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पाकिस्तान का अफगानिस्तान पर मिसाइल अटैक, 7 की मौत:75 घायल; 6 PAK सैनिकों की मौत के बाद किया जवाबी हमला

पाकिस्तान का अफगानिस्तान पर मिसाइल अटैक, 7 की मौत:75 घायल; 6 PAK सैनिकों की मौत के बाद किया जवाबी हमला

अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांत कुनार में सोमवार को हुए हमलों में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 75 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में यूनिवर्सिटी के छात्र, बच्चे और आम नागरिक शामिल हैं। बीबीसी के मुताबिक स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि राजधानी असदाबाद में घरों के साथ-साथ सैयद जमालुद्दीन अफगानी यूनिवर्सिटी को भी निशाना बनाया गया। तालिबान सरकार के डिप्टी प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने आरोप लगाया है कि ये हमले पाकिस्तान की तरफ से किए गए। उनका कहना है कि सोमवार दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुए इन हमलों में मोर्टार और रॉकेट दागे गए। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय का कहना है कि यूनिवर्सिटी और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने की खबरें पूरी तरह गलत हैं। पाकिस्तान के 6 सैनिकों की मौत, एक बंधक इससे पहले रविवार को अफगानिस्तान के कंधार इलाके में पाकिस्तान के साथ सीमा पर फिर हिंसक झड़प की घटना हुई थी। खामा प्रेस ने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि स्पिन बोल्डक इलाके में रात के दौरान दोनों पक्षों के बीच फायरिंग हुई। इसमें पाकिस्तान के छह सैनिक मारे गए। यह भी कहा गया कि एक सैनिक को बंधक बनाकल ले गए। आधी रात चलाए गए इस ऑपरेशन में तालिबानी लड़ाके पाकिस्तानी सैनिकों के हथियार भी लेकर चले गए थे। हालांकि इन दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि झड़प तब शुरू हुई जब देर रात पाकिस्तान की तरफ से सीमा पार फायरिंग हुई, जिसमें एक स्थानीय बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद तालिबान ने जवाबी हमला किया। सोशल मीडिया पर इससे जुड़ा एक वीडियो भी वायरल है… मार्च में दोनों देशों के बीच सीजफायर हुआ यह घटनाएं ऐसे समय पर हुई है जब दोनों देशों के बीच पहले से ही तनाव बना हुआ है। पाकिस्तान ने मार्च में राजधानी काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर भी हमला किया था, जिसमें 400 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा किया गया था। दोनों देशों ने मार्च में एक संघर्षविराम (सीजफायर) किया था, जिससे कई हफ्तों से चल रही खूनखराबे वाली झड़पें रुकी थीं, लेकिन अब हालात फिर बिगड़ते दिख रहे हैं। चीन के अलावा तुर्किए, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब भी इस विवाद को खत्म कराने की कोशिश कर चुके हैं। पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच जंग जैसे हालात पाकिस्तान और अफगानिस्तान में इस साल संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी। पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान पर हमला किया। अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान को ‘सही समय पर कड़ा जवाब’ दिया जाएगा। मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया था। पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है। पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों? 2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था। TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है। TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए।

महिला से एंबुलेंस साफ कराने पर दो कर्मचारी बर्खास्त:पायलट और EMT की सेवाएं समाप्त; एजेंसी ने की सख्त कार्रवाई

महिला से एंबुलेंस साफ कराने पर दो कर्मचारी बर्खास्त:पायलट और EMT की सेवाएं समाप्त; एजेंसी ने की सख्त कार्रवाई

कटनी जिला अस्पताल परिसर में एक महिला से एम्बुलेंस साफ कराने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। विभाग की अनुशंसा पर संबंधित एजेंसी ने एम्बुलेंस के पायलट और ईएमटी (EMT) को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया है। घटना बीते शुक्रवार की है। उमरिया-बरही रोड स्थित खितौली के पास एक अज्ञात वाहन ने करेला ग्राम निवासी 32 वर्षीय राहुल बर्मन को टक्कर मार दी थी। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें डायल 112 की मदद से पहले बरही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। मरीज की पत्नी से कराया था एंबुलेंस साफ बरही से कटनी लाते समय मरीज राहुल ने अत्यधिक पीड़ा और चोट के कारण एम्बुलेंस की खिड़की से उल्टी कर दी थी। आरोप है कि एम्बुलेंस (क्रमांक CG 04 NV 6385) के जिला अस्पताल पहुंचते ही, वहां तैनात ईएमटी मोहित खटीक ने मरीज की पत्नी पर एम्बुलेंस साफ करने का दबाव डाला। महिला को विवश होकर एम्बुलेंस में पानी डालकर सफाई करनी पड़ी। इस घटना का वीडियो 25 अप्रैल को सामने आया, जिससे स्वास्थ्य विभाग की छवि पर सवाल उठे। वीडियो संज्ञान में आने के दो दिन बाद मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राज सिंह ठाकुर ने मामले की जांच के आदेश दिए। जांच में दोषी पाए जाने पर जे.ए.ई.एस. प्रोजेक्ट्स प्रा. लिमिटेड कंपनी ने अपने दो कर्मचारियों-पायलट देवा साहू और ईएमटी मोहित खटीक-की सेवाएं समाप्त कर दी हैं।

मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश को लेकर SC में सुनवाई:मुस्लिम बोर्ड ने कहा था- वे घर पर ही इबादत करें, महिलाओं के खतना पर भी होगी बहस

मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश को लेकर SC में सुनवाई:मुस्लिम बोर्ड ने कहा था- वे घर पर ही इबादत करें, महिलाओं के खतना पर भी होगी बहस

केरलम के सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थलों में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। सबरीमाला पर बहस 22 अप्रैल को खत्म हो चुकी है। अब मुस्लिम धर्म में महिलाओं से जुड़े रीति-रिवाजों पर बहस जारी है। 23 अप्रैल को पिछली सुनवाई में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने कोर्ट से कहा था कि इस्लाम महिलाओं को नमाज के लिए मस्जिद आने से नहीं रोकता है, लेकिन यह बेहतर है कि वे घर पर ही इबादत करें। उधर मुस्लिम महिलाओं में एफजीएम (फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन) यानि खतना से जुड़ी प्रथा पर भी बहस होगी। 7 सवाल, जिनपर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से 22 अप्रैल तक सुनवाई हुई सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पिछले 7 दिन की सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए… 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा 15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता 17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी 21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं 22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं

43 डिग्री तापमान में अंडा खाना नुकसानदायक या फायदेमंद? डॉक्टर ने बताया पूरा सच

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Last Updated:April 28, 2026, 10:54 IST गर्मियों में अंडा खाने को लेकर कई तरह के भ्रम हैं. कुछ लोग मानते हैं कि अंडा शरीर में गर्मी बढ़ाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. सीमित मात्रा में अंडा खाना हर मौसम में फायदेमंद होता है और यह शरीर को जरूरी प्रोटीन प्रदान करता है. फरीदाबाद: फरीदाबाद में इस समय गर्मी अपने चरम पर है. तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है. ऐसे में लोग अपने खानपान को लेकर काफी सतर्क हो जाते हैं. खासकर अंडे को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इतनी भीषण गर्मी में अंडा खाना सही है या नहीं. कई लोगों का मानना है कि अंडा शरीर में गर्मी बढ़ाता है इसलिए इसे गर्मियों में नहीं खाना चाहिए. लेकिन क्या सच में ऐसा है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने डॉक्टर से बात की. अंडा एक कंप्लीट प्रोटीन फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल की सीनियर डाइटिशियन और न्यूट्रिशन कंसल्टेंट डॉ. रितिका शर्मा ने बताया अंडे का मौसम से कोई सीधा संबंध नहीं है. चाहे सर्दी हो या गर्मी, शरीर को हर मौसम में संतुलित आहार की जरूरत होती है. अंडा एक कंप्लीट प्रोटीन है जिसमें शरीर के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं. अंडे को सिर्फ मौसम के आधार पर अपनी डाइट से बाहर नहीं करना चाहिए. डॉ. रितिका ने बताया कुछ लोगों को अंडा खाने से पेट में भारीपन, अपच या एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. यह पूरी तरह व्यक्ति की बॉडी सेंसिटिविटी पर निर्भर करता है. हर किसी का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है. अगर किसी को अंडा खाने से परेशानी होती है तो वह इसकी मात्रा कम कर सकता है या डॉक्टर की सलाह ले सकता है. लेकिन ज्यादातर लोगों के लिए अंडा पूरी तरह सुरक्षित और फायदेमंद है. गर्मियों में अंडे को सीमित मात्रा में खाना बेहतर डॉक्टर रितिका ने बताया गर्मियों में अंडे को सीमित मात्रा में खाना बेहतर रहता है. अक्सर लोग कहते हैं कि अंडा गर्म होता है लेकिन इसे साबित करने वाला कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. सर्दियों में लोग ज्यादा अंडे खाते हैं क्योंकि उस समय शरीर को अधिक ऊर्जा और प्रोटीन की जरूरत होती है. वहीं गर्मियों में हल्का भोजन ज्यादा पसंद किया जाता है इसलिए अंडों की मात्रा अपने आप कम हो जाती है. रोज सुबह अंडा खाना बच्चों और बड़ों दोनों के लिए फायदेमंद डॉ. रितिका शर्मा ने बताया रोज सुबह अंडा खाना बच्चों और बड़ों दोनों के लिए फायदेमंद है. एक स्वस्थ व्यक्ति दिन में दो अंडे आराम से खा सकता है. चार साल से छोटे बच्चों के लिए एक अंडा पर्याप्त होता है. अंडा खाते समय उसकी गुणवत्ता, ताजगी और उसे पकाने का तरीका भी बहुत मायने रखता है. साफ-सफाई का ध्यान रखते हुए उबला या हल्का पका अंडा सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है. इसलिए गर्मी हो या सर्दी सीमित मात्रा में अंडा आपकी सेहत के लिए हमेशा फायदेमंद रहेगा. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Faridabad,Faridabad,Haryana First Published : April 28, 2026, 10:54 IST

झाबुआ में पारा 43.8°C पहुंचा, लू का प्रकोप:सड़कों पर सन्नाटा; डॉक्टरों ने धूप से बचने, हाइड्रेटेड रहने की दी सलाह

झाबुआ में पारा 43.8°C पहुंचा, लू का प्रकोप:सड़कों पर सन्नाटा; डॉक्टरों ने धूप से बचने, हाइड्रेटेड रहने की दी सलाह

झाबुआ में पिछले सात दिनों में तापमान में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल के अंतिम हफ्ते में भीषण गर्मी और लू का असर देखा जा रहा है। इस दौरान अधिकतम तापमान में लगभग 3.6°C की बढ़ोतरी हुई है। हफ्ते की शुरुआत में तापमान 40.2°C (22 अप्रैल) था, जो धीरे-धीरे बढ़ता गया। 25 अप्रैल को पारा 41.8°C तक पहुंच गया। 26 और 27 अप्रैल को अधिकतम तापमान 43.8°C दर्ज किया गया, जो सप्ताह का सर्वाधिक था। इन दिनों में न्यूनतम तापमान भी 25.5°C से 26.0°C के बीच रहा, जिससे रातें भी गर्म रहीं। 24 अप्रैल को 40.4°C दर्ज किए गए तापमान में 48 घंटों के भीतर 3.4°C की वृद्धि हुई, और 26 अप्रैल को यह 43.8°C पर पहुंच गया। इस तीव्र वृद्धि ने आम जनजीवन को प्रभावित किया। हफ्ते की शुरुआत में न्यूनतम तापमान 20.6°C (24 अप्रैल) था, लेकिन हफ्ते के अंत तक इसमें 5 डिग्री से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इससे रात के समय भी गर्मी से राहत मिलना मुश्किल हो गया। पिछले दो दिनों की तुलना में आज तापमान में कमी आज मंगलवार को अधिकतम तापमान 42.2°C दर्ज किया गया। यह पिछले दो दिनों की तुलना में थोड़ा कम है, लेकिन फिर भी सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है। मौसम में इस अचानक बदलाव के कारण दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा देखा गया। डॉक्टरों ने बढ़ते तापमान और लू के मद्देनजर लोगों को हाइड्रेटेड रहने और दोपहर 12 से 4 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है।

गुजरात निकाय चुनाव- 10,050 सीटों में 732 निर्विरोध चुने गए:भाजपा 712 पर आगे; कांग्रेस ने गांधीनगर जिला पंचायत सीट जीती

गुजरात निकाय चुनाव- 10,050 सीटों में 732 निर्विरोध चुने गए:भाजपा 712 पर आगे; कांग्रेस ने गांधीनगर जिला पंचायत सीट जीती

गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों के मंगलवार को वोटों की गिनती जारी है। 15 नगर निगम, 84 नगरपालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों के नतीजे आज घोषित किए जाएंगे। 10,050 सीटों में से 732 सीटों पर निर्विरोध चुनाव हुआ है, जिनमें भाजपा 712 सीटों पर आगे है। वहीं, गांधीनगर जिला पंचायत की भोयान सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार मंजुलाबेन ने 1374 वोटों से जीत दर्ज की है। गुजरात में 26 अप्रैल को रविवार को स्थानीय और नगर निकाय चुनाव के लिए मतदान हुआ था। निर्वाचन आयोग के अनुसार, 15 नगर निगमों में 55.1% मतदान हुआ। नगरपालिकाओं में 65.53%, जिला पंचायतों में 66.64% और तालुका पंचायतों में 67.26% वोटिंग दर्ज की गई। पिछले चुनाव में बीजेपी ने 8,470 में से 6,236 सीटें जीती थीं 2021 के स्थानीय चुनाव में BJP ने शानदार जीत हासिल की थी। पार्टी नगरपालिकाओं की 8,470 सीट में से 6,236 सीट जीती थीं। BJP ने तब सभी छह नगर निगमों के अलावा 81 नगरपालिकाओं, 32 जिला पंचायतों और 231 तालुका पंचायतों पर अपना दबदबा बनाए रखा था। वहीं, अहमदाबाद में ओवैसी की पार्टी AIMIM के 7 पार्षद चुने गए थे। आम आदमी पार्टी (AAP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गुजरात की राजनीति में एक मजबूत तीसरी ताकत के रूप में एंट्री की थी। सूरत नगर निगम में आप ने 120 में से 27 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था। AAP इस बार 5,000 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। अन्य उम्मीदवारों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, एआईएमआईएम और निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं। 2015 के चुनावों में भाजपा को पंचायतों में सबसे बड़ा झटका लगा था। कुल 31 में से भाजपा केवल 8 जिला पंचायतों में ही जीत हासिल कर सकी थी। वहीं कांग्रेस ने 23 जिला पंचायतों में अपना दबदबा कायम रखते हुए भाजपा के कमल को हरा दिया था। ——— ये खबर भी पढ़ें… गुजरात न‍िकाय चुनाव में 57.8% वोटिंग:मतदान के दौरान हार्ट अटैक से जामनगर नगर निगम में AAP कैंडिडेट समेत 3 की मौत गुजरात में स्थानीय और नगर निकाय चुनाव के लिए मतदान हुआ। इसमें 57.08% मतदान दर्ज किया गया है। 15 नगर निगमों में 49%, 84 नगर निगमों में 58.12%, 34 जिला पंचायतों में 60.21% और 260 तालुका पंचायतों में 61% मतदान दर्ज किया गया। पूरी खबर पढ़ें…

फोटो-ऑप के बाद वापस लौटे वाहन: कर्नाटक की स्वावलंबी सारथी योजना पर विवाद | राजनीति समाचार

Trump is not satisfied with Iran's proposal on lifting the blockade on Strait of Hormuz. (Courtesy: Reuters)

आखरी अपडेट:28 अप्रैल, 2026, 10:26 IST जबकि सरकार ने इसे ‘प्रतीकात्मक कार्यक्रम’ कहा, भाजपा ने कल्याण का झांसा देने का आरोप लगाया, क्योंकि कार्यक्रम में प्रदर्शित वाहनों को कथित तौर पर शोरूम में वापस भेज दिया गया था। यह योजना कैब और माल वाहन खरीदने के लिए उच्च सब्सिडी की पेशकश करके सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समुदायों के बीच स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई थी। (एक्स) कर्नाटक की स्वावलंबी सारथी स्व-रोज़गार योजना पर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है, जब आरोप सामने आए कि ओबीसी, एससी/एसटी और अल्पसंख्यक युवाओं के लिए कल्याण कार्यक्रम के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किए गए वाहनों को आधिकारिक लॉन्च कार्यक्रम के कुछ ही घंटों बाद शोरूम में वापस कर दिया गया था। मार्च 2025 के राज्य बजट में घोषित इस योजना को कैब और माल वाहन खरीदने के लिए उच्च सब्सिडी की पेशकश करके सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समुदायों के बीच स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया था। पहल के तहत, लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त होने की उम्मीद है ताकि वे वाहन खरीद सकें और परिवहन और रसद क्षेत्रों में आजीविका के अवसर पैदा कर सकें। हालाँकि, उन रिपोर्टों के बाद विवाद छिड़ गया, जिनमें दावा किया गया था कि 26 मार्च को कार्यक्रम स्थल पर लाई गई कई कारों और वाणिज्यिक वाहनों को कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर शोरूम में वापस ले जाया गया था, जिससे यह सवाल उठने लगा कि क्या वितरण वास्तव में हुआ था या एक औपचारिक प्रदर्शन के रूप में किया गया था। कल्याण लॉन्च या फोटो-ऑप अभ्यास?स्वावलंबी सारथी योजना के तहत ओबीसी, एससी/एसटी और अल्पसंख्यक युवाओं के लिए प्रदर्शित वाहनों को कथित तौर पर आधिकारिक कार्यक्रम के कुछ घंटों के भीतर शोरूम में वापस भेज दिया गया था। मंत्री कहते हैं कि यह केवल प्रतीकात्मक था, बाद में लाभ देने का वादा किया। #कर्नाटक pic.twitter.com/In3h8uW5DQ – हरीश उपाध्या (@हरिशुपाध्या) 27 अप्रैल 2026 घटना के एक महीने बाद जैसे ही मामले ने तूल पकड़ा, आरोपों का जवाब देते हुए, पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री शिवराज तंगदागी ने स्वीकार किया कि वाहन केवल प्रदर्शन के उद्देश्य से लाए गए थे और इस घटना को प्रतीकात्मक बताया। उन्होंने कहा, “हम उन वाहनों को कार्यक्रम के लिए लाए हैं। हमने लाभार्थियों की सूची तैयार कर ली है, और डीबीटी होगी, और हम उन्हें वाहन देंगे। हमारे पास लाभार्थियों की सूची है। हमने कार्यक्रम थोड़ा पहले आयोजित किया क्योंकि हमें मुख्यमंत्री के साथ तारीखें नहीं मिल सकीं। अगले कुछ दिनों में, हमें शोरूम से वाहनों की सूची प्राप्त होगी।” तंगादगी ने कहा कि योजना का कार्यान्वयन अभी भी चल रहा है और जोर देकर कहा कि लाभार्थियों को अनुमोदित प्रक्रिया के अनुसार जल्द ही वाहन प्राप्त होंगे। विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कार्यक्रम औपचारिक रूप से पहल शुरू करने और योजना के तहत वितरित किए जाने वाले वाहनों के प्रकार को प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया गया था। हालाँकि, विपक्षी भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला किया और उस पर वास्तविक लाभ पहुंचाने के बजाय प्रचार करने का आरोप लगाया। भाजपा नेता अशोक गौड़ा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के पास कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए धन की कमी है और वह प्रतीकात्मक घोषणाओं का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस सरकार का खजाना खाली हो गया है। उनके पास कल्याणकारी योजनाओं का समर्थन करने के लिए धन नहीं है। यहां जो हुआ उससे पता चलता है कि यह केवल एक फोटो-ऑप था।” स्वावलंबी सारथी योजना को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अल्पसंख्यक समुदायों के बेरोजगार युवाओं को लक्षित करने वाली एक प्रमुख कल्याणकारी पहल के रूप में देखा जाता है, जिसका लक्ष्य सब्सिडी वाले वाहन स्वामित्व के माध्यम से आजीविका में सुधार और बेरोजगारी को कम करना है। सरकार ने अपनी व्यापक कल्याण प्रतिबद्धताओं के हिस्से के रूप में कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण बजटीय आवंटन का संकेत दिया था। मंत्री द्वारा इस वादे के साथ कि लाभार्थियों की सूची तैयार है और शोरूमों से वाहन विवरण जल्द ही सत्यापित किया जाएगा, इस प्रकरण ने राजनीतिक टकराव पैदा कर दिया है, विपक्ष ने योजना के तहत आवंटन, लाभार्थी चयन और वास्तविक वाहन वितरण पर पारदर्शिता की मांग की है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 28 अप्रैल, 2026, 10:26 IST समाचार राजनीति फोटो-ऑप के बाद वापस लौटे वाहन: कर्नाटक की स्वावलंबी सारथी योजना पर विवाद अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)स्वावलंबी सारथी योजना(टी)कर्नाटक स्वरोजगार योजना(टी)ओबीसी एससी एसटी अल्पसंख्यक कल्याण(टी)वाहन सब्सिडी कार्यक्रम(टी)डीबीटी लाभार्थी विवाद(टी)कांग्रेस सरकार कल्याण(टी)भाजपा विपक्ष की आलोचना(टी)कर्नाटक राजनीतिक विवाद

सन फार्मा 1 लाख करोड़ में अमेरिकी कंपनी 'ऑर्गेनॉन' खरीदेगी:इसकी कई महंगी पेटेंट दवाएं भी बेचेगी, पूरा सौदा नगद में होगा

सन फार्मा 1 लाख करोड़ में अमेरिकी कंपनी 'ऑर्गेनॉन' खरीदेगी:इसकी कई महंगी पेटेंट दवाएं भी बेचेगी, पूरा सौदा नगद में होगा

भारत की सबसे बड़ी दवा कंपनी सन फार्मा अमेरिका (न्यू जर्सी) की दिग्गज कंपनी ऑर्गेनॉन को 1.10 लाख करोड़ रुपए में खरीदेगी। यह किसी भी भारतीय दवा कंपनी द्वारा किया जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा विदेशी सौदा है। डील को लेकर दोनों कंपनियों ने सोमवार को संयुक्त बयान जारी किया। इसके तहत सन फार्मा ऑर्गेनॉन के सभी बकाया शेयर 14 डॉलर प्रति शेयर की कीमत पर खरीदेगी। पूरा सौदा नकद में होगा। इससे सन फार्मा दुनिया की टॉप-25 दवा कंपनियों में शामिल हो जाएगी। उसकी पहुंच 150 देशों में होगी। दुनिया की 7वीं बड़ी कंपनी बन जाएगी सनफार्मा बायोसिमिलर्स जैविक दवाओं वाली यह दुनिया की 7वीं बड़ी कंपनी बन जाएगी। 900-900 करोड़ रुपए राजस्व वाले 18 बड़े बाजार उसके पास होंगे। डील में ऑर्गेनॉन का 81 हजार करोड़ रु. का कर्ज भी शामिल है। हालांककि सन फार्मा का कहना है कि डील के बाद दोनों कंपनियों का संयुक्त राजस्व 1.16 लाख करोड़ रुपए होगा। सौदा 2027 में पूरा होने की उम्मीद है। जानें इस डील से जुड़ी सवालों के जवाब सवाल 1: दुनिया में सन फार्मा की स्थिति क्या है? जवाब: यह दुनिया की सबसे बड़ी जेनेरिक दवा बनाने की कंपनियों में से एक है। इसकी मार्केट वैल्यू 4 लाख करोड़ रु. है। वैश्विक स्तर पर 2 हजार से ज्यादा प्रोडक्ट हैं। 5 महाद्वीपों में 41 अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। 100 से अधिक देशों में कारोबार फैला है। सवाल 2: ऑर्गेनॉन कितनी बड़ी फार्मा कंपनी है? जवाब: 28 हजार करोड़ रुपए की मार्केट वैल्यू वाली ऑर्गेनॉन 2021 में दवा जगत की दिग्गज मर्क एंड कंपनी से अलग होकर बनी थी। आज चीन, अमेरिका, कनाडा, यूरोप, ब्राजील समेत 140 देशों में इसका बाजार है। 10 हजार कर्मचारी हैं। इनके पास महिला स्वास्थ्य एवं सामान्य दवाओं के क्षेत्र में 70 से अधिक प्रोडक्ट का पोर्टफोलियो है। इनमें सबसे प्रमुख है नेक्सप्लानन, जो गर्भनिरोधक इम्प्लांट है। ये 60 देशों में ऑर्गेनॉन बेचती है। सवाल 3: भारत दुनिया की फार्मेसी क्यों है? जवाब: अमेरिकी जेनेरिक बाजार में भारतीय दवाओं हिस्सेदारी 40% तो यूरोप में 25% है। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली हर 3 में से एक दवा भारतीय कंपनी की है। यहां पिछले साल भारत से 99 हजार करोड़ रु. की दवाएं भेजी गईं। दोनों बाजारों में सन फार्मा, ऑरोबिंदो, डॉ. रेड्डीज, ल्यूपिन बड़ी हिस्सेदार हैं। सवाल 4: सन फार्मा देश की नंबर वन कंपनी कैसे बनी? जवाब: सन फार्मा 16 साल में छह अधिग्रहण कर चुकी है। 2013 में रेनबैक्सी देश में नंबर वन थी, लेकिन 2014 में सन फार्मा ने अधिग्रहण कर लिया। 2025 में अमेरिकी बायोफार्मा कंपनी चेकपॉइंट ​थेराप्यूटिक्स के अधिग्रहण से कंपनी की वैश्विक धाक जमीं। 10 हजार रुपए उधार लेकर शुरू की थी कंपनी सन फार्मा के संस्थापक दिलीप सांघवी (71) मूल रूप से गुजरात के अमरेली जिले के हैं। अभी पूरा परिवार मुंबई में रहता है। इनके शुरुआती दिनों का एक किस्सा है। दरअसल, 1983 में दिलीप ने दवा कारोबारी पिता शांतिलाल से 10 हजार रुपए उधार लेकर 5 दोस्तों के साथ एक कमरे में सन फार्मा की नींव रखी। तब वे खुद सेल्समैन थे। एमआर की तरह डॉक्टरों के पास जाकर दवाएं समझाते थे। 1993 में दिलीप ने सिजोफ्रेनिया की दवा क्लोजापाइन लॉन्च करने की योजना बनाई। तभी पता चला कि प्रतिद्वंद्वी कंपनी सैंडोज भी इसे 22 शहरों में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। सांघवी ने रणनीति बदली और डेडलाइन से तीन हफ्ते ही दवा लॉन्च कर दी। देश के लिए गौरव; फाइजर जैसी कंपनी की लीग में होगी सन फार्मा चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के जमैत्री सेठ कहते हैं कि ऑर्गेनॉन अपने साथ 58 हजार करोड़ रुपए का राजस्व लेकर आएगी। डील दिखाती है कि भारतीय कंपनियां अब अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों को खरीदने की वित्तीय ताकत रखती हैं। इससे सन फार्मा फाइजर और नोवार्टिस जैसी कंपनियों की लीग में खड़ी होगी। भारत इनोवेटिव और स्पेशलिटी दवाओं के क्षेत्र में भी एक वैश्विक शक्ति बन सकता है। हालांकि अभी इस सौदे को कई देशों के नियामक प्राधिकरणों से मंजूरी लेनी होगी। अमेरिका में फेडरल ट्रेड कमीशन इस सौदे की बारीकी से जांच करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा कम न हो।

सन फार्मा 1 लाख करोड़ में अमेरिकी कंपनी 'ऑर्गेनॉन' खरीदेगी:इसकी कई महंगी पेटेंट दवाएं भी बेचेगी, पूरा सौदा नगद में होगा

सन फार्मा 1 लाख करोड़ में अमेरिकी कंपनी 'ऑर्गेनॉन' खरीदेगी:इसकी कई महंगी पेटेंट दवाएं भी बेचेगी, पूरा सौदा नगद में होगा

भारत की सबसे बड़ी दवा कंपनी सन फार्मा अमेरिका (न्यू जर्सी) की दिग्गज कंपनी ऑर्गेनॉन को 1.10 लाख करोड़ रुपए में खरीदेगी। यह किसी भी भारतीय दवा कंपनी द्वारा किया जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा विदेशी सौदा है। डील को लेकर दोनों कंपनियों ने सोमवार को संयुक्त बयान जारी किया। इसके तहत सन फार्मा ऑर्गेनॉन के सभी बकाया शेयर 14 डॉलर प्रति शेयर की कीमत पर खरीदेगी। पूरा सौदा नकद में होगा। इससे सन फार्मा दुनिया की टॉप-25 दवा कंपनियों में शामिल हो जाएगी। उसकी पहुंच 150 देशों में होगी। दुनिया की 7वीं बड़ी कंपनी बन जाएगी सनफार्मा बायोसिमिलर्स जैविक दवाओं वाली यह दुनिया की 7वीं बड़ी कंपनी बन जाएगी। 900-900 करोड़ रुपए राजस्व वाले 18 बड़े बाजार उसके पास होंगे। डील में ऑर्गेनॉन का 81 हजार करोड़ रु. का कर्ज भी शामिल है। हालांककि सन फार्मा का कहना है कि डील के बाद दोनों कंपनियों का संयुक्त राजस्व 1.16 लाख करोड़ रुपए होगा। सौदा 2027 में पूरा होने की उम्मीद है। जानें इस डील से जुड़ी सवालों के जवाब सवाल 1: दुनिया में सन फार्मा की स्थिति क्या है? जवाब: यह दुनिया की सबसे बड़ी जेनेरिक दवा बनाने की कंपनियों में से एक है। इसकी मार्केट वैल्यू 4 लाख करोड़ रु. है। वैश्विक स्तर पर 2 हजार से ज्यादा प्रोडक्ट हैं। 5 महाद्वीपों में 41 अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। 100 से अधिक देशों में कारोबार फैला है। सवाल 2: ऑर्गेनॉन कितनी बड़ी फार्मा कंपनी है? जवाब: 28 हजार करोड़ रुपए की मार्केट वैल्यू वाली ऑर्गेनॉन 2021 में दवा जगत की दिग्गज मर्क एंड कंपनी से अलग होकर बनी थी। आज चीन, अमेरिका, कनाडा, यूरोप, ब्राजील समेत 140 देशों में इसका बाजार है। 10 हजार कर्मचारी हैं। इनके पास महिला स्वास्थ्य एवं सामान्य दवाओं के क्षेत्र में 70 से अधिक प्रोडक्ट का पोर्टफोलियो है। इनमें सबसे प्रमुख है नेक्सप्लानन, जो गर्भनिरोधक इम्प्लांट है। ये 60 देशों में ऑर्गेनॉन बेचती है। सवाल 3: भारत दुनिया की फार्मेसी क्यों है? जवाब: अमेरिकी जेनेरिक बाजार में भारतीय दवाओं हिस्सेदारी 40% तो यूरोप में 25% है। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली हर 3 में से एक दवा भारतीय कंपनी की है। यहां पिछले साल भारत से 99 हजार करोड़ रु. की दवाएं भेजी गईं। दोनों बाजारों में सन फार्मा, ऑरोबिंदो, डॉ. रेड्डीज, ल्यूपिन बड़ी हिस्सेदार हैं। सवाल 4: सन फार्मा देश की नंबर वन कंपनी कैसे बनी? जवाब: सन फार्मा 16 साल में छह अधिग्रहण कर चुकी है। 2013 में रेनबैक्सी देश में नंबर वन थी, लेकिन 2014 में सन फार्मा ने अधिग्रहण कर लिया। 2025 में अमेरिकी बायोफार्मा कंपनी चेकपॉइंट ​थेराप्यूटिक्स के अधिग्रहण से कंपनी की वैश्विक धाक जमीं। 10 हजार रुपए उधार लेकर शुरू की थी कंपनी सन फार्मा के संस्थापक दिलीप सांघवी (71) मूल रूप से गुजरात के अमरेली जिले के हैं। अभी पूरा परिवार मुंबई में रहता है। इनके शुरुआती दिनों का एक किस्सा है। दरअसल, 1983 में दिलीप ने दवा कारोबारी पिता शांतिलाल से 10 हजार रुपए उधार लेकर 5 दोस्तों के साथ एक कमरे में सन फार्मा की नींव रखी। तब वे खुद सेल्समैन थे। एमआर की तरह डॉक्टरों के पास जाकर दवाएं समझाते थे। 1993 में दिलीप ने सिजोफ्रेनिया की दवा क्लोजापाइन लॉन्च करने की योजना बनाई। तभी पता चला कि प्रतिद्वंद्वी कंपनी सैंडोज भी इसे 22 शहरों में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। सांघवी ने रणनीति बदली और डेडलाइन से तीन हफ्ते ही दवा लॉन्च कर दी। देश के लिए गौरव; फाइजर जैसी कंपनी की लीग में होगी सन फार्मा चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के जमैत्री सेठ कहते हैं कि ऑर्गेनॉन अपने साथ 58 हजार करोड़ रुपए का राजस्व लेकर आएगी। डील दिखाती है कि भारतीय कंपनियां अब अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों को खरीदने की वित्तीय ताकत रखती हैं। इससे सन फार्मा फाइजर और नोवार्टिस जैसी कंपनियों की लीग में खड़ी होगी। भारत इनोवेटिव और स्पेशलिटी दवाओं के क्षेत्र में भी एक वैश्विक शक्ति बन सकता है। हालांकि अभी इस सौदे को कई देशों के नियामक प्राधिकरणों से मंजूरी लेनी होगी। अमेरिका में फेडरल ट्रेड कमीशन इस सौदे की बारीकी से जांच करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा कम न हो।

शादी से लौट रहे मां-बेटे को वाहन ने मारी टक्कर:गंभीर घायल अस्पताल में भर्ती; शाजापुर नेशनल हाईवे पर हादसा

शादी से लौट रहे मां-बेटे को वाहन ने मारी टक्कर:गंभीर घायल अस्पताल में भर्ती; शाजापुर नेशनल हाईवे पर हादसा

शाजापुर जिले में नेशनल हाईवे 52 पर सोमवार रात करीब 11 बजे सड़क हादसा हो गया। अज्ञात वाहन की टक्कर से बाइक पर सवार मां-बेटा गंभीर रूप से घायल हो गए। वे पलसावद सोन गांव निवासी अर्जुन और उनकी मां कालीबाई थे, जो बोल्डी गांव में एक शादी समारोह से अपने घर लौट रहे थे। टक्कर से दोनों घायल सड़क पर गिर गए हादसा गोलवा के पास हुआ। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों सड़क पर गिरकर घायल हो गए। सूचना मिलने पर नेशनल हाईवे एंबुलेंस 1033 के पायलट किशोर पटेल और ईएमटी कुलदीप आर्य तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों को शाजापुर जिला अस्पताल पहुंचाया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें रेफर कर दिया। हालांकि, परिजनों ने उन्हें इंदौर ले जाने की बजाय शाजापुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उनका इलाज जारी है। हादसे में अर्जुन के सिर में चोट आई है, जबकि उनकी मां कालीबाई के पैर में गंभीर चोट लगी है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।