Sunday, 08 Nov 2026 | 12:34 AM

Trending :

UK PM Keir Starmer Resigns? 100 MPs Rebel; 6th PM in 10 Years

UK PM Keir Starmer Resigns? 100 MPs Rebel; 6th PM in 10 Years

लंदन5 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सोमवार को इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं और अपने पद छोड़ने का रोडमैप भी बता सकते हैं। यह दावा ब्रिटेन के अखबार ‘द ऑब्जर्वर’ की एक रिपोर्ट में किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, स्टार्मर ने कैबिनेट मंत्रियों, सलाहकारों और ट्रेड यूनियन नेताओं से बातचीत के बाद यह तय किया कि उनका पद पर बने रहना अब मुश्किल हो गया है। हालांकि, रॉयटर्स के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि स्टार्मर अभी भी प्रधानमंत्री के तौर पर अपना काम करने पर ध्यान दे रहे हैं।

रॉयटर्स के मुताबिक, स्टार्मर की लेबर पार्टी के 100 से ज्यादा सांसद सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उन्हें इस्तीफा देना चाहिए या अपने पद छोड़ने की समयसीमा घोषित करनी चाहिए। यह बागी सांसद हाउस ऑफ कॉमन्स में पार्टी के कुल सांसदों का लगभग एक चौथाई हैं।

अगर स्टार्मर इस्तीफा देते भी हैं, तो ब्रिटेन के 10 साल के इतिहास में वे छठे ऐसे प्रधानमंत्री होंगे जिन्हें यह पद छोड़ना पड़ा हो। इससे पहले डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक अपना कार्यकाल खत्म करने से पहले ही पीएम पद छोड़ चुके हैं।

ब्रिटेन के अखबार ‘द ऑब्जर्वर’ और ‘द संडे टेलिग्राफ’ ने रविवार को प्रधानमंत्री स्टार्मर के इस्तिफे के बारे में छापा।

ब्रिटेन के अखबार ‘द ऑब्जर्वर’ और ‘द संडे टेलिग्राफ’ ने रविवार को प्रधानमंत्री स्टार्मर के इस्तिफे के बारे में छापा।

स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव क्यों बढ़ा

स्टार्मर ने 2024 में लेबर पार्टी को बड़ी चुनावी जीत दिलाई थी, लेकिन उसके बाद उनकी लोकप्रियता लगातार घटी है। कई विवादों, नीतिगत यू-टर्न और जीवन स्तर में सुधार के वादों को पूरा नहीं कर पाने की वजह से उनकी छवी को नुकसान पहुंचा है।

स्टार्मर की मुश्किलें और बढ़ गईं, जब उनके विरोधी एंडी बर्नहैम ने शुक्रवार को उपचुनाव जीत लिया। इस जीत के बाद बर्नहैम पार्टी की कमान संभालने की दावेदारी पेश कर सकते हैं। जीत के बाद उन्होंने कहा कि वह देश को नई दिशा देना चाहते हैं। वहीं, उनके सहयोगी नेता स्टार्मर से खुद इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं।

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने भी संकेत दिया है कि वह जरूरत पड़ने पर स्टार्मर को नेतृत्व के लिए चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, स्टार्मर ने शुक्रवार को साफ कहा था कि वह अपने नेतृत्व के खिलाफ आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करेंगे और लेबर पार्टी के नेताओं से आपसी खींचतान से बचने की अपील की थी।

ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की वजह

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की बड़ी वजह वहां की संसदीय व्यवस्था है। वहां प्रधानमंत्री को लोग सीधे नहीं चुनते, बल्कि उनकी पार्टी के सांसद उनका समर्थन करते हैं। प्रधानमंत्री तब तक पद पर बने रहते हैं, जब तक पार्टी के सांसद उनके साथ खड़े हो।

अगर सांसदों को लगने लगे कि किसी नेता की घटती लोकप्रियता से अगले चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है, तो वे बिना आम चुनाव कराए भी नया नेता चुनने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। यही वजह है कि ब्रिटेन में पार्टी का समर्थन कमजोर पड़ते ही प्रधानमंत्री बदलने की नौबत जल्दी आ जाती है।

ब्रिटेन की बड़ी पार्टियों के नियम भी नेताओं को हटाने का रास्ता आसान बना देते हैं। कंजर्वेटिव पार्टी में अगर 15% सांसद किसी नेता के खिलाफ चिट्ठी लिख दें, तो उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। वहीं, लेबर पार्टी में कोई दूसरा नेता तब दावेदारी पेश कर सकता है जब उसे पार्टी के 20% से ज्यादा सांसदों और सदस्यों का समर्थन मिल जाए।

2011 में स्थिरता के लिए ‘फिक्स्ड टर्म कानून’ लाया गया था

2011 में फिक्स्ड-टर्म पार्लियामेंट्स एक्ट’ लाया गया था। इसका मकसद संसद का कार्यकाल तय रखना और सरकारों को समय से पहले गिरने से बचाना था। लेकिन बाद में इस कानून को खत्म कर दिया गया।

आलोचकों का कहना है कि इसके बाद पुराने नियम फिर लागू हो गए, जिससे प्रधानमंत्री अपनी पार्टी के समर्थन और अचानक पैदा होने वाले राजनीतिक संकटों के ज्यादा भरोसे हो गए। ऐसे में पार्टी का समर्थन कम होते ही प्रधानमंत्री की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है, जिससे नेताओं का कार्यकाल छोटा और अनिश्चित होता जा रहा है।

ब्रेग्जिट के बाद कम समय में अच्छे नतीजे देने का दबाव

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2016 में ब्रेग्जिट पर हुए जनमत संग्रह के बाद ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। लोग अब सिर्फ पार्टी देखकर वोट नहीं देते, बल्कि महंगाई, टैक्स, सरकारी सेवाओं और बेहतर जीवन स्तर जैसे मुद्दों पर जल्दी नतीजे चाहते हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसी वजह से नेताओं पर कम समय में अच्छे नतीजे देने का दबाव बढ़ गया है। अगर सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, तो सत्तारूढ़ पार्टी के अंदर ही विरोध शुरू हो जाता है और नेता बदलने की मांग उठने लगती है।

————————

ये खबर भी पढ़ें…

शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं:कश्मीर मूल की हैं; एपस्टीन फाइल्स विवाद से PM स्टार्मर की कुर्सी खतरे में

अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े विवादों के कारण ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी खतरे में है। अब उनकी अपनी लेबर पार्टी के एक धड़े ने ही इस्तीफे की मांग कर दी है। हालांकि स्टार्मर अभी पद छोड़ने से इनकार कर रहे हैं।

इस बीच, नए प्रधानमंत्री पद की होड़ में गृह मंत्री शबाना महमूद के साथ ही स्वास्थ्य मंत्री वेस्ट स्ट्रीटिंग और पूर्व उपप्रधानमंत्री अंगेला रेनर का नाम सामने आ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Ranbir Kapoors Ramayan Footage Shown at Cinemacon

April 19, 2026/
5:42 pm

27 मिनट पहले कॉपी लिंक रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर ग्लोबल लेवल पर चर्चा शुरू हो गई है।...

वरिंद्र घुम्मन की मौत डॉक्टरों की लापरवाही से-भाई का दावा:SIT रिपोर्ट का हवाला दिया, बोले-फोर्टिस अमृतसर पर केस करेंगे; सर्जरी के दौरान गई थी जान

March 1, 2026/
5:30 am

जालंधर के रहने वाले और एशिया के इकलौते शाकाहारी बॉडी बिल्डर वरिंद्र घुम्मन मौत मामले में परिवार ने बड़ा खुलासा...

राम चरण बोले- पेद्दी के लिए आमिर-सलमान से कॉन्फिडेंट मिला:डायरेक्टर मना करते हैं, लेकिन अपने स्टंट खुद करता हूं; सेट पर लगीं कई चोटें, पार्ट-1

May 21, 2026/
4:30 am

RRR को ऑस्कर में मिली जीत के बाद ग्लोबल स्टार बन चुके राम चरण की फिल्म पेद्दी 4 जून को...

Profit Dips, Rs 15,000 Cr Share Buyback Announced

April 16, 2026/
6:59 pm

मुंबई50 मिनट पहले कॉपी लिंक आईटी कंपनी विप्रो ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4FY26) के नतीजे घोषित कर...

सुप्रीम कोर्ट स्टाफ को 2 दिन का वर्क फ्रॉम होम:जज कार पूलिंग करके कोर्ट जाएंगे; मोदी की ईंधन बचाने की अपील पर फैसला

May 15, 2026/
5:43 pm

PM मोदी की ईंधन बचत की अपील पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने वर्किंग को लेकर नई गाइडलाइन जारी की...

‘धमाल 4’ की रिलीज डेट फिर टली:अक्षय कुमार की फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ को क्लीन विंडो, अजय देवगन ने निभाई दोस्ती

May 16, 2026/
8:16 pm

अजय देवगन और अक्षय कुमार की दोस्ती फिर चर्चा में है। खबर है कि अजय ने ‘धमाल 4’ की रिलीज...

2nd PUC Results 2026 Karnataka: Over 7.1 lakh students appeared for the Karnataka class 12 exam this year. (AI Generated Image)

April 7, 2026/
8:18 am

आखरी अपडेट:07 अप्रैल, 2026, 08:18 IST पूनावाला ने लिखा कि कांग्रेस “भारतीय जिहादी कांग्रेस” की तरह व्यवहार कर रही है...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

UK PM Keir Starmer Resigns? 100 MPs Rebel; 6th PM in 10 Years

UK PM Keir Starmer Resigns? 100 MPs Rebel; 6th PM in 10 Years

लंदन5 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सोमवार को इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं और अपने पद छोड़ने का रोडमैप भी बता सकते हैं। यह दावा ब्रिटेन के अखबार ‘द ऑब्जर्वर’ की एक रिपोर्ट में किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, स्टार्मर ने कैबिनेट मंत्रियों, सलाहकारों और ट्रेड यूनियन नेताओं से बातचीत के बाद यह तय किया कि उनका पद पर बने रहना अब मुश्किल हो गया है। हालांकि, रॉयटर्स के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि स्टार्मर अभी भी प्रधानमंत्री के तौर पर अपना काम करने पर ध्यान दे रहे हैं।

रॉयटर्स के मुताबिक, स्टार्मर की लेबर पार्टी के 100 से ज्यादा सांसद सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उन्हें इस्तीफा देना चाहिए या अपने पद छोड़ने की समयसीमा घोषित करनी चाहिए। यह बागी सांसद हाउस ऑफ कॉमन्स में पार्टी के कुल सांसदों का लगभग एक चौथाई हैं।

अगर स्टार्मर इस्तीफा देते भी हैं, तो ब्रिटेन के 10 साल के इतिहास में वे छठे ऐसे प्रधानमंत्री होंगे जिन्हें यह पद छोड़ना पड़ा हो। इससे पहले डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक अपना कार्यकाल खत्म करने से पहले ही पीएम पद छोड़ चुके हैं।

ब्रिटेन के अखबार ‘द ऑब्जर्वर’ और ‘द संडे टेलिग्राफ’ ने रविवार को प्रधानमंत्री स्टार्मर के इस्तिफे के बारे में छापा।

ब्रिटेन के अखबार ‘द ऑब्जर्वर’ और ‘द संडे टेलिग्राफ’ ने रविवार को प्रधानमंत्री स्टार्मर के इस्तिफे के बारे में छापा।

स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव क्यों बढ़ा

स्टार्मर ने 2024 में लेबर पार्टी को बड़ी चुनावी जीत दिलाई थी, लेकिन उसके बाद उनकी लोकप्रियता लगातार घटी है। कई विवादों, नीतिगत यू-टर्न और जीवन स्तर में सुधार के वादों को पूरा नहीं कर पाने की वजह से उनकी छवी को नुकसान पहुंचा है।

स्टार्मर की मुश्किलें और बढ़ गईं, जब उनके विरोधी एंडी बर्नहैम ने शुक्रवार को उपचुनाव जीत लिया। इस जीत के बाद बर्नहैम पार्टी की कमान संभालने की दावेदारी पेश कर सकते हैं। जीत के बाद उन्होंने कहा कि वह देश को नई दिशा देना चाहते हैं। वहीं, उनके सहयोगी नेता स्टार्मर से खुद इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं।

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने भी संकेत दिया है कि वह जरूरत पड़ने पर स्टार्मर को नेतृत्व के लिए चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, स्टार्मर ने शुक्रवार को साफ कहा था कि वह अपने नेतृत्व के खिलाफ आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करेंगे और लेबर पार्टी के नेताओं से आपसी खींचतान से बचने की अपील की थी।

ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की वजह

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की बड़ी वजह वहां की संसदीय व्यवस्था है। वहां प्रधानमंत्री को लोग सीधे नहीं चुनते, बल्कि उनकी पार्टी के सांसद उनका समर्थन करते हैं। प्रधानमंत्री तब तक पद पर बने रहते हैं, जब तक पार्टी के सांसद उनके साथ खड़े हो।

अगर सांसदों को लगने लगे कि किसी नेता की घटती लोकप्रियता से अगले चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है, तो वे बिना आम चुनाव कराए भी नया नेता चुनने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। यही वजह है कि ब्रिटेन में पार्टी का समर्थन कमजोर पड़ते ही प्रधानमंत्री बदलने की नौबत जल्दी आ जाती है।

ब्रिटेन की बड़ी पार्टियों के नियम भी नेताओं को हटाने का रास्ता आसान बना देते हैं। कंजर्वेटिव पार्टी में अगर 15% सांसद किसी नेता के खिलाफ चिट्ठी लिख दें, तो उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। वहीं, लेबर पार्टी में कोई दूसरा नेता तब दावेदारी पेश कर सकता है जब उसे पार्टी के 20% से ज्यादा सांसदों और सदस्यों का समर्थन मिल जाए।

2011 में स्थिरता के लिए ‘फिक्स्ड टर्म कानून’ लाया गया था

2011 में फिक्स्ड-टर्म पार्लियामेंट्स एक्ट’ लाया गया था। इसका मकसद संसद का कार्यकाल तय रखना और सरकारों को समय से पहले गिरने से बचाना था। लेकिन बाद में इस कानून को खत्म कर दिया गया।

आलोचकों का कहना है कि इसके बाद पुराने नियम फिर लागू हो गए, जिससे प्रधानमंत्री अपनी पार्टी के समर्थन और अचानक पैदा होने वाले राजनीतिक संकटों के ज्यादा भरोसे हो गए। ऐसे में पार्टी का समर्थन कम होते ही प्रधानमंत्री की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है, जिससे नेताओं का कार्यकाल छोटा और अनिश्चित होता जा रहा है।

ब्रेग्जिट के बाद कम समय में अच्छे नतीजे देने का दबाव

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2016 में ब्रेग्जिट पर हुए जनमत संग्रह के बाद ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। लोग अब सिर्फ पार्टी देखकर वोट नहीं देते, बल्कि महंगाई, टैक्स, सरकारी सेवाओं और बेहतर जीवन स्तर जैसे मुद्दों पर जल्दी नतीजे चाहते हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसी वजह से नेताओं पर कम समय में अच्छे नतीजे देने का दबाव बढ़ गया है। अगर सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, तो सत्तारूढ़ पार्टी के अंदर ही विरोध शुरू हो जाता है और नेता बदलने की मांग उठने लगती है।

————————

ये खबर भी पढ़ें…

शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं:कश्मीर मूल की हैं; एपस्टीन फाइल्स विवाद से PM स्टार्मर की कुर्सी खतरे में

अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े विवादों के कारण ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी खतरे में है। अब उनकी अपनी लेबर पार्टी के एक धड़े ने ही इस्तीफे की मांग कर दी है। हालांकि स्टार्मर अभी पद छोड़ने से इनकार कर रहे हैं।

इस बीच, नए प्रधानमंत्री पद की होड़ में गृह मंत्री शबाना महमूद के साथ ही स्वास्थ्य मंत्री वेस्ट स्ट्रीटिंग और पूर्व उपप्रधानमंत्री अंगेला रेनर का नाम सामने आ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.