ट्रम्प बोले- अमेरिका ने युद्ध जीता:ईरान पूरी तरह कमजोर, डील करना चाहता है, हमारे विमान तेहरान के ऊपर घूम रहे

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 26वां दिन है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को दावा किया है कि अमेरिका ने युद्ध जीत लिया है। व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने पर सहमत हो गया है और अब समझौता करने के लिए तैयार है। अमेरिकी विमान तेहरान के ऊपर घूम रहे हैं। ट्रम्प ने कहा कि लगातार हमलों के बाद ईरान पूरी तरह कमजोर हो चुका है और उसके पास डील करने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और इसमें अमेरिका के टॉप अधिकारी भी शामिल हैं। ट्रम्प ने कहा कि ईरान अब बातचीत में समझदारी दिखा रहा है और जल्द समझौता हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर बातचीत नाकाम रहती है, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे खासकर पावर प्लांट्स पर दोबारा हमला कर सकता है। ईरान में हमलों का असर… ईरान जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
मास्टर प्लान सड़क विवाद में हाईकोर्ट का फैसला:नेहरू प्रतिमा से छावनी पुल मार्ग पर निगम का नोटिस निरस्त, कार्रवाई को बताया अनुचित

नेहरू प्रतिमा (मधुमिलन चौराहा) से छावनी पुल तक प्रस्तावित मास्टर प्लान सड़क के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने नगर निगम की कार्रवाई को अनुचित ठहराते हुए जारी नोटिस को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने निगम को निर्देश दिया है कि वह मामले में पुनः सुनवाई कर विधिसम्मत आदेश पारित करे। मामला इंदौर नगर निगम के जोन-11 के भवन अधिकारी द्वारा जारी उस नोटिस से जुड़ा है, जिसमें उक्त मार्ग को बाधक बताते हुए याचिकाकर्ता बसंत रावत के मकान को सात दिन के भीतर हटाने का निर्देश दिया गया था। नोटिस के बाद छावनी क्षेत्र के व्यापारियों और निगम प्रशासन के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट जयेश गुरनानी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निगम की कार्रवाई को चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि संबंधित मकान नगर निगम की अनुमति एवं स्वीकृत नक्शे के अनुसार निर्मित है, ऐसे में उसे हटाने की कार्रवाई विधिसम्मत नहीं है। सुनवाई के दौरान गुरनानी ने तर्क दिया कि 27 मई 2014 को नगर निगम ने स्वयं आदेश जारी कर उक्त सड़क की चौड़ाई 60 फीट (18 मीटर) निर्धारित की थी, जबकि वर्तमान नोटिस में सड़क की चौड़ाई 24 मीटर (80 फीट) बताई गई है, जो पूर्व आदेश के विपरीत है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि इंदौर विकास योजना 2021 की वैधता को हाई कोर्ट पहले ही समाप्त घोषित कर चुका है, इसलिए उसके आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। याचिकाकर्ता की उपस्थिति में सड़क की सेंट्रल अलाइनमेंट भी निर्धारित नहीं की गई थी। इन तर्कों से सहमत होते हुए कोर्ट ने नगर निगम द्वारा जारी नोटिस को शून्य घोषित कर दिया तथा निगम को पुनः सुनवाई कर वैधानिक प्रक्रिया के तहत निर्णय लेने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट के इस फैसले से छावनी क्षेत्र के व्यापारियों और प्रभावित पक्षों को राहत मिली है।
अनूपपुर में हाईवे पर कार ने बाइक को टक्कर मारी:शख्स रोड पर गिरा, सिर में गहरी चोट लगी; बेटी से मिलने जा रहा था

अनूपपुर जिले के नेशनल हाईवे 43 पर मंगलवार रात 8 बजे एक तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में 52 साल के रघुवीर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना फुनगा चौकी के पास दैखल गांव में हुई। पुष्पराजगढ़ के लमसराई निवासी रघुवीर सिंह अपनी बाइक से करपा से कोतमा जा रहे थे। उनकी बेटी कोतमा में रहकर कॉलेज की पढ़ाई करती है, जिससे मिलने के लिए वे घर से निकले थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि रघुवीर सिंह अपनी बाइक समेत सड़क पर काफी दूर जाकर गिरे। लहूलुहान हालत में अस्पताल पहुंचाया हादसे के बाद आस-पास के लोगों ने तुरंत पुलिस को खबर दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल रघुवीर को फुनगा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। उनके सिर में गहरी चोट आई थी और काफी खून बह रहा था। साथ ही, सड़क पर घिसटने की वजह से उनके शरीर का एक हिस्सा बुरी तरह छिल गया था। पुलिस ने दर्ज किया केस फुनगा चौकी प्रभारी सोने सिंह परस्ते ने बताया कि सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे और घायल को इलाज दिलवाया। प्राथमिक इलाज के बाद थोड़ा ठीक महसूस होने पर रघुवीर अपने किसी परिचित के घर चले गए। पुलिस ने अब कार ड्राइवर के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने का केस दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश शुरू कर दी है।
उद्धव ठाकरे की विदाई पर: फड़णवीस ने पुरानी दोस्ती को याद किया, शिंदे ने कटाक्ष किया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:24 मार्च 2026, 23:11 IST टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, ठाकरे ने 2022 में शिवसेना में विभाजन के बाद शिंदे के साथ भाजपा के गठबंधन का परोक्ष संदर्भ दिया। देवेन्द्र फड़णवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे। (पीटीआई फाइल फोटो) महाराष्ट्र विधान परिषद में मंगलवार को गर्मजोशी और राजनीतिक गहमागहमी का मिश्रण देखने को मिला जब शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और कई अन्य सदस्यों को उनके छह साल के कार्यकाल के अंत में विदाई दी गई। जहां मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने ठाकरे के साथ अपनी दीर्घकालिक मित्रता पर विचार किया, वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस अवसर का उपयोग अपने पूर्व गुरु पर सूक्ष्म कटाक्ष करने के लिए किया। फड़नवीस ने 2010 में ठाकरे के साथ अपने संबंधों को याद किया, जब भाजपा और अविभाजित शिवसेना सहयोगी थे। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद उनका व्यक्तिगत संबंध और गहरा हो गया और उन्होंने ठाकरे को ऐसे व्यक्ति के रूप में वर्णित किया, जिनका मूल स्वभाव टकराव के बजाय मापा और रिश्ते से प्रेरित था। फड़नवीस को अतीत याद आया फड़णवीस ने कहा, “हमने दोस्ती विकसित की। मैं यह नहीं कहूंगा कि यह अब नहीं है।” हालांकि उन्होंने 2019 में राजनीतिक विभाजन को स्वीकार किया जिसने उन्हें अलग-अलग रास्तों पर ला दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका (ठाकरे का) स्वभाव सामान्य राजनेताओं जैसा नहीं है। फड़णवीस ने कहा, “कई बार उन्हें (ठाकरे) भिड़ते, जोरदार हमला करते, जवाबी हमला करते देखा जाता है। लेकिन यह उनका मूल स्वभाव नहीं है। उनका मूल स्वभाव नपा-तुला है और संबंध बनाए रखना है।” फड़णवीस ने आगे कहा कि ठाकरे ने कभी परिणामों की चिंता नहीं की। टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, ठाकरे ने 2022 में शिवसेना में विभाजन के बाद शिंदे के साथ भाजपा के गठबंधन का परोक्ष संदर्भ दिया। उन्होंने सीधे तौर पर शिंदे का नाम लिए बिना कहा, ”अगर आप मुझे इतनी अच्छी तरह से जानते थे तो आपने किसी और का हाथ क्यों पकड़ा।” उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के कार्यों, विशेष रूप से कोविड-19 महामारी से निपटने के कार्यों को भी सूचीबद्ध किया और राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में विपक्ष के नेताओं की नियुक्ति का आह्वान किया। शिंदे की चुटकी विदाई प्रस्ताव पेश करने वाले शिंदे ने शुरुआत में सौहार्दपूर्ण लहजे में कहा कि राजनीति में कोई पूर्ण विराम नहीं होता है। हालाँकि, उपसभापति नीलम गोरे का जिक्र करते हुए, उन्होंने टिप्पणी की कि वह “चांदी के चम्मच के साथ पैदा नहीं हुई थीं”, जो कि ठाकरे के स्पष्ट विपरीत था, जिन्हें पार्टी का नेतृत्व अपने पिता बाल ठाकरे से विरासत में मिला था। शिंदे और नीलम गोरे दोनों ने बाल ठाकरे के नेतृत्व में काम किया है। अपने भाषण में, उद्धव ठाकरे ने स्वयंभू बाबा अशोक खरात के मामले का जिक्र किया, जिन्हें अनुष्ठान के बहाने एक महिला से बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने रहस्यमय तरीके से कहा, ”सांडों को स्वार्थी कारणों से मारा जा रहा है।” 2022 में ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार को गिराकर मुख्यमंत्री बनने के बाद शिंदे ने नासिक जिले में खरात द्वारा निर्मित एक मंदिर का दौरा किया था और खरात की हालिया गिरफ्तारी के बाद उनकी तस्वीरें वायरल हो गईं। सेना (यूबीटी) के नेताओं ने अतीत में आरोप लगाया है कि जब शिंदे और उनके गुट के विधायकों ने 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद असम का दौरा किया, तो गुवाहाटी के एक मंदिर में बैल की बलि दी गई। (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) पहले प्रकाशित: 24 मार्च 2026, 23:11 IST समाचार राजनीति उद्धव ठाकरे की विदाई पर: फड़नवीस ने पुरानी दोस्ती को याद किया, शिंदे ने कटाक्ष किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)महाराष्ट्र विधान परिषद विदाई(टी)उद्धव ठाकरे विदाई(टी)देवेंद्र फड़नवीस उद्धव ठाकरे संबंध(टी)शिवसेना यूबीटी एमएलसी का कार्यकाल समाप्त(टी)एकनाथ शिंदे भाजपा गठबंधन(टी)महाराष्ट्र विपक्षी नेता पद(टी)महाराष्ट्र परिषद बजट सत्र(टी)उद्धव ठाकरे कोरोनोवायरस कार्यकाल
चाय के साथ सभी खाते हैं नमकीन, पर गर्मी में ये आदत कर देगी बड़ा नुकसान! जानें क्या-क्या नहीं खाना चाहिए

Last Updated:March 24, 2026, 22:05 IST Summer Health Tips: मध्य प्रदेश के खरगोन सहित निमाड़ अंचल में तेज गर्मी के बावजूद चाय पीने वालों की संख्या कम नहीं होती. एमपी ही नहीं यूपी, बिहार, राजस्थान करीब-करीब हर जगह यही हाल है. लेकिन गर्मी में चाय के साथ कुछ चीजें खाना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट मानते हैं कि यह आदत बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है. जानें सब… चाय हमारी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा माना जाता है. कई लोगों को सुबह उठते से ही चाय पीने की आदत होती है तो कई लोग दिन में कई बार चाय पीना और साथ में कुछ खाना भी पसंद करते हैं. लेकिन, गर्मी में यह आदत आपकी सेहत को बिगाड़ सकती है. कुछ चीजें ऐसी है जिन्हें चाय के साथ नहीं खाने की सलाह दी जाती है. खरगोन के हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. संतोष मौर्य बताते हैं कि गर्मी में चाय के साथ नमकीन और तली चीजें न खाएं गर्मी के मौसम में चाय के साथ नमकीन, कचौरी, समोसा या ज्यादा तली हुई चीजें खाने से शरीर में गर्मी बढ़ती है. इससे पेट में जलन और गैस की समस्या बढ़ सकती है. लगातार ऐसा करने से Acidity और Indigestion की परेशानी बढ़ सकती है. कई लोग चाय पीने के बाद या साथ में दही या ठंडे पेय पदार्थ भी ले लेते हैं. डॉक्टर के अनुसार गर्म और ठंडी चीजें एक साथ लेने से पाचन तंत्र प्रभावित होता है. इससे पेट दर्द और उल्टी जैसी समस्या हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google गर्मी में फल खाना शरीर के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन चाय के साथ फल खाना सही नहीं है. इससे पाचन धीमा हो सकता है और पेट में भारीपन महसूस होता है. लंबे समय तक ऐसा करने से गैस और कब्ज की समस्या बढ़ सकती है. चाय के साथ भजिया या बेसन से बनी चीजें खाने की आदत कई लोगों में होती है. गर्मी के मौसम में यह आदत शरीर का तापमान बढ़ा सकती है. इससे त्वचा पर दाने या Skin Allergy की समस्या भी हो सकती है. हालांकि, डॉक्टरों का यह भी मानना है कि, गर्मी में खाली पेट चाय पीना सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. इससे पेट में जलन और सिर दर्द की शिकायत हो सकती है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि चाय पीने से पहले हल्का नाश्ता जरूर करें. हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार गर्मी में कम मात्रा में चाय पीना बेहतर होता है. चाय के साथ हल्का और सुपाच्य नाश्ता लें. साथ ही दिनभर पर्याप्त पानी पीना जरूरी है ताकि शरीर का तापमान संतुलित बना रहे. First Published : March 24, 2026, 22:05 IST
MP के कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर भीड़:गाड़ियों की टंकियां फुल कराने पहुंचे लोग, झाबुआ में पुलिस तैनात, आगर में धक्का-मुक्की

मध्यप्रदेश के नीमच, झाबुआ, आगर मालवा और शाजापुर समेत कई शहरों में मंगलवार शाम पेट्रोल पंपों पर अचानक भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पेट्रोल खत्म होने और कीमतें बढ़ने की अफवाह फैलते ही लोग टंकियां फुल कराने के लिए पंपों पर पहुंचने लगे। हालात ऐसे बने कि कई जगह लंबी कतारें लग गईं। आगर मालवा में धक्का-मुक्की की स्थिति बनी, वहीं बड़ी संख्या में लोग बोतल और कुप्पियों में पेट्रोल स्टॉक करने भी पहुंचे। अफवाह से बढ़ा दबाव, कई जगह स्टॉक खत्म पंप संचालकों के मुताबिक, सप्लाई सामान्य होने के बावजूद अचानक बढ़ी मांग के कारण कई जगह शाम तक पेट्रोल खत्म होने जैसी स्थिति बन गई। हालात संभालने के लिए कुछ पंपों ने राशनिंग शुरू कर दी, जहां एक वाहन को सीमित मात्रा में पेट्रोल दिया जा रहा है। झाबुआ के पुलिस वेलफेयर पंप सहित कई स्थानों पर भीड़ नियंत्रित करने के लिए पुलिस तैनात करनी पड़ी। शाजापुर में भी रात होते-होते पंपों पर लंबी लाइनें लग गईं और लोगों को इंतजार करना आगर मालवा में एक पंप पर तकनीकी फॉल्ट के कारण सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे भीड़ और बढ़ गई। प्रशासन ने सभी जिलों में पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता होने की बात कही है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। देखिए तस्वीरें खबर के मिनट टु मिनट अपडेट के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए।
कांतारा विवाद में रणवीर सिंह मांगेंगे बिना शर्त माफी:स्टेज पर दैवा सीन की मिमिक्री की थी, 10 अप्रैल को कर्नाटक हाईकोर्ट में देंगे हलफनामा

फिल्म ‘कांतारा’ के दैवा सीन की मिमिक्री करने के मामले में रणवीर 10 अप्रैल को कर्नाटक हाईकोर्ट में बिना शर्त माफी का हलफनामा दाखिल करेंगे। एक्टर की ओर से यह कदम कन्नड़ समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में दर्ज FIR के बाद उठाया गया है। अदालत में सुनवाई के दौरान रणवीर सिंह के वकील ने स्वेच्छा से एक प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि एक्टर खुद मैसूर के चामुंडी मंदिर जाकर व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने के लिए तैयार हैं। इससे पहले फरवरी में हाईकोर्ट ने रणवीर को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था। विवाद पिछले साल नवंबर में गोवा में हुए फिल्म फेस्टिवल (IFFI) के दौरान शुरू हुआ था। जहां रणवीर ने ऋषभ शेट्टी के आइकॉनिक दैवा सीन की नकल की थी। यह इसके बाद कन्नड़ समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। इंस्टाग्राम वाली माफी सिर्फ दिखावा हालांकि, शिकायतकर्ता और एडवोकेट प्रशांत मेथल ने रणवीर की माफी को ‘दिखावा’ बताया है। उन्होंने दलील दी कि एक्टर ने अब तक केवल इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिखकर माफी मांगी थी, जो दिल से निकली हुई नहीं लगती। मेथल का कहना है कि इंस्टाग्राम पर माफी मांगना और कोर्ट में आकर या व्यक्तिगत रूप से बोलना अलग बात है। मिमिक्री के बाद शुरू हुआ था रणवीर सिंह 28 नवंबर 2025 को गोवा में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया का हिस्सा बने थे। इस दौरान मंच पर उन्होंने फिल्म कांतारा में दिखाई गईं चावुंडी (चामुंडा) देवी का मजाक बनाया था। रणवीर सिंह ने फिल्म के डायरेक्टर और एक्टर ऋषभ शेट्टी से कहा, ‘ऋषभ मैंने इसे (कांतारा) थिएटर में देखा था। वो एक आउटस्टैंडिंग परफॉर्मेंस थी, खासकर जब फीमेल घोस्ट (भूत) आपके शरीर में आती है। वो परफॉर्मेंस, वो एक शॉट आउटस्टैंडिंग था।’ आगे रणवीर सिंह ने कहा, ‘क्या आपने कांतारा देखी है। जब वो शॉट आता है’। आगे रणवीर सिंह ने खुद उस कैरेक्टर की मिमिक्री करते हुए मजाक उड़ाया। आगे रणवीर ने कहा, ‘क्या यहां कोई है, जो मुझे कांतारा 3 में देखना चाहता है, वो इस आदमी से कहे।’ फिल्म फेस्टिवल से रणवीर सिंह का एक और वीडियो सामने आया था, जिसमें वो मंच से उतरने के बाद भी ऋषभ शेट्टी के सामने चावुंडी देवी की मिमिक्री करते दिखाई दिए, हालांकि ऋषभ शेट्टी लगातार इशारा कर उन्हें रोकते नजर आए थे। वहीं, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद एक्टर की जमकर आलोचना भी हुई थी। रणवीर ने मामले को लेकर माफी मांगी थी रणवीर सिंह ने मामले को लेकर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी थी। रणवीर ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा था- मेरा इरादा फिल्म (कांतारा) में ऋषभ की शानदार परफॉर्मेंस को उजागर करने का था। एक अभिनेता होने के नाते, मैं जानता हूं कि उस खास सीन को जिस तरह से उन्होंने निभाया, उसके लिए कितनी मेहनत लगती है और इसके लिए मैं उनका अत्यधिक सम्मान करता हू। मैंने हमेशा हमारे देश की हर संस्कृति, परंपरा और आस्था का गहरा सम्मान किया है। अगर मेरी किसी बात से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं दिल से माफी चाहता हूं।
सांसद राघव चड्डा संसद में किया दावा, आपके जूस में है बीमारी फैलाने वाले रसायन, डॉक्टर से जानें पूरा सच

Last Updated:March 24, 2026, 18:41 IST Raghav Chadha on Fruit Juice: सांसद राघव चड्डा ने संसद में दावा किया है कि बाजार में जो पैकेटबंद जूस मिलते हैं उसमें बीमारियों को फैलाने वाली चीजें मिली रहती है. कंपनियां डिब्बे पर सही जानकारी नहीं देती जिसके कारण युवाओं को कई तरह की बीमारियों का शिकार होना पड़ता है. ऐसे में सवाल उठता है कि फ्रूट जूस में ऐसा क्या होता है जो बीमारियों का घर बन जाता है. इसलिए हमने यही सवाल डॉ. प्रभात रंजन सिन्हा से किया. उन्होंने इसकी पूरी सच्चाई बताई. संसद में सवाल पूछते हुए राघव चड्डा. Photo-Ragahv Chadha X Raghav Chadha on Fruit Juice: आप जो जूस पीते हैं क्या वह शुद्ध जूस होता है? अगर आप खुद जूस के डिब्बे को देखेंगे तो शायद ही लगेगा कि यह जूस इतना खराब हो सकता है लेकिन आम आदमी पार्ट के राज्यसभा सांसद राघव चड्डा ने इसके लिए तीखा सवाल किया है. उन्होंने संसद में कहा है कि बाजार में जो पैकेटबंद जूस हम पीते है उसकी पैकेजिंग से हमें लगता है कि यह बहुत ही ताजा और शुद्ध होगा लेकिन जमीनी हकीकत बेहद खराब है. वास्तव में इस जूस में चीनी का घोल मिला रहता है जो युवाओं को डायबिटीज, मोटापा और लाइफस्टाइल की कई बीमारियों को जन्म दे रहा होता है. डॉ. राघव चड्डा ने जो सवाल उठाए हैं वे कई मायने में सही है. आकाश हेल्थकेयर, नई दिल्ली में इंटरनल मेडिसीन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. प्रभात रंजन सिन्हा से हमने इससे होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से बातचीत की है. आइए जानते हैं. राघव चड्डा ने क्या कहा पहले ये जानते हैं कि राघव चड्डा ने संसद में क्या है. राघव चड्डा ने सरकार से सवाल का जवाब मांगते हुआ कहा कि भारत का कंज्यूमर ब्रांड एक बड़ी बीमारी का शिकार है जिसे मिसलीडिंग ब्रांड और फॉल्स एडवरटाइजमेंट के नाम से जाना जाता है. जब हम फ्रूट जूस खरीदते हैं तो डिब्बे पर एकदम बढ़िया फ्रेश फ्रूट जूस की तस्वीर लगी रहती है. यह बहुत ही लुभावनी लगती है. इससे लगता है कि जूस बहुत ताजा है लेकिन डिब्बे के पीछे बहुत छोटे-छोटे अक्षरों लिखा रहता है कि यह पिक्चर सिर्फ मार्केटिंग उद्येश्य के लिए है. इसे पढ़कर हमारे देश के युवा यह सोचकर इसे पीते हैं कि उन्हें लगता है कि यह हेल्दी और स्वादिष्ट है लेकिन उन्हें पता नहीं कि वे चीनी का घोल पी रहे हैं जिनके चलते डायबिटीज, मोटापा और लाइफस्टाइल डिजीज होती है. मेरी सरकार से यह सवाल है कि क्या सरकार इस तरह के भ्रामक प्रचार पर पाबंदी लगाने के बारे में सोच रही है. You think you’re drinking Fruit Juice? THINK AGAIN.Big food brands are selling sugar water with shiny ‘fresh fruit’ pictures on the front. And hiding the truth in tiny fine print at the back of packet which reads ‘Pictures for marketing purposes only’. SERIOUSLY? Today in… pic.twitter.com/ROu2YGH3G2 — Raghav Chadha (@raghav_chadha) March 24, 2026
गुजरात विधानसभा में UCC बिल पेश:सभी पर समान नियम लागू होंगे, गृह मंत्री संघवी बोले- राज्य के लिए स्वर्णिम दिन

गुजरात विधानसभा में मंगलवार को यूसीसी विधेयक पेश किया गया। इस विधेयक में वसीयत न होने की स्थिति में माता-पिता, बच्चों और पति/पत्नी को संपत्ति में बराबर हिस्सा देने का प्रावधान है। आज का दिन स्वर्णिम रहेगा: हर्ष संघवी गुजरात के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि आज का दिन गुजरात के लिए ऐतिहासिक है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया, जो राज्य के लिए स्वर्णिम दिन है। देश को आजादी मिलने के बाद भी समाज और धर्म के आधार पर व्यक्तिगत कानून अलग-अलग रहे, जिसके कारण बहनों और बेटियों को सबसे ज्यादा कष्ट सहना पड़ा। सभी पर समान नियम लागू होंगे: हर्ष संघवी अब विवाह, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों में सभी पर समान नियम लागू होंगे। उन्होंने आगे कहा कि महिलाएं वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रही थीं और आज वे मुख्यमंत्री को बधाई दे रही हैं। यूसीसी एक ऐसा कानून है, जो किसी एक धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए समान न्याय प्रदान करता है। विवाह पंजीकरण न कराने वालों पर 10-25 हजार रुपए का जुर्माना यूसीसी के मसौदे में व्यक्तिगत कानूनों को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। नई प्रणाली के तहत, राज्य में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य होगा। हालांकि, पंजीकरण न कराने पर भी विवाह को अमान्य नहीं माना जाएगा, लेकिन पंजीकरण न कराने वालों को 10-25 हजार रुपए का जुर्माना भरना पड़ सकता है। यूसीसी के लागू होने से पहले हुए विवाहों के लिए एक विशिष्ट पंजीकरण प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। सामान्य कानून के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु वसीयत न करने के कारण हो जाती है, तो संपत्ति माता-पिता (एक हिस्सा), पति/पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित की जाएगी। यदि उत्तराधिकार में कोई वसीयत नहीं है, तो माता-पिता, बच्चे और पति/पत्नी सभी को संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलेगा। उत्तराखंड और गुजरात की समान नागरिक संहिता में कई समानताएं हैं… समान संपत्ति अधिकार उत्तराखंड: संपत्ति में पुत्र और पुत्री दोनों को समान अधिकार प्राप्त होंगे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे किस वर्ग से संबंधित हैं। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर, समान नागरिक संहिता के तहत उसकी संपत्ति को पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, मृतक के माता-पिता को भी संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त होंगे। पूर्व कानून में यह अधिकार केवल मृतक की माता को ही प्राप्त था। गुजरात: वसीयत न करने की स्थिति में, संपत्ति माता-पिता (एक हिस्सा), पति/पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित की जाएगी। लिव-इन रिलेशनशिप उत्तराखंड: पंजीकरण अनिवार्य है। उत्तराखंड में रहने वाले लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले दंपत्तियों को पंजीकरण कराना होगा। हालांकि यह स्व-घोषणा के समान होगा, अनुसूचित जनजातियों के लोगों को इस नियम से छूट दी जाएगी। बच्चे की जिम्मेदारी: यदि बच्चा लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुआ है, तो उसकी जिम्मेदारी लिव-इन कपल की होगी। दोनों को बच्चे को अपना नाम देना होगा। इससे राज्य में प्रत्येक बच्चे को पहचान मिलेगी। गुजरात: लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक है। यदि आयु 21 वर्ष से कम है, तो अभिभावक को सूचित करना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन घोषणा के 30 दिनों के भीतर करवाना होगा और रजिस्ट्रार द्वारा रजिस्ट्रेशन करके प्रमाण पत्र जारी करना होगा, अन्यथा रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति बिना रजिस्ट्रेशन के 1 महीने से अधिक समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसे 3 महीने की कैद या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बच्चे की जिम्मेदारी: लिव-इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चे वैध माने जाएंगे। यदि महिला को छोड़ दिया जाता है, तो वह भरण-पोषण की हकदार है। तलाक उत्तराखंड: तलाक केवल आपसी सहमति के आधार पर ही दिया जाएगा। पति-पत्नी को तलाक तभी दिया जाएगा जब दोनों के पास एक समान कारण और तर्क हों। यदि केवल एक पक्ष कारण बताता है, तो तलाक नहीं दिया जाएगा। गुजरात: प्रथागत या व्यक्तिगत कानून के तहत तलाक मान्य नहीं होगा। क्रूरता, धर्म परिवर्तन, असाध्य मानसिक बीमारी या सात साल तक लापता रहने जैसे आधारों पर तलाक मांगा जा सकता है। यदि पति-पत्नी एक वर्ष या उससे अधिक समय से अलग रह रहे हैं, तो वे आपसी सहमति से भी तलाक ले सकते हैं। अदालत द्वारा तलाक का आदेश जारी होने के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार के पास तलाक के आदेश को पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। समान नागरिक संहिता का मुद्दा सर्वप्रथम कब उठा? सन् 1835 में, ब्रिटिश सरकार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें आपराधिक साक्ष्य और अनुबंधों के संबंध में देश भर में एक समान कानून बनाने का आह्वान किया गया था। इसे सन् 1840 में लागू भी किया गया, लेकिन धर्म के आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को अलग रखा गया। यहीं से समान नागरिक संहिता की मांग शुरू हुई। 1941 में बीएन राव समिति का गठन किया गया था, जिसने हिंदुओं के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने की बात कही थी। आजादी के बाद, हिंदू संहिता विधेयक पहली बार 1948 में संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य हिंदू महिलाओं को बाल विवाह, सती प्रथा और बुर्का जैसी गलत प्रथाओं से मुक्त करना था। ———————– गुजरात से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… गुजरात में गैस की किल्लत, प्रवासी मजदूर गांव लौट रहे:लोग बोले- सिलेंडर ₹5 हजार में मिल रहा, फ्लैट में चूल्हा नहीं जला सकते देश में एलपीजी गैस कि कमी से चलते गुजरात से अब प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है। सूरत के रेलवे स्टेशनों पर बिहार और यूपी लौटने वाले लोगों की लाइनें लगी हैं। रसोई गैस की कमी के चलते राज्य में रेस्टोरेंट-ढाबा और दूसरे खाने-पीने के स्टॉल चलाने वालों का रोजगार ठप होने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…
गुजरात विधानसभा में UCC बिल पेश:सभी पर समान नियम लागू होंगे, गृह मंत्री संघवी बोले- राज्य के लिए स्वर्णिम दिन

गुजरात विधानसभा में मंगलवार को यूसीसी विधेयक पेश किया गया। इस विधेयक में वसीयत न होने की स्थिति में माता-पिता, बच्चों और पति/पत्नी को संपत्ति में बराबर हिस्सा देने का प्रावधान है। आज का दिन स्वर्णिम रहेगा: हर्ष संघवी गुजरात के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि आज का दिन गुजरात के लिए ऐतिहासिक है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया, जो राज्य के लिए स्वर्णिम दिन है। देश को आजादी मिलने के बाद भी समाज और धर्म के आधार पर व्यक्तिगत कानून अलग-अलग रहे, जिसके कारण बहनों और बेटियों को सबसे ज्यादा कष्ट सहना पड़ा। सभी पर समान नियम लागू होंगे: हर्ष संघवी अब विवाह, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों में सभी पर समान नियम लागू होंगे। उन्होंने आगे कहा कि महिलाएं वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रही थीं और आज वे मुख्यमंत्री को बधाई दे रही हैं। यूसीसी एक ऐसा कानून है, जो किसी एक धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए समान न्याय प्रदान करता है। विवाह पंजीकरण न कराने वालों पर 10-25 हजार रुपए का जुर्माना यूसीसी के मसौदे में व्यक्तिगत कानूनों को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। नई प्रणाली के तहत, राज्य में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य होगा। हालांकि, पंजीकरण न कराने पर भी विवाह को अमान्य नहीं माना जाएगा, लेकिन पंजीकरण न कराने वालों को 10-25 हजार रुपए का जुर्माना भरना पड़ सकता है। यूसीसी के लागू होने से पहले हुए विवाहों के लिए एक विशिष्ट पंजीकरण प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। सामान्य कानून के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु वसीयत न करने के कारण हो जाती है, तो संपत्ति माता-पिता (एक हिस्सा), पति/पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित की जाएगी। यदि उत्तराधिकार में कोई वसीयत नहीं है, तो माता-पिता, बच्चे और पति/पत्नी सभी को संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलेगा। उत्तराखंड और गुजरात की समान नागरिक संहिता में कई समानताएं हैं… समान संपत्ति अधिकार उत्तराखंड: संपत्ति में पुत्र और पुत्री दोनों को समान अधिकार प्राप्त होंगे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे किस वर्ग से संबंधित हैं। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर, समान नागरिक संहिता के तहत उसकी संपत्ति को पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, मृतक के माता-पिता को भी संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त होंगे। पूर्व कानून में यह अधिकार केवल मृतक की माता को ही प्राप्त था। गुजरात: वसीयत न करने की स्थिति में, संपत्ति माता-पिता (एक हिस्सा), पति/पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित की जाएगी। लिव-इन रिलेशनशिप उत्तराखंड: पंजीकरण अनिवार्य है। उत्तराखंड में रहने वाले लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले दंपत्तियों को पंजीकरण कराना होगा। हालांकि यह स्व-घोषणा के समान होगा, अनुसूचित जनजातियों के लोगों को इस नियम से छूट दी जाएगी। बच्चे की जिम्मेदारी: यदि बच्चा लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुआ है, तो उसकी जिम्मेदारी लिव-इन कपल की होगी। दोनों को बच्चे को अपना नाम देना होगा। इससे राज्य में प्रत्येक बच्चे को पहचान मिलेगी। गुजरात: लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक है। यदि आयु 21 वर्ष से कम है, तो अभिभावक को सूचित करना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन घोषणा के 30 दिनों के भीतर करवाना होगा और रजिस्ट्रार द्वारा रजिस्ट्रेशन करके प्रमाण पत्र जारी करना होगा, अन्यथा रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति बिना रजिस्ट्रेशन के 1 महीने से अधिक समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसे 3 महीने की कैद या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बच्चे की जिम्मेदारी: लिव-इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चे वैध माने जाएंगे। यदि महिला को छोड़ दिया जाता है, तो वह भरण-पोषण की हकदार है। तलाक उत्तराखंड: तलाक केवल आपसी सहमति के आधार पर ही दिया जाएगा। पति-पत्नी को तलाक तभी दिया जाएगा जब दोनों के पास एक समान कारण और तर्क हों। यदि केवल एक पक्ष कारण बताता है, तो तलाक नहीं दिया जाएगा। गुजरात: प्रथागत या व्यक्तिगत कानून के तहत तलाक मान्य नहीं होगा। क्रूरता, धर्म परिवर्तन, असाध्य मानसिक बीमारी या सात साल तक लापता रहने जैसे आधारों पर तलाक मांगा जा सकता है। यदि पति-पत्नी एक वर्ष या उससे अधिक समय से अलग रह रहे हैं, तो वे आपसी सहमति से भी तलाक ले सकते हैं। अदालत द्वारा तलाक का आदेश जारी होने के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार के पास तलाक के आदेश को पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। समान नागरिक संहिता का मुद्दा सर्वप्रथम कब उठा? सन् 1835 में, ब्रिटिश सरकार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें आपराधिक साक्ष्य और अनुबंधों के संबंध में देश भर में एक समान कानून बनाने का आह्वान किया गया था। इसे सन् 1840 में लागू भी किया गया, लेकिन धर्म के आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को अलग रखा गया। यहीं से समान नागरिक संहिता की मांग शुरू हुई। 1941 में बीएन राव समिति का गठन किया गया था, जिसने हिंदुओं के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने की बात कही थी। आजादी के बाद, हिंदू संहिता विधेयक पहली बार 1948 में संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य हिंदू महिलाओं को बाल विवाह, सती प्रथा और बुर्का जैसी गलत प्रथाओं से मुक्त करना था। ———————– गुजरात से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… गुजरात में गैस की किल्लत, प्रवासी मजदूर गांव लौट रहे:लोग बोले- सिलेंडर ₹5 हजार में मिल रहा, फ्लैट में चूल्हा नहीं जला सकते देश में एलपीजी गैस कि कमी से चलते गुजरात से अब प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है। सूरत के रेलवे स्टेशनों पर बिहार और यूपी लौटने वाले लोगों की लाइनें लगी हैं। रसोई गैस की कमी के चलते राज्य में रेस्टोरेंट-ढाबा और दूसरे खाने-पीने के स्टॉल चलाने वालों का रोजगार ठप होने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…








