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मिर्जापुर: द मूवी ने दूसरे दिन ₹32 करोड़ कमाए:हनुमान अंश ने 5वें शनिवार को ₹16.50 करोड़ कमाकर धुरंधर का रिकॉर्ड तोड़ा

मिर्जापुर: द मूवी ने दूसरे दिन ₹32 करोड़ कमाए:हनुमान अंश ने 5वें शनिवार को ₹16.50 करोड़ कमाकर धुरंधर का रिकॉर्ड तोड़ा

फिल्म हनुमान अंश बॉक्स ऑफिस पर पांचवें हफ्ते में भी मजबूत प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने हिंदी में 5वें शनिवार की सबसे बड़ी कमाई दर्ज करते हुए धुरंधर का पिछला रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। शनिवार फिल्म के लिए अब तक का सबसे बड़ा कमाई वाला दिन भी रहा। सैकनिल्क के मुताबिक, हनुमान अंश ने पांचवें शनिवार को हिंदी भाषा में 16.50 करोड़ रुपए नेट का कलेक्शन किया। जबकि धुरंधर ने 5वें शनिवार को 11.75 करोड़ रुपए कमाए थे। हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 10 लाख रुपए नेट की ओपनिंग की थी। पहले दो हफ्तों में फिल्म ने करीब 1.50 करोड़ रुपए नेट कमाए। तीसरे हफ्ते में कमाई बढ़कर 10.40 करोड़ रुपए नेट हुई और चौथे हफ्ते में फिल्म ने 61 करोड़ रुपए नेट का कलेक्शन किया। पांचवें हफ्ते के पहले दो दिनों में ही फिल्म 26.25 करोड़ रुपए नेट कमा चुकी है। आगे भी इसके कलेक्शन में बढ़ोतरी की उम्मीद है। पांचवें शनिवार की कमाई के बाद हनुमान अंश भारत में 100 करोड़ रुपए नेट के आंकड़े के करीब पहुंच गई। फिल्म का कुल नेट कलेक्शन ₹99.38 करोड़ हो गया है। आज पूरी उम्मीद है कि फिल्म 100 करोड़ रुपए नेट का आंकड़ा पार कर लेगी। जिसके बाद यह पहली भारतीय फिल्म बनेगी जिसने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 1 करोड़ रुपए से कम की ओपनिंग के बाद 100 करोड़ रुपए नेट क्लब में जगह बनाई है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने दूसरे दिन ₹32 करोड़ कमाए वहीं, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने बॉक्स ऑफिस पर दूसरे दिन भी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने दूसरे दिन भारत में ₹32.00 करोड़ नेट कलेक्शन किया। फिल्म का अब तक का इंडिया ग्रॉस कलेक्शन ₹69.30 करोड़ और इंडिया नेट कलेक्शन ₹57.75 करोड़ हो गया है। वहीं, ओवरसीज में दूसरे दिन फिल्म ने ₹6.00 करोड़ कमाए, जिससे कुल ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन ₹10.25 करोड़ हो गया है। दो दिनों में ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन ₹79.55 करोड़ पहुंच गया है। करण जौहर ने कहा- ‘सॉलिड, कड़क और मसालेदार फिल्म’ फिल्ममेकर करण जौहर ने ‘मिर्जापुर: द मूवी’ देखने के बाद फिल्म की तारीफ की है। फिल्म रिलीज होने के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर इसका ट्रेलर शेयर किया और अपना रिएक्शन दिया। करण ने लिखा, “मिर्जापुर एक सॉलिड, कड़क और मसालेदार फिल्म है। मुझे यह सीरीज बहुत पसंद है और मैंने फिल्म को भी खूब एंजॉय किया। सभी पुराने और फेमस किरदार शानदार हैं और नए किरदारों के लिए भी जगह बनाते हैं। अगर आपने सीरीज नहीं भी देखी है, तब भी आपको फिल्म पसंद आएगी।” गौरतलब है कि मिर्जापुर द मूवी एक्सेल एंटरटेनमेंट की पहली बड़ी थिएट्रिकल फिल्मों में से एक है, जो एक सफल स्ट्रीमिंग फ्रेंचाइजी से आई है। ‘मिर्जापुर’ सीरीज अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई थी। ‘मिर्जापुर’ का पहला सीजन 16 नवंबर 2018 को रिलीज हुआ था, जिसमें कुल 9 एपिसोड थे। इसके बाद दूसरा सीजन 23 अक्टूबर 2020 को आया, जिसमें 10 एपिसोड शामिल थे। वहीं, तीसरा सीजन 5 जुलाई 2024 को रिलीज किया गया। इस सीजन में भी कुल 10 एपिसोड थे। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा के अलावा श्वेता त्रिपाठी, जितेंद्र कुमार, रवि किशन, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता गौर, सुशांत सिंह, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, कुलभूषण खरबंदा, सोनल चौहान, प्रमोद पाठक और अनंग्शा बिस्वास भी नजर आ रहे हैं। ………… यह खबर भी पढ़ें… मूवी रिव्यू- मिर्जापुरः द फिल्म:मुन्ना का पागलपन, कालीन भैया का ठहराव और गुड्डू का गुस्सा, ‘मिर्जापुर’ में फिर गरजी बंदूकें, लेकिन कहानी हुई लंबी मिर्जापुर की दुनिया में कानून से ज्यादा ताकतवर है बंदूक और बंदूक से ज्यादा ताकतवर है सही वक्त पर चली गई चाल। तीन सीजन तक ओटीटी पर इस दुनिया का भौकाल देखने के बाद अब गुरमीत सिंह इसे बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म को सिर्फ सीरीज का लंबा एपिसोड बनाने की कोशिश नहीं की गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

मिर्जापुर: द मूवी ने दूसरे दिन ₹32 करोड़ कमाए:हनुमान अंश ने 5वें शनिवार को ₹16.50 करोड़ कमाकर धुरंधर का रिकॉर्ड तोड़ा

मिर्जापुर: द मूवी ने दूसरे दिन ₹32 करोड़ कमाए:हनुमान अंश ने 5वें शनिवार को ₹16.50 करोड़ कमाकर धुरंधर का रिकॉर्ड तोड़ा

फिल्म हनुमान अंश बॉक्स ऑफिस पर पांचवें हफ्ते में भी मजबूत प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने हिंदी में 5वें शनिवार की सबसे बड़ी कमाई दर्ज करते हुए धुरंधर का पिछला रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। शनिवार फिल्म के लिए अब तक का सबसे बड़ा कमाई वाला दिन भी रहा। सैकनिल्क के मुताबिक, हनुमान अंश ने पांचवें शनिवार को हिंदी भाषा में 16.50 करोड़ रुपए नेट का कलेक्शन किया। जबकि धुरंधर ने 5वें शनिवार को 11.75 करोड़ रुपए कमाए थे। हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 10 लाख रुपए नेट की ओपनिंग की थी। पहले दो हफ्तों में फिल्म ने करीब 1.50 करोड़ रुपए नेट कमाए। तीसरे हफ्ते में कमाई बढ़कर 10.40 करोड़ रुपए नेट हुई और चौथे हफ्ते में फिल्म ने 61 करोड़ रुपए नेट का कलेक्शन किया। पांचवें हफ्ते के पहले दो दिनों में ही फिल्म 26.25 करोड़ रुपए नेट कमा चुकी है। आगे भी इसके कलेक्शन में बढ़ोतरी की उम्मीद है। पांचवें शनिवार की कमाई के बाद हनुमान अंश भारत में 100 करोड़ रुपए नेट के आंकड़े के करीब पहुंच गई। फिल्म का कुल नेट कलेक्शन ₹99.38 करोड़ हो गया है। आज पूरी उम्मीद है कि फिल्म 100 करोड़ रुपए नेट का आंकड़ा पार कर लेगी। जिसके बाद यह पहली भारतीय फिल्म बनेगी जिसने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 1 करोड़ रुपए से कम की ओपनिंग के बाद 100 करोड़ रुपए नेट क्लब में जगह बनाई है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने दूसरे दिन ₹32 करोड़ कमाए वहीं, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने बॉक्स ऑफिस पर दूसरे दिन भी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने दूसरे दिन भारत में ₹32.00 करोड़ नेट कलेक्शन किया। फिल्म का अब तक का इंडिया ग्रॉस कलेक्शन ₹69.30 करोड़ और इंडिया नेट कलेक्शन ₹57.75 करोड़ हो गया है। वहीं, ओवरसीज में दूसरे दिन फिल्म ने ₹6.00 करोड़ कमाए, जिससे कुल ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन ₹10.25 करोड़ हो गया है। दो दिनों में ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन ₹79.55 करोड़ पहुंच गया है। करण जौहर ने कहा- ‘सॉलिड, कड़क और मसालेदार फिल्म’ फिल्ममेकर करण जौहर ने ‘मिर्जापुर: द मूवी’ देखने के बाद फिल्म की तारीफ की है। फिल्म रिलीज होने के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर इसका ट्रेलर शेयर किया और अपना रिएक्शन दिया। करण ने लिखा, “मिर्जापुर एक सॉलिड, कड़क और मसालेदार फिल्म है। मुझे यह सीरीज बहुत पसंद है और मैंने फिल्म को भी खूब एंजॉय किया। सभी पुराने और फेमस किरदार शानदार हैं और नए किरदारों के लिए भी जगह बनाते हैं। अगर आपने सीरीज नहीं भी देखी है, तब भी आपको फिल्म पसंद आएगी।” गौरतलब है कि मिर्जापुर द मूवी एक्सेल एंटरटेनमेंट की पहली बड़ी थिएट्रिकल फिल्मों में से एक है, जो एक सफल स्ट्रीमिंग फ्रेंचाइजी से आई है। ‘मिर्जापुर’ सीरीज अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई थी। ‘मिर्जापुर’ का पहला सीजन 16 नवंबर 2018 को रिलीज हुआ था, जिसमें कुल 9 एपिसोड थे। इसके बाद दूसरा सीजन 23 अक्टूबर 2020 को आया, जिसमें 10 एपिसोड शामिल थे। वहीं, तीसरा सीजन 5 जुलाई 2024 को रिलीज किया गया। इस सीजन में भी कुल 10 एपिसोड थे। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा के अलावा श्वेता त्रिपाठी, जितेंद्र कुमार, रवि किशन, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता गौर, सुशांत सिंह, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, कुलभूषण खरबंदा, सोनल चौहान, प्रमोद पाठक और अनंग्शा बिस्वास भी नजर आ रहे हैं। ………… यह खबर भी पढ़ें… मूवी रिव्यू- मिर्जापुरः द फिल्म:मुन्ना का पागलपन, कालीन भैया का ठहराव और गुड्डू का गुस्सा, ‘मिर्जापुर’ में फिर गरजी बंदूकें, लेकिन कहानी हुई लंबी मिर्जापुर की दुनिया में कानून से ज्यादा ताकतवर है बंदूक और बंदूक से ज्यादा ताकतवर है सही वक्त पर चली गई चाल। तीन सीजन तक ओटीटी पर इस दुनिया का भौकाल देखने के बाद अब गुरमीत सिंह इसे बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म को सिर्फ सीरीज का लंबा एपिसोड बनाने की कोशिश नहीं की गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा

अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की तर्ज पर वोटर लिस्ट की जांच शुरू कर दी है। इसके लिए करीब 125 करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया है। इस प्रक्रिया में वोटर लिस्ट की जांच कर नेशनल वोटर डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इससे अमेरिका में मौजूद करीब 26 लाख भारतवंशी वोटरों में से लगभग 10 लाख के नाम कटने का खतरा बताया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले यह प्रक्रिया पूरी करने का है। ट्रम्प ने ICE को डेटाबेस की जिम्मेदारी दी ट्रम्प प्रशासन ने अपनी इमिग्रेशन एजेंसी ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) को वोटर डेटाबेस की निगरानी की जिम्मेदारी दी है। सभी 50 राज्यों में वोटर लिस्ट की जांच और डेटाबेस अपडेट करने के लिए कंपनियों को काम सौंपा गया है। वोटरों की जानकारी को अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। घर-घर जाकर सर्वे नहीं होगा अमेरिका में भारत की तरह घर-घर जाकर वोटरों का सर्वे नहीं किया जा रहा है। वोटर लिस्ट को कंप्यूटर के जरिए इमिग्रेशन रिकॉर्ड समेत दूसरे रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। रिकॉर्ड में नाम या जानकारी का मिलान नहीं होने पर संबंधित वोटर की जानकारी की दोबारा जांच हो सकती है और नाम हटाए जाने का खतरा रहेगा। भारतवंशी वोटरों पर ज्यादा असर की आशंका क्यों? अमेरिका में करीब 26 लाख भारतवंशी वोटर हैं। न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे राज्यों में इनकी संख्या और राजनीतिक प्रभाव काफी अहम माना जाता है। इन राज्यों में वोटर पहचान और रजिस्ट्रेशन के नियम अलग-अलग हैं। नई जांच प्रक्रिया में रिकॉर्ड का मिलान होने से भारतवंशी वोटरों के नाम भी जांच के दायरे में आएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतवंशी मतदाताओं के वोटिंग पैटर्न पर भी नजर रखी जा सकती है। हालांकि, कितने लोगों के नाम वास्तव में हटेंगे, यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगा। अमेरिका में चुनाव भारत से अलग तरीके से होते हैं अमेरिका में भारत के चुनाव आयोग जैसी एक केंद्रीय संस्था पूरे देश के चुनाव नहीं कराती। वहां चुनाव की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य और स्थानीय प्रशासन संभालते हैं। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में वोटर रजिस्ट्रेशन और पहचान के नियम भी अलग हैं। अमेरिका में वोटर पहचान के नियम राज्य के हिसाब से अलग-अलग हैं। कई राज्यों में वोटर से अपनी पहचान की घोषणा कराना ही पर्याप्त होता है, जबकि कुछ राज्यों में पहचान के दस्तावेज जरूरी होते हैं। 12 राज्यों में पासपोर्ट या जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। कैलिफोर्निया में वोटर के हस्ताक्षर का मिलान किया जाता है। टेक्सास में पहले भी नाम हटाने पर विवाद हुआ टेक्सास में करीब 24 हजार लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के बाद मामला अदालत पहुंचा था। फेडरल कोर्ट से इस मामले में राहत मिली थी और संबंधित मामला अभी लंबित है। इसी वजह से ट्रम्प प्रशासन की नई वोटर लिस्ट जांच को लेकर भी अदालत में चुनौती मिलने की संभावना है। ट्रम्प वोटर आईडी के भी समर्थक ट्रम्प अमेरिका में वोटिंग के लिए फोटो आईडी अनिवार्य करने की मांग का समर्थन करते रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चुनाव में गड़बड़ी रोकने में मदद मिलेगी। अब वोटर लिस्ट की देशभर में जांच और एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने की कोशिश को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद बढ़ सकता है। खासकर उन राज्यों में इसका असर महत्वपूर्ण होगा, जहां भारतवंशी और दूसरे प्रवासी वोटर चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं।

अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा

अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की तर्ज पर वोटर लिस्ट की जांच शुरू कर दी है। इसके लिए करीब 125 करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया है। इस प्रक्रिया में वोटर लिस्ट की जांच कर नेशनल वोटर डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इससे अमेरिका में मौजूद करीब 26 लाख भारतवंशी वोटरों में से लगभग 10 लाख के नाम कटने का खतरा बताया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले यह प्रक्रिया पूरी करने का है। ट्रम्प ने ICE को डेटाबेस की जिम्मेदारी दी ट्रम्प प्रशासन ने अपनी इमिग्रेशन एजेंसी ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) को वोटर डेटाबेस की निगरानी की जिम्मेदारी दी है। सभी 50 राज्यों में वोटर लिस्ट की जांच और डेटाबेस अपडेट करने के लिए कंपनियों को काम सौंपा गया है। वोटरों की जानकारी को अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। घर-घर जाकर सर्वे नहीं होगा अमेरिका में भारत की तरह घर-घर जाकर वोटरों का सर्वे नहीं किया जा रहा है। वोटर लिस्ट को कंप्यूटर के जरिए इमिग्रेशन रिकॉर्ड समेत दूसरे रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। रिकॉर्ड में नाम या जानकारी का मिलान नहीं होने पर संबंधित वोटर की जानकारी की दोबारा जांच हो सकती है और नाम हटाए जाने का खतरा रहेगा। भारतवंशी वोटरों पर ज्यादा असर की आशंका क्यों? अमेरिका में करीब 26 लाख भारतवंशी वोटर हैं। न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे राज्यों में इनकी संख्या और राजनीतिक प्रभाव काफी अहम माना जाता है। इन राज्यों में वोटर पहचान और रजिस्ट्रेशन के नियम अलग-अलग हैं। नई जांच प्रक्रिया में रिकॉर्ड का मिलान होने से भारतवंशी वोटरों के नाम भी जांच के दायरे में आएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतवंशी मतदाताओं के वोटिंग पैटर्न पर भी नजर रखी जा सकती है। हालांकि, कितने लोगों के नाम वास्तव में हटेंगे, यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगा। अमेरिका में चुनाव भारत से अलग तरीके से होते हैं अमेरिका में भारत के चुनाव आयोग जैसी एक केंद्रीय संस्था पूरे देश के चुनाव नहीं कराती। वहां चुनाव की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य और स्थानीय प्रशासन संभालते हैं। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में वोटर रजिस्ट्रेशन और पहचान के नियम भी अलग हैं। अमेरिका में वोटर पहचान के नियम राज्य के हिसाब से अलग-अलग हैं। कई राज्यों में वोटर से अपनी पहचान की घोषणा कराना ही पर्याप्त होता है, जबकि कुछ राज्यों में पहचान के दस्तावेज जरूरी होते हैं। 12 राज्यों में पासपोर्ट या जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। कैलिफोर्निया में वोटर के हस्ताक्षर का मिलान किया जाता है। टेक्सास में पहले भी नाम हटाने पर विवाद हुआ टेक्सास में करीब 24 हजार लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के बाद मामला अदालत पहुंचा था। फेडरल कोर्ट से इस मामले में राहत मिली थी और संबंधित मामला अभी लंबित है। इसी वजह से ट्रम्प प्रशासन की नई वोटर लिस्ट जांच को लेकर भी अदालत में चुनौती मिलने की संभावना है। ट्रम्प वोटर आईडी के भी समर्थक ट्रम्प अमेरिका में वोटिंग के लिए फोटो आईडी अनिवार्य करने की मांग का समर्थन करते रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चुनाव में गड़बड़ी रोकने में मदद मिलेगी। अब वोटर लिस्ट की देशभर में जांच और एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने की कोशिश को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद बढ़ सकता है। खासकर उन राज्यों में इसका असर महत्वपूर्ण होगा, जहां भारतवंशी और दूसरे प्रवासी वोटर चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं।

शाहरुख खान ने अंडरवर्ल्ड को दिया था जवाब:बोले थे- ‘पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो’; फिल्म नहीं करूंगा; डायरेक्टर ने सुनाया किस्सा

शाहरुख खान ने अंडरवर्ल्ड को दिया था जवाब:बोले थे- ‘पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो’; फिल्म नहीं करूंगा; डायरेक्टर ने सुनाया किस्सा

फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने हाल ही में बताया कि 1990 के दशक में मुंबई अंडरवर्ल्ड से बॉलीवुड को धमकियां मिलती थीं। उन्होंने बताया कि धमकी मिलने के बावजूद शाहरुख खान ने अंडरवर्ल्ड के सामने झुकने से इनकार किया और कहा था- “पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो।” यह बात फिल्ममेकर ने राइटर हुसैन जैदी के यूट्यूब चैनल पर बताई। सेट पर पहुंच जाते थे अंडरवर्ल्ड के लोग संजय गुप्ता ने बताया कि 1990 के दशक में मुंबई में अंडरवर्ल्ड से फिल्म इंडस्ट्री भी अछूती नहीं थी। कई प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, एक्टर और एक्ट्रेस लगातार डर के माहौल में काम कर रहे थे। अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग कभी फोन करते थे तो कभी सीधे शूटिंग सेट पर पहुंच जाते थे। संजय गुप्ता ने बताया कि उस समय कई बार ऐसे लोग फिल्म के सेट पर आकर बैठ जाते थे। उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं होती थी कि वहां कौन शूटिंग कर रहा है। वे आराम से सेट पर मौजूद रहते और अपनी बात मनवाने की कोशिश करते थे। उन्होंने बताया कि अंडरवर्ल्ड की तरफ से फिल्म बनाने और कलाकारों को कास्ट करने तक में दखल दिया जाता था। एक बार उनके पास एक प्रोड्यूसर आया और उसने कई बड़े कलाकारों के साइन किए हुए लेटर दिखाए। संजय के मुताबिक, ये साइनिंग लेटर थे, जिनमें लिखा था कि संबंधित कलाकार उस प्रोड्यूसर की फिल्म में काम करेंगे। प्रोड्यूसर ने उनसे कहा था कि उसके पास लगभग सभी बड़े कलाकारों के साइन हैं और वह जिस अभिनेता के साथ संजय को काम करना हो, उसका नाम बता दें। इसके पीछे अंडरवर्ल्ड का दबाव बताया गया। शाहरुख ने झुकने से इनकार किया था इसी बातचीत में संजय गुप्ता ने शाहरुख का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में वह ऐसे कलाकार थे, जिन्होंने अंडरवर्ल्ड के सामने झुकने से इनकार कर दिया था। संजय के मुताबिक, जब शाहरुख को धमकी दी गई तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह अंडरवर्ल्ड के लिए कोई फिल्म नहीं करेंगे और न ही उनके कहने पर शो करेंगे। उन्होंने शाहरुख के रवैये को याद करते हुए कहा कि उनका जवाब था- “पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो। उससे डरता नहीं हूं।” संजय गुप्ता ने कहा कि शाहरुख ने सीधे तौर पर उनके साथ काम करने से इनकार कर दिया। फिल्ममेकर के मुताबिक, इसी वजह से अंडरवर्ल्ड के लोग भी शाहरुख की इज्जत करने लगे थे। संजय ने कहा कि उन्हें लगा कि इंडस्ट्री में कम से कम एक ऐसा व्यक्ति है, जो सीधे उनके सामने खड़ा है। संजय गुप्ता को भी धमकी मिली थी बातचीत में संजय गुप्ता ने अपना एक पुराना अनुभव भी सुनाया। उन्होंने बताया कि साल 1992-93 में उन्हें अंडरवर्ल्ड की तरफ से फोन आया था। उस समय वह अपनी फिल्म ‘आतिश’ और ‘रामशास्त्र’ पर काम कर रहे थे। एक सुबह उनके घर पर फोन आया। दूसरी तरफ से व्यक्ति ने खुद को ‘नाना’ बताया। संजय को समझ नहीं आया कि कौन नाना है? बाद में उन्हें पता चला कि फोन छोटा राजन का था। संजय के मुताबिक, फोन पर उन्हें गालियां दी गईं। इसके बाद एक प्रोड्यूसर के जरिए उन्हें पता चला कि मामला सीरियस है। उन्हें बताया गया कि उनके खिलाफ कुछ लोगों को भेजा गया है। उन्होंने तुरंत संजय दत्त को फोन किया और कहा कि उन्हें घर से बाहर निकालने में मदद करें। इसके बाद संजय दत्त ने अपने पिता सुनील दत्त की सरकारी गाड़ी उनके घर भेजी। संजय गुप्ता पीछे के रास्ते से उस गाड़ी में बैठकर वहां से निकल गए। इसके बाद कहानी में एक बड़ा मोड़ आया। संजय दत्त के घर पर रहते हुए संजय गुप्ता को अभिनेता आदित्य पंचोली का फोन आया। उन्होंने पूछा कि संजय कहां हैं और कहा कि उन्हें उनसे तुरंत मिलना है। कुछ देर बाद आदित्य पंचोली वहां पहुंचे और संजय गुप्ता को गले लगाकर कहा- “आई एम सॉरी यार, ये सब मेरी गलती है।” संजय ने उनसे पूछा कि उनकी गलती कैसे? तब आदित्य ने बताया कि पिछली रात वह दोस्तों के साथ शराब पी रहे थे। बातचीत में आदित्य ने कहा था कि ‘आतिश’ में उनका रोल बहुत अच्छा है और इससे उनका करियर बन सकता है, लेकिन ‘रामशास्त्र’ में उनका रोल उतना अच्छा नहीं है। आदित्य ने कहा था कि अगर संजय गुप्ता पर थोड़ा दबाव डाला जाए तो शायद वह ‘रामशास्त्र’ में उनका रोल बेहतर कर देंगे। संजय के मुताबिक, आदित्य ने सीधे फोन नहीं किया था, लेकिन किसी तरह उनकी यह बात आगे पहुंची और मामला धमकी तक पहुंच गया। इसके बाद संजय गुप्ता को फोन कर डराया गया। फोन पर फिर मांगा गया सिर्फ एक बदलाव आखिरकार संजय गुप्ता की अंडरवर्ल्ड से दोबारा बात कराई गई। उन्होंने माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें लगा था कोई उनके साथ मजाक कर रहा है और उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि सामने से ऐसा फोन आएगा। संजय के मुताबिक, दूसरी तरफ से उन्हें शांत रहने को कहा गया। फिर कहा गया कि ‘रामशास्त्र’ में आदित्य पंचोली का रोल थोड़ा और अच्छा कर दें। संजय ने बताया कि उन्होंने कहा कि रोल पहले से अच्छा है लेकिन सामने से फिर कहा गया कि जितना हो सके, रोल को और बेहतर कर दें।

शाहरुख खान ने अंडरवर्ल्ड को दिया था जवाब:बोले थे- ‘पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो’; फिल्म नहीं करूंगा; डायरेक्टर ने सुनाया किस्सा

शाहरुख खान ने अंडरवर्ल्ड को दिया था जवाब:बोले थे- ‘पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो’; फिल्म नहीं करूंगा; डायरेक्टर ने सुनाया किस्सा

फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने हाल ही में बताया कि 1990 के दशक में मुंबई अंडरवर्ल्ड से बॉलीवुड को धमकियां मिलती थीं। उन्होंने बताया कि धमकी मिलने के बावजूद शाहरुख खान ने अंडरवर्ल्ड के सामने झुकने से इनकार किया और कहा था- “पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो।” यह बात फिल्ममेकर ने राइटर हुसैन जैदी के यूट्यूब चैनल पर बताई। सेट पर पहुंच जाते थे अंडरवर्ल्ड के लोग संजय गुप्ता ने बताया कि 1990 के दशक में मुंबई में अंडरवर्ल्ड से फिल्म इंडस्ट्री भी अछूती नहीं थी। कई प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, एक्टर और एक्ट्रेस लगातार डर के माहौल में काम कर रहे थे। अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग कभी फोन करते थे तो कभी सीधे शूटिंग सेट पर पहुंच जाते थे। संजय गुप्ता ने बताया कि उस समय कई बार ऐसे लोग फिल्म के सेट पर आकर बैठ जाते थे। उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं होती थी कि वहां कौन शूटिंग कर रहा है। वे आराम से सेट पर मौजूद रहते और अपनी बात मनवाने की कोशिश करते थे। उन्होंने बताया कि अंडरवर्ल्ड की तरफ से फिल्म बनाने और कलाकारों को कास्ट करने तक में दखल दिया जाता था। एक बार उनके पास एक प्रोड्यूसर आया और उसने कई बड़े कलाकारों के साइन किए हुए लेटर दिखाए। संजय के मुताबिक, ये साइनिंग लेटर थे, जिनमें लिखा था कि संबंधित कलाकार उस प्रोड्यूसर की फिल्म में काम करेंगे। प्रोड्यूसर ने उनसे कहा था कि उसके पास लगभग सभी बड़े कलाकारों के साइन हैं और वह जिस अभिनेता के साथ संजय को काम करना हो, उसका नाम बता दें। इसके पीछे अंडरवर्ल्ड का दबाव बताया गया। शाहरुख ने झुकने से इनकार किया था इसी बातचीत में संजय गुप्ता ने शाहरुख का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में वह ऐसे कलाकार थे, जिन्होंने अंडरवर्ल्ड के सामने झुकने से इनकार कर दिया था। संजय के मुताबिक, जब शाहरुख को धमकी दी गई तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह अंडरवर्ल्ड के लिए कोई फिल्म नहीं करेंगे और न ही उनके कहने पर शो करेंगे। उन्होंने शाहरुख के रवैये को याद करते हुए कहा कि उनका जवाब था- “पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो। उससे डरता नहीं हूं।” संजय गुप्ता ने कहा कि शाहरुख ने सीधे तौर पर उनके साथ काम करने से इनकार कर दिया। फिल्ममेकर के मुताबिक, इसी वजह से अंडरवर्ल्ड के लोग भी शाहरुख की इज्जत करने लगे थे। संजय ने कहा कि उन्हें लगा कि इंडस्ट्री में कम से कम एक ऐसा व्यक्ति है, जो सीधे उनके सामने खड़ा है। संजय गुप्ता को भी धमकी मिली थी बातचीत में संजय गुप्ता ने अपना एक पुराना अनुभव भी सुनाया। उन्होंने बताया कि साल 1992-93 में उन्हें अंडरवर्ल्ड की तरफ से फोन आया था। उस समय वह अपनी फिल्म ‘आतिश’ और ‘रामशास्त्र’ पर काम कर रहे थे। एक सुबह उनके घर पर फोन आया। दूसरी तरफ से व्यक्ति ने खुद को ‘नाना’ बताया। संजय को समझ नहीं आया कि कौन नाना है? बाद में उन्हें पता चला कि फोन छोटा राजन का था। संजय के मुताबिक, फोन पर उन्हें गालियां दी गईं। इसके बाद एक प्रोड्यूसर के जरिए उन्हें पता चला कि मामला सीरियस है। उन्हें बताया गया कि उनके खिलाफ कुछ लोगों को भेजा गया है। उन्होंने तुरंत संजय दत्त को फोन किया और कहा कि उन्हें घर से बाहर निकालने में मदद करें। इसके बाद संजय दत्त ने अपने पिता सुनील दत्त की सरकारी गाड़ी उनके घर भेजी। संजय गुप्ता पीछे के रास्ते से उस गाड़ी में बैठकर वहां से निकल गए। इसके बाद कहानी में एक बड़ा मोड़ आया। संजय दत्त के घर पर रहते हुए संजय गुप्ता को अभिनेता आदित्य पंचोली का फोन आया। उन्होंने पूछा कि संजय कहां हैं और कहा कि उन्हें उनसे तुरंत मिलना है। कुछ देर बाद आदित्य पंचोली वहां पहुंचे और संजय गुप्ता को गले लगाकर कहा- “आई एम सॉरी यार, ये सब मेरी गलती है।” संजय ने उनसे पूछा कि उनकी गलती कैसे? तब आदित्य ने बताया कि पिछली रात वह दोस्तों के साथ शराब पी रहे थे। बातचीत में आदित्य ने कहा था कि ‘आतिश’ में उनका रोल बहुत अच्छा है और इससे उनका करियर बन सकता है, लेकिन ‘रामशास्त्र’ में उनका रोल उतना अच्छा नहीं है। आदित्य ने कहा था कि अगर संजय गुप्ता पर थोड़ा दबाव डाला जाए तो शायद वह ‘रामशास्त्र’ में उनका रोल बेहतर कर देंगे। संजय के मुताबिक, आदित्य ने सीधे फोन नहीं किया था, लेकिन किसी तरह उनकी यह बात आगे पहुंची और मामला धमकी तक पहुंच गया। इसके बाद संजय गुप्ता को फोन कर डराया गया। फोन पर फिर मांगा गया सिर्फ एक बदलाव आखिरकार संजय गुप्ता की अंडरवर्ल्ड से दोबारा बात कराई गई। उन्होंने माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें लगा था कोई उनके साथ मजाक कर रहा है और उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि सामने से ऐसा फोन आएगा। संजय के मुताबिक, दूसरी तरफ से उन्हें शांत रहने को कहा गया। फिर कहा गया कि ‘रामशास्त्र’ में आदित्य पंचोली का रोल थोड़ा और अच्छा कर दें। संजय ने बताया कि उन्होंने कहा कि रोल पहले से अच्छा है लेकिन सामने से फिर कहा गया कि जितना हो सके, रोल को और बेहतर कर दें।

रूस अगले 3 दिन यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा:पुतिन ने ट्रम्प के दामाद के मॉस्को पहुंचने पर दिया आदेश, जंग खत्म करने पर बात होगी

रूस अगले 3 दिन यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा:पुतिन ने ट्रम्प के दामाद के मॉस्को पहुंचने पर दिया आदेश, जंग खत्म करने पर बात होगी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर 72 घंटे तक हमले रोकने का आदेश दिया है। क्रेमलिन ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। पुतिन का यह आदेश ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए मॉस्को पहुंचे हैं। दोनों रुकी हुई शांति वार्ता को फिर शुरू कराने की कोशिश करेंगे। यूक्रेन पहले ही दोनों के दौरे की जानकारी दे चुका है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने शुक्रवार को कहा था कि अमेरिकी दूतों के यूक्रेन दौरे के दौरान उनकी सेना हवाई हमले रोक देगी। उन्होंने रूस से भी ऐसा ही करने को कहा था। ईरान जंग की वजह से अमेरिका का यूक्रेन पर फोकस हटा अमेरिका लंबे समय से रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश में जुटा है। हालांकि, पिछले छह महीनों में इन कोशिशों की रफ्तार कुछ धीमी हुई है। इसकी एक वजह अमेरिका का ईरान युद्ध पर ज्यादा फोकस करना भी बताई गई है। विटकॉफ और कुशनर इससे पहले जनवरी में मॉस्को पहुंचे थे। तब दोनों ने क्रेमलिन में पुतिन से मुलाकात की थी। अब एक बार फिर दोनों के मॉस्को पहुंचने पर रूसी दूत किरिल दिमित्रीव ने उनका स्वागत किया। रूस ने हाल में कीव पर हमले बढ़ाए रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता अभी किसी नतीजे तक नहीं पहुंची है। इस बीच, कीव समेत यूक्रेन के कई शहरों पर रूसी हवाई हमले तेज हुए हैं। यूक्रेन भी रूस के अंदर लगातार ड्रोन हमले कर रहा है। शुक्रवार को एक रूसी ड्रोन ने कीव में यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी SBU के मुख्यालय को निशाना बनाया। SBU रूस के अंदर किए जाने वाले यूक्रेन के कई लंबी दूरी के हमलों में भी भूमिका निभाती है। उधर, यूक्रेन रूस के सैन्य ठिकानों के अलावा तेल रिफाइनरियों और ई-कॉमर्स केंद्रों को भी निशाना बना रहा है। यूक्रेन का कहना है कि इन हमलों का मकसद रूस की युद्ध क्षमता और उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना है। शनिवार को जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने रात में कीव और बोरिस्पिल एयरपोर्ट पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि ये हमले उस वक्त हुए, जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के यूक्रेन पहुंचने की तैयारी चल रही थी। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन ने रूस के इन हमलों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस का हवाई क्षेत्र अब ड्रोन और मिसाइलों की वजह से खतरनाक हो चुका है। हालांकि, अमेरिकी दूतों की शांति कोशिशों के लिए यूक्रेन की तरफ से कोई खतरा नहीं है। 3 घंटे हमले रोकने का आदेश कितना असरदार होगा? पुतिन का 72 घंटे तक कीव पर हमले रोकने का आदेश अमेरिकी दूतों की मॉस्को और फिर कीव यात्रा के दौरान बातचीत के लिए कुछ समय जरूर दे सकता है। हालांकि, इसे रूस-यूक्रेन के बीच पूरा युद्धविराम नहीं माना जा सकता। यह आदेश सिर्फ कीव पर रूसी हमले रोकने तक सीमित है। दूसरे इलाकों में दोनों देशों के बीच लड़ाई जारी रह सकती है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इन 72 घंटों में शांति वार्ता को आगे बढ़ाने पर कोई सहमति बन पाएगी, या समय खत्म होते ही रूस फिर हमले शुरू कर देगा। इसलिए अब सबकी नजर विटकॉफ और कुशनर की मॉस्को-कीव यात्रा पर है। अगर दोनों पक्ष किसी अहम मुद्दे पर सहमत होते हैं, तो यह 72 घंटे की रोक आगे की बातचीत का रास्ता खोल सकती है। लेकिन फिलहाल इसे युद्ध खत्म होने की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी।

रामायण मेकर्स ने जन्माष्ठमी में रावण का पोस्टर शेयर किया:जमकर हुई आलोचना; क्या ये मेकर्स की प्रमोशनल स्ट्रेटेजी, जानिए नेगेटिव पब्लिसिटी से कैसे होता है फायदा-नुकसान

रामायण मेकर्स ने जन्माष्ठमी में रावण का पोस्टर शेयर किया:जमकर हुई आलोचना; क्या ये मेकर्स की प्रमोशनल स्ट्रेटेजी, जानिए नेगेटिव पब्लिसिटी से कैसे होता है फायदा-नुकसान

रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म रामायण के मेकर्स ने जन्माष्ठमी के दिन रावण का पोस्टर शेयर कर दिया, जिसके चलते उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। कुछ यूजर्स इस चूक से हैरान हैं, तो वहीं कुछ का मानना है कि चर्चा में आने के लिए मेकर्स जानबूझकर ऐसी गलतियां करते हैं। सवाल ये है कि अगर मेकर्स जानबूझकर ऐसी गलती करें, तो नेगेटिव पब्लिसिटी से उन्हें क्या फायदा मिलेगा। दरअसल, फिल्मों से जुड़ी ट्रोलिंग या विवाद अगर सिर्फ चर्चा पैदा करता है तो फिल्म को फायदा मिल सकता है, लेकिन अगर विवाद इतना बढ़ जाए कि दर्शकों की धारणा फिल्म के खिलाफ हो जाए, तो नुकसान भी हो सकता है। एक नजर जानिए, कैसे पड़ता है नेगेटिव पब्लिसिटी का फिल्म पर असर- रामायण मेकर्स ने पोस्ट किया रावण का पोस्टर ये पोस्टर फिल्म रामायण के पेज से शुक्रवार शाम को पोस्ट किया गया था। साथ लिखा गया था, देव लोक, पृथ्वी लोक, पाताल लोक, तीनों लोकों में एख ही राज होगा, रावण राज। पोस्टर आते ही सोशल मीडिया पर मेकर्स की आलोचना शुरू होने लगी। लोगों ने इस पर कई सवाल खड़े किए। पोस्टर से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं पहला सवाल- क्या मेकर्स जानबूझकर, पब्लिसिटी बटोरने और चर्चा में आने के लिए ऐसा कर रहे हैं? दूसरा सवाल- क्या फिल्म से जुड़ी सोशल मीडिया टीम ने गलती से पोस्टर शेयर किया? क्या 4 हजार करोड़ के मेगा बजट की इस फिल्म की रिसर्च टीम इतनी कमजोर है, जिन्हें ये भी नहीं पता कि जन्माष्ठमी में क्या पोस्ट करना चाहिए? इन सवालों के जवाब जानिए- नेगेटिव पब्लिसिटी से फिल्मों को कैसे फायदा होता है? 1. फिल्म की फ्री पब्लिसिटी किसी फिल्म का ट्रेलर, गाना या स्टार उतनी चर्चा न पैदा करे, जितनी कोई विवाद पैदा कर देता है। तो मेकर्स को इसका फायदा मिलता है। मीडिया कवरेज और सोशल मीडिया बहस फिल्म का नाम लगातार लोगों के सामने रखती है। 2. लोगों की उत्सुकता बढ़ती है अगर फिल्म लगातार विवादों में रहती है, तो दर्शक के मन में सवाल उठता है कि आखिर फिल्म में ऐसा क्या है कि इतना विवाद हो रहा है? यही उत्सुकता कई बार टिकट खरीदने की वजह बन जाती है। इसे इन फिल्मों के उदाहरण से समझिए- ‘द कश्मीर फाइल्स’ (2022):फिल्म की रिलीज से पहले और बाद में इसके कंटेंट और राजनीतिक इंटरप्रेटेशन को लेकर जबरदस्त बहस हुई। विवाद ने फिल्म को लगातार हैडलाइन में बनाए रखा। नतीजा यह हुआ कि कम बजट की फिल्म को कई लोगों ने देखा, जिससे फिल्म हिट हुई। अगर फिल्म से जुड़ा कोई विवाद न होता, तो फिल्म चर्चा में न आती। ‘पद्मावत’ (2018): फिल्म को लेकर राजपूत संगठनों का विरोध, कर्णी सेना का आंदोलन, शूटिंग के दौरान तोड़फोड़ और रिलीज रोकने की मांग तक हुई। विवाद इतना बड़ा हुआ कि फिल्म की रिलीज से पहले ही इसका नाम देशभर में चर्चा का विषय बन गया। लगातार टलने वाली फिल्म जब रिलीज हुई, तो लोग विवाद समझने के लिए ही बढ़-चढ़कर फिल्म देखने गए, जिससे फिल्म के कलेक्शन में फायदा हुआ। ‘द केरला स्टोरी’ (2023): फिल्म के कथानक और उसके आंकड़ों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद हुआ। कुछ राज्यों में इसे लेकर विरोध और प्रतिबंध की खबरें आईं, जबकि दूसरी तरफ समर्थकों ने इसे देखने की अपील की। इससे फिल्म को जबरदस्त एक्सपोजर मिला और फिल्म हिट रही। नेगेटिव पब्लिसिटी हमेशा काम नहीं करती? कंट्रोवर्सी तभी फायदा देती है जब दर्शकों की उत्सुकता, फिल्म के खिलाफ बनी नेगेटिविटी से ज्यादा मजबूत हो। इसके उलट कुछ फिल्मों में विवाद ने दर्शकों को फिल्म से दूर भी किया। ‘लक्ष्मी’ (2020): फिल्म के टाइटल और कथित धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपों को लेकर विवाद हुआ। बॉयकॉट की मांग हुई और सोशल मीडिया पर आलोचना हुई। फिल्म विवाद से चर्चा में रही, लेकिन विवाद इतना बड़ा नहीं था, जो उत्सुकता पैदा कर सके। ‘आदिपुरुष’ (2023): फिल्म के डायलॉग, VFX और रामायण के किरदारों को मॉडर्नाइजेशन कर दिखाने को लेकर रिलीज के बाद भारी आलोचना हुई। यहां नेगेटिव पब्लिसिटी, फिल्म के कॉन्सेप्ट से आगे निकल गई। दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा फिल्म की आलोचना करने लगा और वर्ड ऑफ माउथ खराब हुआ। लगातार हो रही है रामायण की आलोचना कास्टिंग पर विवादः बीफ विवाद में रहे रणबीर कपूर को रामायण में भगवान श्री राम का किरदार दिए जाने की लंबे समय से आलोचना हो रही है। इसके अलावा ठीक से हिंदी नहीं बोलने वालीं साई पल्लवी के सीता बनने पर भी विवाद है। रकुलप्रीत सिंह के शूर्पणखा वाले ‘ग्लैमरस लुक’ पर मीम बन रहे। ट्रेलर में स्टारकास्ट के पहनावे पर सवालः फिल्म का ट्रेलर आने के बाद कैकेयी का किरदार निभा रहीं लारा दत्ता के पहनावे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। फैंस का मानना है कि लारा दत्ता फिल्म में किसी मॉडर्न डेली सोप की बहु के गेटअप में लग रही हैं। फिल्म के VFX, बजट की भी आलोचनाः ट्रेलर लॉन्च होने के बाद फिल्म के ग्राफिक्स की आलोचना की जा रही थी। इस पर रणबीर कपूर ने सफाई में कहा कि स्मार्टफोन और खराब इंटरनेट कनेक्शन पर लोग ट्रेलर देखकर विजुअल इफेक्ट्स को जज कर रहे हैं। मेकर्स ने दर्शकों से फिल्म को IMAX 3D में देखने का आग्रह किया है। रामलीला महासंघ ने उठाए सवालः श्री रामलीला महासंघ ने फिल्म के डायरेक्टर नितेश तिवारी और प्रोडक्शन कंपनी को एक पत्र लिखकर चेतावनी दी है। महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने मांग की है कि इस दिवाली पर देश-विदेश में रिलीज होने से पहले यह फिल्म उनके प्रतिनिधिमंडल को दिखाई जाए। महासंघ का कहना है कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक फिल्म में ऐसे कई सीन हो सकते हैं, जो हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। अगर विवादित सीन नहीं हटाए गए तो सिनेमाघरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। महासंघ ने अपने पत्र में साल 2023 में आई फिल्म ‘आदिपुरुष’ का उदाहरण दिया है। अर्जुन कुमार ने याद दिलाया कि भूषण कुमार के प्रोडक्शन और प्रभास-सैफ अली खान स्टारर इस फिल्म के कई दृश्यों पर सनातन समाज और रामलीला से जुड़े लोगों ने कड़ा विरोध जताया था। उस फिल्म में सोने की लंका को काला दिखाया गया था और महाज्ञानी रावण व उसकी

रामायण मेकर्स ने जन्माष्ठमी में रावण का पोस्टर शेयर किया:जमकर हुई आलोचना; क्या ये मेकर्स की प्रमोशनल स्ट्रेटेजी, जानिए नेगेटिव पब्लिसिटी से कैसे होता है फायदा-नुकसान

रामायण मेकर्स ने जन्माष्ठमी में रावण का पोस्टर शेयर किया:जमकर हुई आलोचना; क्या ये मेकर्स की प्रमोशनल स्ट्रेटेजी, जानिए नेगेटिव पब्लिसिटी से कैसे होता है फायदा-नुकसान

रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म रामायण के मेकर्स ने जन्माष्ठमी के दिन रावण का पोस्टर शेयर कर दिया, जिसके चलते उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। कुछ यूजर्स इस चूक से हैरान हैं, तो वहीं कुछ का मानना है कि चर्चा में आने के लिए मेकर्स जानबूझकर ऐसी गलतियां करते हैं। सवाल ये है कि अगर मेकर्स जानबूझकर ऐसी गलती करें, तो नेगेटिव पब्लिसिटी से उन्हें क्या फायदा मिलेगा। दरअसल, फिल्मों से जुड़ी ट्रोलिंग या विवाद अगर सिर्फ चर्चा पैदा करता है तो फिल्म को फायदा मिल सकता है, लेकिन अगर विवाद इतना बढ़ जाए कि दर्शकों की धारणा फिल्म के खिलाफ हो जाए, तो नुकसान भी हो सकता है। एक नजर जानिए, कैसे पड़ता है नेगेटिव पब्लिसिटी का फिल्म पर असर- रामायण मेकर्स ने पोस्ट किया रावण का पोस्टर ये पोस्टर फिल्म रामायण के पेज से शुक्रवार शाम को पोस्ट किया गया था। साथ लिखा गया था, देव लोक, पृथ्वी लोक, पाताल लोक, तीनों लोकों में एख ही राज होगा, रावण राज। पोस्टर आते ही सोशल मीडिया पर मेकर्स की आलोचना शुरू होने लगी। लोगों ने इस पर कई सवाल खड़े किए। पोस्टर से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं पहला सवाल- क्या मेकर्स जानबूझकर, पब्लिसिटी बटोरने और चर्चा में आने के लिए ऐसा कर रहे हैं? दूसरा सवाल- क्या फिल्म से जुड़ी सोशल मीडिया टीम ने गलती से पोस्टर शेयर किया? क्या 4 हजार करोड़ के मेगा बजट की इस फिल्म की रिसर्च टीम इतनी कमजोर है, जिन्हें ये भी नहीं पता कि जन्माष्ठमी में क्या पोस्ट करना चाहिए? इन सवालों के जवाब जानिए- नेगेटिव पब्लिसिटी से फिल्मों को कैसे फायदा होता है? 1. फिल्म की फ्री पब्लिसिटी किसी फिल्म का ट्रेलर, गाना या स्टार उतनी चर्चा न पैदा करे, जितनी कोई विवाद पैदा कर देता है। तो मेकर्स को इसका फायदा मिलता है। मीडिया कवरेज और सोशल मीडिया बहस फिल्म का नाम लगातार लोगों के सामने रखती है। 2. लोगों की उत्सुकता बढ़ती है अगर फिल्म लगातार विवादों में रहती है, तो दर्शक के मन में सवाल उठता है कि आखिर फिल्म में ऐसा क्या है कि इतना विवाद हो रहा है? यही उत्सुकता कई बार टिकट खरीदने की वजह बन जाती है। इसे इन फिल्मों के उदाहरण से समझिए- ‘द कश्मीर फाइल्स’ (2022):फिल्म की रिलीज से पहले और बाद में इसके कंटेंट और राजनीतिक इंटरप्रेटेशन को लेकर जबरदस्त बहस हुई। विवाद ने फिल्म को लगातार हैडलाइन में बनाए रखा। नतीजा यह हुआ कि कम बजट की फिल्म को कई लोगों ने देखा, जिससे फिल्म हिट हुई। अगर फिल्म से जुड़ा कोई विवाद न होता, तो फिल्म चर्चा में न आती। ‘पद्मावत’ (2018): फिल्म को लेकर राजपूत संगठनों का विरोध, कर्णी सेना का आंदोलन, शूटिंग के दौरान तोड़फोड़ और रिलीज रोकने की मांग तक हुई। विवाद इतना बड़ा हुआ कि फिल्म की रिलीज से पहले ही इसका नाम देशभर में चर्चा का विषय बन गया। लगातार टलने वाली फिल्म जब रिलीज हुई, तो लोग विवाद समझने के लिए ही बढ़-चढ़कर फिल्म देखने गए, जिससे फिल्म के कलेक्शन में फायदा हुआ। ‘द केरला स्टोरी’ (2023): फिल्म के कथानक और उसके आंकड़ों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद हुआ। कुछ राज्यों में इसे लेकर विरोध और प्रतिबंध की खबरें आईं, जबकि दूसरी तरफ समर्थकों ने इसे देखने की अपील की। इससे फिल्म को जबरदस्त एक्सपोजर मिला और फिल्म हिट रही। नेगेटिव पब्लिसिटी हमेशा काम नहीं करती? कंट्रोवर्सी तभी फायदा देती है जब दर्शकों की उत्सुकता, फिल्म के खिलाफ बनी नेगेटिविटी से ज्यादा मजबूत हो। इसके उलट कुछ फिल्मों में विवाद ने दर्शकों को फिल्म से दूर भी किया। ‘लक्ष्मी’ (2020): फिल्म के टाइटल और कथित धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपों को लेकर विवाद हुआ। बॉयकॉट की मांग हुई और सोशल मीडिया पर आलोचना हुई। फिल्म विवाद से चर्चा में रही, लेकिन विवाद इतना बड़ा नहीं था, जो उत्सुकता पैदा कर सके। ‘आदिपुरुष’ (2023): फिल्म के डायलॉग, VFX और रामायण के किरदारों को मॉडर्नाइजेशन कर दिखाने को लेकर रिलीज के बाद भारी आलोचना हुई। यहां नेगेटिव पब्लिसिटी, फिल्म के कॉन्सेप्ट से आगे निकल गई। दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा फिल्म की आलोचना करने लगा और वर्ड ऑफ माउथ खराब हुआ। लगातार हो रही है रामायण की आलोचना कास्टिंग पर विवादः बीफ विवाद में रहे रणबीर कपूर को रामायण में भगवान श्री राम का किरदार दिए जाने की लंबे समय से आलोचना हो रही है। इसके अलावा ठीक से हिंदी नहीं बोलने वालीं साई पल्लवी के सीता बनने पर भी विवाद है। रकुलप्रीत सिंह के शूर्पणखा वाले ‘ग्लैमरस लुक’ पर मीम बन रहे। ट्रेलर में स्टारकास्ट के पहनावे पर सवालः फिल्म का ट्रेलर आने के बाद कैकेयी का किरदार निभा रहीं लारा दत्ता के पहनावे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। फैंस का मानना है कि लारा दत्ता फिल्म में किसी मॉडर्न डेली सोप की बहु के गेटअप में लग रही हैं। फिल्म के VFX, बजट की भी आलोचनाः ट्रेलर लॉन्च होने के बाद फिल्म के ग्राफिक्स की आलोचना की जा रही थी। इस पर रणबीर कपूर ने सफाई में कहा कि स्मार्टफोन और खराब इंटरनेट कनेक्शन पर लोग ट्रेलर देखकर विजुअल इफेक्ट्स को जज कर रहे हैं। मेकर्स ने दर्शकों से फिल्म को IMAX 3D में देखने का आग्रह किया है। रामलीला महासंघ ने उठाए सवालः श्री रामलीला महासंघ ने फिल्म के डायरेक्टर नितेश तिवारी और प्रोडक्शन कंपनी को एक पत्र लिखकर चेतावनी दी है। महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने मांग की है कि इस दिवाली पर देश-विदेश में रिलीज होने से पहले यह फिल्म उनके प्रतिनिधिमंडल को दिखाई जाए। महासंघ का कहना है कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक फिल्म में ऐसे कई सीन हो सकते हैं, जो हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। अगर विवादित सीन नहीं हटाए गए तो सिनेमाघरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। महासंघ ने अपने पत्र में साल 2023 में आई फिल्म ‘आदिपुरुष’ का उदाहरण दिया है। अर्जुन कुमार ने याद दिलाया कि भूषण कुमार के प्रोडक्शन और प्रभास-सैफ अली खान स्टारर इस फिल्म के कई दृश्यों पर सनातन समाज और रामलीला से जुड़े लोगों ने कड़ा विरोध जताया था। उस फिल्म में सोने की लंका को काला दिखाया गया था और महाज्ञानी रावण व उसकी

UN ने बदला दुनिया का नक्शा, अमेरिका ने विरोध किया:नए मैप में अफ्रीका बड़ा, यूरोप-US छोटे; 164 देशों ने पक्ष में वोट दिया

UN ने बदला दुनिया का नक्शा, अमेरिका ने विरोध किया:नए मैप में अफ्रीका बड़ा, यूरोप-US छोटे; 164 देशों ने पक्ष में वोट दिया

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को दुनिया के नक्शे को लेकर एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया। इसमें पुराने मर्केटर वर्ल्ड मैप की जगह ऐसे नक्शे के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया है, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनके असली क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाई देता है। नए नक्शे में अफ्रीका पहले से काफी बड़ा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे नजर आएंगे। एशिया के कुछ हिस्सों का आकार भी तुलनात्मक रूप से छोटा दिखेगा। यह प्रस्ताव टोगो ने पेश किया था और इसे अफ्रीकी संघ (African Union) का समर्थन मिला। संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने वोट दिया, जबकि 6 देश वोटिंग से दूर रहे। अमेरिका अकेला देश था जिसने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। अमेरिका ने प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? अमेरिका ने इस पहल की कड़ी आलोचना की। अमेरिकी प्रतिनिधि यारिना फेरेन्सेविच ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को दुनिया की असली समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि 16वीं सदी के नक्शे को बदलने जैसी बहस पर। उन्होंने इसे एक वैचारिक एजेंडा बताया और कहा कि ऐसी बहसों की वजह से संयुक्त राष्ट्र अपनी विश्वसनीयता खो रहा है। वहीं, अफ्रीकी संघ ने इस फैसले का स्वागत किया। उसने इसे दुनिया का नक्शा ज्यादा सटीक और बराबरी वाला बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। खबर लगातार अपडेट हो रही है…