शाजापुर में गर्मी बढ़ी, तेज धूप ने बढ़ाई परेशानी:जमकर तपाएगा अप्रैल का पहला सप्ताह, तापमान 40 डिग्री तक पहुंचने के आसार

शाजापुर में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। तीन दिन पहले बादलों के कारण मिली राहत के बाद, मंगलवार को तेज धूप ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। सुबह से ही आसमान साफ रहा और तीखी धूप का असर महसूस किया गया। दोपहर के समय शहर के व्यस्त इलाकों में भी चहल-पहल कम दिखी। गर्मी से बचने के लिए लोग गमछा, टोपी और चश्मे का उपयोग करते नजर आए। बाजारों में भी दोपहर के वक्त सन्नाटा पसरा रहा, जिससे बढ़ते तापमान का जनजीवन पर स्पष्ट प्रभाव दिखा। मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को अधिकतम तापमान लगभग 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया। गौरतलब है कि तीन दिन पहले अधिकतम तापमान 31 से 32 डिग्री के बीच था, जिसमें अब तेजी से बढ़ोतरी हुई है। मौसम विशेषज्ञ सत्यंत्र धनोतिया ने बताया कि आने वाले दिनों में तापमान लगातार 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रह सकता है। वहीं, 2 अप्रैल तक अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। ऐसे में लोगों को आगामी दिनों में और अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
अपने मन से वेट लॉस की दवा बेची तो खैर नहीं, सरकार ने उठाया सख्त कदम,देश में 49 जगहों पर छापेमारी

Last Updated:March 24, 2026, 13:12 IST Govt Warn on Weight Loss Drugs: वेट लॉस की दवा पर पेटेंट खत्म होने के बाद बाजार में करीब 40 कंपनियों की जेनरिक दवा आ गई है. ये दवा बेहद सस्ती है. लेकिन इस दवा को कोई भी बिना डॉक्टरों की पर्ची से न खरीद सकता है न ही बेच सकता है.लेकिन अभी से ऐसा होने लगा है. इसी कारण सरकार ने हिदायत देते हुए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया है. इस सिलसिले में 49 जगहों पर छापेमारी भी की गई है. सरकार को अंदेशा है कि सस्ती दवा की आड़ में लोग या केमिस्ट शॉप वाले खुद से ही दवा को दे सकते हैं. वेट लॉस दवा के गलत इस्तेमाल पर सरकार सख्त. Govt Warn on Weight Loss Drugs: वजन कम करने वाली दवा के सस्ती होने के बाद अगर किसी ने इस GLP-1 दवा को अपने मन से खरीदने या बेचने की कोशिश की तो उसकी खैर नहीं. ड्रग नियामक संस्था सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने इस पर काबू पाने के लिए सख्त गाइडलाइन जारी की है.इतना ही नहीं, इसके लिए कार्रवाई भी शुरू कर दी है. विभाग ने 49 जगहों पर छापेमारी की है. दरअसल, भारत में पहले से ही GLP-1 श्रेणी की वीगोभी और ओजेंपिक इंजेक्शन बहुत ज्यादा बिक रहे हैं. ये दवा बेहद महंगी होती है लेकिन हाल ही में सरकार ने इसे पेटेंट फ्री कर दिया है जिसके बाद कई कंपनियां इस दवा का जेनरिक वर्जन ला रही है. ये दवा अब बेहद सस्ती हो जाएगी. इसलिए सरकार को डर है कि लोग बिना डॉक्टरों की सलाह इस दवा को खरीद न लें क्योंकि बिना डॉक्टरों की सलाह यह दवा बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है. क्यों सरकार ने उठाया ये कदम यही कारण है कि वजन घटाने की सस्ती दवाओं (GLP-1) को लेकर सरकार अलर्ट हो गई है. भारत के ड्रग्स कंट्रोलर ने इन दवाओं की सप्लाई चेन पर कड़ी नजर रखते हुए सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. जेनरिक वर्जन दवाओं की बाजार में भरमार हो गई है. ये दवाएं मेडिकल स्टोर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेलनेस क्लीनिक पर आसानी से मिलने लगी हैं. लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह इनका इस्तेमाल करना खतरनाक साबित हो सकता है. इसी को देखते हुए सरकार ने दवा कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी तरह का भ्रामक विज्ञापन या छिपा प्रचार न करें, जिससे लोग गुमराह हों या बिना जरूरत दवा लें. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पिछले कुछ हफ्तों में बड़ी कार्रवाई करते हुए देशभर में 49 जगहों पर छापेमारी और जांच की गई. इनमें ऑनलाइन फार्मेसी, थोक विक्रेता, मेडिकल स्टोर और स्लिमिंग क्लीनिक शामिल हैं. जांच में जहां-जहां गड़बड़ी मिली, वहां नोटिस भी जारी किए गए हैं. सरकार का साफ कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सबसे जरूरी है. बिना डॉक्टर की निगरानी के इन दवाओं का इस्तेमाल करने से गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं. नियमों के मुताबिक, ये दवाएं सिर्फ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर और कुछ मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह पर ही दी जा सकती हैं. सरकार ने चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने, जुर्माना लगाने और कानूनी कार्रवाई जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे. मरीजों की सुरक्षा सर्व प्रमुख 10 मार्च को सीडीएससीओ ने दवा कंपनियों को विस्तृत गाइडलाइन जारी की थी जिसमें कहा गया था कि किसी भी हाल में इस दवा से संबंधित भ्रामक विज्ञापन नहीं दिखाया जाएगा. अगर दिखाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों ने बताया कि GLP-1 दवाएं केवल डॉक्टर की पर्ची पर ही दी जाती हैं और इन्हें मेडिकल निगरानी में ही इस्तेमाल करना चाहिए. भारत में इस दवा को एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ और कुछ मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट ही लिख सकते हैं. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाओं का इस्तेमाल गंभीर साइड इफेक्ट और स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है. सीडीएससीओ ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सबसे जरूरी है और इस कार्रवाई का उद्देश्य दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकना और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना है. आने वाले समय में निगरानी और सख्त की जाएगी और नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें Location : New Delhi,New Delhi,Delhi First Published : March 24, 2026, 13:12 IST
कर्नाटक विधानसभा में गूंजा हिमाचल का आर्थिक संकट:बीजेपी MLA ने सैलरी डेफर पर उठाए सवाल, मंत्री बोले- हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत

हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति अब राज्य की सीमाओं से बाहर निकलकर अन्य राज्यों की विधानसभाओं में भी चर्चा का विषय बन गई है। कर्नाटक विधानसभा में बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान सोमवार को हिमाचल का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा, जहां विपक्ष ने बढ़ती सब्सिडी और आर्थिक प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किए। विधानसभा में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के विधायक वी सुनील कुमार ने कहा कि कर्नाटक में करीब 14 प्रतिशत बजट सब्सिडी योजनाओं पर खर्च हो रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यही स्थिति जारी रही, तो राज्य को हिमाचल प्रदेश जैसी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि ‘गारंटी योजनाओं’ पर एक लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुका है, जिससे ‘सब्सिडी कल्चर’ बढ़ रहा है। एस सुनील कुमार ने हिमाचल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कांग्रेस सरकार को गारंटी योजनाओं के चलते वेतन में कटौती और भुगतान स्थगित करने जैसे कदम उठाने पड़े। उन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी भी राज्य के लिए चिंताजनक है और कर्नाटक को इससे सबक लेना चाहिए। हिमाचल सरकार ने 3% से 50% तक सैलरी डेफर की दरअसल, हिमाचल में हाल ही में सरकार ने वित्तीय दबाव के चलते बड़ा फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू का 50 प्रतिशत वेतन छह महीने के लिए डेफर किया है। इसके अलावा, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की 30 प्रतिशत और विधायकों की 20 प्रतिशत सैलरी डेफर की गई है। इसी तरह राज्य सरकार ने 2025-26 की तुलना में 2026-27 में 4 हजार 577 करोड़ रुपए कम का बजट पेश किया है। साल 2025-26 में राज्य के बजट का आकार 58 हजार 514 करोड़ रुपए था, जबकि इस बार घटकर 54 हजार 928 करोड़ रुपए रह गया है। इस वजह से भी दूसरे राज्यों में हिमाचल के आर्थिक हालात को लेकर चर्चा हो रही है। हिमाचल सीएम ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर फोड़ा ठीकरा इसी वजह से कर्नाटक विधानसभा में भी यह मामला गूंजा। वहां विपक्ष हिमाचल की आर्थिक स्थिति को मुद्दा बनाकर सत्तारूढ़ कांग्रेस को घेर रहा है। वहीं हिमाचल सीएम का कहना है कि संघीय ढांचे में केंद्र का रवैया ठीक नहीं है। पहले GST कंपनसेशन बंद किया गया। इसके बाद NPS के अंगेस्ट मिलने वाला लोन और फिर राज्य की लोन लेने की सीमा 5 फीसदी से घटाकर 3 फीसदी की। अब राज्य को हर साल मिलने वाली लगभग 10 हजार करोड़ की रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट भी बंद कर दी गई है। कर्नाटक सरकार ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया वहीं, कर्नाटक सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। राज्य के राजस्व मंत्री कृष्णा बायर गौड़ा ने कहा कि उनकी सरकार वित्तीय चुनौतियों को लेकर पूरी तरह सजग है और कर्नाटक की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। उन्होंने बताया कि राज्य की विकास दर 11 प्रतिशत है, जो महाराष्ट्र और गुजरात से अधिक है। गौड़ा ने यह भी कहा कि सब्सिडी को नकारात्मक रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, ‘डिमांड-साइड इकोनॉमिक्स’ के तहत लोगों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता से बाजार में मांग बढ़ती है और इससे आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं। उन्होंने “मल्टीप्लायर इफेक्ट” का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों के हाथ में दिया गया पैसा कई बार खर्च होता है, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। कुल मिलाकर, हिमाचल की वित्तीय स्थिति अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनती जा रही है। कर्नाटक विधानसभा में उठा यह मुद्दा संकेत देता है कि छोटे राज्यों की आर्थिक नीतियों और उनके प्रभाव पर देशभर में नजर रखी जा रही है।
राजस्थान के युवक ने गुना में फांसी लगाई:मामा के लड़के के साथ घूमने आया था; कमरे में फंदे पर मिला

राजस्थान के बारां जिले से गुना में अपने मामा के लड़के के पास घूमने आए 26 वर्षीय युवक शिवचरण मीणा ने सोमवार शाम हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलने पर कैंट पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को फंदे से उतरवाया और जिला अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मंगलवार सुबह परिजनों के पहुंचने पर पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंप दिया गया है और पुलिस मर्ग कायम कर आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है। 2 दिन पहले ही राजस्थान के बारां से आया था गुना जानकारी के अनुसार, शिवचरण मीणा (26) पुत्र सत्यनारायण मीणा राजस्थान के बारां जिले का रहने वाला था। वह दो दिन पहले ही राजस्थान से गुना घूमने आया था। उसके मामा का लड़का गुना में ही एक स्कूल में टीचर है। वह उसी के पास हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने और घूमने के लिए आया था। मामा का लड़का पहुंचा तो फंदे पर लटका मिला शिवचरण सोमवार शाम शिवचरण ने हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित मामा के लड़के के घर में अज्ञात कारणों के चलते फांसी लगा ली। जब उसका मामा का लड़का घर पहुंचा, तो वह फंदे पर लटका हुआ मिला। इसके बाद उसने तत्काल कैंट पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस ने मर्ग कायम किया, सुसाइड का कारण अज्ञात सूचना पर मौके पर पहुंची कैंट पुलिस ने शव को नीचे उतरवाया और जिला अस्पताल भिजवाया। यहां डॉक्टरों ने शिवचरण को मृत घोषित कर दिया और शव को पीएम रूम में रखवा दिया गया। मंगलवार सुबह परिवार वालों के पहुंचने पर शव का पोस्टमार्टम किया गया। पीएम के बाद शव परिवार वालों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, हालांकि उसने सुसाइड क्यों किया, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है।
किम जोंग बोले- परमाणु हथियार रखने का फैसला सही था:ईरान पर हमले ने हमें सच साबित किया, ताकत से ही सुरक्षा मिलती है

नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन ने देश के पास परमाणु हथियार होने को लेकर खुशी जताई है। सरकारी मीडिया के मुताबिक उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर किए गए हमले साबित करते हैं, कि उनके देश का परमाणु हथियार रखने का फैसला सही था। किम ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध दिखाता है कि आज की दुनिया में सिर्फ मजबूत सैन्य ताकत ही किसी देश को सुरक्षित रख सकती है। उन्होंने यह बयान सोमवार को संसद में लंबे भाषण के दौरान दिया। अपने भाषण में किम ने दक्षिण कोरिया के प्रति सख्त रुख दोहराया और कहा कि वह अपने देश की परमाणु ताकत को और मजबूत करेंगे ताकि अमेरिका को रोका जा सके। किम जोंग बोले- और ज्यादा परमाणु हथियार बनाएंगे किम जोंग उन का यह भाषण मंगलवार को लिखित रूप में जारी हुआ है। इसमें उन्होंने कहा कि 2019 में ट्रम्प के साथ बातचीत टूटने के बाद परमाणु हथियार बढ़ाने का फैसला उनका सबसे सही कदम था। किम ने देश को आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने, ज्यादा परमाणु हथियार और उन्हें ले जाने वाली मिसाइलें बनाने पर जोर दिया। किम ने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों की वजह से नॉर्थ कोरिया अब ज्यादा सुरक्षित है और इसी वजह से वह अपने संसाधनों का इस्तेमाल आर्थिक विकास के लिए भी कर पा रहा है। किम जोंग उन के भाषण की अहम बातें… साउथ कोरिया को दुश्मन देश का दर्जा देंगे किम साउथ कोरिया को लेकर उन्होंने कहा कि वह उसे सबसे बड़ा दुश्मन मानेंगे और पूरी तरह नजरअंदाज करेंगे। अगर साउथ कोरिया कोई भी कदम उठाता है जो उनके देश को नुकसान पहुंचाता है, तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी। कई दशकों से अमेरिका और उसके सहयोगी देश, प्रतिबंध और बातचीत के जरिए नॉर्थ कोरिया को परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के लिए मनाने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन अब तक सभी प्रयास असफल रहे हैं। व्हाइट हाउस में दोबारा आने के बाद ट्रम्प ने किम से फिर बातचीत करने की इच्छा जताई है। हालांकि, किम का कहना है कि बातचीत तभी हो सकती है जब अमेरिका आधिकारिक तौर पर नॉर्थ कोरिया को परमाणु शक्ति के रूप में मान्यता दे। नॉर्थ कोरिया लंबे समय से यह कहता रहा है कि अगर लीबिया के मुअम्मर गद्दाफी और इराक के सद्दाम हुसैन के पास परमाणु हथियार होते, तो उनका अंत इस तरह नहीं होता। 2019 में अमेरिका-नॉर्थ कोरिया की बातचीत टूटी थी अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के बीच परमाणु कार्यक्रम छोड़ने को लेकर साल 2018 में बातचीत शुरू हुई थी। इसे लेकर जून 2018 में सिंगापुर में पहली बार ट्रम्प और किम जोंग उन की ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी। इसके बाद फरवरी 2019 में वियतनाम के हनोई में दूसरी बैठक हुई, लेकिन यहीं बातचीत टूट गई क्योंकि दोनों पक्ष शर्तों पर सहमत नहीं हो पाए। इसके बाद नॉर्थ कोरिया ने कहा था कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता और सुरक्षा के लिए उसे अपनी सैन्य ताकत बढ़ानी होगी। इसी सोच के तहत उसने अपने परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का फैसला किया। नॉर्थ कोरिया का मानना है कि मजबूत परमाणु क्षमता ही उसे बाहरी हमलों से बचा सकती है। नॉर्थ कोरिया के पास अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें हैं इसके बाद नॉर्थ कोरिया ने धीरे-धीरे अपनी पुरानी रणनीति पर वापसी कर ली। उसने मिसाइल टेस्टिंग बढ़ा दी और अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने लगा। कई बार लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का भी परीक्षण किया गया। फिलहाल नॉर्थ कोरिया के पास कुल कितनी मिसाइलें हैं, इसका सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है। लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक नॉर्थ कोरिया के पास सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनमें शॉर्ट रेंज, मीडियम रेंज और और लंबी दूरी (ICBM) की मिसाइलें शामिल हैं ICBM यानी लंबी दूरी की मिसाइलें ऐसी हैं जो अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं। नॉर्थ कोरिया ने ह्वासोंग-15, ह्वासोंग-17 और ह्वासोंग-18 जैसी मिसाइलों की टेस्टिंग की है। इन मिसाइलों की रेंज लगभग 10,000 से 15,000 किलोमीटर तक मानी जाती है। इसका मतलब है कि ये अमेरिका के बड़े हिस्से तक पहुंच सकती हैं। कुछ रिपोर्ट्स यह भी मानती हैं कि नॉर्थ कोरिया के पास करीब 50–100 के आसपास परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलें हो सकती हैं, लेकिन यह पक्का आंकड़ा नहीं है। किम जोंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… किम जोंग-उन की साउथ कोरिया को चेतावनी, बोले- खतरा हुआ तो ‘पूरी तरह तबाह’ कर देंगे नॉर्थ कोरिया के शासक किम जोंग-उन ने साउथ कोरिया को कड़ी चेतावनी दी है। किम ने कहा है कि उनके देश की सुरक्षा को खतरा हुआ तो वे साउथ कोरिया को ‘पूरी तरह नष्ट’ कर सकते हैं। प्योंगयांग में सात दिन चली वर्कर्स पार्टी कांग्रेस के समापन पर किम ने अगले पांच वर्षों के लिए परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को तेज करने का खाका पेश किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
5 साल सड़कें नापी, लाखों दांतों को पढ़ा, भारतीय डेंटिस्ट पिल्लई ने खोजा ऐसा खजाना, दांत बताएगा, कौन था वो?

Dentist Success Story: डेंटिस्ट आमतौर पर अस्पतालों में या अपने क्लिनिकों में बैठते हैं और दांतों की बीमारियों का का इलाज करते हैं.आप और हम सभी को यही मालूम है न? लेकिन अहमदाबाद के इन डेंटिस्ट ने असल में बताया है कि एक डेंटिस्ट का काम सिर्फ दांतों की नाप सीधी करना, कैविटी का इलाज करना या दाढ़ निकालना नहीं होता. 23 राज्यों में 37,000 किलोमीटर सड़कें नापने के दौरान अहमदाबाद के रहने वाले गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज और हॉस्पिटल के डॉ. जयशंकर पी. पिल्लई ने 2.2 लाख दांतों की गहन स्टडी की. इस काम में उन्हें पूरे पांच साल लगे, लेकिन इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसा बना दिया जो भारत में अभी तक मौजूद नहीं था और आने वाली पीढ़ियां इस पर गर्व करेंगी. डॉ जयशंकर पिल्लई ने एक ऐसा व्यवस्थित नक्शा यानि डेटाबेस तैयार किया है, जिसमें दांतों के माध्यम से यह पता चल जाता है कि देश भर में दांतों में किस तरह के बदलाव होते हैं, और उन बदलावों से किसी व्यक्ति की पहचान और उसके मूल स्थान के बारे में क्या पता चलता है. यानि आपदाओं में खो चुके लोगों को उनके दांतों के माध्यम से पहचाना जा सकता है कि वे कौन थे? महिला थे या पुरुष थे? दांत से ही किसी अपराधी का भी पता चल सकता है कि ये किसका है. इन भारतीय डेंटिस्ट ने जो फॉरेंसिक डेंटल डेटाबेस तैयार किया है उसे न केवल सदियां याद रखेंगी बल्कि इनके काम की बदौलत सदियों पुरानी उलझी गुत्थियों को भी सुलझाया जा सकेगा. यह लाखों दांतों के विश्लेषण के बाद तैयार भारत का शायद सबसे व्यापक फोरेंसिक डेंटल मॉर्फोलॉजी डेटाबेस है. इस काम के लिए उन्हें हाल ही में नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) से PhD की उपाधि मिली है. यह काम भारत में आपदाओं और अपराधों के पीड़ितों की पहचान करने के तरीके को बदल सकता है. क्या है इस फॉरेंसिक डेंटल डेटाबेस में? व्यावहारिक फोरेंसिक के लिहाज से देखें तो डॉ.पिल्लई की वर्गीकरण पद्धति अभी किसी व्यक्ति के मूल क्षेत्र की पहचान करने में 36 फीसदी और सिर्फ दांतों के नमूनों के आधार पर लिंग निर्धारित करने में 63 फीसदी सफलता दर हासिल करती है. उनका मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एक बड़े डेटाबेस के इस्तेमाल से इन दोनों आंकड़ों में काफी सुधार किया जा सकता है. अभी तक भारत का रिकॉर्ड था कमजोरवास्तव में देखें तो डॉ. पिल्लई का काम एक बेहद महत्वपूर्ण कमी को पूरा करता है. कई पश्चिमी देशों की तुलना में भारत का डेंटल रिकॉर्ड डेटाबेस काफी कमजोर है, जिससे फोरेंसिक पहचान करना मुश्किल हो जाता है. जांचकर्ताओं को कभी-कभी डेंटल सबूतों से मिलान करने के लिए लोगों की मुस्कुराती हुई तस्वीरों पर निर्भर रहना पड़ता है. हालांकि एनएफएसयू के कुलपति और डॉ. पिल्लई के डॉक्टोरल गाइड डॉ. जेएम व्यास ने बताया कि आपदा पीड़ितों की पहचान करने में दांत अमूल्य होते हैं. सदियों तक सुरक्षित रहते हैं दांत डॉ. पिल्लई ने कहा कि दांत दशकों और सदियों तक सुरक्षित रह सकते हैं और पहचान के एक भरोसेमंद निशान के तौर पर काम कर सकते हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक इस डेटाबेस के आधार पर एक राष्ट्रीय डेंटल रजिस्ट्री स्थापित करने के प्रयास चल रहे हैं. डॉ. पिल्लई ने आगे बताया, ‘मैंने दशकों से ओडोंटोलॉजी (दांतों की संरचना) के फोरेंसिक अनुप्रयोंगों पर बड़े पैमाने पर काम किया है, और इसलिए मैंने भारत के लिए दांतों की एक व्यवस्थित प्रोफाइल तैयार करने का फैसला किया. 2020 से 2025 के बीच, मैंने 23 राज्यों और छह अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों से नमूने इकट्ठा किए. कुल विश्लेषण में 2.23 लाख दांतों के मॉर्फोलॉजिकल (आकार-संबंधी) लक्षणों को शामिल किया गया.’ दांतों को लेकर मिले अहम सुराग डॉ. पिल्लई ने हर नमूने का 15 पैमानों पर मूल्यांकन किया. कुछ निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरणों से पूरी तरह मेल खाते थे. ‘दांतों की बनावट कई कारकों पर निर्भर करती है, लेकिन मेरे अध्ययन में, मुख्य ध्यान आनुवंशिक लक्षणों पर था. अलग-अलग जीन पूल के लिए, हमें अलग-अलग विशेषताएं मिलीं. इनमें से कई अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण से भी मेल खाती थीं.’ उन्होंने कहा, ‘उदाहरण के लिए, ‘कस्प ऑफ कैराबेलि’ एक ऐसी विशेषता है जो कोकेशियाई आबादी में ऊपरी जबड़े के पहले या दूसरे मोलर (दाढ़) पर पाई जाती है .भारत के कुछ हिस्सों में भी देखने को मिली.’ उनके नमूनों में मध्य एशियाई और पश्चिमी यूरोपीय आनुवंशिक आबादी के साथ भी संबंध दिखाई दिए.
असम विधानसभा चुनाव 2026: ‘अगर गौरव पाकिस्तान में चुनावी लड़ाई लड़ें तो…’, हिमंत बिस्वा सरमा ने किया दावा, क्यों ली मौज?

असम में नामांकन नामांकन के अंतिम दिन राजनीतिक सम्राट और गरमा गए, जब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता गौरव गोगोई पर तीखा और अहिंसा पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि अगर गौरव गोगोई पाकिस्तान में चुनाव लड़ेंगे तो उन्हें ज्यादा वोट देंगे। यह बयान उस समय आया जब सरमा गोलाघाट में भाजपा-एजेपी गठबंधन के नामांकन कार्यक्रम में शामिल थे। अविश्वास से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने नामांकन के अंतिम दिन के लिए सभी नामों की शुरुआत की। असम में प्रो-इंकंबेंसी की लहर सरमा ने दावा किया कि पूरा असम राजनीतिक कैथोलिक गठबंधन के पक्ष में है। उन्होंने कहा, ‘पिछले 10 दिनों में जो मैंने देखा है, उसे साफ है कि बीजेपी और उसके सहयोगी दल इस बार फिर से सरकार बनाएंगे और पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ देंगे।’ उन्होंने सीज़न में दल-परिवर्तन को सामान्य रूप से प्रदर्शित करते हुए कहा कि 10-12 की पार्टी का पुनर्जन्म कोई बड़ी बात नहीं है और यह पिछली जीत की तुलना में कम है। मजबूत सरकार बनेगी-सरमा हालाँकि उन्होंने दावा किया कि संख्या को अस्वीकार कर दिया गया है, लेकिन एक बहुत मजबूत सरकार बन गई है। उन्होंने कहा, “मुख्य प्रेरणा की संख्या नहीं बताई जा सकती, लेकिन जिन प्रेरणा पर पहले हमें हार का खतरा था, वहां भी अब हमारे नैतिक पक्ष में घटित हो रहा है।” कांग्रेस-रेज़ोर दल गठबंधन पर उत्पाद गठबंधन पर हमला बोलते हुए सरमा ने कांग्रेस और राइजोर दल के गठबंधन को बहुत देर से बनाया और अप्रभावी बताया। उन्होंने कहा, ‘यूनाइटेड गठबंधन बहुत देर से आया. उनके पास-साथ प्रचार करने या संयुक्त सभा करने का समय ही नहीं बचा। मुझे लगता है कि यह गठबंधन सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगा।’ उन्होंने शिवसागर सीट पर बीजेपी और बीजेपी के बीच मैत्रीपूर्ण कंपनी का भी जिक्र किया. गौरव गोगोई के नेतृत्व पर प्रश्न सरमा ने गौरव गोगोई की नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठाए, कांग्रेस में हो रहे दल-बदल को आंतरिक कमजोरी से जोड़ा। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस भारतीय राजनीति की जननी रही है, लेकिन वह अपने नेताओं पर रोक क्यों नहीं लगा रही? यदि गौरव गोगोई स्वयं असफलता स्वीकार करते हैं तो यह उचित है कि वह नेता नहीं हैं। APSC भर्ती और साजो-सामान का पद सरमा ने शासन से जुड़े मठाधीशों पर भी बात करते हुए कहा कि भाजपा सरकार की तुलना पिछली कांग्रेस सरकार से की जाती है, खासकर भर्ती प्रक्रिया में पार्टी को लेकर। उन्होंने कहा, ‘एक समय जब एपीपी के माध्यम से लोगों को नौकरी दिलाने के लिए करोड़ों रुपये का सामान गोदाम में रखा गया था। आज किसी को कुछ भी देने की जरूरत नहीं है. ‘सार्वजनिक एकता है कि विश्वसनीयता कहाँ है।’ सारांश टिप्पणी से सहायता सुविधा गर्मी सरमा ने एक और तीखा तंज कसते हुए कहा, ‘मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं, लेकिन अगर वे पाकिस्तान में चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें भारी वोट मिल सकते हैं।’ मुख्यमंत्री का यह कहना है कि राजनीतिक हलकों में क्रेटेशियस बैकलैश पैदा हो सकता है और असम में नेपोलियन मोरचा को और अधिक गरमाहट मिल सकती है, क्योंकि प्रचार में उनके लॉटलैंड चरण में प्रवेश कर दिया गया है। ये भी पढ़ें: ड्रग माफिया: दुबई में भारत का मोस्ट वांटेड ड्रग माफिया जैज़! जल्द ही लाया जाएगा भारत (टैग्सटूट्रांसलेट)असम विधानसभा चुनाव(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)असम चुनाव समाचार(टी)हिमंत बिस्वा सरमा का बयान(टी)गौरव गोगोई विवाद(टी)बीजेपी एजीपी गठबंधन असम(टी)राजनीतिक समाचार भारत(टी)असम चुनाव(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)असम चुनाव समाचार
मथुरा में मोहन भागवत ने संतों के पैर छुए:बोले- घुसपैठियों को रोजगार मत दो, ये लोग गड़बड़ी करते हैं

संघ प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार सुबह 10 बजे मथुरा के वृंदावन पहुंचे। यहां एक आश्रम के लोकार्पण समारोह में हिस्सा लिया। संतों का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। संघ प्रमुख ने धर्मांतरण पर कहा- जो लोग पहले हिंदू थे, अब दूसरे संप्रदायों में चले गए हैं, उन्हें वापस लाने की कोशिशें जारी हैं। अगर वो खुद ही वापस आना चाहते हैं तो हमें दरवाजे खुले रखने चाहिए। भागवत ने घुसपैठ के मुद्दे पर कहा- समाज का दायित्व है कि जैसे ही किसी घुसपैठिए का पता चले, अधिकारियों को बताएं। वैसे तो हमें भेदभाव नहीं करना है, लेकिन जो देश में चोरी-छिपे आए हैं, कभी-कभी बड़ी गड़बड़ियों का कारण बनते हैं, ऐसे लोगों के लिए हमें स्पष्ट रहना होगा कि हम उन्हें रोजगार नहीं देंगे। समाज और प्रशासन को मिलकर ऐसे प्रयास करने चाहिए कि धर्मांतरण और घुसपैठ को रोका जाए। संघ प्रमुख ने हिंदुओं को तीन बच्चे पैदा करने की अपनी सलाह फिर से दोहराई। उन्होंने कहा- डॉक्टर मानते हैं कि अगर किसी परिवार में तीन संतान होती हैं तो माता-पिता और बच्चों के सेहतमंद होने की संभावना बढ़ जाती है। जैसा कि मानस शास्त्र कहता है कि घर में तीन बच्चे होने पर वे बड़े होकर बेहतर और संतुलित व्यक्तित्व के बनते हैं। आपसी झगड़े-टकराव भी कम होते हैं। यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। फरसा वाले बाबा की मौत के सवाल पर कहा- SIT जांच चल रही है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रयागराज में कोल्ड स्टोरेज हादसे पर कहा कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ने सहायता की घोषणा की है। घायलों का बेहतर इलाज कराया जाएगा। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। दरअसल, रुक्मिणी विहार में रुड़की के संत महामंडलेश्वर यतींद्रानंद के ‘जीवनदीप’ आश्रम का लोकार्पण किया गया। 24 कमरे के आश्रम में आध्यात्मिक और वैदिक शिक्षा दी जाएगी। इसका शिलान्यास संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने किया था। समारोह में एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव और जूना अखाड़ा के अवधेशानंद गिरी ने भी हिस्सा लिया। देखिए 3 तस्वीरें.. जीवनदीप आश्रम के कार्यक्रम की पल-पल की अपडेट जानने के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
सिनर ने तोड़ा जोकोविच का रिकॉर्ड:मास्टर्स 1000 टूर्नामेंट्स में लगातार 26 सेट जीतने वाले पहले खिलाड़ी बनें, मियामी ओपन में मुटे को हराया

इटली के टेनिस खिलाड़ी जैनिक सिनर ने एटीपी मास्टर्स 1000 स्तर पर लगातार सबसे अधिक सेट जीतने के मामले में नोवाक जोकोविच का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। सिनर ने मियामी ओपन के तीसरे राउंड में कोरेंटिन मूटे को 6-1, 6-4 से हराया। यह मुकाबला 1 घंटा 11 मिनट तक चला। इस जीत के साथ सिनर के लगातार जीते गए सेटों की संख्या 26 हो गई है, जबकि जोकोविच के नाम 24 सेट का रिकॉर्ड था। जोकोविच ने यह उपलब्धि 2016 में इंडियन वेल्स और मियामी के बीच हासिल की थी। नवंबर से जारी है अजेय रहने का सिलसिला सिनर का यह शानदार सफर पिछले साल नवंबर में पेरिस मास्टर्स से शुरू हुआ था। वहां उन्होंने बिना कोई सेट गंवाए खिताब अपने नाम किया था। इसके बाद उन्होंने इसी महीने इंडियन वेल्स ओपन का खिताब भी जीता। म्यूटेट के खिलाफ जीत के साथ ही सिनर ने एटीपी मास्टर्स 1000 लेवल पर लगातार 13 मैच जीतने का रिकॉर्ड भी बना लिया है। मैच के बाद सिनर ने एटीपी की आधिकारिक वेबसाइट से कहा,’मैं बहुत खुश हूं। यह खेल अप्रत्याशित है, इसलिए हम जितना हो सके उतना ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करते हैं। अब देखते हैं कि अगले दौर में क्या होता है।’ उन्होंने आगे कहा कि वे हर मैच के लिए तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार रहने की कोशिश करते हैं। अगले दौर में एलेक्स मिचेलसन से होगा मुकाबला चौथे दौर में जैनिक सिनर का सामना अमेरिका के एलेक्स मिचेलसन से होगा। मिचेलसन ने अपने तीसरे दौर के मुकाबले में अलेजांद्रो ताबिलो को 3-6, 6-3, 6-4 से हराकर आगे कदम बढ़ाया है। सिनर जिस फॉर्म में चल रहे हैं, उन्हें टूर्नामेंट का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। मियामी ओपन में कार्लोस अल्कराज के बाहर होने के बाद सिनर के पास अपनी रैंकिंग और मजबूत करने का अच्छा मौका है। —————————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… IPL गाइडलाइन- मैच के दिन प्रैक्टिस पर रोक:फिटनेस टेस्ट नहीं, जर्सी नंबर बदलने पर बताना होगा; ड्रेसिंग रूम में सिर्फ स्टाफ को एंट्री IPL 2026 के लिए BCCI ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत मैच के दिन कोई भी टीम प्रैक्टिस नहीं कर सकेगी। साथ ही खिलाड़ियों के लिए मैच-डे पर फिटनेस टेस्ट नहीं होगा। वहीं जर्सी नंबर बदलने से 24 घंटे पहले जानकारी देनी होगी और ड्रेसिंग रूम में सिर्फ स्टाफ को ही एंट्री मिलेगी। पूरी खबर
जिला परिषद चुनाव विवाद: उप सभापति ने सतारा एसपी को निलंबित करने का आदेश दिया, सभापति ने आदेश सुरक्षित रखा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:24 मार्च, 2026, 09:04 IST अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज एकत्र करने का आदेश दिया है और घटना की जांच शुरू की है। उपसभापति नीलम गोरे ने सोमवार को तुषार दोशी को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया। सतारा जिला परिषद चुनाव को लेकर विवाद एक बड़े राजनीतिक टकराव में तब्दील हो गया है और मनमानी के आरोपों के बाद जिले के शीर्ष पुलिस अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। पिछले सप्ताह की चुनाव प्रक्रिया के दौरान अराजकता फैलने के बाद विधान परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोरे ने सोमवार को सतारा के पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी और अन्य अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया। यह निर्देश महाराष्ट्र विधान परिषद में मुद्दा उठाए जाने के बाद आया है। यह विवाद जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव से उपजा है, जहां भाजपा की प्रिया शिंदे ने शिव सेना-राकांपा गठबंधन के उम्मीदवार को हरा दिया, जिससे भारतीय जनता पार्टी और शिव सेना के बीच तनाव पैदा हो गया। विवाद के केंद्र में शिवसेना नेता और मंत्री शंभुराज देसाई हैं, जिन्होंने आरोप लगाया है कि वोट डालने की कोशिश के दौरान पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। परिषद को संबोधित करते हुए, देसाई ने कहा कि उन्हें सादे कपड़ों में कर्मियों द्वारा जबरन रोका गया और घसीटा गया, जिससे वह घायल हो गए। उन्होंने कहा, “चार दशकों से अधिक के राजनीतिक जीवन में, मैंने कभी भी इस तरह के व्यवहार का सामना नहीं किया है,” उन्होंने आम नागरिकों की सुरक्षा के बारे में चिंता जताते हुए कहा कि अगर एक मौजूदा मंत्री के साथ इस तरह से व्यवहार किया जा सकता है। देसाई के साथ मौजूद राकांपा मंत्री मकरंद पाटिल ने कहा कि सतारा पुलिस विभाग ने उनके सदस्यों के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज करके अत्याचारपूर्ण व्यवहार किया है। इस मुद्दे पर सदन में तीखी प्रतिक्रिया हुई। कई विधायकों ने जवाबदेही की मांग की, जिसमें मुख्यमंत्री द्वारा विस्तृत स्पष्टीकरण से लेकर इसमें शामिल पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तक की मांग की गई। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि उन्होंने चुनाव के दौरान हस्तक्षेप किया था और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि किसी भी योग्य मतदाता को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने आश्वासन दिया कि निष्पक्ष और गहन जांच की जाएगी। हालांकि, बीजेपी ने आरोपों पर पलटवार किया है. मंत्री जयकुमार गोरे ने पुलिस का बचाव करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान सख्त प्रवेश प्रोटोकॉल लागू किए जाते हैं और कुछ व्यक्तियों ने बिना अनुमति के प्रवेश करने का प्रयास किया, जिससे पुलिस कार्रवाई हुई। दोनों पक्षों के मजबूती से खड़े होने के साथ, सतारा प्रकरण एक स्थानीय चुनावी विवाद से आगे बढ़ गया है और महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर एक व्यापक राजनीतिक लड़ाई में विकसित हो गया है। अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज एकत्र करने का आदेश दिया है और घटना की जांच शुरू की है। उम्मीद है कि नतीजे से जवाबदेही तय होगी, लेकिन राजनीतिक नतीजा पहले से ही स्पष्ट है। ऐसे समय में जब राज्य भर में स्थानीय निकाय चुनाव जोर पकड़ रहे हैं, इस विवाद को प्रशासनिक तटस्थता की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। गठबंधन के भीतर विपक्ष इस मुद्दे का इस्तेमाल भाजपा को घेरने के लिए कर सकता है, जबकि भाजपा व्यवस्था का बचाव करने और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रतिबद्ध है। जांच के नतीजे न सिर्फ जवाबदेही तय करेंगे, बल्कि आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक कहानी को भी आकार दे सकते हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : सतारा, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 24 मार्च, 2026, 09:04 IST समाचार राजनीति जिला परिषद चुनाव विवाद: उपाध्यक्ष ने सतारा एसपी को निलंबित करने का आदेश दिया, अध्यक्ष ने आदेश सुरक्षित रखा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सतारा जिला परिषद चुनाव(टी)महाराष्ट्र राजनीतिक विवाद(टी)सतारा पुलिस निलंबन(टी)शंभुराज देसाई घटना(टी)प्रिया शिंदे भाजपा की जीत(टी)शिवसेना एनसीपी गठबंधन तनाव(टी)महाराष्ट्र सत्तारूढ़ गठबंधन संघर्ष(टी)स्थानीय निकाय चुनाव महाराष्ट्र









