Thursday, 24 Sep 2026 | 02:58 AM

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उत्तराखंड के दो बार CM रहे बीसी खंडूरी का निधन:कल हरिद्वार में होगा अंतिम संस्कार, तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा

उत्तराखंड के दो बार CM रहे बीसी खंडूरी का निधन:कल हरिद्वार में होगा अंतिम संस्कार, तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का निधन हो गया है। वह 91 साल के थे और पिछले करीब 50 दिनों से देहरादून के मैक्स सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में भर्ती थे। लंबे समय से हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे खंडूरी ने मंगलवार सुबह 11:10 बजे अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शनों के लिए देहरादून स्थित आवास पर रखा गया है, जबकि बुधवार को हरिद्वार में अंतिम संस्कार होगा। राज्य सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। खंडूरी के निधन के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और नेताओं में शोक की लहर है। उनके आवास पर नेताओं और समर्थकों का पहुंचना लगातार जारी है। सेना से जुड़े अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे थे। उनके पुत्र मनीष खंडूरी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा- वह मेरे सब कुछ थे, मेरे पिता, मेरे भगवान। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीसी खंडूरी ने सेना से लेकर राजनीति तक बहुमूल्य योगदान दिया। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहते हुए उन्होंने उत्तराखंड के विकास और देशभर में बेहतर कनेक्टिविटी के लिए लगातार काम किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उनके निधन को उत्तराखंड और राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। तस्वीरें देखिए- पूर्व सीएम के निधन पर किसने क्या कहा… अब पूर्व सीएम के बारे में जानिए…. पूर्व सीएम के निधन से जुड़ी हर अपडेट के लिए ब्लॉग से गुजर जाइए….

पंजाब- ट्रक में घुसी कार, 4 दोस्तों की मौत:2 लाशें ड्राइविंग सीट पर फंसी, एक-दूसरे से चिपकीं, कटर से काटकर निकालीं

पंजाब- ट्रक में घुसी कार, 4 दोस्तों की मौत:2 लाशें ड्राइविंग सीट पर फंसी, एक-दूसरे से चिपकीं, कटर से काटकर निकालीं

गुरदासपुर में नेशनल हाईवे पर मंगलवार सुबह ऑल्टो कार सड़क किनारे खड़े ट्रक में जा घुसी। इससे कार सवार 4 दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। 2 की लाशें ड्राइवर सीट पर फंस गईं। लोगों के अनुसार हादसे के दौरान जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद सुबह पुलिस को बुलाया गया, फिर लाशों को बाहर निकालने के लिए कार की बॉडी को कटर से काटा गया। शवों को निकालने में डेढ़ घंटे का समय लग गया। सभी एक दूसरे से चिपके हुए मिले। पुलिस जांच के अनुसार, तीन युवक हिमाचल प्रदेश के एक निजी नशा मुक्ति केंद्र से रात को ही फरार हुए थे। केंद्र से भागने के बाद उन्होंने पठानकोट में रहने वाले चौथे दोस्त को कार समेत साथ लिया, जिसके बाद तड़के करीब 4 बजे यह हादसा हो गया। पुलिस अब उस ट्रक को ट्रेस करने में जुटी है, जिसके पीछे यह कार टकराई थी। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पॉस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। इनमें से एक युवक 2 बच्चों का पिता था। बताया जा रहा है कि कार की स्पीड 80 से 100 के आसपास थी। चश्मदीद ने क्या बताया, 4 पॉइंट में पढ़िए… इन 4 युवकों की हुई मौत पुलिस के अनुसार हादसे में मारे गए युवकों की पहचान पठानकोट के भदरोआ स्थित टीचर कॉलोनी निवासी विक्रम उर्फ विक्की (31), गंदला लाहड़ी (सुजानपुर) निवासी नरेश कुमार, सरना निवासी विनोद कुमार और जम्मू निवासी राही के रूप में हुई है। हिमाचल में नशा मुक्ति केंद्र से भागे विनोद, राही और नरेश ने विक्रम से संपर्क किया था। इसके बाद विक्रम अपनी ऑल्टो कार लेकर उनके साथ चला गया। एक मृतक दो बच्चों का पिता था विक्रम उर्फ विक्की (31) के रूप में हुई है। वह पठानकोट में स्लीपवेल मैट्रेस के शोरूम में काम करता था और कुछ दिन पहले दोस्तों के साथ घूमने गया था। विक्की के 2 बच्चे हैं। पत्नी को फोन कर कहा था- लेट हो जाऊंगा विक्रम उर्फ विक्की ने देर रात को पठानकोट में अपनी पत्नी को फोन किया था। विक्की ने पत्नी को कहा था कि वो सुबह लेट हो जाएगा। काम पर जाना है। साथ ही उसने अपने कपड़े प्रेस करने के लिए भी कहा था। नशा मुक्ति केंद्र से भागे थे तीन युवक मामले की जांच कर रहे ASI बलजीत सिंह ने बताया कि 3 युवक हिमाचल प्रदेश में स्थित संजीवनी नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती थे।। जहां से ये बीती रात चकमा देकर फरार हो गए। पुलिस ने जब नशा मुक्ति केंद्र के मालिक से संपर्क साधा तो उसने पुष्टि की कि ये तीनों युवक रात के समय अपना बैग और सामान लेकर मोटरसाइकिल पर केंद्र से चुपके से निकल गए थे। गुरदासपुर-बटाला साइड से आ रहे थे प्रारंभिक जांच के अनुसार, ये चारों युवक ऑल्टो कार में सवार होकर गुरदासपुर से बटाला साइड की तरफ जा रहे थे। नेशनल हाईवे पर नौशहरा मज्झा सिंह के पास एक ट्रक खड़ा था। जिसमें इनकी कार पीछे से टकरा गई। हादसे के बाद ट्रक ड्राइवर ट्रक समेत मौके से फरार हो गया। पुलिस अधिकारी ने बताया हम हाईवे और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी कैमरे खंगाल रहे हैं, ताकि उस ट्रक को ट्रेस किया जा सके, जिसके पीछे कार टकराई थी। परिजनों के बयानों पर भी होगी कार्रवाई पुलिस के अनुसार युवक नशा मुक्ति केंद्र की सुरक्षा को भेदकर वहां से बाहर कैसे निकले, इस बात की जांच संबंधित क्षेत्र की पुलिस करेगी। वहीं हादसे का शिकार हुए युवकों के परिजनों से भी संपर्क कर लिया गया है। परिवारों के बयानों पर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। —— ये खबर भी पढ़ें: लुधियाना में 3 बच्चों की मां ने किया सुसाइड: मरने से पहले भाई को किया फोन; जेठ-जेठानी पर तंग करने का आरोप; पति विदेश में रहता लुधियाना के थाना मेहरबान के अंतर्गत आते गांव जीवनपुर में एक 32 वर्षीय विवाहिता ने ससुराल वालों से तंग आकर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका की पहचान पूजा कौर के रूप में हुई है। परिजनों द्वारा कल लगाए गए धरने (प्रदर्शन) के बाद पुलिस हरकत में आई और आज जेठ, जेठानी सहित 3 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है। (पढ़ें पूरी खबर)

गर्मियों में पेशाब पीला क्यों हो जाता है? क्या हीट की वजह से होता है ऐसा, डॉक्टर से जान लीजिए

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Last Updated:May 19, 2026, 10:15 IST Yellow Urine During Heatwave: गर्मियों में शरीर से ज्यादा पानी निकलने की वजह से पेशाब का रंग गहरा पीला हो सकता है. डॉक्टर अमरेंद्र पाठक के अनुसार पीला पेशाब अक्सर डिहाइड्रेशन का संकेत होता है. कुछ मेडिकल कंडीशन की वजह से भी ऐसा हो जाता है. इस परेशानी से बचने के लिए गर्म मौसम में पर्याप्त पानी और फ्लूड डाइट लेना बेहद जरूरी है. गर्मियों में डिहाइड्रेशन की वजह से पेशाब पीला हो जाता है. Summer Dehydration Signs: जब गर्मी अपने चरम पर होती है, तब इसका सीधा असर सेहत पर पड़ता है. गर्मियों के मौसम में कई लोग नोटिस करते हैं कि उनके पेशाब का रंग सामान्य की तुलना में ज्यादा पीला हो गया है. कुछ लोगों को पीले पेशाब के साथ तेज स्मेल, हल्की जलन या बार-बार प्यास लगने जैसी समस्याएं भी महसूस हो सकती हैं. ऐसे में अक्सर लोग घबरा जाते हैं और सोचते हैं कि कहीं यह किसी बीमारी का संकेत तो नहीं है. डॉक्टर्स की मानें तो गर्मियों में पेशाब पीला होना अधिकतर मामलों में सामान्य माना जाता है, क्योंकि इस मौसम में शरीर से ज्यादा पानी बाहर निकलता है. अगर इसके साथ अन्य लक्षण भी नजर आएं, तो यह किसी बीमारी का संकेत हो सकता है. ऐसी कंडीशन में डॉक्टर से मिलकर जांच करानी चाहिए. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के वाइस चेयरमैन डॉ. अमरेंद्र पाठक ने News18 को बताया गर्मियों में शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा पसीना निकालता है. पसीने के जरिए शरीर का पानी और कुछ जरूरी मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं. अगर इस दौरान व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीता, तो शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन होने लगता है. डिहाइड्रेशन की वजह से पेशाब कंसंट्रेट हो जाता है और इसका रंग गहरा पीला हो जाता है. जब शरीर में पानी कम होने लगता है, तो किडनी शरीर के पानी को बचाने की कोशिश करती है. इसी वजह से पेशाब ज्यादा गाढ़ा और पीला दिखाई देता है. डॉक्टर के मुताबिक पेशाब का रंग यूरोक्रोम नाम के एक प्राकृतिक पिगमेंट की वजह से हल्का पीला होता है. सामान्य स्थिति में जब शरीर पूरी तरह हाइड्रेटेड रहता है, तो पेशाब का रंग हल्का पीला दिखाई देता है. जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो पेशाब में मौजूद यूरोक्रोम ज्यादा कंसंट्रेटेड हो जाता है. इससे पेशाब का रंग गहरा पीला या डार्क दिखने लगता है. यही वजह है कि पर्याप्त पानी पीने के बाद अक्सर पेशाब का रंग हल्का होने लगता है. एक्सपर्ट की मानें तो गर्मी और डिहाइड्रेशन पेशाब पीला होने की सबसे कॉमन वजह हैं. हालांकि हर बार इसका कारण सिर्फ हीट नहीं होता. कई बार कुछ दवाइयां और विटामिन सप्लीमेंट्स भी पेशाब का रंग बदल सकते हैं. खासकर विटामिन-B सप्लीमेंट लेने के बाद कई लोगों का पेशाब चमकीला पीला दिखाई दे सकता है. इसके अलावा कुछ मामलों में लिवर की बीमारी, यूरिन इंफेक्शन या किडनी से जुड़ी समस्या भी पेशाब का रंग गहरा कर सकती है. अगर लंबे समय तक पेशाब का रंग गहरा पीला बना रहे, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी हो सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

आटा और मैदा में क्या अंतर है? मैदा को क्यों माना जाता है नुकसानदायक, एक्सपर्ट ने बताई असली वजह

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Last Updated:May 19, 2026, 08:44 IST Atta vs Maida Difference: आटा और मैदा दोनों गेहूं से बनते हैं. गेहूं को पीसकर आटा बनाया जाता है, जबकि मैदा प्रोसेस्ड प्रोडक्ट है. मैदा बनाने की प्रक्रिया में फाइबर और कई पोषक तत्व कम हो जाते हैं. इस वजह से मैदा को सेहत के लिए ठीक नहीं माना जाता है. ज्यादा मैदा खाने से पाचन, वजन और ब्लड शुगर से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. आटा और मैदा दोनों गेहूं से बनाए जाते हैं, लेकिन इनमें पोषक तत्वों की मात्रा अलग होती है. Atta or Maida Which is Better: गेहूं को पीसकर आटा बनाया जाता है और सदियों से इससे रोटी और पराठे बनाए जा रहे हैं. गेहूं से बना आटा सेहत के लिए फायदेमंद होता है. आजकल आटे के बजाय ज्यादातर चीजें मैदा से बनाई जा रही हैं. पिज्जा, बर्गर, केक, बिस्किट और समोसे जैसी चीजों में मैदा का इस्तेमाल ज्यादा होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स मैदा को सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं. कई लोग तो मैदा को सफेद जहर तक बताते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि आटा और मैदा दोनों गेहूं से बनते हैं, लेकिन इनमें पोषक तत्वों में बड़ा अंतर होता है. यह अंतर आटा और मैदा बनाने की प्रक्रिया में आ जाता है. एक्सपर्ट से यह जानने की कोशिश करते हैं कि आटे और मैदा में से कौन सी चीज सेहत के लिए ज्यादा बेहतर है. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया आटा साबुत गेहूं को पीसकर बनाया जाता है. मैदा बनाने के लिए गेहूं के छिलके और अंकुर को पूरी तरह से हटा दिया जाता है. इसके बाद बचे हुए हिस्से को बारीक पीसकर ब्लीच किया जाता है, जिससे मैदा का रंग सफेद हो जाता है. यही प्रक्रिया दोनों चीजों में बड़ा अंतर पैदा करती है. आटे में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. मैदा बनाने के दौरान अधिकांश फाइबर और पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं. इसमें सिर्फ स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट ही बचते हैं. यही वजह है कि आटे को सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, जबकि मैदा को नुकसानदायक माना जाता है. मैदा का सेवन कई बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है. मैदा को नुकसानदायक क्यों माना जाता है? एक्सपर्ट के मुताबिक मैदा में फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है. यही वजह है कि इसे खाने के बाद पेट जल्दी भरता नहीं और भूख जल्दी लग सकती है. मैदा जल्दी पचती है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. बार-बार ज्यादा मात्रा में मैदा से बनी चीजें खाने से वजन बढ़ने, मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है. यही कारण है कि इसे कम से कम खाना चाहिए. मैदा में फाइबर कम होने की वजह से यह पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकता है. कुछ लोगों को ज्यादा मैदा खाने के बाद कब्ज, गैस या पेट भारी होने जैसी समस्या महसूस हो सकती है. दूसरी तरफ आटे में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर रखने और पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराने में मदद करता है. इसलिए मैदा के बजाय आटे का सेवन करना चाहिए. क्या मैदा में पोषण बिल्कुल नहीं होता? मैदा में कुछ मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और एनर्जी जरूर होती है, लेकिन इसमें फाइबर और जरूरी पोषक तत्व काफी कम हो जाते हैं. यही वजह है कि इसे रिफाइंड फ्लोर कहा जाता है. कई देशों में मैदा में कुछ विटामिन और आयरन बाद में मिलाए जाते हैं, लेकिन फिर भी इसे साबुत आटे जितना पौष्टिक नहीं माना जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लगातार ज्यादा मैदा खाने से भविष्य में लाइफस्टाइल डिजीज का खतरा बढ़ सकता है. आजकल फास्ट फूड और बेकरी आइटम्स की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से बच्चे और युवा ज्यादा मात्रा में मैदा का सेवन कर रहे हैं. कई पैकेज्ड फूड्स में भी मैदा का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी जानकारी लोगों को नहीं होती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

विदेश में भारत के लिए कठिन प्रश्न उठाने वाले राजनयिक सिबी जॉर्ज से मिलें | भारत समाचार

Iranian President Masoud Pezeshkian and US President Donald Trump. (AFP)

आखरी अपडेट:19 मई, 2026, 08:23 IST केरल के कोट्टायम जिले के पाला के पोडिमट्टम परिवार से आने वाले जॉर्ज पिछले तीन दशकों में कठिन राजनयिक कार्यभारों से परिचित नहीं हैं। प्रधान मंत्री की वर्तमान यूरोप यात्रा में, जॉर्ज – विदेश मंत्रालय में भारत के सचिव (पश्चिम) – प्रधान मंत्री मोदी के साथ सबसे अधिक दिखाई देने वाले चेहरों में से एक के रूप में उभरे हैं। जब नॉर्वे के एक पत्रकार ने पूछा कि दुनिया को भारत पर भरोसा क्यों करना चाहिए और सवाल किया कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी विदेशी यात्रा के दौरान सीधे सवाल क्यों नहीं ले रहे हैं, तो कई लोगों को कूटनीतिक जवाब की उम्मीद थी। इसके बजाय, एक अनुभवी राजनयिक, सिबी जॉर्ज, आगे बढ़े और भारत की जोरदार रक्षा की – जिसने संवैधानिक मूल्यों, सभ्यतागत गौरव, लोकतांत्रिक साख और भूराजनीतिक उपलब्धियों को एक ही उत्तर में मिश्रित कर दिया। “आप किसी देश में विश्वास का परीक्षण कैसे करेंगे?” नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान कोविड-19 के दौरान भारत की भूमिका, इसकी लोकतांत्रिक प्रणाली, सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण और गहराई से विभाजित देशों को एकजुट करने की क्षमता को सूचीबद्ध करने से पहले, जॉर्ज ने शांति से जवाब दिया। उन्होंने कहा, ”हम दुनिया की आबादी का 1/6वां हिस्सा हैं, लेकिन दुनिया की समस्याओं का 1/6वां हिस्सा नहीं हैं,” यह पंक्ति अब उनकी कूटनीतिक संदेश देने की शैली के साथ निकटता से जुड़ी हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे भारत का संविधान हर नागरिक को अदालतों में जाने का मौलिक अधिकार देता है अगर उसे लगता है कि उसके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। यह आदान-प्रदान तेजी से भारत में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर फैल गया, कई लोगों ने वरिष्ठ राजनयिक की इस बात के लिए प्रशंसा की कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया के एक कठिन सवाल को बिना किसी अटपटे या अत्यधिक लिखे हुए आत्मविश्वास के साथ निपटाया। केरल के कोट्टायम जिले के पाला के पोडिमट्टम परिवार से आने वाले जॉर्ज कठिन राजनयिक कार्यभारों से परिचित नहीं हैं। प्रधान मंत्री की वर्तमान यूरोप यात्रा में, जॉर्ज – विदेश मंत्रालय में भारत के सचिव (पश्चिम) – प्रधान मंत्री मोदी के साथ सबसे अधिक दिखाई देने वाले चेहरों में से एक के रूप में उभरे हैं। ऐसा इसलिए नहीं है कि वह सुर्खियों में आना चाहते हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि वह विदेशों में भारत से जुड़े कुछ सबसे कठिन सवालों के जवाब खुद को ढूंढ रहे हैं। कूटनीति की सख्ती से नियंत्रित दुनिया में, जहां सावधानी से लिखे गए बयान आदर्श हैं, जॉर्ज की प्रतिक्रियाएं एक और कारण से सामने आती हैं: वे व्यापक हैं। खुद को संक्षिप्त आधिकारिक बातचीत तक सीमित रखने के बजाय, वह अक्सर लंबे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तर्कों के साथ जवाब देते हैं। यह दृष्टिकोण पिछले सप्ताह एक डच पत्रकार के साथ एक अन्य बातचीत के दौरान फिर से दिखाई दिया, जिसने प्रेस की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों पर भारत पर सवाल उठाया था। जॉर्ज ने सवाल खारिज नहीं किया. इसके बजाय, उन्होंने भारत के सभ्यतागत इतिहास, धार्मिक विविधता और लोकतांत्रिक संरचना की विस्तृत व्याख्या शुरू की। उन्होंने हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म का जिक्र करते हुए कहा, “दुनिया में कोई अन्य देश नहीं है जहां चार धर्म उत्पन्न हुए और फलते-फूलते रहे।” उन्होंने इस बारे में बात की कि कैसे यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम सभी को सदियों से भारत में जगह मिली है, उन्होंने भारत को एक ऐसा देश बताया जहां विविधता को न केवल सहन किया जाता है बल्कि समाज में गहराई से अंतर्निहित किया जाता है। उन्होंने उच्च मतदाता भागीदारी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्मार्टफोन और डिजिटल मीडिया के व्यापक उपयोग की ओर इशारा करके भारत की लोकतांत्रिक साख का बचाव किया। उन्होंने टिप्पणी की, “यह हमारे लोकतंत्र को बहुत शोर वाला लोकतंत्र बनाता है और हमें इस पर गर्व है।” सरकार के समर्थकों के लिए, इन क्षणों ने जॉर्ज को एक असंभावित इंटरनेट व्यक्ति में बदल दिया है – एक राजनयिक जो कठिन सवालों से बचने के बजाय उन्हें सीधे लेने के लिए तैयार दिखता है। उनके उत्तरों के क्लिप्स उनके संयम और अभिव्यक्ति की प्रशंसा वाले कैप्शन के साथ ऑनलाइन प्रसारित हो रहे हैं। लेकिन जो लोग जॉर्ज को जानते हैं उनका कहना है कि यह आत्मविश्वास रातोरात पैदा नहीं हुआ। यह दुनिया के कुछ सबसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राजनयिक वातावरण में बिताए गए तीन दशकों से अधिक समय का परिणाम है। जॉर्ज ने पहले जापान, स्विट्जरलैंड, कुवैत, होली सी, लिकटेंस्टीन और मार्शल द्वीप समूह में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया। उनका राजनयिक करियर 1993 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल होने के बाद शुरू हुआ। उनकी पहली पोस्टिंग काहिरा में हुई, जहाँ उन्होंने एक राजनीतिक अधिकारी के रूप में काम किया; एक कार्यभार जिसने उन्हें मध्य पूर्वी राजनीति और रणनीतिक कूटनीति की जटिलताओं से पहले ही अवगत करा दिया। वहां से, वह दोहा चले गए, जहां उन्होंने प्रथम सचिव के रूप में कांसुलर, मीडिया और सामुदायिक मामलों को संभाला। इन वर्षों में, जॉर्ज ने कठिन कार्यों के बीच अपना करियर बनाया। उन्होंने उस समय इस्लामाबाद में राजनीतिक परामर्शदाता के रूप में कार्य किया जब भारत-पाकिस्तान संबंध इस क्षेत्र में सबसे नाजुक थे। बाद में वह भारत के सबसे महत्वपूर्ण राजनयिक संबंधों में से एक में राजनीतिक और वाणिज्यिक दोनों जिम्मेदारियों को संभालने के लिए वाशिंगटन डीसी चले गए। उन्होंने तेहरान और रियाद में मिशन के उप प्रमुख के रूप में भी कार्य किया, उन पोस्टिंग के लिए भारत के ऊर्जा हितों, क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं और पश्चिम एशिया में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के कल्याण को संतुलित करना आवश्यक था। इन कार्यों से परिचित राजनयिकों का कहना है कि ये विदेश सेवा में सबसे कठिन नौकरियों में से एक हैं क्योंकि इनमें न केवल बातचीत कौशल की आवश्यकता होती है बल्कि संकटों को चुपचाप और कुशलता से प्रबंधित करने की क्षमता भी होती है। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के मुख्यालय में वापस आकर, जॉर्ज ने पूर्वी एशिया प्रभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ संभालीं और भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन का समन्वय किया, जो भारत के सबसे बड़े राजनयिक आउटरीच अभ्यासों में से एक था, जिसका उद्देश्य अफ्रीकी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना था।

हवाई जहाज में सफर करते वक्त कान में दर्द क्यों होने लगता है? इस समस्या से कैसे करें बचाव

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Last Updated:May 19, 2026, 07:58 IST Causes of Ear Pain While Flying: अक्सर आपने महसूस किया होगा कि हवाई जहाज में ट्रैवल करते वक्त कान बंद हो जाते हैं और कई बार कान में दर्द भी होने लगता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार फ्लाइट के दौरान एयर प्रेशर बदलने की वजह से कान में दर्द और भारीपन महसूस होता है. इस समस्या से बचने के लिए च्युइंग गम चबाना फायदेमंद हो सकता है. फ्लाइट के टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान एयर प्रेशर में अचानक बदलाव की वजह से कान में दर्द होने लगता है. Why Ears Hurt During Flights: आज के जमाने में हवाई यात्रा का चलन काफी बढ़ गया है. लोग घूमने-फिरने से लेकर काम के सिलसिले में एयर ट्रैवल करने लगे हैं. देश में लाखों लोग रोज फ्लाइट से सफर कर रहे हैं. आमतौर पर फ्लाइट में सफर करना आरामदायक एक्सपीरिएंस लगता है, लेकिन कई लोगों को टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान कान में तेज दर्द, भारीपन या बंद होने जैसा एहसास होने लगता है. कुछ लोगों को ऐसा महसूस होता है जैसे कान के अंदर दबाव बन रहा हो, जबकि कई बार सुनाई देना भी थोड़ी देर के लिए कम हो सकता है. ज्यादातर मामलों में यह परेशानी कुछ देर बाद अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन सावधानी न बरती जाए तो दर्द और बेचैनी ज्यादा बढ़ सकती है. कुछ मामलों में कान का पर्दा भी फट सकता है. मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक फ्लाइट में ट्रैवल करते वक्त कान बंद होने और कान में दर्द की वजह एयर प्रेशर में बदलाव होता है. हमारे कान के अंदर एक छोटी नली होती है, जिसे यूस्टेशियन ट्यूब कहा जाता है. इसका काम कान के अंदर और बाहर के एयर प्रेशर को संतुलित रखना होता है. सामान्य परिस्थितियों में यह ट्यूब आसानी से काम करती रहती है, लेकिन जब हवाई जहाज तेजी से ऊपर उठता है या नीचे आता है, तो केबिन के अंदर हवा का दबाव तेजी से बदलने लगता है. अगर यूस्टेशियन ट्यूब इस बदलाव के साथ तुरंत तालमेल नहीं बैठा पाती, तो कान के पर्दे पर दबाव पड़ने लगता है. यही वजह है कि कान बंद होने, दर्द, भारीपन या चुभन जैसी समस्या महसूस हो सकती है. मेडिकल भाषा में इस स्थिति को एयरप्लेन इयर कहा जाता है. किन लोगों को ज्यादा खतरा? फ्लाइट में कान दर्द की समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा माना जाता है. जिन लोगों को सर्दी-जुकाम, एलर्जी, साइनस इंफेक्शन या पहले से कान से जुड़ी कोई बीमारी हो, उनकी यूस्टेशियन ट्यूब सही तरीके से काम नहीं कर पाती. ऐसे में दबाव संतुलित करने में ज्यादा दिक्कत होती है. छोटे बच्चों में भी यह समस्या काफी कॉमन है, क्योंकि उनकी यूस्टेशियन ट्यूब पूरी तरह विकसित नहीं होती. यही कारण है कि फ्लाइट के दौरान कई बच्चे रोने लगते हैं या बेचैन हो जाते हैं. इसके अलावा बार-बार फ्लाइट में सफर करने वाले लोगों को भी यह समस्या महसूस हो सकती है. ये लक्षण भी नजर आना कॉमन फ्लाइट के दौरान कान में दर्द के साथ कई दूसरे लक्षण भी महसूस हो सकते हैं. कुछ लोगों को ऐसा लगता है जैसे कान पूरी तरह बंद हो गए हों या अंदर कुछ दबाव जमा हो गया हो. कई बार सुनने की क्षमता थोड़ी देर के लिए कम हो सकती है और आवाजें हल्की सुनाई देती हैं. कुछ यात्रियों को चक्कर जैसा महसूस हो सकता है, जबकि कुछ मामलों में कान के अंदर घंटी बजने जैसी आवाज भी सुनाई दे सकती है. ज्यादातर मामलों में ये लक्षण कुछ घंटों के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन अगर दर्द लंबे समय तक बना रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है. फ्लाइट में कान की समस्या से कैसे बचें? हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो फ्लाइट के टेकऑफ और लैंडिंग के समय च्युइंग गम चबाना या कैंडी खाना काफी फायदेमंद माना जाता है. ऐसा करने से व्यक्ति बार-बार निगलता है, जिससे यूस्टेशियन ट्यूब खुलने लगती है और कान के अंदर का दबाव संतुलित होने में मदद मिलती है. यही वजह है कि कई एयरलाइंस बच्चों और यात्रियों को टेकऑफ के समय कैंडी देती हैं. यह एक आसान और असरदार तरीका माना जाता है, जिससे कान में दर्द की संभावना कम हो सकती है. अगर फ्लाइट के दौरान कान बंद महसूस हों, तो बार-बार जम्हाई लेने या पानी पीने की कोशिश करनी चाहिए. इससे गले और कान के आसपास की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, जो यूस्टेशियन ट्यूब को खोलने में मदद कर सकती हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

पेट्रोल-डीजल 90 पैसे महंगा, 5 दिन में दूसरी बार बढ़ोतरी:छिंदवाड़ा में बिक्री की लिमिट तय; उज्जैन में कथावाचक ने दिलाई ईंधन बचाने की शपथ

पेट्रोल-डीजल 90 पैसे महंगा, 5 दिन में दूसरी बार बढ़ोतरी:छिंदवाड़ा में बिक्री की लिमिट तय; उज्जैन में कथावाचक ने दिलाई ईंधन बचाने की शपथ

देश में पेट्रोल और डीजल आज मंगलवार से 90 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। एक हफ्ते से भी कम समय में ईंधन के दामों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। अब भोपाल में एक लीटर पेट्रोल 110.75 रुपए और डीजल 95.91 रुपए का हो गया है। इंदौर-जबलपुर में प्रति लीटर पेट्रोल के नए रेट 110.79 रुपए, ग्वालियर में 110.69 रुपए और उज्जैन में 111.27 रुपए हो गए हैं। वहीं, उज्जैन में डीजल 96.40 रुपए में मिलेगा। यह भोपाल में 95.91 रुपए, इंदौर में 95.97 रुपए, जबलपुर में 95.98 रुपए और ग्वालियर में 95.86 रुपए प्रति लीटर में मिलेगा। छिंदवाड़ा में किल्लत को देखते हुए पेट्रोल-डीजल बेचने की लिमिट तय कर दी गई है। वहीं, उज्जैन में ईंधन बचाने और सोना न खरीदने की शपथ दिलाई गई। छिंदवाड़ा में पेट्रोल-डीजल बिक्री पर लिमिट तय छिंदवाड़ा में पेट्रोल-डीजल बेचने की लिमिट तय कर दी गई है। यहां पंपों से दोपहिया को 200 रुपए और छोटी कारों को 500 रुपए से ज्यादा का पेट्रोल नहीं दिया जा रहा है। वहीं, बड़ी गाड़ियों में अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल और अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जा रहा है। तेल कंपनियों ने डीलर्स को मौखिक निर्देश जारी कर तय सीमा से अधिक ईंधन बेचने पर रोक लगा दी है। पेट्रोल पंप के स्टॉक और बिक्री की कंपनियों द्वारा सीधे ऑनलाइन निगरानी की जा रही है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित लिमिट से ज्यादा पेट्रोल या डीजल बेचा गया, तो संबंधित रिफ्यूलिंग मशीन को तुरंत लॉक कर दिया जाएगा। कंपनियों की ओर से नया टैंकर तभी भेजा जा रहा है, जब पंप का पुराना स्टॉक पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर हो। कई पंपों पर गाड़ियों की टैंक क्षमता का केवल 25 प्रतिशत ईंधन ही उपलब्ध कराया जा रहा है। उज्जैन में कथा के दौरान पेट्रोल-डीजल बचाने की शपथ उज्जैन में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक ने श्रद्धालुओं को पेट्रोल-डीजल का कम उपयोग करने और एक साल तक सोना नहीं खरीदने की शपथ दिलाई। संत लीलाशाह कॉन्वेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में महाराष्ट्र के अमरावती से पहुंचे राष्ट्रीय संत डॉ. संतोष महाराज ने कहा- सप्ताह या महीने में कम से कम एक दिन पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों का उपयोग न करें। इसके बजाय ई-स्कूटर, ई-रिक्शा और साइकिल का ज्यादा इस्तेमाल करें, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। अब अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे। ये अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। उन्होंने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। बेस प्राइस से चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ यानी डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं, जिसे हम आसान भाषा में इस तरह समझ सकते हैं- 1. कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है। 2. रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है। 3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देश भर में सभी राज्यों के लिए समान होती है। 4. डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है। 5. राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं इसीलिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर और सागर जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती हैं। तेल कंपनियों को 30 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने कहा कि कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था- ईंधन का इस्तेमाल कम करें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था। पीएम ने कहा था- आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमें आयातित पेट्रो उत्पादों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए। इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव भी कम होंगे। ये खबर भी पढ़ें… MP में सांची दूध 2 रुपए प्रति लीटर महंगा अमूल और मदर डेयरी के बाद मध्य प्रदेश में अब सांची दुग्ध संघ ने भी दूध की कीमत 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दी है। नए रेट 15 मई से लागू हो गए हैं। इससे पहले सांची ने पिछले साल 7 मई को रेट बढ़ाए थे। भोपाल में पैक्ड दूध में सांची की सबसे ज्यादा खपत होती है। रोज करीब

रायबरेली में राहुल गांधी बोले- आर्थिक तूफान आने वाला है:बहुत कठिन समय आ रहा है, एक्शन लेने के बजाए मोदीजी विदेश चले गए

रायबरेली में राहुल गांधी बोले- आर्थिक तूफान आने वाला है:बहुत कठिन समय आ रहा है, एक्शन लेने के बजाए मोदीजी विदेश चले गए

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल आज से दो दिन के यूपी दौरे पर हैं। मंगलवार दोपहर 12.15 बजे राहुल रायबरेली पहुंचे। बड़े मंगल पर चुरुवा मंदिर में बजरंगबली के दर्शन किए। पुजारी ने उन्हें माला पहनाई। प्रसाद दिया। यहां राहुल ने दर्शन करने आए लोगों से बात भी की। मंदिर से राहुल सीधे बछरावां पहुंचे। सांसद निधि से बने मैरिज हॉल का उद्घाटन किया। गांव के लोगों से बात की। यहां से राहुल खीरों जाएंगे और जनसभा करेंगे। फिर लालगंज में महिला संवाद कार्यक्रम में शामिल होंगे। कल यानी 20 मई को जनता दर्शन कार्यक्रम में लोगों से मिलेंगे। स्वतंत्रता सेनानी वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण करेंगे। जनसभा के बाद अमेठी रवाना हो जाएंगे। इससे पहले, राहुल सुबह 11.30 बजे दिल्ली से लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने उनका स्वागत किया। बैनर-पोस्टर लेकर पहुंचे सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक भी एयरपोर्ट पहुंचे। ‘राहुल गांधी जिंदाबाद’ के नारे लगाए। राहुल एयरपोर्ट से निकलकर सीधे अपनी कार में बैठे और रायबरेली के लिए रवाना हो गए। इस दौरान राहुल के हाथ में चॉकलेट नजर आई। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद राहुल गांधी 6 बार रायबरेली आ चुके हैं। यह उनका 7वां दौरा होगा। इससे पहले, राहुल 19 जनवरी 2026 को रायबरेली दौरे पर आए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल के दौरे का फोकस संगठन की समीक्षा के साथ-साथ 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारियों पर होगा। राहुल बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा कर सकते हैं। 2 तस्वीरें- राहुल गांधी के रायबरेली-अमेठी दौरे की पल-पल के अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

ऋषिकेश में उज्जैनी एक्सप्रेस के 3 डिब्बे पटरी से उतरे:शंटिंग के दौरान हुआ हादसा; देर रात तक चला मरम्मत कार्य

ऋषिकेश में उज्जैनी एक्सप्रेस के 3 डिब्बे पटरी से उतरे:शंटिंग के दौरान हुआ हादसा; देर रात तक चला मरम्मत कार्य

ऋषिकेश में सोमवार रात शंटिंग के दौरान उज्जैनी एक्सप्रेस के तीन डिब्बे पटरी से उतर गए। रेलवे सूत्रों के मुताबिक शंटिंग लाइन के अंत में लगे बफर (डेड एंड) से इंजन टकरा गया, जिसके बाद डिब्बों पर दबाव बढ़ गया। इससे एक बोगी ट्रैक से बाहर निकल गई, जबकि दूसरी बीच से मुड़ गई। हादसे के दौरान जोरदार आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। घटना के बाद रेलवे अधिकारी, इंजीनियरिंग टीम और पुलिस मौके पर पहुंच गई। देर रात तक ट्रैक दुरुस्त करने और क्षतिग्रस्त डिब्बों को हटाने का काम चलता रहा। गनीमत रही कि हादसे के वक्त ट्रेन खाली थी, इसलिए कोई जनहानि नहीं हुई। जानकारी के मुताबिक उज्जैनी एक्सप्रेस सोमवार शाम करीब 6 बजे योगनगरी रेलवे स्टेशन पहुंची थी। ट्रेन को मंगलवार सुबह 6:15 बजे वापस रवाना होना था। इसी वजह से रात करीब 9:42 बजे ट्रेन को प्लेटफॉर्म से खांड गांव स्थित शंटिंग लाइन पर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान हादसा हो गया। रेलवे सूत्रों के मुताबिक शंटिंग लाइन के अंत में लगे बफर (डेड एंड) से इंजन टकरा गया। इसके बाद पूरी ट्रेन झटके के साथ रुकी और डिब्बों पर दबाव बढ़ गया। दबाव ज्यादा होने से एक बोगी ट्रैक से बाहर निकल गई, जबकि दूसरी बीच से मुड़ गई। हादसे में ट्रेन की तीन बोगियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शंटिंग के दौरान अचानक जोरदार आवाज सुनाई दी। डिब्बों को तेज झटका लगा और वे पास की दीवार से टकरा गए। आवाज सुनकर आसपास के लोग बाहर निकल आए। घटनास्थल के पास मकान होने के कारण मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। इसके बाद रेलवे कर्मचारियों और पुलिस ने ट्रैक के आसपास का इलाका खाली कराया। 5 पॉइंट में सिलसिलेवार जानिए पूरी घटना… 1. रात 9:42 बजे हुआ हादसा उज्जैनी एक्सप्रेस सोमवार शाम योगनगरी रेलवे स्टेशन पहुंची थी। रात करीब 9:42 बजे ट्रेन को प्लेटफॉर्म से खांड गांव स्थित शंटिंग लाइन पर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान हादसा हुआ। 2. शंटिंग लाइन में बफर से टकराया इंजन रेलवे सूत्रों के मुताबिक शंटिंग लाइन के अंत में लगे बफर (डेड एंड) से इंजन टकरा गया। इसके बाद पूरी ट्रेन झटके के साथ रुक गई और डिब्बों पर दबाव बढ़ गया। 3. एक बोगी ट्रैक से बाहर, दूसरी बीच से मुड़ी दबाव ज्यादा होने से ट्रेन की एक बोगी ट्रैक से बाहर निकल गई, जबकि दूसरी बीच से मुड़ गई। हादसे में तीन बोगियां क्षतिग्रस्त हुईं। 4. तेज आवाज से मची अफरातफरी हादसे के दौरान जोरदार आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। घटनास्थल के पास मकान होने के कारण मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। रेलवे कर्मचारियों और पुलिस ने इलाके को खाली कराया। 5. तकनीकी गड़बड़ी और लापरवाही की जांच प्रारंभिक तौर पर हादसे की वजह तकनीकी गड़बड़ी, ज्यादा फोर्स या लोको पायलट की लापरवाही मानी जा रही है। रेलवे की तकनीकी टीम मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की असली वजह स्पष्ट होगी। 40 मिनट बंद रहा रायवाला रेलवे फाटक हादसे और शंटिंग के दौरान रायवाला रेलवे फाटक करीब 40 मिनट तक बंद रहा। शंटिंग कई बार आगे-पीछे होने के कारण रायवाला, खांड गांव, गोहरीमाफी और आर्मी कैंट क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। बताया गया कि फाटक के दूसरी ओर करीब 40 हजार की आबादी प्रभावित हुई। देर रात तक रेस्क्यू उपकरणों का इंतजार घटना की सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारी, इंजीनियरिंग टीम, आरपीएफ और पुलिस मौके पर पहुंच गई। देर रात तक रेस्क्यू उपकरणों के आने का इंतजार चलता रहा। ट्रैक से क्षतिग्रस्त बोगियों को हटाने और लाइन बहाल करने का काम जारी रहा। मंगलवार सुबह उज्जैनी एक्सप्रेस किस समय रवाना होगी, इसे लेकर देर रात तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी। अधिकारियों ने क्या कहा मुरादाबाद रेल मंडल के सीनियर डीसीएम महेश यादव ने बताया, ट्रेन में कोई सवारी नहीं थी। कुछ कोच यार्ड में शंटिंग के लिए ले जाते समय बेपटरी हुए हैं। दुर्घटना के तकनीकी कारणों का पता लगाया जा रहा है। वहीं, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक कैलाश चंद्र भट्ट ने बताया कि हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है और फिलहाल रेल सेवाएं प्रभावित नहीं हैं। हादसे के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन से निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। इंदौर से ऋषिकेश-देहरादून को जोड़ती है उज्जैनी एक्सप्रेस उज्जैनी एक्सप्रेस मध्य प्रदेश के इंदौर को हरिद्वार, योगनगरी ऋषिकेश और देहरादून से जोड़ने वाली अहम ट्रेन है। यह सप्ताह में दो दिन गुरुवार और रविवार को संचालित होती है। इंदौर से दोपहर करीब 3:25 बजे रवाना होकर अगले दिन शाम करीब 6:45 बजे योगनगरी ऋषिकेश पहुंचती है। वहीं ऋषिकेश से सुबह करीब 6:15 बजे वापसी के लिए रवाना होती है। इसे उत्तराखंड आने-जाने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण रेल सेवाओं में शामिल माना जाता है।

हिमाचल के मैदानी इलाकों में बढ़ेगी गर्मी:ऊना का पारा 39.7॰C पहुंचा, ऊंचे क्षेत्रों में अगले 3 दिन हल्की बूंदाबांदी के आसार

हिमाचल के मैदानी इलाकों में बढ़ेगी गर्मी:ऊना का पारा 39.7॰C पहुंचा, ऊंचे क्षेत्रों में अगले 3 दिन हल्की बूंदाबांदी के आसार

हिमाचल प्रदेश के अधिकांश भागों में आज सुबह से ही धूप खिली हुई है। राज्य में 2 दिन की तेज धूप के बाद गर्मी का प्रकोप बढ़ा है। बीते 24 घंटे के दौरान 11 शहरों का अधिकतम तापमान 35 डिग्री या उससे अधिक हो गया है। इससे दिन के वक्त मैदानी इलाकों में घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान ऊना में 39.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा बिलासपुर में 38.5 डिग्री सेल्सियस, सुंदरनगर में 38.1 डिग्री, हमीरपुर में 38 डिग्री, कांगड़ा में 38.3 डिग्री, बरठी में 37.4 डिग्री और मंडी में 37 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। तापमान में बढ़ोतरी के बाद दिन के समय लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। हालांकि, ऊंचे व मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम सुहावना बना हुआ है। अगले 72 घंटे तापमान में उछाल आएगा मौसम विभाग के अनुसार- अगले 72 घंटे के दौरान तापमान में हल्का उछाल आ सकता है, जिससे गर्मी और बढ़ने की संभावना है। हालांकि, आज से एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने के आसार है, लेकिन इसका असर मुख्य रूप से अधिक ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों तक सीमित रहेगा। मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में फिलहाल गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है। अगले तीन दिन ऊंचे पहाड़ों पर बूंदाबांदी मौसम विभाग ने 19 से 21 मई तक अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई है। वहीं 22 मई को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। इसके बाद 23 और 24 मई को भी ऊंचे इलाकों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी के आसार बने हुए हैं।