करतारपुर कॉरिडोर पर विदेश मंत्रालय का आया बयान:सुरक्षा स्थिति के चलते 7 मई 2025 से सेवाएं बंद, SGPC ने वीजा कोटा बढ़ाने की मांग उठाई

पाकिस्तान जाने वाले सिख तीर्थयात्रियों के लिए वीजा कोटा बढ़ाने और करतारपुर साहिब कॉरिडोर को दोबारा खोलने की मांग के बीच विदेश मंत्रालय ने मौजूदा सुरक्षा स्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सुरक्षा स्थिति को देखते हुए करतारपुर कॉरिडोर की सेवाएं फिलहाल निलंबित हैं। जायसवाल से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के प्रतिनिधिमंडल की नई दिल्ली में पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स से मुलाकात और सिख श्रद्धालुओं के लिए वीजा कोटा बढ़ाने की मांग को लेकर सवाल पूछा गया था। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हर साल एक द्विपक्षीय समझौते के तहत सिख जत्थे पाकिस्तान स्थित तीर्थ स्थलों की यात्रा करते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बोले- सेवाएं 7 मई 2025 से निलंबित हैं करतारपुर साहिब कॉरिडोर को फिर से खोलने की मांग पर जायसवाल ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा स्थिति के कारण इसकी सेवाएं 7 मई 2025 से निलंबित हैं और अभी स्थिति में बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर हाल ही में संसद में भी सवाल उठाया गया था। विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल की पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स साद अहमद वारैच से मुलाकात के बाद आई है। प्रतिनिधिमंडल ने नवंबर 2026 में श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश गुरुपर्व से पहले अधिक संख्या में वीजा जारी करने की मांग की है। SGPC के अनुसार, प्रकाश गुरुपर्व के लिए 7,500 से अधिक श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान यात्रा हेतु पासपोर्ट जमा किए हैं। वहीं, पाकिस्तान उच्चायोग की ओर से करीब 1,800 श्रद्धालुओं को ही वीजा जारी किए जाते हैं।
पाकिस्तान बोला- ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगेंडा:फिल्म कहानी से हकीकत नहीं बदलेंगी; 15 अगस्त को रिलीज हुई फिल्म

ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया। उन्होंने कहा कि फिल्म में घटनाओं को भारत के पक्ष में दिखाया गया है और इससे असली घटनाएं नहीं बदल सकतीं। अहमद शरीफ ने मंगलवार तड़के करीब 2 बजे सोशल मीडिया X पर यह बयान दिया। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री को ‘ट्रेजेडी और कॉमेडी’ तक बताया। उनका आरोप है कि फिल्म में कुछ चुनिंदा इंटरव्यू, भावुक कहानी और फिल्मी अंदाज का इस्तेमाल किया गया है। डिस्कवरी की डॉक्यूमेंट्री ‘डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ 15 अगस्त को रिलीज हुई थी। इसमें ऑपरेशन सिंदूर में शामिल भारतीय सैन्य अधिकारियों के इंटरव्यू हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी इसमें नजर आए हैं। पाकिस्तान बोला- सैन्य नाकामी को जीत बताया पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भारत ने ऑपरेशन के नतीजे को अपनी जीत के तौर पर दिखाया है। उन्होंने कहा कि फिल्म में कहानी और वीडियो के जरिए सैन्य नाकामी को सफल ऑपरेशन बताया गया है। उनका कहना था कि फिल्म बनाने से उस समय हुई असली घटनाएं नहीं बदल सकतीं। अहमद शरीफ दावा किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के संघर्ष में उनकी सेना ने 8 भारतीय सैन्य विमान गिराए थे। हालांकि भारत इन दावों को पहले ही नकार चुका है। सीजफायर पर भी पाकिस्तान ने सवाल उठाए पाकिस्तानी सेना ने कहा कि लड़ाई दोनों देशों के DGMO यानी सैन्य ऑपरेशन के प्रमुख अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद रुकी थी। इसलिए इसे भारत की एकतरफा जीत बताना सही नहीं है। पाकिस्तान ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री में एक तरफ भारत की बड़ी और सटीक सैन्य कार्रवाई की बात कही गई है, तो दूसरी तरफ यह भी कहा गया है कि भारत ने लड़ाई को सीमित रखा और पाकिस्तान को पीछे हटने का मौका दिया। पाकिस्तान ने इसे विरोधाभासी दावा बताया। पहलगाम हमले से ऑपरेशन सिंदूर तक 19 दिनों में क्या-क्या हुआ? 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। 7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष बढ़ा और 10 मई को DGMO स्तर की बातचीत के बाद सीजफायर पर सहमति बनी। ———————— ये खबर भी पढ़ें…. इमरान खान से बहन और पत्नी ने मुलाकात की:सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अडियाला जेल पहुंचीं; पूर्व PM अस्पताल शिफ्ट किए जाएंगे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से उनकी बहन नोरीन नियाजी और पत्नी बुशरा बीबी ने अडियाला जेल में मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मुलाकात हुई। नोरीन 9 महीने बाद इमरान से मिलीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
ट्रम्प ने होर्मुज को अमेरिका का नया इलाका बताया:सोशल मीडिया पर मैप पोस्ट किया; ईरान बोला- ट्रम्प की गलतफहमी जल्द दूर हो जाएगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताते हुए सोशल मीडिया पर मैप पोस्ट किया है। ट्रम्प के पोस्ट के बाद ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताना सिर्फ एक गलतफहमी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ट्रम्प को जल्द ही समझ आ जाएगा कि इस समुद्री रास्ते पर अमेरिका का कोई अधिकार नहीं है। ईरानी मंत्री ने ट्रम्प को पुराने बयान की याद दिलाई गरीबाबादी ने ट्रम्प को उनके पुराने बयान की भी याद दिलाई। दरअसल, कुछ महीने पहले ट्रम्प ने ‘फारस की खाड़ी’ का नाम बदलकर ‘अरब की खाड़ी’ कहने का सुझाव दिया था। इस पर ईरान ने कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि यह नाम सदियों से ‘फारस की खाड़ी’ ही है। अब ट्रम्प ने अपने पोस्ट में ‘फारस की खाड़ी’ शब्द का इस्तेमाल किया। इस पर तंज कसते हुए गरीबाबादी ने कहा कि जब ट्रम्प ने इस बार सही नाम का इस्तेमाल किया है, तो उम्मीद है कि उन्हें यह भी समझ आ जाएगा कि होर्मुज स्ट्रेट अमेरिका का इलाका नहीं है। ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल (2017) में ईरान पर भाषण देते हुए पहली बार फारस की खाड़ी को अरब की खाड़ी कहा था। ईरान में इसे राष्ट्रीय पहचान का मुद्दा माना जाता है, इसलिए इस पर बहुत विवाद हुआ था। ईरान बोला- शर्तें पूरी होने तक नहीं खुलेगा होर्मुज ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने मंगलवार को कहा कि होर्मुज स्ट्रेट तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता और समझौता ज्ञापन में किए गए वादों को लागू नहीं करता। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित अपने भाषण में उन्होंने कहा कि तेहरान अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा और अमेरिकी शर्तों के बजाय अपने देश हितों के मुताबिक फैसला लूंगा। ओमान को भी दे चुके हैं धमकी इससे पहले ट्रम्प ने सोमवार को ओमान पर बमबारी की धमकी दी थी। उन्होंने कहा कि अगर ओमान, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में बाधा बना, तो अमेरिका उस पर ‘बमबारी करेगा’। हालांकि, ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि ओमान ने ऐसा क्या किया था जिसे वह रुकावट मान रहे हैं। ओमान लंबे समय से खुद को इस संघर्ष में तटस्थ देश बताता रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में भी वह मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। ट्रम्प का बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह पहली बार है जब उन्होंने मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान को सीधे सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है।
रिपोर्ट- यूक्रेन ने ब्रिटिश ड्रोन से रूस पर हमला किया:नाराज मॉस्को बोला- ब्रिटेन जंग को और बढ़ा रहा, बड़ी कीमत चुकानी होगी

रूस ने ब्रिटेन पर यूक्रेन जंग में दखल देने का आरोप लगाया है। रूसी सरकार का दावा है कि यूक्रेन ने रूस पर हमले में जिस ड्रोन का इस्तेमाल किया था वह ब्रिटिश कंपनियों ने बनाया। रूस ने कहा कि इसके लिए ब्रिटेन को गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। यह मामला ब्रिटिश अखबार द संडे टाइम्स की रिपोर्ट के बाद सामने आया। दरअसल, इसी रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि यूक्रेन ने रूस में हमला करने के लिए 2 ब्रिटिश कंपनियों के बनाए ड्रोन का इस्तेमाल किया। संडे टाइम्स की यह रिपोर्ट अगर सही है, तो यह पहली बार होगा जब ब्रिटिश तकनीक से बने ड्रोन रूस पर हुए हमलों में इस्तेमाल हुए हैं। ब्रिटेन स्थित रूसी दूतावास ने कहा कि लंदन जानबूझकर यूक्रेन संकट को और भड़का रहा है। वह यूक्रेन के जरिए रूस को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। रूसी दूतावास ने कहा कि इसके गंभीर परिणाम होंगे और ब्रिटेन को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। ब्रिटेन बोला- यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़े हैं वहीं, ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस के हमलों से अपनी रक्षा करने के लिए यूक्रेन को जिन हथियारों की जरूरत होगी, ब्रिटेन उन्हें देता रहेगा। प्रवक्ता ने कहा कि रूस को ब्रिटेन की नीति को लेकर कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। ब्रिटेन यूक्रेन और अपने सहयोगी देशों के खिलाफ रूस की आक्रामकता का विरोध करता रहेगा। यूक्रेन ने रूस के अंदर हमले 3 गुना बढ़ाए यूक्रेन ने इस साल रूस के अंदर ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले काफी बढ़ा दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने जुलाई में जनवरी के मुकाबले 3 गुना ज्यादा हमले किए। अब यूक्रेन के हमले सिर्फ रूस की सीमा के पास के इलाकों तक सीमित नहीं हैं। यूक्रेन रूस के अंदर काफी दूर तक ड्रोन और मिसाइल भेजकर हमले कर रहा है। इन हमलों में रूस के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा हथियार और ईंधन के भंडार भी निशाने पर हैं। यूक्रेन रूस की तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और औद्योगिक ठिकानों पर भी हमला कर रहा है।
रिपोर्ट- यूक्रेन ने ब्रिटिश ड्रोन से रूस पर हमला किया:नाराज मॉस्को बोला- ब्रिटेन जंग को और बढ़ा रहा, बड़ी कीमत चुकानी होगी

रूस ने ब्रिटेन पर यूक्रेन जंग में दखल देने का आरोप लगाया है। रूसी सरकार का दावा है कि यूक्रेन ने रूस पर हमले में जिस ड्रोन का इस्तेमाल किया था वह ब्रिटिश कंपनियों ने बनाया। रूस ने कहा कि इसके लिए ब्रिटेन को गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। यह मामला ब्रिटिश अखबार द संडे टाइम्स की रिपोर्ट के बाद सामने आया। दरअसल, इसी रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि यूक्रेन ने रूस में हमला करने के लिए 2 ब्रिटिश कंपनियों के बनाए ड्रोन का इस्तेमाल किया। संडे टाइम्स की यह रिपोर्ट अगर सही है, तो यह पहली बार होगा जब ब्रिटिश तकनीक से बने ड्रोन रूस पर हुए हमलों में इस्तेमाल हुए हैं। ब्रिटेन स्थित रूसी दूतावास ने कहा कि लंदन जानबूझकर यूक्रेन संकट को और भड़का रहा है। वह यूक्रेन के जरिए रूस को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। रूसी दूतावास ने कहा कि इसके गंभीर परिणाम होंगे और ब्रिटेन को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। ब्रिटेन बोला- यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़े हैं वहीं, ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस के हमलों से अपनी रक्षा करने के लिए यूक्रेन को जिन हथियारों की जरूरत होगी, ब्रिटेन उन्हें देता रहेगा। प्रवक्ता ने कहा कि रूस को ब्रिटेन की नीति को लेकर कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। ब्रिटेन यूक्रेन और अपने सहयोगी देशों के खिलाफ रूस की आक्रामकता का विरोध करता रहेगा। यूक्रेन ने रूस के अंदर हमले 3 गुना बढ़ाए यूक्रेन ने इस साल रूस के अंदर ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले काफी बढ़ा दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने जुलाई में जनवरी के मुकाबले 3 गुना ज्यादा हमले किए। अब यूक्रेन के हमले सिर्फ रूस की सीमा के पास के इलाकों तक सीमित नहीं हैं। यूक्रेन रूस के अंदर काफी दूर तक ड्रोन और मिसाइल भेजकर हमले कर रहा है। इन हमलों में रूस के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा हथियार और ईंधन के भंडार भी निशाने पर हैं। यूक्रेन रूस की तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और औद्योगिक ठिकानों पर भी हमला कर रहा है। ब्रिटेन यूक्रेन के समर्थक देशों में शामिल ब्रिटेन यूक्रेन के सबसे बड़े समर्थक देशों में से एक है। युद्ध शुरू होने के बाद से लंदन ने यूक्रेन के लिए 25 अरब पाउंड ( करीब 3.24 लाख करोड़ रुपए ) की सहायता देने का वादा किया है। इसमें 16 अरब पाउंड की सैन्य मदद भी शामिल है। ब्रिटेन ने यूक्रेन को टैंक, मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और अन्य हथियार भी दिए हैं। इसके अलावा ब्रिटेन में 63 हजार से ज्यादा यूक्रेनी सैनिकों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। हाल ही में ब्रिटेन ने यूक्रेन को 1.5 लाख ड्रोन और 350 एयर डिफेंस मिसाइलें देने की भी घोषणा की थी। ये भी पढ़ें… PAK सुप्रीम कोर्ट बोला-इमरान को 2 दिन में अस्पताल भेजें: कहा- बहनों से मिलना उनका अधिकार पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अस्पताल भेजने का आदेश दिया। पूरी खबर पढ़ें…
30 बच्चों से दुष्कर्म के दोषी पर ब्रिटेन-पाकिस्तान में विवाद:ब्रिटिश सरकार वापस PAK भेजने पर अड़ी, इस्लामाबाद ने दी चेतावनी

ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक यौन अपराधी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। शाबिर अहमद ब्रिटेन के कुख्यात ग्रूमिंग गैंग से जुड़ा हुआ है। उसे 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी पाया गया है। शाबिर मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला है लेकिन उसके पास ब्रिटिश नागरिकता है। अब ब्रिटेन शाबिर को पाकिस्तान भेजना चाहता है, लेकिन इस्लामाबाद ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि अगर शाबिर को रखने का दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों को वापस लेने, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर फिर से विचार कर सकता है। कौन है शाबिर अहमद? 73 वर्षीय शाबिर अहमद पाकिस्तान मूल का है। बच्चों के यौन शोषण मामले में उसे 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वह करीब 14 साल जेल में काट चुका है और हाल ही में रिहा हुआ है। ब्रिटेन उसकी नागरिकता समाप्त कर चुका है और अब उसे पाकिस्तान भेजने की कोशिश कर रहा है। हालांकि पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपना अधिकांश जीवन ब्रिटेन में बिताया, वहीं उसका पालन-पोषण हुआ और वहीं उसने अपराध किए, इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी ब्रिटेन को ही उठानी चाहिए। वीजा प्रतिबंध की खबरों से भी नाराज पाकिस्तान ब्रिटेन की कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान शाबिर अहमद को वापस लेने से इनकार करता है, तो ब्रिटिश सरकार पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा पर सख्ती कर सकती है। कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता घटाने की भी बात कही गई है। हालांकि, ब्रिटेन की ओर से इन कदमों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है। डेली टेलीग्राफ से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा कि अगर वीजा और आर्थिक मदद को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो इससे दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। शाबिर अहमद केस की टाइमलाइन 2012: 22 साल की जेल की सजा ब्रिटेन की अदालत ने रोचडेल ग्रूमिंग गैंग मामले में शाबिर अहमद को 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी ठहराया। अदालत ने उसे 22 साल कैद की सजा सुनाई। 2016: ब्रिटिश नागरिकता खत्म दोषी ठहराए जाने के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता समाप्त कर दी। जुलाई 2026: 14 साल बाद जेल से रिहाई करीब 14 साल जेल में बिताने के बाद शाबिर अहमद को सख्त शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। उस पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, तय इलाके से बाहर न जाने और कई अन्य प्रतिबंध लगाए गए। जुलाई 2026: ब्रिटेन ने पाकिस्तान भेजने की कोशिश शुरू की रिहाई के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद को पाकिस्तान भेजने के लिए इस्लामाबाद से बातचीत शुरू की। जुलाई 2026: पाकिस्तान ने लेने से इनकार किया पाकिस्तान ने कहा कि वह शाबिर अहमद को स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उस पर दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों की वापसी, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर अपने रुख पर दोबारा विचार कर सकता है। ब्रिटेन-पाकिस्तान के बीच अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का समझौता ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 से एक समझौता है। इसके तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने की अनुमति नहीं है। इसमें मुख्य रूप से तीन तरह के लोग शामिल हैं: किसी व्यक्ति को पाकिस्तान वापस भेजने से पहले उसकी पहचान और नागरिकता की पुष्टि की जाती है। इसके बाद पाकिस्तान उसके लिए जरूरी यात्रा दस्तावेज जारी करता है और उसे वापस भेज दिया जाता है। इस समझौते में सिर्फ लोगों को वापस भेजना ही शामिल नहीं है। दोनों देश अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और संगठित अपराध से निपटने में भी एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। समझौते के बाद भी पाकिस्तान शाबिर को क्यों नहीं अपना रहा? इसकी वजह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि नागरिकता और कानून से जुड़े कई पेचीदा मुद्दे हैं। 1. पाकिस्तान का दावा- शाबिर उसका नागरिक नहीं ब्रिटेन ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता पहले ही खत्म कर दी थी। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता भी छोड़ दी थी। ऐसे में इस्लामाबाद का दावा है कि उसे पाकिस्तानी नागरिक नहीं मान सकता। 2. 2022 का समझौता हर मामले में लागू नहीं ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 में हुआ रिटर्न्स समझौते के तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। लेकिन किसी व्यक्ति को वापस भेजने से पहले उसकी राष्ट्रीयता और पहचान की पुष्टि करना जरूरी होता है। अगर पाकिस्तान यह मानने से इनकार कर दे कि संबंधित व्यक्ति उसका नागरिक है, तो उसे वापस भेजने की प्रक्रिया रुक सकती है। 3. ब्रिटेन का कानून भी अड़चन बना शाबिर अहमद का मामला दूसरे मामलों से अलग है। वह 1973 से पहले ब्रिटेन आ गया था। उस समय के कानून के तहत ऐसे कुछ लोगों को देश से बाहर भेजने पर रोक थी। इसलिए ब्रिटेन चाहकर भी उसे पाकिस्तान नहीं भेज सकता था। अब ब्रिटिश सरकार ने इस कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए कानून में बदलाव किया है। लेकिन इसके बाद भी शाबिर को पाकिस्तान तभी भेजा जा सकता है, जब पाकिस्तान उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हो। क्या 2022 का समझौता टूट सकता है? ब्रिटिश संसद में सरकार ने बताया है कि पाकिस्तान के साथ मौजूदा रिटर्न्स व्यवस्था के तहत पिछले साल करीब 1,300 ऐसे लोगों को पाकिस्तान भेजा गया था, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का अधिकार नहीं था। इनमें कई गंभीर अपराधों में दोषी लोग भी शामिल थे। यानी पाकिस्तान आम तौर पर अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार नहीं करता। शाबिर अहमद का मामला उसकी नागरिकता और कानूनी स्थिति की वजह से अलग माना जा रहा है। ग्रूमिंग गैंग क्या है जिससे जुड़ा है शबीर अहमद ग्रूमिंग गैंग ऐसे अपराधियों का गिरोह होता है, जो बच्चों को दोस्ती, प्यार, पैसे, उपहार या दूसरे लालच देकर अपने जाल में फंसाता है। इसके बाद उनका यौन शोषण करता है। इनमें से कई लड़कियां प्रेग्नेंट हुईं और उन्हें अबॉर्शन कराना पड़ा। कई लड़कियों ने अपने
30 बच्चों से दुष्कर्म के दोषी पर ब्रिटेन-पाकिस्तान में विवाद:ब्रिटिश सरकार वापस PAK भेजने पर अड़ी, इस्लामाबाद ने दी चेतावनी

ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक यौन अपराधी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। शाबिर अहमद ब्रिटेन के कुख्यात ग्रूमिंग गैंग से जुड़ा हुआ है। उसे 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी पाया गया है। ग्रूमिंग गैंग ऐसे अपराधियों का गिरोह होता है, जो बच्चों को दोस्ती, प्यार, पैसे, उपहार या दूसरे लालच देकर अपने जाल में फंसाता है। इसके बाद उनका यौन शोषण करता है। शाबिर मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला है लेकिन उसके पास ब्रिटिश नागरिकता है। अब ब्रिटेन शाबिर को पाकिस्तान भेजना चाहता है, लेकिन इस्लामाबाद ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि अगर शाबिर को रखने का दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों को वापस लेने, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर फिर से विचार कर सकता है। कौन है शाबिर अहमद? 73 वर्षीय शाबिर अहमद पाकिस्तान मूल का है। बच्चों के यौन शोषण मामले में उसे 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वह करीब 14 साल जेल में काट चुका है और हाल ही में रिहा हुआ है। ब्रिटेन उसकी नागरिकता समाप्त कर चुका है और अब उसे पाकिस्तान भेजने की कोशिश कर रहा है। हालांकि पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपना अधिकांश जीवन ब्रिटेन में बिताया, वहीं उसका पालन-पोषण हुआ और वहीं उसने अपराध किए, इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी ब्रिटेन को ही उठानी चाहिए। वीजा प्रतिबंध की खबरों से भी नाराज पाकिस्तान ब्रिटेन की कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान शाबिर अहमद को वापस लेने से इनकार करता है, तो ब्रिटिश सरकार पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा पर सख्ती कर सकती है। कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता घटाने की भी बात कही गई है। हालांकि, ब्रिटेन की ओर से इन कदमों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है। डेली टेलीग्राफ से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा कि अगर वीजा और आर्थिक मदद को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो इससे दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। शाबिर अहमद केस की टाइमलाइन 2012: 22 साल की जेल की सजा ब्रिटेन की अदालत ने रोचडेल ग्रूमिंग गैंग मामले में शाबिर अहमद को 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी ठहराया। अदालत ने उसे 22 साल कैद की सजा सुनाई। 2016: ब्रिटिश नागरिकता खत्म दोषी ठहराए जाने के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता समाप्त कर दी। जुलाई 2026: 14 साल बाद जेल से रिहाई करीब 14 साल जेल में बिताने के बाद शाबिर अहमद को सख्त शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। उस पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, तय इलाके से बाहर न जाने और कई अन्य प्रतिबंध लगाए गए। जुलाई 2026: ब्रिटेन ने पाकिस्तान भेजने की कोशिश शुरू की रिहाई के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद को पाकिस्तान भेजने के लिए इस्लामाबाद से बातचीत शुरू की। जुलाई 2026: पाकिस्तान ने लेने से इनकार किया पाकिस्तान ने कहा कि वह शाबिर अहमद को स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उस पर दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों की वापसी, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर अपने रुख पर दोबारा विचार कर सकता है। ब्रिटेन-पाकिस्तान के बीच अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का समझौता ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 से एक समझौता है। इसके तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने की अनुमति नहीं है। इसमें मुख्य रूप से तीन तरह के लोग शामिल हैं: किसी व्यक्ति को पाकिस्तान वापस भेजने से पहले उसकी पहचान और नागरिकता की पुष्टि की जाती है। इसके बाद पाकिस्तान उसके लिए जरूरी यात्रा दस्तावेज जारी करता है और उसे वापस भेज दिया जाता है। इस समझौते में सिर्फ लोगों को वापस भेजना ही शामिल नहीं है। दोनों देश अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और संगठित अपराध से निपटने में भी एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। समझौते के बाद भी पाकिस्तान शाबिर को क्यों नहीं अपना रहा? इसकी वजह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि नागरिकता और कानून से जुड़े कई पेचीदा मुद्दे हैं। 1. पाकिस्तान का दावा- शाबिर उसका नागरिक नहीं ब्रिटेन ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता पहले ही खत्म कर दी थी। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता भी छोड़ दी थी। ऐसे में इस्लामाबाद का दावा है कि उसे पाकिस्तानी नागरिक नहीं मान सकता। 2. 2022 का समझौता हर मामले में लागू नहीं ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 में हुआ रिटर्न्स समझौते के तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। लेकिन किसी व्यक्ति को वापस भेजने से पहले उसकी राष्ट्रीयता और पहचान की पुष्टि करना जरूरी होता है। अगर पाकिस्तान यह मानने से इनकार कर दे कि संबंधित व्यक्ति उसका नागरिक है, तो उसे वापस भेजने की प्रक्रिया रुक सकती है। 3. ब्रिटेन का कानून भी अड़चन बना शाबिर अहमद का मामला दूसरे मामलों से अलग है। वह 1973 से पहले ब्रिटेन आ गया था। उस समय के कानून के तहत ऐसे कुछ लोगों को देश से बाहर भेजने पर रोक थी। इसलिए ब्रिटेन चाहकर भी उसे पाकिस्तान नहीं भेज सकता था। अब ब्रिटिश सरकार ने इस कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए कानून में बदलाव किया है। लेकिन इसके बाद भी शाबिर को पाकिस्तान तभी भेजा जा सकता है, जब पाकिस्तान उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हो। क्या 2022 का समझौता टूट सकता है? ब्रिटिश संसद में सरकार ने बताया है कि पाकिस्तान के साथ मौजूदा रिटर्न्स व्यवस्था के तहत पिछले साल करीब 1,300 ऐसे लोगों को पाकिस्तान भेजा गया था, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का अधिकार नहीं था। इनमें कई गंभीर अपराधों में दोषी लोग भी शामिल थे। यानी पाकिस्तान आम तौर पर अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार नहीं करता। शाबिर अहमद का मामला उसकी नागरिकता और कानूनी स्थिति की वजह से अलग माना जा रहा है।
कनाडा के वैंकूवर में ट्रेन ट्रैक पर चढ़ा सिख शख्स:पटरियों पर बैठकर गाना गाया, बोला- मुझे अंग्रेजी नहीं आती; ट्रेन सर्विस रोकनी पड़ी

कनाडा के वैंकूवर में एक सिख शख्स के स्काई ट्रेन के ट्रैक पर चले जाने से ट्रेन सेवा रोकनी पड़ी। शख्स पटरियों पर बैठा रहा और वहां गाना गाता नजर आया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में शख्स बार-बार “आई डॉन्ट नो इंग्लिश यानी मुझे अंग्रेजी नहीं आती” कहता सुनाई दे रहा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने शख्स को ट्रैक से हटाने की कोशिश की। बाद में उसे वहां से बाहर निकाल लिया गया। शख्स को हटाए जाने के दौरान मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने तालियां भी बजाईं। ट्रेन सेवा रोकनी पड़ी शख्स के ट्रैक पर होने के कारण स्काई ट्रेन की आवाजाही प्रभावित हुई। यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और सुरक्षा के लिए ट्रेन सेवा को रोकना पड़ा। उपलब्ध जानकारी में शख्स के ट्रैक पर जाने की वजह और उसके खिलाफ की गई कानूनी कार्रवाई की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। स्काई ट्रेन क्या है और यह कैसे चलती है? वैंकूवर की स्काई ट्रेनएक तरह की मेट्रो ट्रेन है। इसे चलाने के लिए ड्राइवर की जरूरत नहीं पड़ती। ट्रेन का सिस्टम कंप्यूटर से चलता है। स्काई ट्रेन का बड़ा हिस्सा सड़क के ऊपर बने ट्रैक पर चलता है। कुछ जगहों पर यह जमीन के नीचे भी जाती है। स्काई ट्रेन के ट्रैक पर आम लोगों का जाना सुरक्षित नहीं है। ट्रेन बहुत तेज चलती है। अगर कोई व्यक्ति अचानक ट्रैक पर आ जाए तो ट्रेन को तुरंत रोकना आसान नहीं होता। इसलिए जैसे ही पता चलता है कि कोई व्यक्ति ट्रैक पर है, सुरक्षा के लिए उस हिस्से की ट्रेन रोक दी जाती है। पुलिस और ट्रेन के कर्मचारी पहले उस व्यक्ति को ट्रैक से बाहर निकालते हैं। इसके बाद यह देखा जाता है कि ट्रैक पूरी तरह खाली और सुरक्षित है या नहीं। सब कुछ ठीक होने के बाद ही ट्रेन फिर से चलती है। एक व्यक्ति से कई ट्रेनें क्यों रुक सकती हैं? स्काई ट्रेन की कई ट्रेनें एक ही नेटवर्क पर चलती हैं। इसलिए ट्रैक के एक हिस्से में कोई खतरा होने पर सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि आसपास की दूसरी ट्रेनें भी रुक सकती हैं। यात्रियों को ट्रेन में इंतजार करना पड़ सकता है या उन्हें दूसरी ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन बदलना पड़ सकता है। यानी इस घटना में शख्स का ट्रैक पर बैठना सिर्फ पुलिस के लिए परेशानी नहीं था। उसकी वजह से यात्रियों की सुरक्षा के लिए पूरी ट्रेन सेवा को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।
कनाडा के वैंकूवर में ट्रेन ट्रैक पर चढ़ा सिख शख्स:पटरियों पर बैठकर गाना गाया, बोला- मुझे अंग्रेजी नहीं आती; ट्रेन सर्विस रोकनी पड़ी

कनाडा के वैंकूवर में एक सिख शख्स के स्काई ट्रेन के ट्रैक पर चले जाने से ट्रेन सेवा रोकनी पड़ी। शख्स काफी देर तक पटरियों पर बैठा रहा और वहां गाना गाता नजर आया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में शख्स बार-बार “आई डॉन्ट नो इंग्लिश” यानी मुझे अंग्रेजी नहीं आती है, कहते सुनाई दे रहा है। वीडियो में वह पटरियों पर उछल-कूद करता और गाना गाता भी नजर आ रहा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने शख्स को ट्रैक से बाहर निकाल लिया। उसे हटाए जाने के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने तालियां भी बजाईं। ट्रेन सेवा रोकनी पड़ी शख्स के ट्रैक पर मौजूद होने के कारण स्काई ट्रेन की आवाजाही प्रभावित हुई। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए ट्रेन सेवा को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। किस वजह से शख्स ट्रैक पर गया था, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। उसके खिलाफ पुलिस ने क्या कानूनी कार्रवाई की, इसकी भी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। घटना का पूरा वीडियो… स्काई ट्रेन क्या है और यह कैसे चलती है? वैंकूवर की स्काई ट्रेन एक तरह की मेट्रो ट्रेन है। इसकी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए ट्रेन के अंदर ड्राइवर की जरूरत नहीं पड़ती। इसका संचालन कंप्यूटर आधारित सिस्टम से होता है। स्काई ट्रेन का बड़ा हिस्सा सड़क के ऊपर बने ट्रैक पर चलता है। कुछ हिस्सों में यह जमीन के नीचे भी जाती है। स्काई ट्रेन के ट्रैक पर आम लोगों का जाना बेहद खतरनाक होता है। ट्रेन के ट्रैक पर किसी व्यक्ति के पहुंचने की जानकारी मिलते ही सुरक्षा के लिए संबंधित हिस्से में ट्रेन की आवाजाही रोक दी जाती है। इसके बाद पुलिस और ट्रेन कर्मचारी पहले व्यक्ति को ट्रैक से बाहर निकालते हैं। फिर यह जांच की जाती है कि ट्रैक पूरी तरह खाली और सुरक्षित है या नहीं। सुरक्षा की पुष्टि होने के बाद ही ट्रेन सेवा दोबारा शुरू की जाती है। एक व्यक्ति के ट्रैक पर आने से कई ट्रेनें क्यों रुकती हैं? स्काई ट्रेन की कई ट्रेनें एक ही नेटवर्क से जुड़ी होती हैं। इसलिए ट्रैक के किसी एक हिस्से में सुरक्षा से जुड़ी समस्या होने पर उसका असर आसपास चल रही दूसरी ट्रेनों पर भी पड़ सकता है। ऐसे समय में यात्रियों को ट्रेन के अंदर इंतजार करना पड़ सकता है। कई बार उन्हें दूसरी ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन बदलना पड़ता है या अपनी यात्रा में देरी का सामना करना पड़ता है। यानी इस घटना में शख्स का ट्रैक पर बैठना सिर्फ पुलिस के लिए परेशानी नहीं बना। उसकी मौजूदगी के कारण यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रेन सेवा भी रोकनी पड़ी और पूरे नेटवर्क की आवाजाही प्रभावित हुई।
शाहरुख, अजय, टाइगर पर भड़के मुकेश खन्ना:पान मसाला एड करने पर कहा- केसरिया आदाब के लिए नहीं, शर्म की हद है, जनता से माफी मांगो

‘शक्तिमान’ और ‘महाभारत’ में भीष्म पितामह का किरदार निभाने वाले मुकेश खन्ना ने पान मसाला विज्ञापन को लेकर बयान दिया है। उन्होंने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) से मिले कारण बताओ नोटिस का समर्थन किया। मुकेश खन्ना ने कहा कि इन कलाकारों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने विज्ञापन पर तंज कसते हुए कहा कि ये कलाकार बाजार में ‘केसरिया आदाब’ करके घूम रहे थे। मुकेश खन्ना ने एक वीडियो शेयर किया है। इसमें उन्होंने कहा, “सरकार की तरफ से, FDA की तरफ से जो तीन बड़े कलाकार बाजार में केसरिया आदाब करके घूम रहे थे, उनके खिलाफ नोटिस भेजा गया है। मुझे खुशी होती है कि कभी-कभी सरकार मेरी बातों पर ध्यान देती है, लेकिन जरा देर से ध्यान देती है। इसमें समय लगाती है।” वीडियो के साथ मुकेश खन्ना ने लिखा, “केसरिया आदाब के लिए नहीं होता। शौर्य, साहस और पराक्रम के लिए होता है। शर्म आती है ये देखकर, जब कोई आदाब करता है और इशारों से कहता है- गुटखा खाओ।” उन्होंने आगे लिखा, “शर्म की हद तब हो जाती है, जब ऐसा करने वाला जनता का पसंदीदा कलाकार होता है। समझ नहीं आता कि वह ये भद्दा आदाब क्यों करता है, जबकि उसके पास सब कुछ है।” मुकेश खन्ना ने कहा कि कलाकार युवाओं को सुधार सकते हैं, फिर उन्हें युवाओं को बिगाड़ने वाले विज्ञापन नहीं करने चाहिए। उन्होंने लिखा, “शुक्र है, देर-सबेर FDA जागा और नोटिस भेजी गई कि तुम लोग ऐसा क्यों कर रहे हो। जवाब का दुनिया को इंतजार है। मुझे भी। क्या आपको है?” मुकेश खन्ना ने वीडियो में कहा, “मैंने स्कूल के बच्चों की किताबों को लेकर आवाज उठाई थी। काफी सालों के बाद उस पर ध्यान दिया गया। मैंने कहा था कि वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान बना दिया जाए। अब इस पर मुहिम शुरू हो गई है। बड़े-बड़े कलाकार अपने आपको अच्छा समझते हैं और अच्छी जिंदगी जीते हैं, लेकिन लोगों को गलत जिंदगी जीने की राह दिखा रहे हैं। जो केसरिया आदाब कहकर विज्ञापन करते हैं, उनसे मैंने कई बार पूछा है कि आप कर क्या रहे हैं। करने के लिए आपके पास बहुत कुछ है, फिर भी आप इस तरह के विज्ञापन क्यों कर रहे हैं?” बोले- महाराष्ट्र में प्रतिबंधित ब्रांड का अप्रत्यक्ष विज्ञापन मुकेश खन्ना ने कहा कि कलाकार भले ही इलायची का विज्ञापन करने की बात कहते हैं, लेकिन वे उसी नाम वाले ब्रांड का अप्रत्यक्ष विज्ञापन कर रहे हैं। उन्होंने इसे सरोगेट विज्ञापन बताया। उन्होंने कहा, “आप उसी ब्रांड का प्रचार कर रहे हैं, जो बाजार में और महाराष्ट्र में प्रतिबंधित है। मुझे हैरानी है कि सरकार के अधिकारियों ने कार्रवाई इतनी देर से क्यों की। इतने सालों से इन कलाकारों को शायद लाखों-करोड़ों रुपए मिल रहे थे। शायद सरकार को भी इससे काफी राजस्व मिल रहा था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है।” मुकेश खन्ना बोले- कलाकारों को सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए मुकेश खन्ना ने आगे कहा है, “इन कलाकारों को कहना चाहिए कि हमने गलत विज्ञापन किया है। अब गलत विज्ञापन किया है, तो इनका फर्ज बनता है कि वे लोगों को सही संदेश दें कि यह चीज खाने के लिए नहीं होती।” शाहरुख, अजय, टाइगर को मिला नोटिस महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। FDA का आरोप है कि ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन के जरिए राज्य में प्रतिबंधित ‘विमल पान मसाला’ का इनडायरेक्ट प्रचार किया जा रहा है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, FDA ने 11 अगस्त को तीनों को नोटिस भेजकर विज्ञापन में उनकी भूमिका पर 15 दिन में जवाब और स्पष्टीकरण मांगा है। शाहरुख खान को बांद्रा स्थित उनके घर ‘मन्नत’, अजय देवगन को जुहू स्थित आवास और टाइगर श्रॉफ को उनकी प्रोडक्शन कंपनी ‘टाइगर श्रॉफ प्रोडक्शंस एलएलपी’ के पते पर नोटिस भेजा गया है। नोटिस में क्या कहा गया? FDA का कहना है कि विज्ञापन में ‘विमल’ नाम, प्रोडक्ट और डायलॉग इस तरह इस्तेमाल किए गए हैं कि इससे ‘विमल’ ब्रांड का प्रचार होता दिखता है। चूंकि ‘विमल’ ब्रांड पान मसाला से भी जुड़ा है, इसलिए FDA को शक है कि विज्ञापन के जरिए प्रतिबंधित पान मसाले का इनडायरेक्ट प्रचार किया जा रहा है। तंबाकू और गुटखा नेटवर्क पर मकोका (MCOCA) की तैयारी महाराष्ट्र में तंबाकू या निकोटिन वाले गुटखा और पान मसाला पर 2012 से रोक है। यह रोक हर साल बढ़ाई जाती है। अभी की रोक 13 जुलाई 2026 से एक साल के लिए लागू है। इसके तहत पान मसाला बनाने, रखने, लाने-ले जाने और बेचने पर रोक है। इस कानून को हर साल रिन्यू किया जाता है। हाल ही में 13 जुलाई 2026 को इस बैन की अवधि फिर बढ़ाई गई है। FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने 12 जून को अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि संगठित गुटखा और तंबाकू नेटवर्क के मामलों में पुलिस के साथ मिलकर ‘मकोका’ (MCOCA – महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। सरोगेट विज्ञापन गलत नहीं, लेकिन पान मसाला बैन होने से नोटिस इस तरह के विज्ञापन को सरोगेट विज्ञापन कहा जाता है। इसका मतलब है कि किसी ऐसे प्रोडक्ट का सीधे विज्ञापन न करके, उसी ब्रांड के दूसरे प्रोडक्ट का विज्ञापन करना। जैसे पान मसाला ब्रांड की इलायची का विज्ञापन। यह विज्ञापन अपने आप में गलत नहीं है। लेकिन महाराष्ट्र में पान मसाला पर बैन है। FDA का कहना है कि इस वजह से राज्य में पान मसाले का इनडायरेक्ट प्रचार भी नहीं कर सकते। मुकेश खन्ना ने की थी जन गण मन हटाने की मांग की थी हाल ही में आईएएनएस को दिए बयान में मुकेश खन्ना ने कहा, ‘मैं तीन साल पहले बोल चुका हूं कि वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाओ (ये राष्ट्रगीत ही है)। ये जन मन गण (जन गण मन) हमारे देश का नहीं है। ये जो क्वीन एलिजाबेथ थीं, उनके मान में रवींद्रनाथ टेगौर ने एक स्तुति गान लिखा था, उसको हमने मान लिया, भाग्य विधाता, पंजाब सिंग (सिंध)। अरे ये हमारा नहीं है। हमारा है वंदे मातरम, लता जी (मंगेशकर) ने गाया है।’ आगे उन्होंने









