Tuesday, 15 Sep 2026 | 05:19 PM

Trending :

EXCLUSIVE

कृतिका कामरा-गौरव कपूर ने घर पर रजिस्टर्ड मैरिज की:लाल चंदेरी साड़ी में दिखीं एक्ट्रेस; सहवाग-युवराज समेत कई स्टार्स पहुंचे

कृतिका कामरा-गौरव कपूर ने घर पर रजिस्टर्ड मैरिज की:लाल चंदेरी साड़ी में दिखीं एक्ट्रेस; सहवाग-युवराज समेत कई स्टार्स पहुंचे

एक्ट्रेस कृतिका कामरा और मशहूर होस्ट गौरव कपूर शादी के बंधन में बंध गए हैं। 11 मार्च की शाम मुंबई के बांद्रा स्थित अपने घर पर दोनों ने एक निजी समारोह में रजिस्टर्ड मैरिज की। कृतिका और गौरव ने किसी बड़े ताम-झाम और पारंपरिक शादी की बजाय घर पर ही शादी करने का फैसला किया। समारोह में केवल परिवार के सदस्य और कुछ करीबी दोस्त ही शामिल हुए। मां की गिफ्ट की हुई लाल चंदेरी साड़ी पहनी शादी के मौके पर कृतिका कामरा लाल रंग की चंदेरी साड़ी में बेहद खूबसूरत नजर आईं। खास बात यह है कि यह साड़ी उन्हें उनकी मां ने गिफ्ट की थी। इसे कृतिका के अपने ब्रांड ‘सिन्नाबार’ ने तैयार किया है, जो पारंपरिक चंदेरी कला को बचाने और महिला कारीगरों को बढ़ावा देने का काम करता है। वहीं, गौरव कपूर ने डिजाइनर राघवेंद्र राठौड़ का आइवरी और गोल्ड रंग का ट्रेडिशनल आउटफिट पहना, जो शाम के माहौल से मेल खा रहा था। क्रिकेट और बॉलीवुड शामिल हुए शादी के बाद घर की छत (टेरेस) पर एक आफ्टर-पार्टी रखी गई। इसमें क्रिकेट जगत से वीरेंद्र सहवाग, जहीर खान और युवराज सिंह पहुंचे। वहीं बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री से नेहा धूपिया, अंगद बेदी, सोहा अली खान, मलाइका अरोड़ा और पूजा गौर जैसे सितारे शामिल हुए। अपनों के बीच नया चैप्टर शुरू करना खुशी की बात अपनी शादी को लेकर गौरव और कृतिका ने कहा, ‘हम हमेशा से मानते रहे हैं कि जिंदगी के सबसे खास पल वही होते हैं, जो आप अपने प्रिय लोगों के साथ साझा करते हैं। हमें बहुत खुशी है कि हम अपनी जिंदगी का यह नया अध्याय मुंबई में अपने घर पर, अपने परिवार और सबसे करीबी दोस्तों के बीच शुरू कर पा रहे हैं।’

ऑफ कटर से गच्चा खा रहे मॉडर्न बैटर:वर्ल्ड कप के 357 विकेट पेसर्स को, इसमें 68 ऑफ कटर पर गिरे, बुमराह इसके उस्ताद

ऑफ कटर से गच्चा खा रहे मॉडर्न बैटर:वर्ल्ड कप के 357 विकेट पेसर्स को, इसमें 68 ऑफ कटर पर गिरे, बुमराह इसके उस्ताद

टी-20 क्रिकेट को हमेशा से बल्लेबाजों का गेम माना जाता है, लेकिन टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में तेज गेंदबाजों ने ‘स्लोअर गेंदों’ (पेस-ऑफ) के जरिए जोरदार वापसी की। इस पूरे टूर्नामेंट में तेज गेंदबाजों द्वारा फेंकी गई कुल गेंदों में स्लोअर का प्रतिशत 15.88% रहा, यानी लगभग हर छठी गेंद गति कम करके फेंकी गई। यह पिछले चार संस्करणों में सबसे ज्यादा है। आधुनिक क्रिकेट में तेज गेंदबाजों के पास लेग-कटर, नकल-बॉल और स्प्लिट-फिंगर जैसी कई नई और जटिल स्लोअर गेंदें मौजूद हैं। लेकिन, इन तमाम वेरिएशंस के बीच गेंदबाजों का सबसे मारक हथियार बनी एक पुरानी और बेसिक गेंद-‘ऑफ-कटर’। विकेट निकालने के लिए गेंदबाजों ने स्लोअर गेंदों की वैरायटी में से इसी साधारण गेंद पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया। फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ जसप्रीत बुमराह ने इसी स्विंग होती ऑफ-कटर का इस्तेमाल करके 4 कीवी बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा और भारत को शानदार जीत दिलाई। बुमराह ने फाइनल में अपने 4 ओवर के स्पैल में 18 गेंदें ऑफ कटर फेंकी बुमराह ने इस वैरिएशन का सबसे ज्यादा फायदा उठाया। फाइनल में फेंकी गई अपनी 24 गेंदों में से 18 गेंदें उन्होंने ऑफ-कटर ही रखीं। फाइनल में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बनने के बाद बुमराह ने कहा था, ‘अपने अनुभव और यहां के पाटा विकेटों पर खेलने की वजह से मैंने सीखा है कि ज्यादा तेज गेंद फेंकने से बल्लेबाजों को शॉट खेलने में आसानी होती है। इसलिए मैंने स्मार्ट तरीके से खेला और यह सोचने की कोशिश की कि बल्लेबाज क्या करने की कोशिश कर रहे हैं।’ गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी स्टेडियम बुमराह का होमग्राउंड है। अहमदाबाद में सबसे खतरनाक रहा यह वैरिएशन क्योंकि मैदान बड़ा क्या होती है ऑफ कटर? क्रिकेट में ‘ऑफ-कटर’ तेज गेंदबाजों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले स्लोअर वेरिएशन का एक प्रकार है। यह एक तेज गेंदबाज द्वारा फेंकी गई ऑफ-स्पिन गेंद होती है। जब कोई तेज गेंदबाज इसे फेंकता है, तो वह अपने सामान्य रन-अप और एक्शन के साथ ही आता है, लेकिन गेंद को रिलीज करते समय अपनी उंगलियों को सीम पर दाईं ओर (घड़ी की सुई की दिशा में) तेजी से फेरता है। इसे ही तकनीकी भाषा में गेंद को ‘कट’ करना कहते हैं। अंगुलियों के इस खास एक्शन की वजह से गेंद की गति अपने आप काफी कम हो जाती है। पिच पर टप्पा खाने के बाद यह गेंद दाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए बाहर (ऑफ स्टंप) से अंदर (लेग स्टंप या शरीर) की तरफ आती है। चूंकि बल्लेबाज रन-अप को देखकर एक तेज गेंद की उम्मीद कर रहा होता है, इसलिए गति में अचानक आए इस बदलाव से उसकी टाइमिंग पूरी तरह बिगड़ जाती है। गेंद पिच पर थोड़ी रुक कर आती है, जिससे बल्लेबाज अक्सर अपना शॉट जल्दी खेल बैठता है। इसका नतीजा यह होता है कि गेंद हवा में खड़ी हो जाती है या बल्लेबाज सीधे बोल्ड और एलबीडब्ल्यू हो जाता है। टी-20 क्रिकेट में यह गेंद सबसे बड़े हथियारों में से एक है। विशेष रूप से जब पिच सूखी या ग्रिपी हो, तो यह गेंद टप्पा खाकर पिच को ज्यादा पकड़ती है और बल्लेबाजों के लिए इसे पढ़ना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में तेज गेंदबाज रन रोकने और अहम मौकों पर विकेट निकालने के लिए इसी ‘ऑफ-कटर’ पर सबसे ज्यादा भरोसा जताते हैं। जसप्रीत बुमराह, ड्वेन ब्रावो, मुस्तफिजुर रहमान और हर्षल पटेल जैसे गेंदबाज इस कला में दुनिया के सबसे बेहतरीन गेंदबाज माने जाते हैं।

ऑफ कटर से गच्चा खा रहे मॉडर्न बैटर:वर्ल्ड कप के 357 विकेट पेसर्स को, इसमें 68 ऑफ कटर पर गिरे, बुमराह इसके उस्ताद

ऑफ कटर से गच्चा खा रहे मॉडर्न बैटर:वर्ल्ड कप के 357 विकेट पेसर्स को, इसमें 68 ऑफ कटर पर गिरे, बुमराह इसके उस्ताद

टी-20 क्रिकेट को हमेशा से बल्लेबाजों का गेम माना जाता है, लेकिन टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में तेज गेंदबाजों ने ‘स्लोअर गेंदों’ (पेस-ऑफ) के जरिए जोरदार वापसी की। इस पूरे टूर्नामेंट में तेज गेंदबाजों द्वारा फेंकी गई कुल गेंदों में स्लोअर का प्रतिशत 15.88% रहा, यानी लगभग हर छठी गेंद गति कम करके फेंकी गई। यह पिछले चार संस्करणों में सबसे ज्यादा है। आधुनिक क्रिकेट में तेज गेंदबाजों के पास लेग-कटर, नकल-बॉल और स्प्लिट-फिंगर जैसी कई नई और जटिल स्लोअर गेंदें मौजूद हैं। लेकिन, इन तमाम वेरिएशंस के बीच गेंदबाजों का सबसे मारक हथियार बनी एक पुरानी और बेसिक गेंद-‘ऑफ-कटर’। विकेट निकालने के लिए गेंदबाजों ने स्लोअर गेंदों की वैरायटी में से इसी साधारण गेंद पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया। फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ जसप्रीत बुमराह ने इसी स्विंग होती ऑफ-कटर का इस्तेमाल करके 4 कीवी बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा और भारत को शानदार जीत दिलाई। बुमराह ने फाइनल में अपने 4 ओवर के स्पैल में 18 गेंदें ऑफ कटर फेंकी बुमराह ने इस वैरिएशन का सबसे ज्यादा फायदा उठाया। फाइनल में फेंकी गई अपनी 24 गेंदों में से 18 गेंदें उन्होंने ऑफ-कटर ही रखीं। फाइनल में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बनने के बाद बुमराह ने कहा था, ‘अपने अनुभव और यहां के पाटा विकेटों पर खेलने की वजह से मैंने सीखा है कि ज्यादा तेज गेंद फेंकने से बल्लेबाजों को शॉट खेलने में आसानी होती है। इसलिए मैंने स्मार्ट तरीके से खेला और यह सोचने की कोशिश की कि बल्लेबाज क्या करने की कोशिश कर रहे हैं।’ गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी स्टेडियम बुमराह का होमग्राउंड है। अहमदाबाद में सबसे खतरनाक रहा यह वैरिएशन क्योंकि मैदान बड़ा क्या होती है ऑफ कटर? क्रिकेट में ‘ऑफ-कटर’ तेज गेंदबाजों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले स्लोअर वेरिएशन का एक प्रकार है। यह एक तेज गेंदबाज द्वारा फेंकी गई ऑफ-स्पिन गेंद होती है। जब कोई तेज गेंदबाज इसे फेंकता है, तो वह अपने सामान्य रन-अप और एक्शन के साथ ही आता है, लेकिन गेंद को रिलीज करते समय अपनी उंगलियों को सीम पर दाईं ओर (घड़ी की सुई की दिशा में) तेजी से फेरता है। इसे ही तकनीकी भाषा में गेंद को ‘कट’ करना कहते हैं। अंगुलियों के इस खास एक्शन की वजह से गेंद की गति अपने आप काफी कम हो जाती है। पिच पर टप्पा खाने के बाद यह गेंद दाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए बाहर (ऑफ स्टंप) से अंदर (लेग स्टंप या शरीर) की तरफ आती है। चूंकि बल्लेबाज रन-अप को देखकर एक तेज गेंद की उम्मीद कर रहा होता है, इसलिए गति में अचानक आए इस बदलाव से उसकी टाइमिंग पूरी तरह बिगड़ जाती है। गेंद पिच पर थोड़ी रुक कर आती है, जिससे बल्लेबाज अक्सर अपना शॉट जल्दी खेल बैठता है। इसका नतीजा यह होता है कि गेंद हवा में खड़ी हो जाती है या बल्लेबाज सीधे बोल्ड और एलबीडब्ल्यू हो जाता है। टी-20 क्रिकेट में यह गेंद सबसे बड़े हथियारों में से एक है। विशेष रूप से जब पिच सूखी या ग्रिपी हो, तो यह गेंद टप्पा खाकर पिच को ज्यादा पकड़ती है और बल्लेबाजों के लिए इसे पढ़ना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में तेज गेंदबाज रन रोकने और अहम मौकों पर विकेट निकालने के लिए इसी ‘ऑफ-कटर’ पर सबसे ज्यादा भरोसा जताते हैं। जसप्रीत बुमराह, ड्वेन ब्रावो, मुस्तफिजुर रहमान और हर्षल पटेल जैसे गेंदबाज इस कला में दुनिया के सबसे बेहतरीन गेंदबाज माने जाते हैं।

हिमाचल के ऊंचे पहाड़ों पर ताजा बर्फबारी:अगले 6 दिन बरसेंगे बादल, आज 5 जिलों में आंधी-तूफान की चेतावनी, गर्मी से मिलेगी राहत

हिमाचल के ऊंचे पहाड़ों पर ताजा बर्फबारी:अगले 6 दिन बरसेंगे बादल, आज 5 जिलों में आंधी-तूफान की चेतावनी, गर्मी से मिलेगी राहत

हिमाचल प्रदेश के ट्राइबल जिला लाहौल स्पीति की ऊंची चोटियों पर आज ताजा हिमपात हो रहा है। अटल टनल रोहतांग समेत शिंकुला दर्रा, रोहतांग पास, कोकसर और लाहौल घाटी में बर्फ के फाहे गिरे। इससे ऊंचे क्षेत्रों के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग (IMD) ने ताजा बुलेटिन में दोपहर 12 बजे तक चंबा व लाहौल स्पीति में बर्फबारी और कांगड़ा व कुल्लू में बारिश का पूर्वानुमान लगाया है। शिमला समेत प्रदेश के ज्यादातर भागों में भी आज सुबह से ही मौसम खराब बना हुआ। IMD की माने तो राज्य में अगले छह दिन तक बारिश और बर्फबारी के आसार है। आज भी पांच जिले चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला में आंधी व तूफान का यलो अलर्ट जारी कर रखा है। इन जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तूफान चल सकता है। 6 दिन ऊंचे पहाड़ों पर बर्फबारी, निचले इलाकों में बारिश IMD के अनुसार, अगले छह दिन के दौरान अधिक ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले और मध्यम ऊंचाई वाले भागों में हल्की बारिश के आसार है। बुधवाार की रात को भी लाहौल स्पीति की अधिक ऊंची चोटियों पर हल्का हिमपात दर्ज किया गया। कल जरूर वेस्टर्न डिस्टरबेंस थोड़ा कमजोर पड़ेगा। मगर 14 मार्च को यह फिर से स्ट्रॉन्ग होकर बरसेगा। इससे विशेषकर 15 मार्च को पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान है। 16 और 17 मार्च को भी अधिक ऊंचे व मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश-बर्फबारी के आसार है। बारिश-बर्फबारी के बाद गर्मी से राहत ऊंचे पहाड़ों पर बारिश-बर्फबारी के बाद प्रदेशवासियों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली है। ऊंचे क्षेत्रों में कई जगह रात का तापमान 2 से 3 डिग्री तक नीचे लुढ़का है। आने वाले पांच-छह दिनों के दौरान तापमान में और गिरावट आएगी। बीते कल तक प्रदेश के ज्यादातर शहरों का अधिकतम तापमान सामान्य से 6 से 10 डिग्री तक अधिक चल रहा था। कल्पा का अधिकतम तापमान सामान्य से 9.9 डिग्री ज्यादा के साथ 20.5 डिग्री, शिमला का 7.7 डिग्री ज्यादा के साथ 23.5 डिग्री, सोलन का 7.2 डिग्री ज्यादा के साथ 30.0 डिग्री, धर्मशाला का 7.1 डिग्री के उछाल के साथ 29.0 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। बीते 24 घंटे के दौरान ऊना का तापमान सर्वाधिक 33.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मार्च में 100 प्रतिशत कम बारिश मौसम विभाग के अनुसार- फरवरी माह में सामान्य से 96 प्रतिशत और एक से 11 मार्च तक नॉर्मल से 100 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इससे राज्य में सूखे जैसे हालात पनप रहे हैं। ऐसे में ताजा बारिश-बर्फबारी किसानों-बागवानों के लिए राहत लेकर आएगी। हालांकि, अभी तक अधिक ऊंचे इलाकों में ही हल्की बारिश-बर्फबारी हुई है। मगर अगले चार-पांच दिनों के दौरान पूरे प्रदेश में डेढ़ महीने से चला आ रहा ड्राइ स्पेल टूटने के आसार है।

श्रमिक प्रसूति सहायता योजना भुगतान में लापरवाही:तीन स्वास्थ्य कर्मचारियों की 10 दिन की सैलरी काटी, सुधार न होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

श्रमिक प्रसूति सहायता योजना भुगतान में लापरवाही:तीन स्वास्थ्य कर्मचारियों की 10 दिन की सैलरी काटी, सुधार न होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

प्रसूता महिलाओं को मिलने वाली सरकारी योजनाओं के भुगतान में देरी स्वास्थ्य कर्मचारियों को महंगी पड़ गई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) मध्यप्रदेश ने जननी सुरक्षा योजना और मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना की राशि समय पर जारी नहीं करने पर तीन स्वास्थ्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इन कर्मचारियों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में हितग्राहियों का भुगतान अब भी लंबित है। इसके बाद विभाग ने तीनों कर्मचारियों के 10 दिन का वेतन काटते हुए चेतावनी दी है कि कार्य में सुधार नहीं होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। रीवा और सीधी जिले के कर्मचारियों पर कार्रवाई राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश के मिशन संचालक ने रीवा और सीधी जिले के तीन स्वास्थ्य कर्मचारियों पर यह कार्रवाई की है। इनमें विकासखंड हनुमना (मऊगंज), जिला रीवा के विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक रोहित सिंह, विकासखंड सिहावल, जिला सीधी के विकासखंड लेखा प्रबंधक रोहित सिंह और जिला अस्पताल सीधी के लेखा प्रबंधक अरुण सिंह शामिल हैं। इन कर्मचारियों को हितग्राही मूलक योजनाओं के भुगतान में अनावश्यक देरी और कार्य के प्रति उदासीनता के कारण पहले नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के बाद भी लंबित रहे कई भुगतान स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद भी कई प्रसूताओं को मिलने वाली योजनाओं की राशि लंबित पाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि नोटिस जारी होने की तारीख से लेकर अब तक बड़ी संख्या में जननी सुरक्षा योजना और मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना के हितग्राहियों को भुगतान नहीं किया गया। विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही माना है। 10 दिन का वेतन काटा, दी चेतावनी कार्य में लापरवाही और राज्य कार्यालय के आदेशों की लगातार अनदेखी करने पर स्वास्थ्य विभाग ने तीनों कर्मचारियों पर अर्थदंड लगाया है। कार्रवाई के तहत उनके 10 दिन का वेतन काटा गया है। साथ ही उन्हें निर्देश दिया गया है कि लंबित भुगतान जल्द से जल्द निपटाएं। सरकार की प्राथमिकता है समय पर भुगतान स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जननी सुरक्षा योजना और मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना का उद्देश्य प्रसूता महिलाओं को आर्थिक सहायता देना है, ताकि उन्हें प्रसव के समय बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। सरकार की प्राथमिकता है कि इन योजनाओं का लाभ हितग्राहियों को समय पर मिले। विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

पूरी रेसिपी: पालक से लेकर बीटरूट तक, घर पर आसानी से तैयार करें ये 4 तरह की रंग-बिरंगी फुल और कुरकुरी पूरियां

पूरी रेसिपी: पालक से लेकर बीटरूट तक, घर पर आसानी से तैयार करें ये 4 तरह की रंग-बिरंगी फुल और कुरकुरी पूरियां

पूड़ी रेसिपी: अक्सर समुच्चय में समुच्चय या खास कारखाने पूरी तरह से निर्मित होते हैं, लेकिन रोज़ एक जैसा सिंपल पूरी तरह खाते-खाते कई बार लोग बोर हो जाते हैं। ऐसे में अगर आप खाने में थोड़ा बदलाव करना चाहते हैं तो अलग-अलग तरह की पूरियां साज-सज्जा कर सकते हैं। पालक, चुकंदर, मटर और मेथी से बनने वाली पूरियाँ स्वाद के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर होती हैं। आइए जानते हैं घर पर आसानी से बनने वाली इन खास पूरी रेसिपी के बारे में… पालक पूरी तरह से बनाने के लिए सबसे पहले पालक को अच्छे प्रकार का ढोकर व्यवसाय लें। इसके बाद यह है कि पेस्टीलेट्स तैयार कर लें। इसके बाद प्लास्टर में पालक का पेस्ट, नमक, नाव और थोड़ा सा तेल का प्लास्टर आटा गूंथ लें। तैयार कारखानों के छोटे-छोटे लो अवशेष पूरियां बेलें और गर्म तेल में सोना होने तक तल लें। पालक पूरी तरह से स्वादिष्ट के साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाजवाब होता है। बीटरूट यानी चुकंदर से बनी पूरी देखने में भी खूबसूरत लगती है और स्वाद में भी अलग होता है। इसे बनाने के लिए चुकंदर को स्टोकर कद्दूकस कर लें या प्लास्टिक में पीसकर पेस्ट बनाकर तैयार कर लें। इसके बाद एट्रेक्ट में चुकंदर, नमक, लाल मिर्च और थोड़ा सा तेल मॉड्यूल आटा तैयार करें। छोटी-छोटी पूरियाँ बेलकर गर्म तेल में तल लें। बीटरूट पूरी को आप आलू की सब्जी या दही के साथ बना सकते हैं. मटर की पूरी तरह से एक बेहतरीन पद होता है। इसे बनाने के लिए हरी मटर को दो तरफा रेखा सा मैश कर लें। इसके बाद इसमें हरी मिर्च, अदरक, नमक और थोड़ा सा सब्जी मसाला मिला लें। अब इस कंपनी को आटे में आटा गूंथ लें। तैयार आटे से पूरियां बेलकर गर्म तेल में तल लें। मटर की पूरी का स्वाद स्टूडियो या स्टूडियो दोनों में अच्छा लगता है। मेथी की खासतौर पर समुद्र के मौसम में बहुत पसंद की जाती है। इसे बनाने के लिए ताजी मेथी की ‘यूनोपॉथ’ काट लें। फिर आटे में मेथी, नमक, हल्दी, लाल मिर्च और थोड़ा सा तेल मठरी आटा लें। छोटी-छोटी पूरियाँ बेलकर गर्म तेल में तल लें। मेथी की पूरी को अचार या सब्जी के साथ परोसा जा सकता है. (टैग्सटूट्रांसलेट)घर पर पूरी रेसिपी(टी)अलग-अलग पूरी रेसिपी(टी)पालक पूरी रेसिपी(टी)चुकंदर पूरी रेसिपी(टी)मटर पूरी रेसिपी(टी)मेथी पूरी रेसिपी(टी)भारतीय नाश्ता पूरी विचार(टी)आसान पूरी रेसिपी(टी)स्वस्थ पूरी रेसिपी(टी)भारतीय भोजन रेसिपी पूरी

घंटों फंसी रही बराता, एम्बुलेंस और वाहन:मुरैना में नेशनल हाईवे, ओवरब्रिज बाइपास पर जाम; लोग होते रहे परेशान

घंटों फंसी रही बराता, एम्बुलेंस और वाहन:मुरैना में नेशनल हाईवे, ओवरब्रिज बाइपास पर जाम; लोग होते रहे परेशान

शहर में आज शाम करीब 8 बजे के बाद कई प्रमुख सड़कों पर भीषण जाम लग गया। जौरा रोड नेशनल हाईवे-552, बैरियल चौराहा नेशनल हाईवे-44, ऋषिगावल रोड, अंबाह ओवरब्रिज, बायपास और अन्य मार्गों पर वाहन घंटों तक फंसे रहे। जाम के कारण एम्बुलेंस और बारातें भी रास्ते में अटक गईं, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। जौरा रोड पर जाम के दौरान दो मरीजों को लेकर जा रही एम्बुलेंस भी लंबे समय तक फंसी रही। लोगों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील समय में भी पुलिस या ट्रैफिक पुलिस मौके पर नजर नहीं आई। स्थिति यह रही कि जाम में फंसे लोगों ने खुद ही सड़कों पर उतरकर धीरे-धीरे यातायात को व्यवस्थित किया, तब जाकर रास्ता खुल सका। शादी समारोहों के कारण बढ़ी भीड़ बताया जा रहा है कि 11 मार्च को शहर में बड़ी संख्या में विवाह समारोह होने के कारण सड़कों पर वाहनों की संख्या अचानक बढ़ गई। बारातों और निजी वाहनों की भीड़ के चलते कई मार्गों पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। लोगों ने पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल महापुर रोड निवासी रेनू तोमर ने बताया कि वह एक शादी में शामिल होने बाइक से जौरा रोड जा रहे थे। वहां दोनों ओर लंबा जाम लगा था। ऋषिगावल रोड पर भी वाहनों की लंबी कतारें लगी थीं और लोग घंटों जाम में फंसे रहे। उन्होंने बताया कि जाम में एम्बुलेंस भी मरीजों के साथ खड़ी रही, लेकिन कहीं भी पुलिस या ट्रैफिक पुलिस नजर नहीं आई। लोगों का कहना है कि जब शहर में अधिक शादियां होती हैं तो पुलिस को पहले से यातायात व्यवस्था करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसी कोई व्यवस्था देखने को नहीं मिली। घंटों बाद स्थानीय लोगों की मदद से धीरे-धीरे जाम खुल सका।

एसटी आयोग के हस्तक्षेप से 24 आदिवासी मजदूर मुक्त:तमिलनाडु से बैतूल पहुंचे, कलेक्टर ने स्टेशन पर किया स्वागत

एसटी आयोग के हस्तक्षेप से 24 आदिवासी मजदूर मुक्त:तमिलनाडु से बैतूल पहुंचे, कलेक्टर ने स्टेशन पर किया स्वागत

तमिलनाडु के ईरोड जिले में बंधुआ मजदूरी की स्थिति में फंसे भीमपुर ब्लॉक के 24 आदिवासी मजदूरों को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातीय आयोग के हस्तक्षेप के बाद मुक्त कराकर मध्यप्रदेश लाया गया। बुधवार को सभी मजदूर बैतूल पहुंचे, जहां प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें रिसीव किया गया और देर रात बस से उनके गांव भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार भीमपुर क्षेत्र के ये मजदूर पिछले चार-पांच महीनों से तमिलनाडु के मोडाकुरिची क्षेत्र के ओलापालयम में बंधुआ मजदूरी की स्थिति में काम कर रहे थे। मामले की जानकारी सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातीय आयोग तक पहुंची। इसके बाद आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हस्तक्षेप किया। आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के निर्देश पर आयोग के सलाहकार और पूर्व जिला न्यायाधीश प्रकाश उइके ने तमिलनाडु के डीजीपी, मुख्य सचिव और बैतूल एसपी को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कराई। इसके बाद तमिलनाडु पुलिस सक्रिय हुई और ईरोड जिले में कार्रवाई करते हुए सभी 24 मजदूरों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। रेस्क्यू के बाद मजदूरों को दो दिन तक मोडाकुरिची के कम्युनिटी हॉल में रखा गया, जहां श्रम विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की। इसके बाद 10 मार्च 2026 को शाम 5:15 बजे उन्हें राप्तीसागर एक्सप्रेस (12512) से मध्यप्रदेश के लिए रवाना किया गया। यात्रा के दौरान पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी भी उनके साथ रहे। बुधवार को मजदूर बैतूल रेलवे स्टेशन पहुंचे, जहां कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी, एसपी वीरेंद्र जैन, एएसपी कमला जोशी, एसडीएम अभिजीत सिंह, लेबर ऑफिसर धम्मदीप भगत सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मजदूरों से बातचीत कर उनकी स्थिति की जानकारी ली। मुक्त कराए गए मजदूरों में 4 महिलाएं, 5 नाबालिग लड़कियां, 1 बच्चा और 14 पुरुष शामिल हैं। प्रशासन ने सभी के भोजन और अन्य व्यवस्थाएं कराते हुए देर रात बस के माध्यम से उन्हें उनके गांव रवाना कर दिया। इनमें।चार मजदूर हरदा जिले के भी शामिल है। मजदूर संगीता ने बताया कि उनसे सुबह 7 बजे से रात 12 बजे तक गन्ना कटवाया जाता था। करीब 16 घंटे तक काम कराया जाता था, जबकि खाने में सिर्फ चावल दिए जाते थे। उन्होंने बताया कि वहां किसी से बात करने, फोन पर संपर्क करने या कहीं आने-जाने की मनाही थी। ठेकेदार के लोग पूरे समय उनकी निगरानी करते रहते थे। मजदूर अल्लू ने बताया कि उन्हें पहले महाराष्ट्र के शोलापुर ले जाया गया था और वहां से तमिलनाडु भेज दिया गया। उन्हें पहले दिवाली और फिर होली पर घर भेजने का वादा किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें वापस आने नहीं दिया जा रहा था। इस पूरे रेस्क्यू अभियान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़े कार्यकर्ताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनकी पहल से मामला संबंधित अधिकारियों और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातीय आयोग तक पहुंच सका।

White Spots on Nails Causes | Health Tips | नाखूनों पर सफेद धब्बे का कारण | हेल्थ टिप्स |

white spots on nails causes

Last Updated:March 11, 2026, 22:13 IST White Spots on Nails Causes: क्या आपके नाखूनों पर भी सफेद दाग या छोटे निशान हैं? ज्यादातर लोग इसे कैल्शियम की कमी मानकर दूध और पनीर खाना शुरू कर देते हैं, लेकिन सच कुछ और ही है. मेडिकल भाषा में इसे ल्यूकोनिखिया कहते हैं और इसके पीछे का असली कारण अक्सर कोई गंभीर बीमारी नहीं बल्कि एक छोटी सी चोट होती है. जानिए डॉ. राजकुमार से कि ये निशान कब सामान्य होते हैं और कब आपको सतर्क रहने की जरूरत है. कई बार हम अपने नाखूनों पर छोटे-छोटे सफेद निशान देखते हैं और तुरंत सोचने लगते हैं कि कहीं शरीर में कोई बड़ी कमी तो नहीं हो गई. कुछ लोग इसे कैल्शियम की कमी मान लेते हैं तो कुछ इसे किसी बीमारी का संकेत समझते हैं. सच यह है कि नाखूनों पर बनने वाले इन सफेद धब्बों के पीछे कई कारण हो सकते हैं. इन्हें नजरअंदाज करने से पहले सही जानकारी होना जरूरी है. डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि नाखूनों पर दिखने वाले इन सफेद धब्बों को मेडिकल भाषा में ल्यूकोनिखिया कहा जाता है. आमतौर पर यह पूरी तरह हानिकारक नहीं होते और कई बार खुद ही धीरे-धीरे गायब भी हो जाते हैं. जैसे-जैसे नाखून बढ़ते हैं, ये निशान भी ऊपर की तरफ खिसकते जाते हैं और अंत में कटकर हट जाते हैं. इसलिए हर बार इन्हें बीमारी का संकेत समझ लेना सही नहीं होता. इन सफेद निशानों का सबसे आम कारण नाखून पर लगी हल्की चोट होती है. कई बार हमें याद भी नहीं रहता कि नाखून कहीं टकरा गया था या दब गया था. यही छोटी सी चोट बाद में सफेद धब्बे के रूप में दिखाई देती है. खासकर जो लोग जल्दी-जल्दी काम करते हैं या नाखूनों का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनके नाखूनों पर ऐसे निशान ज्यादा दिख सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google कुछ मामलों में शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी इसका कारण बन सकती है. जिंक, प्रोटीन या कुछ विटामिन की कमी होने पर नाखूनों की बनावट पर असर पड़ता है. हालांकि यह हर व्यक्ति में जरूरी नहीं होता, लेकिन अगर बार-बार सफेद निशान दिखाई दें तो अपनी डाइट पर ध्यान देना अच्छा रहता है. कई बार नेल पॉलिश, नेल रिमूवर या केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल भी नाखूनों पर असर डाल सकता है. इन प्रोडक्ट्स में मौजूद कुछ तत्व नाखूनों की ऊपरी परत को कमजोर कर देते हैं. इसका परिणाम सफेद धब्बों या हल्की लकीरों के रूप में दिखाई दे सकता है. इसलिए समय-समय पर नाखूनों को बिना किसी केमिकल के भी रहने देना जरूरी है. कुछ दुर्लभ स्थितियों में एलर्जी या फंगल इंफेक्शन भी नाखूनों पर सफेद निशान बना सकते हैं. अगर इन निशानों के साथ नाखून मोटे होने लगें, टूटने लगें या उनका रंग बदलने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है. यह संकेत हो सकता है कि नाखूनों की सेहत पर कोई और समस्या असर डाल रही है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. नाखूनों पर दिखने वाले सफेद निशान ज्यादातर मामलों में सामान्य होते हैं और घबराने की जरूरत नहीं होती. यह अक्सर छोटी-मोटी चोट या नाखूनों की बढ़त से जुड़ा एक सामान्य बदलाव होता है. फिर भी अगर ये निशान लगातार बढ़ रहे हों या नाखूनों में और बदलाव दिखाई दें, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है. सही देखभाल से नाखून लंबे समय तक स्वस्थ और मजबूत बने रह सकते हैं. First Published : March 11, 2026, 22:13 IST

भिंड में NH-719 पर 2 KM लंबा जाम:दबोहा पुलिया के पास बारातों के कारण फंसे सैकड़ों वाहन, एंबुलेंस भी घंटों जाम में अटकी

भिंड में NH-719 पर 2 KM लंबा जाम:दबोहा पुलिया के पास बारातों के कारण फंसे सैकड़ों वाहन, एंबुलेंस भी घंटों जाम में अटकी

भिंड में नेशनल हाईवे-719 पर बुधवार रात करीब 9 बजे के बाद अचानक जाम के हालात बन गए। दबोहा पुलिया के पास करीब 2 किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिसमें सैकड़ों वाहन फंस गए। जाम में एंबुलेंस तक के फंसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार ग्वालियर-भिंड-इटावा नेशनल हाईवे-719 पर बुधवार रात दबोहा पुलिया के पास यातायात व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई। रात करीब 9 बजे के बाद यहां धीरे-धीरे वाहनों की लंबी कतार लगनी शुरू हुई और कुछ ही देर में जाम करीब दो किलोमीटर तक फैल गया। जाम में दोपहिया, चारपहिया और भारी वाहन फंस गए, जिससे लोगों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। स्थानीय लोगों के मुताबिक शास्त्री कॉलोनी से लेकर दबोहा पुलिया तक करीब एक दर्जन मैरिज गार्डन स्थित हैं। इन दिनों शादी समारोहों का सीजन चल रहा है, जिसके चलते लगातार बारातें निकल रही हैं। बारातों के दौरान सड़क पर डीजे, बैंड और नाचते बारातियों के कारण यातायात रुक-रुक कर चलता रहा, जिससे जाम की स्थिति बन गई। नेशनल हाईवे होने के कारण इस मार्ग पर रोजाना भारी वाहनों का भी अधिक दबाव रहता है। ऐसे में जब एक साथ कई बारातें सड़क पर निकलती हैं तो यातायात पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। जाम में कई एंबुलेंस भी फंस गईं, जिससे मरीजों को ले जा रहे परिजनों को परेशानी उठानी पड़ी। स्थानीय लोगों का कहना है कि शादी के सीजन में इस क्षेत्र में हर साल इसी तरह के हालात बनते हैं। हाईवे के किनारे कई मैरिज गार्डन होने के कारण बारातें सीधे सड़क पर निकलती हैं, जिससे यातायात प्रभावित होता है। लोगों ने प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है।