‘चुप हूं, पराजित नहीं’: राघव चड्ढा ने AAP पर उठाए सवाल, पूछा ‘क्या मैंने कुछ गलत किया है?’ | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:03 अप्रैल, 2026, 10:38 IST चड्ढा ने आम आदमी को दिए अपने संदेश में कहा कि जब भी उन्हें संसद में बोलने का मौका मिला, उन्होंने इस अवसर का उपयोग आम लोगों के मुद्दों को उठाने के लिए किया। आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता के पद से हटाने के कुछ ही घंटों बाद, आप नेता ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर अपना एक वीडियो साझा किया और कहा कि उन्हें “चुप कर देना चाहिए, लेकिन हराया नहीं जाना चाहिए”। चड्ढा ने आम आदमी को दिए अपने संदेश में कहा कि जब भी उन्हें संसद में बोलने का मौका मिला, उन्होंने इस अवसर का उपयोग आम लोगों के मुद्दों को उठाने के लिए किया। हालांकि, उन्होंने तुरंत आप पर निशाना साधा और पार्टी से सवाल किया कि क्या लोगों की आवाज उठाना अपराध है। “जब भी मुझे संसद में बोलने का मौका मिला, मैंने सार्वजनिक मुद्दे उठाए। जिन विषयों को उठाने की हिम्मत कोई नहीं करता, लेकिन क्या सार्वजनिक मुद्दे उठाना अपराध है? क्या मैंने कोई अपराध किया है? क्या मैंने कोई गलती की है? क्या मैंने कुछ गलत किया है?” चड्ढा ने एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में पूछा। उन्होंने कहा, “मैं यह सवाल इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि AAP ने सचिवालय से राघव चड्ढा को संसद में बोलने से रोकने के लिए कहा था।” खामोश हूं, हारा नहीं’आम आदमी’ को मेरा संदेश- खामोश हो गया हूं, हारा नहीं हूं ‘मैं आदमी हूं’ को मेरा मैसेज pic.twitter.com/poUwxsu0S3 – राघव चड्ढा (@raghav_chadha) 3 अप्रैल 2026 चड्ढा का संदेश गुरुवार को नाटकीय घटनाक्रम के बाद आया, जब अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया और सचिवालय से उन्हें फ्लोर टाइम की अनुमति न देने का अनुरोध किया। विशेष रूप से, AAP ने गुरुवार को राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर चड्ढा को हटाने की मांग की और उच्च सदन में पार्टी के उपनेता के रूप में उनके स्थान पर पंजाब के सांसद अशोक मित्तल का नाम प्रस्तावित किया। राघव चड्ढा देश के सबसे युवा सांसदों में से हैं और एक समय उन्हें केजरीवाल का करीबी विश्वासपात्र माना जाता था। उन्होंने पार्टी मामलों में, विशेषकर पंजाब में और दिल्ली में आप के कार्यकाल के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 03 अप्रैल, 2026, 10:06 IST समाचार राजनीति ‘चुप हूं, पराजित नहीं’: राघव चड्ढा ने AAP पर उठाए सवाल, पूछा ‘क्या मैंने कुछ गलत किया है?’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
चेक बाउंस केस में सुनवाई के दौरान भावुक हुए राजपाल:बोले- पांच बार और जेल भेज दो, कोर्ट ने अतिरिक्त समय देने से मना किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में बकाया रकम चुकाने के लिए अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस से पेश हुए राजपाल भावुक हो गए। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने 6 करोड़ रुपए चुकाने के लिए 30 दिन का समय देने की मांग ठुकराते हुए कहा, “नहीं मतलब नहीं। फैसला सुरक्षित रखा जा रहा है और समय नहीं मिलेगा।” सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि पेमेंट करने की इच्छा है तो देरी क्यों हो रही है। कोर्ट ने कहा, “आप कह रहे हैं कि आप पेमेंट करना चाहते हैं, लेकिन आपके वकील कह रहे हैं कि जेल जा चुके हैं, इसलिए पेमेंट नहीं करेंगे। अगर आप पेमेंट करना चाहते हैं, तो फिर मामले की सुनवाई क्यों हो रही है। पेमेंट कर दीजिए।” शिकायतकर्ता पक्ष बोला- 7.75 करोड़ अभी भी बाकी मामले में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने कोर्ट में कहा कि सजा पूरी करने से वित्तीय देनदारी खत्म नहीं होती। वकील अवनीत सिंह सिक्का ने दलील दी कि राजपाल यादव 10 करोड़ रुपए का पेमेंट नहीं करने की बात स्वीकार कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि पेमेंट न होने के बाद ही कार्यवाही शुरू की गई। कुल 7.75 करोड़ रुपए अभी भी बकाया हैं, जबकि ट्रायल कोर्ट से पहले करीब 2 करोड़ रुपए जमा किए गए थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने वन-टाइम सेटलमेंट की संभावना भी तलाशी। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि कम समय में 6 करोड़ रुपए दिए जाएं तो विवाद सुलझ सकता है, जिस पर शिकायतकर्ता भी सहमत दिखा। राजपाल यादव ने कहा, “उन्होंने मुझसे 17 करोड़ रुपए ले लिए हैं। मेरे पांच फ्लैट बेचने पड़े हैं। मैं फिर से कोर्ट जाने के लिए तैयार हूं। मैं भावुक नहीं हूं, मुझे पांच बार और जेल भेज दो।” हालांकि, जब उन्होंने रकम जुटाने के लिए 30 दिन का समय मांगा तो अदालत ने इनकार कर दिया। समझौता नहीं होने पर हाईकोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। क्या है पूरा मामला साल 2010 में राजपाल यादव ने फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए प्राइवेट कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। यह फिल्म फ्लॉप रही और राजपाल यादव को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। राजपाल यादव समय रहते कर्ज की रकम नहीं लौटा सके। लोन लेते समय राजपाल यादव ने जो चेक कंपनी को दिए थे, वे बाउंस हो गए, जिसके बाद एक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई। दोनों पार्टियों के बीच समझौते के बावजूद पूरी पेमेंट नहीं हुई और समय के साथ ब्याज जुड़ता गया, जिससे कुल कर्ज काफी बढ़ गया। साल 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया और उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की, जहां उन्हें कई बार राहत मिली, क्योंकि उन्होंने भुगतान और समझौते का भरोसा दिया था। हालांकि, फरवरी 2026 की शुरुआत में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्टर को पूर्व में दी गई रियायतों और समय सीमा को बढ़ाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने उन्हें 4 फरवरी तक सरेंडर करने का आदेश दिया था, जिसके बाद उन्होंने 5 फरवरी को शाम लगभग 4 बजे आत्मसमर्पण किया। इसके बाद वह लगभग 12 दिन जेल में रहने के बाद 1.5 करोड़ रुपए जमा करने की शर्त पर अंतरिम जमानत पर 16 फरवरी को बाहर आए थे।
चेक बाउंस केस में सुनवाई के दौरान भावुक हुए राजपाल:बोले- पांच बार और जेल भेज दो, कोर्ट ने अतिरिक्त समय देने से मना किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में बकाया रकम चुकाने के लिए अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस से पेश हुए राजपाल भावुक हो गए। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने 6 करोड़ रुपए चुकाने के लिए 30 दिन का समय देने की मांग ठुकराते हुए कहा, “नहीं मतलब नहीं। फैसला सुरक्षित रखा जा रहा है और समय नहीं मिलेगा।” सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि पेमेंट करने की इच्छा है तो देरी क्यों हो रही है। कोर्ट ने कहा, “आप कह रहे हैं कि आप पेमेंट करना चाहते हैं, लेकिन आपके वकील कह रहे हैं कि जेल जा चुके हैं, इसलिए पेमेंट नहीं करेंगे। अगर आप पेमेंट करना चाहते हैं, तो फिर मामले की सुनवाई क्यों हो रही है। पेमेंट कर दीजिए।” शिकायतकर्ता पक्ष बोला- 7.75 करोड़ अभी भी बाकी मामले में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने कोर्ट में कहा कि सजा पूरी करने से वित्तीय देनदारी खत्म नहीं होती। वकील अवनीत सिंह सिक्का ने दलील दी कि राजपाल यादव 10 करोड़ रुपए का पेमेंट नहीं करने की बात स्वीकार कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि पेमेंट न होने के बाद ही कार्यवाही शुरू की गई। कुल 7.75 करोड़ रुपए अभी भी बकाया हैं, जबकि ट्रायल कोर्ट से पहले करीब 2 करोड़ रुपए जमा किए गए थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने वन-टाइम सेटलमेंट की संभावना भी तलाशी। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि कम समय में 6 करोड़ रुपए दिए जाएं तो विवाद सुलझ सकता है, जिस पर शिकायतकर्ता भी सहमत दिखा। राजपाल यादव ने कहा, “उन्होंने मुझसे 17 करोड़ रुपए ले लिए हैं। मेरे पांच फ्लैट बेचने पड़े हैं। मैं फिर से कोर्ट जाने के लिए तैयार हूं। मैं भावुक नहीं हूं, मुझे पांच बार और जेल भेज दो।” हालांकि, जब उन्होंने रकम जुटाने के लिए 30 दिन का समय मांगा तो अदालत ने इनकार कर दिया। समझौता नहीं होने पर हाईकोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। क्या है पूरा मामला साल 2010 में राजपाल यादव ने फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए प्राइवेट कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। यह फिल्म फ्लॉप रही और राजपाल यादव को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। राजपाल यादव समय रहते कर्ज की रकम नहीं लौटा सके। लोन लेते समय राजपाल यादव ने जो चेक कंपनी को दिए थे, वे बाउंस हो गए, जिसके बाद एक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई। दोनों पार्टियों के बीच समझौते के बावजूद पूरी पेमेंट नहीं हुई और समय के साथ ब्याज जुड़ता गया, जिससे कुल कर्ज काफी बढ़ गया। साल 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया और उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की, जहां उन्हें कई बार राहत मिली, क्योंकि उन्होंने भुगतान और समझौते का भरोसा दिया था। हालांकि, फरवरी 2026 की शुरुआत में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्टर को पूर्व में दी गई रियायतों और समय सीमा को बढ़ाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने उन्हें 4 फरवरी तक सरेंडर करने का आदेश दिया था, जिसके बाद उन्होंने 5 फरवरी को शाम लगभग 4 बजे आत्मसमर्पण किया। इसके बाद वह लगभग 12 दिन जेल में रहने के बाद 1.5 करोड़ रुपए जमा करने की शर्त पर अंतरिम जमानत पर 16 फरवरी को बाहर आए थे।
फ्लाइट में 60% सीटें मुफ्त देने के फैसले पर रोक:सरकार ने 15 दिन में फैसला बदला, कई एयरलाइंस ने आपत्ति जताई थी

केंद्र सरकार ने एयरलाइंस को फ्लाइट में 60% सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क के चुनने देने वाले निर्देश को अस्थायी रूप से रोक दिया है। न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि यह नियम 20 अप्रैल से लागू होना था, लेकिन अब इसे अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 15 दिन पहले 18 मार्च को कहा था कि डीजीसीए को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी फ्लाइट में सीट चयन के लिए न्यूनतम 60% सीटें बिना चार्ज उपलब्ध कराई जाएं। इसका उद्देश्य यात्रियों को सीट चुनने में समान अवसर देना बताया गया था। मंत्रालय के अनुसार, इस मुद्दे की समीक्षा के दौरान फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस की ओर से आपत्तियां भेजी गईं। इनमें ऑपरेशनल असर, किराए पर प्रभाव और मौजूदा डिरेगुलेटेड टैरिफ व्यवस्था से तालमेल जैसे मुद्दे उठाए गए। मंत्रालय ने कहा कि व्यापक जांच पूरी होने तक 60% सीटें मुफ्त देने का प्रावधान लागू नहीं किया जाएगा। मौजूदा नियम 20% सीटों पर ही लागू होता है मौजूदा नियमों में पैसेंजर्स के लिए 20% सीटें ही बिना एक्स्ट्रा चार्ज दिए बुक की जा सकती हैं, जबकि बाकी सीटों के लिए भुगतान करना पड़ता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी एयरलाइंस पंसद की सीटें चुनने पर 500 से 3000 रुपए तक एक्स्ट्रा चार्ज करती हैं। ‘प्रेफर्ड सीट’ के नाम पर एक्स्ट्रा चार्ज नहीं ले सकेंगी एयरलाइंस अक्सर देखा जाता है कि टिकट बुकिंग के बाद जब यात्री वेब चेक-इन करते हैं, तो उन्हें फ्री सीट के नाम पर केवल 20% ऑप्शन ही मिलते हैं। बाकी सीटों के लिए कंपनियां ‘प्रेफर्ड सीट’ के नाम पर भारी वसूली करती हैं। DGCA के 15 दिन पुराने आदेश में कहा था कि हर फ्लाइट में 60% सीटें ऐसी होनी चाहिए, जिन्हें यात्री बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के चुन सकें। हालांकि अभी यह लागू नहीं होगा। केंद्रीय मंत्री बोले- भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू एविएशन मार्केट सिविल एविएशन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू एविएशन मार्केट बन गया है। भारतीय एयरपोर्ट अब हर दिन 5 लाख से ज्यादा यात्रियों को संभाल रहे हैं। उड़ान योजना से भारत में हवाई यात्रा अब सिर्फ अमीर लोगों का अधिकार न रहकर, सभी के लिए सुलभ बन गई है। देश में हवाई यात्रा को और भी आसान बनाने के लिए लगातार कोशिशें जारी हैं, जैसे उड़ान यात्री कैफे, जहां किफायती खाना मिलता है, फ्लाईब्रेरी में किताबें मुफ्त पढ़ने मिलती हैं और टर्मिनल पर फ्री वाई-फाई। —————- ये खबर भी पढ़ें… एयर टिकट बुकिंग 48 घंटे में कैंसिल की तो फुल-रिफंड: फ्लाइट से 7 दिन पहले बुकिंग जरूरी, DGCA के नए नियम; जानें बदलाव नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने गुरुवार को हवाई यात्रा के टिकट रिफंड और कैंसिल करने से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक, अब टिकट बुक करने के 48 घंटे के भीतर कैंसिल या बदलाव करने पर एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा, यानी टिकट का पूरा अमाउंट रिफंड किया जाएगा। यह फैसला यात्रियों की बढ़ती शिकायतों और हाल ही में इंडिगो की उड़ानों में हुई दिक्कतों के बाद लिया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
फ्लाइट में 60% सीटें मुफ्त देने के फैसले पर रोक:सरकार ने 15 दिन में फैसला बदला, कई एयरलाइंस ने आपत्ति जताई थी

केंद्र सरकार ने एयरलाइंस को फ्लाइट में 60% सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क के चुनने देने वाले निर्देश को अस्थायी रूप से रोक दिया है। न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि यह नियम 20 अप्रैल से लागू होना था, लेकिन अब इसे अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 15 दिन पहले 18 मार्च को कहा था कि डीजीसीए को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी फ्लाइट में सीट चयन के लिए न्यूनतम 60% सीटें बिना चार्ज उपलब्ध कराई जाएं। इसका उद्देश्य यात्रियों को सीट चुनने में समान अवसर देना बताया गया था। मंत्रालय के अनुसार, इस मुद्दे की समीक्षा के दौरान फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस की ओर से आपत्तियां भेजी गईं। इनमें ऑपरेशनल असर, किराए पर प्रभाव और मौजूदा डिरेगुलेटेड टैरिफ व्यवस्था से तालमेल जैसे मुद्दे उठाए गए। मंत्रालय ने कहा कि व्यापक जांच पूरी होने तक 60% सीटें मुफ्त देने का प्रावधान लागू नहीं किया जाएगा। मौजूदा नियम 20% सीटों पर ही लागू होता है मौजूदा नियमों में पैसेंजर्स के लिए 20% सीटें ही बिना एक्स्ट्रा चार्ज दिए बुक की जा सकती हैं, जबकि बाकी सीटों के लिए भुगतान करना पड़ता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी एयरलाइंस पंसद की सीटें चुनने पर 500 से 3000 रुपए तक एक्स्ट्रा चार्ज करती हैं। ‘प्रेफर्ड सीट’ के नाम पर एक्स्ट्रा चार्ज नहीं ले सकेंगी एयरलाइंस अक्सर देखा जाता है कि टिकट बुकिंग के बाद जब यात्री वेब चेक-इन करते हैं, तो उन्हें फ्री सीट के नाम पर केवल 20% ऑप्शन ही मिलते हैं। बाकी सीटों के लिए कंपनियां ‘प्रेफर्ड सीट’ के नाम पर भारी वसूली करती हैं। DGCA के 15 दिन पुराने आदेश में कहा था कि हर फ्लाइट में 60% सीटें ऐसी होनी चाहिए, जिन्हें यात्री बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के चुन सकें। हालांकि अभी यह लागू नहीं होगा। केंद्रीय मंत्री बोले- भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू एविएशन मार्केट सिविल एविएशन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू एविएशन मार्केट बन गया है। भारतीय एयरपोर्ट अब हर दिन 5 लाख से ज्यादा यात्रियों को संभाल रहे हैं। उड़ान योजना से भारत में हवाई यात्रा अब सिर्फ अमीर लोगों का अधिकार न रहकर, सभी के लिए सुलभ बन गई है। देश में हवाई यात्रा को और भी आसान बनाने के लिए लगातार कोशिशें जारी हैं, जैसे उड़ान यात्री कैफे, जहां किफायती खाना मिलता है, फ्लाईब्रेरी में किताबें मुफ्त पढ़ने मिलती हैं और टर्मिनल पर फ्री वाई-फाई। —————- ये खबर भी पढ़ें… एयर टिकट बुकिंग 48 घंटे में कैंसिल की तो फुल-रिफंड: फ्लाइट से 7 दिन पहले बुकिंग जरूरी, DGCA के नए नियम; जानें बदलाव नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने गुरुवार को हवाई यात्रा के टिकट रिफंड और कैंसिल करने से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक, अब टिकट बुक करने के 48 घंटे के भीतर कैंसिल या बदलाव करने पर एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा, यानी टिकट का पूरा अमाउंट रिफंड किया जाएगा। यह फैसला यात्रियों की बढ़ती शिकायतों और हाल ही में इंडिगो की उड़ानों में हुई दिक्कतों के बाद लिया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
उत्तराखंड की बेटी ने जापान में जीता ब्रॉन्ज मेडल:फटे जूतों की कहानी सुन क्रिकेटर स्नेह राणा ने दिए नए स्पाइक्स, बोलीं- हमेशा साथ निभाऊंगी

रुड़की के एक छोटे से गांव की रहने वाली एथलीट सोनिया ने जापान के फुकुओका में हुई 18वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। बेहद साधारण परिवार से आने वाली सोनिया का यह सफर संघर्षों से भरा रहा, जहां संसाधनों की कमी हर कदम पर चुनौती बनकर सामने आई। बीते दिन इस संघर्ष और उपलब्धि की कहानी जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर स्नेह राणा तक पहुंची, तो उन्होंने सोनिया को देहरादून स्थित अपने स्पोर्ट्स स्ट्राइव टर्फ पर बुलाया। यहां उन्होंने सोनिया को प्रोफेशनल स्पोर्ट्स शूज और बेहतर न्यूट्रिशन सपोर्ट देकर न सिर्फ मदद की, बल्कि ताउम्र साथ निभाने का भरोसा भी दिया। सोनिया के लिए यह पल भावुक कर देने वाला था। फटे जूतों में दौड़कर मेडल जीतने वाली यह एथलीट जब नए स्पाइक्स हाथ में लिए खड़ी थी, तो उसकी आंखों में सिर्फ आंसू ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का नया आत्मविश्वास भी साफ दिखाई दे रहा था। टर्फ पर मिला साथ, भावुक हो गई सोनिया देहरादून के सिनोला स्थित टर्फ पर जब सोनिया पहुंचीं, तो उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि उनके लिए क्या इंतजार कर रहा है। स्नेह राणा ने उन्हें गले लगाया, हालचाल पूछा और फिर उन्हें प्रोफेशनल स्पोर्ट्स शूज और न्यूट्रिशन सपोर्ट सौंपा। यह वही चीजें थीं, जिनकी कमी सोनिया को सालों से महसूस होती रही थी। जैसे ही उन्होंने नए जूते हाथ में लिए, उनकी आंखें भर आईं। बातचीत के दौरान वह खुद को संभाल नहीं पाईं। परिवार की हालत कमजोर, बहनों ने निभाया मां का रोल सोनिया का संघर्ष सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं था। उनका पूरा बचपन आर्थिक तंगी में बीता। परिवार में चार बहनें और एक भाई हैं। पिता मजदूरी करके घर चलाते हैं और मां का निधन हो चुका है। ऐसे हालात में खेल को करियर बनाना आसान नहीं था। सोनिया बताती हैं कि कई बार ऐसा वक्त आया जब ट्रेनिंग छोड़ने का मन हुआ, लेकिन उनकी बहनों ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। उन्होंने मां की कमी पूरी की, हिम्मत दी और हर मुश्किल में साथ खड़ी रहीं। यही वजह रही कि सोनिया ने हालातों के आगे घुटने नहीं टेके और अपने सपनों को जिंदा रखा। गांव के ताने, लेकिन इरादे रहे मजबूत सोनिया के सफर में सिर्फ आर्थिक परेशानियां ही नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव भी बड़ी चुनौती रहा। गांव के लोग अक्सर ताने मारते थे और परिवार से कहते थे कि लड़की को वापस बुला लो। लेकिन सोनिया ने इन बातों को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। वह कहती हैं कि उन्होंने हमेशा खुद को अंदर से मजबूत रखा और लोगों को जवाब देने के बजाय अपनी मेहनत से साबित करने का रास्ता चुना।। फटे जूतों में जीता नेशनल मेडल सोनिया की असली पहचान 2025 में हुए राष्ट्रीय खेल 2025 के दौरान बनी। 10,000 मीटर की दौड़ में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता, लेकिन इस जीत की सबसे बड़ी बात यह थी कि उनके पास दौड़ने के लिए सही स्पाइक्स तक नहीं थे। वह फटे जूतों में ट्रैक पर उतरीं और 35 मिनट 45.19 सेकंड का समय निकालकर पदक अपने नाम किया। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि उनके संघर्ष और जज्बे की सबसे बड़ी मिसाल थी। इसी दौरान उन्होंने बताया था कि एक एथलीट के लिए सही डाइट लेना कितना मुश्किल होता है। महंगे सप्लीमेंट्स तो दूर, वह सस्ते मल्टी-विटामिन के सहारे ही अपनी तैयारी कर रही थीं। न्यूट्रिशन की कमी, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी सोनिया ने कभी भी प्रोफेशनल लेवल का न्यूट्रिशन नहीं लिया। वह बताती हैं कि उन्होंने आज तक कोई महंगा सप्लीमेंट नहीं खरीदा। ऑनलाइन सस्ते मल्टी-विटामिन खरीदकर ही उन्होंने अपनी ट्रेनिंग जारी रखी। कई बार शरीर साथ नहीं देता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अब स्नेह राणा के सपोर्ट के बाद उन्हें उम्मीद है कि वह अपनी ट्रेनिंग को और बेहतर बना पाएंगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अच्छे प्रदर्शन कर सकेंगी। स्नेह राणा बोलीं- मैं भी इसी रास्ते से आई हूं स्नेह राणा ने सोनिया से मुलाकात के दौरान अपने संघर्ष भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वह भी एक छोटे गांव से आई हैं, जहां महिला क्रिकेट को लेकर जागरूकता नहीं थी। लोगों के ताने, संसाधनों की कमी और सामाजिक सोच- इन सभी का सामना उन्होंने भी किया है। उन्होंने कहा कि जब लोग कहते थे कि तुम यह नहीं कर सकती, तो वह और ज्यादा जिद्दी हो जाती थीं। यही जिद उन्हें यहां तक लेकर आई। अब एशियन गेम्स पर नजर जापान में ब्रॉन्ज जीतने के बाद सोनिया का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है। अब उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करना है। स्नेह राणा के सपोर्ट से उन्हें नई ऊर्जा मिली है। बेहतर जूते, सही न्यूट्रिशन और मानसिक सहयोग- ये तीनों चीजें अब उनके पास हैं, जो किसी भी एथलीट के लिए बेहद जरूरी होती हैं। सोनिया की कहानी आज उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं।
चुप्पी, अनुपस्थिति या अधिक: AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से क्यों हटाया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:03 अप्रैल, 2026, 05:09 IST AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया, उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया, इस कदम से अटकलों को हवा मिली क्योंकि नेताओं ने पार्टी के प्रमुख मुद्दों पर चड्ढा की चुप्पी का हवाला दिया। आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा एक महत्वपूर्ण कदम में, आम आदमी पार्टी (आप) ने बुधवार को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उच्च सदन में उपनेता के पद से हटा दिया, जो पार्टी के भीतर आंतरिक दरार के संकेत देता है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर चड्ढा को पार्टी के उपनेता पद से हटाने के फैसले की जानकारी दी। पार्टी ने यह भी अनुरोध किया है कि राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। आप के पंजाब सांसद अशोक मित्तल को चड्ढा का उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया है। पत्रकारों से बात करते हुए, मित्तल ने कहा कि केजरीवाल ने उन्हें नई भूमिका सौंपी है और वह अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करेंगे और पार्टी के रुख और राष्ट्रीय हितों दोनों को सदन में मजबूती से रखेंगे। राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया इस कदम के कुछ घंटों बाद, राज्यसभा सांसद ने राज्यसभा में अपने तर्कों और हस्तक्षेपों का संकलन साझा करके परोक्ष प्रतिक्रिया जारी की। तीन मिनट के वीडियो में 37 वर्षीय नेता को वायु प्रदूषण और बढ़ते हवाई किराए से लेकर गिग श्रमिकों के अधिकारों और मोबाइल प्रीपेड योजनाओं की 28-दिन की वैधता सहित कई मुद्दों पर चिंता व्यक्त करते हुए दिखाया गया है। स्वाति मालीवाल के बाद वह आप के दूसरे राज्यसभा सांसद बन गए हैं, जिनका पार्टी नेतृत्व से मतभेद हो गया है। उसे क्यों हटाया गया? हालाँकि कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, लेकिन कई मीडिया रिपोर्टों में सुझाव दिया गया है कि अनुशासन और पार्टी के रुख के साथ तालमेल की चिंताओं ने उन्हें पद से हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई होगी। हालांकि चड्ढा ने अभी तक इस निष्कासन पर चर्चा नहीं की है, लेकिन मामले से परिचित लोगों का कहना है कि पार्टी का निर्णय “आप से संबंधित मामलों पर उनकी चुप्पी और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाले कार्यक्रमों से अनुपस्थिति” के कारण है। आप के मुख्य मुद्दों पर उनकी चुप्पी ने बाहर निकलने की अफवाहों को हवा दे दी थी, खासकर तब जब उन्हें असम के लिए पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची से बाहर कर दिया गया था। पीटीआई के मुताबिक, पार्टी नेताओं ने दावा किया है कि केजरीवाल और मनीष सिसौदिया की गिरफ्तारी के दौरान चड्ढा की चुप्पी एक प्रमुख मुद्दा रही है. ऐसा प्रतीत होता है कि चड्ढा ने खुद को पार्टी के प्रमुख मुद्दों से दूर कर लिया है। 2025 के दिल्ली चुनावों में AAP की हार के बाद, उनका सार्वजनिक ध्यान व्यापक नीतिगत चिंताओं की ओर स्थानांतरित हो गया। मार्च 2024 में जब दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल को उत्पाद शुल्क नीति मामले में गिरफ्तार किया गया था, तब चड्ढा चिकित्सा कारणों से विदेश में थे। वह केजरीवाल की लगभग छह महीने की कैद के दौरान दूर रहे और 13 सितंबर, 2024 को उनकी रिहाई के कुछ दिनों बाद ही उनसे मिले। अभी हाल ही में, चड्ढा ने तब चुप्पी साध ली जब पिछले महीने दिल्ली की एक अदालत ने केजरीवाल, सिसौदिया और अन्य आप नेताओं को उत्पाद शुल्क मामले में बरी कर दिया था। अदालत से राहत के बाद वह केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस और जंतर-मंतर पर हुई हालिया रैली में भी शामिल नहीं हुए। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि चड्ढा को अन्य राज्यों में पार्टी के राजनीतिक अभियानों और संगठनात्मक मामलों से लगातार दरकिनार किया जा रहा है, हालांकि वह संसद के अंदर और बाहर मुखर रहे हैं। AAP ने आंतरिक दरार का खंडन किया चड्ढा की जगह लेने वाले मित्तल ने मीडिया से कहा कि विकास ढूंढना पार्टी की “सामान्य प्रक्रिया” का हिस्सा है। बदलाव को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हुए उन्होंने इसे एक नियमित प्रक्रिया बताया और कहा कि पहले एनडी गुप्ता उच्च सदन में पार्टी के उपनेता थे और फिर चड्ढा को यह जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने कहा, “अब, मुझे यह भूमिका दी गई है। हमारी पार्टी चाहती है कि सभी सांसद सीखें और शायद उसी संदर्भ में, मुझे यह भूमिका दी गई है ताकि मैं राजनीति में प्रक्रियाओं और प्रशासनिक कौशल सीख सकूं।” उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूत बनी हुई है। आप सांसद संजय सिंह ने पार्टी के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ”हमने पार्टी के फैसले के बारे में राज्यसभा सचिवालय को सूचित कर दिया है.” AAP के वर्तमान में राज्यसभा में 10 सदस्य हैं, जिनमें पंजाब से सात और दिल्ली से तीन शामिल हैं। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) पहले प्रकाशित: 03 अप्रैल, 2026, 05:09 IST समाचार राजनीति चुप्पी, अनुपस्थिति या अधिक: AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से क्यों हटाया? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राघव चड्ढा को हटाना(टी)आम आदमी पार्टी(टी)आप की आंतरिक दरार(टी)राज्यसभा उपनेता(टी)अरविंद केजरीवाल नेतृत्व(टी)अशोक मित्तल की नियुक्ति(टी)स्वाति मालीवाल नतीजा(टी)आप राज्यसभा सांसद
एक्टर रणदीप हुड्डा की मां की फिल्मों में एंट्री:पहली मूवी में निभाया दादी का किरदार; बेटे ने मजाकिया अंदाज में दी बधाई

बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा की मां आशा हुड्डा ने भी अपनी पहली फिल्म में दादी का किरदार निभाया है। रणदीप हुड्डा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से भी अपनी मां की फिल्म को लेकर एक पोस्ट शेयर की है। पोस्ट के जरिए उन्होनें हास्य अंदाज में लिखा, “जिब मां के रोल का टेम था, टेम ना मिल्या, तै ईब सीधा दादी का।” स्टेज ऐप पर रिलीज हुई फिल्म सांगी में आदि का किरदार निभा रही आशा हुड्डा दैनिक भास्कर एप से बातचीत की। कॉलेज के दिनों से एक्टिंग का शौक आशा हुड्डा ने कहा कि 1971 में उन्होंने अपनी रोहतक महिला कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी। कॉलेज के दिनों से ही वे स्टेज पर ड्रामा और एक्टिंग में हिस्सा लेती थी। हालांकि, उनका उस दौरान से ही एक्टिंग करने का मन था। बाद में शादी होने के बाद वह पारिवारिक और राजनीति में सक्रिय भूमिका के साथ काम करती रहीं। रणदीप से मजाक में कहती थी मां का रोल दिलवाना आशा हुड्डा बताती हैं कि अपने स्ट्रगल टाइम से निकाल कर जब रणदीप हुड्डा ने बॉलीवुड में दमदार एंट्री की, तो उसके बाद एक कभी-कभी मजाक में रणदीप को उनकी माता आशा हुड्डा का देती थी कि रणदीप पर अगर कभी मां का रोल मिले तो मुझे भी ले लेना, लेकिन उन्होंने कभी एक्टिंग बॉलीवुड में नहीं की। डेढ़ साल पहले फिल्म का मिला ऑफर वहीं, करीबन डेढ़ साल पहले सोनीपत की रहने वाली गीतू परी ने उन्हें फिल्म के रोल के लिए कॉल किया था। आशा हुड्डा बताती है कि सांगी फिल्म में काम के लिए जब उन्हें किरदार बताया गया, उन्होंने तुरंत हां कर दी। जहां उन्हें फिल्म में साक्षी की दादी का रोल मिला है। जींद में डेढ़ दिन की हुई शूटिंग आशा हुड्डा अपने किरदार को लेकर बताती हैं कि उन्हें डेढ़ दिन के लिए शूटिंग के लिए बुलाया गया था। शूटिंग जींद में और आसपास के क्षेत्र में हुई है। आशा हुड्डा ने बताया कि उनका भी हमेशा मान रहा है कि अपनी संस्कृति के लिए अगर काम करने का मौका मिलेगा तो वह जरूर काम करेंगे और इसी इरादे के साथ उन्होंने हरियाणवी संस्कृति में दादी का किरदार मिला है। रणदीप ने मां के किरदार पर यूं किया रिएक्ट रणदीप हुड्डा की मां ने बताया कि करीबन ने डेढ़ साल पहले जब वह हरियाणा के जींद में शूटिंग करके घर पहुंची थी, तो उसने रणदीप को बताया था कि वह शूटिंग करके आई है, तो इस दौरान रणदीप बहुत जोर-जोर से हंसा था और बोला की मां आखिर दादी का रोल कर रही है। और अपनी मां के इस जज्बे को लेकर रणदीप ने सराहना की थी। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट अब जब फिल्म रिलीज हुई है तो रणदीप हुड्डा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से अपनी मां की फिल्म के लिए पोस्ट शेयर किया है। रणदीप हुड्डा ने लिखा- मां का रोल नहीं मिला, तो सीधा बनी दादी। उनकी यह मजेदार पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। फैंस को पसंद आया रणदीप का अंदाज अपनी मां किरदार को लेकर बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा ने इस हल्के-फुल्के अंदाज ने फैंस का ध्यान खींच लिया। उन्होंने आगे अपनी टीम के लिए शुभकामनाएं देते हुए लिखा, “आज आपको स्क्रीन पर देखने के लिए उत्साहित हूं मम्मी… पूरी टीम को ढेर सारी शुभकामनाएं।” इस पोस्ट के जरिए एक्ट्रेस ने इंडस्ट्री की उस सच्चाई को भी मजाकिया अंदाज में सामने रखा, जहां कलाकारों को उम्र से अलग किरदार निभाने पड़ते हैं। फैंस भी इस पोस्ट पर जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं और इसे काफी पसंद किया जा रहा है। यहां जानिए कौन है आशा हुड्डा… आशा हुड्डा मूलरूप से गांव छारा की रहने वाली है और उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन पॉलिटिकल साइंस से रोहतक से 1973 में की थी। 1975 में उन्होंने छोटू राम कॉलेज रोहतक से बीएड की पढ़ाई पूरी की। राजनीतिक और सामाजिक सफर आशा हुड्डा ने बताया कि फरीदाबाद में उनका मकान है और रोहतक और फरीदाबाद में उन्होंने काफी काम किया है और 1994 में मुख्यमंत्री साहब सिंह वर्मा ने उन्हें राजनीति में जिला अध्यक्ष के रूप में ज्वाइन कराया था। भाजपा में वे अपनी सक्रिय भूमिका के साथ रही है। 1994 से लेकर 2000 तक वह जिला अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं देती रही हैं। महिला मोर्चा और राष्ट्रीय जिम्मेदारियां हरियाणा प्रदेश महिला मोर्चा की 2000 से लेकर 2003 तक जनरल सेक्रेटरी रही है। वहीं इसके बाद वे राष्ट्रीय कार्यकारिणी शिक्षक प्रकोष्ठ की पंजाब प्रभारी रही। वही पारिवारिक काम के चलते करीबन 3 साल वह अमेरिका में भी रही उसके बाद वापस लौटकर फिल्म सेंसर बोर्ड दिल्ली जोन की सदस्य साल 2008 में रही है। भाजपा में सक्रिय भूमिका और अन्य पद वहीं बीजेपी पार्टी ने उन्हें साल 2018 में पावर जेनरेशन हरियाणा की डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया था। इसके बाद प्रदेश कार्यकारिणी की सदस्य के रूप में भी उन्होंने 8 साल अपनी पार्टी के प्रति समर्पित भाव रखते हुए काम किया है। विधानसभा टिकट की दावेदारी वही साल 2014 और 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान पृथला विधानसभा से भी उन्होंने टिकट की दावेदारी की थी। लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला और उसके बाद भी उन्होंने बीजेपी का दामन थाम कर रखा और लगातार भाजपा के साथ जुड़कर कार्यकर्ता के रूप में काम करती रही है। पृथला भी विधानसभा में उनके मामा रहते हैं इसलिए वहां से लगाव था और वहीं से वह टिकट मांग रही थी। फिल्म ‘सांगी’ की कहानी और कलाकार के बारे में जानिए सोनीपत की रहने वाली गीतू परी और अन्ना फिल्म फैक्ट्री, गीतू फिल्म द्वारा क्रिएट की गई है। फिल्म में आशा हुड्डा, रोहित बच्ची, गीतू व साक्षी दलाल ने किरदार निभाया है। वहीं, डायरेक्टर रविंद्र बजवान अन्ना हैं। संघर्ष और लव स्टोरी पर आधारित फिल्म जानकारी के मुताबिक, फिल्म में एक सांगी कलाकार के संघर्ष की कहानी है और फिल्म में लव स्टोरी भी है। जहां लीड रोल में किरदार साक्षी दलाल निभा रही है। कुलदीप का सांगी कलाकार हैं और उसके बेड़े में अमन भी शामिल होता हैं। इस दौरान ने वह साक्षी के संपर्क में आता है और उससे प्यार करने
बालाघाट में हनुमान जयंती पर निकली शोभायात्रा:साधक मोहित सोनी ने 40 किलो वजनी हनुमान स्वरूप धारण किया; 40 दिनों तक तपस्या की

बालाघाट जिले में हनुमान जयंती पर गुरुवार शाम को श्रद्धा और भक्ति के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इस वर्ष आकर्षण का मुख्य केंद्र युवा साधक मोहित सोनी रहे, जिन्होंने भगवान हनुमान का स्वरूप धारण कर 40 किलो वजनी मुकुट के साथ नगर भ्रमण किया। ‘हनुमान सेवा दल समिति’ और ‘मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर ट्रस्ट’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शोभायात्रा से पूरा नगर ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। 40 दिनों के कठिन ब्रह्मचर्य और तपस्या के बाद मिली सिद्धि परंपरा के अनुसार, प्रतिवर्ष हनुमान जी का स्वरूप धारण करने के लिए एक साधक का चयन किया जाता है, जिसे 40 दिनों तक कठोर ब्रह्मचर्य का पालन और विशेष साधना करनी होती है। इस वर्ष यह सौभाग्य मोहित सोनी को प्राप्त हुआ। 40 दिनों की तपस्या पूर्ण करने के बाद उन्होंने भारी-भरकम मुकुट और वेशभूषा धारण की और बैंड-बाजे व ढोल की थाप पर भक्तों के साथ नृत्य भी किया। मुख्य मार्गों से गुजरी यात्रा शोभायात्रा का शुभारंभ शाम 8 बजे मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर से हुआ। यहां से यह काली पुतली चौक और अहिंसा द्वार होते हुए नगर के मुख्य मार्गों से निकली। मार्ग में पड़ने वाले सभी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। लोगों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न देवी-देवताओं की झांकियां भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। 11 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठानों का समापन इस भव्य शोभायात्रा के साथ ही पिछले 11 दिनों से चल रहे विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का भी विधि-विधान से समापन हो गया। आयोजन में हनुमान सेवा दल के शंकर मोटवानी, राजू सोनी, सुनील आडवाणी सहित सैकड़ों की संख्या में पदाधिकारी और श्रद्धालु शामिल हुए। सुरक्षा व्यवस्था के बीच देर रात तक नगर में भक्ति का माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त किया। देखें तस्वीरें…
पपीता की पहचान कैसे करें: रंग देखकर पपीता की गलती न करें! पपीता मीठा है या नहीं, बस अपनाएं ये 3 आसान तरीके

पपीते की पहचान कैसे करें: पपीता एक ऐसा फल है जो केवल स्वाद में सबसे अच्छा होता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए किसी भी समृद्धि से कम नहीं है। विटामिन ए, सी और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर पपीता पाचन तंत्र को बनाए रखने और त्वचा में चमक लाने के लिए जाना जाता है। लेकिन बार-बार बाजार में हम एक समस्या बड़ी का सामना करते हैं और वह पपीता ऊपर से एकदम पीला और सुंदर दिखता है, लेकिन घर काटने वाला पर वह या तो अनोखा किरदार है या पूरी तरह से पका हुआ नहीं होता है। ज्यादातर लोग रंग-बिरंगे देखकर पेज टैग पर आधारित होते हैं, जो एक बड़ी चूक साबित हो सकते हैं। हम आपको इस लेख में विस्तार से जानते हैं। ऊपरी त्वचा की मजबूती और दबाव का पता लगाएं पपीते की कीमत और उसके मसाले का सबसे खास क्वालिटी वाला नमूना उसे चुना जा सकता है। जब आप पपीता का स्वाद चखें, तो उसे अपने रेस्तरां के बीच के किनारे पर ले जाएं। अगर पपीता ग्रोइन पर थोड़ा सा नरम महसूस हो रहा है (जैसे पका हुआ टमाटर या एवोकैडो), तो समझ लें कि वह अंदर से अच्छी तरह पका हुआ और मीठा है। यदि पपीता पत्थर की तरह सख्त है, तो वह कच्चा है। वहीं, अगर वह बहुत अधिक पिप्पिपा या जरूरत से ज्यादा पोषित है, तो उसे अंदर से बुरा भुगतान किया जा सकता है। कुक के पास की जानकारी से पता करें किसी भी फल का मिश्रण उसके सुगंध में दिखता है। पपीता का विशेष समय उसे नाक के पास ले जाता है, उस हिस्से के हिस्से की तरफ जहां से वह सिलिकॉन से घूमने जाता है। यह बात इस बात का संकेत है कि फल प्राकृतिक रूप से चुकाया गया है। यदि पपीते से कोई संतुष्टि नहीं आ रही है, तो वह आश्वस्त हो सकता है। इसके विपरीत, यदि इसमें बहुत तेजी से या सिरके जैसी गंध आ रही है, तो इसका मतलब है कि फल सुग्गा शुरू हो गया है। मिट्टी के दाग और रंगत से पता करें सिर्फ पीले रंग का माचिस की ख़ातिर नहीं है, क्योंकि आजकल के फलों को फ़ेवल से भी मसाला मिलता है। आपको पपीते की रंगत में गहराई देखनी चाहिए। वह पपीता अपनी त्वचा पर सीधे पीले या नारंगी रंग के साथ मध्य एशिया निशान या ‘झुर्रियां’ होन का चयन करें। पूरी तरह से पतला और चमकीला पीला पपीता बार-बार पकता है। साथ ही, यदि पपीते के मिश्रण का एक भाग हरा है और शेष भाग पीला है, तो वह मसाले की प्रक्रिया में है और मीठा हो सकता है। (टैग अनुवाद करने के लिए) सर्वोत्तम पपीता गुणवत्ता (टी) ताजे फलों का चयन (टी) किराने की खरीदारी के तरीके (टी) स्वस्थ फलों के टिप्स (टी) मीठा पपीता कैसे चुनें (टी) पके पपीते की पहचान करें (टी) पपीता खरीदने के टिप्स (टी) पपीता गंध परीक्षण (टी) पका बनाम कच्चा पपीता (टी) मीठा पपीता हैक









