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अपने मन से वेट लॉस की दवा बेची तो खैर नहीं, सरकार ने उठाया सख्त कदम,देश में 49 जगहों पर छापेमारी

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Govt Warn on Weight Loss Drugs: वेट लॉस की दवा पर पेटेंट खत्म होने के बाद बाजार में करीब 40 कंपनियों की जेनरिक दवा आ गई है. ये दवा बेहद सस्ती है. लेकिन इस दवा को कोई भी बिना डॉक्टरों की पर्ची से न खरीद सकता है न ही बेच सकता है.लेकिन अभी से ऐसा होने लगा है. इसी कारण सरकार ने हिदायत देते हुए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया है. इस सिलसिले में 49 जगहों पर छापेमारी भी की गई है. सरकार को अंदेशा है कि सस्ती दवा की आड़ में लोग या केमिस्ट शॉप वाले खुद से ही दवा को दे सकते हैं.

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वेट लॉस दवा के गलत इस्तेमाल पर सरकार सख्त.

Govt Warn on Weight Loss Drugs: वजन कम करने वाली दवा के सस्ती होने के बाद अगर किसी ने इस GLP-1 दवा को अपने मन से खरीदने या बेचने की कोशिश की तो उसकी खैर नहीं. ड्रग नियामक संस्था सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने इस पर काबू पाने के लिए सख्त गाइडलाइन जारी की है.इतना ही नहीं, इसके लिए कार्रवाई भी शुरू कर दी है. विभाग ने 49 जगहों पर छापेमारी की है. दरअसल, भारत में पहले से ही GLP-1 श्रेणी की वीगोभी और ओजेंपिक इंजेक्शन बहुत ज्यादा बिक रहे हैं. ये दवा बेहद महंगी होती है लेकिन हाल ही में सरकार ने इसे पेटेंट फ्री कर दिया है जिसके बाद कई कंपनियां इस दवा का जेनरिक वर्जन ला रही है. ये दवा अब बेहद सस्ती हो जाएगी. इसलिए सरकार को डर है कि लोग बिना डॉक्टरों की सलाह इस दवा को खरीद न लें क्योंकि बिना डॉक्टरों की सलाह यह दवा बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है.

क्यों सरकार ने उठाया ये कदम
यही कारण है कि वजन घटाने की सस्ती दवाओं (GLP-1) को लेकर सरकार अलर्ट हो गई है. भारत के ड्रग्स कंट्रोलर ने इन दवाओं की सप्लाई चेन पर कड़ी नजर रखते हुए सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. जेनरिक वर्जन दवाओं की बाजार में भरमार हो गई है. ये दवाएं मेडिकल स्टोर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेलनेस क्लीनिक पर आसानी से मिलने लगी हैं. लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह इनका इस्तेमाल करना खतरनाक साबित हो सकता है. इसी को देखते हुए सरकार ने दवा कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी तरह का भ्रामक विज्ञापन या छिपा प्रचार न करें, जिससे लोग गुमराह हों या बिना जरूरत दवा लें.

नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
पिछले कुछ हफ्तों में बड़ी कार्रवाई करते हुए देशभर में 49 जगहों पर छापेमारी और जांच की गई. इनमें ऑनलाइन फार्मेसी, थोक विक्रेता, मेडिकल स्टोर और स्लिमिंग क्लीनिक शामिल हैं. जांच में जहां-जहां गड़बड़ी मिली, वहां नोटिस भी जारी किए गए हैं. सरकार का साफ कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सबसे जरूरी है. बिना डॉक्टर की निगरानी के इन दवाओं का इस्तेमाल करने से गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं. नियमों के मुताबिक, ये दवाएं सिर्फ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर और कुछ मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह पर ही दी जा सकती हैं. सरकार ने चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने, जुर्माना लगाने और कानूनी कार्रवाई जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे.

मरीजों की सुरक्षा सर्व प्रमुख
10 मार्च को सीडीएससीओ ने दवा कंपनियों को विस्तृत गाइडलाइन जारी की थी जिसमें कहा गया था कि किसी भी हाल में इस दवा से संबंधित भ्रामक विज्ञापन नहीं दिखाया जाएगा. अगर दिखाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों ने बताया कि GLP-1 दवाएं केवल डॉक्टर की पर्ची पर ही दी जाती हैं और इन्हें मेडिकल निगरानी में ही इस्तेमाल करना चाहिए. भारत में इस दवा को एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ और कुछ मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट ही लिख सकते हैं. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाओं का इस्तेमाल गंभीर साइड इफेक्ट और स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है. सीडीएससीओ ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सबसे जरूरी है और इस कार्रवाई का उद्देश्य दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकना और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना है. आने वाले समय में निगरानी और सख्त की जाएगी और नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

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Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

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Govt Warn on Weight Loss Drugs: वजन कम करने वाली दवा के सस्ती होने के बाद अगर किसी ने इस GLP-1 दवा को अपने मन से खरीदने या बेचने की कोशिश की तो उसकी खैर नहीं. ड्रग नियामक संस्था सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने इस पर काबू पाने के लिए सख्त गाइडलाइन जारी की है.इतना ही नहीं, इसके लिए कार्रवाई भी शुरू कर दी है. विभाग ने 49 जगहों पर छापेमारी की है. दरअसल, भारत में पहले से ही GLP-1 श्रेणी की वीगोभी और ओजेंपिक इंजेक्शन बहुत ज्यादा बिक रहे हैं. ये दवा बेहद महंगी होती है लेकिन हाल ही में सरकार ने इसे पेटेंट फ्री कर दिया है जिसके बाद कई कंपनियां इस दवा का जेनरिक वर्जन ला रही है. ये दवा अब बेहद सस्ती हो जाएगी. इसलिए सरकार को डर है कि लोग बिना डॉक्टरों की सलाह इस दवा को खरीद न लें क्योंकि बिना डॉक्टरों की सलाह यह दवा बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है.

क्यों सरकार ने उठाया ये कदम
यही कारण है कि वजन घटाने की सस्ती दवाओं (GLP-1) को लेकर सरकार अलर्ट हो गई है. भारत के ड्रग्स कंट्रोलर ने इन दवाओं की सप्लाई चेन पर कड़ी नजर रखते हुए सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. जेनरिक वर्जन दवाओं की बाजार में भरमार हो गई है. ये दवाएं मेडिकल स्टोर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेलनेस क्लीनिक पर आसानी से मिलने लगी हैं. लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह इनका इस्तेमाल करना खतरनाक साबित हो सकता है. इसी को देखते हुए सरकार ने दवा कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी तरह का भ्रामक विज्ञापन या छिपा प्रचार न करें, जिससे लोग गुमराह हों या बिना जरूरत दवा लें.

नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
पिछले कुछ हफ्तों में बड़ी कार्रवाई करते हुए देशभर में 49 जगहों पर छापेमारी और जांच की गई. इनमें ऑनलाइन फार्मेसी, थोक विक्रेता, मेडिकल स्टोर और स्लिमिंग क्लीनिक शामिल हैं. जांच में जहां-जहां गड़बड़ी मिली, वहां नोटिस भी जारी किए गए हैं. सरकार का साफ कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सबसे जरूरी है. बिना डॉक्टर की निगरानी के इन दवाओं का इस्तेमाल करने से गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं. नियमों के मुताबिक, ये दवाएं सिर्फ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर और कुछ मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह पर ही दी जा सकती हैं. सरकार ने चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने, जुर्माना लगाने और कानूनी कार्रवाई जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे.

मरीजों की सुरक्षा सर्व प्रमुख
10 मार्च को सीडीएससीओ ने दवा कंपनियों को विस्तृत गाइडलाइन जारी की थी जिसमें कहा गया था कि किसी भी हाल में इस दवा से संबंधित भ्रामक विज्ञापन नहीं दिखाया जाएगा. अगर दिखाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों ने बताया कि GLP-1 दवाएं केवल डॉक्टर की पर्ची पर ही दी जाती हैं और इन्हें मेडिकल निगरानी में ही इस्तेमाल करना चाहिए. भारत में इस दवा को एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ और कुछ मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट ही लिख सकते हैं. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाओं का इस्तेमाल गंभीर साइड इफेक्ट और स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है. सीडीएससीओ ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सबसे जरूरी है और इस कार्रवाई का उद्देश्य दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकना और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना है. आने वाले समय में निगरानी और सख्त की जाएगी और नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

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18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

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