IPL जितनी भाषाएं दुनिया की किसी लीग में नहीं- जियो-हॉटस्टार:अंपायर अनिल बोले- सूर्यवंशी बेस्ट प्लेयर; सरनदीप ने कहा- पंजाब क्रिकेटर्स का गढ़

क्रिकेट ब्रॉडकास्टर जियो हॉटस्टार ने दावा किया है कि दुनिया की किसी लीग में IPL जितनी इतनी भाषाएं नहीं हैं। दैनिक भास्कर मुंबई स्थित जियो-हॉटस्टार ऑफिस पहुंचा। यहां हेड कंटेंट सिद्धार्थ शर्मा, पूर्व अंपायर अनिल चौधरी, पूर्व क्रिकेटर और सिलेक्टर सरनदीप सिंह से बातचीत हुई। सिद्धार्थ ने बताया कि IPL अब 12 भाषाओं में देखा जा रहा है और भोजपुरी-हरियाणवी जैसी फीड्स तेजी से बढ़ रही हैं। वहीं पूर्व भारतीय अंपायर अनिल चौधरी ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को मौजूदा दौर का सबसे बेहतरीन टी-20 बैटर बताया। दूसरी तरफ पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता सरनदीप सिंह ने कहा कि पंजाब आज भी भारतीय क्रिकेट का सबसे बड़ा गढ़ है, जहां से लगातार बड़े खिलाड़ी निकल रहे हैं। नीचे सवाल-जवाब में पूरा इंटरव्यू पढ़ें… सवाल: IPL में 12 भाषाओं में कमेंट्री शुरू करने का आइडिया कैसे आया? सिद्धार्थ ने बताया कि लंबे समय तक भारत में क्रिकेट सिर्फ अंग्रेजी में दिखाया जाता था। 2013 में स्टार स्पोर्ट्स के पास बड़े क्रिकेट राइट्स आने के बाद हिंदी फीड की शुरुआत हुई।उन्होंने कहा- मकसद था कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी भाषा में क्रिकेट देख सकें और उससे जुड़ाव महसूस करें। 2017 में तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फीड शुरू की गईं। इसके बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ भोजपुरी, पंजाबी, हरियाणवी समेत कई नई भाषाएं जोड़ी गईं और अब IPL 12 भाषाओं में उपलब्ध है। सवाल: भोजपुरी कमेंट्री की शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती क्या थी? सिद्धार्थ के मुताबिक, सबसे बड़ी चुनौती सही कमेंटेटर ढूंढना थी। उन्होंने कहा कि हर भाषा में पूर्व क्रिकेटर उपलब्ध नहीं होते, इसलिए ऐसे लोगों को तलाशा गया जो क्रिकेट समझते हों और साथ ही अच्छे स्टोरीटेलर भी हों। उन्होंने बताया कि भोजपुरी कमेंट्री के लिए कई ऑडिशन लिए गए। 10-12 लोगों का पूल तैयार किया गया, फिर वर्कशॉप और ट्रेनिंग के बाद कुछ आवाजों को चुना गया। कमेंटेटर्स को यह भी सिखाया गया कि रोहित शर्मा की बैटिंग या विराट कोहली के कवर ड्राइव को किस अंदाज में पेश करना है। इसके लिए अलग ट्रेनिंग मॉड्यूल और फ्रेमवर्क बनाए गए। सवाल: भोजपुरी कमेंट्री इतनी वायरल क्यों हुई? सिद्धार्थ ने कहा कि भोजपुरी कमेंट्री की ताकत उसका देसी अंदाज और कहानी सुनाने की कला है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी फीड में तकनीकी विश्लेषण से ज्यादा मनोरंजन, लोकल बोली, मुहावरे और भावनात्मक जुड़ाव पर फोकस किया गया। उनके मुताबिक, भोजपुरी कमेंटेटर क्रिकेट को ऐसे पेश करते हैं कि जो दर्शक खेल की बारीकियां नहीं भी समझते, वे भी उससे जुड़ जाते हैं। यही वजह है कि भोजपुरी कमेंट्री ने अपनी अलग पहचान बना ली। सवाल: IPL कमेंट्री में पूर्व खिलाड़ियों को इतनी अहमियत क्यों दी जाती है? सिद्धार्थ ने कहा कि कोशिश रहती है कि ऐसे लोगों को कमेंट्री में लाया जाए जो IPL इकोसिस्टम का हिस्सा रहे हों। सवाल: भारतीय ब्रॉडकास्ट की तुलना विदेशी लीग्स से कैसे होती है? सिद्धार्थ ने दावा किया कि IPL ब्रॉडकास्ट दुनिया की बड़ी स्पोर्ट्स लीग्स से आगे है। उन्होंने कहा कि कवरेज की चौड़ाई, भाषाओं की संख्या और दर्शकों तक पहुंच के मामले में IPL का मॉडल अनोखा है। सवाल: पंजाबी कमेंट्री का फ्लेवर बाकी भाषाओं से अलग कैसे है? पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर सरनदीप सिंह ने कहा कि पंजाबी भाषा खुद में बहुत भावनात्मक और मजेदार है। उन्होंने बताया कि हिंदी और अंग्रेजी कमेंट्री में शब्द सीमित और औपचारिक होते हैं, जबकि पंजाबी में खुलकर बात होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाबी में ऐसे लोकल शब्द और जुमले इस्तेमाल होते हैं जो गांवों और कस्बों की भाषा से आते हैं। सवाल: पंजाबी कमेंट्री में सबसे यादगार IPL पल कौन सा रहा? सरनदीप ने पंजाब किंग्स के बड़े रन चेज और आक्रामक खेल को सबसे यादगार बताया। उन्होंने कोलकाता में 262 रन चेज करने और मुंबई इंडियंस के खिलाफ अर्शदीप सिंह के प्रदर्शन का जिक्र किया। सवाल: पंजाब से इतने क्रिकेटर क्यों निकलते हैं? सरनदीप ने कहा कि पंजाब में खेलों की संस्कृति बहुत पुरानी है। उन्होंने युवराज सिंह, हरभजन सिंह, कपिल देव, नवजोत सिंह सिद्धू जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि क्रिकेट वहां की संस्कृति का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि पंजाब के अलग-अलग इलाकों- मालवा, दोआबा और माझा की अपनी अलग बोली और फ्लेवर है, जो खिलाड़ियों और कमेंट्री दोनों में दिखाई देता है। सवाल: आधुनिक क्रिकेट में फिटनेस कितनी जरूरी हो गई है? IPL में सबसे ज्यादा मैचों में अंपायरिंग करने वाले अनिल चौधरी ने कहा कि आज के क्रिकेट में फिटनेस सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। उनके मुताबिक, अगर खिलाड़ी या अंपायर फिट नहीं है तो वह खेल की स्पीड के साथ तालमेल नहीं बैठा सकता। सवाल: अभी के समय का बेस्ट टी-20 बैटर कौन है? अनिल ने बताया कि अभी जितने यंगस्टर्स वो शानदार खेल दिखा रहे हैं। आयुष म्हात्रे, यश राज पुंजा, देवदत्त पडीक्कल सभी बेहतरीन फॉर्म में रहे, लेकिन उनका पसंदीदा प्लेयर वैभव सूर्यवंशी है। वैभव की हिटिंग एबिलिटी को अनिल ने शानदार बताया।
IPL जितनी भाषाएं दुनिया की किसी लीग में नहीं- जियो-हॉटस्टार:अंपायर अनिल बोले- सूर्यवंशी बेस्ट प्लेयर; सरनदीप ने कहा- पंजाब क्रिकेटर्स का गढ़

क्रिकेट ब्रॉडकास्टर जियो हॉटस्टार ने दावा किया है कि दुनिया की किसी लीग में IPL जितनी इतनी भाषाएं नहीं हैं। दैनिक भास्कर मुंबई स्थित जियो-हॉटस्टार ऑफिस पहुंचा। यहां हेड कंटेंट सिद्धार्थ शर्मा, पूर्व अंपायर अनिल चौधरी, पूर्व क्रिकेटर और सिलेक्टर सरनदीप सिंह से बातचीत हुई। सिद्धार्थ ने बताया कि IPL अब 12 भाषाओं में देखा जा रहा है और भोजपुरी-हरियाणवी जैसी फीड्स तेजी से बढ़ रही हैं। वहीं पूर्व भारतीय अंपायर अनिल चौधरी ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को मौजूदा दौर का सबसे बेहतरीन टी-20 बैटर बताया। दूसरी तरफ पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता सरनदीप सिंह ने कहा कि पंजाब आज भी भारतीय क्रिकेट का सबसे बड़ा गढ़ है, जहां से लगातार बड़े खिलाड़ी निकल रहे हैं। नीचे सवाल-जवाब में पूरा इंटरव्यू पढ़ें… सवाल: IPL में 12 भाषाओं में कमेंट्री शुरू करने का आइडिया कैसे आया? सिद्धार्थ ने बताया कि लंबे समय तक भारत में क्रिकेट सिर्फ अंग्रेजी में दिखाया जाता था। 2013 में स्टार स्पोर्ट्स के पास बड़े क्रिकेट राइट्स आने के बाद हिंदी फीड की शुरुआत हुई।उन्होंने कहा- मकसद था कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी भाषा में क्रिकेट देख सकें और उससे जुड़ाव महसूस करें। 2017 में तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फीड शुरू की गईं। इसके बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ भोजपुरी, पंजाबी, हरियाणवी समेत कई नई भाषाएं जोड़ी गईं और अब IPL 12 भाषाओं में उपलब्ध है। सवाल: भोजपुरी कमेंट्री की शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती क्या थी? सिद्धार्थ के मुताबिक, सबसे बड़ी चुनौती सही कमेंटेटर ढूंढना थी। उन्होंने कहा कि हर भाषा में पूर्व क्रिकेटर उपलब्ध नहीं होते, इसलिए ऐसे लोगों को तलाशा गया जो क्रिकेट समझते हों और साथ ही अच्छे स्टोरीटेलर भी हों। उन्होंने बताया कि भोजपुरी कमेंट्री के लिए कई ऑडिशन लिए गए। 10-12 लोगों का पूल तैयार किया गया, फिर वर्कशॉप और ट्रेनिंग के बाद कुछ आवाजों को चुना गया। कमेंटेटर्स को यह भी सिखाया गया कि रोहित शर्मा की बैटिंग या विराट कोहली के कवर ड्राइव को किस अंदाज में पेश करना है। इसके लिए अलग ट्रेनिंग मॉड्यूल और फ्रेमवर्क बनाए गए। सवाल: भोजपुरी कमेंट्री इतनी वायरल क्यों हुई? सिद्धार्थ ने कहा कि भोजपुरी कमेंट्री की ताकत उसका देसी अंदाज और कहानी सुनाने की कला है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी फीड में तकनीकी विश्लेषण से ज्यादा मनोरंजन, लोकल बोली, मुहावरे और भावनात्मक जुड़ाव पर फोकस किया गया। उनके मुताबिक, भोजपुरी कमेंटेटर क्रिकेट को ऐसे पेश करते हैं कि जो दर्शक खेल की बारीकियां नहीं भी समझते, वे भी उससे जुड़ जाते हैं। यही वजह है कि भोजपुरी कमेंट्री ने अपनी अलग पहचान बना ली। सवाल: IPL कमेंट्री में पूर्व खिलाड़ियों को इतनी अहमियत क्यों दी जाती है? सिद्धार्थ ने कहा कि कोशिश रहती है कि ऐसे लोगों को कमेंट्री में लाया जाए जो IPL इकोसिस्टम का हिस्सा रहे हों। सवाल: भारतीय ब्रॉडकास्ट की तुलना विदेशी लीग्स से कैसे होती है? सिद्धार्थ ने दावा किया कि IPL ब्रॉडकास्ट दुनिया की बड़ी स्पोर्ट्स लीग्स से आगे है। उन्होंने कहा कि कवरेज की चौड़ाई, भाषाओं की संख्या और दर्शकों तक पहुंच के मामले में IPL का मॉडल अनोखा है। सवाल: पंजाबी कमेंट्री का फ्लेवर बाकी भाषाओं से अलग कैसे है? पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर सरनदीप सिंह ने कहा कि पंजाबी भाषा खुद में बहुत भावनात्मक और मजेदार है। उन्होंने बताया कि हिंदी और अंग्रेजी कमेंट्री में शब्द सीमित और औपचारिक होते हैं, जबकि पंजाबी में खुलकर बात होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाबी में ऐसे लोकल शब्द और जुमले इस्तेमाल होते हैं जो गांवों और कस्बों की भाषा से आते हैं। सवाल: पंजाबी कमेंट्री में सबसे यादगार IPL पल कौन सा रहा? सरनदीप ने पंजाब किंग्स के बड़े रन चेज और आक्रामक खेल को सबसे यादगार बताया। उन्होंने कोलकाता में 262 रन चेज करने और मुंबई इंडियंस के खिलाफ अर्शदीप सिंह के प्रदर्शन का जिक्र किया। सवाल: पंजाब से इतने क्रिकेटर क्यों निकलते हैं? सरनदीप ने कहा कि पंजाब में खेलों की संस्कृति बहुत पुरानी है। उन्होंने युवराज सिंह, हरभजन सिंह, कपिल देव, नवजोत सिंह सिद्धू जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि क्रिकेट वहां की संस्कृति का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि पंजाब के अलग-अलग इलाकों- मालवा, दोआबा और माझा की अपनी अलग बोली और फ्लेवर है, जो खिलाड़ियों और कमेंट्री दोनों में दिखाई देता है। सवाल: आधुनिक क्रिकेट में फिटनेस कितनी जरूरी हो गई है? IPL में सबसे ज्यादा मैचों में अंपायरिंग करने वाले अनिल चौधरी ने कहा कि आज के क्रिकेट में फिटनेस सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। उनके मुताबिक, अगर खिलाड़ी या अंपायर फिट नहीं है तो वह खेल की स्पीड के साथ तालमेल नहीं बैठा सकता। सवाल: अभी के समय का बेस्ट टी-20 बैटर कौन है? अनिल ने बताया कि अभी जितने यंगस्टर्स वो शानदार खेल दिखा रहे हैं। आयुष म्हात्रे, यश राज पुंजा, देवदत्त पडीक्कल सभी बेहतरीन फॉर्म में रहे, लेकिन उनका पसंदीदा प्लेयर वैभव सूर्यवंशी है। वैभव की हिटिंग एबिलिटी को अनिल ने शानदार बताया।
जौ का चिल्ला रेसिपी: जौ का चीला रेसिपी: जौ के आटे का चीला, एक मील में भारी स्वाद और पोषण; विधि नोट करें

सामग्री: 1 कप जौ का आटा, 1 प्याज, 1 टमाटर, 1 हरी मिर्च, हरा धनियां, 1/2 छोटा मोटा धनिया, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/4 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, 1/4 छोटा चम्मच नमक, आवश्यकता अनुसार पानी, थोड़ा सा तेल छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: जौ का आटा में सबसे पहले एक बड़ा बाउल मिला। अब इसमें प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, हरा धनिया, हल्दी, लाल मिर्च और नमक के टुकड़े अच्छे से मिलाएं। छवि: एआई इसके बाद लिटिल-थोड़ा पानी डाले हुए एक वोट बैटर तैयार कर लें। बैटर ना मैक्सिमम सोलोमन हो और ना मैक्सिमम सोलोमन। अब गैस पर तवा गरम करें और तेल के बर्तन पर प्रभाव डालें। छवि: फ्रीपिक तैयार बैटर को तवे पर नामांकित गोल आकार में फैलाएं। मीडियम एक तरफ दोनों तरफ से सोनार और क्रिस्पी होने तक सेंक लें। जब चीला अच्छे से पक जाए तो इसे प्लेट में निकाल लें। छवि: एआई गरमा-गरम जौ का चीला हरी चटनी, टोमैटो सॉस या दही के साथ परोसें। फल तो ऊपर से थोड़ा सा मसाला मसाला भी छिड़क सकते हैं, इससे स्वाद और बढ़ जाएगा। छवि: एआई जौ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जिससे पाचन बेहतर रहता है। यह वजन नियंत्रित करने में भी मदद करता है और लंबे समय तक पेट भरने का एहसास कराता है। छवि: सोशल मीडिया समरसाइल में पिक्चर और वार्निश प्लांटर्स के लिए यह रेसिपी एकदम परफेक्ट है। छवि: एआई
‘कभी नहीं सोचा था कि मैं राजनेता बनूंगा’: कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया का विदाई संदेश | भारत समाचार

आखरी अपडेट:28 मई, 2026, 15:56 IST कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस्तीफा दिया, कहा कि उन्होंने कांग्रेस आलाकमान के आदेशों का पालन किया, राज्यपाल थावरचंद गहलोत का इस्तीफा इंतजार कर रहा है, डीके शिवकुमार को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है। इस्तीफा देने के तुरंत बाद सिद्धारमैया ने मीडिया को संबोधित किया। (छवि: पीटीआई) कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया गुरुवार को अपने इस्तीफे की घोषणा करते समय भावुक हो गए, उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा को दर्शाया और कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह एक दिन राज्य का नेतृत्व करेंगे क्योंकि उन्होंने साथी कांग्रेस के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार के लिए शीर्ष पद संभालने का रास्ता बनाया था। राज्यपाल कार्यालय को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि वह ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए हैं और अप्रत्याशित रूप से राजनीति में आए हैं। उन्होंने कहा, “मैं एक गांव से आता हूं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं राजनेता, मुख्यमंत्री या विपक्ष का नेता बनूंगा। मैं संयोग से राजनीति में आया क्योंकि मेरे परिवार से कोई भी इस क्षेत्र में नहीं था।” दिग्गज कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने बार-बार कहा है कि जब भी पार्टी नेतृत्व निर्देश देगा, वह पद छोड़ देंगे। उन्होंने कहा, “मैंने कई बार कहा है कि जब भी हाईकमान मुझे सूचित करेगा, मैं अपना इस्तीफा दे दूंगा। परसों हाईकमान ने मुझसे इस्तीफा देने के लिए कहा और मैंने उनसे कहा कि मैं इसे आज सौंप दूंगा। इसलिए, मैंने इसे सौंप दिया है।” सिद्धारमैया ने कहा कि एक बार राज्यपाल के लौटने पर, उन्हें उम्मीद है कि इस्तीफा “संविधान के अनुसार” स्वीकार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “एक बार जब कोई मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा दे देता है, तो उसे इसे स्वीकार करना चाहिए और अगले मुख्यमंत्री के लिए रास्ता बनाना चाहिए।” यह इस्तीफा कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन पर लंबे समय से चल रही अटकलों और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की संभावित पदोन्नति पर कांग्रेस के भीतर बढ़ती चर्चा के बीच आया है। सूत्रों ने कहा कि सिद्धारमैया के आज दिन में राहुल गांधी से मिलने की उम्मीद है, जबकि कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक शनिवार को होने की संभावना है। अगले मुख्यमंत्री के लिए शपथ ग्रहण समारोह को सप्ताहांत तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है, रविवार संभावित तारीख है। सूत्रों के मुताबिक, नए मुख्यमंत्री के साथ कितने मंत्री शपथ ले सकते हैं, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, हालांकि इस समारोह में राहुल गांधी के शामिल होने की उम्मीद है. एक भावनात्मक संबोधन में, सिद्धारमैया ने अपनी राजनीतिक यात्रा पर विचार किया और राज्य की सेवा करने का अवसर देने के लिए कांग्रेस नेतृत्व को धन्यवाद दिया। निवर्तमान सीएम ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं, सांसदों और सहयोगियों को भी धन्यवाद दिया जिन्होंने उनके राजनीतिक जीवन के दौरान उनका समर्थन किया। अभिनेता राजकुमार की प्रसिद्ध पंक्ति “प्रशंसक भगवान हैं” का जिक्र करते हुए सिद्धारमैया ने कहा, “मैं एक राजनेता हूं। संविधान मेरा धर्म है। मतदाता मेरे भगवान हैं।” उन्होंने कहा कि उन्होंने बुद्ध, बसवन्ना, बीआर अंबेडकर और महात्मा गांधी के सिद्धांतों का पालन करके शासन करने की कोशिश की थी और सामाजिक न्याय और समान अवसर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी। अपनी सरकार के प्रदर्शन पर प्रकाश डालते हुए, सिद्धारमैया ने दावा किया कि कांग्रेस प्रशासन ने 2023 और 2026 के बीच 158 वादों को पूरा किया है, जिसमें पहले वर्ष के भीतर पार्टी की पांच प्रमुख गारंटी योजनाओं का कार्यान्वयन भी शामिल है। उन्होंने कहा, ”हमने कर्नाटक के लोगों को जो वचन दिया था, उसे पूरा किया है।” अपने आर्थिक रिकॉर्ड का बचाव करते हुए, सिद्धारमैया ने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया कि उनकी सरकार ने कर्नाटक को कर्ज में धकेल दिया है। उन्होंने कहा, “उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री, जो वित्त मंत्री भी हैं, ने राज्य को कर्ज में डुबो दिया। यह गलत है। मैंने विधानसभा में भी यह कहा है।” कांग्रेस नेता ने कर्नाटक के आर्थिक प्रदर्शन की ओर भी इशारा किया, उन्होंने दावा किया कि राज्य जीएसटी संग्रह में राष्ट्रीय स्तर पर दूसरे स्थान पर है और 8.1% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो 2026-27 के लिए राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि अनुमान 7.4% से अधिक है। उनका इस्तीफा कर्नाटक में एक बड़े राजनीतिक परिवर्तन का प्रतीक है और कांग्रेस आलाकमान के लिए राज्य के अगले मुख्यमंत्री की औपचारिक घोषणा करने का मंच तैयार करता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘कभी नहीं सोचा था कि मैं राजनेता बनूंगा’: कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया का विदाई संदेश अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सिद्धारमैया का इस्तीफा(टी)कर्नाटक के मुख्यमंत्री(टी)कांग्रेस आलाकमान(टी)डीके शिवकुमार(टी)कर्नाटक की राजनीति(टी)नेतृत्व परिवर्तन(टी)कांग्रेस सरकार कर्नाटक(टी)जीएसटी संग्रह कर्नाटक
कौन हैं रेडियोलॉजिस्ट से बीजेपी चीफ बनीं अर्चना गुप्ता, जिन्होंने 43 साल बाद हरियाणा में रचा इतिहास?

हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष अर्चना गुप्ता: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को संगठनात्मक नियुक्तियों के एक नए दौर की घोषणा की, जिसमें अर्चना गुप्ता को अपनी हरियाणा इकाई का नया अध्यक्ष नामित किया गया। नियुक्तियों की घोषणा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा जारी अलग-अलग अधिसूचनाओं के माध्यम से की। हरियाणा में नियुक्ति के साथ ही केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को पार्टी की दिल्ली इकाई का नया अध्यक्ष नामित किया गया। उन्होंने वीरेंद्र सचदेवा का स्थान लिया, जो अब तक दिल्ली भाजपा प्रमुख के रूप में कार्यरत थे। भाजपा ने पंजाब और त्रिपुरा में नेतृत्व परिवर्तन की भी घोषणा की। सरदार केवल सिंह ढिल्लों को पार्टी की पंजाब इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, सभी नियुक्तियाँ तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। कौन हैं अर्चना गुप्ता? हरियाणा भाजपा अध्यक्ष के रूप में पदोन्नत होने से पहले, अर्चना गुप्ता ने हरियाणा में पार्टी के राज्य महासचिव के रूप में कार्य किया। वह इस भूमिका में मोहन लाल बडोली की जगह लेंगी। पिछले कुछ वर्षों में, अर्चना गुप्ता ने भाजपा के भीतर कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाई हैं, जिनमें पानीपत जिले के लिए भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष और बाद में पानीपत में भाजपा जिला अध्यक्ष के रूप में कार्य करना शामिल है। अपने राजनीतिक कार्यों के अलावा, वह पेशेवर रूप से एक रेडियोलॉजिस्ट के रूप में भी जानी जाती हैं। पृष्ठभूमि और परिवार: एक रिपोर्ट के मुताबिक पुदीनाअर्चना गुप्ता का जन्म 20 जनवरी 1968 को हुआ था और वह विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) से भी जुड़ी रही हैं। उनके पति डॉ. अनिल गुप्ता पेशे से नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। उनके बेटे अविरल ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की है, जबकि उनकी बेटी अरुशी एक डॉक्टर हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)भारतीय जनता पार्टी(टी)बीजेपी अध्यक्ष(टी)हरियाणा बीजेपी(टी)हरियाणा समाचार
फ्रेंच ओपन- नोवाक जोकोविच तीसरे राउंड में पहुंचे:रायबकिना उलटफेर का शिकार, स्वियातेक-स्वितोलिना अगले दौर में

सर्बिया के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने फ्रेंच ओपन के तीसरे दौर में जगह बना ली है। 39 वर्षीय जोकोविच ने फ्रांस के वैलेंटाइन रोयर को चार सेट में हराया। वहीं महिला वर्ग में ऑस्ट्रेलियन ओपन चैंपियन एलिना रायबकिना को बड़ा उलटफेर झेलना पड़ा। जोकोविच ने 74वीं रैंक वाले वैलेंटाइन रोयर को 6-3, 6-2, 6-7 (7), 6-3 से हराया। करीब 3 घंटे 44 मिनट तक चले मुकाबले में रोयर ने उन्हें कड़ी चुनौती दी। तीसरे सेट के टाईब्रेकर में बैकहैंड चूकने के कारण जोकोविच मैच जल्दी खत्म नहीं कर सके। पेरिस में लगातार चौथे दिन तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। गर्मी के कारण जोकोविच चेंजओवर के दौरान गर्दन और सिर पर आइस पैक लगाते नजर आए। मैच के बाद उन्होंने कहा कि यह बेहद मुश्किल परिस्थितियों में खेला गया मुकाबला था और अनुभव ने उनकी काफी मदद की। तीसरे सेट के टाईब्रेकर में चूके, वायलिन सेलिब्रेशन किया जीत के बाद जोकोविच ने अपना मशहूर ‘वायलिन सेलिब्रेशन’ किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब उम्मीद है टूर्नामेंट के बाकी हिस्से में उनका सामना किसी और फ्रांसीसी खिलाड़ी से नहीं होगा। इस जीत के साथ जोकोविच ने रोलां गैरो में फ्रांसीसी खिलाड़ियों के खिलाफ 14-0 का रिकॉर्ड बना लिया। वह लगातार 21वें साल फ्रेंच ओपन के तीसरे दौर में पहुंचे हैं। रायबकिना को यूक्रेन की खिलाड़ी ने हराया विमेंस सिंगल्स में ऑस्ट्रेलियन ओपन चैंपियन एलिना रायबकिना को यूक्रेन की यूलिया स्टारोडुब्तसेवा ने 3-6, 6-1, 7-6 (4) से हराकर बाहर कर दिया। चार बार की चैंपियन इगा स्वियातेक ने सारा बेजलेक को 6-2, 6-3 से हराकर अगले दौर में प्रवेश किया। रोलां गैरो में यह उनकी 42वीं जीत रही। अब तीसरे दौर में उनका मुकाबला पोलैंड की मागडा लिनेट से होगा। यूक्रेन की एलिना स्वितोलिना और मार्टा कोस्त्युक भी अगले दौर में पहुंच गईं। स्वितोलिना ने कैटलिन क्वेवेदो को हराया, जबकि कोस्त्युक ने केटी वोलेट्स को मात दी। ——————————— वैभव बोले- गेल का रिकॉर्ड पता नहीं था:बस टीम के लिए खेलना था; गेल ने 30 बॉल में 100 बनाए थे, सूर्यवंशी 3 रन चूके राजस्थान के ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने बुधवार को IPL के एलिमिनेटर में हैदराबाद के खिलाफ 29 गेंदों में 97 रन बनाए। वे IPL इतिहास का सबसे तेज शतक बनाने के क्रिस गेल (30 गेंद) के रिकॉर्ड से चूक गए। पूरी खबर
‘गिरगिट से भी खतरनाक’: चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने ‘गिरगिट’ कविता से विद्रोहियों पर हमला किया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:28 मई, 2026, 13:07 IST विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर इस्तीफे और असंतोष बढ़ने पर ममता बनर्जी ने टीएमसी विद्रोहियों पर हमला करते हुए गिरगिट कविता पोस्ट की। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने पार्टी के बागियों पर निशाना साधते हुए ‘गिरगिट’ कविता लिखी। विधानसभा चुनावों में अपनी करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में गहराते आंतरिक संकट के मद्देनजर, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने “गिरगिट (गिरगिट)” शीर्षक से एक तीखे शब्दों वाली कविता लिखी, जो पार्टी के विद्रोहियों पर पलटवार करती नजर आई। यह कविता, जो बंगाली में लिखी गई है और उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई है, पार्टी के उन असंतुष्टों पर एक अप्रत्यक्ष हमला प्रतीत होती है, जिन्होंने चुनाव में हार के बाद या तो पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया है या सार्वजनिक रूप से नेतृत्व की आलोचना की है। कविता की शुरुआती पंक्तियों में ममता ने लिखा, “गिरगिट से भी ज्यादा खतरनाक – कम से कम आकार बदलने वाला अपनी आजीविका के लिए रंग बदलता है।” कविता में, ममता ने ऐसे लोगों पर “कुछ घंटों के भीतर रंग और चरित्र बदलने” और व्यक्तिगत लाभ के लिए “लोगों और कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान को बेचने” का आरोप लगाया, जो स्पष्ट रूप से उन लोगों की आलोचना के रूप में सामने आया जिन्होंने संकट के बीच पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाया है। यह भी पढ़ें: ‘कॉकरोचों को पूरा समर्थन’: टीएमसी की ममता, अभिषेक बनर्जी ने कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन किया कविता की अंतिम पंक्तियों में, तृणमूल सुप्रीमो ने विद्रोहियों को चेतावनी देते हुए संकेत दिया कि अंततः उन्हें अपने कार्यों के परिणामों का सामना करना पड़ेगा। कविता में कहा गया है, “जैसे रथ के पहिए चलेंगे, वैसे ही आपके पहिए भी चलेंगे। आपको परिणाम मिलेंगे। उस दिन गद्दारों को समझ आएगा कि मूल्यहीन अमानवीयता क्या होती है।” इस्तीफों की लहर, असंतोष ने टीएमसी को प्रभावित किया यह कविता उस दिन जारी की गई जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर आंतरिक अशांति और अधिक गहरी होती दिखाई दी, जिसमें पार्टी के भीतर से कई इस्तीफों और असंतोष की खुली अभिव्यक्तियाँ सामने आईं। केएमसी बरो XII के अध्यक्ष सुशांत घोष ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि पार्टी के प्रवक्ता और पार्षद अरूप चक्रवर्ती ने केएमसी लेखा समिति से इस्तीफा दे दिया। यह भी पढ़ें: बंगाल में ममता की हार के बाद इंडिया ब्लॉक का सवाल: अब विपक्ष का नेतृत्व कौन करता है? एक अन्य घटनाक्रम में, बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने तृणमूल के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को एक और इस्तीफा सौंप दिया, जिसमें उन्होंने सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियां छोड़ दीं और यह स्पष्ट कर दिया कि वह पार्टी में बनी रहेंगी। पूर्व मंत्री और गायक इंद्रनील सेन ने भी सक्रिय चुनावी राजनीति से हटने के अपने फैसले की घोषणा की। कई नेताओं ने पार्टी की हालिया चुनावी असफलताओं के लिए संगठन के भीतर बढ़ती “वीवीआईपी संस्कृति” को जिम्मेदार ठहराया है और आरोप लगाया है कि चुनावों के बाद जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को तेजी से दरकिनार कर दिया गया है और उन्हें समर्थन नहीं मिल रहा है। अपने त्याग पत्र में, दस्तीदार ने राशन घोटाले, भर्ती अनियमितताओं और आरजी कर बलात्कार-और-हत्या मामले से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने जनता के गुस्से को बढ़ाने और विश्वास के क्षरण में योगदान दिया है। ममता बनर्जी ने पहले नतीजों के बाद नवनिर्वाचित विधायकों के साथ अपनी पहली बैठक के दौरान असंतोष के संकेतों को स्वीकार किया था, और टिप्पणी की थी कि जो लोग पार्टी के साथ रहने के इच्छुक नहीं हैं वे छोड़ने के लिए स्वतंत्र हैं। इस पृष्ठभूमि में, उनकी नवीनतम कविता को राजनीतिक हलकों में आंतरिक असंतुष्टों के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पार्टी हाल के वर्षों में अपनी सबसे गंभीर संगठनात्मक चुनौतियों में से एक का सामना कर रही है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘गिरगिट से भी खतरनाक’: चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने ‘गिरगिट’ कविता के साथ विद्रोहियों पर हमला किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)ममता बनर्जी कविता(टी)तृणमूल कांग्रेस संकट(टी)टीएमसी आंतरिक असंतोष(टी)गिरगिट गिरगिट कविता(टी)पार्टी विद्रोही टीएमसी(टी)इस्तीफों की लहर(टी)वीवीआईपी संस्कृति आलोचना(टी)बंगाल विधानसभा हार
करनाल के युवक की अमेरिका में मौत:ट्रक खाई में गिरा, परिवार का इकलौता बेटा, पिता ने जमीन बेचकर भेजा था विदेश

अमेरिका के कैलिफोर्निया में करनाल के एक युवक की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई। युवक ट्रक ड्राइवर था। हादसे के दौरान उसका ट्रक अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा। घटना की सूचना जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में मातम छा गया। परिजन अब शव को भारत लाने के लिए सरकार से मदद मांग रहे हैं और इसके लिए फंड भी जुटाया जा रहा है। गांव बालरागड़ान निवासी गौरव कुमार अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए करीब 2 साल पहले अमेरिका गया था। उसे विदेश भेजने के लिए उसके पिता रामफल ने जमीन तक बेच दी और कर्ज भी लिया। परिवार ने करीब 50 लाख रुपए खर्च किए। गौरव डंकी रूट से कई महीनों में अमेरिका पहुंचा था। काम बदलने के बाद दोबारा ट्रक चलाना शुरू किया अमेरिका पहुंचने के बाद गौरव ने शुरुआत में करीब छह महीने तक ट्रक चलाया। बाद में वह एक स्टोर पर काम करने लगा, लेकिन वहां इनकम कम होने के कारण उसने फिर से ट्रक चलाने का फैसला लिया। परिवार को उम्मीद थी कि इससे घर की आर्थिक हालत सुधरेगी। 26 मई को आखिरी बार घर किया था कॉल जानकारी के अनुसार, 26 मई को गौरव ट्रक लेकर निकला था। रास्ते में एक रेस्टोरेंट पर चाय पीने के लिए रुका और उसने घर फोन कर बताया कि वह ट्रक चला रहा है और कुछ देर बाद फिर बात करेगा। यह कॉल उसकी जिंदगी की आखिरी कॉल साबित हुई। ट्रक का बैलेंस बिगड़ा, खाई में गिरने से मौत रेस्टोरेंट से निकलने के बाद वह कुछ ही दूरी चला था कि अचानक ट्रक का संतुलन बिगड़ गया और ट्रक खाई में जा गिरा। इस हादसे में उसकी मौके पर ही मौत हो गई। 27 मई को दोपहर करीब ढाई बजे परिवार को फोन आया, जिसमें पुलिस ने हादसे और मौत की जानकारी दी। इकलौता बेटा था, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ गौरव कुमार अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी एक बहन है, जिसकी शादी हो चुकी है। पिता रामफल ने बताया कि गौरव हर सुबह करीब 8 बजे घर फोन करता था और परिवार के सभी सदस्यों से बात करता था, लेकिन 26 मई की कॉल आखिरी साबित हुई। शव को भारत लाने के लिए फंड जुटा रहा परिवार गौरव का पार्थिव शरीर अभी अमेरिका में ही है। परिवार उसे भारत लाकर अंतिम संस्कार करना चाहता है, ताकि उसे अपने गांव की मिट्टी नसीब हो सके। इसके लिए ऑनलाइन फंड जुटाया जा रहा है और सरकार से भी आर्थिक मदद की गुहार लगाई गई है।
बांग्लादेश में 700 किलो वाले ट्रम्प भैंसे की कुर्बानी रुकी:₹3 लाख में ईद के लिए निलाम हुआ था, अब नेशनल जू भेजा गया

बांग्लादेश में डोनाल्ड ट्रम्प नाम से मशहूर सफेद भैंसे की ईद पर कुर्बानी पर रोक लगा दी गई। ईद से पहले इस भैंसे को कुर्बानी के लिए 3.85 लाख टाका (यानी करीब 3 लाख रूपए) में बेच दिया था। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, इस भैंसे का पालन-पोषण राजधानी ढाका से कुछ दूर नारायणगंज स्थित रबेया एग्रो फार्म में हुआ। फार्म के मालिक जिया उद्दीन मैरदा ने बताया कि ईद के लिए 700 किलो के इस भैंसे की कीमत 550 टका प्रति किलोग्राम लगाई गई थी। लेकिन जैसे-जैसे इस सफेद भैंसे की लोकप्रियता बढ़ती गई, वैसे-वैसे सरकार और प्रशासन का ध्यान भी उसकी तरफ गया। इसके बाद बांग्लादेश के गृह मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा की कि भैंसे को बचाकर ढाका के नेशनल जू भेजा जाएगा। गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने अधिकारियों को इस जानवर को सुरक्षित रखने का आदेश दिया। सरकार ने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति ने कुर्बानी के लिए यह भैंसा खरीदा था, उसे उसके पूरे पैसे वापस किए जाएंगे। अपने सुनहरे बालों के कारण सोशल मीडिया पर वायरल हुआ भैंसा करीब 700 किलो वजन वाला यह भैंसा सोशल मीडिया पर अचानक बहुत मशहूर हो गया। इसकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। लोग दूर-दूर से सिर्फ इस अनोखे भैंसे को देखने के लिए फार्म पर पहुंचने लगे। बच्चे, परिवार और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स उसके साथ फोटो और वीडियो बनाने लगे। इस भैंसे की सबसे खास बात उसके सिर पर मौजूद सुनहरे बालों का गुच्छा है, जो काफी हद तक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हेयरस्टाइल जैसा दिखता है। इसी वजह से लोगों ने मजाक-मजाक में उसका नाम डोनाल्ड ट्रम्प रख दिया था। लोगों की भारी भीड़ फार्म पर जमा होने लगी, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने आखिरी समय में फैसला लिया कि इस दुर्लभ भैंसे की कुर्बानी नहीं होने दी जाएगी। पशुपालन विभाग ने भैंसे को सुरक्षित रखने कि मांग की ढाका के केरानीगंज पुलिस स्टेशन के अधिकारी मोहम्मद रूहुल कुद्दुस ने बताया कि पशुपालन विभाग ने पुलिस से संपर्क कर इस भैंसे को सुरक्षित रखने की मांग की थी। अधिकारियों का मानना है कि यह भैंसा अभी जवान है और कई साल तक जिंदा रह सकता है। ANI से बात करते हुए फार्म के मालिक ने बताया कि यह भैंस 4 साल का है और यह एल्बिनो किस्म की नस्ल है। इसका रंग सफेद-गुलाबी जैसा है। इसीलिए यह दुर्लभ और अनोखी है। अब इस भैंसे को बांग्लादेश नेशनल जू में रखा गया है। जू प्रशासन ने उसके लिए अलग बाड़ा तैयार किया है और उसकी देखभाल के लिए खास कर्मचारी भी लगाए गए हैं। जू के क्यूरेटर अतीकुर रहमान ने बताया कि भैंसे को फिलहाल दो हफ्ते तक निगरानी और क्वारंटीन में रखा जाएगा। इसके बाद आम लोग उसे जू में देख सकेंगे। बांग्लादेश में एल्बिनो नस्ल बेहद दुर्लभ बांग्लादेश में सफेद या एल्बिनो भैंसे बेहद दुर्लभ माने जाते हैं। वहां ज्यादातर काले रंग के जानवर ही देखने को मिलते हैं। ऐसे में इस भैंसे का अलग रंग और उसके सिर के सुनहरे बाल लोगों के लिए आकर्षण का बड़ा कारण बन गए। एल्बिनो नस्ल के जानवरों के शरीर में मेलेनिन नाम का पिगमेंट बहुत कम या बिल्कुल नहीं बनता। यही पिगमेंट त्वचा, बाल और आंखों को रंग देता है। इसकी कमी की वजह से ऐसे जानवरों का रंग सफेद या हल्का गुलाबी दिखता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक हजारों सामान्य पशुओं में कभी-कभी एक एल्बिनो जन्म लेता है। इनकी त्वचा और आंखें संवेदनशील होती हैं, इसलिए इन्हें धूप, संक्रमण और त्वचा संबंधी बीमारियों से ज्यादा खतरा रहता है। —————— ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में 9 इस्लामिक जगहों के नाम नहीं बदलेंगे:हिंदू-सिख दौर का नाम रखा जाना था, कट्टरपंथियों के विरोध के बाद फैसला बदला पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मरियम नवाज सरकार ने लाहौर की सड़कों, चौकों और इलाकों के पुराने नाम बहाल करने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। सरकार जिन नामों को बहाल करना चाहती थी, उनमें कई हिंदू और सिख दौर के नाम शामिल थे। सरकार ने यह कदम कट्टरपंथी समूहों और सोशल मीडिया पर बढ़ते विरोध के बाद उठाया। कुछ लोगों ने इसे हिंदू और सिख पहचान वापस लाने की कोशिश बताते हुए धार्मिक रंग दे दिया था। लाहौर के डिप्टी कमिश्नर कैप्टन (रिटायर्ड) मोहम्मद अली एजाज ने पाकिस्तानी अखबार डॉन से कहा कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
प्रीति जिंटा का PBKS फैंस के लिए इमोशनल नोट:कहा- उतार-चढ़ाव में साथ देने के लिए शुक्रिया; IPL में 1 पॉइंट से बहार हुई थी पंजाब किंग्स

पंजाब किंग्स (PBKS) के आईपीएल 2026 के प्लेऑफ से बाहर होने के बाद टीम की को-ओनर और एक्ट्रेस प्रीति जिंटा ने फैंस के लिए एक इमोशनल नोट शेयर किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर कर प्रीति ने सीजन के उतार-चढ़ाव भरे सफर में टीम का साथ देने के लिए समर्थकों का आभार जताया। पंजाब किंग्स इस सीजन में 15 पॉइंट्स के साथ पांचवें नंबर पर रही और सिर्फ एक पॉइंट के अंतर से प्लेऑफ की रेस से बाहर हो गई थी। राजस्थान रॉयल्स ने मुंबई इंडियंस को हराकर चौथा स्थान हासिल किया और पंजाब को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया था। प्रीति जिंटा ने सोशल मीडिया पर जताया आभार प्रीति जिंटा ने एक्स पोस्ट में लिखा कि आईपीएल 2026 के इस उतार-चढ़ाव भरे सफर में हमारे साथ मजबूती से खड़े रहने के लिए पंजाब किंग्स के सभी फैंस का बहुत-बहुत शुक्रिया। अच्छे और बुरे समय के बीच आप सभी के प्यार ने इस सफर को और ज्यादा पूरा बना दिया। दोबारा मिलने तक मेरा सारा प्यार और शुभकामनाएं। प्रीति ने इस पोस्ट के साथ अपने सिग्नेचर स्टाइल में हैशटैग टिंग (#Ting) भी लिखा। उनकी इस पोस्ट पर फैंस लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं और टीम के खेल की तारीफ कर रहे हैं। पहले हाफ में नंबर-1 पर रही थी टीम साल 2025 में रनर-अप रही पंजाब किंग्स को इस सीजन की शुरुआत में जीत का बड़ा दावेदार माना जा रहा था। टूर्नामेंट के पहले हाफ में टीम का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। पंजाब ने लगातार अपने पहले छह मैच जीते। टीम ने छह जीत और एक बिना नतीजे वाले मैच के साथ लगातार सात मैचों तक अजेय रहने का रिकॉर्ड बनाया। पंजाब किंग्स 13 पॉइंट्स के साथ करीब एक महीने तक पॉइंट टेबल में पहले स्थान पर जमी रही। लगातार छह हार के कारण बिगड़ा खेल टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में टीम अपनी लय बरकरार नहीं रख सकी। खराब रणनीतिक फैसलों और मैच के दौरान कैच छूटने के कारण पंजाब किंग्स का प्रदर्शन लगातार गिरता गया। टीम को लगातार छह मैचों में हार का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी प्लेऑफ की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा। इसके बाद टीम ने लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) को हराकर अपनी हार का सिलसिला जरूर तोड़ा, लेकिन वे कुल 15 पॉइंट्स ही जुटा सके जो प्लेऑफ में पहुंचने के लिए काफी नहीं थे। सिर्फ एक पॉइंट के अंतर से टूटी उम्मीद पंजाब किंग्स को प्लेऑफ से बाहर करने में राजस्थान रॉयल्स (RR) की जीत की बड़ी भूमिका रही। राजस्थान रॉयल्स ने अपने आखिरी मुकाबले में मुंबई इंडियंस (MI) को हराकर कुल 16 पॉइंट्स हासिल कर लिए। इस जीत के साथ राजस्थान ने पंजाब किंग्स को हटाकर पॉइंट टेबल में चौथे स्थान पर कब्जा कर लिया और प्लेऑफ का आखिरी टिकट पा लिया। पंजाब की टीम सिर्फ एक पॉइंट कम होने की वजह से पांचवें स्थान पर रहकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई।







