'आदित्य धर ने कई बातें छुपाकर रखीं':धुरंधर 2 एक्टर दानिश इकबाल बोले- दो महीने पहले तक नहीं पता था कि मैं ही ‘बड़े साहब’ हूं

फिल्म ‘धुरंधर’ में कई बार ‘बड़े साहब’ का जिक्र हुआ था, लेकिन किरदार का खुलासा नहीं किया गया था। अब ‘धुरंधर 2’ के रिलीज होने के बाद सामने आया है कि इस रोल को एक्टर दानिश इकबाल ने निभाया है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में दानिश इकबाल ने कहा कि उन्हें कई दिनों तक शूटिंग के दौरान यह जानकारी नहीं थी कि वह बड़े साहब का किरदार निभा रहे हैं। टाइम्स नाऊ को दिए इंटरव्यू में दानिश इकबाल ने कहा, ‘मैं आपको बता दूं कि बड़े साहब वाली बात तो कभी हुई ही नहीं। मतलब, दो महीने पहले तक मुझे भी पता नहीं था कि मैं बड़े साहब का रोल कर रहा हूं। मुझे शक था। वह (आदित्य) बहुत सीक्रेटिव थे और उन्होंने कई बातें अपने तक ही रखीं।’ एक्टर ने आगे कहा, ‘लेकिन हां, मैं दाऊद का रोल कर रहा था, यह मुझे अच्छी तरह पता था, लेकिन दाऊद ही बड़े साहब हैं, इस पर मैं भी पूरी तरह कन्फिडेंट नहीं था। सब मुझे दाऊद भाई या साहब कहकर बुलाते थे। मेरे किरदार के बारे में किसी ने मुझसे कुछ नहीं कहा। इसलिए मेरे सीन्स में हर समय मैं ही बोलता रहता हूं।’ 8 से 9 घंटे तक मेकअप करना पड़ता था: दानिश दानिश इकबाल ने यह भी बताया कि बड़े साहब के किरदार में खुद को ढालने के लिए उन्हें रोज मेकअप के लिए 8 से 9 घंटे बैठना पड़ता था और पूरे दिन प्रोस्थेटिक के साथ रहना होता था। इसे हटाने में भी 3 से 4 घंटे लगते थे और कई नियमों का पालन करना पड़ता था, जिसमें खाना नहीं खा सकते थे। दानिश इकबाल ए माइटी हार्ट, महारानी, फराज, भक्षक और द हंट: द राजीव असैसिनेशन केस जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं। वह हाल ही में नाना पाटेकर के साथ वेब सीरीज संकल्प में दिखे थे।
'आदित्य धर ने कई बातें छुपाकर रखीं':धुरंधर 2 एक्टर दानिश इकबाल बोले- दो महीने पहले तक नहीं पता था कि मैं ही ‘बड़े साहब’ हूं

फिल्म ‘धुरंधर’ में बार-बार ‘बड़े साहब’ का जिक्र हुआ था, लेकिन किरदार का खुलासा नहीं किया गया था। अब ‘धुरंधर 2’ के रिलीज होने के बाद सामने आया है कि इस रोल को एक्टर दानिश इकबाल ने निभाया है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में दानिश इकबाल ने बताया कि उन्हें शूटिंग के दौरान यह जानकारी नहीं थी कि वह ‘बड़े साहब’ का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दो महीने पहले तक उन्हें इस बात का पता नहीं था। टाइम्स नाऊ को दिए इंटरव्यू में दानिश इकबाल ने बताया, ‘मैं आपको बता दूं कि ‘बड़े साहब’ वाली बात तो कभी हुई ही नहीं। मतलब, दो महीने पहले तक मुझे भी पता नहीं था कि मैं ‘बड़े साहब’ का रोल कर रहा हूं। मुझे शक था। वह (आदित्य) बहुत सीक्रेटिव थे और उन्होंने कई बातें अपने तक ही रखीं।’ एक्टर ने आगे कहा, ‘लेकिन हां, मैं दाऊद का रोल कर रहा था, यह मुझे अच्छी तरह पता था, लेकिन दाऊद ही बड़े साहब हैं, इस पर मैं भी पूरी तरह कन्फिडेंट नहीं था। सब मुझे दाऊद भाई या साहब कहकर बुलाते थे। मेरे किरदार के बारे में किसी ने मुझसे कुछ नहीं कहा। इसलिए मेरे सीन्स में हर समय मैं ही बोलता रहता हूं।’ दानिश इकबाल ने यह भी बताया कि ‘बड़े साहब’ के किरदार में खुद को ढालने के लिए उन्हें रोज 8 से 9 घंटे तक मेकअप करना पड़ता था और पूरे दिन प्रोस्थेटिक के साथ रहना होता था। इसे हटाने में भी 3 से 4 घंटे लगते थे और कई नियमों का पालन करना पड़ता था, जिसमें खाना नहीं खा सकते थे। दानिश इकबाल ए माइटी हार्ट, महारानी, अरण्यक, फराज, भक्षक और द हंट: द राजीव असैसिनेशन केस जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं। वह हाल ही में नाना पाटेकर के साथ वेब सीरीज ‘संकल्प’ में दिखे थे।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: सीताफल की पिच भी ‘हीरो’ विक्ट्री, एआईएडीएमके ने लगाए आरोप, पार्टी नेताओं से क्या बोले स्टालिन?

विधानसभा चुनाव को लेकर तमिल की दिलचस्प बातें जारी है। आरोप प्रत्यारोप के दौर के बीच साउथ के सुपर स्टार विजय की नई नवेली पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) भी राष्ट्रवादी बनी हुई है। एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता के. टी.आर.जी. बालाजी ने आगामी चुनाव में टीवीके के साथ गठबंधन की कंपनियों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि अभिनेता की राजनीति में स्थिर राजनीतिक परिदृश्य में कोई बदलाव नहीं आएगा और एआईएडीएमके डीएमके का एकमात्र मजबूत विकल्प बनी हुई है। एआईएडीएमके के नेताओं से बातचीत नहीं की गई है. बालाजी ने कहा, “अगर कोई हाथ नहीं मिला तो हम अकेले खड़े रहेंगे और हम इसके लिए तैयार हैं।” पीटीआई का कहना है कि एनडीए के नाम पर बिना विजय के रविवार को गठबंधन के लिए बातचीत को बताया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि टीवीके ‘जनता की टीम’ है और इस आरोप को खारिज कर दिया गया कि उनकी पार्टी किसी प्रभावशाली पार्टी की सहायक टीम के रूप में काम करती है। हालाँकि, विजय ने यह नहीं बताया कि यह आरोप लगाया गया है। गठबंधन को लेकर क्या बोले विजय मामल्लपुरम में एक इफ्तार कार्यक्रम को अलायंस करते हुए विजय ने कहा कि जब अन्य प्रयास सफल नहीं हुए तो उनके सहयोगी ने इफ्तार अभियान चलाया कि टीवीके पद पर का रास्ता चुना जाएगा। इसकी खबरें वर्कवर्क्स में ब्रह्मा की स्थिति पैदा हो सकती है, क्योंकि ऐसी आ रही है कि टीवीके अलायंस में जा सकता है। इसलिए उन्होंने घोषणा की कि हम इस पर विचार कर रहे हैं कि चुनाव में बड़ी जीत के बाद सरकार का नेतृत्व हम ही करेंगे। असंबद्ध और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर कोई सहमति नहीं होगी। इस महीने दिल्ली की अपनी दूसरी यात्रा के बाद एआईएडीएमके के महासचिव अद्दादी के पलानीस्वामी ने दावा किया था कि तमिलनाडु में उनकी पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल होने के लिए धर्म के बीच सीट पर कट्टरता के रूप में चर्चा चल रही है। 23 अप्रैल को एक चरण के लिए चुनाव होने वाले एआईएडीएमके नेताओं ने कहा कि गठबंधन के बीच सीट बंटवारे की आधिकारिक घोषणा आने वाले दिनों में की जाएगी। एनडीए से गठबंधन पर चर्चा-AIADMK तमिलनाडु में सत्तारूढ़ दल के नेता (एलओपी) पलानीस्वामी ने कहा, “तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन में गठबंधन के बीच सीट पर हंगामा जारी है। प्रत्येक पार्टी को शामिल करने वाले विधायकों का विवरण आधिकारिक तौर पर 4 दिनों के भीतर घोषित किया जाएगा।” पलानीस्वामी ने अभिनेता से नेता बने विक्ट्री पार्टी टीवीके के साथ गठबंधन की संभावना को भी खारिज कर दिया. पलानीस्वामी ने कहा, ”तमिलगा वेट्री कज़गम के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है।” क्या बोले एमके स्टालिन इन सबके बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने स्टालिन के नेता एडप्पादी के पलानीस्वामी (ईपीएस) की कड़ी आलोचना की है। पलानीस्वामी 19 मार्च 2026 को सीट शेयरिंग पर बातचीत के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात करने आए थे। डीएमके कैडर ने अपने पत्र में लिखा है, “विपक्ष के सुझाव से पता चलता है कि दिल्ली में जज दिल्ली के लिए जा रहे हैं। क्या वे तमिलनाडु के लिए फंड सुनिश्चित करने के लिए हैं? राज्य के अधिकार के लिए आरक्षित परियोजना पूरी करने के लिए? नहीं। उनका ध्यान केंद्रित है और है। लोग यह बात साफ-साफ कहते हैं। कंपनी के लोग कभी-कभी दिल्ली या उनके प्रतिनिधि के रूप में काम करने वालों को मशीन बनाने की इजाजत नहीं देते हैं। वे जानते हैं कि राज्य के स्वामित्व और विकास के लिए कौन सा स्थान है।” ये भी पढ़ें केरल विधानसभा चुनाव 2026: केरल चुनाव को लेकर कांग्रेस ने जारी की दूसरी सूची, 37 का विमोचन
IPL में पहली बार सभी 10 टीमों के कप्तान भारतीय:कमिंस बाहर तो ईशान ने कमान संभाली; 6 कैप्टन पहली ट्रॉफी जीतने की दौड़ में

IPL के 19 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा जब सभी 10 टीमों के कप्तान भारतीय होंगे। सनराइजर्स हैदराबाद के नियमित कप्तान पैट कमिंस के शुरुआती मैचों से बाहर होने के बाद फ्रेंचाइजी ने उनकी जगह ईशान किशन को कप्तानी सौंपी है। इसके साथ ही टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबलों में सभी टीमों की कमान भारतीय खिलाड़ियों के हाथ में होगी। पिछले सीजन में भी हैदराबाद के पैट कमिंस को छोड़कर बाकी सभी टीमों के कप्तान भारतीय ही थे। ईशान किशन पहले बार किसी IPL की कप्तानी करेंगे ईशान किशन पहली बार IPL में कप्तानी करते नजर आएंगे। मौजूदा 10 कप्तानों में 6 ऐसे हैं, जो अपनी पहली ट्रॉफी की तलाश में हैं। इनमें ऋतुराज गायकवाड़, रियान पराग, शुभमन गिल, अजिंक्य रहाणे, ईशान किशन और ऋषभ पंत शामिल हैं। वहीं, बाकी 4 कप्तान पहले ही खिताब जीत चुके हैं। श्रेयस अय्यर ने 2024 में कोलकाता नाइट राइडर्स को चैंपियन बनाया था, रजत पाटीदार ने 2025 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को खिताब दिलाया, जबकि हार्दिक पांड्या ने 2022 में गुजरात टाइटंस को ट्रॉफी जिताई थी। श्रेयस अय्यर इकौलते कप्तान जो तीन फ्रेंचाइजियों को फाइनल तक पहुंचाया श्रेयस अय्यर IPL इतिहास के इकलौते कप्तान हैं, जिन्होंने तीन अलग-अलग फ्रेंचाइजियों को फाइनल तक पहुंचाया है। उन्होंने 2020 में दिल्ली कैपिटल्स को फाइनल तक पहुंचाया, जहां टीम को मुंबई इंडियंस से हार मिली थी। इसके बाद 2024 में उन्होंने KKR को चैंपियन बनाया और 2025 में पंजाब किंग्स को फाइनल तक पहुंचाया, जहां टीम RCB से हार गई। धोनी और रोहित सबसे सफल कप्तान IPL इतिहास में सबसे सफल कप्तानों की बात करें तो महेंद्र सिंह धोनी (CSK) और रोहित शर्मा (MI) शीर्ष पर हैं। दोनों ने अपनी-अपनी टीमों को 5-5 बार चैंपियन बनाया है। धोनी के नाम सबसे ज्यादा मैच (229) और जीत (134) दर्ज हैं, जबकि रोहित ने मुंबई इंडियंस को पांच खिताब दिलाए हैं। —————————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… नाथन एलिस हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण IPL 2026 से बाहर: CSK ने रिप्लेसमेंट जारी नहीं किया, फ्रेंचाइजी ने 2 करोड़ रुपए में खरीदा था 5 बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स के तेज गेंदबाज नाथन एलिस हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण IPL 2026 से बाहर हो गए हैं। फ्रेंचाइजी के एक अधिकारी ने बताया कि 31 साल के एलिस IPL से बाहर हो चुके हैं, हालांकि उनके रिप्लेसमेंट को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। पूरी खबर
गर्मी में गन्ने का एक गिलास जूस, पीलिया को रखें हमेशा दूर; डॉक्टर ने बताए चौंकाने वाले फायदे

Last Updated:March 20, 2026, 12:29 IST Sugarcane Juice Benefits: गर्मी के दिनों में शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए मौसमी फलों के सेवन की सलाह दी जाती है लेकिन पीलिया एक ऐसी बीमारी है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक को अपनी चपेट में ले लेती है. वहीं गन्ने के जूस को पीलिया का काल माना जाता है. गर्मी में एक गिलास जूस पीलिया सहित कई बीमारियों में लाभकारी है. गर्मी की शुरुआत होते ही खरगोन सहित निमाड़ में सूरज आग उगलने लगा है. मार्च के महीने में ही तापमान तेजी से बढ़ा है. अप्रैल-मई में हालत और ज्यादा खराब हो सकते हैं क्योंकि हर साल यहां तामपान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. ऐसे में लोगों का दिन में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है और शरीर जल्दी थकने लगता है. इस भीषण गर्मी के कारण तेज धूप और लू की चपेट में आकर लोग जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं. बच्चे और बुजुर्ग इसके ज्यादा शिकार होते हैं. इस मौसम में डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और बुखार जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं. खास बात यह है कि इस समय ध्यान न दिया जाए, तो बुखार पीलिया में बदल जाता है और कई बार व्यक्ति की जान तक चले जाती है. खरगोन के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ संतोष मौर्य ने लोकल 18 से कहा कि इस मौसम में ज्यादा पानी पीना चाहिए और ठंडी चीजों का सेवन करना चाहिए ताकि शरीर संतुलित बना रहे. वहीं गन्ने का जूस पीलिया के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद है. यह लीवर को सपोर्ट करता है और शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद करता है. नियमित रूप से इसका सेवन करने से राहत मिल सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google इसी वजह से इन दिनों खरगोन में गर्मी बढ़ते ही गन्ने के जूस के ठेले बड़ी संख्या में नजर आने लगे हैं. दोपहर के समय इन ठेलों पर लोगों की भीड़ खूब दिख रही है. लोग ठंडा-ठंडा जूस पीकर राहत महसूस कर रहे हैं क्योंकि यह सिर्फ प्यास नहीं बुझाता बल्कि शरीर को अंदर से ठंडक भी देता है. गन्ने का रस नैचुरल तरीके से शरीर को एनर्जी देता है. इसे पीने से तुरंत ताजगी मिलती है और थकान कम होती है. गन्ने के जूस में कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे शरीर के लिए जरूरी तत्व पाए जाते हैं. इसके साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. डॉ मौर्य के अनुसार, गन्ने का जूस सिर्फ स्वाद में अच्छा नहीं होता बल्कि यह शरीर को तुरंत एनर्जी भी देता है. तेज धूप में बाहर से आने के बाद एक गिलास जूस शरीर को तुरंत ताजगी देता है और कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाता. नियमित रूप से इसका सेवन करने से पीलिया जैसी घातक बीमारियों में जल्दी राहत मिल सकती है. यह एक नैचुरल ड्रिंक है, जिसमें किसी तरह का केमिकल नहीं होता. वहीं इसकी तासीर भी ठंडी होती है, इसलिए यह शरीर को अंदर से ठंडक भी देता है. यही कारण है कि गर्मी के मौसम में लोग कोल्डड्रिंक की जगह गन्ने का जूस ज्यादा पसंद करते हैं. यह सस्ता भी होता है और सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. First Published : March 20, 2026, 12:29 IST
‘अपमानित हुआ, गुहार लगानी पड़ी…’: बोरदोलोई ने गोगोई के सत्ता संभालने के बाद से असम कांग्रेस में विश्वास की कमी का संकेत दिया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 20, 2026, 12:17 IST बोरदोलोई, जो हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं और उन्हें दिसपुर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा गया है। असम के नेता प्रद्युत बोरदोलोई बीजेपी में शामिल हो गए. (पीटीआई/फ़ाइल) अनुभवी नेता और नगांव से पूर्व कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा कि पार्टी के भीतर अलगाव, आंतरिक मतभेद और अपमान की बढ़ती भावना के कारण उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया। बोरदोलोई, जो हाल ही में भाजपा में शामिल हुए और उन्हें दिसपुर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा गया है, ने कहा कि कांग्रेस के साथ उनका जुड़ाव उनकी किशोरावस्था से है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “कांग्रेस के साथ मेरा जुड़ाव काफी पुराना है। मैं 16 साल का था जब मैं एनएसयूआई (कांग्रेस की छात्र शाखा) का सदस्य बना… मैं पहली पीढ़ी का राजनेता हूं और मुझे पार्टी में आगे बढ़ने के कई मौके मिले। मैंने चार बार विधायक के रूप में जीत हासिल की और 15 साल तक कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया। मैं दो बार सांसद भी रहा हूं।” क्या बदलाव आया, इसकी व्याख्या करते हुए, बोरदोलोई ने कहा, “हालांकि, हाल ही में, चीजें पहले जैसी नहीं रही हैं… मैंने (कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में) शशि थरूर का समर्थन किया था क्योंकि मुझे लगा कि संगठन में चुनाव आवश्यक हैं। मैंने उनके लिए प्रचार करने के लिए उत्तर-पूर्वी राज्यों में उनके साथ यात्रा की… मुझे कहना होगा कि मल्लिकार्जुन खड़गे, जो अध्यक्ष बने, ने कभी कोई शिकायत नहीं की, लेकिन मुझे लगा कि अन्य लोग समान नहीं थे। मुझे लगा कि मुझे व्यवस्थित रूप से बाहर कर दिया गया था। मेरे कनिष्ठों को स्क्रीनिंग समितियों में नियुक्त किया गया था।” जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और उन्हें सीडब्ल्यूसी में आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया, मेरा नाम कभी भी किसी भी विचार के लिए नहीं आया।” उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान सामने आई कठिनाइयों के बारे में भी बताया। “हालांकि 2019 में मैंने नागांव लोकसभा सीट जीती, जो कांग्रेस ने 35 वर्षों से नहीं जीती थी, 2024 में मुझे फिर से नामांकित होने के लिए दर-दर भटकना पड़ा। क्योंकि गौरव गोगोई के कलियाबोर निर्वाचन क्षेत्र के कुछ हिस्से नागांव में चले गए, वह मेरी सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे। बाद में, रकीबुल हुसैन भी यही चाहते थे। मुझे बहुत दुख हुआ। सोनिया गांधी के हस्तक्षेप से मुझे मेरी सीट मिल गई। लेकिन तथ्य यह है कि मुझे केसी सहित हर नेता के पास जाना पड़ा। वेणुगोपाल, और विनती ने मुझे अपमानित महसूस कराया,” उन्होंने कहा। बोरदोलोई ने आगे असम में पार्टी नेतृत्व से समर्थन की कमी का आरोप लगाया। “गोगोई के असम कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के बाद, विश्वास में लगातार कमी आई है। मुझे सभी निर्णय लेने से दूर रखा गया था और मैं अलग-थलग महसूस कर रहा था। तब जो लोग मेरे काफिले पर हमले के लिए जिम्मेदार थे, उन्हें लहरीघाट और गोगोई के स्थानीय विधायक आसिफ नज़र ने सम्मानित किया था। मुझे आश्चर्य हुआ कि मेरी शिकायतों के बावजूद गोगोई अगले दिन उनके साथ मंच साझा करने चले गए। मेरे द्वारा उनके खिलाफ दिए गए सबूतों के बावजूद वे विधायक को फिर से नामांकित करना चाहते हैं। मुझे केंद्रीय चुनाव समिति के दौरान पता चला कि (सीईसी) की बैठक में, इमरान मसूद, जो एक बहुत ही सांप्रदायिक नेता हैं और कांग्रेस की बैठकों में वंदे मातरम गाने से इनकार करते हैं, ने मेरी शिकायतों को मनगढ़ंत बताकर खारिज कर दिया, राज्य कांग्रेस प्रमुख बैठक में थे, लेकिन उन्होंने मेरा बचाव नहीं किया।” यह पूछे जाने पर कि क्या कोई पैटर्न है, यह देखते हुए कि असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने पहले कांग्रेस नेतृत्व द्वारा दरकिनार किए जाने का आरोप लगाया था, बोरदोलोई ने कहा, “अगर मैं इस पर कुछ भी कहूंगा, तो मैं रोने वाले बच्चे की तरह लगूंगा। तथ्य यह है कि मुझे अपमानित महसूस हुआ।” जगह : असम, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 20, 2026, 12:17 IST समाचार राजनीति ‘अपमानित हुआ, गुहार लगानी पड़ी…’: बोरदोलोई ने गोगोई के सत्ता संभालने के बाद से असम कांग्रेस में विश्वास की कमी का संकेत दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)प्रद्युत बोरदोलोई(टी)असम की राजनीति(टी)कांग्रेस पार्टी(टी)बीजेपी(टी)राजनीतिक स्विच(टी)आंतरिक मतभेद(टी)नागांव(टी)दिसपुर विधानसभा क्षेत्र
वर्ल्ड अपडेट्स:लंदन में 2 भारतीयों ने सड़क पर पान थूका, डेढ़ लाख रुपए का जुर्माना लगा

लंदन के ब्रेंट इलाके में सार्वजनिक जगह पर पान थूकने के मामले में भारतीय मूल के दो लोगों पर 1,391 पाउंड (करीब 1.45 लाख रुपये) का जुर्माना लगाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों लोगों को पहले मौके पर ही 100 पाउंड का जुर्माना भरने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने इसे नहीं भरा। इसके बाद मामला कोर्ट पहुंच गया और जुर्माना कई गुना बढ़ गया। ब्रेंट सिटी काउंसिल ने पान थूकने के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि इससे सार्वजनिक जगहें गंदी होती हैं और सफाई पर काफी खर्च बढ़ जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, काउंसिल को हर साल करीब 30,000 पाउंड (लगभग 30 लाख रुपये) सिर्फ पान के दाग साफ करने में खर्च करने पड़ते हैं। पहला मामला एडगवेयर इलाके के रहने वाले अक्षीतकुमार भद्रे पटेल का है। उन्होंने जून 2025 में किंग्सबरी रोड पर एक मेट्रो स्टेशन के पास पान थूका था। वे कोर्ट में पेश नहीं हुए, इसलिए उनके खिलाफ फैसला उनकी गैरमौजूदगी में ही सुनाया गया। समय पर जुर्माना न भरने के कारण उनकी रकम 10 गुना से ज्यादा बढ़ गई। दूसरा मामला रुइसलिप इलाके के रहने वाले हितेश पटेल का है। उन्होंने वेम्बली हिल रोड पर पान थूका था। वे भी कोर्ट में पेश नहीं हुए और उनके खिलाफ भी गैरहाजिरी में ही फैसला हुआ, जिससे उन पर भी भारी जुर्माना लगा। उत्तर-पश्चिम लंदन के ब्रेंट और आसपास के इलाकों में पान थूकने की समस्या बढ़ रही है, जिस पर स्थानीय प्रशासन सख्त हो गया है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पान के दाग हटाना मुश्किल और महंगा होता है, इसके लिए खास तरीके से सफाई करनी पड़ती है। काउंसिल ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है। इसके तहत जगह-जगह चेतावनी वाले बैनर लगाए जा रहे हैं, अधिकारी गश्त कर रहे हैं और मौके पर ही 100 पाउंड तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… कनाडा पुलिस बोली- भारत से जुड़े अपराध का कोई सबूत नहीं, ट्रूडो सरकार के दावे से पलटे कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने कहा है कि भारत सरकार से जुड़े किसी एजेंट से कनाडा के लोगों को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। RCMP के कमिश्नर माइक डुहेम ने गुरुवार को CTV को दिए इंटरव्यू में कहा कि मौजूदा जांच में किसी विदेशी सरकार से सीधा संबंध साबित नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, “2024 में मैंने जो कहा था, वह उस समय की जांच पर आधारित था। लेकिन अब जो हम देख रहे हैं, उसमें हर मामले को किसी विदेशी संस्था से जोड़ना संभव नहीं है।” यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भारत दौरे के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार देखा जा रहा है। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एनआईए द्वारा घोषित आतंकी हरदीप निज्जर की हत्या को भारत से जोड़कर आरोप लगाए थे, जिससे दोनों देशों के संबंध खराब हो गए थे। साल 2023 में पैदा हुए तनाव के बाद भारत और कनाडा अपने रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं, और हालिया कूटनीतिक प्रयासों से इसमें सुधार भी दिख रहा है। ट्रम्प ने जापानी पीएम की मौजूदगी में कहा- हमें भी पर्ल हार्बर हमले की जानकारी नहीं थी, वैसा ही हमने ईरान में किया अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने गुरुवार को जापान की प्रधानमंत्री को उस समय चौंका दिया, जब उन्होंने 1941 में हुए पर्ल हार्बर हमले का जिक्र कर दिया। ट्रम्प ने यह बात हल्के अंदाज में कही, लेकिन यह टिप्पणी जापान के लिए असहज करने वाली मानी जा रही है। ट्रम्प ने PM साने ताकाइची के साथ एक बैठक के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। तब उनसे एक रिपोर्टर ने पूछा- अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला करने से पहले अपने सहयोगियों को क्यों नहीं बताया। इस पर ट्रम्प ने कहा, “हमने किसी को नहीं बताया क्योंकि हम सरप्राइज देना चाहते थे। सरप्राइज के बारे में जापान से बेहतर कौन जानता है?” उन्होंने एक जापानी पत्रकार से मजाकिया लहजे में कहा, “तुमने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया?” ताकाइची, जो ट्रांसलेटर के जरिए बात समझ रही थीं, उन्होंने कुछ नहीं कहा, लेकिन ऐसा लगा कि वह यह सुनकर असहज हो गई थीं। दरअसल, 7 दिसंबर 1941 को जापान ने अमेरिका के हवाई स्थित पर्ल हार्बर सैन्य अड्डे पर अचानक हमला किया था। इस हमले में 2400 से ज्यादा अमेरिकी मारे गए थे। इसके बाद अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हो गया था। नेपाल में बालेन शाह 27 मार्च को PM पद की शपथ ले सकते हैं, एक दिन पहले सांसदों का शपथ ग्रहण समारोह नेपाल में बड़ा राजनीतिक बदलाव होने जा रहा है। हाल ही में हुए संसदीय चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की बंपर जीत के बाद अब बालेंद्र (बालेन) शाह 27 मार्च को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी में हैं। RSP ने 23 फरवरी को हुए चुनाव में 275 में से 182 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। इससे साफ हो गया है कि बालेन शाह के नेतृत्व में एक ही पार्टी की सरकार बनेगी। चुनाव से पहले ही पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था और अब सरकार बनाने की तैयारियां आखिरी चरण में हैं। सांसदों का शपथ ग्रहण 26 मार्च को दोपहर 2 बजे होगा। इससे पहले उसी दिन सुबह 11:30 बजे सबसे वरिष्ठ सांसद को शपथ दिलाई जाएगी। 78 साल के अर्जुन नरसिंह केसी सबसे उम्रदराज चुने गए सांसद हैं, जो पहले खुद राष्ट्रपति से शपथ लेंगे और फिर बाकी सांसदों को शपथ दिलाएंगे।
बच्चों के दूध के दांतों को न समझें ‘अस्थायी’! डेंटिस्ट की चेतावनी- आपकी एक गलती बिगाड़ देगी बच्चे का चेहरा, जानिए ब्रश करने की सही उम्र

X चौंकाने वाली रिपोर्ट: बच्चों के ‘दूध के दांत’ क्यों हैं इतने जरूरी? Kids Dental Health Tips: राजस्थान के दंत विशेषज्ञ डॉ. आशीष जोशी ने चेतावनी दी है कि बच्चों के दूध के दांतों की अनदेखी उनके स्थायी दांतों को खराब कर सकती है. बोतल से दूध पीकर सोना और अंगूठा चूसना जैसी आदतें दांतों के आकार और सेहत को बिगाड़ रही हैं. विशेषज्ञों ने 3 साल की उम्र से ही ब्रश करने और मीठा कम करने की सलाह दी है.
‘मेरी बेटी के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए’: आरजी कार पीड़िता की मां ने पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी से टिकट मांगा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 20, 2026, 08:46 IST आरजी कर पीड़िता की मां ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार ने उनकी बेटी के मामले में जांच में बाधा डालने की कोशिश की थी. शहर के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के खिलाफ कोलकाता में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। (फोटो: पीटीआई) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले एक बड़े घटनाक्रम में, आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल पीड़िता की मां ने घोषणा की है कि वह भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकती हैं। गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य राज्य से मौजूदा टीएमसी सरकार को हटाना है क्योंकि उन्होंने उनकी बेटी के मामले में जांच में बाधा डालने की कोशिश की थी। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, मृतक डॉक्टर की मां ने कहा कि उन्हें उत्तर 24 परगना के पानीहाटी निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारने की संभावना है, और उनका नाम उम्मीदवारों की तीसरी सूची में शामिल हो सकता है जिसे भाजपा जल्द ही जारी करने वाली है। दुखी मां ने बताया कि उन्हें पहले बीजेपी से ऑफर मिला था लेकिन वह उस समय मानसिक रूप से तैयार नहीं थीं। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जिनके पास गृह विभाग भी है, का जिक्र करते हुए कहा, “मुझे बहुत पहले भाजपा से एक प्रस्ताव मिला था, लेकिन मैं तब मानसिक रूप से तैयार नहीं थी। कल, मैंने इसे स्वीकार करने और चुनाव लड़ने का फैसला किया क्योंकि मैं गृह मंत्री के शासन को समाप्त करना चाहती हूं।” उन्होंने कहा, “मैं अपनी बेटी को न्याय सुनिश्चित करने और इस सरकार को सत्ता से हटाने के लिए राजनीति में प्रवेश कर रही हूं।” इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने टिप्पणी की, “यह परिवार पर निर्भर है कि वे क्या करना चाहते हैं।” उन्होंने भाजपा और टीएमसी दोनों पर महिला मेडिकल इंटर्न के खिलाफ अपराध के पीछे की सच्चाई को उजागर करने के इरादे की कमी का आरोप लगाया। सलीम ने कहा, “टीएमसी सरकार ने सभी सबूत नष्ट कर दिए। पीड़िता के शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने का भी प्रयास किया गया, जिसे सीपीआई (एम) और डीवाईएफआई सदस्यों ने विफल कर दिया। इसी तरह, भाजपा शासित उत्तर प्रदेश में भी अपराध को छुपाने के लिए हाथरस पीड़िता के शव को इसी तरह से ठिकाने लगा दिया गया।” सलीम ने कहा, “मैं समझता हूं कि माता-पिता असहाय हैं। हमने कभी भी परिवार से सीपीआई (एम) का समर्थन करने के लिए नहीं कहा था। हमारे साथी, साथ ही हमारे सैकड़ों समर्थक, हमारी बेटी-बहन के लिए न्याय की मांग करते हुए और उसकी मौत के लिए जिम्मेदार संस्थागत भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए सड़कों पर उतरे थे। हम साजिशकर्ताओं को दंडित करने की अपनी मांग पर कायम हैं।” आरजी कर रेप केस अगस्त 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के सेमिनार हॉल के अंदर 31 वर्षीय डॉक्टर के साथ बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई, जिससे देश भर में आक्रोश फैल गया और राज्य भर में डॉक्टरों और नागरिक समाज समूहों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा। यह मामला एक महत्वपूर्ण राजनीतिक युद्ध के मैदान में बदल गया, भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार पर दोषियों को बचाने का आरोप लगाया, जबकि टीएमसी ने आरोपों से इनकार किया और जोर देकर कहा कि कानून अपना काम करेगा। जगह : कोलकाता (कलकत्ता), भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 20, 2026, 08:46 IST समाचार राजनीति ‘मेरी बेटी के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए’: आरजी कार पीड़िता की मां ने पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी से टिकट मांगा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
लिव-इन में रहने के बाद रेप का आरोप गलत:एमपी हाईकोर्ट ने व्यापारी को किया बरी; कहा- सहमति से बने संबंधों में FIR उचित नहीं

दो वयस्क महिला-पुरुष यदि अपनी मर्जी से लिव-इन में रहते हैं। आपसी सहमति से संबंध बनाते हैं, लेकिन बाद में विवाद होने पर यदि महिला रेप की शिकायत दर्ज कराती है तो यह उचित नहीं है। यह कहते हुए एमपी हाईकोर्ट ने रेप केस में फंसे कटनी के कपड़ा व्यापारी को राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया। कोर्ट ने यह फैसला 17 मार्च को सुनाया। मामला कटनी के कपड़ा व्यापारी मुकेश ठाकुरानी से जुड़ा है। इनके खिलाफ एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी ने वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी और तलवार के बल पर रेप किया। पत्नी से हुआ विवाद, फिर युवती आई जिंदगी में कटनी के माधव नगर निवासी मुकेश ठाकुरानी (35) कपड़ा व्यवसायी हैं। वर्ष 2003 में उनका विवाह हुआ। उनके दो बच्चे हैं। 5 मई 2019 को किसी बात को लेकर पत्नी से विवाद हो गया, जिसके बाद पत्नी बच्चों को लेकर मायके चली गई और पति के खिलाफ दहेज व भरण-पोषण का केस दर्ज कर दिया। इसी बीच 10 मई 2019 को कोर्ट के काम के दौरान मुकेश की मुलाकात कटनी में रहने वाली 24 वर्षीय युवती से हुई। वह भी अपने पति के खिलाफ चल रहे मुकदमे के सिलसिले में कोर्ट आती थी। कोर्ट में दोनों की अकसर बातचीत होने लगी। युवती ने बताया कि उसका पति उसे परेशान करता है, जिसके खिलाफ उसने शिकायत दर्ज कराई है। मुकेश के वैवाहिक विवाद की जानकारी मिलने पर वह उसके और करीब आ गई। दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। युवती का कहना था कि अब सरकार भी लिव-इन रिलेशन को मान्यता देती है, इसलिए वे साथ रह सकते हैं। आगे चलकर दोनों अपने-अपने जीवन साथियों से तलाक लेकर शादी कर सकते हैं। इसके बाद दोनों गोवा, भेड़ाघाट और मैहर घूमने भी गए। लिव-इन की शुरुआत ठीक, फिर बढ़ा विवाद और बिगड़े रिश्ते मुकेश युवती के साथ लिव-इन में रहने को तैयार हो गया। 1 सितंबर 2019 को युवती अपनी मां और दो साल की बेटी के साथ मुकेश के घर आकर रहने लगी। शुरुआती कुछ दिन ठीक रहे, लेकिन समय बीतने के साथ दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। इसी दौरान घर से लगातार नकदी और जेवरात गायब होने लगे। इस बारे में पूछने पर मुकेश और युवती के बीच विवाद बढ़ने लगा। याचिकाकर्ता के अनुसार, घर से करीब 15 लाख रुपए कैश और सोना गायब हो गया। जब इस संबंध में युवती से पूछताछ की गई तो उसने विवाद करना शुरू कर दिया। युवती ने मार्च 2020 में यह कहते हुए मुकेश का घर छोड़ दिया कि अब वह उसे जेल भिजवाएगी। एफआईआर के बाद अगले ही दिन गिरफ्तारी, जेल भेजा गया मुकेश का घर छोड़कर युवती अपने पति के घर लौट गई। 25 जुलाई 2020 को उसने कटनी के महिला थाने में मुकेश ठाकुरानी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2)(n), 377, 294 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज करवाई। युवती ने आरोप लगाया कि मुकेश ने उसका वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी और उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने यह भी कहा कि शादी का झांसा देकर मुकेश ने कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। साथ ही नाबालिग बेटी को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर उसके साथ जबरन यौन और अप्राकृतिक कृत्य किए। पुलिस ने अगले दिन 26 जुलाई 2020 को उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से मुकेश को जेल भेज दिया गया। 20 अगस्त 2020 को 25 दिन तक कटनी जेल में रहने के बाद मुकेश को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। लिव-इन के बाद दुष्कर्म का आरोप, हाईकोर्ट में दी चुनौती मर्जी से लिव-इन रिलेशन में रहने के बावजूद युवती ने कपड़ा व्यापारी पर दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में शिकायत दर्ज कराई थी। इसे चुनौती देते हुए व्यापारी ने हाईकोर्ट में कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं। पुलिस जांच में भी सामने आया कि मुकेश के मोबाइल में ऐसा कोई वीडियो नहीं मिला, जिसके आधार पर वह युवती को ब्लैकमेल कर रहा हो। इसके अलावा, घर की तलाशी के दौरान भी कोई तलवार बरामद नहीं हुई। सीनियर वकील बोले- संबंध सहमति से, आरोप निराधार याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में सीनियर एडवोकेट मनीष दत्त उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच संबंध सहमति से थे। पीड़िता एक विवाहित महिला है, जिसकी एक बच्ची है और वह अपने पति से अलग रह रही है। वह इस तथ्य से भली-भांति अवगत थी कि तलाक मिलने तक वह दूसरा विवाह नहीं कर सकती, जैसा कि उसके सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज बयान से स्पष्ट है। आपत्तिजनक स्थिति में अश्लील वीडियो बनाए जाने के आरोप के संबंध में साइबर सेल को कोई भी सबूत नहीं मिला, जो पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र से भी स्पष्ट है। इसलिए युवती का यह आरोप कि पत्नी को तलाक देने के झूठे आश्वासन पर उसे रिश्ते में फंसाया गया, असत्य है। डेढ़ साल तक रहे शारीरिक संबंध, दोनों थे विवाहित याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट मनीष दत्त ने कोर्ट को बताया कि युवती और उसके पति ने समाज में अपनी छवि बचाने के लिए दोबारा साथ आकर झूठी एफआईआर दर्ज कराई है। याचिकाकर्ता के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप झूठे और निराधार हैं। विशेष रूप से यह तथ्य सामने आया कि पहले से विवाहित दो व्यक्तियों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने थे, जिनमें समय के साथ दरार आ गई और वे स्वतः समाप्त हो गए। यह स्थिति याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आधार नहीं हो सकती। विवाह का आश्वासन अवास्तविक, आरोप निराधार कोर्ट को बताया गया कि विवाह के आश्वासन का आरोप भी निराधार है, क्योंकि युवती पहले से विवाहित थी और उसका एक बच्चा भी था, इसलिए ऐसा वादा स्वाभाविक रूप से अवास्तविक था। साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत जबरदस्ती या चोट पहुंचाने की धमकी के संबंध में भी कोई ठोस सबूत नहीं मिला। कोर्ट ने पाया- आरोप सही नहीं, एफआईआर रद्द सीनियर एडवोकेट मनीष दत्त ने बताया कि जस्टिस बी.पी. शर्मा की कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि









