क्या डायबिटीज के मरीज ब्रेड खा सकते हैं? डॉक्टर आशीष सहगल ने बताई हकीकत, देखें वीडियो

Bread and Diabetes: डायबिटीज के मरीजों के लिए ब्रेड खाने को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं. करनाल के डायबिटीज स्पेशलिस्ट डॉक्टर आशीष सहगल ने अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड एक वीडियो में बताया है कि डायबिटीज में ब्रेड पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इसका प्रकार और मात्रा महत्वपूर्ण है. होल ग्रेन ब्रेड या लो-कार्ब ब्रेड को सीमित मात्रा में शामिल किया जा सकता है. नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग और संतुलित डाइट के साथ इसे डायबिटीज में सुरक्षित रूप से खाया जा सकता है. अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आप ब्रेड खाएं या नहीं.
राज्यसभा में 19 नए सदस्यों ने शपथ ली:शरद पवार व्हीलचेयर पर पहुंचे; 16 अप्रैल से तीन दिन का विशेष सत्र

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) प्रमुख शरद पवार समेत 19 नए और दोबारा चुने गए राज्यसभा सदस्यों ने सोमवार को शपथ ली। शरद पवार व्हीलचेयर पर शपथ लेने के लिए संसद पहुंचे। शपथ लेने वालों में 5 महाराष्ट्र, 3 ओडिशा, 6 तमिलनाडु और 5 पश्चिम बंगाल के सदस्य है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन की मौजूदगी में सभी सदस्यों को शपथ दिलाई गई। 16 अप्रैल से तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। दरअसल, 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटें 2 अप्रैल को खाली हुई थीं। इन सीटों के 26 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे, जबकि बाकी 11 सीटों पर 16 मार्च को वोटिंग हुई। शपथग्रहण की दो तस्वीरें… इन सदस्यों ने शपथ ली… 16 अप्रैल से राज्यसभा का विशेष सत्र सांदसों के शपथ ग्रहण का आयोजन ऐसे समय हुआ, जब संसद का सत्र नहीं चल रहा है। हालांकि इस मौके पर उप सभापति हरिवंश और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू भी मौजूद थे। किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर सभी दलों से साथ आने की अपील की। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से बुलाया जाएगा। 16, 17 और 18 अप्रैल को सदन में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े अहम बिल पर चर्चा की जाएगी। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं। प्रस्तावित 50% की बढ़ोतरी के साथ सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी, जिसमें से 273 (करीब एक तिहाई) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार ने 2023 में संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण विधेयक पेश किया था। उसी दौरान इस बिल को आधिकारिक रूप से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा गया। किरेन रिजिजू ने कहा कि यह मुद्दा किसी एक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश का है और इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस और कुछ अन्य दल अभी आगे नहीं आए हैं, लेकिन उनसे विरोध की उम्मीद नहीं है। 16 मार्च: राज्यसभा चुनाव में NDA ने 11 में 9 सीटें जीतीं, 26 सांसद निर्विरोध चुने गए थे हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुआ था। इनमें 9 सीटों पर NDA कैंडिडेट्स या NDA समर्थित कैंडिडेट्स ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस और बीजू जनता दल (BJD) ने एक-एक सीट पर जीत हासिल की। राज्यवार सीटों की बात करें तो बिहार की सभी पांचों सीटों पर NDA प्रत्याशी विजयी रहे। ओडिशा की 4 सीटों में से 3 NDA और 1 बीजद उम्मीदवार ने जीती। हरियाणा की दो सीटों में से एक पर भाजपा और एक पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। पूरी खबर पढ़ें… ———– ये खबर भी पढ़ें… राज्यसभा की 37 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव:इनमें 25 सीटें विपक्ष, एनडीए की 12; पवार, सिंघवी का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। 37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव कराया जाएगा। जो सीटें खाली हो रही हैं उनमें 12 एनडीए के पास हैं, 25 पर विपक्ष का कब्जा है। पूरी खबर पढ़ें…
45 की उम्र के बाद महिलाओं में क्यों बढ़ता है लिवर फैट? डॉक्टर ने बताई असली वजह और बचाव के तरीके

Last Updated:April 06, 2026, 15:42 IST Menopause and Fatty Liver: महिलाओं में 45 की उम्र के बाद हार्मोनल बदलाव होने लगता है, जिसके कारण लिवर में फैट तेजी से बढ़ने लगता है. एस्ट्रोजन का स्तर घटने से फैट पेट और आंतरिक अंगों के आसपास जमा होता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है. समय पर जागरुकता से इस समस्या से बचा जा सकता है. मेनोपॉज के बाद महिलाओं में फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है. Fatty Liver Risk in Women: हमारे शरीर में उम्र के अनुसार बदलाव होते रहते हैं. 45 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में बेहद तेजी से बदलाव होने लगते हैं, जिनका असर सिर्फ हार्मोन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है. खासकर मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिससे शरीर में फैट के जमाव का पैटर्न बदल जाता है. यही कारण है कि इस उम्र के बाद कई महिलाओं में लिवर फैट तेजी से बढ़ने लगता है, जो गंभीर समस्या पैदा कर सकता है. चेन्नई की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. कनगा लक्ष्मी ने HT को बताया कि मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर घटने से शरीर में फैट का वितरण प्रभावित होता है. पहले जो फैट शरीर के बाहरी हिस्सों जैसे हिप्स और जांघों में जमा होता था, वह अब पेट और आंतरिक अंगों के आसपास जमा होने लगता है. यह विसरल फैट ज्यादा खतरनाक होता है और लिवर पर सीधा असर डालता है. इसी बदलाव के कारण महिलाओं में फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है. हार्मोनल बदलाव के साथ शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस भी बढ़ने लगता है. जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर का स्तर असंतुलित हो जाता है. इससे मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और एक्स्ट्रा फैट लिवर में जमा होने लगता है, जिससे फैटी लिवर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर के अनुसार फैटी लिवर की समस्या शुरुआती स्टेज में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती है. कई महिलाओं का वजन सामान्य रहता है, इसलिए वे इसे गंभीरता से नहीं लेतीं. हालांकि अंदरूनी फैट धीरे-धीरे लिवर में जमा होता रहता है, जिससे समय पर इसका पता नहीं चल पाता और बाद में यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है. दरअसल मेनोपॉज से पहले एस्ट्रोजन महिलाओं को एक तरह का सुरक्षा कवच देता है, जिससे वे मेटाबॉलिक बीमारियों से कुछ हद तक सुरक्षित रहती हैं. मेनोपॉज के बाद यह सुरक्षा खत्म हो जाती है. इसके बाद महिलाओं में न केवल फैटी लिवर बल्कि दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है. कुछ मामलों में यह जोखिम पुरुषों से भी ज्यादा हो सकता है. फैटी लिवर के लक्षण साफ नहीं होते, लेकिन कुछ संकेत इस ओर इशारा कर सकते हैं. जैसे बिना ज्यादा वजन बढ़े पेट का घेरा बढ़ना, लगातार थकान रहना, लिवर एंजाइम्स का बढ़ना या पहले से PCOS, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या होना. ये सभी संकेत बताते हैं कि शरीर में मेटाबॉलिक असंतुलन बढ़ रहा है. इस समस्या से बचने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार बेहद जरूरी है. संतुलित और प्रोटीन युक्त आहार लेना, नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और एरोबिक एक्सरसाइज करना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना काफी मददगार साबित होता है. इसके साथ ही समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना भी जरूरी है, ताकि समस्या को शुरुआती स्टेज में ही पकड़ा जा सके. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 15:42 IST
दिल्ली विधानसभा का बैरियर तोड़कर घुसी कार:VIP गेट से एंट्री की, ड्राइवर ने गुलदस्ता रखा और फरार हुआ

दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा में सोमवार दोपहर चूक हुई है। अज्ञात कार सवार वीआईपी गेट नंबर 2 की बैरिकेडिंग तोड़कर अंदर घुसा। सूत्रों के मुताबिक, कार चालक ने अंदर गुलदस्ता रखा और मौके से कार लेकर फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलने पर दिल्ली पुलिस कार की तलाश में जुटी गई है। घटना की 3 तस्वीरें… खबर लगातार अपडेट की जा रही है…
भाजपा स्थापना दिवस पर रानीताल कार्यालय में कार्यक्रम:मंत्री राकेश सिंह ने कहा, यह पार्टी के लिए पर्व जैसा अवसर

जबलपुर में भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस रविवार को रानीताल स्टेडियम स्थित पार्टी कार्यालय में उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्थापना दिवस भाजपा के लिए किसी पर्व से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि देशभर में कार्यकर्ताओं ने इसे उत्साह और समर्पण के साथ मनाया। राकेश सिंह ने कहा कि यह दिन उन संस्थापकों और पुरोधाओं को याद करने का अवसर है, जिन्होंने भारतीय जनसंघ से भाजपा तक की यात्रा में अपना योगदान दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन की विचारधारा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। राकेश सिंह ने कहा कि कार्यकर्ताओं की निष्ठा और अनुशासन ही संगठन की ताकत है, जिसके बल पर भाजपा ने कठिन परिस्थितियों में भी खुद को मजबूत किया है। कार्यक्रम में सांसद आशीष दुबे, विधायक अभिलाष पाण्डेय, विधायक ईश्वरदास रोहाणी, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे और नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर सहित कई नेता मौजूद रहे।
मीठा खाने की इच्छा क्यों होती है? क्या यह शरीर में छिपी किसी समस्या का संकेत, डाइटिशियन ने बताया सच

Causes of Sugar Cravings: कई बार आपने महसूस किया होगा कि अचानक मीठा खाने की इच्छा करने लगती है. कभी चॉकलेट, कभी मिठाई, तो कभी मीठी चाय पीने का खूब मन करता है. ऐसा लगता है कि शरीर खुद ही शुगर की मांग कर रहा है. कई बार लगता है कि ऐसा लोग स्वाद की वजह से करते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह सेहत से जुड़ा संकेत भी हो सकता है. अगर आपको बार-बार मीठा खाने की इच्छा हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया कि कभी-कभी मीठा खाने का मन करना बिल्कुल सामान्य है. हमारा दिमाग ग्लूकोज को एनर्जी के मुख्य सोर्स के रूप में इस्तेमाल करता है. जब शरीर को इंस्टेंट एनर्जी की जरूरत होती है, तो मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है. अगर यह इच्छा बहुत बार या कंट्रोल से बाहर हो जाए, तो इसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं. जब आप लंबे समय तक कुछ नहीं खाते या बहुत ज्यादा रिफाइंड कार्ब्स खाते हैं, तो ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता और फिर गिरता है. इस गिरावट के बाद शरीर फिर से शुगर मांगता है, जिससे मीठा खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डाइटिशियन के अनुसार कम नींद लेने से शरीर का एनर्जी बैलेंस बिगड़ जाता है. इससे भूख बढ़ाने वाले हार्मोन एक्टिव हो जाते हैं और मीठा खाने की इच्छा तेज हो जाती है. थकान के समय शरीर इंस्टेंट एनर्जी पाने के लिए शुगर की ओर झुकता है. इसके अलावा स्ट्रेस, एंजायटी या उदासी के समय लोग अक्सर कंफर्ट फूड की ओर जाते हैं, जिसमें मीठा सबसे ऊपर होता है. मीठा खाने से दिमाग में फील-गुड हार्मोन रिलीज होता है, जिससे थोड़ी देर के लिए अच्छा महसूस होता है. एक्सपर्ट की मानें तो कभी-कभी शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी भी मीठा खाने की इच्छा बढ़ा सकती है. अगर मैग्नीशियम, क्रोमियम, प्रोटीन की कमी है, तब भी क्रेविंग बढ़ जाती है. हालांकि यह सीधा कारण नहीं होता, लेकिन असंतुलित डाइट क्रेविंग्स को बढ़ा सकती है. बार-बार और बहुत ज्यादा मीठा खाने की इच्छा टाइप 2 डायबिटीज, हार्मोनल असंतुलन, अत्यधिक तनाव या एंजायटी का भी संकेत हो सकता है. अगर इसके साथ बार-बार प्यास लगना, थकान या वजन में बदलाव जैसे लक्षण भी हों, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है. डाइटिशियन के अनुसार अगर आपको मीठा खाने की क्रेविंग हो रही है, तो प्रोटीन और फाइबर से भरपूर डाइट लें. लंबे समय तक खाली पेट न रहें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, मीठे के हेल्दी ऑप्शन चुनें और रोज 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें. मीठा खाने की इच्छा हमेशा खराब नहीं होती, लेकिन अगर यह बार-बार और अनकंट्रोल हो जाए, तो यह शरीर के किसी असंतुलन का संकेत हो सकती है. सही खानपान, अच्छी नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है.
महाकुंभ वाले IITian बाबा ने शादी की:इंजीनियर पत्नी कर्नाटक की, दोनों हिमाचल में रह रहे; झज्जर में परिवार से मिलने पहुंचे

प्रयागराज महाकुंभ मेले में फेमस हुए IITian बाबा अभय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लंबे समय बाद सोमवार को वह झज्जर में स्पॉट हुए। वो भी अकेले नहीं पत्नी के साथ। उन्होंने खुलासा किया कि दोनों ने 15 फरवरी को शिवरात्रि के मौके पर हिमाचल के अघंजर मंदिर में शादी कर ली। उसके बाद 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज भी की। भगवा कपड़े पहने अभय सिंह एडवोकेट पिता के चैंबर में आए। यहां दैनिक भास्कर एप की टीम से बातचीत में उन्होंने कहा- “हम दोनों अपनी जिंदगी से खुश हैं। फिलहाल सादगी से रह रहे हैं। अध्यात्म की तरफ रुझान होने से पहले कभी मैं भी इस चैंबर में बैठकर पिता की एप्लीकेशन चेक कर लेता था। पत्नी मूलरूप से कर्नाटक की हैं। वह भी इंजीनियर हैं। हम हिमाचल के धर्मशाला में रह रहे हैं।” अभय सिंह मूलरूप से झज्जर के सासरौली गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता कर्ण सिंह वकील हैं और झज्जर बार एसोसिएशन के प्रधान भी रह चुके हैं। बॉम्बे IIT से एयरो स्पेस इंजीनियरिंग करने वाले अभय सिंह प्रयागराज महाकुंभ में संन्यासी वेश में नजर आने के बाद देश-विदेश में चर्चा में आए। जानिए IITian बाबा और उनकी पत्नी ने शादी को लेकर क्या बताया…. चैंबर में केस स्टडी करने आता था अभय सिंह ने कहा- आज पिताजी के चैंबर में आकर अच्छा लगा। मैं पहले भी यहां आकर एप्लीकेशन चेक करता था। मुझे अध्यात्मिकता का सच समझ में आ गया था, लेकिन ये नहीं था कि आगे क्या करना है। जब घर पर अकेला होता था तो सोचता था कि चैंबर में जाकर कुछ कर लेता हूं। यहां आकर मैं स्टडी करता रहता था कि कौन सा केस कैसे लगता है। 15 फरवरी को मंदिर, 19 को कोर्ट मैरिज की शादी को लेकर अभय सिंह ने कहा कि ऐसे छिपाने वाली कोई बात नहीं थी। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर हिमाचल के अघंजर महादेव मंदिर में जाकर शादी की। इसके बाद 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज की। पत्नी ही आज मुझे यहां लेकर आई हैं। बैंक में KYC भी करानी थी। पत्नी बोलीं- सनातन यूनिवर्सिटी बनाएंगे अभय की पत्नी प्रतीका ने कहा- अभय काफी सरल नेचर के हैं। वो बेहद ईमानदार और सच्चे इंसान हैं। मैं कर्नाटक से हूं और इनसे एक साल पहले मिलीं थी। मैंने इंजीनियरिंग कर रखी है। अब हम सनातन को आगे बढ़ाने में काम करेंगे। हम विचार कर रहे हैं कि आगे चलकर सनातन यूनिवर्सिटी बनाए। यहां अध्यात्म से जुड़े गुरु, साधक एक जगह पर यूनाइट करने की कोशिश है। हम झज्जर में सास-ससुर और परिवार वालों से मिलने आए हैं। अब अभय सिंह के इंजीनियर से संन्यासी बनने की कहानी जानिए… कोचिंग के लिए कोटा की जगह दिल्ली गए अभय सिंह का जन्म झज्जर के सासरौली गांव में हुआ। वह ग्रेवाल गोत्र के जाट परिवार में जन्मे। अभय ने शुरुआती पढ़ाई झज्जर जिले से की। पढ़ाई में वह बहुत होनहार थे। इसके बाद परिवार उन्हें IIT की कोचिंग के लिए कोटा भेजना चाहता था। मगर, अभय ने दिल्ली में कोचिंग लेने की बात कही। IIT बॉम्बे में पढ़ाई, कनाडा में काम किया कोचिंग के बाद अभय ने IIT का एग्जाम क्रैक कर लिया। जिसके बाद उन्हें IIT बॉम्बे में एडमिशन मिल गया। अभय ने वहां से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री ली। इसके बाद डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री की। अभय की छोटी बहन कनाडा में रहती है। पढ़ाई पूरी करने के बाद परिवार ने उन्हें अच्छे फ्यूचर के लिए कनाडा भेज दिया। कनाडा में अभय ने कुछ समय एरोप्लेन बनाने वाली कंपनी में काम भी किया। जहां उन्हें 3 लाख सेलरी मिलती थी। लॉकडाउन की वजह से कनाडा में फंसे 2021 में कनाडा में लॉकडाउन लग गया। जिस वजह से अभय भी कनाडा में ही फंस गए। जब लॉकडाउन हटा तो अभय भारत लौट आए। यहां आने के बाद वह अचानक फोटोग्राफी करने लगे। अभय सिंह को घूमने का भी शौक रहा, इसलिए वह केरल गए। उज्जैन कुंभ में भी गए थे। 2024 में अभय सबके संपर्क से बाहर हो गए। परिवार ने बहुत कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई। परिवार का नंबर तक ब्लॉक कर दिया। इसके बाद 2025 में वह महाकुंभ से चर्चा में आए।
तमिल इलेक्शन में नंबर गेम या 69 प्रतिशत नट? किसी दल ने भी क्यों नहीं निकाला ब्राह्मण प्रत्याशी, जानें वजह

तमिल की सूची में इस बार बड़ा उल्टेफेर देखने को मिल रहा है। आगामी चुनाव के मद्देनजर ना सिर्फ डीएमके और कांग्रेस बल्कि एआईएडीएमके और बीजेपी तक ने किसी भी ब्राह्मण को अपना हित नहीं बनाया है। करीब साढ़े तीन दशक में पहली बार ऐसा हुआ जब अन्नाद्रमुक ने किसी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया। द्रविड़ आंदोलन का कितना प्रभावद्रविड़ आंदोलन के दक्षिण के इस राज्य में ब्राह्मण राजनीति ना सिर्फ हाशिए पर चली गई है बल्कि इस बार चुनावों में प्रमुख आश्रमों ने ब्राह्मणों को टिकटें बांटने से भी मना कर दिया है और ब्राह्मणों का समर्थन हासिल करने वाली बीजेपी ने भी पार्टी बना ली है। बीजेपी ने अपने कोटे की 27 विधानसभा सीटों में से किसी भी सीट पर ब्राह्मणों की प्रतिष्ठा घोषित नहीं की है। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि ये सब तमिलनाडु में ये घटिया प्रतिभाएं का नतीजा है या फिर मजबूरी है। बता दें कि तमिल के 234 विधानमंडलों में भारतीय गठबंधन में डीएमके 164 और कांग्रेस 28 के प्राइमरी चुनावों में लड़ाई जारी है, लेकिन दोनों में से किसी ने भी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया। इसके अलावा उनके सहयोगी लेफ्ट, वीसीके और मुस्लिम लीग ने भी किसी ब्राह्मण पर भरोसा नहीं किया। विपक्षी गठबंधन में अन्नाद्रमुक 178 रिपब्लिकन उम्मीदवार 27 और अन्य 18 रिपब्लिकन उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, लेकिन एक भी सीट पर ब्राह्मण उम्मीदवार को नहीं उतारा गया है। बिजनेसमैन की पार्टी ने भी बनाई दूरीदिलचस्प बात यह है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनके निधन के करीब 10 साल बाद भी उनकी पार्टी ने किसी भी ब्राह्मण को मैदान में नहीं उतारा। एआईएडीएमके ने 2021 में ब्राह्मण समाज से आने वाले पूर्व पुलिस गोदाम और नटराज को उम्मीदवार बनाया था, इस बार भी टिकट नहीं दिया गया। ब्राह्मणों ने टिकटें निकालींअभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कजगम (टीवीके) ने 2 ब्राह्मण दावेदारों को मैदान में उतारा। इसके अलावा तमिल राष्ट्रवादी नेता सीमान की पार्टी के नाम तमिलर दास ने 6 ब्राह्मणों के टिकट दिए हैं। इन दोनों ने ही मायलापुर और श्रीरंगम जैसे इलाक़ों को चुना है, जहाँ ब्राह्मण चर्च की संख्या सबसे ज़्यादा है। एनईटीके द्वारा 6 ब्राह्मणों को मैदान में पीछे के सिद्धांतों का कहना है कि सरटेन ने तमिलनाडु में पेरियार-विरोधी रुख अपनाया है। आरएसएस से जुड़े एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि वो द्रविड़ दीवार को गिराने का काम करेंगे। वे अपने राजनीतिक अनुसंधान में भी जाति और पहचान का फ्रैंक का उपयोग करते हैं। क्या कहते हैं राजनीतिक पंडितटाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक अरुण जेटली का कहना है कि अन्नाद्रमुक ने कई दशकों तक ब्राह्मण समाज का समर्थन किया, लेकिन हाल ही में इसमें बदलाव आया है। व्यापारियों के निधन के बाद ब्राह्मण ईसाइयों का गुट भाजपा के पक्ष में हुआ। इसके चलते एआईएडीएमके ने ही ब्राह्मणों से दूरी बना ली है, लेकिन बीजेपी के संयोजक बनने की वजह से लोग जरूर चिंतित हैं। ब्राह्मणों की सूचीतमिल की कुल सूची में ब्राह्मणों की दुकान मात्र 3 प्रतिशत है। वेबसाइटों की संख्या अधिक है। मुथुरैयर, थेवर, वन्नियार और गौंडर। कम संख्या में ब्राह्मणों को वोट बैंक के रूप में देखा नहीं गया। इसके अलावा राज्य में 69 प्रतिशत शून्य लागू है। विचारधारा ने अपनी राजनीति को ओबीसी और विचारधारा के उद्घोषणा के साथ जोड़ा- गिरफ़्तार है। द्रविड़ राजनीति में ब्राह्मणों को आर्य या बाहरी माना जाता है, जबकि गैर-ब्राह्मणों को मूल द्रविड़ माना जाता है। यही कारण है कि किसी भी ब्राह्मण नेता के लिए खुद को तमिल हितों की रक्षा साबित करना आपके लिए एक बड़ी चुनौती है। ये भी पढ़ें पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ‘बंगाल के लोगों को भूख लगती है मोदी सरकार’, केंद्र पर अभिषेक बनर्जी ने कहा- झूठ बोला तो दो मुझे जेल भेज दिया (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)टीएन चुनाव 2026(टी)डीएमके(टी)कांग्रेस(टी)ब्राह्मण उम्मीदवार(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी(टी) डीएमके(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)ब्राह्मण(टी)प्रत्याशी(टी)द्रविड़
छिंदवाड़ा में मर्सी हॉस्पिटल में लगा ताला:मरीज शिफ्ट, सुधार के बाद ही खुलेगा अस्पताल, CMHO ने जारी किया है पत्र

छिंदवाड़ा: शहर में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खजरी रोड स्थित मर्सी हॉस्पिटल (अम्मा अस्पताल) का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। यह सख्त कदम मरीज स्वर्गीय श्रीमती साक्षी शर्मा के उपचार में लापरवाही की शिकायत की विस्तृत जांच के बाद उठाया गया है। आज सोमवार को अस्पताल को पूरी तरह बंद कर दिया गया और वहां भर्ती सभी मरीजों को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया। शिकायत के बाद बनी जांच टीम मामले में विशाल शर्मा द्वारा सीएम हेल्पलाइन पोर्टल और ई-मेल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग ने दो सदस्यीय जांच दल गठित किया। इस दल में जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. धीरज दवंडे और जिला चिकित्सालय की स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता पाठक को शामिल किया गया। जांच में सामने आई गंभीर स्थिति जांच के दौरान सामने आया कि 25 वर्षीय साक्षी शर्मा गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से पीड़ित थीं और 8 दिसंबर 2025 से उनका उपचार चल रहा था। अल्ट्रासाउंड में पॉलीहाइड्रामिनियोस की स्थिति पाई गई थी, जिससे गर्भावस्था पहले से ही हाई रिस्क मानी जा रही थी। 15 दिसंबर को मरीज का ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ गया, भ्रूण की हलचल कम हो गई और लीकिंग की समस्या सामने आई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। इसके बाद 17 दिसंबर की रात को मरीज की हालत बिगड़ने पर इमरजेंसी सीजेरियन ऑपरेशन किया गया, जिसमें बच्चे का जन्म हुआ। ऑपरेशन के बाद मरीज को ब्लड चढ़ाने की सलाह दी गई थी। इलाज में भारी लापरवाही उजागर जांच रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन की कई गंभीर खामियां सामने आईं। सबसे अहम बात यह रही कि अस्पताल में मरीज की निगरानी के लिए कोई भी RMO (रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर) या इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर मौजूद नहीं था। पूरी जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ के भरोसे थी। तड़के करीब 5 बजे जब मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ी, तब एनेस्थीसिया विशेषज्ञ को बुलाया गया और इसके बाद मरीज को हायर सेंटर रेफर किया गया। इसके अलावा अस्पताल में ICU सुविधा का अभाव और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी पाई गई, जिसे गंभीर लापरवाही माना गया। नियमों का उल्लंघन, तत्काल बंद करने के आदेश जांच में पाई गई कमियों को मध्यप्रदेश उपचर्यागृह एवं रुजोपचार संबंधी स्थापना अधिनियम 1973 एवं संशोधित नियम 2021 का उल्लंघन माना गया। इसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी कर दिए। मरीजों को शिफ्ट, नई भर्ती पर रोक विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अस्पताल में नए मरीजों की भर्ती पूरी तरह बंद रहेगी। साथ ही पहले से भर्ती मरीजों को 3 दिनों के भीतर अन्य अस्पतालों या जिला चिकित्सालय में शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए थे। अपडेट के अनुसार, सोमवार को सभी मरीजों को सुरक्षित अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया है। सुधार कार्य में जुटा अस्पताल प्रबंधन सीएमएचओ द्वारा जारी नोटिस में जिन कमियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें दूर करने के लिए अस्पताल प्रबंधन अब सुधार कार्य में जुट गया है। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद ही अस्पताल को दोबारा संचालन की अनुमति दी जाएगी। चेतावनी: नियम तोड़े तो होगी सख्त कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि औचक निरीक्षण के दौरान अस्पताल संचालित पाया गया, तो प्रबंधन के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
असम विधानसभा चुनाव 2026: ‘महिलाओं को मिलेगा ‘नियत’, सरकार ने बुलाया संसद का विशेष सत्र, असम से पीएम मोदी ने किया बड़ा ऐलान

असम के बारापेटा में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि असम में शांति के लिए कई बलिदान दिए गए हैं, ऐसे में शांति बनाए रखने के लिए कांग्रेस को दूर रखना होगा। मोदी ने कहा कि कांग्रेस की जमीन पर जज़बे समाज को धोखा था। हमारी सरकार ज्यूबियन क्षेत्र का विकास कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि हमारी सरकार सत्यनिष्ठा से परम शांति ला पाई है। 16 अप्रैल से सरकार ने संसद का सत्र बुलाया-प्रधानमंत्री मोदीमहिला नटखट को लेकर मोदी ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि नारी वंदन अधिनियम पारित किया गया है। 2029 के आम चुनाव में महिलाओं को नामांकन मिलना चाहिए। इसके लिए 16 अप्रैल से सरकार ने संसद का सत्र बुलाया है। कुछ लोग प्रकरण लेकर भम्र फैलाए हुए हैं। इस बिल से किसी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा. पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत में महिलाओं की पूरी भूमिका होनी चाहिए। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि दक्षिण के राज्य से इस महिला शीर्षक संशोधन बिल को किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि दक्षिण से आने वाले पैनल को इस बात का खतरा था कि कहीं ऐसा न हो कि वहां की सदस्यता में कोई कमी हो जाए। मोदी ने कांग्रेस पर ज़ोरदार संरचनात्मक ढांचा तैयार कियाकांग्रेस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार किसानों के हक का पैसा बिचौलियों को लूटा करती थी, लेकिन भाजपा सरकार किसानों के हित में निर्णय लेती है। उन्होंने आगे कहा कि देश के लिए सिर्फ एक दूसरे की सरकार कांग्रेस की सरकार है। जनता कांग्रेस के पास रिपोर्ट कार्ड लेकर नहीं आती, जबकि बीजेपी की सरकार अपना रिपोर्ट कार्ड बताती है। बीजेपी जो कहती है वो करके जाना है. असम में बीजेपी और सरकार की हैट्रिक-मोदीपीएम मोदी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों से असम में शांति है और असम की पहचान अब दुनिया में कायम हो रही है। उन्होंने आगे कहा कि हमारा संकल्प देश को विकसित करना है। हिंदुस्तान को आत्मनिर्भर बनाना है। कांग्रेस के शाही परिवार के नामदार जो दिल्ली में बैठे हैं, उनके हार का सेंचुरी असम के लोग स्थापित होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि असम बीजेपी और सरकारी नौकरी की हैट्रिक। ये भी पढ़ें ईरान ने अमेरिका की दुखती नस को खलासी, स्याह की लड़की वाली खतरनाक पर वीडियो शेयर कर याद करें ऑपरेशन ईगल क्लॉक (टैग्सटूट्रांसलेट)असम(टी)असम विधानसभा चुनाव(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)पीएम मोदी(टी)असम(टी)बारापेटा(टी) पीएम मोदी(टी)कांग्रेस(टी)विधानसभा चुनाव(टी)महिला नताशा(टी)संसद









