राखी पर रामदेव ने कंगना के लिए भेजी मिठाइयां-रुपए:बोले- विवाद खत्म करें; कंगना ने कहा था- बाबा मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटका

रक्षाबंधन पर योग गुरु बाबा रामदेव ने अभिनेत्री और सांसद कंगना रनोट के लिए मिठाई और उपहार भेजा। उन्होंने एक सफेद लिफाफे में 500 रुपए के नोटों की गड्डी भी भेजी। इस दौरान रामदेव ने कहा कि रिश्तों में मिठास बनी रहनी चाहिए और पुराने गिले-शिकवे भुलाकर प्रेम के साथ आगे बढ़ना चाहिए। रामदेव ने कहा कि देश में किसी भी कारण से नफरत और एक-दूसरे के प्रति वैर-भाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों उनके और कंगना रनोट के बीच विवाद की चर्चा हुई थी, जिसे संवाद के जरिए खत्म किया जाना चाहिए। रामदेव ने यह भी कहा कि वे कंगना को फोन कर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देंगे। इसके बाद कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर रामदेव का वीडियो शेयर किया। उन्होंने लिखा- “त्योहार का दिन होता है सब भूल-चूक माफ करने के लिए। मेरे भाई बाबा रामदेव जी ने बहुत अच्छी बात कही कि विवाद नहीं, संवाद होना चाहिए। आज रक्षाबंधन के दिन मैं उनकी मिठाई और बड़े भाई का प्रेम, दोनों स्वीकार करती हूं। बहुत धन्यवाद। ईश्वर आपको लंबी आयु दे।” पहले जानिए विवाद कैसे शुरू हुआ कंगना रनोट ने जेन-जी प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा था। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने कंगना के बयान पर कहा था, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के युवा को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” रामदेव की इस टिप्पणी के बाद कंगना ने भी पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि बाबा रामदेव को उनकी जवानी और बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम नहीं करना चाहिए। कंगना ने फिर उठाया पुराना विवाद विवाद शांत होने के बाद अब कंगना ने एक बार फिर बाबा रामदेव की टिप्पणी का जिक्र किया है। डीडी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कंगना ने कहा कि बाबा रामदेव उनसे पहले से ही नाराज चल रहे हैं। कंगना ने कहा, “अभी उनसे पूछा गया कि कंगना ने प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा है, तो उन्होंने कहा, उसका बचपन देखा है क्या था, उसकी जवानी देखी है क्या थी। क्या बाबा रामदेव मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटका हुआ था, उसने देखा है क्या था। क्या देखा। मुझे समझ नहीं आ रहा, ऐसा क्या देखा। बताना चाहिए था न कि क्या देखा।” अब रक्षाबंधन पर रामदेव ने भेजा गिफ्ट पुराने विवाद के बीच रक्षाबंधन पर बाबा रामदेव ने अपने बयान में साफ कहा कि पुराने गिले-शिकवे भुलाकर रिश्तों में मिठास बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाद को संवाद से खत्म किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कंगना को फोन कर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देने की बात भी कही। हम इस खबर को अपडेट कर रहे हैं…
पाकिस्तान में गुरुद्वारा गिराया, मॉल बनाने की तैयारी:बलूचिस्तान में 200 साल पहले बना था, BJP बोली- सिखों की विरासत खत्म करने की कोशिश

पाकिस्तान के बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में करीब 200 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब को गिरा दिया गया। अब इस जगह पर एक मॉल का निर्माण किया जा रहा है। बलूचिस्तान गुरुद्वारा सिंह सभा के सदस्य सरदार जसबीर सिंह के अनुसार, बलूचिस्तान में कभी 12 गुरुद्वारे थे, जिनमें से अब सिर्फ 2 बचे हैं। गुरुद्वारे को गिराए जाने पर भारत में भी कड़ा विरोध हो रहा है। भाजपा के नेशनल स्पोक्सपर्सन आरपी सिंह ने अकाल तख्त साहिब से मामले को पाकिस्तान सरकार के सामने उठाने और स्वतंत्र जांच की मांग की है। 200 साल पुराने गुरुद्वारे में खुला था स्कूल क्वेटा के आर्चर रोड स्थित श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा परिसर में बाद में सेंट गैब्रिएल स्कूल संचालित हो रहा था। सिख समुदाय के नेता सरदार जसबीर सिंह के मुताबिक, अब उसी गुरुद्वारे को ढहाकर यहां शॉपिंग प्लाजा का निर्माण कराया जा रहा है। मामला बलूचिस्तान हाई कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल निर्माण रोकने से इनकार कर दिया है। निजी बिल्डर को जमीन बेची गई सिख समुदाय के मुताबिक, यह जमीन श्री गुरु सिंह सभा से जुड़ी संपत्ति थी। आरोप है कि इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) ने इसे एक निजी बिल्डर को बेच दिया। अब सवाल उठ रहा है कि ETPB को इस धार्मिक संपत्ति को बेचने का अधिकार किस आधार पर मिला और जमीन की बिक्री की प्रक्रिया क्या थी? इस पर पाकिस्तान सरकार या ETPB की ओर से आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है। 4 पॉइंट्स में पढ़ें क्या बोले आरपी सिंह:- फारूकाबाद में भी 125 साल पुराना गुरुद्वारा तोड़ा गया था पाकिस्तान के फारूकाबाद में भी 125 साल पुराने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को तोड़ा गया था। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि ये खबर बेहद दुखद है। उन्होंने कहा था कि भारत इस घटना की कड़ी निंदा करता है। यह सिखों के एक पवित्र धार्मिक स्थल को जानबूझकर निशाना बनाकर की गई तोड़फोड़ है। सबसे चिंता की बात यह है कि स्थानीय प्रशासन और इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) की ओर से इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाने की ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे साफ है कि वहां धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले अब भी जारी हैं।
नेपाल में फिर बाढ़ की संभावना, बिहार में आएगी तबाही?:गंगा और गंडक उफन रहीं, अबकी ग्लेशियर टूटा तो नियंत्रण में नहीं रहेंगे हालात

‘हालात काबू में हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।’ नेपाल में तबाही के बाद CM सम्राट चौधरी के इस बयान ने बिहार के 21 जिलों के लोगों को फौरी तौर पर राहत तो दी है। लेकिन साथ ही आगे की चुनौती के लिए भी आगाह कर दिया है। नेपाल में क्या फिर तबाही आने वाली है, अगर आई तो बिहार का क्या होगा, गंगा-गंडक-कोसी में क्या चल रहा, समझेंगे; बूझे की नाही में…। क्या नेपाल में फिर से बाढ़ आने की संभावना है? वैज्ञानिकों ने आगे के खतरे से इनकार नहीं किया है। एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि घाटी की अस्थिर ढलानें और आंशिक रूप से ढहा हुआ ग्लेशियर आने वाले दिनों में मलबे के नए बहाव से दूसरी बाढ़ की स्थिति पैदा कर सकता है। नेपाल के गृह मंत्री सूडान गुरुंग ने कहा कि ल्हेन्डे नदी अभी पूरी तरह से साफ नहीं हुई है। ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) ने कहा कि बादलों के ढके होने के कारण क्षेत्र की उपग्रह से निगरानी करने में भी दिक्कत आई है। वहीं, काठमांडू यूनिवर्सिटी के जलवायु शोधकर्ता और प्रोफेसर रिजन भक्त कायस्थ ने कहा, ‘शुरुआत में चिंता थी कि ऊपर की ओर एक और बड़ी झील बन सकती है, लेकिन अभी तक ऐसी झील के अस्तित्व की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।’ कायस्थ ने कहा, ‘जोखिम अभी भी बना हुआ है। बढ़ता तापमान ग्लेशियरों के पिघलने, बर्फ और चट्टानों के टूटने तथा हिमालय में हिमस्खलन की संभावना को बढ़ाता है। लेकिन हम सटीक रूप से यह नहीं कह सकते कि अगली घटना कहां होगी।’ नेपाल में ग्लेशियर टूटेगा तो बिहार को खतरा क्यों बिहार से करीब 400 फीट की ऊंचाई (समुंद्र तल से) पर स्थित नेपाल की सभी नदियों का पानी घूम फिर कर बिहार ही आता है। इससे नदियों के 3 रूट से ऐसे समझिए… रूट-1ः नेपाल की नारायणी से चंपारण, सारण तबाह रूट-2ः नेपाल की सप्तकोशी से सहरसा-सुपौल का एरिया प्रभावित रूट-3ः UP के रास्ते भी बिहार में आता है नेपाल का पानी मतलब यह कि नेपाल के उत्तर में हादसा हो या पश्चिम में सारा पानी बिहार ही पहुंचेगा। ऐसे में नेपाल की नदियों की हलचल का बिहार पर ज्यादा असर पड़ता है। अब नीचे के मैप से समझिए…नदियों का रूट …दूसरा ग्लेशियर टूटा तो क्या बिहार में बिगड़ेंगे हालात? बिल्कुल। अभी ताजा हालात है कि नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को आई बाढ़ के बाद बिहार के गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। वाल्मीकिनगर बैराज से हर घंटे औसतन डेढ़ लाख से ज्यादा क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, गंडक में 3 मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं, फ्लैश फ्लड आने की भी आशंका है। अब 2 कारणों से समझिए, कैसे बिगड़ सकते हैं हालात… 1. गंगा-गंडक उफान पर, पानी का बढ़ रहा दबाव बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के मुताबिक, 27 अगस्त की शाम 4 बजे तक गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक, पटना में गंगा, खगड़िया में बुढ़ी गंडक, सीवान के दरौली में घाघरा, कटिहार के कुरसेला में कोसी नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। नेपाल के पानी के कारण गंडक और गंगा में पानी का फ्लो बढ़ रहा है। खगड़िया में गंगा और बूढ़ी गंडक में पानी के कारण 20 पंचायतों में 50 हजार से ज्यादा घर पानी में डूब गए हैं। अगर नेपाल में दूसरा ग्लेशियर टूटा तो बिहार में हालात खराब हो जाएंगे। क्योंकि अभी ही नदियों में पानी काफी बढ़ गया है। आगे पानी आने पर तबाही ही मचेगी। CM सम्राट चौधरी ने 27 अगस्त को निरीक्षण करने के बाद कहा, ‘खतरा अभी टला नहीं है। भगवान की कृपा रही तो सब ठीक होगा।’ 2. अगले 5 दिन तक बिहार और नेपाल में बारिश का अलर्ट नेपाल और बिहार में अगले 5 दिन तक यानी 2 सितंबर तक बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज यानी 28 अगस्त को बिहार में तेज बारिश का अलर्ट है। वहीं, नेपाल में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। हालांकि, 29 अगस्त से 2 सितंबर तक नेपाल और बिहार में रुक-रुक कर धीमी बारिश की चेतावनी दी गई है। अगर मौसम विभाग का अनुमान सही साबित हुआ तो यह बिहार के गंडक, कोसी, गंगा के किनारे रहने वाले लोगों को खासा दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। …लेकिन राहत की 2 बातें पहली- बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के मुताबिक, नेपाल की सभी 22 नदियों का जलस्तर 27 अगस्त की शाम 5 बजे तक खतरे के निशान से नीचे हैं। खास बात है कि त्रिशूली यानी नारायणी और भोटेकोशी यानी सप्तकोशी नदी खतरे के निशान से क्रमशः 4 और 3 फीट नीचे बह रही है। मतलब अभी वहां नदियों में ज्यादा पानी नहीं है। अगर थोड़ी बारिश हुई भी तो नदियां उफान नहीं मारेंगी, बशर्ते ग्लेशियर या बादल न फट जाए। दूसरी- जल संसाधन विभाग के मुताबिक, गंडक बैराज का अपस्ट्रीम 353.770 फीट और डाउनस्ट्रीम 350.930 फीट है। जो तय मानक 362 फीट से करीब 8 फीट कम है। इसका मतलब हुआ कि अभी बैराज पर 8 फीट ज्यादा तक पानी स्टोर किया जा सकता है। अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम के पानी के स्तर में मामूली अंतर (2.84 फीट) बता रहा है कि बांध के गेट खुले हुए हैं और बांध पर ज्यादा दबाव नहीं है। मतलब पानी की गति सामान्य व नियंत्रित है।
ट्रम्प ने लेक ओंटारियो का नाम बदलकर लेक अमेरिका किया:यह अमेरिका और कनाडा का बॉर्डर; दोनों देशों की पांच बड़ी झीलों में शामिल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने के आदेश पर हस्ताक्षर किए। यह बदलाव अमेरिका के सरकारी नक्शों और भौगोलिक नामों में लागू होगा। हालांकि, ट्रम्प कनाडा को इस नए नाम का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। ट्रम्प ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। हाल ही में अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% शुल्क लगाने का ऐलान किया था। ट्रम्प ने कनाडा को व्यापार के मामले में ‘सबसे मुश्किल’ देश बताते हुए कहा कि उसके रवैये को स्वीकार नहीं किया जा सकता। नाम बदलने का फैसला ट्रम्प के लिए नया नहीं है। पिछले साल उन्होंने मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर ‘अमेरिका की खाड़ी’ करने का आदेश दिया था। अब लेक ओंटारियो का नाम बदलने का फैसला भी कनाडा के साथ बढ़ते तनाव के बीच आया है। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा के बीच स्थित पांच बड़ी झीलों में से एक है। इसका एक हिस्सा अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य से और दूसरा हिस्सा कनाडा के ओंटारियो प्रांत से जुड़ा है। झील के एक तरफ न्यूयॉर्क है, जबकि दूसरी तरफ कनाडा का सबसे बड़ा शहर टोरंटो स्थित है। दोनों देशों की सीमा भी इस झील के बीच से गुजरती है। लेक ओंटारियो का नाम यूरोपीय लोगों के अमेरिका पहुंचने से भी पहले से चला आ रहा है। यह नाम ह्यूरॉन समुदाय की भाषा के एक शब्द से निकला है, जिसका अर्थ ‘चमकते पानी की झील’ बताया जाता है। बाद में कनाडा के ओंटारियो प्रांत का नाम भी इसी झील के नाम पर रखा गया। हालांकि, नाम बदलने को लेकर एक अहम बात है। दुनिया की अंतरराष्ट्रीय झीलों और जलक्षेत्रों के नाम तय करने वाली कोई एक वैश्विक संस्था नहीं है। अमेरिका अपने सरकारी दस्तावेजों और नक्शों में इसे ‘लेक अमेरिका’ कह सकता है, लेकिन कनाडा अपनी तरफ से पुराने नाम ‘लेक ओंटारियो’ का इस्तेमाल जारी रख सकता है।
कंगना ने फिर साधा रामदेव बाबा पर निशाना:कहा- मेरी जवानी की बात करते हैं, क्या मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटके थे, जानिए क्या है विवाद

कंगना रनोट ने कुछ समय पहले Gen-Z को गटरछाप कहा था। इस पर रामदेव बाबा ने कहा “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता।” कंगना ने इस पर कहा कि बाबा रामदेव मेरी जवानी और बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम न करें। विवाद लगभग खत्म हो चुका था, लेकिन कंगना ने फिर एक बार इस विवाद पर बयान दिया है। कंगना रनोट ने डीडी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा है, ‘बाबा रामदेव मुझसे पहले ही नाराज चल रहे हैं। अभी उनसे पूछा गया कि कंगना ने प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा है, तो उन्होंने कहा, उसका बचपन देखा है क्या था, उसकी जवानी देखी है क्या थी। क्या बाबा रामदेव मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटका हुआ था, उसने देखा है क्या था। क्या देखा। मुझे समझ नहीं आ रहा, ऐसा क्या देखा। बताना चाहिए था न कि क्या देखा।’ कंगना रनोट ने इन विवादों पर भी दिया रिएक्शन- कृति सेनन एड विवाद- कंगना रनोट लगातार कृति सेनन के उस रक्षाबंधन एड की आलोचना कर रही हैं, जिसमें उन्होंने रिवीलिंग कपड़े पहने थे। कंगना ने इस विवाद पर कहा है कि क्या इस तरह के कपड़े किसी मुस्लिम फेस्टिवल में पहने दिखाए जा सकते हैं। एक्ट्रेस ने कहा कि एक फेस्टिवल कल्चर रिप्रेसेंट करता है, जिसमें इस तरह के ब्रालेट नहीं पहने जा सकते। भड़काऊ बयान देने पर रिएक्शन- कंगना ने लगातार मुद्दों पर विवादित बयान देने पर भी रिएक्शन दिया है। कंगना ने कहा कि अगर कॉकरोच है, तो उसे चप्पल से ही मारा जाएगा। उसे हाथ से नहीं मारा जाता या उसे किस नहीं किया जा सकता। वहीं अगर तितली हो, तो लोग उसे पकड़ते हैं, तस्वीरें क्लिक करते हैं। उनका कहना है कि जिस तरह के लोग बयान देते हैं, उस पर वो वैसे ही जवाब देती हैं। कंगना बोलीं- मैं बीजेपी की पपेट नहीं- कंगना ने बयानों को पार्टी से जोड़े जाने पर कहा, जब बहुत ज्यादा शोर होता है, तो कहीं न कहीं आपको भी चिल्लाना पड़ता है। मैं कई बार तगड़े बयान दे देती हूं, पर मैं जानबूझकर ऐसा नहीं करना चाहती। तो इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मैं कोई पपेट थोड़ी ना हूं। बीजेपी आज मेरे साथ है, कल हो या ना हो। दो साल से मैं पार्लियामेंट की मेंबर हूं। 20 साल से मैं कलाकार हूं। मेरा एक वजूद है। मैं अगर खड़ी हो जाऊं तो 20 प्रेस वाले आएंगे और मेरी बात सुनेंगे।’ क्या था कंगना रनोट और रामदेव बाबा का पूरा विवाद? कंगना रनोट ने जेन-जी प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा था। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने कंगना के बयान पर कहा था, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के युवा को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” इस पर कंगना ने सोशल मीडिया पर लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।”
टेक दिग्गज अब ‘किसान’ बने; अमेरिका में कृषिभूमि की होड़:गेट्स-बेजोस 7 लाख एकड़ जमीन पर आलू-गाजर उगा रहे, जुकरबर्ग पाल रहे मवेशी

दुनिया के सबसे अमीर और टेक दिग्गजों में अब पशु-पालन और खेती का शौक बढ़ रहा है। अमेरिका में खेती की जमीन अब सिर्फ किसान की जरूरत नहीं, अरबपतियों के लिए बड़ा निवेश और शौक बन चुकी है। कोई यहां मवेशी पाल रहा है, तो कोई जमीन खरीदकर भविष्य ज्यादा सुरक्षित कर रहा है। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग हवाई के काउआई द्वीप पर करीब 2,871 करोड़ रु. के 4,000 एकड़ कोउलाउ रेंच पर वाग्यू और एंगस नस्ल के मवेशी पाल रहे हैं। वहीं, रेडिट के सह-संस्थापक एलेक्सिस ओहानियन फ्लोरिडा में अपने फार्म पर केले के बाग और मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। हालांकि, इन दिग्गजों के खेती-बारी का नया शौक अमेरिका में कृषि जमीनों को एक बेहद महंगे ‘एसेट क्लास’ में बदल दिया है। ‘ द लैंड रिपोर्ट’ के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स के पास 2.75 लाख एकड़ कृषि भूमि है, जिससे वे अमेरिका के 44वें सबसे बड़े भूस्वामी बन गए हैं। अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस 4.62 लाख एकड़ और वॉलमार्ट घराने से जुड़े स्टेन क्रोनके 27 लाख एकड़ जमीन के मालिक हैं। क्रोनके ने 2025 में न्यू मैक्सिको में 9.38 लाख एकड़ जमीन खरीदी, जिसे अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी रैंच बिक्री बताया गया। अलग-अलग राज्यों में इन जमीनों पर आलू, गाजर, प्याज, सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी फसलें उगाई जाती हैं। कुछ किसानों को लीज पर भी दी जाती है। पीपुल्स कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में कृषि भूमि 411 लाख करोड़ की परिसंपत्ति बन चुकी है। अमेरिकी कृषि विभाग के मुताबिक, बीते वर्ष खेतों के मूल्य में 4.3% की बढ़ोतरी हुई। नेशनल यंग फार्मर्स कोएलिशन की पॉलिसी निदेशक एरिन फॉस्टर के अनुसार, जमीन की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि पहली बार खेती में उतरने वाले युवा या छोटे किसान प्रतिस्पर्धा से पूरी तरह बाहर हो गए हैं। जमीन में निवेश क्यों? महंगाई के साथ बढ़ती है कीमत महंगाई से सुरक्षित बचाव – सीमित प्राकृतिक संसाधन होने के कारण जमीन की कीमतें हमेशा महंगाई के साथ बढ़ती हैं। एआई और डेटा सेंटर्स की मांग – टेक कंपनियों (एआई हाइपरस्केलर्स) को विशाल डेटा सेंटर बनाने के लिए बड़े भूभाग की जरूरत होती है। लाइफस्टाइल और नॉन-फाइनेंशियल फायदे – कोरोना महामारी के बाद बड़े परिसरों में शिकार, मछली पकड़ने और खुद का ऑर्गेनिक अन्न उगाने का रुझान बढ़ा है।
नेपाल में तबाही, पानी बिहार क्यों पहुंचेगा:36 फाटक खोले, त्रिशूली-भोटेकोशी का पानी किन जिलों तक पहुंचेगा, समझिए पूरा कनेक्शन

बिहार से करीब 300 किलोमीटर दूर नेपाल में तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने तबाही मचा दी है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के पानी ने रसुवा, टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके को तहस-नहस कर दिया है। गांव के गांव बह गए, बाजार तबाह हो गए, पुल टूट गए और सड़कें कट गईं। नेपाल में आई तबाही पर बिहार सरकार अलर्ट है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गृह मंत्री अमित शाह ने बात की है और NDRF की टीम को सीमावर्ती जिलों में तैनात कर दिया है। नेपाल में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों, क्या यहां भी तबाही मचेगी, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1: नेपाल के रसुवा में बाढ़ और तबाही कैसे आई है? जवाबः 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिले में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बहुत तेज पानी आया। पानी तिब्बत की तरफ से आया और कुछ ही समय में घर, सड़क, पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बहा ले गया। उस समय रसुवा में ऐसी भारी स्थानीय बारिश की सूचना नहीं थी, इसलिए सामान्य बारिश से आई बाढ़ की संभावना कम मानी जा रही है। कैसे हुआ? कितना नुकसान? नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 95 लोगों के मौत की खबर है। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 500 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक हैं। सवाल-2: भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों? जवाबः नेपाल में आई तबाही से बिहार के खतरों को समझने के लिए भोट कोशी और त्रिशूली नदियों के तंत्रों को समझना होगा… त्रिशूली नदी के पानी से 5 जिलों को खतरा रसुवा नेपाल का उत्तरी, हिमालयी जिला है और चीन के तिब्बत से लगा है। टिमुरे/रसुवागढ़ी और स्याब्रुबेसी इसी क्षेत्र में हैं। यहां की नदियां ऊंचे हिमालय से निकलकर बहुत तेज ढाल वाले एरिया में नीचे उतरती हैं। इसी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का डिस्चार्ज अचानक बढ़ता है तो पानी तेजी से नीचे आता है। भोटेकोशी से कोसी इलाके में खतरा भोटेकोशी नेपाल के उत्तरी हिस्से में चीन-तिब्बत सीमा से निकलने वाली हिमालयी नदी है। यह सिंधुपालचोक क्षेत्र से होकर बहती है। हालांकि, अबकी बार 2008 वाले हालात नहीं सवाल-3: कितना नुकसान हो सकता है, बिहार सरकार क्या कर रही है? जवाबः अभी नुकसान का आकलन करना जल्दीबाजी होगी। गंडक और कोसी बेसिन की नदियों में पानी बढ़ना चालू है। लेकिन गति सामान्य है। CM सम्राट चौधरी ने मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। डिप्टी CM और जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि लोग सतर्क रहें, घबराएं नहीं। अगले 24 घंटे अलर्ट रहने की जरूरत है। समस्या पहले से बड़ी है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। गंडक नदी पर दबाव बढ़ने की आशंका है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से बाढ़ राहत के लिए अतिरिक्त टीमों की तैनाती की गई है। राहत एवं बचाव के लिए जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। सरकार अलर्ट, बोली-डरे नहीं सवाल-4ः नेपाल की नदियों से बिहार में क्यों आती है बाढ़? जवाबः नेपाल बिहार से करीब 400 फीट ऊंचाई (समुंद्र तल से) पर स्थित है। नेपाल में भारी बारिश होती है तो पानी ऊपर से नीचे की तरफ नेचुरल ग्रेविटी के कारण आता है। नेपाल में कोई बड़ा डैम नहीं है। जिससे पानी को कंट्रोल किया जा सके। नेपाल हिमालय पर बसा है। इसका करीब 75% हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र है। कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, महानंदा और अधवारा नदियों का समूह यहां से निकलता है। नेपाल में बारिश होने पर पानी इन्हीं नदियों के रास्ते गंगा नदी तक पहुंचता है। 129 साल से चल रही हाई डैम बनाने की बात उत्तर बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने के लिए 1897 से ही भारत और नेपाल की सरकारों के बीच सप्तकोशी नदी पर बांध की बात चल रही है। इसे लेकर आजादी से पहले और बाद में दोनों देशों की सरकारों के बीच कई बार वार्ताएं हुईं। आखिरकार 1991 में दोनों देशों के बीच इसे लेकर एक समझौता भी हुआ। 2004 में इस प्रस्तावित बांध की संभावनाओं को तलाशने के लिए नेपाल के धरान में एक संयुक्त परियोजना कार्यालय भी बना है। मगर 129 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद आज तक नेपाल के बराह क्षेत्र से 1.6 किमी उत्तर की दिशा में प्रस्तावित इस बांध के निर्माण को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। 21 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की। इसके बाद वित्त मंत्री ने कोसी-मेची परियोजना के पहले चरण की राशि जारी करने और दूसरे चरण की तकनीकी मंजूरी देने का निर्देश जल शक्ति मंत्रालय को दिया है। CM सम्राट चौधरी ने कहा कि बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए कोसी नदी पर उच्च बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जल्द बनेगी। JDU नेता संजय झा ने बताया, ‘नेपाल में हाई डैम का निर्माण एकमात्र समाधान है, जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) 2028 तक बन जाएगी।’
भारत में नेपाल जैसी तबाही को उफन रहीं 88 झीलें:खतरे में 6 प्रदेश, आखिर ग्लेशियल लेक अचानक कैसे फट जाती हैं

26 सुबह करीब 9 बजे। ग्लेशियर से टूटकर गिरे बर्फ और चट्टानों ने भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ ला दी, जिससे नेपाल के रसुवा जिले में तबाही मच गई। गांव, सड़कें और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बह गए। सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें भारत, अमेरिका और ब्रिटेन के टूरिस्ट भी शामिल हैं। करीब एक साल पहले, जुलाई 2025 में भी इसी इलाके में तिब्बत की एक ग्लेशियर झील तापमान बढ़ने से फट गई थी, जिसमें 9 लोगों की जान गई थी। ये एक पैटर्न-सा बनता जा रहा है, जिसकी जद में भारत के भी कई राज्य हैं। 5 गुना बढ़ गईं ग्लेशियर झीलें, खतरे में भारत के 6 प्रदेश IIT रोपड़ और सिडनी की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने एक साझा स्टडी की। इसी महीने जारी रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में 1990 में सिर्फ 107 ग्लेशियर झीलें थीं। 2024 तक यह संख्या बढ़कर 669 हो गई, यानी 525% की बढ़ोत्तरी। 669 में से 88 झीलों पर नेपाल जैसी ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ का खतरा मंडरा रहा है। 9 झीलों को ‘बेहद ज्यादा खतरनाक’, 18 को ‘ज्यादा खतरनाक’ और 26 को ‘मध्यम खतरनाक’ श्रेणी में रखा गया है। रिसर्चर्स ने दो झीलों पर खास मॉडलिंग की- ब्यास बेसिन की हिमसू झील और सतलुज बेसिन की एक बेनाम झील। अगर ब्यास झील का नेचुरल डैम टूट जाए, तो 1,385 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड की बाढ़ आएगी। यानी हर सेकेंड करीब 14 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे हर सेकेंड ओलंपिक साइज के 6 स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं। इसी तरह सतलुज झील से 3,507 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड पानी का सैलाब आएगा। यानी हर सेकेंड करीब 35 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे डैम और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत 588 इमारतों को खतरा है। हिमालय का बढ़ता तामपान इस खतरे को और बढ़ा रहा है। जुलाई 2026 में आई IIT खड़गपुर की एक स्टडी बताती है कि ऊंचाई वाले इलाकों का तापमान पिछले 20 सालों में करीब 1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि इससे ग्लेशियर पिघलने और नदियों के बहाव में बड़ा बदलाव आ सकता है। ग्लेशियर झीलें अचानक कैसे फट जाती हैं? पहाड़ों पर ऊंचाई पर मौजूद ग्लेशियर जब पिघलते हैं, तो उनका पानी आसपास के निचले इलाके या किसी चट्टानी दीवार के सहारे इकट्ठा होने लगता है। ये धीरे-धीरे एक झील का रूप ले लेता है, जिसे ‘ग्लेशियल लेक’ कहते हैं। ये झील ग्लेशियर के सामने या उसकी निचली सतह पर भी बन सकती है। इन झीलों को बर्फ, पहाड़ का मलबा या चट्टान की एक नैचुरल दीवार यानी ‘डैम’ रोककर रखती है। जब ये दीवार किसी वजह से अचानक टूट जाती है, तो झील में जमा लाखों-करोड़ों क्यूबिक मीटर पानी बहुत तेज रफ्तार से बेकाबू होकर नीचे की तरफ बहता है। इसी को ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, GLOF या ग्लेशियर की झील फटना कहते हैं। GLOF में पानी के बहाव की रफ्तार आम बारिश से आई बाढ़ के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है, जिससे यह रास्ते में आने वाली हर चीज को बहुत तेजी से काटती-छांटती और बहाती चली जाती है। ग्लेशियर झील 3 वजहों से फट सकती हैं… 1. ग्लोबल वॉर्मिंग से ग्लेशियर का तेजी से पिघलना 2. बर्फ या चट्टान का झील में गिरना भारी बारिश से झील का ओवरफ्लो होना GLOF की तबाही कैसे रोकी जा सकती है? नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, NDMA और नेशनल GLOF रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम के मुताबिक, क्या नेपाल की बाढ़ से भारत में फौरन कोई खतरा? इसलिए भोटेकोशी में अधिक पानी आने पर उसका पानी सुनकोशी और फिर कोसी नदी तंत्र में शामिल हो सकता है। इससे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और खगड़िया जिले काफी प्रभावित हो सकते हैं। 2008 में नेपाल के कुसहा में कोसी नदी का तटबंध टूट गया था। इसके बाद कोसी नदी अपने नए/प्राकृतिक रास्ते को छोड़कर सैकड़ों साल पुराने पूर्व की ओर वाले रास्ते पर बहने लगी। इससे अचानक नदी का रुख घनी आबादी और नए इलाकों की तरफ मुड़ गया, जिससे बिहार के 34 लाख से अधिक लोग बिना किसी पूर्व चेतावनी के भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए। हालांकि, इस बार रसुवा में लैंडस्लाइड, भूस्खलन या हिम झील टूटने से अचानक नदी में भारी मात्रा में पानी आ गया है। लेकिन नदी ने अपना रास्ता नहीं बदला है। वह अपने तय रास्ते पर बह रही है। इस कारण एक्सपर्ट तटबंध टूटने की संभावना व्यक्त नहीं कर रहे हैं। ————
जेन अल्फा स्टूडेंट्स रात 12 बजे तक धरने पर:ओपन स्कूल और प्राचार्य के विरोध में उतरे , स्कूल शिक्षा मंत्री के आश्वासन के बाद हटे

दुर्ग जिले के पेंड्रावन के स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में टीचर्स की कमी को लेकर 9-12वीं क्लास तक के बच्चे रात 12 बजे तक धरने पर बैठे रहे। करीब 400 छात्र-छात्राओं ने मंगलवार दोपहर खैरागढ़-धमधा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। ओपन स्कूल व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे स्टूडेंट्स ये स्टूडेंट्स अगले सेशन से स्कूल में चल रही ओपन स्कूल व्यवस्था खत्म करने को लेकर धरने पर बैठे थे। उनकी मांग थी कि प्राचार्य को भी हटाया जाए। साथ ही शिक्षकों की कमी भी दूर की जाए। छात्रों की मांग 17 शिक्षकों की थी। खासकर आर्ट्स और कॉमर्स के शिक्षकों की कमी को लेकर छात्र नाराज थे। विभाग ने कॉमर्स के एक शिक्षक की जल्द व्यवस्था करने का आश्वासन दिया, लेकिन छात्र पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की व्यवस्था होने तक प्रदर्शन खत्म करने को तैयार नहीं थे। 600 स्टूडेंट्स पर सिर्फ 6 शिक्षक दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक के पेंड्रावन गांव में प्राथमिक, माध्यमिक, स्वामी आत्मानंद स्कूल, ओपन स्कूल और कॉलेज की कक्षाएं संचालित होती हैं। इस पूरे संस्थान में 600 से ज्यादा स्टूडेंट्स पढ़ते हैं, लेकिन यहां सिर्फ 6 शिक्षक पदस्थ थे। शिक्षकों की कमी के कारण नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही थी, जिससे स्टूडेंट्स और पेरेंट्स लंबे समय से परेशान थे। शुक्रवार को स्टूडेंट्स ने आंदोलन की चेतावनी दी थी शिक्षकों की मांग को लेकर स्टूडेंट्स और ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग को पहले ही चेतावनी दी थी। शुक्रवार को उन्होंने अधिकारियों को तीन दिन का समय दिया था और कहा था कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो सोमवार से बड़ा आंदोलन शुरू होगा। तय समय सीमा पूरी होने के बाद भी कोई हल नहीं निकला, जिसके चलते छात्रों और ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया। स्टूडेंट्स की मांगे मानी, ओपन स्कूल खत्म हुआ छात्रों के धरने के बाद SDOP, तहसीलदार, SDM और स्कूल शिक्षा विभाग के सहायक संचालक समेत कई अधिकारी पहुंचे और छात्रों की मांग मान ली। छात्रों की बात मानते हुए प्रशासन ने ओपन स्कूल व्यवस्था को खत्म कर दिया है। साथ ही 4 नए शिक्षकों को स्कूल में नियुक्त करने की मंजूरी दी है। अब स्कूल में कुल 7 शिक्षक होंगे। साथ ही नए प्राचार्य की भी नियुक्ति की गई है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के आश्वासन के बाद हटे छात्र अधिकारियों ने छात्रों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। बाद में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से फोन पर बातचीत और आश्वासन मिलने के बाद छात्रों ने प्रदर्शन खत्म किया। धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं ने कहा कि वे 12 घंटे से धरने पर बैठे थे, इससे वे थक गए हैं और भूखे प्यासे भी हैं लेकिन उन्हें खुशी है कि उनकी मांग मान ली गई है।
जयपुर पहुंची 'मुन्ना माइकल' की एक्ट्रेस निधी अग्रवाल:एयरपोर्ट पर फैंस के साथ खिंचवाईं तस्वीरें, साउथ सिनेमा में एक्टिव हैं एक्ट्रेस

बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुकी अभिनेत्री निधि अग्रवाल बुधवार को जयपुर पहुंचीं। वह शहर में आयोजित एक इवेंट में शामिल होने के लिए आई हैं। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही निधि का सामना कुछ ऐसे फैंस से हुआ, जो रामबाग पैलेस में होने वाली एक रॉयल वेडिंग में शामिल होने के लिए पहुंच रहे थे। फैंस ने निधि को देखते ही उनके साथ फोटो खिंचवाने की इच्छा जताई। निधि ने भी अपने प्रशंसकों को निराश नहीं किया। उन्होंने बाउंसर्स से दूर होकर सभी के साथ तस्वीरें क्लिक कराईं। अचानक एयरपोर्ट पर मिले फैंस के साथ उनका यह सहज अंदाज लोगों को पसंद आया। इसके बाद निधि अपने कार्यक्रम के लिए रवाना हो गईं। साउथ सिनेमा में लगातार सक्रिय हैं निधि निधि अग्रवाल पिछले कुछ वर्षों में मुख्य रूप से तेलुगु और तमिल फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रही हैं। मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाली निधि ने फिल्मों में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने अभिनय की शुरुआत हिंदी फिल्म ‘मुन्ना माइकल’ (2017) से की थी। इस फिल्म में उन्होंने टाइगर श्रॉफ के साथ काम किया और अपने डांस और स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके बाद निधि ने तेलुगु सिनेमा का रुख किया और ‘सव्यसाची’ से तेलुगु फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद वह ‘मिस्टर मजनू’, ‘आईस्मार्ट शंकर’ और ‘हीरो’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। खासतौर पर आईस्मार्ट शंकर ने उन्हें साउथ इंडस्ट्री में काफी लोकप्रियता दिलाई। तमिल सिनेमा में भी बनाई पहचान निधि ने तमिल फिल्मों में भी काम किया है। वह अभिनेता उदयनिधि स्टालिन के साथ ‘कलगा थलाइवन’ में नजर आईं। इसके अलावा उनकी फिल्मोग्राफी में तमिल और तेलुगु सिनेमा के कई प्रोजेक्ट शामिल हैं। निधि को फिल्मों के साथ-साथ उनके ग्लैमरस लुक और सोशल मीडिया प्रेजेंस के लिए भी जाना जाता है। मॉडलिंग बैकग्राउंड के कारण फैशन और स्टाइल के मामले में भी उनकी खास पहचान बनी हुई है। पवन कल्याण के साथ ‘हरि हर वीरा मल्लू’ को लेकर चर्चा में रहीं हाल के वर्षों में निधि की सबसे चर्चित फिल्मों में ‘हरि हर वीरा मल्लू’ भी शामिल रही, जिसमें उन्होंने तेलुगु सुपरस्टार पवन कल्याण के साथ स्क्रीन शेयर की। इस बड़े प्रोजेक्ट के कारण निधि एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आईं। निधि की लगातार बढ़ती सक्रियता बताती है कि वह अब केवल एक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। हिंदी फिल्मों से शुरुआत करने के बाद उन्होंने तेलुगु और तमिल सिनेमा में अपनी जगह बनाई है और अलग-अलग भाषाओं के प्रोजेक्ट्स में काम कर रही हैं।









