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हिमाचल के मैदानी इलाकों में बढ़ेगी गर्मी:ऊना का पारा 39.7॰C पहुंचा, ऊंचे क्षेत्रों में अगले 3 दिन हल्की बूंदाबांदी के आसार

हिमाचल के मैदानी इलाकों में बढ़ेगी गर्मी:ऊना का पारा 39.7॰C पहुंचा, ऊंचे क्षेत्रों में अगले 3 दिन हल्की बूंदाबांदी के आसार

हिमाचल प्रदेश के अधिकांश भागों में आज सुबह से ही धूप खिली हुई है। राज्य में 2 दिन की तेज धूप के बाद गर्मी का प्रकोप बढ़ा है। बीते 24 घंटे के दौरान 11 शहरों का अधिकतम तापमान 35 डिग्री या उससे अधिक हो गया है। इससे दिन के वक्त मैदानी इलाकों में घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान ऊना में 39.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा बिलासपुर में 38.5 डिग्री सेल्सियस, सुंदरनगर में 38.1 डिग्री, हमीरपुर में 38 डिग्री, कांगड़ा में 38.3 डिग्री, बरठी में 37.4 डिग्री और मंडी में 37 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। तापमान में बढ़ोतरी के बाद दिन के समय लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। हालांकि, ऊंचे व मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम सुहावना बना हुआ है। अगले 72 घंटे तापमान में उछाल आएगा मौसम विभाग के अनुसार- अगले 72 घंटे के दौरान तापमान में हल्का उछाल आ सकता है, जिससे गर्मी और बढ़ने की संभावना है। हालांकि, आज से एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने के आसार है, लेकिन इसका असर मुख्य रूप से अधिक ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों तक सीमित रहेगा। मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में फिलहाल गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है। अगले तीन दिन ऊंचे पहाड़ों पर बूंदाबांदी मौसम विभाग ने 19 से 21 मई तक अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई है। वहीं 22 मई को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। इसके बाद 23 और 24 मई को भी ऊंचे इलाकों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी के आसार बने हुए हैं।

घंटों बैठे-बैठे काम करते हैं? पैरों को सुन्न होने से बचाएंगी ये आसान डेस्क एक्सरसाइज

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Last Updated:May 18, 2026, 23:26 IST आजकल ऑफिस हो या वर्क फ्रॉम होम, घंटों कुर्सी पर बैठे रहना लोगों की मजबूरी बन गया है. लेकिन लगातार बैठे रहने से पैरों में जकड़न, भारीपन और दर्द जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं. ऐसे में कुछ आसान Desk Exercises आपके पैरों को एक्टिव रखने और शरीर को हल्का महसूस कराने में मदद कर सकती हैं. ख़बरें फटाफट आजकल ज्यादातर लोगों का दिन कुर्सी पर बैठकर ही निकल जाता है. सुबह लैपटॉप खोलते हैं और फिर पता ही नहीं चलता कि कब कई घंटे बीत गए. लंबे समय तक बैठे रहने से सबसे ज्यादा असर पैरों पर पड़ता है. कई लोगों को पैरों में भारीपन, झनझनाहट, अकड़न या हल्का दर्द महसूस होने लगता है. कुछ लोगों के पैर तो इतने stiff हो जाते हैं कि उठते समय अजीब सा खिंचाव महसूस होता है. अच्छी बात ये है कि इसके लिए आपको जिम जाने या अलग से घंटों निकालने की जरूरत नहीं है. ऑफिस डेस्क पर बैठे-बैठे भी कुछ आसान एक्सरसाइज करके पैरों को एक्टिव रखा जा सकता है. अगर काफी देर से एक ही पोजिशन में बैठे हैं तो सबसे पहले अपने टखनों को मूव करिए. कुर्सी पर आराम से बैठें और एक पैर को थोड़ा ऊपर उठाकर धीरे-धीरे गोल घुमाएं. पहले दाईं दिशा में और फिर उल्टी दिशा में. इसके बाद दूसरे पैर से भी यही करें. सुनने में ये बहुत छोटी एक्सरसाइज लग सकती है, लेकिन इससे पैरों में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और stiffness कम महसूस होती है. जिन लोगों के पैर जल्दी सुन्न हो जाते हैं, उनके लिए ये काफी मददगार हो सकती है. Leg Extension से पैरों को दीजिए हल्का स्ट्रेचकई बार लंबे समय तक बैठे रहने से घुटनों और जांघों में जकड़न होने लगती है. ऐसे में लेग एक्सटेंशन काफी आराम दे सकता है. कुर्सी पर बैठकर एक पैर को सामने की तरफ सीधा करें और कुछ सेकंड तक रोककर रखें. फिर धीरे से नीचे ले आएं. अब यही दूसरे पैर से करें. इससे पैरों की muscles एक्टिव रहती हैं और लंबे समय तक बैठने का असर थोड़ा कम हो सकता है. अगर दिन में 8-9 घंटे बैठकर काम करते हैं तो इसे बीच-बीच में जरूर करें. Heel Raise और Toe Raise भी हैं फायदेमंदकई लोगों को लंबे समय तक बैठने के बाद पैरों में अजीब सा भारीपन महसूस होता है. इसके लिए Heel Raise और Toe Raise काफी आसान और असरदार एक्सरसाइज मानी जाती हैं. इसमें आपको सिर्फ एड़ियों और पंजों को ऊपर-नीचे करना होता है. पहले पंजे जमीन पर रखें और एड़ियों को ऊपर उठाएं, फिर एड़ियां नीचे रखकर पंजों को ऊपर करें. यह मूवमेंट पैरों की muscles को एक्टिव रखता है और ब्लड फ्लो बेहतर करने में मदद कर सकता है. सबसे अच्छी बात ये है कि इसे करते समय आपको काम रोकने की भी जरूरत नहीं पड़ती. Knee Lift से पैरों को रखें एक्टिवअगर बैठे-बैठे शरीर बिल्कुल सुस्त लगने लगे तो नी लिफ्ट ट्राय कर सकते हैं. इसमें कुर्सी पर सीधे बैठकर एक घुटने को ऊपर उठाना होता है और फिर धीरे से नीचे लाना होता है. इसके बाद दूसरे पैर से यही दोहराएं. इससे पैरों के साथ-साथ हिप्स भी थोड़ा एक्टिव महसूस करते हैं. लगातार बैठे रहने से शरीर का निचला हिस्सा कम मूव करता है, इसलिए ऐसी छोटी एक्सरसाइज दिनभर शरीर को हल्का और एक्टिव बनाए रखने में मदद करती हैं. सिर्फ 2 मिनट चलना भी जरूरी हैकई लोग सोचते हैं कि सिर्फ एक्सरसाइज कर लेना काफी है, लेकिन लंबे समय तक लगातार बैठे रहना भी ठीक नहीं माना जाता. कोशिश करें कि हर एक घंटे बाद कुर्सी से उठें और थोड़ा टहल लें. ऑफिस में हैं तो पानी लेने चले जाएं या थोड़ा वॉक कर लें. इससे शरीर को मूवमेंट मिलता है और पैरों में जमी हुई जकड़न कम हो सकती है. छोटी-छोटी आदतें ही लंबे समय में शरीर को ज्यादा आरामदायक महसूस कराती हैं. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi

इसके लिए कोई ‘ममता’ नहीं है: ‘सड़क पर नमाज़ न पढ़ें’ | सार्वजनिक स्थान = प्रार्थना मैट? | न्यूज18

इसके लिए कोई 'ममता' नहीं है: 'सड़क पर नमाज़ न पढ़ें' | सार्वजनिक स्थान = प्रार्थना मैट? | न्यूज18

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न आम, न तरबूज…उत्तराखंड की गर्मियों का साथी ये नन्हा फल, पहाड़ों पर इसके गाए जाते गीत

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Last Updated:May 18, 2026, 21:33 IST Kafal Benefits : उत्तराखंड के पहाड़ों में गर्मियों के मौसम में मिलने वाला काफल इन दिनों लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. गहरे लाल रंग का यह जंगली फल अपने खट्टे-मीठे स्वाद और औषधीय गुणों की वजह से काफी प्रसिद्ध है. काफल पकने का मतलब गर्मियों के आगमन. लोकगीत ‘काफल पाको मैनी चाखो’ ने इसे देशभर में पहचान दिलाई है. बागेश्वर के किशन मलड़ा लोकल 18 से बताते हैं कि काफल की खेती नहीं की जाती है. यह मध्य हिमालय के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है. काफल केवल फल नहीं बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा भी है. प्रसिद्ध लोकगीत ‘काफल पाको मैनी चाखो’ ने इसे देशभर में पहचान दिलाई है. पहाड़ों में यह गीत आज भी लोगों की जुबान पर रहता है. काफल पकने का मतलब गर्मियों के आगमन. इसी के साथ जंगलों में रौनक बढ़ने लगती है. गांवों में बच्चे और महिलाएं जंगलों में काफल तोड़ने जाते हैं, जो एक तरह की पारंपरिक गतिविधि बन चुकी है. कई मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी काफल जान है. काफल को प्राकृतिक ऊर्जा देने वाला फल माना जाता है. गर्मियों में इसे खाने से शरीर को ताजगी और ठंडक मिलती है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर की कमजोरी दूर करने में मदद करते हैं. स्थानीय लोग लंबे समय से इसे पारंपरिक स्वास्थ्यवर्धक फल के रूप में उपयोग करते आए हैं. पहाड़ों में जंगलों से लौटते समय लोग काफल खाकर थकान मिटाते हैं. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. बिना किसी मिलावट और केमिकल के मिलने वाला काफल आज के समय में लोगों के लिए हेल्दी विकल्प बन चुका है. गर्मियों के मौसम में काफल स्थानीय ग्रामीणों के लिए अच्छी आय का साधन बन जाता है. गांवों के लोग जंगलों से काफल इकट्ठा कर बाजारों में बेचते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होती है. सड़क किनारे और स्थानीय बाजारों में काफल की अच्छी कीमत मिलती है. पर्यटक भी इसे खरीदने में काफी रुचि दिखाते हैं. कई परिवारों की मौसमी आय का बड़ा हिस्सा काफल बिक्री से आता है. खासकर महिलाओं और युवाओं को इससे रोजगार मिलता है. पहाड़ों में सीमित रोजगार के बीच यह जंगली फल लोगों के लिए आर्थिक सहारा बन रहा है. हर साल काफल सीजन का उन्हें बेसब्री से इंतजार रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google पिछले कुछ वर्षों में काफल की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. पहले यह केवल पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित था, लेकिन अब शहरों में भी इसकी मांग बढ़ने लगी है. लोग इसे उत्तराखंड की पारंपरिक पहचान के रूप में पसंद कर रहे हैं. कई स्थानीय व्यापारी काफल को पैक करके दूसरे शहरों तक पहुंचा रहे हैं. सोशल मीडिया और पर्यटन के कारण भी इसकी पहचान मजबूत हुई है. गर्मियों में बाजारों में काफल की दुकानें लोगों को आकर्षित करती हैं. बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इसका स्वाद पसंद करते हैं. प्राकृतिक, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक होने के कारण काफल आज उत्तराखंड के सबसे चर्चित जंगली फलों में शामिल हो गया है. बागेश्वर के किशन मलड़ा लोकल 18 से बताते हैं कि काफल की सबसे खास बात यह है कि इसकी खेती नहीं की जाती है. यह मध्य हिमालय के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला जंगली फल है. उत्तराखंड के बागेश्वर, अल्मोड़ा, नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों के जंगलों में यह बड़ी मात्रा में मिलता है. करीब 1500 से 2500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काफल के पेड़ अधिक पाए जाते हैं. ग्रामीण लोग हर साल मौसम आने पर जंगलों से काफल इकट्ठा करते हैं. पहाड़ों के पर्यावरण और जैव विविधता में भी इसका महत्त्वपूर्ण योगदान है. बिना किसी रासायनिक खाद या दवा के उगने वाला यह फल पूरी तरह प्राकृतिक होता है. बागेश्वर के चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि काफल केवल स्वादिष्ट फल ही नहीं बल्कि औषधीय गुणों का भी खजाना है. इसमें विटामिन सी, आयरन, कैल्शियम और एंटी-ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. काफल पाचन तंत्र को मजबूत करने और पेट की समस्याओं से राहत देने में उपयोगी है. इसकी छाल का उपयोग दांत दर्द और गले की खराश में भी किया जाता है. गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला यह फल प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है. उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के बीच काफल काफी लोकप्रिय होता जा रहा है. पहाड़ घूमने पहुंचे लोग स्थानीय बाजारों और सड़कों पर काफल खरीदते नजर आते हैं. इसका अनोखा स्वाद पर्यटकों को बेहद पसंद आता है. कई लोग इसे पहाड़ों की खास पहचान मानते हैं. काफल से बने नमक-मसाले वाले स्वाद को लोग बड़े चाव से खाते हैं. सोशल मीडिया पर भी काफल की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल होते हैं. गर्मियों में पहाड़ी पर्यटन के साथ काफल की बिक्री भी बढ़ जाती है. स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि बाहर से आने वाले लोग अक्सर काफल के बारे में पूछते हैं, इसका स्वाद चखने के बाद दोबारा जरूर खरीदते हैं. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही उत्तराखंड के पहाड़ों में काफल की मांग तेजी से बढ़ जाती है. यह जंगली फल अपने खट्टे-मीठे स्वाद के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पसंद आता है. लाल और गहरे बैंगनी रंग का काफल जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है, मई-जून के महीनों में बाजारों में दिखाई देता है. स्थानीय लोग सुबह-सुबह जंगलों से काफल तोड़कर बाजारों तक पहुंचाते हैं. सड़क किनारे छोटे दुकानदार भी इसे बेचते नजर आते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तराखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|

ईपीएस ने ‘पीठ में छुरा घोंपने वाले’ विजय पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया, एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन की रिपोर्टों को खारिज किया | भारत समाचार

Ruturaj Gaikwad and Kartik Sharma are building a partnership (Picture credit: AP)

आखरी अपडेट:18 मई, 2026, 20:40 IST पलानीस्वामी ने कहा कि फर्जी खबरें प्रसारित की गईं जिसमें आरोप लगाया गया कि अन्नाद्रमुक द्रमुक के समर्थन से सरकार बनाने की योजना पर काम कर रही है। एक विद्रोही खेमे के टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार से हाथ मिलाने के बाद एआईएडीएमके सुप्रीमो एडप्पादी के पलानीस्वामी को बड़ा झटका लगा। (पीटीआई/फ़ाइल) अन्नाद्रमुक के संकटग्रस्त प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी ने सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय पर विधायकों को “खरीद-फरोख्त” करके लुभाने का आरोप लगाया और सरकार बनाने के लिए द्रमुक के साथ उनकी पार्टी के गठबंधन की अफवाहों को खारिज कर दिया। उनकी टिप्पणी एसपी वेलुमणि और सी वे षणमुगम के नेतृत्व वाले एक विद्रोही अन्नाद्रमुक गुट द्वारा ईपीएस पर कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ सरकार बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाने के बाद विजय को बाहरी समर्थन देने के बाद आई है। हालांकि, पलानीस्वामी ने एक बयान में कहा कि फर्जी खबरें प्रसारित की गईं जिसमें आरोप लगाया गया कि एआईएडीएमके डीएमके के समर्थन से सरकार बनाने की योजना पर काम कर रही है, उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थापना 1972 में डीएमके के विरोध के सिद्धांत पर की गई थी। ईपीएस ने ‘बैकस्टैबर’ विजय की आलोचना की अन्नाद्रमुक सुप्रीमो ने विजय की तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) पर “खरीद-फरोख्त” और मंत्री पद की पेशकश के जरिए अन्नाद्रमुक पदाधिकारियों को लुभाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “जो पार्टी शुद्ध ताकत होने का दावा करती है, वह द्रमुक सहयोगियों के चरणों में गिर गई है। उसी पार्टी ने विधायकों की खरीद-फरोख्त कर अन्नाद्रमुक की पीठ में छुरा घोंपा है।” पलानीस्वामी ने आगे कहा कि टीवीके थोड़े समय के लिए ही टिकेगी और उन्हें विश्वास है कि तमिलनाडु में जल्द ही एआईएडीएमके की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा, ”एमजीआर और जयललिता के दिनों से, हमने विश्वासघात करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है और अगर वे पश्चाताप करते हैं तो उन्हें वापस ले लेते हैं।” इस बीच, बागी एआईएडीएमके नेता सी वे शनमुगम ने ईपीएस पर चुनाव से पहले टीवीके के साथ गठबंधन करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की बार-बार सलाह को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उनकी टिप्पणी पलानीस्वामी द्वारा 13 मई को विधानसभा विश्वास प्रस्ताव के दौरान नेतृत्व की अवहेलना करने के लिए विधायक एसपी वेलुमणि और सी विजयभास्कर सहित कई बागी नेताओं को पार्टी पदों से निष्कासित करने के बाद आई है। अन्नाद्रमुक ने यह भी कहा कि उन्होंने उन 25 विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए आवेदन किया है जिन्होंने पार्टी के व्हिप की अवज्ञा की और टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने के लिए मतदान किया, जो ईपीएस नेतृत्व के तहत पार्टी में सबसे गंभीर संकट को दर्शाता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ईपीएस ने ‘पीठ में छुरा घोंपने वाले’ विजय पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया, एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन की रिपोर्टों को खारिज किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु की राजनीति(टी)तमिलनाडु सरकार(टी)ईपीएस विजय(टी)ईपीएस बनाम विजय(टी)एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन(टी)एआईएडीएमके बागी विधायक(टी)विजय सरकार

क्या आप भी फ्रिज में रखते हैं कटे फल? ये गलती सेहत पर पड़ सकती है भारी, एक्सपर्ट ने बताया कब बन जाते हैं जहरीले

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Cut Fruits Storage: गर्मियों में ज्यादातर लोग तरबूज, खरबूजा, पपीता या अनानास जैसे फलों को काटकर फ्रिज में रख देते हैं ताकि बार-बार काटने की झंझट न रहे और ठंडे फल आसानी से मिल जाएं. देखने में यह आदत काफी आसान लगती है, लेकिन कई बार यही छोटी सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है. बहुत से लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखने के बाद फल पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं, जबकि सच यह है कि कटने के बाद फलों की ताजगी तेजी से कम होने लगती है. हवा, नमी और बैक्टीरिया के संपर्क में आने के बाद उनमें खराबी शुरू हो जाती है, अगर सही तरीके से स्टोर न किया जाए तो कटे हुए फल पेट से जुड़ी दिक्कतों की वजह भी बन सकते हैं. खासकर गर्म मौसम में बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं और फल जल्दी खराब हो जाते हैं. यही कारण है कि एक्सपर्ट कटे फलों को ज्यादा देर तक स्टोर करने से बचने की सलाह देते हैं, अगर आप भी अक्सर कटे हुए फल फ्रिज में रखते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि उन्हें कितनी देर तक सुरक्षित रखा जा सकता है और स्टोर करने का सही तरीका क्या है. कटे हुए फल जल्दी क्यों खराब होते हैं?जब भी किसी फल को काटा जाता है, उसकी बाहरी सुरक्षा परत हट जाती है. इसके बाद फल सीधे हवा और नमी के संपर्क में आ जाता है. यही वजह है कि उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. साल्मोनेला, ई. कोलाई और लिस्टेरिया जैसे हानिकारक बैक्टीरिया कटे फलों में तेजी से बढ़ सकते हैं. फ्रिज बैक्टीरिया की रफ्तार को धीमा जरूर करता है, लेकिन उन्हें पूरी तरह खत्म नहीं करता. इसलिए यह मान लेना गलत है कि फ्रिज में रखा हर कटे फल पूरी तरह सुरक्षित है. ऑक्सीडाइजेशन से कम हो जाते हैं पोषक तत्वआपने कई बार देखा होगा कि कटने के कुछ देर बाद सेब या केला भूरा पड़ने लगता है. यह ऑक्सीडाइजेशन की वजह से होता है. हवा के संपर्क में आने पर फलों में मौजूद विटामिन-सी जैसे पोषक तत्व धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. यानी फल सिर्फ स्वाद ही नहीं खोते, बल्कि उनका न्यूट्रिशन भी कम होने लगता है. लंबे समय तक कटे फल रखने से उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कितने समय तक सुरक्षित रहते हैं कटे फल?कटे फलों की सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि उन्हें किस तापमान पर रखा गया है. अगर फल कमरे के तापमान पर रखे हैं, तो उन्हें 4 से 6 घंटे के अंदर खा लेना चाहिए. अगर फ्रिज का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से कम है, तो ज्यादातर कटे फल करीब 24 घंटे तक ठीक रह सकते हैं. तरबूज, खरबूजा, पपीता और अनानास जैसे ज्यादा पानी वाले फल जल्दी खराब होते हैं. केला और सेब जैसे फल जल्दी रंग बदलते हैं, इसलिए इन्हें काटने के तुरंत बाद खाना बेहतर माना जाता है. लोग स्टोर करते समय कौन सी गलतियां करते हैं?कई लोग कटे फलों को प्लेट में खुला छोड़ देते हैं या हल्के फॉयल में ढककर फ्रिज में रख देते हैं. इससे फल लगातार हवा के संपर्क में बने रहते हैं और जल्दी खराब हो जाते हैं. इसके अलावा बार-बार फ्रिज खोलने से अंदर का तापमान बदलता रहता है. तापमान में उतार-चढ़ाव होने पर फलों में खराबी तेजी से बढ़ती है. कई बार लोग एक ही कंटेनर को बार-बार खोलते रहते हैं, जिससे बाहर की दूषित हवा अंदर पहुंचती रहती है. कटे फलों को सुरक्षित रखने का सही तरीका 1. एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करेंकटे हुए फलों को हमेशा कांच या अच्छी क्वालिटी के एयरटाइट कंटेनर में रखें. इससे हवा अंदर कम जाती है और फल ज्यादा समय तक ताजे बने रहते हैं. 2. साफ-सफाई का ध्यान रखेंफल काटने से पहले हाथ, चाकू और कटिंग बोर्ड अच्छी तरह साफ करें. गंदे बर्तन या चाकू से बैक्टीरिया सीधे फल के अंदर पहुंच जाते हैं. 3. तुरंत फ्रिज में रखेंफल काटने के बाद उन्हें ज्यादा देर बाहर न छोड़ें. तुरंत फ्रिज में रखना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. 4. छोटे हिस्सों में स्टोर करेंअगर ज्यादा फल काट रहे हैं, तो उन्हें छोटे-छोटे कंटेनर में रखें. इससे हर बार पूरा कंटेनर खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कैसे पहचानें कि फल खराब हो चुके हैं?कई बार फल देखने में ठीक लगते हैं, लेकिन अंदर से खराब हो चुके होते हैं. ऐसे में इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है. फल से खट्टी या फर्मेंटेशन जैसी गंध आना, फल का चिपचिपा हो जाना, ज्यादा पानी छोड़ना, रंग का बहुत ज्यादा गहरा या काला पड़ जाना, स्वाद में बदलाव महसूस होना. अगर इनमें से कोई भी संकेत दिखे, तो ऐसे फल खाने से बचना चाहिए. बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा जरूरी सावधानीकटे हुए खराब फल बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए ज्यादा नुकसानदायक हो सकते हैं. ऐसे लोगों में फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए उनके लिए हमेशा ताजे और तुरंत कटे फल देना ज्यादा सुरक्षित रहता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

इमली की चटनी रेसिपी: गरमा गरम चाट-पकौड़ी का मजा होगा दोगुना, घर पर खास हलवाई स्टाइल इमली की चटनी, नोट करें रेसिपी

इमली चटनी रेसिपी

18 मई 2026 को 16:06 IST पर अद्यतन किया गया इमली की चटनी रेसिपी: गर्मियों में अगर आप समोसे, कचौड़ी, चाट या पकौड़े का स्वाद लेना चाहते हैं, तो घर पर बनी खट्टी-मीठी इमली की रेसिपी सबसे बेहतरीन है। यह चिप्स स्वाद में बिल्कुल हलवाई स्टाइल में दिखता है और इसे बनाना भी बेहद आसान है। खास बात यह है कि सही तरीके से स्टोर करने पर 2 से 3 महीने तक बुरा नहीं होता। आइये जानते हैं इसकी आसान रेसिपी के बारे में। अनुसरण करना : सामग्री 150 ग्राम इमली 150 गुड़ ग्राम 1 से 2 चीनी चीनी 2 कप गरम पानी 1 मूल तेल आधा भाग जीरा 2 चुटकियाँ आधा आधा दरदारी पिसी सौंफ 1 काली मिर्च पाउडर आधा काला नमक स्वाद नमक आधा सोंठ छवि: फ्रीपिक सबसे पहले इमली को 20 से 30 मिनट तक गर्म पानी में अकेलाकर रख दें। इसके बाद हाथों से अच्छी तरह से मसलकर गूदा निकाला जाता है। अब छलनी की मदद से इसे अच्छा लें ताकि रेशे और बीज अलग-अलग हो जाएं। छवि: फ्रीपिक कड़ाही में 1 मसाला तेल गर्म करके, तड़का लगाने के लिए इसमें जीरा, हींग और दारदारी पिसी सौंफ मॉड्यूल पाइलन भून लें। आईमली की पल्प दाल डे और मूर्ति की आने तक की तैयारी हो गई। छवि: फ्रीपिक इमली के गूदे में गुड़ और चीनी डालें। गुड़ के अच्छे प्रकार के पिघलने के बाद रात्री लाल मिर्च पाउडर, काला नमक, सादा नमक, सोंठ पाउडर और खरबूजे के बीज की दाल दें। सभी विकलांगों को अच्छी तरह से मध्यम आकार के बेंचमार्क पर ग्रेड। छवि: फ्रीपिक लगभग 5 से 7 मिनट तक अंतिम संस्कार पर अंतिम मिनट तक। जब मॅकॅमिनेशन पर अच्छी तरह का कोट होने लगे, तब गैस बंद कर दे। ध्यान रखें कि अनैतिकता के बाद लालच और अधिकता हो जाती है। छवि: फ्रीपिक पूरी तरह से निजीकरण के बाद इसे एयर टाइट कांचन के जार में पिज्जा में रखा गया। इसे सही तरीके से स्टोर करके 2 से 3 महीने तक आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 18 मई 2026 को 16:06 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)इमली चटनी रेसिपी(टी)इमली चटनी रेसिपी(टी)मीठी इमली चटनी(टी)हलवाई स्टाइल चटनी(टी)भारतीय चटनी रेसिपी(टी)खट्टी मीठी चटनी(टी)स्ट्रीट फूड चटनी(टी)घर का बना इमली सॉस(टी)इमली की चटनी कैसे बनाएं(टी)आसान चटनी रेसिपी

तलाक पर बोले मौनी के पति सूरज:हमारे बीच कोई विवाद या एलिमनी का लेनदेन नहीं; अफवाहें फैलाना बंद करे

तलाक पर बोले मौनी के पति सूरज:हमारे बीच कोई विवाद या एलिमनी का लेनदेन नहीं; अफवाहें फैलाना बंद करे

एक्ट्रेस मौनी रॉय और उनके पति सूरज नांबियार ने पिछले गुरुवार को अलग होने का फैसला किया था। अब इस मामले पर बिजनेसमैन सूरज नांबियार का स्टेटमेंट सामने आया है। सोमवार को जारी किए गए इस बयान में सूरज ने मीडिया में चल रही अफवाहों पर नाराजगी जताई है। उन्होंने साफ किया है कि उनके अलग होने के फैसले में कोई विवाद, एलिमनी (गुजारा भत्ता) या कोई तीसरा शख्स शामिल नहीं है। दोनों ने आपसी सहमति और सम्मान के साथ अलग होने का फैसला किया है। मौनी रॉय ने भी इस पोस्ट को दोबारा शेयर किया है। अफवाहों को बताया बेबुनियाद और गलत सूरज नांबियार ने अपने ऑफिशियल बयान में कहा कि मीडिया के कुछ हिस्सों की तरफ से हमारी पर्सनल लाइफ में जरूरत से ज्यादा दखल दिया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से हमारे अलग होने को लेकर जो भी खबरें चलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद हैं। सूरज ने कहा कि हम दोनों आपसी सहमति से अलग हो रहे हैं और इस मामले को निजी तौर पर सुलझाने के लिए समय ले रहे हैं। सोशल मीडिया पर चल रही मनगढ़ंत बातें सिर्फ लोगों को बदनाम करने की कोशिश हैं। गुरुवार को अलग होने की घोषणा की थी गुरुवार को मौनी और सूरज ने इंस्टाग्राम पर एक जॉइंट नोट जारी कर बताया था कि वे अपनी शादी खत्म कर रहे हैं। मौनी और सूरज ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा था, हमें दुख है कि मीडिया के कुछ लोगों ने हमारी निजी जिंदगी में बेवजह और जरूरत से ज्यादा दखल दिया है। हम यह कहना चाहते हैं कि हमने अलग होने का फैसला किया है और इस समय को शांति और समझदारी के साथ निजी तौर पर संभाल रहे हैं। हमारी निजी जिंदगी को लेकर कई झूठी कहानियां और गलत बातें फैलाई गई हैं, जो हमारे रिश्ते की सच्चाई नहीं दिखातीं। काफी सोच-विचार के बाद हमने आपसी सम्मान और समझदारी के साथ अलग-अलग रास्तों पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। न कोई विवाद है और न ही एलिमनी का मामला सूरज ने सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को खारिज करते हुए लिखा कि मैं कुछ बातें बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूं। हमारे बीच कोई एलिमनी का लेनदेन नहीं हो रहा है। हमारे बीच किसी तरह का कोई झगड़ा या विवाद नहीं है। इस अलगाव के पीछे कोई तीसरा शख्स भी नहीं है। मौनी और मैंने एक-दूसरे की भलाई को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया है। यही सच है और इसके अलावा जो कुछ भी मीडिया में दिखाया जा रहा है, वह सिर्फ काल्पनिक है। चुप रहना सही नहीं समझा सूरज ने आगे लिखा कि इस मुश्किल समय में मौनी और मैंने हमेशा गरिमा बनाए रखी है। हम मीडिया से भी इसी सम्मान की उम्मीद करते हैं। मैं इन अफवाहों का जवाब सीधे तौर पर इसलिए दे रहा हूं क्योंकि जानबूझकर फैलाई जा रही झूठी खबरों पर चुप रहना मुझे सही नहीं लगा। गलत जानकारी के खिलाफ बोलना बेहद जरूरी था। इस पूरे बयान को एक्ट्रेस मौनी रॉय ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर री-शेयर किया है। साल 2022 में हुई थी दोनों की शादी मौनी रॉय और सूरज नांबियार की शादी जनवरी 2022 में गोवा में हुई थी। दोनों की शादी बंगाली और साउथ इंडियन रीति-रिवाजों से हुई थी, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थीं। दोनों की मुलाकात साल 2018 में दुबई के एक क्लब में हुई थी, जिसके बाद उन्होंने करीब तीन साल तक एक-दूसरे को डेट किया। शादी के चार साल पूरे होने से पहले ही दोनों ने पिछले हफ्ते एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी कर तलाक का ऐलान किया था।

LLB छात्रा से रेप के आरोपी ने जुलूस निकाला:गाजियाबाद जेल से छूटने पर समर्थकों ने फूल बरसाए, हिंदू युवा वाहिनी का नगर अध्यक्ष रहा

LLB छात्रा से रेप के आरोपी ने जुलूस निकाला:गाजियाबाद जेल से छूटने पर समर्थकों ने फूल बरसाए, हिंदू युवा वाहिनी का नगर अध्यक्ष रहा

गाजियाबाद में रविवार को LLB छात्रा से रेप का आरोपी जमानत पर जेल से बाहर आया। हिंदू युवा वाहिनी का नगर अध्यक्ष रह चुका है। 8 महीने बाद डासना जेल से निकलते ही उसके समर्थकों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इसके बाद उसे कंधे पर बैठाकर जेल परिसर से सड़क तक ले गए। फिर गाड़ियों का काफिला निकालकर जुलूस निकाला गया। समर्थकों ने इसका वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया। 8 अगस्त 2025 को आरोपी सुशील प्रजापति ने LLB की एक छात्रा के साथ रेप किया था। इसके बाद उसे किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। देर रात करीब 11 बजे छात्रा मुरादनगर थाने पहुंची। उसके समर्थन में बजरंग दल के लोग भी पहुंचे और हंगामा किया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। 11 अगस्त 2025 को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। 17 मई को सुशील प्रजापति जेल से बाहर आया। देखिए 3 तस्वीरें… अब जानिए पूरा मामला… 2021 में हुई थी मुलाकात पुलिस के मुताबिक, नवंबर 2021 में गाजियाबाद निवासी सुशील प्रजापति की मुलाकात LLB की एक छात्रा से हुई थी। इसके बाद सुशील उसे लगातार फोन कर हालचाल लेने लगा। छात्रा ने उससे बताया कि वह लॉ की पढ़ाई के साथ मेरठ कोर्ट में एक सीनियर वकील के पास प्रैक्टिस भी करती है। इस पर सुशील ने उससे कहा कि वह गाजियाबाद कोर्ट में बैठना शुरू कर दे। उसने दावा किया कि उसके जानकार वहां सीनियर एडवोकेट हैं, जो उसे हर महीने पैसे भी दिलवा देंगे। साथ ही, उसके जानने वाले लोग भी छात्रा के पास केस लेकर आएंगे। सुशील ने यह भी कहा कि गाजियाबाद, मोदीनगर के ज्यादा करीब है। इस पर छात्रा ने उससे गाजियाबाद कोर्ट में बैठने की व्यवस्था कराने को कहा। थार में बैठाकर ले गया था सुशील 8 अगस्त 2025 की सुबह करीब 11 बजे सुशील ने छात्रा को फोन कर कहा कि उसकी गाजियाबाद के एक सीनियर वकील से बात हो गई है और वह उसी दिन मुलाकात करा देगा। इसके बाद छात्रा मेरठ से बस के जरिए गाजियाबाद के मुरादनगर पहुंची। वहां सुशील पहले से थार गाड़ी लेकर खड़ा था। उसने कहा, “जल्दी बैठो, वकील साहब इंतजार कर रहे हैं। अभी उनसे मिलना है। इसके बाद वह छात्रा को एक फ्लैट पर ले गया। वहां उसने उसे कोल्ड ड्रिंक पीने के लिए दी और कहा कि वकील साहब आने वाले हैं। आरोप है कि कोल्ड ड्रिंक पीते ही छात्रा को नींद आने लगी। इसी दौरान सुशील प्रजापति ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद सुशील ने उसे धमकी दी कि अगर उसने किसी को इस बारे में बताया तो उसकी हत्या करवा देगा। उसने कहा कि उसके बड़े-बड़े लोगों से संबंध हैं और वह हिंदू युवा वाहिनी संगठन से जुड़ा हुआ है। इसके बाद वह छात्रा को अपनी कार से सड़क पर छोड़कर चला गया और कहा कि यहां से चुपचाप मेरठ लौट जाओ। छात्रा के पक्ष में जुटे कई संगठन होश आने के बाद छात्रा रात करीब 11 बजे मुरादनगर थाने पहुंची। सूचना मिलते ही उसके समर्थन में गोरक्षक दल और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी थाने पहुंच गए। उन्होंने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग को लेकर हंगामा किया। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी सुशील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। करीब 8 महीने तक डासना जेल में रहने के बाद वह रविवार को जमानत पर जेल से बाहर आया। —————- यह खबर भी पढ़िए… लखनऊ में ढाबा संचालक की हत्या:झगड़े का वीडियो बनाने पर दबंगों ने सिर में मारी गोली, 3 संदिग्ध हिरासत में लखनऊ में दबंगों ने एक ढाबा संचालक के सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। उसने ढाबे के सामने रोड पर लड़ाई कर रहे युवकों का वीडियो बनाया था। इससे नाराज होकर दबंग युवकों ने घटना को अंजाम दिया। ढाबा संचालक को गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी ऑपेरशन के दौरान मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें

योगी बोले- नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए:सड़क पर नहीं पढ़ी जाएगी; प्यार से मानेंगे तो ठीक, नहीं तो दूसरा तरीका अपनाएंगे

योगी बोले- नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए:सड़क पर नहीं पढ़ी जाएगी; प्यार से मानेंगे तो ठीक, नहीं तो दूसरा तरीका अपनाएंगे

यूपी में बकरीद से पहले सड़कों पर नमाज को लेकर सीएम योगी ने चेतावनी दी है। लखनऊ में सोमवार को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा- सड़कें नमाज पढ़ने या किसी तरह की भीड़ जुटाने के लिए नहीं हैं। लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या यूपी में सड़कों पर नमाज होती है? मैं कहता हूं- कतई नहीं। उन्होंने कहा- सड़कें आम लोगों के चलने के लिए हैं। कोई भी आकर ट्रैफिक डिस्टर्ब करे, यह अधिकार किसी को नहीं है। नमाज पढ़नी है तो तय जगह पर पढ़िए। संख्या ज्यादा है तो शिफ्ट में पढ़ लीजिए। हम नमाज नहीं रोकेंगे, लेकिन सड़क पर अराजकता नहीं होने देंगे। योगी ने आगे कहा- सरकार पहले संवाद से समाधान चाहती है। लेकिन, कानून तोड़ने वालों पर सख्ती भी होगी। प्यार से मानेंगे तो ठीक है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे। सीएम योगी ने बरेली में हुए बवाल का भी जिक्र किया। कहा- बरेली में लोगों ने हाथ आजमाया था, ताकत भी देख ली। कानून सभी के लिए बराबर है। किसी को भी सड़क जाम करने या अव्यवस्था फैलाने की छूट नहीं दी जाएगी। दरअसल, यूपी में सितंबर 2025 में आई लव मोहम्मद को लेकर विवाद हुआ था। बरेली में मुस्लिम नेता मौलाना तौकीर रजा ने नमाज के बाद धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया। पुलिस ने रोका तो पथराव हो गया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। CM बोले- पहले कट्टा-बम बनते थे, अब ब्रह्मोस मिसाइल बन रही योगी ने यूपी के विकास और निवेश का जिक्र किया। कहा- पहले प्रदेश की पहचान कट्टा और बम से होती थी, लेकिन अब यहां ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। नकारात्मक माहौल होगा तो ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ पैदा होगा। सकारात्मक माहौल होगा तो ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ बनेगा। यूपी में तेजी से निवेश आ रहा है। रोजगार बढ़ रहे हैं। यूपी जल्द 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनेगा। यूपी में महिलाओं की सुरक्षा बेहतर हुई योगी ने कहा- यूपी में पहले महिलाएं दिन में भी बाहर निकलने से डरती थीं। अब वे नाइट शिफ्ट में काम कर रही हैं। सुरक्षित घर लौट रही हैं। अब कोई बेटी से छेड़खानी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा- यूपी अब ‘बीमारू राज्य’ नहीं, बल्कि रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बन चुका है। पिछले 6 साल से यूपी लगातार रेवेन्यू सरप्लस में है। अब प्रदेश को किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती। यूपी के पास कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं की ताकत जैसी अपार संभावनाएं हैं। सरकार सभी 75 जिलों के संतुलित विकास पर काम कर रही है। बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान सड़क पर नमाज का मुद्दा उठाया था सीएम योगी ने हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सड़कों पर नमाज के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि दीदी सड़कों पर नमाज पढ़वाती हैं और हिंदू त्योहारों पर पाबंदी लगाती हैं। यूपी में कोई सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ सकता। सड़कें यातायात के लिए हैं, नमाज के लिए नहीं। नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा। योगी सरकार ने सड़क पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाई थी योगी सरकार ने 2022-2023 में सड़कों पर नमाज पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। आदेश दिया कि ईद, अलविदा जुमा या किसी भी अन्य दिन सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। धार्मिक कार्यक्रम केवल ईदगाह, मस्जिदों या निर्धारित धार्मिक स्थलों के अंदर ही होने चाहिए। ———————- ये खबर भी पढ़ें… लखनऊ में हंगामा, पथराव और लाठीचार्ज: बुलडोजर से वकीलों के 240 चैंबर ढहाए; अखिलेश बोले- भाजपा किसी की सगी नहीं लखनऊ जिला कोर्ट के बाहर रविवार को जमकर हंगामा हुआ। बुलडोजर से चैंबर तोड़े जाने के विरोध में वकील भड़क गए। वकीलों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर लाठियां बरसाईं। इस दौरान भीड़ में से कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। VIDEO में देखिए पूरा बवाल…