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ऑफ कटर से गच्चा खा रहे मॉडर्न बैटर:वर्ल्ड कप के 357 विकेट पेसर्स को, इसमें 68 ऑफ कटर पर गिरे, बुमराह इसके उस्ताद

ऑफ कटर से गच्चा खा रहे मॉडर्न बैटर:वर्ल्ड कप के 357 विकेट पेसर्स को, इसमें 68 ऑफ कटर पर गिरे, बुमराह इसके उस्ताद

टी-20 क्रिकेट को हमेशा से बल्लेबाजों का गेम माना जाता है, लेकिन टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में तेज गेंदबाजों ने ‘स्लोअर गेंदों’ (पेस-ऑफ) के जरिए जोरदार वापसी की। इस पूरे टूर्नामेंट में तेज गेंदबाजों द्वारा फेंकी गई कुल गेंदों में स्लोअर का प्रतिशत 15.88% रहा, यानी लगभग हर छठी गेंद गति कम करके फेंकी गई। यह पिछले चार संस्करणों में सबसे ज्यादा है। आधुनिक क्रिकेट में तेज गेंदबाजों के पास लेग-कटर, नकल-बॉल और स्प्लिट-फिंगर जैसी कई नई और जटिल स्लोअर गेंदें मौजूद हैं। लेकिन, इन तमाम वेरिएशंस के बीच गेंदबाजों का सबसे मारक हथियार बनी एक पुरानी और बेसिक गेंद-‘ऑफ-कटर’। विकेट निकालने के लिए गेंदबाजों ने स्लोअर गेंदों की वैरायटी में से इसी साधारण गेंद पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया। फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ जसप्रीत बुमराह ने इसी स्विंग होती ऑफ-कटर का इस्तेमाल करके 4 कीवी बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा और भारत को शानदार जीत दिलाई। बुमराह ने फाइनल में अपने 4 ओवर के स्पैल में 18 गेंदें ऑफ कटर फेंकी
बुमराह ने इस वैरिएशन का सबसे ज्यादा फायदा उठाया। फाइनल में फेंकी गई अपनी 24 गेंदों में से 18 गेंदें उन्होंने ऑफ-कटर ही रखीं। फाइनल में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बनने के बाद बुमराह ने कहा था, ‘अपने अनुभव और यहां के पाटा विकेटों पर खेलने की वजह से मैंने सीखा है कि ज्यादा तेज गेंद फेंकने से बल्लेबाजों को शॉट खेलने में आसानी होती है। इसलिए मैंने स्मार्ट तरीके से खेला और यह सोचने की कोशिश की कि बल्लेबाज क्या करने की कोशिश कर रहे हैं।’ गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी स्टेडियम बुमराह का होमग्राउंड है। अहमदाबाद में सबसे खतरनाक रहा यह वैरिएशन क्योंकि मैदान बड़ा क्या होती है ऑफ कटर?
क्रिकेट में ‘ऑफ-कटर’ तेज गेंदबाजों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले स्लोअर वेरिएशन का एक प्रकार है। यह एक तेज गेंदबाज द्वारा फेंकी गई ऑफ-स्पिन गेंद होती है। जब कोई तेज गेंदबाज इसे फेंकता है, तो वह अपने सामान्य रन-अप और एक्शन के साथ ही आता है, लेकिन गेंद को रिलीज करते समय अपनी उंगलियों को सीम पर दाईं ओर (घड़ी की सुई की दिशा में) तेजी से फेरता है। इसे ही तकनीकी भाषा में गेंद को ‘कट’ करना कहते हैं। अंगुलियों के इस खास एक्शन की वजह से गेंद की गति अपने आप काफी कम हो जाती है। पिच पर टप्पा खाने के बाद यह गेंद दाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए बाहर (ऑफ स्टंप) से अंदर (लेग स्टंप या शरीर) की तरफ आती है। चूंकि बल्लेबाज रन-अप को देखकर एक तेज गेंद की उम्मीद कर रहा होता है, इसलिए गति में अचानक आए इस बदलाव से उसकी टाइमिंग पूरी तरह बिगड़ जाती है। गेंद पिच पर थोड़ी रुक कर आती है, जिससे बल्लेबाज अक्सर अपना शॉट जल्दी खेल बैठता है। इसका नतीजा यह होता है कि गेंद हवा में खड़ी हो जाती है या बल्लेबाज सीधे बोल्ड और एलबीडब्ल्यू हो जाता है। टी-20 क्रिकेट में यह गेंद सबसे बड़े हथियारों में से एक है। विशेष रूप से जब पिच सूखी या ग्रिपी हो, तो यह गेंद टप्पा खाकर पिच को ज्यादा पकड़ती है और बल्लेबाजों के लिए इसे पढ़ना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में तेज गेंदबाज रन रोकने और अहम मौकों पर विकेट निकालने के लिए इसी ‘ऑफ-कटर’ पर सबसे ज्यादा भरोसा जताते हैं। जसप्रीत बुमराह, ड्वेन ब्रावो, मुस्तफिजुर रहमान और हर्षल पटेल जैसे गेंदबाज इस कला में दुनिया के सबसे बेहतरीन गेंदबाज माने जाते हैं।

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ऑफ कटर से गच्चा खा रहे मॉडर्न बैटर:वर्ल्ड कप के 357 विकेट पेसर्स को, इसमें 68 ऑफ कटर पर गिरे, बुमराह इसके उस्ताद

टी-20 क्रिकेट को हमेशा से बल्लेबाजों का गेम माना जाता है, लेकिन टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में तेज गेंदबाजों ने ‘स्लोअर गेंदों’ (पेस-ऑफ) के जरिए जोरदार वापसी की। इस पूरे टूर्नामेंट में तेज गेंदबाजों द्वारा फेंकी गई कुल गेंदों में स्लोअर का प्रतिशत 15.88% रहा, यानी लगभग हर छठी गेंद गति कम करके फेंकी गई। यह पिछले चार संस्करणों में सबसे ज्यादा है। आधुनिक क्रिकेट में तेज गेंदबाजों के पास लेग-कटर, नकल-बॉल और स्प्लिट-फिंगर जैसी कई नई और जटिल स्लोअर गेंदें मौजूद हैं। लेकिन, इन तमाम वेरिएशंस के बीच गेंदबाजों का सबसे मारक हथियार बनी एक पुरानी और बेसिक गेंद-‘ऑफ-कटर’। विकेट निकालने के लिए गेंदबाजों ने स्लोअर गेंदों की वैरायटी में से इसी साधारण गेंद पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया। फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ जसप्रीत बुमराह ने इसी स्विंग होती ऑफ-कटर का इस्तेमाल करके 4 कीवी बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा और भारत को शानदार जीत दिलाई। बुमराह ने फाइनल में अपने 4 ओवर के स्पैल में 18 गेंदें ऑफ कटर फेंकी
बुमराह ने इस वैरिएशन का सबसे ज्यादा फायदा उठाया। फाइनल में फेंकी गई अपनी 24 गेंदों में से 18 गेंदें उन्होंने ऑफ-कटर ही रखीं। फाइनल में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बनने के बाद बुमराह ने कहा था, ‘अपने अनुभव और यहां के पाटा विकेटों पर खेलने की वजह से मैंने सीखा है कि ज्यादा तेज गेंद फेंकने से बल्लेबाजों को शॉट खेलने में आसानी होती है। इसलिए मैंने स्मार्ट तरीके से खेला और यह सोचने की कोशिश की कि बल्लेबाज क्या करने की कोशिश कर रहे हैं।’ गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी स्टेडियम बुमराह का होमग्राउंड है। अहमदाबाद में सबसे खतरनाक रहा यह वैरिएशन क्योंकि मैदान बड़ा क्या होती है ऑफ कटर?
क्रिकेट में ‘ऑफ-कटर’ तेज गेंदबाजों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले स्लोअर वेरिएशन का एक प्रकार है। यह एक तेज गेंदबाज द्वारा फेंकी गई ऑफ-स्पिन गेंद होती है। जब कोई तेज गेंदबाज इसे फेंकता है, तो वह अपने सामान्य रन-अप और एक्शन के साथ ही आता है, लेकिन गेंद को रिलीज करते समय अपनी उंगलियों को सीम पर दाईं ओर (घड़ी की सुई की दिशा में) तेजी से फेरता है। इसे ही तकनीकी भाषा में गेंद को ‘कट’ करना कहते हैं। अंगुलियों के इस खास एक्शन की वजह से गेंद की गति अपने आप काफी कम हो जाती है। पिच पर टप्पा खाने के बाद यह गेंद दाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए बाहर (ऑफ स्टंप) से अंदर (लेग स्टंप या शरीर) की तरफ आती है। चूंकि बल्लेबाज रन-अप को देखकर एक तेज गेंद की उम्मीद कर रहा होता है, इसलिए गति में अचानक आए इस बदलाव से उसकी टाइमिंग पूरी तरह बिगड़ जाती है। गेंद पिच पर थोड़ी रुक कर आती है, जिससे बल्लेबाज अक्सर अपना शॉट जल्दी खेल बैठता है। इसका नतीजा यह होता है कि गेंद हवा में खड़ी हो जाती है या बल्लेबाज सीधे बोल्ड और एलबीडब्ल्यू हो जाता है। टी-20 क्रिकेट में यह गेंद सबसे बड़े हथियारों में से एक है। विशेष रूप से जब पिच सूखी या ग्रिपी हो, तो यह गेंद टप्पा खाकर पिच को ज्यादा पकड़ती है और बल्लेबाजों के लिए इसे पढ़ना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में तेज गेंदबाज रन रोकने और अहम मौकों पर विकेट निकालने के लिए इसी ‘ऑफ-कटर’ पर सबसे ज्यादा भरोसा जताते हैं। जसप्रीत बुमराह, ड्वेन ब्रावो, मुस्तफिजुर रहमान और हर्षल पटेल जैसे गेंदबाज इस कला में दुनिया के सबसे बेहतरीन गेंदबाज माने जाते हैं।

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