ग्वालियर में जमीन आवंटन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ग्वालियर विकास प्राधिकरण (GDA) के पूर्व उपाध्यक्ष गोपीलाल भारतीय ने प्राधिकरण पर शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगाने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने मोहन यादव को लिखित शिकायत भेजकर जांच की मांग की है। शिकायत के मुताबिक, पूर्व में ग्वालियर सुधार न्यास (अब GDA) ने गांधी रोड की योजना क्रमांक 1A, 2B, 3B और 4, 5, 6, 7 के लिए करीब 115 बीघा शासकीय राजस्व भूमि पर कॉलोनियां विकसित कर दीं। आरोप है कि यह जमीन शासन या कलेक्ट्रेट से विधिवत आवंटित कराए बिना और प्रीमियम राशि चुकाए बिना ही विकसित कर दी गई। 1965 से 1974 के गजट नोटिफिकेशन का हवाला, सहकारी समितियों को बेचे प्लॉट गोपीलाल भारतीय के अनुसार, ग्राम गोशपुरा, मेहरा और मुरार की जमीन को लेकर 1965, 1966 और 1974 में अलग-अलग गजट नोटिफिकेशन जारी हुए थे। इन्हीं के आधार पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया बताई गई, लेकिन वास्तविक आवंटन नहीं कराया गया और सीधे कॉलोनियां विकसित कर भूखंडों का विक्रय कर दिया गया। आरोप है कि इस शासकीय भूमि के भूखंड गृह निर्माण सहकारी समितियों और हितग्राहियों को बेच दिए गए। इससे प्राधिकरण को तो करोड़ों की आमदनी हुई, लेकिन शासन को भारी राजस्व नुकसान हुआ। इन योजनाओं में 2 हजार करोड़ रुपए के नुकसान का दावा शिकायत में दावा किया गया है कि इस पूरे मामले में शासन को करीब 2 हजार करोड़ रुपए तक का नुकसान हो सकता है। पूर्व उपाध्यक्ष ने इस पूरे प्रकरण की जांच कर राशि वसूलने की मांग की है। जिन योजनाओं में गड़बड़ी की आशंका जताई वे ये हैं… योजना 1A: 20 बीघा योजना 2B: 25 बीघा योजना 3B: 15 बीघा योजना 4: 10 बीघा योजना 5: 15 बीघा योजना 6: 10 बीघा योजना 7: 20 बीघा RTI में नहीं मिला जवाब गोपीलाल भारतीय का कहना है कि उन्होंने मामले में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी, लेकिन अधिकारियों ने जवाब नहीं दिया। अपील के बाद भी जानकारी नहीं मिलने पर उन्हें मुख्यमंत्री को शिकायत करनी पड़ी। CEO बोले- “मेरे संज्ञान में मामला नहीं” इस मामले में GDA के CEO नरोत्तम भार्गव का कहना है कि उन्हें इस शिकायत की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता अक्सर इस तरह की शिकायतें करते रहते हैं।














































