लखनऊ की हार पर ऋषभ पंत के बयान से विवाद:शॉन पोलाक बोले- कप्तान मैनेजमेंट पर दोष मढ़ रहे हैं; 'टू मेनी माइंड्स' पर बहस

KKR के खिलाफ सुपर ओवर में हार के बाद LSG कप्तान ऋषभ पंत के बयान से चर्चा शुरू हुई। पंत ने कहा था कि मैदान पर ज्यादा राय मिलने से फैसले लेना मुश्किल होता है। साउथ अफ्रीका के पूर्व क्रिकेटर शॉन पोलक ने कहा कि कप्तान ऐसा कहकर परोक्ष रूप से मैनेजमेंट पर उंगली उठा रहे हैं। मैनेजमेंट को दोषी दे रहे हैं शॉन पोलक ने एक क्रिकेट वेबसाइट से कहा कि कप्तान का ऐसा बयान सही संकेत नहीं है। पोलक के मुताबिक, ‘पंत मूल रूप से यह कह रहे हैं कि बहुत सारे लोग उन्हें जानकारी दे रहे हैं और वे एक तरह से अपने मैनेजमेंट ग्रुप को दोषी ठहरा रहे हैं।’ उन्होंने जोड़ा कि बाहर से समझना मुश्किल है कि ड्रेसिंग रूम में आखिरी फैसला किसका होता है या कौन पंत के साथ रणनीति तय करता है। दो फैसलों पर उठे सवाल, जिनसे मैच हाथ से निकला मैच में पंत के दो फैसलों की आलोचना हो रही है। आखिरी ओवर में मोहम्मद शमी ने छक्का लगाकर मैच टाई कराया, लेकिन उससे पहले दिग्विजय राठी को ओवर देना भारी पड़ा, जहां रिंकू सिंह ने चार छक्के जड़े थे। दूसरा सवाल सुपर ओवर में निकोलस पूरन को भेजने पर उठा। KKR के सुनील नरेन ने गेंदबाजी कर टीम को जीत दिलाई। इन्हीं के बीच पंत ने कहा था कि ज्यादा दिमाग होने से मैदान पर चीजें आसान नहीं रहतीं।’ पंत बोले- हर खिलाड़ी को जिम्मेदारी लेनी होगी, बाहर जवाब ढूंढना बंद करें हार के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी में पंत ने टीम को एकजुट रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा,’हमें एक छोटे ब्रेक और रिफ्रेश होने की जरूरत है। दबाव हमेशा रहेगा, लेकिन हमें जवाब बाहर के बजाय अपने अंदर ढूंढने होंगे। चीजों को सरल रखना जरूरी है। हार के लिए किसी एक या दो खिलाड़ी को नहीं, बल्कि पूरी यूनिट को जिम्मेदारी लेनी होगी।’ उन्होंने माना कि टीम को दबाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए मानसिक रूप से तैयार होना होगा। ब्रेक के बाद वापसी की उम्मीद, टीम को रीसेट करने की जरूरत लखनऊ टीम अब छोटे ब्रेक पर जा रही है। पोलक के अनुसार, इस दौरान टीम को तय करना होगा कि मैदान पर कप्तान की भूमिका और मैनेजमेंट का हस्तक्षेप कितना होगा। फिलहाल अंक तालिका में स्थिति चुनौतीपूर्ण है और अगले मैचों के लिए निर्णय प्रक्रिया सुधारनी होगी। —————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… कोहली IPL में 9 हजार रन बनाने वाले पहले बैटर:दिल्ली का पावरप्ले में सबसे कम स्कोर; बेंगलुरु ने 81 बॉल रहते मैच जीता; मोमेंट्स-रिकॉर्डस रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने IPL 2026 के 39वें मैच में दिल्ली कैपिटल्स को 9 विकेट से हरा दिया। सोमवार को अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में दिल्ली की बल्लेबाजी फ्लॉप रही। टीम ने पावरप्ले का सबसे कम स्कोर बनाया। दिल्ली की पारी 75 रन पर ढेर हो गई। जवाब ने बेंगलुरु ने 81 गेंद रहते टारगेट हासिल कर लिया। 23 रन बनाकर नाबाद रहने वाले विराट कोहली IPL इतिहास में 9 हजार रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज बन गए। पूरी खबर
E20 के बाद E85 फ्लेक्स-फ्यूल की तैयारी में भारत:माइलेज 30% तक कम हो सकता है; कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य

ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच कच्चे तेल के सप्लाई संकट को देखते हुए भारत सरकार अब E85 फ्लेक्स-फ्यूल की ओर कदम बढ़ा रही है। सरकार जल्द ही E85 फ्यूल की मंजूरी के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर सकती है, जिसके लिए मार्केट में आम सहमति बन चुकी है। खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करना लक्ष्य भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से 50% से ज्यादा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है जो हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरकर पहुंचता है। ईरान-अमेरिका तनाव की वजह से ये रूट बंद है, जिससे कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर के पार पहुंच गए हैं। कच्चे तेल का महंगा होना न केवल देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ है, बल्कि आत्मनिर्भरता के लिए भी चुनौती है। इसी वजह से सरकार अब इथेनॉल वाले ईंधन पर फोकस कर रही है। अभी 20% एथेनॉल वाले पेट्रोल की बिक्री हो रही E85 फ्यूल में 85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है। अभी देशभर में E20 फ्यूल की बिक्री अनिवार्य है। इथेनॉल को गन्ने के रस, मक्का और सड़े हुए अनाज जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। ये फ्यूल पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करता है। ऑटो इंडस्ट्री तैयार, नोटिफिकेशन का इंतजार ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को लेकर अपनी तैयारी पहले ही दिखा दी है। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी के मुताबिक, फ्लेक्स-फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक देश के तौर पर हम आयात पर निर्भर नहीं रहेंगे। सरकार अब E85 को रेगुलेटेड फ्यूल के रूप में अनिवार्य करने की जगह फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है। इन 4 मोर्चों पर चुनौतियों से निपटना होगा SP ग्लोबल के डायरेक्टर पुनीत गुप्ता का कहना है कि E85 को अपनाने के लिए बड़े इकोसिस्टम की जरूरत होगी। इसमें 4 मुख्य चुनौतियां हैं: माइलेज और कीमत बन सकती है रुकावट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तकनीक से ज्यादा बड़ी चुनौती फ्यूल की कीमत और माइलेज है। इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी कम होने के कारण फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का माइलेज 20 से 30% तक गिर सकता है। इस कमी की भरपाई के लिए फ्यूल की कीमत कम रखनी होगी । टोयोटा, मारुति इथेनॉल वाले वाहन पेश कर चुके टोयोटा और मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां पहले ही हाई इथेनॉल ब्लेंड से चलने वाले वाहन पेश कर चुकी हैं। टीवीएस मोटर के चेयरमैन सुदर्शन वेणु ने भी संकेत दिए हैं कि कंपनी अपाचे सहित अपने कई सेगमेंट में इथेनॉल से चलने वाले वाहन लाने की योजना बना रही है। टैक्स बेनेफिट्स पर जोर देने की जरूरत विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को सब्सिडी देने के बजाय पॉलिसी इनेबलर के रूप में काम करना चाहिए। इसमें FFV (फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल) पर कम टैक्स, पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल के दामों में बड़ा अंतर और इथेनॉल को कार्बन-न्यूट्रल मानकर क्रेडिट देना शामिल है। नॉलेज पार्ट: क्या होता है फ्लेक्स-फ्यूल इंजन? यह एक ऐसा इंजन है जो एक से ज्यादा तरह के ईंधन (जैसे शुद्ध पेट्रोल या पेट्रोल-इथेनॉल का कोई भी मिश्रण) पर चल सकता है। इसमें सेंसर लगे होते हैं जो ईंधन के मिश्रण को पहचानकर इंजन की सेटिंग्स को अपने आप एडजस्ट कर लेते हैं।
भारत-न्यूजीलैंड में FTA से सेब बागवान चिंतित:राठौर बोले-इम्पोर्ट ड्यूटी 25% की; हिमाचल, कश्मीर-उत्तराखंड के किसानों पर पड़ेगी मार

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच बीते कल दिल्ली में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) ने हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता एवं ठियोग के विधायक कुलदीप राठौर ने कहा कि इस एग्रीमेंट के बाद न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 फीसदी से घटाकर 25 प्रतिशत रह जाएगी। राठौर ने कहा- बेशक पहले साल में यह कोटा 32,500 मीट्रिक टन (लगभग 20 kg के 16,25,000 बॉक्स) से शुरू होता है, लेकिन छठे साल तक यह बढ़कर 45,000 मीट्रिक टन (लगभग 22,50,000 बॉक्स) हो जाएगा। यह सेब अप्रैल से अगस्त दौरान भारत के बाजार में आएगा। इसकी मार पहले निचले क्षेत्रों के सेब बागवानों को पड़ेगी। सीजन की शुरुआत से पहले ही विदेशी सेब के आने से बाजार गिर जाएगा और इसका असर पूरे सीजन पर रहेगा। राठौर ने कहा- न्यूज़ीलैंड की सेब इंडस्ट्री में प्रोडक्टिविटी बहुत ज्यादा है, मॉडर्न बागों में प्रति हेक्टेयर 50-70 टन (लगभग 2,500 से 3,500 बॉक्स प्रति हेक्टेयर) पैदावार होती है, जबकि हिमाचल प्रदेश में एवरेज प्रोडक्टिविटी मात्र 7-8 टन प्रति हेक्टेयर (लगभग 350 से 400 बॉक्स प्रति हेक्टेयर) है। इस वजह से हिमाचल में इनपुट कॉस्ट न्यूजीलैंड समेत दूसरे देशों से भी कहीं ज्यादा है। ऐसे में विदेशी सेब के भारतीय बाजार में आने से राज्य के बागवानों को उचित दाम नहीं मिलेगे। 2.5 लाख परिवार सेब पर डिपेंडेंट: राठौर कुलदीप राठौर ने कहा- भारत का सेब सेक्टर, जो हिमालयी बेल्ट में फैला हुआ है, बड़ी ग्रामीण इकॉनमी को सपोर्ट करता है। जम्मू और कश्मीर लगभग 76-77% प्रोडक्शन के साथ सबसे आगे है, उसके बाद हिमाचल प्रदेश लगभग 21-22% के साथ दूसरे नंबर पर है। अकेले हिमाचल में 1 लाख 15 हजार हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन पर सेब की खेती होती है और लगभग 2.5 लाख परिवार इस पर डिपेंडेंट हैं। केंद्र की किसान विरोधी नीतियों से किसान परेशान सेब राज्य की हॉर्टिकल्चर इनकम का लगभग 80% हिस्सा देते हैं। मगर केंद्र की किसान विरोधी नीतियों ने सेब उत्पादकों को चिंताएं बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 150 फीसदी करने का भरोसा हिमाचल के बागवानों को दिया था। पीएम ने अब तक इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का वादा पूरा तो नहीं किया, लेकिन इसे कम जरूर किया है। CA स्टोर में रखे सेब पर भी मार पड़ेगी राठौर ने कहा कि न्यूजीलैंड के सेब की ज्यादा मार CA (वातानुकुलित) स्टोरेज से निकलने वाले सेब पर पड़ने वाली है। उन्होंने बताया कि यह एग्रीमेंट स्वदेसी सेब की इंडस्ट्री को तबाह करेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से इम्पोर्ट कोटा और कीमतों की कड़ी निगरानी करने, कोल्ड स्टोरेज, ग्रेडिंग और ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने, किसानों को मॉडर्न टेक्नोलॉजी मुहैया कराने और आगे कोई भी बदलाव करने से पहले किसानों से सलाह लेने की मांग की है।
पन्ना टाइगर रिजर्व: बाघ की मौत पर कार्रवाई:बीटगार्ड निलंबित, रेंजर-वनपाल को आरोप पत्र; एसटीएफ कर रही जांच

मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ के कंकाल मिलने के मामले में प्रबंधन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। मैदानी अमले की घोर लापरवाही मानते हुए एक बीटगार्ड को निलंबित कर दिया गया है, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों को आरोप पत्र जारी किए गए हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर बीके पटेल ने बताया कि गंगऊ अभ्यारण्य के बीट कटरिया में बाघ का कंकाल मिलने के बाद प्राथमिक जांच के आधार पर बीटगार्ड रामसफल बैगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। इसके अतिरिक्त, निगरानी में चूक को लेकर कार्यवाहक वनपाल कमल किशोर मोची और रेंजर (परिक्षेत्राधिकारी) सागर शुक्ला को आरोप पत्र जारी कर उनसे जवाब मांगा गया है। यह घटना बीते मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को सामने आई थी, जब मझगवां-हिनौता मुख्य मार्ग के पास वन कक्ष क्रमांक-278 में एक नर बाघ का पूरी तरह सड़ा हुआ शव मिला था, जो कंकाल में बदल चुका था। चौंकाने वाली बात यह है कि यह शव मुख्य मार्ग से मात्र 150 फीट की दूरी पर था। अनुमान है कि बाघ की मौत लगभग 15 दिन पहले हो चुकी थी। इतने दिनों तक शव का जंगल में पड़े रहना और गश्ती दल को इसकी जानकारी न मिलना, पीटीआर की ‘एम-स्ट्राइप्स’ निगरानी प्रणाली और मैदानी अमले की सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है या इसके पीछे शिकारियों का हाथ है, इसकी गहन जांच जारी है। जबलपुर से आई विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए हैं। डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि बाघ के अवशेषों के नमूने फॉरेंसिक लैब भेजे जा चुके हैं। पोस्टमार्टम और लैब रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चलेगा, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
खुम्बु आइसफॉल पर रुका एवरेस्ट पर्वतारोहियों का मिशन:गाइड्स को एयरलिफ्ट कराने की तैयारी; ‘एवरेस्ट की सेहत’ सुधारने में जुटे आइसफॉल डॉक्टर

समुद्र तल से 17 हजार फीट की ऊंचाई, एवरेस्ट की कठिन डगर और चारों तरफ पसरा मौत सा सन्नाटा… यहां हवा की एक सरसराहट भी दिल की धड़कनें बढ़ा देती है, क्योंकि एक जरा सी चूक सीधे गहरी खाई या बर्फ की कब्र में ले जा सकती है। इसी बर्फीले नर्क के बीच खड़ा है एक शख्स, जिसे दुनिया ‘आइसफॉल डॉक्टर’ कहती है। दावा जांगबू शेर्पा के लिए माउंट एवरेस्ट सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि ‘मरीज’ है, जिसकी सांसों की नब्ज वह हर दिन टटोलता है। पर इस हफ्ते, खुम्बु आइसफॉल के उस दो मील के खतरनाक हिस्से ने दावा और उनकी 11 सदस्यीय विशिष्ट टीम को भी खौफ में डाल दिया है। भारी बर्फबारी के कारण बहुत बड़ी नीलीस-सफेद बर्फ की दीवार (सेराक) रास्ते में खड़ी हो गई है। यह दीवार इतनी विशाल है कि इसे पार करना बेहद खतरनाक है। फिलहाल ग्राउंड जीरो पर कोशिशों में जुटे जागंबू बताते हैं,‘रास्ते हर साल बंद होते हैं, पर मैंने अपनी जिंदगी में बर्फ का ऐसा पहाड़ रास्ते के बीच कभी नहीं देखा। हमने ड्रोन उड़ाकर देखा है, इसे पार करना अभी नामुमकिन है।’ यह मामूली रुकावट नहीं है, बल्कि एक ऐसी मौत की दीवार है जिसने सैकड़ों पर्वतारोहियों के सपनों को बेस कैंप में ही कैद कर दिया है।’ जांगबू कहते हैं ‘बेस कैंप अब एक तंबू के शहर में तब्दील हो चुका है, जहां 400 से ज्यादा पर्वतारोही टकटकी लगाए उस दीवार के पिघलने का इंतजार कर रहे हैं। चढ़ाई का समय तेजी से खत्म हो रहा है। नेपाल सरकार के लिए यह बड़ा राजस्व का मामला है, इसलिए विचार किया जा रहा है कि अगर एक-दो दिन में दीवार नहीं पिघली, तो गाइड्स को एयरलिफ्ट कर ऊपर पहुंचाया जाए। पहाड़ पर तीन बार फतह हासिल कर चुके दावा जांगबू जानते हैं कि रास्ता खुलने के बाद भी चुनौती कम नहीं होगी। सैकड़ों लोगों का एक साथ उस संकरे रास्ते से गुजरना एक नई मुसीबत को दावत देगा। जांगबू की नजरें अभी भी उस सफेद दीवार पर टिकी हैं- उन्हें इंतजार है कि कब उनका ‘मरीज’ उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता देगा। क्योंकि एवरेस्ट पर, आखिरी फैसला हमेशा पहाड़ का ही होता है। खतरा, इसी जगह पर 2014 में 16 गाइड्स की मौत हुई थी आइसफॉल डॉक्टर्स का काम दुनिया के सबसे खतरनाक पेशों में गिना जाता है। ये जांबाज उस वक्त पहाड़ पर चढ़ते हैं जब कोई और वहां जाने की सोच भी नहीं सकता। दरकते ग्लेशियरों के बीच रस्सियां बांधना और रसातल जैसी गहरी दरारों पर एल्युमीनियम की सीढ़ियां टिकाना बड़ी चुनौती रहती है। पर इस साल, खतरा पहले से कहीं ज्यादा है। अप्रैल 2014 की घटना इन शेरपाओं के जेहन में अब भी ताजा है, जब इसी जगह बर्फ की दीवार गिरने से 16 गाइड्स की मौत हो गई थी। वह एवरेस्ट के इतिहास का सबसे भीषण दिन था। स्थिति वैसी ही है और सुरक्षा से समझौता करना खुदकुशी के बराबर है।
खुम्बु आइसफॉल पर रुका एवरेस्ट पर्वतारोहियों का मिशन:गाइड्स को एयरलिफ्ट कराने की तैयारी; ‘एवरेस्ट की सेहत’ सुधारने में जुटे आइसफॉल डॉक्टर

समुद्र तल से 17 हजार फीट की ऊंचाई, एवरेस्ट की कठिन डगर और चारों तरफ पसरा मौत सा सन्नाटा… यहां हवा की एक सरसराहट भी दिल की धड़कनें बढ़ा देती है, क्योंकि एक जरा सी चूक सीधे गहरी खाई या बर्फ की कब्र में ले जा सकती है। इसी बर्फीले नर्क के बीच खड़ा है एक शख्स, जिसे दुनिया ‘आइसफॉल डॉक्टर’ कहती है। दावा जांगबू शेर्पा के लिए माउंट एवरेस्ट सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि ‘मरीज’ है, जिसकी सांसों की नब्ज वह हर दिन टटोलता है। पर इस हफ्ते, खुम्बु आइसफॉल के उस दो मील के खतरनाक हिस्से ने दावा और उनकी 11 सदस्यीय विशिष्ट टीम को भी खौफ में डाल दिया है। भारी बर्फबारी के कारण बहुत बड़ी नीलीस-सफेद बर्फ की दीवार (सेराक) रास्ते में खड़ी हो गई है। यह दीवार इतनी विशाल है कि इसे पार करना बेहद खतरनाक है। फिलहाल ग्राउंड जीरो पर कोशिशों में जुटे जागंबू बताते हैं,‘रास्ते हर साल बंद होते हैं, पर मैंने अपनी जिंदगी में बर्फ का ऐसा पहाड़ रास्ते के बीच कभी नहीं देखा। हमने ड्रोन उड़ाकर देखा है, इसे पार करना अभी नामुमकिन है।’ यह मामूली रुकावट नहीं है, बल्कि एक ऐसी मौत की दीवार है जिसने सैकड़ों पर्वतारोहियों के सपनों को बेस कैंप में ही कैद कर दिया है।’ जांगबू कहते हैं ‘बेस कैंप अब एक तंबू के शहर में तब्दील हो चुका है, जहां 400 से ज्यादा पर्वतारोही टकटकी लगाए उस दीवार के पिघलने का इंतजार कर रहे हैं। चढ़ाई का समय तेजी से खत्म हो रहा है। नेपाल सरकार के लिए यह बड़ा राजस्व का मामला है, इसलिए विचार किया जा रहा है कि अगर एक-दो दिन में दीवार नहीं पिघली, तो गाइड्स को एयरलिफ्ट कर ऊपर पहुंचाया जाए। पहाड़ पर तीन बार फतह हासिल कर चुके दावा जांगबू जानते हैं कि रास्ता खुलने के बाद भी चुनौती कम नहीं होगी। सैकड़ों लोगों का एक साथ उस संकरे रास्ते से गुजरना एक नई मुसीबत को दावत देगा। जांगबू की नजरें अभी भी उस सफेद दीवार पर टिकी हैं- उन्हें इंतजार है कि कब उनका ‘मरीज’ उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता देगा। क्योंकि एवरेस्ट पर, आखिरी फैसला हमेशा पहाड़ का ही होता है। खतरा, इसी जगह पर 2014 में 16 गाइड्स की मौत हुई थी आइसफॉल डॉक्टर्स का काम दुनिया के सबसे खतरनाक पेशों में गिना जाता है। ये जांबाज उस वक्त पहाड़ पर चढ़ते हैं जब कोई और वहां जाने की सोच भी नहीं सकता। दरकते ग्लेशियरों के बीच रस्सियां बांधना और रसातल जैसी गहरी दरारों पर एल्युमीनियम की सीढ़ियां टिकाना बड़ी चुनौती रहती है। पर इस साल, खतरा पहले से कहीं ज्यादा है। अप्रैल 2014 की घटना इन शेरपाओं के जेहन में अब भी ताजा है, जब इसी जगह बर्फ की दीवार गिरने से 16 गाइड्स की मौत हो गई थी। वह एवरेस्ट के इतिहास का सबसे भीषण दिन था। स्थिति वैसी ही है और सुरक्षा से समझौता करना खुदकुशी के बराबर है।
एमजी रोड पर धंसी सड़क, फलों से भरा पिकअप फंसा:बड़वानी में घटिया सीवरेज कार्य से लगा जाम, रहवासी बोले-सही तरीके से नहीं हो रहा काम

बड़वानी जिला मुख्यालय के एमजी रोड पर मंगलवार सुबह एक फलों से भरा पिकअप वाहन सड़क में धंस गया। घटना के बाद कुछ समय तक रास्ते पर जाम की स्थिति बन गई और यातायात प्रभावित रहा। सीवरेज काम के बाद ठीक से नहीं बनी सड़क जानकारी के अनुसार, एमजी रोड पर सीवरेज लाइन बिछाने के बाद सड़क की मरम्मत ठीक से नहीं की गई थी। इसी कारण सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया और मंडी जा रहा पिकअप वाहन उसमें फंस गया। इस मार्ग पर पहले भी भारी वाहनों के फंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। रहवासियों ने जताई नाराजगी स्थानीय निवासी उदित ने बताया कि सीवरेज काम के बाद सड़क को सही तरीके से नहीं भरा जा रहा है। इसी वजह से आए दिन वाहन फंस रहे हैं और हादसे का खतरा बना रहता है। वहीं, राजेश गुप्ता ने कहा कि इस घटना में बड़ा हादसा टल गया, क्योंकि अगर वाहन पलट जाता तो नुकसान हो सकता था। ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग क्षेत्र के लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार ठेकेदार के भुगतान पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो आगे बड़ी घटना हो सकती है। नगर पालिका ने दिए जांच के निर्देश नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि निक्कू चौहान ने बताया कि एमजी रोड के निर्माण को लेकर शिकायतें मिली हैं। उन्होंने संबंधित ठेकेदार को गुणवत्ता के साथ जल्द काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि लापरवाही पाए जाने पर भुगतान रोका जाएगा और नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
सीहोर-श्यामपुर मार्ग पर डामर पिघला:जिले में तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस पहुंचा; अस्पतालों में बनी हीट स्ट्रोक यूनिट

सीहोर जिले में भीषण गर्मी और राजस्थान से आ रही गर्म हवाओं के कारण अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मंगलवार को तेज गर्मी के चलते सीहोर-श्यामपुर मार्ग पर सड़क का डामर पिघलना शुरू हो गया है। अप्रैल महीने में पिछले दो दिनों से पारा 44 डिग्री के पार बना हुआ है, जिसने गर्मी के कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। लू और हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी करते हुए जिले के सभी अस्पतालों में ‘हीट स्ट्रोक मैनेजमेंट यूनिट’ और ओआरएस (ORS) कॉर्नर स्थापित कर दिए हैं। मई 2024 के बाद अप्रैल में टूटा गर्मी का रिकॉर्ड जिले में इस साल अप्रैल माह में ही गर्मी ने पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इससे पहले 23 मई 2024 को सीहोर शहर का अधिकतम तापमान 44.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, लेकिन अप्रैल के महीने में ऐसी भीषण गर्मी पहले कभी रिकॉर्ड नहीं की गई। तेज धूप के कारण दोपहर के समय शहर की अधिकांश सड़कें सुनसान नजर आ रही हैं। लोग केवल बहुत जरूरी काम होने पर ही खुद को कपड़े से ढककर घरों से बाहर निकल रहे हैं। CMHO ने दिए सतत निगरानी और उपचार के निर्देश बढ़ते तापमान के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया ने अलर्ट जारी किया है। उन्होंने जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं के प्रभारी अधिकारियों को सतत निगरानी और उपचार के निर्देश दिए हैं। मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके, इसके लिए अस्पतालों में पदस्थ स्वास्थ्य कर्मियों का उन्मुखीकरण (Orientation) भी किया जा रहा है। अस्पतालों में ठंडे पानी, पंखे और ओआरएस कॉर्नर की व्यवस्था स्वास्थ्य संस्थाओं को आने वाले मरीजों में लू के लक्षणों की तुरंत जांच करने और उचित प्रबंधन के निर्देश दिए गए हैं। वार्डों में मरीजों के लिए ठंडे पेयजल और पंखों की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, तेज धूप में ज्यादा देर तक रहना लू लगने का प्रमुख कारण है, जिससे शरीर में पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है। गर्मी से संबंधित बीमारियों से बचाव के लिए सभी संस्थाओं में पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराई गई हैं और ओआरएस (ORS) कॉर्नर स्थापित किए गए हैं।
बड़वानी में वॉटर एटीएम बंद, रात में नहीं मिलता पानी:मरीज-छात्र परेशान, कहा-अधिकतर नहीं मिलता है पानी; नपा पर लापरवाही का आरोप

बड़वानी में गर्मी के साथ पेयजल संकट गहराता जा रहा है। शहर के कई इलाकों में लगे वॉटर एटीएम में पानी की सप्लाई ठीक से नहीं हो रही है। खासकर रात के समय ये एटीएम बंद रहते हैं, जिससे आम लोगों के साथ-साथ मरीज और छात्र भी परेशान हैं। रात में पानी के लिए भटक रहे लोग स्थानीय निवासी मनोहर शर्मा ने बताया कि वे रोज रात में कोर्ट चौराहे से गुजरते हैं, जहां लोगों को पानी के लिए भटकते देखा जा सकता है। यहां लगा वॉटर एटीएम अधिकतर बंद ही रहता है। दिन में कुछ समय पानी मिलता है, लेकिन शाम के बाद हालात खराब हो जाते हैं। अस्पताल क्षेत्र में सबसे ज्यादा दिक्कत, छात्र भी परेशान सबसे गंभीर स्थिति अस्पताल के आसपास है। यहां भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को पानी के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। पानी नहीं मिलने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। बाहर से पढ़ने आए छात्र भी पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। वे वॉटर एटीएम पर बोतल भरने पहुंचते हैं, लेकिन खाली हाथ लौटना पड़ता है। पैसे देने के बाद भी नहीं मिला पानी मनोहर शर्मा ने बताया कि उन्होंने वॉटर एटीएम में पैसे भी डाले, लेकिन पानी नहीं मिला और बाद में पैसे वापस आ गए। उन्होंने इसे नगर पालिका की लापरवाही बताया है। शहर के मुख्य चौक और पुराने थाने क्षेत्र में भी वॉटर एटीएम बंद पड़े हैं। लोगों का कहना है कि यह समस्या रोज की बन गई है। तेज गर्मी में पानी की कमी से जीवन मुश्किल हो गया है। लोगों में बढ़ रहा गुस्सा महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और वे जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। नगर पालिका की सीएमओ सोनाली शर्मा ने कहा कि उन्हें इस समस्या की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि वॉटर एटीएम में नियमित पानी देने की व्यवस्था है, लेकिन अगर कहीं दिक्कत है तो उसे ठीक कराया जाएगा।
‘उन्होंने स्वीकार किया कि कांग्रेस महिला विरोधी है’: शशि थरूर पर किरण रिजिजू की बड़ी टिप्पणी | भारत समाचार

आखरी अपडेट:28 अप्रैल, 2026, 11:49 IST किरण रिजिजू ने कहा कि शशि थरूर ने उनसे निजी बातचीत में माना था कि कांग्रेस महिला विरोधी हो सकती है. केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि शशि थरूर ने माना कि कांग्रेस महिला विरोधी है. साभार: पीटीआई केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को महिला विरोधी होने के लिए कांग्रेस की आलोचना की और यह भी कहा कि उनकी पार्टी के सांसद शशि थरूर ने संसद सत्र के बाद दोनों नेताओं के बीच एक निजी बातचीत के दौरान इस तथ्य को “एक तरह से स्वीकार” किया था। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ एक साक्षात्कार में रिजिजू ने कहा, “संसद सत्र समाप्त होने के बाद, थरूर ने (संसद) हॉल में मुझसे कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला विरोधी हो सकती है, लेकिन कोई भी महिला शशि थरूर को महिला विरोधी नहीं मानेगी। इसलिए मैंने कहा, हां, मैं सहमत हूं कि कोई भी आपको महिला विरोधी नहीं कहेगा, लेकिन आपकी पार्टी महिला विरोधी है।” #घड़ी | एएनआई को दिए इंटरव्यू में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू कहते हैं, “संसद सत्र खत्म होने के बाद शशि थरूर ने मुझसे कहा कि कांग्रेस भले ही महिला विरोधी हो, लेकिन कोई भी महिला शशि थरूर को महिला विरोधी नहीं मानेगी. मैंने जवाब दिया कि हां, मैं मानता हूं कि कोई आपको नहीं कहेगा…” pic.twitter.com/vwc1eLm4VP– एएनआई (@ANI) 28 अप्रैल 2026 उन्होंने आगे कहा कि थरूर ने “एक तरह से स्वीकार कर लिया” कि उनकी पार्टी कांग्रेस का महिला विरोधी रुख है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने कहा, “उनका मतलब था कि भले ही कांग्रेस महिला विरोधी हो, लेकिन महिलाएं शशि थरूर को महिला विरोधी नहीं मानेंगी। तो इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है कि, एक तरह से, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कांग्रेस महिला विरोधी है। और मैंने यह भी स्वीकार किया कि वह व्यक्तिगत रूप से महिला विरोधी नहीं हो सकते हैं, लेकिन उनकी पार्टी महिला विरोधी है।” महिला आरक्षण बिल के खिलाफ वोट करने के बाद बीजेपी कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा रही है. विधेयक के लोकसभा में पारित नहीं हो पाने के बाद रिजिजू ने आरोप लगाया था कि महिलाओं को उनके अधिकारों से ”वंचित” करने के बाद कांग्रेस जश्न के मूड में है। रिजिजू ने पहले कहा था, “यह स्थापित हो गया है कि कांग्रेस महिला विरोधी है। उसे देश की महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने के बाद विपक्ष इसे अपनी जीत मान रहा है। लेकिन देश की महिलाएं उन्हें अच्छा सबक सिखाएंगी।” संविधान (131वां संशोधन) विधेयक में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन अभ्यास के बाद, 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को “परिचालित” करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव किया गया था। हालाँकि, विपक्ष ने कहा कि महिला आरक्षण कानून सीटों की संख्या में वृद्धि के बिना भी लागू किया जा सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार का प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास देश के चुनावी मानचित्र को इस तरह से फिर से तैयार करने का एक प्रयास था जिससे भाजपा को फायदा होगा। विपक्षी दलों ने यह भी आरोप लगाया कि परिसीमन प्रक्रिया दक्षिणी राज्यों के खिलाफ भेदभावपूर्ण हो सकती है, जिन्होंने प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण उपायों को लागू किया है। चूंकि विपक्ष ने इसके ख़िलाफ़ वोट किया, इसलिए बिल को ज़रूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका. रिजिजू के अनुसार, मुख्य मुद्दा यह नहीं था कि महिलाएं हमारा समर्थन करती हैं या विरोध करती हैं, बल्कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “राजनीतिक चश्मे से इसका विश्लेषण न करें। इसका विरोध करने पर उन्हें महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।” इस आलोचना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कि भाजपा शुरू से जानती थी कि विधेयक लोकसभा में पारित नहीं होगा, रिजिजू ने कहा, “कौन सोचेगा कि कोई महिलाओं के खिलाफ वोट करेगा? किसने सपने में भी सोचा होगा कि कांग्रेस, टीएमसी और एसपी इसका विरोध करेंगे?” उसने कहा। विधेयक से जुड़े परिसीमन पर चिंताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “यह प्रावधान पहले से ही 2023 अधिनियम का हिस्सा था। उन्होंने तब इसका विरोध क्यों नहीं किया?” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 28 अप्रैल, 2026, 11:47 IST न्यूज़ इंडिया ‘उन्होंने मान लिया कि कांग्रेस महिला विरोधी है’: शशि थरूर पर किरण रिजिजू की बड़ी टिप्पणी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कांग्रेस का महिला विरोधी रुख(टी)किरेन रिजिजू साक्षात्कार(टी)शशि थरूर की टिप्पणी(टी)महिला आरक्षण बिल(टी)बीजेपी बनाम कांग्रेस(टी)33 प्रतिशत कोटा(टी)लोकसभा महिला सीटें(टी)परिसीमन विवाद









