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राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ने किया यूएई का कायाकल्प:शाही पहचान छिपाई, वेटर की नौकरी की; जानें कैसे बने नाहयान गल्फ के गेमचेंजर

राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ने किया यूएई का कायाकल्प:शाही पहचान छिपाई, वेटर की नौकरी की; जानें कैसे बने नाहयान गल्फ के गेमचेंजर

संयुक्त राष्ट्र अमीरात (यूएई) ने तेल उत्पादक संगठन ओपेक से दूरी बनाकर संकेत दिया है कि उसका भविष्य तेल पर ही निर्भर नहीं है। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की रणनीति ग्रीन हाइड्रोजन, एआई और स्पेस मिशन पर है। उन्होंने 2015 में कहा था कि आखिरी तेल के बैरल पर यूएई शोक नहीं, उत्सव मनाएगा। पहले सैन्य कमांडर फिर क्राउन प्रिंस से राष्ट्रपति बनने तक उनके फैसलों ने न केवल यूएई का कायाकल्प किया है, खाड़ी देशों में बदलाव को भी हवा दी है। शेख मोहम्मद की परवरिश ने उनके फैसलों की नींव रखी। जब 14 वर्ष के थे, तब पिता शेख जायद ने उन्हें राजसी पहचान छिपाकर मोरक्को पढ़ने भेजा था। ताकि वे कठोर जीवन देख सकें। सैंडहर्स्ट की ट्रेनिंग और ‘वेटर’ के रूप में काम मोरक्को में पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपना नाम बदलकर ‘हसन’ रखा था, ताकि कोई उन्हें पहचान न सके। वे अपना खाना खुद बनाते और कपड़े खुद धोते थे। वहां एक कैफे में वेटर के तौर पर भी काम किया, ताकि वह आम लोगों के संघर्ष और जीवन को करीब से समझ सकें। शेख मोहम्मद ने ब्रिटेन की प्रतिष्ठित रॉयल मिलिट्री अकादमी सैंडहर्स्ट से ट्रेनिंग ली और पासआउट होकर बाद में यूएई सेना में शामिल हुए। सेना के आधुनिकीकरण और प्रोफेशनल ट्रेनिंग को उन्होंने खुद मॉनिटर किया। शेख मोहम्मद ने खुद को कट्‌टरपंथी सोच से अलग रखा। छात्र जीवन में जब एक मौलवी ने उन्हें कट्टरपंथ की ओर मोड़ने की कोशिश की, तो वे जल्द समझ गए कि यह विचारधारा खतरनाक है। यमन युद्ध में नाहयान ने मिसाल पेश की। भतीजे को फ्रंट लाइन पर भेजा, जो आज युद्ध के कारण व्हीलचेयर पर हैं। 2004 में क्राउन प्रिंस बनने पर नाहयान ने कानूनों की दशा बदली। संसद में 50% महिला आरक्षण, 100% विदेशी स्वामित्व व गोल्डन वीसा जैसे फैसलों ने यूएई को निवेश हब बनाया। हालांकि, 2004-22 तक उनके भाई शेख खलीफा बिन जायद राष्ट्रपति थे, पर असली ताकत व कूटनीति क्राउन प्रिंस रहते नाहयान के पास थी। यही यूएई को गल्फ का गेमचेंजर बना रहा है। एआई से 50% सरकारी फैसले लेने वाला पहला देश बनेगा 2022 में राष्ट्रपति बनने के बाद शेख मोहम्मद ने पर्सनल लॉ में बदलाव कर तलाक, कस्टडी और विरासत में महिलाओं को अधिकार दिए। श्रम कानून बदलकर ‘निश्चित अवधि’ के अनुबंध अनिवार्य किए गए, जिससे बाहरी मजदूरों को लाभ हुआ। ‘एजेंटिक एआई’ मॉडल के तहत लक्ष्य है कि 2028 तक 50% सरकारी काम एआई संभाले, जो विश्लेषण के साथ फैसले भी ले सके। ऐसा करने वाला यूएई दुनिया का पहला देश होगा। सादगी की बात करें तो कई बार मेहमानों को वे खुद ही कॉफी सर्व करते हैं।

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