Sunday, 13 Sep 2026 | 11:06 AM

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'द अलायंस' में सलमान खान की एंट्री:भाई को देखकर इमोशनल हुए सोहेल खान, गले लगाकर सलमान ने पूछा, 'क्या भाई?'

'द अलायंस' में सलमान खान की एंट्री:भाई को देखकर इमोशनल हुए सोहेल खान, गले लगाकर सलमान ने पूछा, 'क्या भाई?'

प्राइम वीडियो के शो ‘द अलायंस’ के आने वाले एपिसोड के नए प्रोमो में सलमान खान की घर में एंट्री दिखाई गई। इस दौरान उन्होंने डेनिम शर्ट, चारकोल ट्राउजर और काउबॉय हैट पहनी हुई थी। सलमान के आते ही कंटेस्टेंट्स खुशी और हैरानी से भर गए। सोहेल खान अपने भाई सलमान खान को देखकर सबसे ज्यादा हैरान नजर आए। उनके चेहरे के भाव हैरानी से खुशी में बदल गए और वह सलमान को गले लगाने के लिए आगे बढ़े। सलमान ने उन्हें गले लगाते हुए मुस्कुराकर पूछा, ‘क्या भाई?’ सोहेल के सपोर्ट के लिए पहुंचे सलमान प्रोमो के मुताबिक, सलमान की एंट्री उस समय हुई, जब सोहेल खान पूर्व पत्नी सीमा सचदेह के शो से बाहर होने और ग्रोइन में चोट लगने के बाद ‘अलायंस’ हाउस में उदास महसूस कर रहे थे। हाल के एपिसोड में सोहेल खान ने खुद को एलिमिनेशन के लिए नॉमिनेट किया था। उन्होंने कहा कि चोट की वजह से वह टास्क में योगदान नहीं दे पाए, जबकि दूसरे कंटेस्टेंट चोटिल होने के बावजूद मुकाबला कर रहे थे। उन्हें लगा कि वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। सलमान खान की ‘अलायंस’ हाउस में एंट्री वाला एपिसोड आज यानी रविवार को प्रीमियर होने की उम्मीद है। सोहेल ने सीमा की तारीफ की थी रियलिटी गेम शो ‘अलायंस’ को कुणाल खेमू होस्ट कर रहे हैं। शो में रिश्तों और दोस्ती के समीकरण हर दिन बदलते रहते हैं। यह शो प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रहा है, जिसमें फिल्म और टीवी कलाकारों के साथ कई इंफ्लुएंसर्स भी हिस्सा ले रहे हैं। इसमें सोहेल खान, मिनी माथुर, कुशाल टंडन और नीति टेलर शामिल हैं। शो में सीमा सचदेह की वाइल्ड कार्ड एंट्री हुई थी। वहीं, जब शो में सीमा की एंट्री हुई, तब सोहेल ने उनकी तारीफ की थी। उस दौरान होस्ट कुणाल ने सोहेल से सीमा को लेकर सवाल किया था, जिस पर उन्होंने अपनी शादी और रिश्ते को लेकर खुलकर बात की थी। कुणाल खेमू ने पूछा था कि सीमा को शो में देखकर उन्हें कैसा लग रहा है। इस पर सोहेल खान ने कहा था कि उन्होंने सीमा के साथ अपनी जिंदगी के 25 साल बिताए हैं। उन्होंने सीमा को एक खूबसूरत और अच्छे दिल वाली महिला बताया। सोहेल ने यह भी कहा था कि अगर उनके रिश्ते में कभी कोई गलती हुई होगी, तो वह उनकी तरफ से हुई होगी। शो में सोहेल खान और सीमा के बीच बातचीत और बॉन्डिंग देखकर अन्य प्रतियोगियों ने तालियां बजाकर दोनों का हौसला बढ़ाया था। सोहेल और सीमा ने भागकर शादी की थी सोहेल और सीमा की पहली मुलाकात चंकी पांडे की सगाई की पार्टी में हुई थी। सोहेल पहली नजर में ही सीमा को दिल दे बैठे। जल्द ही दोनों ने एक-दूसरे को डेट करना शुरू कर दिया। लेकिन अलग-अलग धर्म होने की वजह से सीमा का परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। परिवार के विरोध के बावजूद दोनों ने साथ रहने का फैसला किया। 15 मार्च 1998 को, जिस दिन सोहेल की पहली डायरेक्टेड फिल्म ‘प्यार किया तो डरना क्या’ रिलीज हुई, उसी दिन दोनों ने घर से भागकर शादी कर ली। पहले आर्य समाज मंदिर में फेरे लिए और फिर निकाह किया। उनका पहला बेटा निर्वाण 2000 में और दूसरा बेटा योहान 2011 में हुआ। दोनों 2022 में अलग हो गए।

मलेशिया में पाकिस्तानी के साथ पकड़ी पंजाबी युवती गायब:नानी बोली- फोन बंद, मां की मौत हो चुकी; मोगा के युवकों ने थप्पड़ मारे थे

मलेशिया में पाकिस्तानी के साथ पकड़ी पंजाबी युवती गायब:नानी बोली- फोन बंद, मां की मौत हो चुकी; मोगा के युवकों ने थप्पड़ मारे थे

मलेशिया में पाकिस्तान के युवक के साथ पकड़ी गई मोगा की लड़की गायब हो गई है। पंजाब में रह रही लड़की की नानी ने दोहती को वापस लाने की गुहार लगाई है। नानी का एक वीडियो भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि इसकी मां की मौत हो चुकी है और उसने ही इसे पालकर बड़ा किया है। उन्होंने कहा कि दोहती की इच्छा विदेश जाने की थी, इसलिए उसे 3 साल पहले ही विदेश भेजा था। उसे नहीं पता है कि वह वहां किसके साथ रह रही है। उन्होंने सोचा था कि दोहती विदेश जाकर कमाएगी तो इसके बाद उसकी शादी अच्छे घर में कर देंगे। अब उन्हें लोगों से पता चला है कि उसके साथ वहां कुछ लड़कों ने पाकिस्तानी के साथ घूमने के चलते पिटाई की है। घटना वाले दिन से दोहती गायब है और उसके साथ कोई भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्हें डर है कि उसके साथ कुछ अनहोनी घटना न हुई हो। हाईवे पर घेरकर थप्पड़ मारे थे 2 दिन पहले मलेशिया के एक हाईवे पर पंजाबी युवती के साथ बीच सड़क मारपीट का VIDEO सोशल मीडिया पर सामने आया था। इसमें कुछ पंजाबी युवक युवती को घेरकर उससे बहस करते हैं, थप्पड़ मारते हैं और उसके साथ मौजूद पाकिस्तानी युवक से भी धक्का-मुक्की करते दिखाई देते हैं। वीडियो शेयर करने वाले युवकों का दावा था कि युवती पंजाब के मोगा की रहने वाली है और मलेशिया में पाकिस्तानी युवक के साथ रह रही थी। वे उसे भारत डिपोर्ट करने की मांग करते भी दिखाई देते हैं। झगड़े के बाद मलेशिया पुलिस ने पूछताछ के लिए उठाया हाईवे पर लड़ाई-झगड़े के वीडियो के बाद मलेशिया पुलिस ने सभी लड़कों को पैसे के विवाद में पूछताछ के लिए उठा लिया है। वीडियो में लड़के पाकिस्तानी लड़के के साथ हैप्पी नामक पंजाबी लड़के से पैसे का लेन-देन बता रहे थे। अभी मलेशिया पुलिस युवकों से पूछताछ कर रही है। रूबीना की टीम ने की पुलिस को शिकायत मलेशिया में समाजसेवी संस्था चला रही पंजाबी महिला रूबीना ने लड़की के गायब होने की शिकायत मलेशिया पुलिस को कर दी है। रूबीना ने शिकायत को लेकर वीडियो जारी कर कहा कि मोगा की रहने वाली लड़की चाहे पंजाबियों के कब्जे में है या फिर पाकिस्तानी या बंगलादेशियों के, उसे सही सलामत उनकी संस्था के हवाले कर दें ताकि उसे पंजाब पहुंचाया जा सके। रूबीना ने कहा कि लड़की का फोन भी बंद आ रहा है, इसके चलते उसके साथ कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।

ईरान बोला- अमेरिका अपने मकसद में नाकाम रहा:जंग की तैयारी और तेज करेंगे, सऊदी ने US से हमले टालने को कहा

ईरान बोला- अमेरिका अपने मकसद में नाकाम रहा:जंग की तैयारी और तेज करेंगे, सऊदी ने US से हमले टालने को कहा

ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री माजिद इब्न अल-रेजा ने कहा कि अमेरिका अपने सैन्य मकसद पूरे नहीं कर पाया है। लेकिन इससे ईरान को ढील नहीं देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को भविष्य की जंग के लिए और तेजी से तैयारी करनी होगी। माजिद ने कहा, दुश्मन अपने मकसद में नाकाम रहा है, लेकिन हमें लापरवाह नहीं होना चाहिए। जंग की तैयारी, नई तकनीक और रक्षा क्षमता को पहले से ज्यादा तेजी से बढ़ाना होगा। रक्षा मंत्री ने स्पेस टेक्नोलॉजी, इंटेलिजेंस, कम लागत में हथियार बनाने और रक्षा उद्योग को मजबूत करने को सरकार की प्राथमिकता बताया। उधर, एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से फोन पर बात की। उन्होंने ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य हमले पर चिंता जताई और ट्रम्प से संयम बरतने के साथ इस योजना को टालने की अपील की। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

‘तुम जैसे सिंगर से ऐसी उम्मीद नहीं थी’:‘चांद सिफारिश’ के आलाप में ऑटो-ट्यून वाली बात पर ललित पंडित ने शान को डांटा था

‘तुम जैसे सिंगर से ऐसी उम्मीद नहीं थी’:‘चांद सिफारिश’ के आलाप में ऑटो-ट्यून वाली बात पर ललित पंडित ने शान को डांटा था

गुरु पूर्णिमा के मौके पर सिंगर शान का नया साईं भजन ‘साई नाम सांचा’ रिलीज हुआ है। इसे संगीतकार ललित पंडित ने कंपोज किया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में शान ने अपने गुरु, मां से जुड़ी साईं बाबा की यादें, ललित पंडित के साथ काम करने के किस्से, AI के बढ़ते असर और अपने बेटों के म्यूजिक करियर पर बात की। सवाल: गुरु पूर्णिमा के मौके पर सबसे पहले आपके गुरु के बारे में जानना चाहेंगे। आपकी जिंदगी में सबसे बड़ा गुरु कौन रहा है? जवाब: मेरे कई गुरु रहे हैं, लेकिन अगर एक नाम लेना हो तो उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान साहब का लूंगा। मैंने उनसे संगीत की तालीम ली। आज भी उनके परिवार से सीखना जारी है। मैं जो भी गा पा रहा हूं, वह उन्हीं की देन है। सवाल: आपने कहा कि जो कुछ सीखा, वह गुरु की देन है। क्या अब तक उनकी गुरु दक्षिणा चुका पाए हैं? जवाब: बिल्कुल नहीं। मैं आज तक कोई खास गुरु दक्षिणा नहीं दे पाया। मेरे लिए सबसे बड़ी गुरु दक्षिणा यही होगी कि मेरी गायकी हर दिन बेहतर होती रहे। अगर गुरुजी मुझे कहीं से सुन रहे होंगे, तो यही चाहेंगे कि मैं और मेहनत करूं और अच्छा गाऊं। सवाल: इसी गुरु पूर्णिमा पर आपका साईं भजन भी रिलीज हुआ है। आपने बताया था कि आपकी मां साईं बाबा में बहुत आस्था रखती थीं। यह भजन गाते वक्त उनकी कौन-सी याद सबसे ज्यादा आई? जवाब: मेरी मां बहुत ज्यादा धार्मिक नहीं थीं, लेकिन साईं बाबा में उनकी गहरी आस्था थी। हर गुरुवार हम दोनों साईं मंदिर जाते थे और अगरबत्ती जलाते थे। उस समय हमारी जिंदगी बहुत साधारण थी। यह भजन गाते समय वही पल याद आए। मां की याद के साथ साईं मंदिरों की याद भी ताजा हो गई। सवाल: इस भजन की रिकॉर्डिंग का किस्सा क्या है? जवाब: मैं जापान छुट्टियों पर जाने वाला था। तभी ललित जी का फोन आया। उन्होंने कहा कि अगर अभी रिकॉर्ड नहीं किया तो बात रह जाएगी। मैं तुरंत स्टूडियो पहुंचा, अपनी लाइनें रिकॉर्ड कीं और चला गया। उस दिन मेरी आवाज पूरी तरह ठीक नहीं थी, इसलिए चार लाइनें गाने में काफी मेहनत करनी पड़ी। पूरा गाना तैयार हुआ तो बहुत खुशी हुई। सवाल: आपने ललित पंडित के साथ कई सुपरहिट गाने गाए हैं। उनके साथ काम करने का अनुभव बाकी संगीतकारों से कितना अलग होता है? जवाब: उनके साथ काम करना हमेशा खास होता है। उन्होंने मुझसे हर तरह के गाने गवाए हैं। टेक्नोलॉजी आगे बढ़ गई है, लेकिन ललित जी आज भी शुद्ध गायकी पर भरोसा करते हैं। उनके साथ रिकॉर्डिंग करना ऐसा लगता है जैसे फिर से स्कूल पहुंच गए हों। सवाल: फिल्म ‘फना’ के गीत ‘चांद सिफारिश’ की रिकॉर्डिंग के दौरान ऑटो-ट्यून को लेकर क्या हुआ था? जवाब: गाने की शुरुआत में जो आलाप है, उसे रिकॉर्ड करने के बाद ललित जी को लगा कि उसे और बेहतर किया जा सकता है। मैंने मजाक में कहा कि ट्यूनर से ठीक कर दीजिए। यह सुनते ही ललित जी बोले, ‘तुम जैसे सिंगर से ऐसी बात की उम्मीद नहीं थी।’ फिर मैं तुरंत स्टूडियो पहुंचा और पूरा आलाप दोबारा रिकॉर्ड किया। सवाल: जतिन-ललित के साथ काम करते हुए आपने सबसे बड़ी सीख क्या ली? जवाब: मेरे शुरुआती गानों से लेकर आज तक प्लेबैक सिंगिंग की बहुत सारी बारीकियां मैंने उन्हीं से सीखी हैं। मैं उनके 90 के दशक के संगीत का बड़ा प्रशंसक हूं। आज भी उनके काम का फैन हूं। सवाल: अब AI भी म्यूजिक इंडस्ट्री का हिस्सा बनता जा रहा है। इसे आप किस नजरिए से देखते हैं? जवाब: AI एक अच्छा रेफरेंस टूल हो सकता है, लेकिन उसे पूरी तरह क्रिएटिव काम का विकल्प नहीं बनाना चाहिए। मैंने अपने कुछ म्यूजिक वीडियो AI की मदद से बनाए हैं, लेकिन गाने का संगीत और रिकॉर्डिंग पूरी तरह असली है। AI समय और पैसा बचाता है, लेकिन इससे कई लोगों का रोजगार प्रभावित हो रहा है। आने वाले समय में यह बड़ा मुद्दा बन सकता है। सवाल: ललित पंडित की अगली पीढ़ी के काम को कैसे देखते हैं? जवाब: मैंने रोहांश और अबीर को बचपन से देखा है। दोनों संस्कारी, मेहनती और प्रतिभाशाली हैं। संगीत उन्हें विरासत में मिला है। मुझे वे अपने बच्चों जैसे लगते हैं। सवाल: आपके दोनों बेटे भी म्यूजिक में हैं। इस समय वे क्या कर रहे हैं? जवाब: मेरे दोनों बेटे संगीत से जुड़े हैं। छोटे बेटे माही ने फिल्मों के लिए गाने गाए हैं। बड़ा बेटा सोहम म्यूजिक प्रोड्यूसर और म्यूजिक डायरेक्टर है। वह ‘नेवर सोबर’ नाम से काम करता है और ज्यादातर पर्दे के पीछे रहकर संगीत बनाता है। दोनों बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।

‘तुम जैसे सिंगर से ऐसी उम्मीद नहीं थी’:‘चांद सिफारिश’ के आलाप में ऑटो-ट्यून वाली बात पर ललित पंडित ने शान को डांटा था

‘तुम जैसे सिंगर से ऐसी उम्मीद नहीं थी’:‘चांद सिफारिश’ के आलाप में ऑटो-ट्यून वाली बात पर ललित पंडित ने शान को डांटा था

गुरु पूर्णिमा के मौके पर सिंगर शान का नया साईं भजन ‘साई नाम सांचा’ रिलीज हुआ है। इसे संगीतकार ललित पंडित ने कंपोज किया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में शान ने अपने गुरु, मां से जुड़ी साईं बाबा की यादें, ललित पंडित के साथ काम करने के किस्से, AI के बढ़ते असर और अपने बेटों के म्यूजिक करियर पर बात की। सवाल: गुरु पूर्णिमा के मौके पर सबसे पहले आपके गुरु के बारे में जानना चाहेंगे। आपकी जिंदगी में सबसे बड़ा गुरु कौन रहा है? जवाब: मेरे कई गुरु रहे हैं, लेकिन अगर एक नाम लेना हो तो उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान साहब का लूंगा। मैंने उनसे संगीत की तालीम ली। आज भी उनके परिवार से सीखना जारी है। मैं जो भी गा पा रहा हूं, वह उन्हीं की देन है। सवाल: आपने कहा कि जो कुछ सीखा, वह गुरु की देन है। क्या अब तक उनकी गुरु दक्षिणा चुका पाए हैं? जवाब: बिल्कुल नहीं। मैं आज तक कोई खास गुरु दक्षिणा नहीं दे पाया। मेरे लिए सबसे बड़ी गुरु दक्षिणा यही होगी कि मेरी गायकी हर दिन बेहतर होती रहे। अगर गुरुजी मुझे कहीं से सुन रहे होंगे, तो यही चाहेंगे कि मैं और मेहनत करूं और अच्छा गाऊं। सवाल: इसी गुरु पूर्णिमा पर आपका साईं भजन भी रिलीज हुआ है। आपने बताया था कि आपकी मां साईं बाबा में बहुत आस्था रखती थीं। यह भजन गाते वक्त उनकी कौन-सी याद सबसे ज्यादा आई? जवाब: मेरी मां बहुत ज्यादा धार्मिक नहीं थीं, लेकिन साईं बाबा में उनकी गहरी आस्था थी। हर गुरुवार हम दोनों साईं मंदिर जाते थे और अगरबत्ती जलाते थे। उस समय हमारी जिंदगी बहुत साधारण थी। यह भजन गाते समय वही पल याद आए। मां की याद के साथ साईं मंदिरों की याद भी ताजा हो गई। सवाल: इस भजन की रिकॉर्डिंग का किस्सा क्या है? जवाब: मैं जापान छुट्टियों पर जाने वाला था। तभी ललित जी का फोन आया। उन्होंने कहा कि अगर अभी रिकॉर्ड नहीं किया तो बात रह जाएगी। मैं तुरंत स्टूडियो पहुंचा, अपनी लाइनें रिकॉर्ड कीं और चला गया। उस दिन मेरी आवाज पूरी तरह ठीक नहीं थी, इसलिए चार लाइनें गाने में काफी मेहनत करनी पड़ी। पूरा गाना तैयार हुआ तो बहुत खुशी हुई। सवाल: आपने ललित पंडित के साथ कई सुपरहिट गाने गाए हैं। उनके साथ काम करने का अनुभव बाकी संगीतकारों से कितना अलग होता है? जवाब: उनके साथ काम करना हमेशा खास होता है। उन्होंने मुझसे हर तरह के गाने गवाए हैं। टेक्नोलॉजी आगे बढ़ गई है, लेकिन ललित जी आज भी शुद्ध गायकी पर भरोसा करते हैं। उनके साथ रिकॉर्डिंग करना ऐसा लगता है जैसे फिर से स्कूल पहुंच गए हों। सवाल: फिल्म ‘फना’ के गीत ‘चांद सिफारिश’ की रिकॉर्डिंग के दौरान ऑटो-ट्यून को लेकर क्या हुआ था? जवाब: गाने की शुरुआत में जो आलाप है, उसे रिकॉर्ड करने के बाद ललित जी को लगा कि उसे और बेहतर किया जा सकता है। मैंने मजाक में कहा कि ट्यूनर से ठीक कर दीजिए। यह सुनते ही ललित जी बोले, ‘तुम जैसे सिंगर से ऐसी बात की उम्मीद नहीं थी।’ फिर मैं तुरंत स्टूडियो पहुंचा और पूरा आलाप दोबारा रिकॉर्ड किया। सवाल: जतिन-ललित के साथ काम करते हुए आपने सबसे बड़ी सीख क्या ली? जवाब: मेरे शुरुआती गानों से लेकर आज तक प्लेबैक सिंगिंग की बहुत सारी बारीकियां मैंने उन्हीं से सीखी हैं। मैं उनके 90 के दशक के संगीत का बड़ा प्रशंसक हूं। आज भी उनके काम का फैन हूं। सवाल: अब AI भी म्यूजिक इंडस्ट्री का हिस्सा बनता जा रहा है। इसे आप किस नजरिए से देखते हैं? जवाब: AI एक अच्छा रेफरेंस टूल हो सकता है, लेकिन उसे पूरी तरह क्रिएटिव काम का विकल्प नहीं बनाना चाहिए। मैंने अपने कुछ म्यूजिक वीडियो AI की मदद से बनाए हैं, लेकिन गाने का संगीत और रिकॉर्डिंग पूरी तरह असली है। AI समय और पैसा बचाता है, लेकिन इससे कई लोगों का रोजगार प्रभावित हो रहा है। आने वाले समय में यह बड़ा मुद्दा बन सकता है। सवाल: ललित पंडित की अगली पीढ़ी के काम को कैसे देखते हैं? जवाब: मैंने रोहांश और अबीर को बचपन से देखा है। दोनों संस्कारी, मेहनती और प्रतिभाशाली हैं। संगीत उन्हें विरासत में मिला है। मुझे वे अपने बच्चों जैसे लगते हैं। सवाल: आपके दोनों बेटे भी म्यूजिक में हैं। इस समय वे क्या कर रहे हैं? जवाब: मेरे दोनों बेटे संगीत से जुड़े हैं। छोटे बेटे माही ने फिल्मों के लिए गाने गाए हैं। बड़ा बेटा सोहम म्यूजिक प्रोड्यूसर और म्यूजिक डायरेक्टर है। वह ‘नेवर सोबर’ नाम से काम करता है और ज्यादातर पर्दे के पीछे रहकर संगीत बनाता है। दोनों बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।

एथेनॉल से पेट्रोल पर ₹30 प्रति लीटर की बचत हुई:सरकार का दावा- ब्लेंडिंग न होती तो दिल्ली में ₹125 लीटर मिलता, अभी ₹102 में मिल रहा

एथेनॉल से पेट्रोल पर ₹30 प्रति लीटर की बचत हुई:सरकार का दावा- ब्लेंडिंग न होती तो दिल्ली में ₹125 लीटर मिलता, अभी ₹102 में मिल रहा

क्रूड ऑयल की कीमतें जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में 135 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई थीं, तब अगर तेल कंपनियों ने पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग न की होती, तो दिल्ली में पेट्रोल का भाव लगभग 125 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया होता। शुक्रवार को पेट्रोलियम मंत्रालय ने एथेनॉल प्रोग्राम की लागत, खाद्य सुरक्षा पर असर और टैक्सपेयर्स की सब्सिडी से जुड़े दावों का जवाब देते हुए यह बात कही। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि संकट के समय पर इस प्रोग्राम की वजह से पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 30 रुपए की बचत हुई। दिल्ली में अभी 102 रुपए लीटर है E20 पेट्रोल पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक बाजार में क्रूड की कीमतें बढ़ने के बावजूद देश में उपभोक्ताओं को पेट्रोल 94.77 रुपए प्रति लीटर के भाव पर मिला। इसका कारण यह था कि पूर्व-निर्धारित कीमतों पर घरेलू स्तर पर खरीदे गए एथेनॉल की हर एक लीटर पेट्रोल में 20% हिस्सेदारी थी। इसी वजह से रिटेल कीमतें क्रूड के तेज उछाल से बची रहीं। 28 फरवरी को पश्चिमी एशिया में तनाव और संघर्ष शुरू होने के बाद, सरकार ने करीब 75 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा था। इसके बाद मई में दामों में 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। दिल्ली में फिलहाल मानक E20 पेट्रोल (91-ऑक्टेन) की कीमत 102.12 रुपए प्रति लीटर है, जबकि 100-ऑक्टेन वाला पेट्रोल 169 रुपए प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। गरीबों का अनाज या FCI का चावल डायवर्ट नहीं हुआ पेट्रोलियम मंत्रालय ने उन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि गरीबों के हक का खाद्यान्न एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट किया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस प्रोग्राम को चलाने या सपोर्ट देने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) के सब्सिडी वाले चावल का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। माइलेज पर कितना असर: 2 से 6% तक घट सकती है एफिशिएंसी सड़क परिवहन मंत्रालय ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के एक अध्ययन का हवाला दिया। गुरुवार को लोकसभा में जानकारी देते हुए मंत्रालय ने बताया कि E10 ईंधन के लिए डिजाइन की गई BS-III, BS-IV और BS-VI गाड़ियां जब E20 पर चलाई जाती हैं, तो उनकी कैपेसिटी और उम्र के हिसाब से माइलेज (फ्यूल एफिशिएंसी) में 2 से 6% तक की गिरावट आ सकती है। इससे पहले 20 जुलाई को तेल मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया था कि ऐसी गाड़ियों में माइलेज की यह कमी लगभग 3-5% तक ही सीमित रहती है। वैज्ञानिक जांच के बाद लागू हुआ E20 दोनों मंत्रालयों ने जोर देकर कहा कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम को पूरी तरह से वैज्ञानिक रूप से जांचे-परखे और चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। जैसे-जैसे देश में उत्पादन क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होता गया, ब्लेंडिंग के स्तर को भी धीरे-धीरे बढ़ाया गया। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में बताया कि E20 पर शिफ्ट होने का फैसला फ्यूल सिस्टम, इंजन की मजबूती, ड्राइवैबिलिटी, मटीरियल कम्पैटिबिलिटी और एमिशन परफॉर्मेंस की पूरी जांच और वैलिडेशन के बाद ही लिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वाहन निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और चीनी व अनाज उद्योग से लगातार सलाह-मशविरा किया गया। 23 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों पर कोई असर नहीं सरकार ने लैब स्टडीज और रियल-वर्ल्ड डेटा का हवाला देते हुए बताया कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से गाड़ियों की ओवरऑल परफॉर्मेंस पर कोई विपरीत या प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। सड़कों पर चल रही 20 करोड़ से ज्यादा टू-व्हीलर्स और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इन एथेनॉल-मिश्रित ईंधनों पर चल रही हैं। एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से इंजन खराब होने का कोई भी प्रामाणिक या सत्यापित मामला सामने नहीं आया है।

फिल्म फ्लॉप हुई तो रोती हुई घर गईं सोनाली सहगल:हिमांश कोहली ने कहा- ‘यारियां’ के बाद लगा, अब सब खत्म हो गया

फिल्म फ्लॉप हुई तो रोती हुई घर गईं सोनाली सहगल:हिमांश कोहली ने कहा- ‘यारियां’ के बाद लगा, अब सब खत्म हो गया

फिल्म ‘आर्य भट्ट का जीरो’ खुद पर भरोसा और सपनों के लिए संघर्ष की कहानी है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सोनाली सहगल, हिमांश कोहली और डायरेक्टर कमल चंद्रा ने ऐसे अनुभव साझा किए, जब लोगों ने उन पर भरोसा नहीं किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सोनाली ने बताया कि एक फिल्म के फ्लॉप होने के बाद वह कार में रोते हुए घर गई थीं। हिमांश ने कहा कि ‘यारियां’ के बाद लगातार फिल्में नहीं चलीं तो लगा कि करियर खत्म हो गया। सवाल: फिल्म का संदेश है कि खुद पर भरोसा सबसे जरूरी है। आपकी जिंदगी में ऐसा कब हुआ? जवाब/सोनाली सहगल: मेरे अंदर हमेशा आत्मविश्वास था, लेकिन मुझसे ज्यादा भरोसा मेरी मम्मी को था। उन्होंने मेरे मिस इंडिया बनने से पहले ही कहा था कि उनकी बेटी मिस इंडिया बनेगी। लोग हंसते थे, लेकिन उनका विश्वास कभी नहीं डगमगाया। आज मुझे लगता है कि परिवार का एक इंसान भी आप पर पूरा भरोसा करे, तो आधी लड़ाई वहीं जीत जाती है। इसलिए सेल्फ बिलीफ के साथ परिवार का भरोसा भी जरूरी है। सवाल: हिमांश, आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ था? जवाब/हिमांश कोहली: बचपन से मुझे फिल्मों का शौक था। जब लोगों से कहता था कि मुझे एक्टर बनना है, तो ज्यादातर लोग सपना छोड़ने की सलाह देते थे। स्कूल में मैंने झूठ बोल दिया कि मैं धारा तेल के विज्ञापन वाला बच्चा हूं। पूरे स्कूल ने भरोसा कर लिया, लेकिन बाद में सच सामने आ गया। इसके बाद मुझे बुलिंग झेलनी पड़ी। सीनियर्स मजाक उड़ाते थे और सजा भी देते थे। तभी मैंने तय किया कि सच में एक्टर बनकर दिखाऊंगा। सवाल: उस घटना ने आपको कितना बदला? जवाब/हिमांश कोहली: उस वक्त बहुत बुरा लगा था, लेकिन आज लगता है कि अगर वह घटना नहीं होती तो शायद मैं इतनी मेहनत नहीं करता। मैंने थिएटर शुरू किया, एक्टिंग सीखी और कई संस्थानों में ट्रेनिंग ली। मेरे माता-पिता ने हर कदम पर साथ दिया। आज पुराने दोस्त कहते हैं, ‘यार, तूने सच में अपना सपना पूरा कर लिया।’ सवाल: परिवार का साथ कितना जरूरी रहा? जवाब/हिमांश कोहली: अगर मेरे माता-पिता साथ नहीं देते तो मैं एक्टिंग की पढ़ाई नहीं कर पाता। उन्होंने सिर्फ पढ़ाई नहीं, मेरे सपने पर भी भरोसा किया। वही भरोसा मुझे यहां तक लेकर आया। सवाल: कमल जी, आपकी कहानी भी कुछ ऐसी ही है? जवाब/कमल चंद्रा: बिल्कुल। मैं इंजीनियर था। अच्छी नौकरी थी, लेकिन एक्टिंग वर्कशॉप के बाद लगा कि मुझे फिल्मों में काम करना है। मैंने चार सरकारी नौकरियां छोड़ दीं। रिश्तेदारों ने मना किया, लेकिन पिता ने कहा, ‘तूने मेरा सपना पूरा कर दिया, अब अपना सपना जी।’ उसी बात ने मुझे कभी पीछे मुड़कर नहीं देखने दिया। सवाल: हिमांश क्या आप भी अपने माता-पिता का कोई अधूरा सपना भी जी रहे हैं? जवाब/हिमांश कोहली: बिल्कुल। मेरी मां कलाकार बनना चाहती थीं। उन्हें गायन, पेंटिंग और अभिनय का शौक था, लेकिन कम उम्र में शादी होने से उनका सपना अधूरा रह गया। आज फिल्मों में काम करते हुए लगता है कि मैं अपना ही नहीं, मां का सपना भी पूरा कर रहा हूं। उन्होंने एक बार ऋषि कपूर और जितेंद्र से मिलने की इच्छा जताई थी। जब मैं उन्हें दोनों कलाकारों से मिलवा पाया तो लगा कि मेरी मेहनत सफल हो गई। उनके चेहरे की खुशी मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी। सवाल: कमल जी, आपकी जिंदगी का सबसे भावुक पल कौन-सा रहा? जवाब/कमल चंद्रा: मेरी पहली फिल्म के दौरान महेश भट्ट ने मेरे पिता से फोन पर मेरी तारीफ की थी। फोन कटने के बाद पापा की खुशी देखने लायक थी। उन्होंने कहा, “मुझे पता था, मेरा बेटा कुछ अच्छा करेगा।” माता-पिता की आंखों में अपने लिए गर्व देखना सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। सवाल: ‘आर्य भट्ट का जीरो’ की कहानी में ऐसी क्या बात थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब/हिमांश कोहली: मुझे ‘बग्गू’ का किरदार बहुत पसंद आया। वह सिखाता है कि जिंदगी मंजिल से भटका सकती है, लेकिन सपना और मेहनत नहीं छोड़ें तो एक दिन मंजिल जरूर मिलती है। हालात जैसे भी हों, उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे बड़ी सीख क्या मिली? जवाब/हिमांश कोहली: इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी टीम है। रवि किशन, राजेश शर्मा, गोपाल दत्त, नीरज सूद और बाकी कलाकारों के साथ बातचीत करना एक एक्टिंग स्कूल जैसा था। हर कलाकार अपने संघर्ष और अनुभव साझा करता था। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। सवाल: कमल जी, शूटिंग से जुड़ा कोई दिलचस्प किस्सा? जवाब/कमल चंद्रा: जिस घर में शूटिंग हुई, उसके मालिक बाद में उसे रेनोवेट करने वाले थे। लेकिन फिल्म पूरी होने के बाद उन्होंने फैसला बदल दिया। उन्हें लगा कि यह घर फिल्म की यादों से जुड़ गया है, इसलिए इसे जैसा है, वैसा ही रहने देना चाहिए। यह हमारे लिए बहुत खास पल था। सवाल: फिल्म का सबसे बड़ा संदेश क्या है? जवाब/कमल चंद्रा: हर इंसान जिंदगी में कभी न कभी खुद को ‘जीरो’ महसूस करता है। हमारी फिल्म कहती है कि खुद पर भरोसा और मेहनत बनी रहे, तो वही इंसान एक दिन हीरो बन सकता है। सवाल: सोनाली, आपने ‘आर्य भट्ट का जीरो’ के लिए हां क्यों कहा? जवाब/सोनाली सहगल: मेरे लिए किसी भी फिल्म में सबसे अहम उसकी कहानी होती है। कमल ने स्क्रिप्ट सुनाई तो उसमें बनावटीपन नहीं, बल्कि सच्चाई दिखी। हर किरदार असली लगा और यही बात सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: रिंकू का किरदार आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/सोनाली सहगल: इस फिल्म से पहले मैं अलग जॉनर की फिल्म कर रही थी। वहां मेरा किरदार और दुनिया अलग थे। ‘रिंकू’ छोटे शहर की साधारण लड़की है, इसलिए उसके हावभाव, बोलने के तरीके और सोच पर अलग तरह से काम करना पड़ा। एक कलाकार के तौर पर यही चुनौती सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: इस फिल्म में सबसे खास बात क्या लगी? जवाब/सोनाली सहगल: मुझे लगा कि इस फिल्म का हर किरदार कुछ न कुछ सिखाता है। कोई उम्मीद देता है, कोई रिश्तों की अहमियत समझाता है और कोई संघर्ष से लड़ना सिखाता है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। सवाल: दर्शक ‘आर्य भट्ट का जीरो’ देखकर क्या महसूस करेंगे? जवाब/हिमांश कोहली: अगर लगे कि

फिल्म फ्लॉप हुई तो रोती हुई घर गईं सोनाली सहगल:हिमांश कोहली ने कहा- ‘यारियां’ के बाद लगा, अब सब खत्म हो गया

फिल्म फ्लॉप हुई तो रोती हुई घर गईं सोनाली सहगल:हिमांश कोहली ने कहा- ‘यारियां’ के बाद लगा, अब सब खत्म हो गया

फिल्म ‘आर्य भट्ट का जीरो’ खुद पर भरोसा और सपनों के लिए संघर्ष की कहानी है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सोनाली सहगल, हिमांश कोहली और डायरेक्टर कमल चंद्रा ने ऐसे अनुभव साझा किए, जब लोगों ने उन पर भरोसा नहीं किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सोनाली ने बताया कि एक फिल्म के फ्लॉप होने के बाद वह कार में रोते हुए घर गई थीं। हिमांश ने कहा कि ‘यारियां’ के बाद लगातार फिल्में नहीं चलीं तो लगा कि करियर खत्म हो गया। सवाल: फिल्म का संदेश है कि खुद पर भरोसा सबसे जरूरी है। आपकी जिंदगी में ऐसा कब हुआ? जवाब/सोनाली सहगल: मेरे अंदर हमेशा आत्मविश्वास था, लेकिन मुझसे ज्यादा भरोसा मेरी मम्मी को था। उन्होंने मेरे मिस इंडिया बनने से पहले ही कहा था कि उनकी बेटी मिस इंडिया बनेगी। लोग हंसते थे, लेकिन उनका विश्वास कभी नहीं डगमगाया। आज मुझे लगता है कि परिवार का एक इंसान भी आप पर पूरा भरोसा करे, तो आधी लड़ाई वहीं जीत जाती है। इसलिए सेल्फ बिलीफ के साथ परिवार का भरोसा भी जरूरी है। सवाल: हिमांश, आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ था? जवाब/हिमांश कोहली: बचपन से मुझे फिल्मों का शौक था। जब लोगों से कहता था कि मुझे एक्टर बनना है, तो ज्यादातर लोग सपना छोड़ने की सलाह देते थे। स्कूल में मैंने झूठ बोल दिया कि मैं धारा तेल के विज्ञापन वाला बच्चा हूं। पूरे स्कूल ने भरोसा कर लिया, लेकिन बाद में सच सामने आ गया। इसके बाद मुझे बुलिंग झेलनी पड़ी। सीनियर्स मजाक उड़ाते थे और सजा भी देते थे। तभी मैंने तय किया कि सच में एक्टर बनकर दिखाऊंगा। सवाल: उस घटना ने आपको कितना बदला? जवाब/हिमांश कोहली: उस वक्त बहुत बुरा लगा था, लेकिन आज लगता है कि अगर वह घटना नहीं होती तो शायद मैं इतनी मेहनत नहीं करता। मैंने थिएटर शुरू किया, एक्टिंग सीखी और कई संस्थानों में ट्रेनिंग ली। मेरे माता-पिता ने हर कदम पर साथ दिया। आज पुराने दोस्त कहते हैं, ‘यार, तूने सच में अपना सपना पूरा कर लिया।’ सवाल: परिवार का साथ कितना जरूरी रहा? जवाब/हिमांश कोहली: अगर मेरे माता-पिता साथ नहीं देते तो मैं एक्टिंग की पढ़ाई नहीं कर पाता। उन्होंने सिर्फ पढ़ाई नहीं, मेरे सपने पर भी भरोसा किया। वही भरोसा मुझे यहां तक लेकर आया। सवाल: कमल जी, आपकी कहानी भी कुछ ऐसी ही है? जवाब/कमल चंद्रा: बिल्कुल। मैं इंजीनियर था। अच्छी नौकरी थी, लेकिन एक्टिंग वर्कशॉप के बाद लगा कि मुझे फिल्मों में काम करना है। मैंने चार सरकारी नौकरियां छोड़ दीं। रिश्तेदारों ने मना किया, लेकिन पिता ने कहा, ‘तूने मेरा सपना पूरा कर दिया, अब अपना सपना जी।’ उसी बात ने मुझे कभी पीछे मुड़कर नहीं देखने दिया। सवाल: हिमांश क्या आप भी अपने माता-पिता का कोई अधूरा सपना भी जी रहे हैं? जवाब/हिमांश कोहली: बिल्कुल। मेरी मां कलाकार बनना चाहती थीं। उन्हें गायन, पेंटिंग और अभिनय का शौक था, लेकिन कम उम्र में शादी होने से उनका सपना अधूरा रह गया। आज फिल्मों में काम करते हुए लगता है कि मैं अपना ही नहीं, मां का सपना भी पूरा कर रहा हूं। उन्होंने एक बार ऋषि कपूर और जितेंद्र से मिलने की इच्छा जताई थी। जब मैं उन्हें दोनों कलाकारों से मिलवा पाया तो लगा कि मेरी मेहनत सफल हो गई। उनके चेहरे की खुशी मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी। सवाल: कमल जी, आपकी जिंदगी का सबसे भावुक पल कौन-सा रहा? जवाब/कमल चंद्रा: मेरी पहली फिल्म के दौरान महेश भट्ट ने मेरे पिता से फोन पर मेरी तारीफ की थी। फोन कटने के बाद पापा की खुशी देखने लायक थी। उन्होंने कहा, “मुझे पता था, मेरा बेटा कुछ अच्छा करेगा।” माता-पिता की आंखों में अपने लिए गर्व देखना सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। सवाल: ‘आर्य भट्ट का जीरो’ की कहानी में ऐसी क्या बात थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब/हिमांश कोहली: मुझे ‘बग्गू’ का किरदार बहुत पसंद आया। वह सिखाता है कि जिंदगी मंजिल से भटका सकती है, लेकिन सपना और मेहनत नहीं छोड़ें तो एक दिन मंजिल जरूर मिलती है। हालात जैसे भी हों, उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे बड़ी सीख क्या मिली? जवाब/हिमांश कोहली: इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी टीम है। रवि किशन, राजेश शर्मा, गोपाल दत्त, नीरज सूद और बाकी कलाकारों के साथ बातचीत करना एक एक्टिंग स्कूल जैसा था। हर कलाकार अपने संघर्ष और अनुभव साझा करता था। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। सवाल: कमल जी, शूटिंग से जुड़ा कोई दिलचस्प किस्सा? जवाब/कमल चंद्रा: जिस घर में शूटिंग हुई, उसके मालिक बाद में उसे रेनोवेट करने वाले थे। लेकिन फिल्म पूरी होने के बाद उन्होंने फैसला बदल दिया। उन्हें लगा कि यह घर फिल्म की यादों से जुड़ गया है, इसलिए इसे जैसा है, वैसा ही रहने देना चाहिए। यह हमारे लिए बहुत खास पल था। सवाल: फिल्म का सबसे बड़ा संदेश क्या है? जवाब/कमल चंद्रा: हर इंसान जिंदगी में कभी न कभी खुद को ‘जीरो’ महसूस करता है। हमारी फिल्म कहती है कि खुद पर भरोसा और मेहनत बनी रहे, तो वही इंसान एक दिन हीरो बन सकता है। सवाल: सोनाली, आपने ‘आर्य भट्ट का जीरो’ के लिए हां क्यों कहा? जवाब/सोनाली सहगल: मेरे लिए किसी भी फिल्म में सबसे अहम उसकी कहानी होती है। कमल ने स्क्रिप्ट सुनाई तो उसमें बनावटीपन नहीं, बल्कि सच्चाई दिखी। हर किरदार असली लगा और यही बात सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: रिंकू का किरदार आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/सोनाली सहगल: इस फिल्म से पहले मैं अलग जॉनर की फिल्म कर रही थी। वहां मेरा किरदार और दुनिया अलग थे। ‘रिंकू’ छोटे शहर की साधारण लड़की है, इसलिए उसके हावभाव, बोलने के तरीके और सोच पर अलग तरह से काम करना पड़ा। एक कलाकार के तौर पर यही चुनौती सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: इस फिल्म में सबसे खास बात क्या लगी? जवाब/सोनाली सहगल: मुझे लगा कि इस फिल्म का हर किरदार कुछ न कुछ सिखाता है। कोई उम्मीद देता है, कोई रिश्तों की अहमियत समझाता है और कोई संघर्ष से लड़ना सिखाता है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। सवाल: दर्शक ‘आर्य भट्ट का जीरो’ देखकर क्या महसूस करेंगे? 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जोमैटो-ब्लिंकइट के 1 लाख डिलीवरी पार्टनर्स ने फाइल किया ITR:₹18 करोड़ का इनकम टैक्स रिफंड मिला; 905 शहरों में 73% पहली बार टैक्सपेयर बने

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जोमैटो और ब्लिंकिट ने इस साल देश के 905 शहरों में अपने एक लाख से ज्यादा डिलीवरी पार्टनर्स को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने में मदद की है। इस पहल से डिलीवरी पार्टनर्स को अब तक 18 करोड़ रुपए का इनकम टैक्स रिफंड मिल चुका है। गिग वर्कर के लिए रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख में अभी एक महीना बाकी है, जो कि 31 अगस्त 2026 है। 73% डिलीवरी पार्टनर्स ने पहली बार भरा ITR इस साल रिटर्न फाइल करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स में से लगभग 73% ऐसे लोग हैं, जिन्होंने पहली बार ITR फाइल किया है। जोमैटो या ब्लिंकिट के पास इनके पिछले सालों के रिटर्न फाइल करने का कोई रिकॉर्ड नहीं था। यह आंकड़ा दिखाता है कि प्लेटफॉर्म की मदद से अब गिग वर्कर भी औपचारिक वित्तीय प्रणाली (फॉर्मल फाइनेंशियल सिस्टम) से तेजी से जुड़ रहे हैं। ITR से मिलेगा लोन, क्रेडिट कार्ड और रेंटल एग्रीमेंट में फायदा ITR को एक विश्वसनीय वित्तीय दस्तावेज के रूप में मान्यता प्राप्त है। इससे डिलीवरी पार्टनर्स को अपनी वित्तीय साख बनाने में मदद मिलती है। इसका उपयोग वे पर्सनल लोन, FD-बैकड क्रेडिट कार्ड, रेंटल एग्रीमेंट और अन्य सेवाओं के आवेदन के दौरान अपनी वित्तीय हिस्ट्री साबित करने के लिए कर सकते हैं।

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जोमैटो और ब्लिंकिट ने इस साल देश के 905 शहरों में अपने एक लाख से ज्यादा डिलीवरी पार्टनर्स को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने में मदद की है। इस पहल से डिलीवरी पार्टनर्स को अब तक 18 करोड़ रुपए का इनकम टैक्स रिफंड मिल चुका है। गिग वर्कर के लिए रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख में अभी एक महीना बाकी है, जो कि 31 अगस्त 2026 है। 73% डिलीवरी पार्टनर्स ने पहली बार भरा ITR इस साल रिटर्न फाइल करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स में से लगभग 73% ऐसे लोग हैं, जिन्होंने पहली बार ITR फाइल किया है। जोमैटो या ब्लिंकिट के पास इनके पिछले सालों के रिटर्न फाइल करने का कोई रिकॉर्ड नहीं था। यह आंकड़ा दिखाता है कि प्लेटफॉर्म की मदद से अब गिग वर्कर भी औपचारिक वित्तीय प्रणाली (फॉर्मल फाइनेंशियल सिस्टम) से तेजी से जुड़ रहे हैं। ITR से मिलेगा लोन, क्रेडिट कार्ड और रेंटल एग्रीमेंट में फायदा ITR को एक विश्वसनीय वित्तीय दस्तावेज के रूप में मान्यता प्राप्त है। इससे डिलीवरी पार्टनर्स को अपनी वित्तीय साख बनाने में मदद मिलती है। इसका उपयोग वे पर्सनल लोन, FD-बैकड क्रेडिट कार्ड, रेंटल एग्रीमेंट और अन्य सेवाओं के आवेदन के दौरान अपनी वित्तीय हिस्ट्री साबित करने के लिए कर सकते हैं।