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भूल जाएंगे ग्लूकोज और नींबू पानी… सिर्फ चबा लें इस पेड़ की दो पत्तियां; गर्मी में बॉडी रहेगी अंदर से बर्फ की तरह ठंडी!

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Last Updated:May 13, 2026, 09:27 IST Sheesham Leaves Benefits: शीशम का पेड़ न केवल मजबूत लकड़ी बल्कि बेहतरीन आयुर्वेदिक गुणों के लिए भी जाना जाता है. गर्मी के मौसम में इसकी 2-3 कोमल पत्तियां चबाने से शरीर अंदर से ठंडा रहता है और लू से बचाव होता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल तत्व पाचन सुधारने, त्वचा की जलन कम करने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं. हालांकि, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इसके सेवन से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए. यही कारण है कि गर्मी के मौसम में इसका सेवन शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है. ग्रामीण बुजुर्गों का यह पारंपरिक अनुभव रहा है कि यदि इसकी पत्तियों को नियमित रूप से चबाया जाए, तो यह न केवल शरीर को आंतरिक शीतलता प्रदान करती हैं, बल्कि लू के हानिकारक प्रभाव से बचाने में भी कारगर साबित होती हैं. शीशम के पत्ते पेट के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं. अक्सर गर्मियों के मौसम में लोगों को गैस, अपच और कब्ज जैसी पाचन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसी स्थिति में शीशम की कोमल पत्तियों का सेवन पाचन तंत्र को सुदृढ़ बनाने का कार्य करता है. इसके अतिरिक्त, ये पत्तियां शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर डिटॉक्स करने में भी काफी मददगार साबित होती हैं. शीशम के पत्ते शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को सुदृढ़ करने में भी काफी सहायक माने जाते हैं. अक्सर बदलते मौसम के दौरान होने वाले वायरल संक्रमण और शारीरिक कमजोरी से बचने के लिए ग्रामीण इलाकों में लोग इसे एक प्रभावी घरेलू नुस्खे के तौर पर इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, सुरक्षा की दृष्टि से किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google त्वचा संबंधी विकारों के निवारण में भी शीशम के पत्तों का उपयोग अत्यंत गुणकारी माना गया है. करौली के आयुर्वेद चिकित्सालय के डॉ. महेश जंगम बताते हैं कि शीशम का पेड़ केवल अपनी कीमती लकड़ी के लिए ही नहीं, बल्कि अपने औषधीय गुणों के लिए भी विशिष्ट स्थान रखता है. इस वृक्ष की लकड़ी, पत्तियां और छाल, सभी आयुर्वेद के गुणों से भरपूर होते हैं. इसके पत्तों का लेप लगाने से खुजली, दाद और त्वचा की जलन में त्वरित राहत मिल सकती है. साथ ही, भीषण गर्मी के कारण होने वाली शरीर की जलन और अत्यधिक पसीने की समस्या को नियंत्रित करने में भी इसके औषधीय गुण बेहद प्रभावशाली माने जाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार शीशम की पत्तियों का सेवन हमेशा सीमित और संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए. विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे व्यक्तियों को डॉक्टरी परामर्श के बिना इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए. यदि सही मात्रा और उचित विधि से इसका उपयोग किया जाए, तो यह देसी पेड़ भीषण गर्मी में शरीर को शीतलता और राहत प्रदान करने वाला एक बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प साबित हो सकता है. इन्हीं प्रभावशाली वनस्पतियों में से एक शीशम का पेड़ है. आयुर्वेद के अनुसार शीशम के पत्ते स्वास्थ्य के लिए अत्यंत गुणकारी माने गए हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग सुबह खाली पेट इसकी 2-3 कोमल पत्तियां चबाने की परंपरा का पालन करते हैं, जिससे शरीर को प्राकृतिक ठंडक प्राप्त होती है और कई रोगों से बचाव होता है. औषधीय विज्ञान की दृष्टि से देखें तो शीशम के पत्तों में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को डिटॉक्स करने यानी विषैले तत्वों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. भीषण गर्मी के मौसम में शरीर के आंतरिक तापमान को संतुलित बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है. तेज धूप, चिलचिलाती लू और लगातार बढ़ते तापमान के कारण लोग अक्सर जल्दी थकान, शारीरिक कमजोरी और पाचन संबंधी विकारों का शिकार होने लगते हैं. ऐसी विषम परिस्थितियों में, ग्रामीण अंचलों में आज भी बड़ी संख्या में लोग गर्मी के दुष्प्रभावों से बचने के लिए पारंपरिक देसी और आयुर्वेदिक उपचारों पर अटूट भरोसा जताते हैं.