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उत्तराखंड की बेटी ने जापान में जीता ब्रॉन्ज मेडल:फटे जूतों की कहानी सुन क्रिकेटर स्नेह राणा ने दिए नए स्पाइक्स, बोलीं- हमेशा साथ निभाऊंगी

उत्तराखंड की बेटी ने जापान में जीता ब्रॉन्ज मेडल:फटे जूतों की कहानी सुन क्रिकेटर स्नेह राणा ने दिए नए स्पाइक्स, बोलीं- हमेशा साथ निभाऊंगी

रुड़की के एक छोटे से गांव की रहने वाली एथलीट सोनिया ने जापान के फुकुओका में हुई 18वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। बेहद साधारण परिवार से आने वाली सोनिया का यह सफर संघर्षों से भरा रहा, जहां संसाधनों की कमी हर कदम पर चुनौती बनकर सामने आई। बीते दिन इस संघर्ष और उपलब्धि की कहानी जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर स्नेह राणा तक पहुंची, तो उन्होंने सोनिया को देहरादून स्थित अपने स्पोर्ट्स स्ट्राइव टर्फ पर बुलाया। यहां उन्होंने सोनिया को प्रोफेशनल स्पोर्ट्स शूज और बेहतर न्यूट्रिशन सपोर्ट देकर न सिर्फ मदद की, बल्कि ताउम्र साथ निभाने का भरोसा भी दिया। सोनिया के लिए यह पल भावुक कर देने वाला था। फटे जूतों में दौड़कर मेडल जीतने वाली यह एथलीट जब नए स्पाइक्स हाथ में लिए खड़ी थी, तो उसकी आंखों में सिर्फ आंसू ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का नया आत्मविश्वास भी साफ दिखाई दे रहा था। टर्फ पर मिला साथ, भावुक हो गई सोनिया देहरादून के सिनोला स्थित टर्फ पर जब सोनिया पहुंचीं, तो उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि उनके लिए क्या इंतजार कर रहा है। स्नेह राणा ने उन्हें गले लगाया, हालचाल पूछा और फिर उन्हें प्रोफेशनल स्पोर्ट्स शूज और न्यूट्रिशन सपोर्ट सौंपा। यह वही चीजें थीं, जिनकी कमी सोनिया को सालों से महसूस होती रही थी। जैसे ही उन्होंने नए जूते हाथ में लिए, उनकी आंखें भर आईं। बातचीत के दौरान वह खुद को संभाल नहीं पाईं। परिवार की हालत कमजोर, बहनों ने निभाया मां का रोल सोनिया का संघर्ष सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं था। उनका पूरा बचपन आर्थिक तंगी में बीता। परिवार में चार बहनें और एक भाई हैं। पिता मजदूरी करके घर चलाते हैं और मां का निधन हो चुका है। ऐसे हालात में खेल को करियर बनाना आसान नहीं था। सोनिया बताती हैं कि कई बार ऐसा वक्त आया जब ट्रेनिंग छोड़ने का मन हुआ, लेकिन उनकी बहनों ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। उन्होंने मां की कमी पूरी की, हिम्मत दी और हर मुश्किल में साथ खड़ी रहीं। यही वजह रही कि सोनिया ने हालातों के आगे घुटने नहीं टेके और अपने सपनों को जिंदा रखा। गांव के ताने, लेकिन इरादे रहे मजबूत सोनिया के सफर में सिर्फ आर्थिक परेशानियां ही नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव भी बड़ी चुनौती रहा। गांव के लोग अक्सर ताने मारते थे और परिवार से कहते थे कि लड़की को वापस बुला लो। लेकिन सोनिया ने इन बातों को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। वह कहती हैं कि उन्होंने हमेशा खुद को अंदर से मजबूत रखा और लोगों को जवाब देने के बजाय अपनी मेहनत से साबित करने का रास्ता चुना।। फटे जूतों में जीता नेशनल मेडल सोनिया की असली पहचान 2025 में हुए राष्ट्रीय खेल 2025 के दौरान बनी। 10,000 मीटर की दौड़ में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता, लेकिन इस जीत की सबसे बड़ी बात यह थी कि उनके पास दौड़ने के लिए सही स्पाइक्स तक नहीं थे। वह फटे जूतों में ट्रैक पर उतरीं और 35 मिनट 45.19 सेकंड का समय निकालकर पदक अपने नाम किया। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि उनके संघर्ष और जज्बे की सबसे बड़ी मिसाल थी। इसी दौरान उन्होंने बताया था कि एक एथलीट के लिए सही डाइट लेना कितना मुश्किल होता है। महंगे सप्लीमेंट्स तो दूर, वह सस्ते मल्टी-विटामिन के सहारे ही अपनी तैयारी कर रही थीं। न्यूट्रिशन की कमी, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी सोनिया ने कभी भी प्रोफेशनल लेवल का न्यूट्रिशन नहीं लिया। वह बताती हैं कि उन्होंने आज तक कोई महंगा सप्लीमेंट नहीं खरीदा। ऑनलाइन सस्ते मल्टी-विटामिन खरीदकर ही उन्होंने अपनी ट्रेनिंग जारी रखी। कई बार शरीर साथ नहीं देता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अब स्नेह राणा के सपोर्ट के बाद उन्हें उम्मीद है कि वह अपनी ट्रेनिंग को और बेहतर बना पाएंगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अच्छे प्रदर्शन कर सकेंगी। स्नेह राणा बोलीं- मैं भी इसी रास्ते से आई हूं स्नेह राणा ने सोनिया से मुलाकात के दौरान अपने संघर्ष भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वह भी एक छोटे गांव से आई हैं, जहां महिला क्रिकेट को लेकर जागरूकता नहीं थी। लोगों के ताने, संसाधनों की कमी और सामाजिक सोच- इन सभी का सामना उन्होंने भी किया है। उन्होंने कहा कि जब लोग कहते थे कि तुम यह नहीं कर सकती, तो वह और ज्यादा जिद्दी हो जाती थीं। यही जिद उन्हें यहां तक लेकर आई। अब एशियन गेम्स पर नजर जापान में ब्रॉन्ज जीतने के बाद सोनिया का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है। अब उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करना है। स्नेह राणा के सपोर्ट से उन्हें नई ऊर्जा मिली है। बेहतर जूते, सही न्यूट्रिशन और मानसिक सहयोग- ये तीनों चीजें अब उनके पास हैं, जो किसी भी एथलीट के लिए बेहद जरूरी होती हैं। सोनिया की कहानी आज उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं।

चुप्पी, अनुपस्थिति या अधिक: AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से क्यों हटाया | राजनीति समाचार

Ramayana teaser features Ranbir Kapoor, Sai Pallavi, Yash and others.

आखरी अपडेट:03 अप्रैल, 2026, 05:09 IST AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया, उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया, इस कदम से अटकलों को हवा मिली क्योंकि नेताओं ने पार्टी के प्रमुख मुद्दों पर चड्ढा की चुप्पी का हवाला दिया। आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा एक महत्वपूर्ण कदम में, आम आदमी पार्टी (आप) ने बुधवार को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उच्च सदन में उपनेता के पद से हटा दिया, जो पार्टी के भीतर आंतरिक दरार के संकेत देता है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर चड्ढा को पार्टी के उपनेता पद से हटाने के फैसले की जानकारी दी। पार्टी ने यह भी अनुरोध किया है कि राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। आप के पंजाब सांसद अशोक मित्तल को चड्ढा का उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया है। पत्रकारों से बात करते हुए, मित्तल ने कहा कि केजरीवाल ने उन्हें नई भूमिका सौंपी है और वह अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करेंगे और पार्टी के रुख और राष्ट्रीय हितों दोनों को सदन में मजबूती से रखेंगे। राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया इस कदम के कुछ घंटों बाद, राज्यसभा सांसद ने राज्यसभा में अपने तर्कों और हस्तक्षेपों का संकलन साझा करके परोक्ष प्रतिक्रिया जारी की। तीन मिनट के वीडियो में 37 वर्षीय नेता को वायु प्रदूषण और बढ़ते हवाई किराए से लेकर गिग श्रमिकों के अधिकारों और मोबाइल प्रीपेड योजनाओं की 28-दिन की वैधता सहित कई मुद्दों पर चिंता व्यक्त करते हुए दिखाया गया है। स्वाति मालीवाल के बाद वह आप के दूसरे राज्यसभा सांसद बन गए हैं, जिनका पार्टी नेतृत्व से मतभेद हो गया है। उसे क्यों हटाया गया? हालाँकि कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, लेकिन कई मीडिया रिपोर्टों में सुझाव दिया गया है कि अनुशासन और पार्टी के रुख के साथ तालमेल की चिंताओं ने उन्हें पद से हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई होगी। हालांकि चड्ढा ने अभी तक इस निष्कासन पर चर्चा नहीं की है, लेकिन मामले से परिचित लोगों का कहना है कि पार्टी का निर्णय “आप से संबंधित मामलों पर उनकी चुप्पी और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाले कार्यक्रमों से अनुपस्थिति” के कारण है। आप के मुख्य मुद्दों पर उनकी चुप्पी ने बाहर निकलने की अफवाहों को हवा दे दी थी, खासकर तब जब उन्हें असम के लिए पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची से बाहर कर दिया गया था। पीटीआई के मुताबिक, पार्टी नेताओं ने दावा किया है कि केजरीवाल और मनीष सिसौदिया की गिरफ्तारी के दौरान चड्ढा की चुप्पी एक प्रमुख मुद्दा रही है. ऐसा प्रतीत होता है कि चड्ढा ने खुद को पार्टी के प्रमुख मुद्दों से दूर कर लिया है। 2025 के दिल्ली चुनावों में AAP की हार के बाद, उनका सार्वजनिक ध्यान व्यापक नीतिगत चिंताओं की ओर स्थानांतरित हो गया। मार्च 2024 में जब दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल को उत्पाद शुल्क नीति मामले में गिरफ्तार किया गया था, तब चड्ढा चिकित्सा कारणों से विदेश में थे। वह केजरीवाल की लगभग छह महीने की कैद के दौरान दूर रहे और 13 सितंबर, 2024 को उनकी रिहाई के कुछ दिनों बाद ही उनसे मिले। अभी हाल ही में, चड्ढा ने तब चुप्पी साध ली जब पिछले महीने दिल्ली की एक अदालत ने केजरीवाल, सिसौदिया और अन्य आप नेताओं को उत्पाद शुल्क मामले में बरी कर दिया था। अदालत से राहत के बाद वह केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस और जंतर-मंतर पर हुई हालिया रैली में भी शामिल नहीं हुए। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि चड्ढा को अन्य राज्यों में पार्टी के राजनीतिक अभियानों और संगठनात्मक मामलों से लगातार दरकिनार किया जा रहा है, हालांकि वह संसद के अंदर और बाहर मुखर रहे हैं। AAP ने आंतरिक दरार का खंडन किया चड्ढा की जगह लेने वाले मित्तल ने मीडिया से कहा कि विकास ढूंढना पार्टी की “सामान्य प्रक्रिया” का हिस्सा है। बदलाव को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हुए उन्होंने इसे एक नियमित प्रक्रिया बताया और कहा कि पहले एनडी गुप्ता उच्च सदन में पार्टी के उपनेता थे और फिर चड्ढा को यह जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने कहा, “अब, मुझे यह भूमिका दी गई है। हमारी पार्टी चाहती है कि सभी सांसद सीखें और शायद उसी संदर्भ में, मुझे यह भूमिका दी गई है ताकि मैं राजनीति में प्रक्रियाओं और प्रशासनिक कौशल सीख सकूं।” उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूत बनी हुई है। आप सांसद संजय सिंह ने पार्टी के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ”हमने पार्टी के फैसले के बारे में राज्यसभा सचिवालय को सूचित कर दिया है.” AAP के वर्तमान में राज्यसभा में 10 सदस्य हैं, जिनमें पंजाब से सात और दिल्ली से तीन शामिल हैं। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) पहले प्रकाशित: 03 अप्रैल, 2026, 05:09 IST समाचार राजनीति चुप्पी, अनुपस्थिति या अधिक: AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से क्यों हटाया? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राघव चड्ढा को हटाना(टी)आम आदमी पार्टी(टी)आप की आंतरिक दरार(टी)राज्यसभा उपनेता(टी)अरविंद केजरीवाल नेतृत्व(टी)अशोक मित्तल की नियुक्ति(टी)स्वाति मालीवाल नतीजा(टी)आप राज्यसभा सांसद

एक्टर रणदीप हुड्डा की मां की फिल्मों में एंट्री:पहली मूवी में निभाया दादी का किरदार; बेटे ने मजाकिया अंदाज में दी बधाई

एक्टर रणदीप हुड्डा की मां की फिल्मों में एंट्री:पहली मूवी में निभाया दादी का किरदार; बेटे ने मजाकिया अंदाज में दी बधाई

बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा की मां आशा हुड्डा ने भी अपनी पहली फिल्म में दादी का किरदार निभाया है। रणदीप हुड्डा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से भी अपनी मां की फिल्म को लेकर एक पोस्ट शेयर की है। पोस्ट के जरिए उन्होनें हास्य अंदाज में लिखा, “जिब मां के रोल का टेम था, टेम ना मिल्या, तै ईब सीधा दादी का।” स्टेज ऐप पर रिलीज हुई फिल्म सांगी में आदि का किरदार निभा रही आशा हुड्डा दैनिक भास्कर एप से बातचीत की। कॉलेज के दिनों से एक्टिंग का शौक आशा हुड्डा ने कहा कि 1971 में उन्होंने अपनी रोहतक महिला कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी। कॉलेज के दिनों से ही वे स्टेज पर ड्रामा और एक्टिंग में हिस्सा लेती थी। हालांकि, उनका उस दौरान से ही एक्टिंग करने का मन था। बाद में शादी होने के बाद वह पारिवारिक और राजनीति में सक्रिय भूमिका के साथ काम करती रहीं। रणदीप से मजाक में कहती थी मां का रोल दिलवाना आशा हुड्डा बताती हैं कि अपने स्ट्रगल टाइम से निकाल कर जब रणदीप हुड्डा ने बॉलीवुड में दमदार एंट्री की, तो उसके बाद एक कभी-कभी मजाक में रणदीप को उनकी माता आशा हुड्डा का देती थी कि रणदीप पर अगर कभी मां का रोल मिले तो मुझे भी ले लेना, लेकिन उन्होंने कभी एक्टिंग बॉलीवुड में नहीं की। डेढ़ साल पहले फिल्म का मिला ऑफर वहीं, करीबन डेढ़ साल पहले सोनीपत की रहने वाली गीतू परी ने उन्हें फिल्म के रोल के लिए कॉल किया था। आशा हुड्डा बताती है कि सांगी फिल्म में काम के लिए जब उन्हें किरदार बताया गया, उन्होंने तुरंत हां कर दी। जहां उन्हें फिल्म में साक्षी की दादी का रोल मिला है। जींद में डेढ़ दिन की हुई शूटिंग आशा हुड्डा अपने किरदार को लेकर बताती हैं कि उन्हें डेढ़ दिन के लिए शूटिंग के लिए बुलाया गया था। शूटिंग जींद में और आसपास के क्षेत्र में हुई है। आशा हुड्डा ने बताया कि उनका भी हमेशा मान रहा है कि अपनी संस्कृति के लिए अगर काम करने का मौका मिलेगा तो वह जरूर काम करेंगे और इसी इरादे के साथ उन्होंने हरियाणवी संस्कृति में दादी का किरदार मिला है। रणदीप ने मां के किरदार पर यूं किया रिएक्ट रणदीप हुड्डा की मां ने बताया कि करीबन ने डेढ़ साल पहले जब वह हरियाणा के जींद में शूटिंग करके घर पहुंची थी, तो उसने रणदीप को बताया था कि वह शूटिंग करके आई है, तो इस दौरान रणदीप बहुत जोर-जोर से हंसा था और बोला की मां आखिर दादी का रोल कर रही है। और अपनी मां के इस जज्बे को लेकर रणदीप ने सराहना की थी। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट अब जब फिल्म रिलीज हुई है तो रणदीप हुड्डा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से अपनी मां की फिल्म के लिए पोस्ट शेयर किया है। रणदीप हुड्डा ने लिखा- मां का रोल नहीं मिला, तो सीधा बनी दादी। उनकी यह मजेदार पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। फैंस को पसंद आया रणदीप का अंदाज अपनी मां किरदार को लेकर बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा ने इस हल्के-फुल्के अंदाज ने फैंस का ध्यान खींच लिया। उन्होंने आगे अपनी टीम के लिए शुभकामनाएं देते हुए लिखा, “आज आपको स्क्रीन पर देखने के लिए उत्साहित हूं मम्मी… पूरी टीम को ढेर सारी शुभकामनाएं।” इस पोस्ट के जरिए एक्ट्रेस ने इंडस्ट्री की उस सच्चाई को भी मजाकिया अंदाज में सामने रखा, जहां कलाकारों को उम्र से अलग किरदार निभाने पड़ते हैं। फैंस भी इस पोस्ट पर जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं और इसे काफी पसंद किया जा रहा है। यहां जानिए कौन है आशा हुड्डा… आशा हुड्डा मूलरूप से गांव छारा की रहने वाली है और उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन पॉलिटिकल साइंस से रोहतक से 1973 में की थी। 1975 में उन्होंने छोटू राम कॉलेज रोहतक से बीएड की पढ़ाई पूरी की। राजनीतिक और सामाजिक सफर आशा हुड्डा ने बताया कि फरीदाबाद में उनका मकान है और रोहतक और फरीदाबाद में उन्होंने काफी काम किया है और 1994 में मुख्यमंत्री साहब सिंह वर्मा ने उन्हें राजनीति में जिला अध्यक्ष के रूप में ज्वाइन कराया था। भाजपा में वे अपनी सक्रिय भूमिका के साथ रही है। 1994 से लेकर 2000 तक वह जिला अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं देती रही हैं। महिला मोर्चा और राष्ट्रीय जिम्मेदारियां हरियाणा प्रदेश महिला मोर्चा की 2000 से लेकर 2003 तक जनरल सेक्रेटरी रही है। वहीं इसके बाद वे राष्ट्रीय कार्यकारिणी शिक्षक प्रकोष्ठ की पंजाब प्रभारी रही। वही पारिवारिक काम के चलते करीबन 3 साल वह अमेरिका में भी रही उसके बाद वापस लौटकर फिल्म सेंसर बोर्ड दिल्ली जोन की सदस्य साल 2008 में रही है। भाजपा में सक्रिय भूमिका और अन्य पद वहीं बीजेपी पार्टी ने उन्हें साल 2018 में पावर जेनरेशन हरियाणा की डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया था। इसके बाद प्रदेश कार्यकारिणी की सदस्य के रूप में भी उन्होंने 8 साल अपनी पार्टी के प्रति समर्पित भाव रखते हुए काम किया है। विधानसभा टिकट की दावेदारी वही साल 2014 और 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान पृथला विधानसभा से भी उन्होंने टिकट की दावेदारी की थी। लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला और उसके बाद भी उन्होंने बीजेपी का दामन थाम कर रखा और लगातार भाजपा के साथ जुड़कर कार्यकर्ता के रूप में काम करती रही है। पृथला भी विधानसभा में उनके मामा रहते हैं इसलिए वहां से लगाव था और वहीं से वह टिकट मांग रही थी। फिल्म ‘सांगी’ की कहानी और कलाकार के बारे में जानिए सोनीपत की रहने वाली गीतू परी और अन्ना फिल्म फैक्ट्री, गीतू फिल्म द्वारा क्रिएट की गई है। फिल्म में आशा हुड्डा, रोहित बच्ची, गीतू व साक्षी दलाल ने किरदार निभाया है। वहीं, डायरेक्टर रविंद्र बजवान अन्ना हैं। संघर्ष और लव स्टोरी पर आधारित फिल्म जानकारी के मुताबिक, फिल्म में एक सांगी कलाकार के संघर्ष की कहानी है और फिल्म में लव स्टोरी भी है। जहां लीड रोल में किरदार साक्षी दलाल निभा रही है। कुलदीप का सांगी कलाकार हैं और उसके बेड़े में अमन भी शामिल होता हैं। इस दौरान ने वह साक्षी के संपर्क में आता है और उससे प्यार करने

बालाघाट में हनुमान जयंती पर निकली शोभायात्रा:साधक मोहित सोनी ने 40 किलो वजनी हनुमान स्वरूप धारण किया; 40 दिनों तक तपस्या की

बालाघाट में हनुमान जयंती पर निकली शोभायात्रा:साधक मोहित सोनी ने 40 किलो वजनी हनुमान स्वरूप धारण किया; 40 दिनों तक तपस्या की

बालाघाट जिले में हनुमान जयंती पर गुरुवार शाम को श्रद्धा और भक्ति के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इस वर्ष आकर्षण का मुख्य केंद्र युवा साधक मोहित सोनी रहे, जिन्होंने भगवान हनुमान का स्वरूप धारण कर 40 किलो वजनी मुकुट के साथ नगर भ्रमण किया। ‘हनुमान सेवा दल समिति’ और ‘मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर ट्रस्ट’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शोभायात्रा से पूरा नगर ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। 40 दिनों के कठिन ब्रह्मचर्य और तपस्या के बाद मिली सिद्धि परंपरा के अनुसार, प्रतिवर्ष हनुमान जी का स्वरूप धारण करने के लिए एक साधक का चयन किया जाता है, जिसे 40 दिनों तक कठोर ब्रह्मचर्य का पालन और विशेष साधना करनी होती है। इस वर्ष यह सौभाग्य मोहित सोनी को प्राप्त हुआ। 40 दिनों की तपस्या पूर्ण करने के बाद उन्होंने भारी-भरकम मुकुट और वेशभूषा धारण की और बैंड-बाजे व ढोल की थाप पर भक्तों के साथ नृत्य भी किया। मुख्य मार्गों से गुजरी यात्रा शोभायात्रा का शुभारंभ शाम 8 बजे मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर से हुआ। यहां से यह काली पुतली चौक और अहिंसा द्वार होते हुए नगर के मुख्य मार्गों से निकली। मार्ग में पड़ने वाले सभी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। लोगों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न देवी-देवताओं की झांकियां भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। 11 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठानों का समापन इस भव्य शोभायात्रा के साथ ही पिछले 11 दिनों से चल रहे विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का भी विधि-विधान से समापन हो गया। आयोजन में हनुमान सेवा दल के शंकर मोटवानी, राजू सोनी, सुनील आडवाणी सहित सैकड़ों की संख्या में पदाधिकारी और श्रद्धालु शामिल हुए। सुरक्षा व्यवस्था के बीच देर रात तक नगर में भक्ति का माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त किया। देखें तस्वीरें…

पपीता की पहचान कैसे करें: रंग देखकर पपीता की गलती न करें! पपीता मीठा है या नहीं, बस अपनाएं ये 3 आसान तरीके

पपीता की पहचान कैसे करें: रंग देखकर पपीता की गलती न करें! पपीता मीठा है या नहीं, बस अपनाएं ये 3 आसान तरीके

पपीते की पहचान कैसे करें: पपीता एक ऐसा फल है जो केवल स्वाद में सबसे अच्छा होता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए किसी भी समृद्धि से कम नहीं है। विटामिन ए, सी और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर पपीता पाचन तंत्र को बनाए रखने और त्वचा में चमक लाने के लिए जाना जाता है। लेकिन बार-बार बाजार में हम एक समस्या बड़ी का सामना करते हैं और वह पपीता ऊपर से एकदम पीला और सुंदर दिखता है, लेकिन घर काटने वाला पर वह या तो अनोखा किरदार है या पूरी तरह से पका हुआ नहीं होता है। ज्यादातर लोग रंग-बिरंगे देखकर पेज टैग पर आधारित होते हैं, जो एक बड़ी चूक साबित हो सकते हैं। हम आपको इस लेख में विस्तार से जानते हैं। ऊपरी त्वचा की मजबूती और दबाव का पता लगाएं पपीते की कीमत और उसके मसाले का सबसे खास क्वालिटी वाला नमूना उसे चुना जा सकता है। जब आप पपीता का स्वाद चखें, तो उसे अपने रेस्तरां के बीच के किनारे पर ले जाएं। अगर पपीता ग्रोइन पर थोड़ा सा नरम महसूस हो रहा है (जैसे पका हुआ टमाटर या एवोकैडो), तो समझ लें कि वह अंदर से अच्छी तरह पका हुआ और मीठा है। यदि पपीता पत्थर की तरह सख्त है, तो वह कच्चा है। वहीं, अगर वह बहुत अधिक पिप्पिपा या जरूरत से ज्यादा पोषित है, तो उसे अंदर से बुरा भुगतान किया जा सकता है। कुक के पास की जानकारी से पता करें किसी भी फल का मिश्रण उसके सुगंध में दिखता है। पपीता का विशेष समय उसे नाक के पास ले जाता है, उस हिस्से के हिस्से की तरफ जहां से वह सिलिकॉन से घूमने जाता है। यह बात इस बात का संकेत है कि फल प्राकृतिक रूप से चुकाया गया है। यदि पपीते से कोई संतुष्टि नहीं आ रही है, तो वह आश्वस्त हो सकता है। इसके विपरीत, यदि इसमें बहुत तेजी से या सिरके जैसी गंध आ रही है, तो इसका मतलब है कि फल सुग्गा शुरू हो गया है। मिट्टी के दाग और रंगत से पता करें सिर्फ पीले रंग का माचिस की ख़ातिर नहीं है, क्योंकि आजकल के फलों को फ़ेवल से भी मसाला मिलता है। आपको पपीते की रंगत में गहराई देखनी चाहिए। वह पपीता अपनी त्वचा पर सीधे पीले या नारंगी रंग के साथ मध्य एशिया निशान या ‘झुर्रियां’ होन का चयन करें। पूरी तरह से पतला और चमकीला पीला पपीता बार-बार पकता है। साथ ही, यदि पपीते के मिश्रण का एक भाग हरा है और शेष भाग पीला है, तो वह मसाले की प्रक्रिया में है और मीठा हो सकता है। (टैग अनुवाद करने के लिए) सर्वोत्तम पपीता गुणवत्ता (टी) ताजे फलों का चयन (टी) किराने की खरीदारी के तरीके (टी) स्वस्थ फलों के टिप्स (टी) मीठा पपीता कैसे चुनें (टी) पके पपीते की पहचान करें (टी) पपीता खरीदने के टिप्स (टी) पपीता गंध परीक्षण (टी) पका बनाम कच्चा पपीता (टी) मीठा पपीता हैक

शख्स ने गोली मारकर आत्महत्या की:पुलिस ने पिस्टल के लाइसेंस और कारणों की जांच शुरू की

शख्स ने गोली मारकर आत्महत्या की:पुलिस ने पिस्टल के लाइसेंस और कारणों की जांच शुरू की

नरसिंहपुर जिले के सालीचौका क्षेत्र में गुरुवार शाम को 42 वर्षीय अनुपम राय ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल पर पंचनामा कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। आत्महत्या के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। गाडरवारा थाना प्रभारी अशोक चौहान ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मृतक ने पिस्टल से खुद को गोली मारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना में प्रयुक्त पिस्टल लाइसेंसी थी या अवैध। पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही आत्महत्या के वास्तविक कारणों का पता चल पाएगा।

जबलपुर के पूर्व महापौर ने पुलिसकर्मियों से किया था विवाद:हाईकोर्ट में खोली गई एसटीएफ की जांच रिपोर्ट, बढ़ सकती है प्रभात साहू की मुश्किलें

जबलपुर के पूर्व महापौर ने पुलिसकर्मियों से किया था विवाद:हाईकोर्ट में खोली गई एसटीएफ की जांच रिपोर्ट, बढ़ सकती है प्रभात साहू की मुश्किलें

सितंबर 2025 में जबलपुर के पूर्व महापौर प्रभात साहू का वाहन चेंकिग के दौरान एक पुलिस आरक्षक के बीच जमकर विवाद हुआ। मामले पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने साफ कहा था कि जब थानों में पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो वे आम जनता को सुरक्षा कैसे देंगे। मामले पर चीफ जस्टिस की कोर्ट ने जांच के लिए एसटीएफ को निर्देश दिए थे, जहां जांच के बाद गुरुवार को एसटीएफ की सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष खोली गई। एसटीएफ ने कोर्ट को बताया कि पूर्व महापौर प्रभात साहू पर पुलिस आरक्षक ने जो आरोप लगाए थे, वह सही थे। जांच में पुलिसकर्मियों को क्लीनचिट दी गई है, लिहाजा अब भाजपा नेता प्रभात साहू सहित 5 पर मुकदमा चलेगा। बता दें कि इस विवाद के बाद प्रभात साहू की शिकायत पर लार्जगंज थाने में दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, जबकि पूर्व महापौर की शिकायत पर दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था। पुलिसकर्मियों ने निलंबन की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जबलपुर निवासी अधिवक्ता मोहित वर्मा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हुए कोर्ट को बताया कि पूर्व महापौर प्रभात साहू ने पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता की थी। कोर्ट में यह भी दलील दी गई कि पूर्व महापौर के द्वारा वर्दी फाड़ने का स्पष्ट वीडियो भी वायरल होने के बावजूद उनके व समर्थकों के विरुद्ध राजनीतिक दबाव में नामजद रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। यह था पूरा घटनाक्रम जनहित याचिकाकर्ता के अनुसार पूर्व महापौर प्रभात साहू को लार्डगंज थाना अंतर्गत बल्देव बाग के समीप वाहन सितंबर 2025 को चेकिंग दौरान पुलिसकर्मी ने बिना हेलमेट पहने वाहन चलाते हुए रोका था। पूर्व महापौर अपना परिचय देते हुए पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता करने लगे। इसके कुछ ही देर बाद समर्थकों की भीड़ एकत्र हो गया। याचिका में आरोप है कि सरेराह पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ दी थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल भी हुआ था। इसके बावजूद राजनीतिक दबाव के कारण ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी के विरुद्ध नामजद एफआईआर दर्ज करते हुए उसे निलंबित कर दिया गया। पुलिसकर्मी की शिकायत पर अज्ञात आरोपितों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया है। वायरल वीडियो में आरोपियों की शिनाख्त स्पष्ट थी।

लांजी में शराब दुकान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन:रहवासी देरशाम तक धरने पर, विधायक ने कहा- लोगों की मांग सही है

लांजी में शराब दुकान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन:रहवासी देरशाम तक धरने पर, विधायक ने कहा- लोगों की मांग सही है

बालाघाट के कोटेश्वर नगरी लांजी में भिलाई मार्ग पर प्रस्तावित शराब दुकान के विरोध में वार्डवासियों ने मोर्चा खोल दिया है। महिलाएं सहित बड़ी संख्या में लोग दो स्थानों पर पंडाल लगाकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और लगातार नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। रहवासी क्षेत्र में दुकान खोलने के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोगों के कारण प्रशासन के सामने दुकान खुलवाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। दरअसल, ठेके के बाद शराब ठेकेदार अब दुकान खोलना चाहते हैं, लेकिन रहवासी इसके विरोध में खड़े हैं। पिछले दो वर्षों से लांजी-सालेटेकरी मार्ग पर संचालित शराब दुकान को हटाकर अब दूसरे क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा है, जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। गुरुवार देर शाम तक जनप्रतिनिधि और रहवासी विरोध में डटे रहे और शराब दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग करते रहे। धरना दे रहे लोगों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी स्थिति में रिहायशी क्षेत्र में शराब दुकान स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया है कि दुकान को नगर सीमा से बाहर संचालित किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, शराब ठेकेदारों का कहना है कि वे प्रशासन के निर्देशों के अनुसार ही दुकान संचालित करेंगे। उनका यह भी तर्क है कि दुकान नहीं खुलने से शासन को राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस मामले पर विधायक राजकुमार कर्राहे का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि शराब दुकान को लेकर संबंधित ठेकेदार और एसडीएम से चर्चा की गई है और जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा। विधायक ने वार्डवासियों की मांग को सही ठहराते हुए कहा कि जहां शराब दुकान प्रस्तावित है, वह एक रहवासी क्षेत्र है और वहां आवागमन अधिक रहता है। आसपास स्कूल, मंदिर, बैंक सहित अन्य गतिविधियां संचालित होती हैं, ऐसे में भारती लॉन और सिद्धेश्वर मंगल भवन के सामने शराब दुकान का खुलना उचित नहीं है। विधायक के इस बयान के बाद अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासन जल्द ही कोई ठोस और संतुलित निर्णय ले सकता है।

चौधरी असलम की पत्नी ने संजय दत्त की तारीफ की:बोलीं- उनकी एक्टिंग देख कर एक पल को लगा पति ही सामने खड़े हों

चौधरी असलम की पत्नी ने संजय दत्त की तारीफ की:बोलीं- उनकी एक्टिंग देख कर एक पल को लगा पति ही सामने खड़े हों

फिल्म ‘धुरंधर’ में संजय दत्त ने पाकिस्तानी पुलिस अफसर चौधरी असलम का किरदार निभाया है। उनके इस रोल की अब खुद दिवंगत चौधरी असलम की पत्नी नौरीन असलम ने भी इसकी तारीफ की है। नौरीन ने कहा कि संजय दत्त को फिल्म में देखकर एक पल के लिए उन्हें ऐसा लगा जैसे उनके पति ही पर्दे पर सामने खड़े हों। हालांकि, उन्होंने फिल्म के मेकर्स से थोड़ी नाराजगी भी जताई है। संजय की आंखों में दिखा पति का अक्स आजतक रेडियो के एक पॉडकास्ट में नौरीन असलम ने फिल्म में संजय दत्त की परफॉर्मेंस पर बात की। उन्होंने कहा, संजय दत्त इस रोल के लिए बिल्कुल सही पसंद थे। फिल्म के एक सीन में जब वह गाड़ी के पास खड़े होकर अपनी नजरें उठाते हैं, तो मुझे लगा जैसे खुद असलम खड़े हैं। नौरीन ने यह भी बताया कि उनके पति अक्सर मजाक में कहा करते थे कि उनकी मौत के बाद उनके जीवन पर फिल्म बनेगी। मेकर्स से जताई थोड़ी शिकायत तारीफ के साथ-साथ नौरीन ने फिल्म की गहराई पर सवाल भी उठाए। उनका कहना है कि फिल्म में उनके पति के किरदार के साथ पूरी तरह न्याय नहीं किया गया। नौरीन ने कहा, अगर वे फिल्म बना रहे थे, तो कम से कम मुझसे, पुलिस विभाग या उन पत्रकारों से बात करनी चाहिए थी जिन्होंने असलम को करीब से देखा है। इससे उनके किरदार के सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों पहलुओं को बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था। नौरीन ने पूरी फिल्म नहीं देखी नौरीन ने बताया कि उन्होंने पूरी फिल्म नहीं देखी है, लेकिन कुछ क्लिप्स देखी हैं। फिल्म में पुलिस अफसर के किरदार द्वारा इस्तेमाल की गई गालियों पर उन्होंने कहा कि यह फैमिली ऑडियंस के लिए भले ही ठीक न हो, लेकिन पुलिस महकमे में ऐसी भाषा आम बात है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म के किरदार और माहौल पर फिट बैठता है।

शादी के गिफ्ट पर नाराजगी ‘क्रूरता नहीं:हाईकोर्ट ने पति पर दर्ज FIR की रद्द, न्यूजीलैंड सहित विदेश में हुई घटनाओं पर भी फैसला

शादी के गिफ्ट पर नाराजगी ‘क्रूरता नहीं:हाईकोर्ट ने पति पर दर्ज FIR की रद्द, न्यूजीलैंड सहित विदेश में हुई घटनाओं पर भी फैसला

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा कि शादी में दिए गए गिफ्ट को लेकर असंतोष जताना “क्रूरता” नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने न्यूजीलैंड में रह रहे पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी। यह मामला मोहाली के खरड़ थाने का है। पत्नी ने साल 2015 में शिकायत दर्ज करवाई थी। उसने आरोप लगाया था कि पति और उसके परिवार ने दहेज को लेकर मानसिक उत्पीड़न किया। शादी का गिफ्ट नहीं आया पसंद सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पति भारत में बहुत कम समय के लिए रहा था। शादी के बाद वह केवल 16 दिन भारत में रहा और बाद में 15 दिन के लिए आया। इस पूरे समय में उसके खिलाफ मुख्य आरोप सिर्फ इतना था कि उसे शादी में दिए गए गिफ्ट पसंद नहीं आए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल गिफ्ट को लेकर नाराजगी जताना क्रूरता नहीं है। अदालत के अनुसार, इस तरह की बात न तो किसी को आत्महत्या के लिए मजबूर करती है और न ही इससे किसी की जान को कोई खतरा होता है, इसलिए इसे कानून के तहत क्रूरता नहीं माना जा सकता विदेश में हुई घटनाओं पर भी फैसला अदालत ने विदेश में हुई घटनाओं को लेकर भी साफ फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की ज्यादातर घटनाएं न्यूजीलैंड में हुई थीं, इसलिए भारत में इन पर केस तभी चल सकता है जब केंद्र सरकार की अनुमति हो। बिना अनुमति भारत में ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पत्नी ने पहले घरेलू हिंसा और भरण-पोषण से जुड़े मामले भी दर्ज किए थे, लेकिन उसमें उसे कोई राहत नहीं मिली। हालांकि बच्चे के लिए भरण-पोषण तय किया गया था। साथ ही, दोनों का विवाह वर्ष 2022 में समाप्त हो चुका है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट संदेश दिया कि पारिवारिक विवाद और आपराधिक मामलों में अंतर समझना जरूरी है। केवल छोटे-छोटे घरेलू मतभेदों को आधार बनाकर गंभीर आपराधिक धाराओं का सहारा लेना कानून का गलत इस्तेमाल है।