Tuesday, 28 Apr 2026 | 02:37 PM

Trending :

EXCLUSIVE

खुम्बु आइसफॉल पर रुका एवरेस्ट पर्वता​रोहियों का मिशन:गाइड्स को एयरलिफ्ट कराने की तैयारी; ‘एवरेस्ट की सेहत’ सुधारने में जुटे आइसफॉल डॉक्टर

खुम्बु आइसफॉल पर रुका एवरेस्ट पर्वता​रोहियों का मिशन:गाइड्स को एयरलिफ्ट कराने की तैयारी; ‘एवरेस्ट की सेहत’ सुधारने में जुटे आइसफॉल डॉक्टर

समुद्र तल से 17 हजार फीट की ऊंचाई, एवरेस्ट की कठिन डगर और चारों तरफ पसरा मौत सा सन्नाटा… यहां हवा की एक सरसराहट भी दिल की धड़कनें बढ़ा देती है, क्योंकि एक जरा सी चूक सीधे गहरी खाई या बर्फ की कब्र में ले जा सकती है। इसी बर्फीले नर्क के बीच खड़ा है एक शख्स, जिसे दुनिया ‘आइसफॉल डॉक्टर’ कहती है। दावा जांगबू शेर्पा के लिए माउंट एवरेस्ट सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि ‘मरीज’ है, जिसकी सांसों की नब्ज वह हर दिन टटोलता है। पर इस हफ्ते, खुम्बु आइसफॉल के उस दो मील के खतरनाक हिस्से ने दावा और उनकी 11 सदस्यीय विशिष्ट टीम को भी खौफ में डाल दिया है। भारी बर्फबारी के कारण बहुत बड़ी नीलीस-सफेद बर्फ की दीवार (सेराक) रास्ते में खड़ी हो गई है। यह दीवार इतनी विशाल है कि इसे पार करना बेहद खतरनाक है। फिलहाल ग्राउंड जीरो पर कोशिशों में जुटे जागंबू बताते हैं,‘रास्ते हर साल बंद होते हैं, पर मैंने अपनी जिंदगी में बर्फ का ऐसा पहाड़ रास्ते के बीच कभी नहीं देखा। हमने ड्रोन उड़ाकर देखा है, इसे पार करना अभी नामुमकिन है।’ यह मामूली रुकावट नहीं है, बल्कि एक ऐसी मौत की दीवार है जिसने सैकड़ों पर्वतारोहियों के सपनों को बेस कैंप में ही कैद कर दिया है।’ जांगबू कहते हैं ‘बेस कैंप अब एक तंबू के शहर में तब्दील हो चुका है, जहां 400 से ज्यादा पर्वतारोही टकटकी लगाए उस दीवार के पिघलने का इंतजार कर रहे हैं। चढ़ाई का समय तेजी से खत्म हो रहा है। नेपाल सरकार के लिए यह बड़ा राजस्व का मामला है, इसलिए विचार किया जा रहा है कि अगर एक-दो दिन में दीवार नहीं पिघली, तो गाइड्स को एयरलिफ्ट कर ऊपर पहुं‍चाया जाए। पहाड़ पर तीन बार फतह हासिल कर चुके दावा जांगबू जानते हैं कि रास्ता खुलने के बाद भी चुनौती कम नहीं होगी। सैकड़ों लोगों का एक साथ उस संकरे रास्ते से गुजरना एक नई मुसीबत को दावत देगा। जांगबू की नजरें अभी भी उस सफेद दीवार पर टिकी हैं- उन्हें इंतजार है कि कब उनका ‘मरीज’ उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता देगा। क्योंकि एवरेस्ट पर, आखिरी फैसला हमेशा पहाड़ का ही होता है। खतरा, इसी जगह पर 2014 में 16 गाइड्स की मौत हुई थी आइसफॉल डॉक्टर्स का काम दुनिया के सबसे खतरनाक पेशों में गिना जाता है। ये जांबाज उस वक्त पहाड़ पर चढ़ते हैं जब कोई और वहां जाने की सोच भी नहीं सकता। दरकते ग्लेशियरों के बीच रस्सियां बांधना और रसातल जैसी गहरी दरारों पर एल्युमीनियम की सीढ़ियां टिकाना बड़ी चुनौती रहती है। पर इस साल, खतरा पहले से कहीं ज्यादा है। अप्रैल 2014 की घटना इन शेरपाओं के जेहन में अब भी ताजा है, जब इसी जगह बर्फ की दीवार गिरने से 16 गाइड्स की मौत हो गई थी। वह एवरेस्ट के इतिहास का सबसे भीषण दिन था। स्थिति वैसी ही है और सुरक्षा से समझौता करना खुदकुशी के बराबर है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
नरसिंहपुर जिला अस्पताल में प्रसूता और अजन्मी बेटी की मौत:करेली से रेफर होकर आई थी गर्भवती; मुंह से झाग निकलने के बाद तोड़ा दम

April 19, 2026/
9:39 pm

नरसिंहपुर जिला अस्पताल में प्रसव से पहले एक 26 वर्षीय गर्भवती महिला और उसकी अजन्मी बेटी की मौत हो गई।...

रीवा में शोभायात्रा में हर्ष फायरिंग का वीडियो सामने आया:कैमरा मैन के पैर में लगी गोली; पुलिस कर रही तलाश

March 22, 2026/
8:11 am

रीवा जिले के समान थाना क्षेत्र स्थित गुलाब नगर में एक शोभायात्रा के दौरान हुई हर्ष फायरिंग में कैमरा मैन...

Ramayan Movie Ranbir Kapoor Hanuman Jayanti Reveal 2026 Update

March 27, 2026/
10:48 am

12 मिनट पहले कॉपी लिंक ‘रामायण’ के को-प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा दुनिया की सबसे बड़ी विजुअल इफेक्ट्स (VFX) कंपनियों में से...

लेटेंट विवाद पर समय रैना के बड़े खुलासे:कहा- कपिल शर्मा मेरे अगले एपिसोड में आने वाले थे; सुनील पाल, मुकेश खन्ना पर कसा तंज

April 8, 2026/
4:49 pm

स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना ने अपने नए यूट्यूब स्पेशल ‘समय रैना- स्टिल अलाइव’ के साथ वापसी की है। पिछले साल...

Telangana School ₹8 Cr Digital AI Education Sees 3500 Applications

April 13, 2026/
6:02 am

हैदराबाद4 मिनट पहले कॉपी लिंक तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से 104 किमी दूर नलगोंडा स्थित कोमटिरेड्डी प्रतीक सरकारी स्कूल का...

ईशान किशन टी-20 बैटर्स की रैंकिंग में नंबर-5 पर आए:बॉलर्स में बुमराह ने 7 स्थान की छलांग लगाई, सिकंदर रजा टॉप ऑलराउंडर

February 25, 2026/
5:43 pm

ICC की ताजा टी-20 रैंकिंग में भारतीय ओपनर ईशान किशन 3 स्थान की छलांग लगाकर 5वें नंबर पर पहुंच गए...

Tehran Black Rain, Lebanon Protests

March 9, 2026/
7:04 am

4 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 11वां दिन है। लगातार हो रहे...

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

खुम्बु आइसफॉल पर रुका एवरेस्ट पर्वता​रोहियों का मिशन:गाइड्स को एयरलिफ्ट कराने की तैयारी; ‘एवरेस्ट की सेहत’ सुधारने में जुटे आइसफॉल डॉक्टर

खुम्बु आइसफॉल पर रुका एवरेस्ट पर्वता​रोहियों का मिशन:गाइड्स को एयरलिफ्ट कराने की तैयारी; ‘एवरेस्ट की सेहत’ सुधारने में जुटे आइसफॉल डॉक्टर

समुद्र तल से 17 हजार फीट की ऊंचाई, एवरेस्ट की कठिन डगर और चारों तरफ पसरा मौत सा सन्नाटा… यहां हवा की एक सरसराहट भी दिल की धड़कनें बढ़ा देती है, क्योंकि एक जरा सी चूक सीधे गहरी खाई या बर्फ की कब्र में ले जा सकती है। इसी बर्फीले नर्क के बीच खड़ा है एक शख्स, जिसे दुनिया ‘आइसफॉल डॉक्टर’ कहती है। दावा जांगबू शेर्पा के लिए माउंट एवरेस्ट सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि ‘मरीज’ है, जिसकी सांसों की नब्ज वह हर दिन टटोलता है। पर इस हफ्ते, खुम्बु आइसफॉल के उस दो मील के खतरनाक हिस्से ने दावा और उनकी 11 सदस्यीय विशिष्ट टीम को भी खौफ में डाल दिया है। भारी बर्फबारी के कारण बहुत बड़ी नीलीस-सफेद बर्फ की दीवार (सेराक) रास्ते में खड़ी हो गई है। यह दीवार इतनी विशाल है कि इसे पार करना बेहद खतरनाक है। फिलहाल ग्राउंड जीरो पर कोशिशों में जुटे जागंबू बताते हैं,‘रास्ते हर साल बंद होते हैं, पर मैंने अपनी जिंदगी में बर्फ का ऐसा पहाड़ रास्ते के बीच कभी नहीं देखा। हमने ड्रोन उड़ाकर देखा है, इसे पार करना अभी नामुमकिन है।’ यह मामूली रुकावट नहीं है, बल्कि एक ऐसी मौत की दीवार है जिसने सैकड़ों पर्वतारोहियों के सपनों को बेस कैंप में ही कैद कर दिया है।’ जांगबू कहते हैं ‘बेस कैंप अब एक तंबू के शहर में तब्दील हो चुका है, जहां 400 से ज्यादा पर्वतारोही टकटकी लगाए उस दीवार के पिघलने का इंतजार कर रहे हैं। चढ़ाई का समय तेजी से खत्म हो रहा है। नेपाल सरकार के लिए यह बड़ा राजस्व का मामला है, इसलिए विचार किया जा रहा है कि अगर एक-दो दिन में दीवार नहीं पिघली, तो गाइड्स को एयरलिफ्ट कर ऊपर पहुं‍चाया जाए। पहाड़ पर तीन बार फतह हासिल कर चुके दावा जांगबू जानते हैं कि रास्ता खुलने के बाद भी चुनौती कम नहीं होगी। सैकड़ों लोगों का एक साथ उस संकरे रास्ते से गुजरना एक नई मुसीबत को दावत देगा। जांगबू की नजरें अभी भी उस सफेद दीवार पर टिकी हैं- उन्हें इंतजार है कि कब उनका ‘मरीज’ उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता देगा। क्योंकि एवरेस्ट पर, आखिरी फैसला हमेशा पहाड़ का ही होता है। खतरा, इसी जगह पर 2014 में 16 गाइड्स की मौत हुई थी आइसफॉल डॉक्टर्स का काम दुनिया के सबसे खतरनाक पेशों में गिना जाता है। ये जांबाज उस वक्त पहाड़ पर चढ़ते हैं जब कोई और वहां जाने की सोच भी नहीं सकता। दरकते ग्लेशियरों के बीच रस्सियां बांधना और रसातल जैसी गहरी दरारों पर एल्युमीनियम की सीढ़ियां टिकाना बड़ी चुनौती रहती है। पर इस साल, खतरा पहले से कहीं ज्यादा है। अप्रैल 2014 की घटना इन शेरपाओं के जेहन में अब भी ताजा है, जब इसी जगह बर्फ की दीवार गिरने से 16 गाइड्स की मौत हो गई थी। वह एवरेस्ट के इतिहास का सबसे भीषण दिन था। स्थिति वैसी ही है और सुरक्षा से समझौता करना खुदकुशी के बराबर है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.