‘बाबरी मस्जिद दान के बारे में क्या?’: राम मंदिर विवाद के बीच यूपी के डिप्टी सीएम का सपा, कांग्रेस पर हमला | भारत समाचार

आखरी अपडेट:26 जून, 2026, 20:33 IST ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार और कदाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है. उपमुख्यमंत्री ने कथित राम मंदिर चोरी मामले में चल रही पुलिस जांच का भी बचाव किया और कहा कि जांच निष्पक्ष रूप से की जा रही है। (फोटो: पीटीआई) कथित राम मंदिर दान चोरी को लेकर भाजपा पर विपक्ष के हमलों के बीच, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर “तुष्टिकरण की राजनीति” में शामिल होने का आरोप लगाया और राज्य सरकार की जांच के तरीके का बचाव किया। राम मंदिर के दान की कथित चोरी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, पाठक ने सवाल किया कि विपक्षी दल बाबरी मस्जिद के लिए एकत्र किए गए धन के बारे में क्यों नहीं पूछ रहे हैं। पाठक ने कहा, “उसके बारे में पूछें। क्या कोई इस पर सवाल उठा रहा है? समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के ये लोग केवल तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं। सिर्फ मुस्लिम मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए, वे सनातन संस्कृति पर हमला कर रहे हैं।” वीडियो | मिर्ज़ापुर: अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक कहते हैं, “बाबरी मस्जिद के लिए पैसा इकट्ठा किया गया था या नहीं? इकट्ठा किया गया था ना? उसके बारे में पूछिए. क्या कोई इस पर सवाल उठा रहा है? ये समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लोग हैं… pic.twitter.com/wTHfmnKmMs– प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (@PTI_News) 26 जून, 2026 उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार और कदाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है। उन्होंने कहा, “लेकिन बाबरी मस्जिद के लिए इकट्ठा किए गए चंदे का क्या हुआ? उसके बारे में भी पूछिए।” उपमुख्यमंत्री ने कथित राम मंदिर चोरी मामले में चल रही पुलिस जांच का भी बचाव किया और कहा कि जांच निष्पक्ष रूप से की जा रही है। उन्होंने कहा, “जहां तक एफआईआर में प्रभावशाली लोगों के बारे में उठाए जा रहे सवालों का सवाल है तो क्या आप पुलिस हैं या हम पुलिस हैं? पुलिस प्रशासन निष्पक्षता से जांच कर रहा है। लेकिन एक सवाल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के उन लोगों से पूछें जो तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं। उनसे पूछें कि वह पैसा कहां गया।” पाठक ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मदरसों में, खासकर सीमावर्ती जिलों में, अवैध गतिविधियां और आतंकी फंडिंग हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया, “मदरसों में अवैध गतिविधियां हो रही हैं, बाहर से पैसा आ रहा है और आतंकी फंडिंग हो रही है। हमारे सीमावर्ती जिलों में मदरसों में क्या चल रहा है? मौलाना वहां क्या कर रहे हैं? लोगों को इसके बारे में भी सोचना चाहिए।” कथित राम मंदिर दान चोरी मामले पर राजनीतिक घमासान के बीच उनकी टिप्पणी आई है, विपक्ष ने इस मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधा है, जबकि सत्तारूढ़ दल ने अपने प्रतिद्वंद्वियों पर मामले का राजनीतिकरण करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में -सौरभ वर्मावरिष्ठ उपसंपादक सौरभ वर्मा मुख्य उप-संपादक के रूप में News18.com के लिए सामान्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दैनिक समाचारों को कवर करते हैं। वह राजनीति पर गहरी नजर रखते हैं। आप उन्हें ट्विटर –twitter.com/saurbhkverma19 पर फ़ॉलो कर सकते हैं न्यूज़ इंडिया ‘बाबरी मस्जिद दान के बारे में क्या?’: राम मंदिर विवाद के बीच यूपी के डिप्टी सीएम का सपा, कांग्रेस पर निशाना अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राम मंदिर दान चोरी(टी)उत्तर प्रदेश की राजनीति(टी)ब्रजेश पाठक(टी)तुष्टिकरण की राजनीति(टी)समाजवादी पार्टी(टी)कांग्रेस की आलोचना(टी)बाबरी मस्जिद फंड(टी)मदरसों को आतंकी फंडिंग
पोहे के पकौड़े रेसिपी: कांदा पोहा नहीं, कम तेल में ऐसे तैयार करें चिवड़े के पकौड़े, नोट करें आसान रेसिपी

चिवड़े के पकौड़े बनाने की सामग्री के लिए: 2 कप मोटा पोहा, 2 छिले हुए आलू, 1, 2 हरी मिर्च, हरा धनियां, 1 बड़ा अदरक पेस्ट, ½ छोटा छोटा लाल मिर्च पाउडर, ½ छोटा मोटा प्याज, ½ छोटा धनिया पाउडर, ½ छोटा धनिया पाउडर, छवि: फ्रीपिक ½ छोटा चम्मच गरम मसाला, ½ छोटा चम्मच जीरा, स्वादानुसार नमक, 2-3 बड़े बेसन, 1-2 बड़ा चम्मच चावल, तेल। कम तेल में खाना पकाने के लिए एयर फ्रायर सबसे अच्छा विकल्प है। छवि: एआई बनाने की आसान विधि: सबसे पहले पोहे को अच्छी तरह धोकर 5 मिनट के लिए रख दें, ताकि वह प्रभावशाली हो जाए। अब यह अतिरिक्त पानी हटा दिया गया है। एक बड़े प्लास्टिक में आलू को मैश करें। छवि: फ्रीपिक इसमें पोहा, प्याज, हरी मिर्च, अदरक, हरा धनिया, बेसन, चावल का आटा और सभी माध्यमिक घटक अच्छी तरह से मिला लें। अगर मिश्रण में ज्यादा मात्रा में मसाला लगे तो थोड़ा और बेसन मिला सकते हैं। छवि: फ्रीपिक इस मिश्रण से छोटे-छोटे पकौड़े या टिक्की का आकार। एयर फ़्रेयर या नॉन-स्टिक टीवी को गर्म करें। पकौड़ों पर लिटिल-सा ऑयल ब्रश करें और मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सोना और कुरकुरा होने तक सेंक लें। छवि: एआई ड्रामा तो कृप्या कम तेल में शैलो फ्राई भी कर सकते हैं। गरम-गरम चिवड़े के पकौड़े को हरी धनिया की चटनी, टमाटर की चटनी या इमली की मिठाई के साथ पकायें। चाय के साथ यह बस्तर पूरे परिवार को बहुत पसंद आएगा। छवि: एआई अधिक कुरकुरेपन के लिए थोड़ा सा चावल का आटा जरूर खायें। अंजीर तो कद्दूकस में की हुई गाजर, मीठा मिर्च या मटर भी मिला सकते हैं। तीखा स्वाद पसंद हो तो लाल मिर्च फ्लेक्स या कुटी काली मिर्च। छवि: एआई कम मेहनत और कम तेल में बनने वाले ये चिवड़े के पकौड़े स्वाद के साथ-साथ युवा भी होते हैं। अगर आप रोजमर्रा बनने वाले से कुछ अलग तरह के निशान बनाना चाहते हैं, तो यह रेसिपी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। छवि: एआई
पोहे के पकौड़े रेसिपी: कांदा पोहा नहीं, कम तेल में ऐसे तैयार करें चिवड़े के पकौड़े, नोट करें आसान रेसिपी

चिवड़े के पकौड़े बनाने की सामग्री के लिए: 2 कप मोटा पोहा, 2 छिले हुए आलू, 1, 2 हरी मिर्च, हरा धनियां, 1 बड़ा अदरक पेस्ट, ½ छोटा छोटा लाल मिर्च पाउडर, ½ छोटा मोटा प्याज, ½ छोटा धनिया पाउडर, ½ छोटा धनिया पाउडर, छवि: फ्रीपिक ½ छोटा चम्मच गरम मसाला, ½ छोटा चम्मच जीरा, स्वादानुसार नमक, 2-3 बड़े बेसन, 1-2 बड़ा चम्मच चावल, तेल। कम तेल में खाना पकाने के लिए एयर फ्रायर सबसे अच्छा विकल्प है। छवि: एआई बनाने की आसान विधि: सबसे पहले पोहे को अच्छी तरह धोकर 5 मिनट के लिए रख दें, ताकि वह प्रभावशाली हो जाए। अब यह अतिरिक्त पानी हटा दिया गया है। एक बड़े प्लास्टिक में आलू को मैश करें। छवि: फ्रीपिक इसमें पोहा, प्याज, हरी मिर्च, अदरक, हरा धनिया, बेसन, चावल का आटा और सभी माध्यमिक घटक अच्छी तरह से मिला लें। अगर मिश्रण में ज्यादा मात्रा में मसाला लगे तो थोड़ा और बेसन मिला सकते हैं। छवि: फ्रीपिक इस मिश्रण से छोटे-छोटे पकौड़े या टिक्की का आकार। एयर फ़्रेयर या नॉन-स्टिक टीवी को गर्म करें। पकौड़ों पर लिटिल-सा ऑयल ब्रश करें और मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सोना और कुरकुरा होने तक सेंक लें। छवि: एआई ड्रामा तो कृप्या कम तेल में शैलो फ्राई भी कर सकते हैं। गरम-गरम चिवड़े के पकौड़े को हरी धनिया की चटनी, टमाटर की चटनी या इमली की मिठाई के साथ पकायें। चाय के साथ यह बस्तर पूरे परिवार को बहुत पसंद आएगा। छवि: एआई अधिक कुरकुरेपन के लिए थोड़ा सा चावल का आटा जरूर खायें। अंजीर तो कद्दूकस में की हुई गाजर, मीठा मिर्च या मटर भी मिला सकते हैं। तीखा स्वाद पसंद हो तो लाल मिर्च फ्लेक्स या कुटी काली मिर्च। छवि: एआई कम मेहनत और कम तेल में बनने वाले ये चिवड़े के पकौड़े स्वाद के साथ-साथ युवा भी होते हैं। अगर आप रोजमर्रा बनने वाले से कुछ अलग तरह के निशान बनाना चाहते हैं, तो यह रेसिपी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। छवि: एआई
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति ने हरिद्वार में की पूजा:सिद्धपीठ से नवंबर में होने वाले चुनाव में जीत की कामना की, पहली बार आए उत्तराखंड

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जूमा भारत दौरे पर हरिद्वार पहुंचे। उन्होंने सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में मां भगवती के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की और आगामी चुनावों में सफलता की कामना की। मंदिर प्रशासन ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने महामंडलेश्वर से मुलाकात कर आशीर्वाद भी लिया। इस दौरान जूमा ने कहा कि हरिद्वार का आध्यात्मिक वातावरण उन्हें बेहद पसंद आया। उन्होंने बताया कि वह पहले भी कई बार भारत आ चुके हैं, लेकिन हरिद्वार पहली बार आए हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं की सराहना की। महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका में नवंबर में स्थानीय निकाय चुनाव और 2029 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। जूमा ने संकल्प लिया कि यदि वह दोबारा राष्ट्रपति बने तो सबसे पहले हरिद्वार आकर मां दक्षिण काली के दर्शन करेंगे। इस दौरान भारत-दक्षिण अफ्रीका के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर भी चर्चा हुई। तस्वीरें देखिए- सिलसिलेवार ढंग से पढ़िए पूरी खबर… 1. हरिद्वार के सिद्धपीठ में जैकब जूमा ने की पूजा- दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जूमा इन दिनों भारत के आध्यात्मिक दौरे पर हैं। उन्होंने उत्तराखंड के हरिद्वार पहुंचकर प्रसिद्ध सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में मां भगवती की विशेष पूजा-अर्चना की। जूमा ने बताया कि वे पहले भी कई बार भारत (2008, 2010, 2015, 2016) आ चुके हैं, लेकिन धर्मनगरी हरिद्वार का यह उनका पहला दौरा है। मंदिर के महामंडलेश्वर ने फूलों की भव्य माला पहनाकर उनका स्वागत किया। जूमा दक्षिण अफ्रीका के एक प्रमुख विपक्षी दल के अध्यक्ष हैं। वहां इसी साल 4 नवंबर को स्थानीय निकाय चुनाव हैं और 2029 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। जूमा ने संकल्प लिया है कि यदि वे दोबारा राष्ट्रपति बनते हैं, तो सबसे पहले फिर से हरिद्वार आकर मां काली की पूजा करेंगे। इस यात्रा के दौरान जूमा के साथ दक्षिण अफ्रीका के राजनयिक, उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री वाईपी सिंह और उनके बेहद करीबी मित्र व विवादित कारोबारी अजय कुमार गुप्ता भी मौजूद रहे। 2. सहारनपुर की राशन दुकान से दक्षिण अफ्रीका के ‘किंगमेकर’ बने गुप्ता ब्रदर्स- जैकब जूमा की किस्मत को बदलने और फिर डुबाने के पीछे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गुप्ता बंधुओं (अजय, अतुल और राजेश गुप्ता) का हाथ रहा है। गुप्ता बंधुओं के पिता शिवकुमार गुप्ता सहारनपुर के रायवाला बाजार में राशन और मसालों की दुकान चलाते थे। 1985 में पढ़ाई के बाद मंझले भाई अतुल गुप्ता दक्षिण अफ्रीका चले गए, जहां उन्हें रंगभेद के बाद व्यापार की बड़ी संभावनाएं दिखीं। बाद में उन्होंने अपने भाइयों अजय और राजेश को भी बुला लिया। 1993 में उन्होंने सहारा कंप्यूटर्स की शुरुआत की। मेहनत के दम पर यह देश की नंबर वन कंपनी बनी। इसके बाद उन्होंने कोल-गोल्ड माइनिंग, अखबार (न्यूज एज) और कई न्यूज चैनलों पर कब्जा कर अरबों का साम्राज्य खड़ा कर लिया। 3. संकट के समय जैकब जूमा की मदद और गुप्ता राज की शुरुआत- 2000 के आसपास गुप्ता ब्रदर्स और तत्कालीन उपराष्ट्रपति जैकब जूमा के बीच दोस्ती हुई। इसके बाद जूमा पर भ्रष्टाचार और गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया और 15 साल की सजा सुनाई गई। इस बुरे वक्त में गुप्ता बंधुओं ने जैकब जूमा की 5 पत्नियों और 23 बच्चों की आर्थिक मदद की, बच्चों को नौकरियां दीं और जुमा को राष्ट्रपति बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया। 2009 में जैकब ज़ूमा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बन गए। इसके बाद देश में गुप्ता बंधुओं का परोक्ष राज शुरू हो गया। सरकारी ठेके केवल गुप्ता ब्रदर्स को मिलते, बड़े पदों पर नियुक्तियां वे तय करते और यहां तक कि सेना के एयरपोर्ट पर अपने निजी विमान उतारते थे। 4. तीन भाइयों के चक्कर में गई राष्ट्रपति की कुर्सी और फिर जेल- 2016 में तत्कालीन उप वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि गुप्ता भाइयों ने उन्हें वित्त मंत्री बनाने का सौदा किया था। इसके बाद देश में भारी बवाल मच गया। इस बेतहाशा राजनीतिक दखल और अरबों के घोटाले के आरोप के चलते दक्षिण अफ्रीका में बेहद लोकप्रिय रहे जैकब ज़ूमा को अपनी राष्ट्रपति की कुर्सी गंवानी पड़ी और उन्हें 15 महीने की जेल काटनी पड़ी। जुमा के हटते ही गुप्ता ब्रदर्स पर शिकंजा कसा। 2018 में छापेमारी के बाद तीनों भाई कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए दुबई (UAE) भाग गए। हालांकि, प्रत्यर्पण संधि होने के बाद हाल ही में दो भाइयों को यूएई में गिरफ्तार कर लिया गया है, जिन्हें वापस दक्षिण अफ्रीका लाने की तैयारी है। राष्ट्रपति पद गंवाने और जेल जाने के बाद, अब जैकब ज़ूमा एक बार फिर अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। अभी वे अपने पुराने साथी अजय गुप्ता को साथ लेकर हरिद्वार में मां भगवती की शरण में पहुंचे हैं। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें… देहरादून बॉर्डर पांवटा साहिब पर डटे 200 निहंग:SSP को दिया दो दिन का अल्टीमेटम; बोले- साथियों को छोड़ो वरना कूच करेंगे देहरादून कूच करने वाले निहंगों में से कुछ लोग अब भी पांवटा साहिब में डटे हुए हैं। मामले में हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने पांवटा साहिब पहुंचकर निहंग जत्थेदारों से बातचीत की। उन्होंने उनकी मांगों और उत्तराखंड कूच को लेकर विस्तार से चर्चा की। (पढ़ें पूरी खबर)
110 करोड़ की एडवेंचर थ्रिलर फिल्म 'नागबंधम- द सीक्रेट ट्रेजर':अभिषेक ने बताया- फिल्म में सिर्फ खजाने की खोज नहीं, मंदिरों-रहस्यों से भरी दुनिया भी दिखेगी

फिल्म ‘नागबंधम द सीक्रेट ट्रेजर’ अपने माइथो कंटेंट को लेकर चर्चा में हैं। इसमें भगवान शिव को खास तरीके से प्रेजेंट किया गया है। यह 3 जुलाई को रिलीज होगी। निर्देशक अभिषेक नामा ने मेकिंग से जुड़ी रोचक बातें शेयर कीं… अभिषेक बताते हैं…‘नागबंधम द सीक्रेट ट्रेजर’ एक भव्य एडवेंचर थ्रिलर फिल्म है, जो सदियों से छिपे एक रहस्य के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में एक ऐसी जर्नी दिखाई गई है, जिसमें पौराणिक कथाएं, पवित्र मंदिर, भूले-बिसरे योद्धा, ब्रह्मकमल और एक खजाना शामिल है, जो मानवता की किस्मत बदल सकता है। यह फिल्म 5 भाषाओं तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और हिंदी में बनी है।’ अभिषेक ने बताया, ‘फिल्म की शूटिंग कई जगहों पर की गई, जिनमें हैदराबाद, विशेष रूप से तैयार किए गए स्टूडियो सेट, जंगल, पानी वाले लोकेशन और बड़े आउटडोर क्षेत्र शामिल हैं, जिन्हें कहानी की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग दुनिया और समय को दर्शाने के लिए तैयार किया गया। सभी शेड्यूल, एक्शन सीक्वेंस, गानों और अन्य कामों को मिलाकर इस फिल्म को पूरा करने में एक साल से अधिक का समय लगा।’ देश के प्राचीन इतिहास और रहस्यमयी खजानों के प्रति रुचि से आया आइडिया अभिषेक साझा करते हैं…‘नागबंधम का मूल आइडिया भारत के प्राचीन इतिहास और रहस्यमयी खजानों के प्रति मेरी गहरी रुचि से आया। कई वर्षों तक मैंने पवित्र मंदिरों, नाग परंपराओं, खो चुकी सभ्यताओं से जुड़ी कहानियों पर रिसर्च की। कई एडवेंचर से भरी कहानियों ने प्रेरित किया।’ हर किरदार के व्यक्तित्व के हिसाब से एक्टर्स को फिल्म में चुना गया है अभिषेक कहते हैं…‘फिल्म के हर किरदार के लिए एक खास व्यक्तित्व और स्क्रीन प्रेजेंस की जरूरत थी। विराट कर्ण को इसलिए चुना गया, क्योंकि उनके भीतर मुख्य किरदार की जर्नी को दिखाने की क्षमता थी। महेश मांजरेकर और मुरली शर्मा जैसे अनुभवी कलाकारों ने फिल्म को गहराई और विश्वसनीयता दी। वहीं नाभा नटेश और दक्षा नागरकर अपने किरदारों में मजबूती और आकर्षण लाईं। जब ये कलाकार जुड़े तो हमें लगा कि ‘नागबंधम’ की दुनिया के लिए हमें बिल्कुल सही टीम मिल गई है। विराट कर्ण उन पहले कलाकारों में शामिल थे, जो इस प्रोजेक्ट से जुड़े, क्योंकि पूरी कहानी उनके किरदार के इर्द-गिर्द घूमती है। ’ करीब 110 करोड़ रुपए है लागत अभिषेक कहते हैं…‘नागबंधम’ का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं है। हर सेट, कॉस्ट्यूम, हथियार और फ्रेम को भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और जुनून के साथ तैयार किया गया है। सिर्फ ट्रेजर हंट नहीं, देश की संस्कृति से लोगों को परिचय भी कराना है। इसका बजट करीब 110 करोड़ रुपए है।’ शूटिंग लोकेशन – हैदराबाद में विशेष रूप से तैयार किए गए स्टूडियो अभिषेक के मुताबिक, ‘फिल्म की शूटिंग कई जगहों पर की गई, जिनमें हैदराबाद, विशेष रूप से तैयार किए गए स्टूडियो सेट, जंगल, पानी वाले लोकेशन और बड़े आउटडोर क्षेत्र शामिल हैं, जिन्हें कहानी की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग दुनिया और समय को दर्शाने के लिए तैयार किया गया। सभी शेड्यूल, एक्शन सीक्वेंस, गानों और अन्य कामों को मिलाकर इस फिल्म को पूरा करने में एक साल से अधिक का समय लगा।’ 10 बड़े सेट में तैयार हुई फिल्म की दुनिया ‘नागबंधम’ के लिए करीब 10 बड़े सेट तैयार किए गए। ‘फिल्म के हर हथियार और कॉस्ट्यूम को अलग तरीके से डिजाइन किया गया है। एक्शन और क्लोजअप सीन्स के लिए हथियारों के अलग-अलग संस्करण तैयार किए गए। फिल्म के इमोशन को शिद्दत से दिखाएंगे 5 भव्य गाने अभिषेक ने बताया ‘फिल्म का हर गीत इसकी कहानी को आगे बढ़ाने के साथ इससे जुड़ी अलग-अलग भावनाओं को भी दिखाता है। – एक भव्य भक्ति गीत, जो दिव्य ऊर्जा और आध्यात्मिकता का उत्सव पर है। – दूसरा रोमांटिक गीत है, जो मुख्य किरदारों के इमोशल रिश्ते को दिखाता है। – तीसरा इमोशनल गीत है, जिसमें दर्द, त्याग और आंतरिक संघर्ष नजर आएगा। – चौथा सनातन धर्म और नागा साधुओं की दुनिया से प्रेरित गीत है। – पांचवें गाने में पारिवारिक उत्सव है, जिसमें खुशी, अपनापन और परंपरा दिखेगी।
शादी में गोआ पहुंचे साउथ और बॉलीवुड स्टार्स:अनिल कपूर-जैकी श्रॉफ, चिरंजीवी और नागार्जुन ट्रेडिशनल लुक में नजर आए; तृषा कृष्णन भी शामिल हुईं

अभिनेत्री और राजनेता खुशबू सुंदर और फिल्ममेकर सुंदर सी की बड़ी बेटी अवंतिका सुंदर शादी के बंधन में बंध गई हैं। उन्होंने 25 जून को गोवा के एक लग्जरी रिसॉर्ट में श्रवण श्रीनिवासन के साथ सात फेरे लिए। इस शादी में साउथ फिल्म इंडस्ट्री और बॉलीवुड के कई बड़े कलाकार शामिल हुए। सोशल मीडिया पर शादी के कई वीडियो सामने आए हैं, जिसमें चिरंजीवी, नागार्जुन, अनिल कपूर, वेंकटेश और जैकी श्रॉफ जैसे एक्टर्स एक साथ नजर आ रहे हैं। एक्ट्रेस तृषा कृष्णन भी शादी में शामिल हुईं। खुशबू सुंदर ने इस शादी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को भी न्योता भेजा था। देखें शादी की तस्वीरें.… चिरंजीवी, जैकी श्रॉफ और अनिल कपूर का गेट-टुगेदर इस शादी के जरिए सिनेमा जगत के दिग्गज कलाकारों का एक बड़ा गेट-टुगेदर देखने को मिला। एक वीडियो में चिरंजीवी और जैकी श्रॉफ आपस में बातचीत करते नजर आ रहे हैं। वहीं एक अन्य क्लिप में चिरंजीवी, जैकी श्रॉफ, वेंकटेश, अनिल कपूर और नागार्जुन एक साथ बैठकर हंसते-मजाक करते और एक-दूसरे की तस्वीरें खींचते हुए दिखे। एक्ट्रेस तृषा कृष्णन भी शादी में शामिल हुईं। वे गोल्डन साड़ी और डायमंड नेकलेस में पहली रो में बैठकर चिरंजीवी और उनकी पत्नी से बात करती नजर आईं। वाइट और गोल्ड रही शादी की थीम शादी के फंक्शंस के लिए एक खास ड्रेस कोड रखा गया था। समारोह में पहुंचे ज्यादातर मेहमान पारंपरिक दक्षिण भारतीय परिधानों जैसे वेष्टी और मुंडू में नजर आए। शादी की थीम वाइट और गोल्ड कलर पर आधारित थी, जिससे पूरा माहौल पारंपरिक लग रहा था। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सभी स्टार्स इसी कॉम्बिनेशन के कपड़ों में दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री विजय को दिया था पर्सनल न्योता खुशबू सुंदर ने इस शादी के लिए कई बड़ी राजनीतिक हस्तियों को भी आमंत्रित किया था। इस महीने की शुरुआत में, 3 जून को खुशबू सुंदर अपने परिवार के साथ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के आवास पर गई थीं। उन्होंने विजय को शादी का पर्सनल कार्ड दिया था। सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीरें शेयर करते हुए खुशबू ने विजय को अपना भाई बताया था और लिखा था कि उनके व्यस्त शेड्यूल के बावजूद वे बहुत गर्मजोशी से मिले। हालांकि, मुख्यमंत्री इस शादी समारोह में शामिल नहीं हो सके। प्रधानमंत्री मोदी से भी की थी मुलाकात मुख्यमंत्री विजय के अलावा खुशबू सुंदर और उनके पति सुंदर सी ने पिछले महीने नई दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री को शादी का निमंत्रण पत्र सौंपा था। खुशबू सुंदर ने इस मुलाकात की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर पोस्ट की थीं और नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देने के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया था।
वर्ल्ड अपडेट्स:यूरोपीय संघ की बैठक में स्वीडन की मंत्री अपने 3 साल के बच्चे के साथ पहुंचीं

यूरोपीय संघ (EU) के जलवायु मंत्रियों की बैठक में गुरुवार को स्वीडन की जलवायु मंत्री रोमिना पूरमोख्तारी अपने 3 महीने के बेटे एडम को लेकर पहुंचीं। EU परिषद के अधिकारियों के मुताबिक, पहली बार किसी मंत्री स्तरीय बैठक में एक शिशु शामिल हुआ है। 30 साल की रोमिना ने कहा कि वह यह दिखाना चाहती थीं कि महिलाओं को मां बनने और करियर में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा तभी संभव है, जब परिवार और सरकारी नीतियों से पूरा सहयोग मिले। स्वीडन में दुनिया की सबसे उदार पेरेंटल लीव नीतियों में से एक है। वहां माता-पिता को कुल 16 महीने का सवेतन अवकाश मिलता है। इसमें से 90 दिन मां और 90 दिन पिता के लिए तय होते हैं।
वर्ल्ड अपडेट्स:यूरोपीय संघ की बैठक में स्वीडन की मंत्री अपने 3 साल के बच्चे के साथ पहुंचीं

यूरोपीय संघ (EU) के जलवायु मंत्रियों की बैठक में गुरुवार को स्वीडन की जलवायु मंत्री रोमिना पूरमोख्तारी अपने 3 महीने के बेटे एडम को लेकर पहुंचीं। EU परिषद के अधिकारियों के मुताबिक, पहली बार किसी मंत्री स्तरीय बैठक में एक शिशु शामिल हुआ है। 30 साल की रोमिना ने कहा कि वह यह दिखाना चाहती थीं कि महिलाओं को मां बनने और करियर में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा तभी संभव है, जब परिवार और सरकारी नीतियों से पूरा सहयोग मिले। स्वीडन में दुनिया की सबसे उदार पेरेंटल लीव नीतियों में से एक है। वहां माता-पिता को कुल 16 महीने का सवेतन अवकाश मिलता है। इसमें से 90 दिन मां और 90 दिन पिता के लिए तय होते हैं।
मार्केट-कैप में माइक्रोन ने मेटा-टेस्ला को पीछे छोड़ा:AI चिप की डिमांड से शेयरों में 18.4% का उछाल; कंपनी की कुल वैल्यू $1.37 ट्रिलियन पहुंची

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और मेमोरी चिप की भारी मांग के चलते अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयरों में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। गुरुवार को कारोबारी सेशन में माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन कुछ समय के लिए दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों मेटा प्लेटफॉर्म्स और टेस्ला से भी ज्यादा हो गया। मजबूत तिमाही अनुमानों (गाइडेंस) के बाद निवेशकों के बढ़े भरोसे से कंपनी के शेयर इंट्राडे में 18.4% तक उछल गए। मेटा-टेस्ला के बिल्कुल करीब बंद हुआ मार्केट कैप रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को कारोबार खत्म होने पर माइक्रोन टेक्नोलॉजी का शेयर 15.8% की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार बंद होने पर माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.37 ट्रिलियन डॉलर रहा। इसकी तुलना में मेटा प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप 1.38 ट्रिलियन डॉलर और इलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला का मार्केट कैप 1.41 ट्रिलियन डॉलर था। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान आई बड़ी तेजी से माइक्रोन कुछ समय के लिए इन दोनों कंपनियों से आगे निकल गया था। चौथी तिमाही में $50 बिलियन रेवेन्यू का अनुमान माइक्रोन की इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे कंपनी का चौथी तिमाही (अगस्त में समाप्त होने वाली तिमाही) के लिए जारी किया गया मजबूत रेवेन्यू अनुमान है। कंपनी ने इस तिमाही में करीब 50 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने का अनुमान जताया है। यह वॉल स्ट्रीट के 43.2 बिलियन डॉलर के अनुमान से काफी ज्यादा है। इस शानदार परफॉर्मेंस ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि हाइपरस्केलर्स के कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर जारी चिंताओं के बावजूद AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च मजबूत बना हुआ है। भविष्य की सप्लाई के लिए $22 बिलियन के एडवांस ऑर्डर चिप मार्केट में मची इस होड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि माइक्रोन को भविष्य में मेमोरी चिप्स की सप्लाई सुरक्षित करने के लिए ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के कमिटमेंट (एडवांस ऑर्डर) मिल चुके हैं। यह हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और अन्य AI फोकस्ड प्रोडक्ट्स की भारी डिमांड को दर्शाता है। 2027 के बाद तक बनी रहेगी चिप की किल्लत ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) संजय मेहरोत्रा ने एनालिस्ट्स से बात करते हुए कहा कि फिलहाल मांग के मुकाबले सप्लाई पूरी होने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। बाजार में यह तंग स्थिति (शॉर्टेज) कैलेंडर वर्ष 2027 के बाद भी बने रहने की आशंका है। चिप की उपलब्धता में केवल 2028 से धीरे-धीरे सुधार होने की संभावना है। मई में छुआ था $1 ट्रिलियन का पड़ाव माइक्रोन ने इसी साल मई के आखिरी हफ्ते में पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप का आंकड़ा पार किया था। इस आंकड़े को छूकर कंपनी दुनिया की चुनिंदा दिग्गज टेक कंपनियों के क्लब में शामिल हो गई थी। इस अर्निंग रिपोर्ट के आने के बाद से अब तक कंपनी का शेयर 15% से ज्यादा चढ़ चुका है, जबकि साल 2026 में अब तक इस स्टॉक में कुल 326% की भारी बढ़त दर्ज की जा चुकी है। सेमीकंडक्टर और स्टोरेज शेयरों में आई चौतरफा तेजी माइक्रोन के शानदार नतीजों का असर पूरी इंडस्ट्री पर देखने को मिला। गुरुवार को फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 3.2% चढ़ गया। एलएसईजी (LSEG) के डेटा के मुताबिक, यह इंडेक्स अब तक के अपने सबसे मजबूत तिमाही प्रदर्शन की राह पर है। माइक्रोन की कॉम्पिटिटर कंपनियों में सैंडिस्क का शेयर 22%, वेस्टर्न डिजिटल 7.4% और सीगेट टेक्नोलॉजी 4.3% मजबूत हुआ। वहीं क्वालकॉम के शेयरों में भी तेजी आई, क्योंकि कंपनी ने अपने AI-फोकस्ड डेटा-सेंटर बिजनेस के लिए महत्वाकांक्षी ग्रोथ प्लान पेश किया है। एप्पल के कारण टेक सेक्टर में दिखा मिला-जुला रुख माइक्रोन के ब्लॉकबस्टर नतीजों के बावजूद ग्लोबल टेक सेक्टर में मिला-जुला रुख रहा। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हाइपरस्केलर्स द्वारा AI पर किया जा रहा भारी खर्च कब तक टिक पाएगा। इसी बीच एपल ने मेमोरी और स्टोरेज चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया। एपल के इस कदम से कंपनी के शेयरों में 6.1% की गिरावट आई और बाजार में एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर बूम की इस बढ़ी हुई लागत का बोझ आखिरी में कौन उठाएगा। क्या होते हैं हाइपरस्केलर्स और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी? हाइपरस्केलर्स: ये वे बड़ी क्लाउड कंप्यूटिंग और टेक कंपनियां (जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एमेजन और मेटा) होती हैं, जो बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन करती हैं। इनके द्वारा किया जाने वाला खर्च पूरी टेक इंडस्ट्री की दिशा तय करता है। हाई-बैंडविड्थ मेमोरी: यह एक एडवांस और सुपर-फास्ट मेमोरी चिप होती है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से AI और डीप लर्निंग के प्रोसेस को तेजी से चलाने के लिए किया जाता है। इसकी मांग इस समय दुनिया भर में सबसे ज्यादा है।
मार्केट-कैप में माइक्रोन ने मेटा-टेस्ला को पीछे छोड़ा:AI चिप की डिमांड से शेयरों में 18.4% का उछाल; कंपनी की कुल वैल्यू $1.37 ट्रिलियन पहुंची

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और मेमोरी चिप की भारी मांग के चलते अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयरों में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। गुरुवार को कारोबारी सेशन में माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन कुछ समय के लिए दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों मेटा प्लेटफॉर्म्स और टेस्ला से भी ज्यादा हो गया। मजबूत तिमाही अनुमानों (गाइडेंस) के बाद निवेशकों के बढ़े भरोसे से कंपनी के शेयर इंट्राडे में 18.4% तक उछल गए। मेटा-टेस्ला के बिल्कुल करीब बंद हुआ मार्केट कैप रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को कारोबार खत्म होने पर माइक्रोन टेक्नोलॉजी का शेयर 15.8% की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार बंद होने पर माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.37 ट्रिलियन डॉलर रहा। इसकी तुलना में मेटा प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप 1.38 ट्रिलियन डॉलर और इलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला का मार्केट कैप 1.41 ट्रिलियन डॉलर था। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान आई बड़ी तेजी से माइक्रोन कुछ समय के लिए इन दोनों कंपनियों से आगे निकल गया था। चौथी तिमाही में $50 बिलियन रेवेन्यू का अनुमान माइक्रोन की इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे कंपनी का चौथी तिमाही (अगस्त में समाप्त होने वाली तिमाही) के लिए जारी किया गया मजबूत रेवेन्यू अनुमान है। कंपनी ने इस तिमाही में करीब 50 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने का अनुमान जताया है। यह वॉल स्ट्रीट के 43.2 बिलियन डॉलर के अनुमान से काफी ज्यादा है। इस शानदार परफॉर्मेंस ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि हाइपरस्केलर्स के कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर जारी चिंताओं के बावजूद AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च मजबूत बना हुआ है। भविष्य की सप्लाई के लिए $22 बिलियन के एडवांस ऑर्डर चिप मार्केट में मची इस होड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि माइक्रोन को भविष्य में मेमोरी चिप्स की सप्लाई सुरक्षित करने के लिए ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के कमिटमेंट (एडवांस ऑर्डर) मिल चुके हैं। यह हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और अन्य AI फोकस्ड प्रोडक्ट्स की भारी डिमांड को दर्शाता है। 2027 के बाद तक बनी रहेगी चिप की किल्लत ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) संजय मेहरोत्रा ने एनालिस्ट्स से बात करते हुए कहा कि फिलहाल मांग के मुकाबले सप्लाई पूरी होने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। बाजार में यह तंग स्थिति (शॉर्टेज) कैलेंडर वर्ष 2027 के बाद भी बने रहने की आशंका है। चिप की उपलब्धता में केवल 2028 से धीरे-धीरे सुधार होने की संभावना है। मई में छुआ था $1 ट्रिलियन का पड़ाव माइक्रोन ने इसी साल मई के आखिरी हफ्ते में पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप का आंकड़ा पार किया था। इस आंकड़े को छूकर कंपनी दुनिया की चुनिंदा दिग्गज टेक कंपनियों के क्लब में शामिल हो गई थी। इस अर्निंग रिपोर्ट के आने के बाद से अब तक कंपनी का शेयर 15% से ज्यादा चढ़ चुका है, जबकि साल 2026 में अब तक इस स्टॉक में कुल 326% की भारी बढ़त दर्ज की जा चुकी है। सेमीकंडक्टर और स्टोरेज शेयरों में आई चौतरफा तेजी माइक्रोन के शानदार नतीजों का असर पूरी इंडस्ट्री पर देखने को मिला। गुरुवार को फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 3.2% चढ़ गया। एलएसईजी (LSEG) के डेटा के मुताबिक, यह इंडेक्स अब तक के अपने सबसे मजबूत तिमाही प्रदर्शन की राह पर है। माइक्रोन की कॉम्पिटिटर कंपनियों में सैंडिस्क का शेयर 22%, वेस्टर्न डिजिटल 7.4% और सीगेट टेक्नोलॉजी 4.3% मजबूत हुआ। वहीं क्वालकॉम के शेयरों में भी तेजी आई, क्योंकि कंपनी ने अपने AI-फोकस्ड डेटा-सेंटर बिजनेस के लिए महत्वाकांक्षी ग्रोथ प्लान पेश किया है। एप्पल के कारण टेक सेक्टर में दिखा मिला-जुला रुख माइक्रोन के ब्लॉकबस्टर नतीजों के बावजूद ग्लोबल टेक सेक्टर में मिला-जुला रुख रहा। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हाइपरस्केलर्स द्वारा AI पर किया जा रहा भारी खर्च कब तक टिक पाएगा। इसी बीच एपल ने मेमोरी और स्टोरेज चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया। एपल के इस कदम से कंपनी के शेयरों में 6.1% की गिरावट आई और बाजार में एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर बूम की इस बढ़ी हुई लागत का बोझ आखिरी में कौन उठाएगा। क्या होते हैं हाइपरस्केलर्स और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी? हाइपरस्केलर्स: ये वे बड़ी क्लाउड कंप्यूटिंग और टेक कंपनियां (जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एमेजन और मेटा) होती हैं, जो बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन करती हैं। इनके द्वारा किया जाने वाला खर्च पूरी टेक इंडस्ट्री की दिशा तय करता है। हाई-बैंडविड्थ मेमोरी: यह एक एडवांस और सुपर-फास्ट मेमोरी चिप होती है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से AI और डीप लर्निंग के प्रोसेस को तेजी से चलाने के लिए किया जाता है। इसकी मांग इस समय दुनिया भर में सबसे ज्यादा है। ये खबर भी पढ़ें… सोमवार को गिरावट के साथ खुल सकता है भारतीय बाजार: गिफ्टी निफ्टी में 150 अंकों की कमजोरी; 8% टूटा दक्षिण कोरिया का कोस्पी मुहर्रम की छुट्टी के कारण आज 26 जून को भारतीय शेयर बाजार बंद हैं। लेकिन वैश्विक बाजारों में मंदी के कारण सोमवार को ये गिरावट के साथ खुल सकता है। आज दक्षिण कोरिया का बाजार कोस्पी 8% नीचे हैं और गिफ्ट निफ्टी 150 अंकों से ज्यादा टूट गया है। पूरी खबर पढ़ें…






