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‘तुम जैसे सिंगर से ऐसी उम्मीद नहीं थी’:‘चांद सिफारिश’ के आलाप में ऑटो-ट्यून वाली बात पर ललित पंडित ने शान को डांटा था

‘तुम जैसे सिंगर से ऐसी उम्मीद नहीं थी’:‘चांद सिफारिश’ के आलाप में ऑटो-ट्यून वाली बात पर ललित पंडित ने शान को डांटा था

गुरु पूर्णिमा के मौके पर सिंगर शान का नया साईं भजन ‘साई नाम सांचा’ रिलीज हुआ है। इसे संगीतकार ललित पंडित ने कंपोज किया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में शान ने अपने गुरु, मां से जुड़ी साईं बाबा की यादें, ललित पंडित के साथ काम करने के किस्से, AI के बढ़ते असर और अपने बेटों के म्यूजिक करियर पर बात की। सवाल: गुरु पूर्णिमा के मौके पर सबसे पहले आपके गुरु के बारे में जानना चाहेंगे। आपकी जिंदगी में सबसे बड़ा गुरु कौन रहा है? जवाब: मेरे कई गुरु रहे हैं, लेकिन अगर एक नाम लेना हो तो उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान साहब का लूंगा। मैंने उनसे संगीत की तालीम ली। आज भी उनके परिवार से सीखना जारी है। मैं जो भी गा पा रहा हूं, वह उन्हीं की देन है। सवाल: आपने कहा कि जो कुछ सीखा, वह गुरु की देन है। क्या अब तक उनकी गुरु दक्षिणा चुका पाए हैं? जवाब: बिल्कुल नहीं। मैं आज तक कोई खास गुरु दक्षिणा नहीं दे पाया। मेरे लिए सबसे बड़ी गुरु दक्षिणा यही होगी कि मेरी गायकी हर दिन बेहतर होती रहे। अगर गुरुजी मुझे कहीं से सुन रहे होंगे, तो यही चाहेंगे कि मैं और मेहनत करूं और अच्छा गाऊं। सवाल: इसी गुरु पूर्णिमा पर आपका साईं भजन भी रिलीज हुआ है। आपने बताया था कि आपकी मां साईं बाबा में बहुत आस्था रखती थीं। यह भजन गाते वक्त उनकी कौन-सी याद सबसे ज्यादा आई? जवाब: मेरी मां बहुत ज्यादा धार्मिक नहीं थीं, लेकिन साईं बाबा में उनकी गहरी आस्था थी। हर गुरुवार हम दोनों साईं मंदिर जाते थे और अगरबत्ती जलाते थे। उस समय हमारी जिंदगी बहुत साधारण थी। यह भजन गाते समय वही पल याद आए। मां की याद के साथ साईं मंदिरों की याद भी ताजा हो गई। सवाल: इस भजन की रिकॉर्डिंग का किस्सा क्या है? जवाब: मैं जापान छुट्टियों पर जाने वाला था। तभी ललित जी का फोन आया। उन्होंने कहा कि अगर अभी रिकॉर्ड नहीं किया तो बात रह जाएगी। मैं तुरंत स्टूडियो पहुंचा, अपनी लाइनें रिकॉर्ड कीं और चला गया। उस दिन मेरी आवाज पूरी तरह ठीक नहीं थी, इसलिए चार लाइनें गाने में काफी मेहनत करनी पड़ी। पूरा गाना तैयार हुआ तो बहुत खुशी हुई। सवाल: आपने ललित पंडित के साथ कई सुपरहिट गाने गाए हैं। उनके साथ काम करने का अनुभव बाकी संगीतकारों से कितना अलग होता है? जवाब: उनके साथ काम करना हमेशा खास होता है। उन्होंने मुझसे हर तरह के गाने गवाए हैं। टेक्नोलॉजी आगे बढ़ गई है, लेकिन ललित जी आज भी शुद्ध गायकी पर भरोसा करते हैं। उनके साथ रिकॉर्डिंग करना ऐसा लगता है जैसे फिर से स्कूल पहुंच गए हों। सवाल: फिल्म ‘फना’ के गीत ‘चांद सिफारिश’ की रिकॉर्डिंग के दौरान ऑटो-ट्यून को लेकर क्या हुआ था? जवाब: गाने की शुरुआत में जो आलाप है, उसे रिकॉर्ड करने के बाद ललित जी को लगा कि उसे और बेहतर किया जा सकता है। मैंने मजाक में कहा कि ट्यूनर से ठीक कर दीजिए। यह सुनते ही ललित जी बोले, ‘तुम जैसे सिंगर से ऐसी बात की उम्मीद नहीं थी।’ फिर मैं तुरंत स्टूडियो पहुंचा और पूरा आलाप दोबारा रिकॉर्ड किया। सवाल: जतिन-ललित के साथ काम करते हुए आपने सबसे बड़ी सीख क्या ली? जवाब: मेरे शुरुआती गानों से लेकर आज तक प्लेबैक सिंगिंग की बहुत सारी बारीकियां मैंने उन्हीं से सीखी हैं। मैं उनके 90 के दशक के संगीत का बड़ा प्रशंसक हूं। आज भी उनके काम का फैन हूं। सवाल: अब AI भी म्यूजिक इंडस्ट्री का हिस्सा बनता जा रहा है। इसे आप किस नजरिए से देखते हैं? जवाब: AI एक अच्छा रेफरेंस टूल हो सकता है, लेकिन उसे पूरी तरह क्रिएटिव काम का विकल्प नहीं बनाना चाहिए। मैंने अपने कुछ म्यूजिक वीडियो AI की मदद से बनाए हैं, लेकिन गाने का संगीत और रिकॉर्डिंग पूरी तरह असली है। AI समय और पैसा बचाता है, लेकिन इससे कई लोगों का रोजगार प्रभावित हो रहा है। आने वाले समय में यह बड़ा मुद्दा बन सकता है। सवाल: ललित पंडित की अगली पीढ़ी के काम को कैसे देखते हैं? जवाब: मैंने रोहांश और अबीर को बचपन से देखा है। दोनों संस्कारी, मेहनती और प्रतिभाशाली हैं। संगीत उन्हें विरासत में मिला है। मुझे वे अपने बच्चों जैसे लगते हैं। सवाल: आपके दोनों बेटे भी म्यूजिक में हैं। इस समय वे क्या कर रहे हैं? जवाब: मेरे दोनों बेटे संगीत से जुड़े हैं। छोटे बेटे माही ने फिल्मों के लिए गाने गाए हैं। बड़ा बेटा सोहम म्यूजिक प्रोड्यूसर और म्यूजिक डायरेक्टर है। वह ‘नेवर सोबर’ नाम से काम करता है और ज्यादातर पर्दे के पीछे रहकर संगीत बनाता है। दोनों बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।

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