बालाघाट में लूट-चाकूबाजी के तीन आरोपी गिरफ्तार:जन्मदिन मनाने के बाद की थी वारदात; दो आरोपियों पर पहले से सात केस

बालाघाट कोतवाली पुलिस ने शुक्रवार शाम जागपुरघाट में हुई लूट और चाकूबाजी की घटना के तीन फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों में प्रेमनगर निवासी मित बिसेन (18), अक्षय उर्फ प्रिंस वर्मा (21) और एक नाबालिग शामिल है। गुरुवार देर शाम हुई इस वारदात में दो युवक गंभीर रूप से घायल हुए थे। जन्मदिन मनाने के बाद लूट के इरादे से किया हमला पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी मित बिसेन का जन्मदिन मनाने के बाद तीनों आरोपियों ने वारदात को अंजाम दिया। जागपुरघाट में आरोपियों ने यूपेश लिल्हारे और पीयूष रूसे को रोककर मोबाइल और नकदी लूटने का प्रयास किया। विरोध करने पर मित ने चाकू से हमला कर दिया, जिससे दोनों युवक घायल हो गए। घायलों का उपचार जिला अस्पताल में जारी है। सीसीटीवी और सर्विलांस की मदद से पकड़ाए एसपी आदित्य मिश्रा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सात अलग-अलग टीमें बनाई। पुलिस ने रात भर तलाशी अभियान चलाया और सीसीटीवी फुटेज व मोबाइल सर्विलांस के आधार पर तीनों को दबोच लिया। घायल पीयूष की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। पहले से सात मामले दर्ज पकड़े गए आरोपियों में से मित बिसेन और अक्षय वर्मा शातिर अपराधी हैं। पुलिस के अनुसार, इन दोनों पर मारपीट और चोरी जैसे गंभीर अपराधों के पहले से सात मामले दर्ज हैं। पुलिस अब आरोपियों से लूटा गया सामान और वारदात में इस्तेमाल हथियार बरामद करने की प्रक्रिया पूरी कर रही है। हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित लूट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों से अन्य आपराधिक गतिविधियों के संबंध में भी पूछताछ की जा रही है। नाबालिग आरोपी को बाल सुधार गृह भेजने की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
होर्मुज रूट खुलने के बाद कच्चा-तेल 86 डॉलर पर आया:13 प्रतिशत सस्ता हुआ; अमेरिकी शेयर बाजार 2% चढ़ा, डाउ जोन्स 49,500 के पार

ईरान के होर्मुज रूट को कॉमर्शियल जहाजों के लिए पूरी तरह खोलने के ऐलान के बाद क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) 13% सस्ता हुआ है। शुक्रवार, 17 अप्रैल को दाम करीब 13 डॉलर गिरकर 86 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। एक दिन पहले क्रूड ऑयल की कीमत 99.39 डॉलर प्रति बैरल थी। 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले कच्चा तेल 73 डॉलर प्रति बैरल था। जंग के दौरान दाम बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गए थे। तब से पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तेल सस्ता होने से अब यह आशंकाएं भी खत्म हो गई हैं। अमेरिका का डाउ जोन्स करीब 1,000 अंक चढ़ा कच्चे तेल की कीमत गिरने से ग्लोबल मार्केट में भी बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिका का डाउ जोन्स करीब 1,000 अंक की तेजी के साथ 49,500 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। SP 500 में 1.12% और नैस्डैक इंडेक्स में 1.04% की बढ़त देखने को मिल रही है। ईरान के विदेश मंत्री ने होर्मुज खोलने की जानकारी दी ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम के मद्देनजर होर्मुज रूट को सभी व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है। मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीद से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। ट्रम्प बोले- ईरान होर्मुज को कभी बंद नहीं करेगा ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर लिखा- ‘ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर कभी बंद न करने पर सहमति जताई है। अब इसका इस्तेमाल दुनिया के खिलाफ एक हथियार के तौर पर नहीं किया जाएगा।’ कच्चा तेल सस्ता होने से भारत को क्या फायदे होंगे? कच्चा तेल भारत के लिए जरूरी है, क्योंकि हम करीब 85% तेल आयात करते हैं। तेल की कीमतें गिरने पर अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर राहत मिलती है। पेट्रोल-डीजल के रेट नहीं बढ़ेंगे: कच्चा तेल सस्ता होने पर IOC, BPCL, HPCL जैसी कंपनियों के तेल की कीमत बढ़ाने की आशंका कम हो जाएगी। इससे ट्रांसपोर्ट लागत घटती है और आम आदमी के बजट पर असर पड़ता है। महंगाई पर असर: डीजल के रेट न बढ़ने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी नहीं। इससे फल, सब्जियां, अनाज और अन्य रोजमर्रा के खाने-पीने के सामानों के दाम नहीं बढ़ेंगे। CAD में सुधार: कच्चा तेल सस्ता होने से इंपोर्ट बिल घटता है। विदेशी मुद्रा भंडार बचता है और करंट अकाउंट डेफिसिट यानी CAD कम होता है। रुपये को मजबूती: कच्चे तेल का बिल घटने से डॉलर की मांग कम होती है। इससे रुपया मजबूत होता है और आयात सस्ता होता है। सब्सिडी बोझ कम: कच्चा तेल सस्ता होने से सरकार का सब्सिडी खर्च घटता है। बचा पैसा सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सेक्टर में लगा सकती है। कॉर्पोरेट प्रॉफिट: तेल सस्ता होने से लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है। इससे शेयर बाजार पर पॉजिटिव असर पड़ता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कच्चा तेल 10 डॉलर सस्ता होने पर करंट अकाउंट डेफिसिट में 9-10 बिलियन डॉलर की कमी और महंगाई में करीब 0.5% राहत मिल सकती है। तेल सप्लाई में रुकावट से जूझ रही थी दुनिया आईएनजी (ING) के एनालिसिस के अनुसार, युद्ध की वजह से बाजार में रोजाना लगभग 1.3 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही थी। हालांकि, वैकल्पिक पाइपलाइन रूटों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन सप्लाई पर दबाव बना रहा। अब इस जलमार्ग के खुलने से उम्मीद की जा रही है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और एनर्जी मार्केट में स्थिरता लौटेगी। ट्रम्प के बयान से शांति की उम्मीद जगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को कहा था कि ईरान युद्ध जल्द ही खत्म होना चाहिए। लास वेगास के एक कार्यक्रम में उन्होंने संघर्ष के सकारात्मक दिशा में बढ़ने की बात कही और कहा कि तेहरान ‘डील’ करने के लिए काफी उत्सुक है। ट्रम्प के मुताबिक, इजराइल और लेबनान के बीच 10 दिनों का युद्धविराम शुरू हो चुका है और जल्द ही दोनों देशों के प्रमुखों को व्हाइट हाउस आमंत्रित किया जा सकता है। होर्मुज प्रभावित होने से तेल महंगा हुआ था जंग के बाद ईरान ने होर्मुज रूट लगभग बंद कर दिया था। दुनिया का करीब 20% तेल-गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से कच्चा तेल, LPG, एल्युमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक महंगे हुए थे। ब्रिटेन-यूरोप में दवाओं और जरूरी चीजों की कमी का खतरा बढ़ा, क्योंकि शिपिंग खर्च कई गुना बढ़ गया था। इस सप्लाई संकट के कारण अमेरिका में गैस की कीमतें 4.15 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई थीं और महंगाई दर में भी उछाल आया था। मार्च में क्रूड ऑयल 60% महंगा हुआ था मार्च में कच्चे तेल में 60% उछाल आया था। यह 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद एक महीने में सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी। फरवरी अंत में 72.48 डॉलर से बढ़कर मार्च में 120 डॉलर पार पहुंच गया था। इससे पहले सितंबर 1990 में सद्दाम हुसैन के कुवैत पर हमले के समय तेल की कीमतें एक महीने में 46% बढ़ी थीं। भारत के कुल तेल आयात का 51% खाड़ी देशों से आता है भारत कच्चे तेल के लिए सबसे ज्यादा पश्चिम एशिया पर निर्भर है। FY2025-26 के पहले 10 महीनों में कुल आयात में 51% हिस्सा इसी क्षेत्र का था। कीमत बढ़ने से आयात बिल तेजी से बढ़ रहा था। ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 505 अंक चढ़कर 78,494 पर बंद: निफ्टी में भी 157 अंकों की तेजी, 24,354 पर पहुंचा; FMCG शेयरों में खरीदारी हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन आज यानी शुक्रवार 17 अप्रैल को सेंसेक्स 505 अंक (0.65%) की तेजी के साथ 78,494 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 157 अंकों (0.65%) की तेजी रही, ये 24,354 पर पहुंच गया। आज के कारोबार में FMCG,मीडिया और मेटल शेयरों में खरीदारी रही, जबकि आईटी शेयरों में बिकवाली रही। पूरी खबर पढ़ें…
भोजशाला विवाद; वसंत पंचमी-जुमे पर टकराव रोकने की मांग:सामाजिक सद्भाव की अपील, दोनों समुदायों के हित में नियम बनाने की बात

धार भोजशाला से जुड़े विवाद में दायर याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। आवेदक अंतर सिंह यादव, अनवर हुसैन, मजरुल्ला खान, नंदराम परमार, पुरुषोत्तम हिरवले, रामनारायण धाकड़ और रियाज मोहम्मद खान (सभी निवासी धार) की ओर से वरिष्ठ ए़डवोकेट अशोक चितले ने पक्ष रखा। एडवोकेट चितले ने कोर्ट को बताया कि भोजशाला एक संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक है, जिसका धार्मिक उपयोग हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों द्वारा किया जाता रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि वसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ने की स्थिति में पूर्व में कई बार तनाव, झड़प और टकराव की स्थिति बनी है। उच्च स्तरीय समिति गठन की मांग याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट से मांग की गई कि भविष्य में दोनों समुदायों के बीच टकराव की स्थिति न बने, इसके लिए उच्च स्तरीय समिति/आयोग गठित करने और केंद्र व राज्य शासन को आवश्यक विधायी प्रावधान या नियम बनाने के निर्देश दिए जाएं, ताकि विवाद की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह अलग याचिका है, जिसमें सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की मांग की गई है। कोर्ट ने कहा भारतीय संविधान के तहत हम सभी धर्मों को साथ लेकर चलते हैं। साथ ही मामले में आगे की सुनवाई अगले दिन जारी रखने की बात कही। इंटरविनर पर कोर्ट की टिप्पणी सुनवाई के दौरान एक इंटरविनर द्वारा बहस की अनुमति मांगे जाने पर कोर्ट ने कहा कि कोर्ट ऐसा मंच नहीं है जहां हर कोई अपनी मांग लेकर उपस्थित हो। यदि किसी याचिका में ठोस आधार (सब्सटेंस) नहीं होगा तो उसे नहीं सुना जाएगा। एएसआई को भी पक्ष रखने की अनुमति एएसआई के एडवोकेट सुनील जैन को कोर्ट ने पक्षकार बताते हुए अपनी रिपोर्ट या पक्ष प्रस्तुत करने की अनुमति दी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुनवाई लगातार जारी रखी जाएगी। अंतर सिंह एवं अन्य की ओर से ए़डवोकेट चितले अगली सुनवाई में अपनी दलीलें जारी रखेंगे।
‘विश्वासघात’ बनाम ‘गेरीमैंडरिंग’: संयुक्त विपक्ष ने सरकार के महिला कोटा को हराया, लोकसभा में परिसीमन पर जोर | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 20:23 IST 131वें संशोधन के बिना, सदन का विस्तार करने और 2026 के बाद की जनगणना से महिलाओं के कोटे को अलग करने की कानूनी व्यवस्था रुकी हुई है यह हार 2029 के आम चुनावों के रोडमैप को अनिश्चितता की स्थिति में छोड़ देती है। (फ़ाइल छवि) शुक्रवार को एक नाटकीय विधायी गतिरोध में, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में गिर गया क्योंकि सरकार अनिवार्य दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रही। दिन भर की ज़ोरदार बहस के बावजूद, विधेयक – जिसमें सदन को 50 सीटों तक विस्तारित करने और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की मांग की गई थी – के पक्ष में 27 वोट और विरोध में 211 वोट मिले। अनुच्छेद 36 के तहत, संशोधन को पारित करने के लिए कम से कम 326 वोटों (49 उपस्थित और मतदान को मानते हुए) के विशेष बहुमत की आवश्यकता थी, जिससे ट्रेजरी बेंच में काफी कमी रह गई। हार के बाद सदन की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार ने परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून विधेयक पर आगे नहीं बढ़ने का भी फैसला किया। तीनों कानूनों का उद्देश्य लोकसभा और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना था। संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक पारित होने में विफल क्यों हुआ? विधेयक की हार का प्राथमिक कारण विपक्ष का एकीकृत मोर्चा था, जिसने तर्क दिया कि यह कानून महिला सशक्तिकरण के बारे में कम और भारत के चुनावी मानचित्र के “खतरनाक” पुनर्गठन के बारे में अधिक था। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने विधेयक को “घबराहट की प्रतिक्रिया” और “राष्ट्र-विरोधी कृत्य” करार देते हुए इस आरोप की अगुवाई की, जो दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों को उनके सफल जनसंख्या नियंत्रण के लिए दंडित करेगा। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर महिलाओं के कोटा को नए परिसीमन अभ्यास से जोड़कर, विपक्ष ने दावा किया कि सरकार “गणितीय गड़बड़ी” का प्रयास कर रही थी। सदन का गणित सत्तारूढ़ एनडीए के लिए भी उतना ही ख़राब था। 543 की प्रभावी ताकत और उपस्थित और मतदान करने वालों में से दो-तिहाई की आवश्यकता के साथ, सरकार को पर्याप्त क्रॉस-पार्टी समर्थन की आवश्यकता थी जो कभी पूरा नहीं हुआ। जबकि 27 हाँ ने साधारण बहुमत का प्रतिनिधित्व किया, वे संशोधन के लिए संवैधानिक सीमा से लगभग 50 वोट कम रह गए। अनुपस्थित रहने की कुल अनुपस्थिति – 49 सदस्यों ने व्यक्तिगत रूप से मतदान किया – 50-सीट विस्तार योजना की ध्रुवीकरण प्रकृति को रेखांकित किया। सरकार ने इस विधायी झटके पर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की है? मतदान के तुरंत बाद, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला किया और उन पर भारत की महिलाओं के खिलाफ “ऐतिहासिक विश्वासघात” का आरोप लगाया। रिजिजू ने जोर देकर कहा कि हालांकि विधेयक आज गिर गया, नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता अटल है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष ने दशकों से लंबित सुधार को रोकने के लिए परिसीमन की तकनीकीताओं के पीछे छिपकर अपने “महिला विरोधी” पूर्वाग्रह को उजागर किया है। रिजिजू ने सदन के बाहर संवाददाताओं से कहा, ”विपक्ष ने आज भारत की बेटियों की आकांक्षाओं के खिलाफ मतदान किया है।” उन्होंने कसम खाई कि सरकार आरक्षण के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सभी संवैधानिक रास्ते तलाशेगी, यह संकेत देते हुए कि भविष्य के सत्रों में “निष्पादन की कार्यप्रणाली” पर फिर से विचार किया जा सकता है। गृह मंत्री अमित शाह, जिन्होंने पहले सदन से विधेयक को “नैतिक अनिवार्यता” के रूप में पारित करने का आग्रह किया था, ने इसी तरह कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले गुट द्वारा “अदूरदर्शी” नाकेबंदी के बावजूद महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए 2029 का लक्ष्य प्राथमिकता बना हुआ है। महिला आरक्षण और परिसीमन की आगे की राह क्या है? यह हार 2029 के आम चुनावों के रोडमैप को अनिश्चितता की स्थिति में छोड़ देती है। 131वें संशोधन के बिना, सदन का विस्तार करने और 2026 के बाद की जनगणना से महिलाओं के कोटा को अलग करने की कानूनी व्यवस्था रुकी हुई है। 2023 का 106वां संशोधन – मूल महिला कोटा कानून – सिर्फ एक दिन पहले 16 अप्रैल को अधिसूचित किया गया था, लेकिन इसका कार्यान्वयन तकनीकी रूप से परिसीमन अभ्यास से जुड़ा हुआ है जिसे अब पराजित विधेयक सुविधाजनक बनाने के लिए था। राजनीतिक लड़ाई के अब सार्वजनिक क्षेत्र में जाने की उम्मीद है, दोनों पक्ष “17 अप्रैल की हार” को या तो संघवाद की जीत या लैंगिक न्याय की हार के रूप में पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 20:22 IST समाचार राजनीति ‘विश्वासघात’ बनाम ‘गेरीमैंडरिंग’: संयुक्त विपक्ष ने सरकार के महिला आरक्षण को हराया, लोकसभा में परिसीमन पर जोर अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
सीहोर में पाइपलाइन जोड़ने के दौरान पानी बर्बाद:इंदौर नाके पर नई टंकी से कनेक्शन; हजारों लीटर पेयजल सड़कों पर बहा

सीहोर शहर में भीषण गर्मी और जल संकट के बीच हजारों लीटर पेयजल सड़कों पर बह गया। यह घटना नगर के इंदौर नाका क्षेत्र में नवनिर्मित पानी की टंकी को मुख्य पाइपलाइन से जोड़ने की प्रक्रिया के दौरान हुई। पाइपलाइन जोड़ने के कार्य के तहत मुख्य पाइपलाइन को खाली किया गया, जिससे बड़ी मात्रा में साफ पानी व्यर्थ बह गया। इस लापरवाही को देखकर स्थानीय नागरिकों में भारी रोष है। शहर इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। सीहोर में अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। नगर निगम द्वारा शहर में पेयजल की आपूर्ति दो दिन के अंतराल पर की जा रही है। पेयजल संकट लगातार गहरा रहा गिरते जलस्तर के कारण पेयजल संकट लगातार गहरा रहा है। पानी की किल्लत का फायदा निजी टैंकर संचालक उठा रहे हैं, जहां एक टैंकर के लिए नागरिकों को 500 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। 20 लीटर पानी की केन भी 20 रुपए में बिक रही है। नागरिकों का कहना है कि जब शहर बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है और लोग महंगे दामों पर पानी खरीदने को मजबूर हैं, ऐसे में बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के इतनी बड़ी मात्रा में पानी बहा देना प्रबंधन की बड़ी लापरवाही है। उनका मानना है कि पाइपलाइन जोड़ने के कार्य को इस तरह नियोजित किया जाना चाहिए था कि पानी की बर्बादी कम से कम हो।
अवैध बोरिंग पर शिकंजा, मशीन जब्त:सीधी में बिना अनुमति चल रही थी बोरिंग, एजेंट समेत जिम्मेदारों पर एक्शन

सीधी जिले के चुरहट क्षेत्र के ग्राम कुसमहर में अवैध बोरिंग के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे बिना अनुमति के बोरिंग का कार्य चल रहा था, जिसे रोककर मशीन जब्त कर ली गई। यह अवैध बोरिंग गांव के प्राथमिक स्कूल से महज 100 मीटर की दूरी पर संचालित हो रही थी, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई थीं। जानकारी मिलते ही एसडीएम विकास कुमार आनंद ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने तहसीलदार रामपुर नैकिन आशीष कुमार मिश्रा को मौके पर भेजा। तहसीलदार ने बोरिंग कार्य करवा रहे लोगों से दस्तावेज मांगे, लेकिन कोई भी वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं की जा सकी। जांच में पता चला कि बोरिंग लक्ष्मीकांत प्रजापति की जमीन पर हो रही थी, जबकि कार्य कराने का जिम्मा एजेंट जितेंद्र चतुर्वेदी के पास था। दोनों पक्षों के पास आवश्यक अनुमति नहीं थी, जिससे यह कार्य पूरी तरह अवैध पाया गया। दस्तावेजों के अभाव में प्रशासन ने तत्काल बोरिंग मशीन जब्त कर ली। सुरक्षा कारणों से मशीन को सेमरिया थाने में खड़ा करवाया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरी कागजी कार्रवाई नहीं हो जाती और मामला न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक मशीन थाने में ही रहेगी। तहसीलदार आशीष कुमार मिश्रा ने बताया कि मौके पर नियमों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए अवैध खनन किया जा रहा था, जिस पर नियमानुसार कार्रवाई की गई है। जब्त की गई बोरिंग मशीन शिव शक्ति कंपनी की है, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर KA 01 ME 7577 है। यह मशीन कर्नाटक की बताई जा रही है। गौरतलब है कि सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा ने पहले ही जिले को प्रतिबंधित जोन घोषित कर अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। प्रशासन की कार्रवाई से अवैध गतिविधियों में लिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है।
खरगोन में पारा 41°C, फिर भी स्कूल टाइम नहीं बदला:तेज धूप में घर लौटने को मजबूर छात्र, मांग के बाद भी फैसला नहीं

खरगोन जिले में भीषण गर्मी के बावजूद स्कूलों के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दोपहर में स्कूल लगने और छुट्टी होने के कारण छात्रों को तेज धूप में घर लौटना पड़ रहा है, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने जिले में लू का अलर्ट जारी किया है। पिछले दो दिनों से तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। शुक्रवार को हल्के बादलों के बावजूद दोपहर में तेज धूप और उमस ने लोगों को परेशान किया। ग्रामीण क्षेत्र अहिरखेड़ा में दोपहर 3:30 बजे स्कूल से लौटते समय बच्चे रुमाल और दुपट्टे से सिर ढंककर तेज धूप से बचते नजर आए। यह स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चिंता बढ़ा रही है। अत्यधिक गर्मी के कारण स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति भी कम हो रही है। गर्मी और सुविधाओं की कमी के चलते कई विद्यार्थी स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। शिक्षक संघ ने समय बदलने पत्र लिखा मध्य प्रदेश शिक्षक संघ, खरगोन ने तीन दिन पहले ही कलेक्टर को पत्र लिखकर स्कूलों का समय सुबह करने की मांग की थी। जिला अध्यक्ष सुनील भावसार ने बताया कि कई सरकारी स्कूलों में बिजली और पंखों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे छात्रों को गर्मी में दिक्कत होती है। शिक्षा अधिकारी शैलेंद्र कानूडे ने अभी तक कलेक्टर को समय परिवर्तन का कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है। वर्तमान में स्कूलों की छुट्टी दोपहर 2 बजे के बाद हो रही है, जिससे छात्रों को तेज धूप में घर जाना पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिससे नमी बढ़ेगी और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है। हालांकि फिलहाल गर्मी से राहत के आसार कम हैं।
‘काला मां काली का रंग है’: डीएमके की कनिमोझी ने पीएम मोदी के ‘काला टीका’ पर पलटवार किया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 18:51 IST पीएम मोदी ने विरोध में काले कपड़े पहनने के लिए डीएमके सदस्यों पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि यह विधेयक पर बहस के दौरान बुरी नजर से बचने के लिए “काला टीका” के रूप में काम करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि। (संसद टीवी पीटीआई के माध्यम से) द्रमुक नेता कनिमोझी ने महिला आरक्षण कानून में संशोधन के खिलाफ पार्टी के विरोध पर निर्देशित “काला टीका” टिप्पणी को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पलटवार किया। लोकसभा में बोलते हुए कनिमोझी ने कहा कि वह इस टिप्पणी से आश्चर्यचकित हैं और उन्होंने कहा कि काला देवी काली का रंग है। उन्होंने यह भी कहा कि द्रमुक इस मुद्दे पर अंत तक अपना विरोध जारी रखेगी। गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन पर बहस में हस्तक्षेप करते हुए, पीएम मोदी ने विरोध में काले कपड़े पहनने के लिए डीएमके सदस्यों पर कटाक्ष किया था और कहा था कि यह विधेयक पर बहस के दौरान बुरी नजर से बचने के लिए “काला टीका” के रूप में काम करता है। काले कपड़ों और झंडों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अच्छे काम शुरू करने से पहले काला टीका लगाने की परंपरा है जिसके लिए वह उन्हें धन्यवाद देते हैं. शुक्रवार को बहस में भाग लेते हुए, कनिमोझी, जो काली साड़ी पहने हुए थीं, ने कहा कि वह “आश्चर्यचकित हैं कि जो लोग हिंदुत्व की रक्षा के लिए वहां हैं, उन्हें देवी काली की याद नहीं दिलाई गई, जो काली देवी हैं जो काला पहनती हैं”। उन्होंने यह भी कहा कि काला द्रमुक के बौद्धिक नेता पेरियार का भी रंग है, जिन्होंने उन्हें अंत तक लड़ना सिखाया है। कनिमोझी के अलावा डीएमके के अन्य सांसद भी सदन में काले कपड़े पहने हुए थे। द्रमुक सांसद ने यह भी मांग की कि महिला आरक्षण अधिनियम, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत कोटा प्रदान करता है, को समान 543 सीटों के साथ 2029 से लागू किया जाए। उन्होंने मांग की कि परिसीमन प्रक्रिया को महिलाओं के कोटे से अलग किया जाना चाहिए। गुरुवार को, जबकि DMK सदस्यों ने सदन में काले कपड़े पहने थे, पार्टी नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य में काला झंडा फहराया और परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई, इसे “काला कानून” करार दिया, जो तमिल लोगों को अपनी ही भूमि में “शरणार्थी” बनाने का प्रयास करता है। (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 18:50 IST समाचार राजनीति ‘काला मां काली का रंग है’: डीएमके की कनिमोझी ने पीएम मोदी के ‘काला टीका’ पर पलटवार किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)मोदी काला टीका टिप्पणी पर कनिमोझी की प्रतिक्रिया(टी)कनिमोझी लोकसभा भाषण(टी)मोदी काला टीका टिप्पणी(टी)डीएमके काला विरोध(टी)महिला आरक्षण विधेयक(टी)परिसीमन और महिला कोटा(टी)डीएमके हिंदुत्व आलोचना(टी)पेरियार काला प्रतीकवाद
फूड एप से 12 ऑर्डर पर ₹900 एक्स्ट्रा खर्च हो:जोमैटो, स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस 3 साल में 9 गुना बढ़ी, यहां दाम भी 15% तक ज्यादा

ऑनलाइन ऑर्डर के जरिये खाना मंगवाना, OTT देखना, 10 मिनट में किराना- ये सुविधाएं अब पहले से महंगी हो चुकी हैं। प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज और छुपे हुए खर्च मिलकर हर महीने हजारों रुपए यूं ही खर्च हो रहे हैं। यदि आप महीने में 12 बार भी फूड डिलीवरी एप से ऑर्डर करते हैं तो अनजाने में करीब 900 रुपए अतिरक्ति खर्च कर रहे हैं। इसमें 180 रुपए प्लेटफॉर्म फीस और 720 रुपए डिलीवरी चार्ज शामिल है। यह रकम हर साल बढ़ रही है। 2023-2026 के बीच जोमैटो, स्विगी पर प्लेटफॉर्म फीस 9 गुना हो गई। ऑनलाइन मेन्यू के दाम भी ऑफलाइन से 10-15% ज्यादा होते हैं। मंथली खर्च पर बढ़ रहा 2 से 5 हजार का बोझ असली समस्या यह है कि हर खर्च छोटा लगता है। 249 रुपए का लंच, 199 रुपए का सब्सक्रिप्शन, लेकिन ये सब मिलकर परिवार के बजट पर हर महीने 2000-5000 रुपए का बोझ बढ़ा देते हैं। चुनौतीपूर्ण हालात में यह बिजनेस बढ़ता है। कोविड महामारी की सबसे कमजोर तिमाही (जनवरी-मार्च 2020) में जहां SP 500 कंपनियों की बिक्री 1.9% घटी, वहीं सब्सक्रिप्शन बिजनेस 9.5% बढ़े थे। नेटफ्लिक्स की आय 16%, एपल सर्विसेज की 36% और स्पॉटिफाई की 26% बढ़ी थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सब्सक्रिप्शन मॉडल दो दशकों का सबसे लचीला और मजबूत बिजनेस आर्किटेक्चर है। यहां सीधे ग्राहकों की जेब से पैसा आता है। आलस और मुश्किल प्रोसेस से बढ़ रहे पेड ग्राहक मैकिंजी की रिपोर्ट कहती है कि लोग सब्सक्रिप्शन तभी बंद करते हैं जब उसके दाम बहुत ज्यादा बढ़ जाएं। लेकिन ज्यादातर लोग इसे कैंसिल क्यों नहीं करते? इसकी सबसे बड़ी वजह है ‘जड़ता’ (Inertia) यानी कुछ न करने की आदत। फ्रीमियम मॉडल (जहाँ शुरुआत में सर्विस फ्री मिलती है) वाली कंपनियां 5 साल में करीब 95-100% ग्राहकों को अपने साथ जोड़े रखने में सफल रहती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि 95% ग्राहक उनकी सर्विस से बहुत खुश हैं। असल में, सब्सक्रिप्शन बंद करने के लिए ग्राहक को खुद से मेहनत और प्रोसेस करना पड़ता है, जबकि उसे चालू रखने के लिए उसे कुछ भी नहीं करना पड़ता। इसी आलस या प्रोसेस की जटिलता की वजह से लोग पैसे देते रहते हैं। फूड डिलीवरी, OTT की रफ्तार तेज 1. फूड डिलीवरी: तीन साल में तीन गुना हुआ बाजार 2023 में भारत का ऑनलाइन फूड डिलीवरी बाजार 69,000 करोड़ रुपए का था। ईएमआर एंड मार्क का अनुमान है कि इस साल के आखिर तक यह 2.25 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। 2. OTT: 60 करोड़ से ऊपर निकले स्ट्रीमिंग ऑडियंस आईबीईएफ के मुताबिक 2023 में OTT का पेड सब्सक्रिप्शन 8,200 करोड़ रुपए का था। इस साल यह 11,191 करोड़ तक पहुंच सकता है। बीते साल स्ट्रीमिंग ऑडियंस 60.1 करोड़ थे। ईरान जंग का असर: 10% तक और महंगाई के लिए तैयार रहें मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अभी सीमित है। लेकिन कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। यह अब भी 96 डॉलर पर है। अगर जंग लंबा खिंचा तो कई सेक्टरों में 10% से ज्यादा महंगाई देखने को मिल सकती है। वेल्थ मैनेजमेंट फर्म मेवनार्क के मुताबिक, घर के बजट में कम से कम 10% बढ़ने के लिए अभी से तैयार रहें।
पेट की बेलगाम चर्बी पर ICMR का महाप्लान, लाखों लोगों पर हो रही रिसर्च, मोटापा दूर करने का निकालेगा फॉर्मूला

Last Updated:April 17, 2026, 18:25 IST ICMR Plan for Belly Fat Control: भारत पेट की चर्बी से परेशान है. यहां चौथा वयस्कों के पेट पर बेलगाम चर्बी होती है. पेट की चर्बी घटाने के लिए तरह-तरह की बात की जाती है लेकिन कोई एक मानक फॉर्मूला अब तक तैयार नहीं हो पाया है. इसी समस्या को देखते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी ICMR ने एक महाप्लान तैयार किया है. इसके तहत देश भर में लाखों लोगों पर अध्ययन किया जाएगा और ऐसा फॉर्मूला निकाला जाएगा जिससे पेट के मोटापे से मुक्ति मिले. मोटापा कम करने का निकलेगा समाधान. मोटापा कम करने के लिए हजारों तरह के फंडे आजमाए जाते हैं. कोई कहता है कि भोजन कम कर दो. कोई कहता है एक्सरसाइज करो. कोई कहता है वॉक करो. कोई कहता है फास्ट करो तो कोई कहता है योग करो लेकिन क्या कोई ऐसा फॉर्मूला है जिसमें दावे के साथ कहा जाए कि इससे मोटाप कम हो जाएगा. शायद कोई नहीं. किसी को भोजन कम करने से मोटापा कम हो जाता है तो किसी को भोजन कम करने से मोटापा बढ़ ही जाता है. मतलब अब तक कोई भी ऐसी चीज नहीं जिससे मोटापे का फुलप्रूव इलाज किया जा सके. इसी बात को मद्देनजर रखते हुए आईसीएमआर ने एक महाप्लान बनाया है. इस महाप्लान के तहत देश भर में लाखों लोगों पर अध्ययन किया जाएगा और पेट की चर्बी को खत्म करने के लिए कोई वैज्ञानिक तरीका निकाला जाएगा. भारत के लिए प्रभावी तरीका रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर चार में से एक वयस्क पेट की चर्बी से परेशान है. यहां मोटापाग्रस्त व्यक्तियों में अधिकांश के पेट पर चर्बी ही सबसे बड़ी समस्या है. मोटापा भारत में इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि भारतीय चिकित्सा जगत इससे परेशान है. मोटापा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, लिवर डिजीज जैसी मेटाबोलिक बीमारियों की प्रमुख वजह है. यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार इस मोटापे को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह दे चुके है. अब इस चुनौती से निपटने के लिए देश की सर्वोच्च चिकित्सा संस्था ICMR ने एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है. संस्था अब लाखों लोगों के डेटा का विश्लेषण कर यह पता लगाएगी कि वास्तव में वजन घटाने का कौन सा तरीका भारतीय शरीर और भौगोलिक स्थितियों के हिसाब से सबसे प्रभावी है. शुगर, कोलेस्ट्रॉल का भी विश्लेषण टीओआई के मुताबिक कई वर्षों से चल रही रिसर्च, अलग-अलग डाइट प्लान, फिटनेस रूटीन और जागरुकता अभियानों के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कौन-सा तरीका सबसे ज्यादा प्रभावी है और किस व्यक्ति पर कौन-सा उपाय बेहतर काम करता है. इस कमी को दूर करने के लिए आईसीएमआर ने विभिन्न अध्ययनों के शोधकर्ताओं से डेटा साझा करने का आह्वान किया है, ताकि एक बड़ा संयुक्त विश्लेषण किया जा सके. इस पहल का मकसद वजन कम करने के लिए विभिन्न उपायों जैसे कि डाइट, एक्सरसाइज, व्यवहार और मल्टी कंपोनेंट इंटवेंशन की प्रभावशालिता पर अध्ययन किया जएगा. यह देखा जाएगा विभिन्न समूहों पर इन सबका क्या असर होता है. यह विश्लेषण केवल वजन घटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसे मानकों पर भी नजर रखेगा, क्योंकि मोटापा कई लाइफस्टाइल बीमारियों से गहराई से जुड़ा हुआ है. हर उम्र के लोगों के लिए निकलेगा फॉर्मूलाइसका एक अहम फोकस यह भी होगा कि एक ही तरीका कुछ लोगों पर काम करता है जबकि दूसरों पर नहीं. इसके लिए उम्र, लिंग, आय स्तर और भौगोलिक स्थितियों जैसे ग्रामीण इलाकों के आधार पर अंतर का अध्ययन किया जाएगा. ग्रामीण इलाकों में कुपोषण होते हुए भी मोटापा बढ़ रहा है. एक्सपर्ट का कहना है कि यह समस्या अब और जटिल होती जा रही है, क्योंकि केवल वजन अब स्वास्थ्य जोखिम का भरोसेमंद पैमाना नहीं रह गया है. अब कई ऐसे लोग भी सामने आ रहे हैं जिनका वजन सामान्य है लेकिन वे मेटाबॉलिक समस्याओं से जूझ रहे हैं. बेशक अधिक वजन वाले लोगों में तुरंत कोई गंभीर जटिलता नहीं दिखती लेकिन बाद कई परेशानियां सामने आ जाती है. इस विश्लेषण से अखिल भारतीय प्रमाण मिलने की उम्मीद है. इस समग्र विश्लेषण के बाद पेट की चर्बी और मोटापे को कम करने के लिए एक सर्वमान्य फॉर्मूला तय किया जाएगा जो पूरे देश के सभी उम्र के लोगों के लिए प्रभावी होगा. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 17, 2026, 18:25 IST








