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जिम में भर-भरकर लेते हैं सप्लीमेंट या इंजेक्शन? हो जाइए सावधान! एक गलती से शरीर हो सकता है खराब

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Last Updated:May 17, 2026, 14:36 IST GYM Care Tips: बॉडी बिल्डिंग करने वाले लोग अक्सर जिम में स्टेरॉयड, इंजेक्शन या भारी सप्लीमेंट का इस्तेमाल करते हैं, जिससे वह बॉडी दिखा सकें, लेकिन बस एक गलती उनकी जान ले सकती है. डॉक्टरों की जांच में सामने आया कि शरीर पर खतरनाक स्टेरॉयड का गंभीर असर पड़ा है. एक्सपर्ट ने कहा कि किसी भी प्रकार का स्टेरॉयड या सप्लीमेंट शरीर पर सीधा असर डालता है, इसलिए इसे कभी भी बिना डॉक्टर और प्रोफेशनल ट्रेनर की सलाह के शुरू नहीं करना चाहिए. गाजियाबाद: अगर आप जिम में स्टेरॉयड, इंजेक्शन या भारी सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. बीते दिनों गाजियाबाद के इंदिरापुरम में सामने आए एक मामले ने फिटनेस की दुनिया के खतरनाक सच को उजागर कर दिया है. यहां जिम करने वाले एक युवक की तबीयत स्टेरॉयड और इंजेक्शन लेने के बाद इतनी बिगड़ गई कि उसके कूल्हे के नीचे का हिस्सा खराब हो गया. डॉक्टरों की जांच में सामने आया कि शरीर पर खतरनाक स्टेरॉयड का गंभीर असर पड़ा है. पीड़ित युवक ने जिम संचालक पर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है और पुलिस अब पूरे मामले की जांच में जुटी है. इस घटना ने उन युवाओं के लिए बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जो जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में बिना जानकारी और बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड या सप्लीमेंट लेना शुरू कर देते हैं. स्टेरॉयड या सप्लीमेंट का शरीर पर सीधा असरफिटनेस एक्सपर्ट शिवानी असवाल का कहना है कि आज के समय में जिम जाने वाले कई युवा कम समय में बॉडी बनाने की होड़ में स्टेरॉयड और इंजेक्शन का सहारा लेने लगे हैं. सोशल मीडिया पर दिखने वाली फिट बॉडी और जल्दी रिजल्ट पाने की चाहत कई बार लोगों को गंभीर बीमारियों की तरफ धकेल देती है. उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार का स्टेरॉयड या सप्लीमेंट शरीर पर सीधा असर डालता है, इसलिए इसे कभी भी बिना डॉक्टर और प्रोफेशनल ट्रेनर की सलाह के शुरू नहीं करना चाहिए. गलत तरीके से लिए गए सप्लीमेंट शरीर के हार्मोन बिगाड़ सकते हैं, लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं और हड्डियों को कमजोर कर सकते हैं. डॉक्टर की सलाह लेकर शुरू करें सप्लीमेंटशिवानी असवाल ने बताया कि जिम शुरू करते ही स्टेरॉयड लेना सबसे बड़ी गलती होती है. सबसे पहले शरीर को नेचुरल तरीके से ट्रेन करना जरूरी है. इसके लिए नियमित वर्कआउट, सही डाइट और सही रूटीन सबसे अहम भूमिका निभाते हैं. उन्होंने कहा कि कई लोगों को लगता है कि सिर्फ नॉनवेज खाने से ही अच्छी बॉडी बनती है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है. वेजिटेरियन डाइट में भी भरपूर प्रोटीन मौजूद होता है. सोयाबीन, पनीर, टोफू, दालें और हरी सब्जियां शरीर को मजबूत बनाने में मदद करती हैं. अगर सही खानपान और मेहनत के बाद भी शरीर में जरुरत महसूस हो, तभी डॉक्टर की सलाह लेकर सप्लीमेंट शुरू करना चाहिए. सप्लीमेंट का भी सही चयन जरूरीउन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बाजार में बिक रहे कई लोकल और नकली सप्लीमेंट शरीर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं. इसलिए कोई भी प्रोडक्ट खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता और प्रमाणिकता की जांच जरूर करनी चाहिए. इसके अलावा हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए जरूरी नहीं कि जो सप्लीमेंट एक व्यक्ति को सूट करे वही दूसरे को भी फायदा पहुंचाए. अगर स्टेरॉयड या सप्लीमेंट लेने के बाद शरीर में दर्द, कमजोरी, हार्मोन संबंधी परेशानी, लिवर की दिक्कत या हड्डियों में दर्द महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और उस प्रोडक्ट का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए. एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि फिटनेस पाने का कोई शॉर्टकट नहीं होता. अच्छी बॉडी बनाने के लिए नियमित मेहनत, संतुलित खानपान और सही लाइफस्टाइल ही सबसे सुरक्षित और बेहतर तरीका है. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ghaziabad,Uttar Pradesh Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

दावा-पंड्या 22 मई को दूसरी बार शादी करने वाले हैं:माहिका शर्मा के साथ रिलेशनशिप में हैं; दोनों की तरफ से कोई ऐलान नहीं

दावा-पंड्या 22 मई को दूसरी बार शादी करने वाले हैं:माहिका शर्मा के साथ रिलेशनशिप में हैं; दोनों की तरफ से कोई ऐलान नहीं

हार्दिक पंड्या इन दिनों चोट के कारण आईपीएल के कुछ मैच नहीं खेल पाए हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि वो और उनकी गर्लफ्रेंड माहिका शर्मा शादी कर सकते हैं। हालांकि, दोनों की तरफ से अब तक इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने दावा किया है कि हार्दिक पंड्या और मॉडल माहिका शर्मा 22 मई को राजस्थान के उदयपुर में शादी करने वाले हैं। वहीं, एक यूजर ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि माहिका लगातार मैचों के दौरान स्टेडियम में मौजूद रहती थीं और हार्दिक मैच खत्म होने के बाद सीधे उनके पास चले जाते थे। पोस्ट में यह भी कहा गया कि टीम की निजी चर्चाएं लीक होने की शिकायत के बाद BCCI ने खिलाड़ियों की गर्लफ्रेंड्स के टीम कैंप में आने पर सख्ती की। दावा किया गया कि हार्दिक इन नियमों से नाराज थे और इसी वजह से शादी का फैसला लिया गया। हालांकि, इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इन वायरल पोस्ट्स को फर्जी भी बता रहे हैं। हार्दिक ने 2020 में नताशा स्टेनकोविक से शादी की थी बता दें कि हार्दिक ने मई 2020 में नताशा स्टेनकोविक से शादी की थी। उसी साल नताशा ने बेटे अगस्त्य को 30 जुलाई 2020 को जन्म दिया। साल 2024 में दोनों अलग हो गए। हार्दिक अब माहिका शर्मा को डेट कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने माहिका के नाम के पहले अक्षर का टैटू भी बनवाया है। 2026 टी20 विश्व कप जीत के बाद स्टेडियम में जश्न के दौरान हार्दिक और माहिका साथ नजर आए थे। दोनों का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें वे एक-दूसरे के साथ समय बिताते दिखाई दिए थे। वहीं, 19 फरवरी को हार्दिक ने माहिका के जन्मदिन पर इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “जन्मदिन मुबारक हो मेरी राजकुमारी… मैं तुमसे प्यार करता हूं।”

टॉप-10-कंपनियों में से 9 की वैल्यू ₹3.12 लाख करोड़ घटी:रिलायंस टॉप लूजर रही, वैल्यू ₹1.34 लाख करोड़ घटी; SBI-TCS का मार्केट कैप भी घटा

टॉप-10-कंपनियों में से 9 की वैल्यू ₹3.12 लाख करोड़ घटी:रिलायंस टॉप लूजर रही, वैल्यू ₹1.34 लाख करोड़ घटी; SBI-TCS का मार्केट कैप भी घटा

मार्केट कैप के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 9 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 3.12 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज की मार्केट वैल्यू सबसे ज्यादा घटी है। रिलायंस की मार्केट वैल्यू ₹1.34 लाख करोड़ घटकर ₹18.08 लाख करोड़ पर आ गई। वहीं SBI की की मार्केट वैल्यू ₹52,245 करोड़ घटकर ₹8.89 लाख करोड़ पर आ गई। इसके अलावा TCS, बजाज फाइनेंस, HDFC बैंक, ICICI बैंक, लार्सन एंड टुब्रो, HUL और LIC की मार्केट वैल्यू भी घटी है। वहीं बीते हफ्ते सिर्फ भारतीय एयरटेल की मार्केट वैल्यू बढ़ी है। देश की टॉप-10 कंपनियों में से 9 की वैल्यू ₹3.12 लाख करोड़ घटी सोर्स: BSE (11 मई – 15 मई, 2026) बीते हफ्ते सेंसेक्स 2,090 अंक गिरा था पिछले हफ्ते सेंसेक्स 2,090 (2.7%) अंक और निफ्टी 532 (2.2%) अंक गिरा था। वहीं बीते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को सेंसेक्स 516 अंक की गिरावट के साथ 77,328 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 150 अंकों की गिरावट रही, ये 24,176 पर आ गया। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

गर्मी में डायबिटीज के मरीज भूलकर भी न करें ये गलती! डॉक्टर की खास सलाह, देखें वीडियो

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X गर्मी में डायबिटीज के मरीज भूलकर भी न करें ये गलती! डॉक्टर की खास सलाह, देखें   Diabetes Summer Care Tips: जोधपुर के एमडीएम अस्पताल के मधुमेह विशेषज्ञ डॉक्टर रौनक गांधी के अनुसार, भीषण गर्मी में डायबिटीज मरीजों के लिए डिहाइड्रेशन का खतरा काफी बढ़ जाता है. शरीर में शुगर का स्तर बढ़ने पर ग्लूकोज के साथ पानी भी पेशाब के जरिए अधिक बाहर निकलता है. इसके अलावा, डापा और एम्पा ग्लिफ्लोज़िन जैसी दवाइयाँ लेने वाले मरीजों में भी यूरिन की मात्रा बढ़ने से पानी की कमी हो सकती है. इससे बचाव के लिए डॉक्टर ने मरीजों को बिना प्यास लगे भी समय-समय पर पर्याप्त पानी पीने, धूप से बचने और नियमित शुगर जांच की सलाह दी है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

पाकिस्तान के लाहौर में 9 जगहों के इस्लामी नाम बदले:इस्लामपुरा अब कृष्णनगर, बाबरी चौक फिर से जैन मंदिर चौक, मुस्तफाबाद का नाम धर्मपुरा हुआ

पाकिस्तान के लाहौर में 9 जगहों के इस्लामी नाम बदले:इस्लामपुरा अब कृष्णनगर, बाबरी चौक फिर से जैन मंदिर चौक, मुस्तफाबाद का नाम धर्मपुरा हुआ

अमृतसर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लाहौर दशकों तक इस्लामीकरण के शिकंजे में रहने के बाद जड़ों की ओर लौट रहा है। दो महीने के भीतर लाहौर में 9 जगहों के इस्लामी नाम फिर से मूल हिंदू या ब्रिटिश विरासत पर रखे गए हैं। इनमें इस्लामपुरा अब अपने पुराने नाम कृष्णनगर और बाबरी मस्जिद चौक अब पुराने जैन मंदिर चौक के नाम से आधिकारिक रूप से जाना जाएगा। इनके बोर्ड भी लगा दिए गए हैं। खास बात यह भी है कि इस बदलाव के खिलाफ वहां कोई कट्‌टरपंथी मोर्चा भी नहीं खोल पाया। पंजाब सूबे की सीएम मरियम नवाज के अनुसार परकोटा शहर लाहौर के आठों दरवाजे जिनमें दिल्ली गेट भी शामिल है उसका भी जीर्णोद्धार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार नाम प​रिवर्तन के दूसरे चरण में पाकिस्तान के सिंध और खैबर पखतूनख्वाह प्रांतों में भी मूल नामों का ऐलान किया जा सकता है। जैन मंदिर… नाम से ईमान पर आंच नहीं जैन मंदिर के पास के अनारकली इलाके के मौलाना वाजिद कादरी का मानना है कि इस्लाम को किसी मंदिर या गुरुद्वारे से समस्या नहीं है। 1990 के दशक में जैन मंदिर चौक का नाम बदलकर बाबरी मस्जिद चौक कर दिया गया। ये सियासी फैसला था। हमने कभी इसे बाबरी मस्जिद चौक नहीं बोला। हमें यह समझना होगा कि जिन पूर्वजों ने ये हिंदू नाम रखे थे, वे भी मुसलमान ही थे, और इससे उनके ईमान पर आंच नहीं आई थी। लक्ष्मी चौक… हमारी विरासत का हिस्सा लाहौर की बीकनहाउस यूनिवर्सिटी के लेक्चरर साद मलिक कहते हैं, यह वाकई सुखद बदलाव है। मैं इसे हमेशा लक्ष्मी चौक ही कहता रहा, क्योंकि मेरे पिता इसे इसी नाम से बुलाते थे। साद कहते हैं म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने अपने कागजों में भले ही इसका नाम मौलाना जफर अली चौक कर दिया हो, लेकिन मेरे और मेरे जैसे कई लोगों के लिए लक्ष्मी चौक उस विरासत का हिस्सा है, जिसे जफर अली खान के नाम से कोई लेना-देना नहीं है। लक्ष्मी चौक पीढ़ियों से जुड़ा हुआ नाम है। नवाज के दौर में बदले थे कई नाम…बेटी अब दुरुस्त कर रही; इमरान खान को नाम बदली से परहेज था नाम बदलने का दौर कब शुरू हुआ? पाक के पूर्व पीएम नवाज शरीफ और पंजाब की सीएम मरियम नवाज ने 19 मार्च को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इसमें लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल (LHAR) प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई। लाहौर के नए नामों को फिर से पुराने हिंदू या ब्रिटिश विरासत के दौर के नाम पर रखने का फैसला लिया गया था। नवाज शरीफ का कहना था कि हमें यूरोप से सीख लेनी चाहिए। वे ऐतिहासिक नामों से छेड़छाड़ नहीं करते हैं। लाहौर के पुराने नाम हमारा इतिहास है, इसे हमें सहेजना है, बदलना नहीं है। मरियम का कहना था कि लाहौर का इतिहास ही इसकी पहचान है। पुराने नाम और इमारतें इसका सबूत हैं। कट्‌टरपंथियों का क्या रवैया रहा? कट्‌टरपंथ के नाम पर सड़कों पर उत्पात मचाने के लिए कुख्यात तहरीक-लब्बैक-पाकिस्तान (TLP) को मरियम सरकार ने बैन कर रखा है। इसलिए कोई विरोध नहीं हुआ। लश्कर-ए-तैयबा ने भी मूल नाम रखने का कोई विरोध नहीं किया है। नाम बदली किसके दौर में हुई? लाहौर में नाम बदलने की कवायद 1990 के दशक में बाबरी मस्जिद के ढांचे को गिराने के बाद हुई। उस दौर में केंद्र में नवाज शरीफ, फिर बेनजीर और परवेज मुशर्रफ की सरकारें रहीं। 2018 से 2022 तक पीएम रहे इमरान खान के समय में नाम बदलने का दौर नहीं चला।

खीरा भंडारण युक्तियाँ: खीरा भंडारण करने का सही तरीका क्या है? ना करें ये सॉफ्ट, फ़रिश्ते में भी मोनोकर हो जाएगा ख़राब

ककड़ी भंडारण युक्तियाँ

17 मई 2026 को 13:20 IST पर अपडेट किया गया लोग अक्सर बाज़ार से खेडा खरीदकर सीधे फ़र्ज़ी में रख देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आम औषधि आपके समय से पहले खराब, बेजान और बेकार हो सकती है? असल में, खेडा बहुत अधिक ठंडक निरीक्षण नहीं कर पाता। अगर आप भी लंबे समय तक फिश और क्रैंची रखना चाहते हैं तो इन आसान टिप्स को जरूर अपनाएं। अनुसरण करना : खेड़ा स्टोर करने से पहले उसे अच्छी तरह से साफ करना जरूरी है ताकि किताबें न लगें। बाजार से सामान के बाद खेडों को पानी से इकट्ठा करना। उन्हें स्टोर करने से पहले पूरी तरह से सुखा लें। छवि: मेटा एआई प्लास्टिक को प्लास्टिक की ट्रॉली में सीधे न रखें। उन्हें पेपर तौलिया या सूती कपड़े में लपेटकर रखें। छवि: मेटा एआई सूखे को क्रिस्पर ड्राअर के बजाय फ़्रिज़ के ऊपरी प्रोटोटाइप पर रखा गया। इसके बिल्कुल पीछे सटाकर न रखें, वहां सबसे ज्यादा ठंड होती है। छवि: मेटा एआई मिठाई को कभी भी टमाटर, सेब या केले के साथ न रखें। ये फल एथिलीन गैस के बर्तन हैं जिनसे खेडा जल्दी पीला पड़ जाता है और दागने लगता है। छवि: मेटा एआई अगर आप जिप-लॉक बैग में जिप-लॉक बैग रख रहे हैं, तो इसमें एक स्टील का डिजिटल डिजायन भी शामिल है। इससे पहले सप्ताह भर तक ताज़ा बना रहता है। छवि: मेटा एआई द्वारा प्रकाशित: आर्या पांडे प्रकाशित 17 मई 2026 13:20 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)खीरा भंडारण युक्तियाँ(टी)अंग्रेजी: खीरे को कैसे स्टोर करें(टी)खीरे को ताजा रखें(टी)खीरा फ्रिज में रखें(टी)ग्रीष्मकालीन रसोई युक्तियाँ(टी)खीरे को खराब होने से बचाएं(टी)कागज तौलिया विधि(टी)प्लास्टिक रैप भंडारण

पाकिस्तान के लाहौर में 9 जगहों के नाम बदले गए:लाहौर का इस्लामपुरा अब कृष्णनगर, बाबरी चौक फिर से जैन मंदिर चौक

पाकिस्तान के लाहौर में 9 जगहों के नाम बदले गए:लाहौर का इस्लामपुरा अब कृष्णनगर, बाबरी चौक फिर से जैन मंदिर चौक

पाकिस्तान के पंजाब सूबे में कहावत है ‘जिन्ने लाहौर नहीं वेख्या, ओ जमिया ही नहीं’ (जिसने लाहौर नहीं देखा, उसका जन्म ही नहीं हुआ)। अमृतसर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लाहौर दशकों तक इस्लामीकरण के शिकंजे में रहने के बाद जड़ों की ओर लौट रहा है। दो महीने के भीतर लाहौर में 9 जगहों के इस्लामी नाम फिर से मूल हिंदू या ब्रिटिश विरासत पर रखे गए हैं। इनमें इस्लामपुरा अब अपने पुराने नाम कृष्णनगर और बाबरी मस्जिद चौक अब पुराने जैन मंदिर चौक के नाम से आधिकारिक रूप से जाना जाएगा। इनके बोर्ड भी लगा दिए गए हैं। खास बात यह भी है कि इस बदलाव के खिलाफ वहां कोई कट्‌टरपंथी मोर्चा भी नहीं खोल पाया। पंजाब सूबे की सीएम मरियम नवाज के अनुसार परकोटा शहर लाहौर के आठों दरवाजे जिनमें दिल्ली गेट भी शामिल है, उसका भी जीर्णोद्धार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार नाम प​रिवर्तन के दूसरे चरण में पाकिस्तान के सिंध और खैबर पख्तूनख्वाह प्रांतों में भी मूल नामों का ऐलान किया जा सकता है। इनके मूल नाम फिर बहाल – इस्लामपुरा फिर से कृष्णनगर – सुन्नतनगर फिर से संतनगर – मौलाना जफर चौक फिर से लक्ष्मी चौक – बाबरी मस्जिद चौक फिर से जैन मंदिर चौक – मुस्तफाबाद फिर से धर्मपुरा – सर आगा खान चौक फिर से डेविस रोड – अल्लामा इकबाल रोड फिर से जेल रोड – फातिमा जिन्ना रोड फिर से क्वींस रोड – बाग-ए-जिन्ना फिर से लॉरेंस रोड – मुस्तफाबाद को भी फिर से मिला पुराना नाम धर्मपुरा लक्ष्मी चौक… हमारी विरासत का हिस्सा लाहौर की बीकनहाउस यूनिवर्सिटी के लेक्चरर साद मलिक कहते हैं- यह वाकई सुखद बदलाव है। मैं इसे हमेशा लक्ष्मी चौक ही कहता रहा, क्योंकि मेरे पिता इसे इसी नाम से बुलाते थे। साद कहते हैं म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने अपने कागजों में भले ही इसका नाम मौलाना जफर अली चौक कर दिया हो, लेकिन मेरे और मेरे जैसे कई लोगों के लिए लक्ष्मी चौक उस विरासत का हिस्सा है, जिसे जफर अली खान के नाम से कोई लेना-देना नहीं है। लक्ष्मी चौक पीढ़ियों से जुड़ा हुआ नाम है। जैन मंदिर… नाम से ईमान पर आंच नहीं जैन मंदिर के पास के अनारकली इलाके के मौलाना वाजिद कादरी का मानना है कि इस्लाम को किसी मंदिर या गुरुद्वारे से समस्या नहीं है। 1990 के दशक में जैन मंदिर चौक का नाम बदलकर बाबरी मस्जिद चौक कर दिया गया। ये सियासी फैसला था। हमने कभी इसे बाबरी मस्जिद चौक नहीं बोला। हमें यह समझना होगा कि जिन पूर्वजों ने ये हिंदू नाम रखे थे, वे भी मुसलमान ही थे, और इससे उनके ईमान पर आंच नहीं आई थी। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है नवाज के दौर में बदले थे कई नाम…बेटी अब दुरुस्त कर रही; इमरान खान को नाम बदली से परहेज था नाम बदलने का दौर कब शुरू हुआ? पाक के पूर्व पीएम नवाज शरीफ और पंजाब की सीएम मरियम नवाज ने 19 मार्च को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इसमें लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल (एलएचएआर) प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई। लाहौर के नए नामों को फिर से पुराने हिंदू या ब्रिटिश विरासत के दौर के नाम पर रखने का फैसला लिया गया था। नवाज और मरियम का क्या कहना था? नवाज शरीफ का कहना था कि हमें यूरोप से सीख लेनी चाहिए। वे ऐतिहासिक नामों से छेड़छाड़ नहीं करते हैं। लाहौर के पुराने नाम हमारा इतिहास हैं, इसे हमें सहेजना है, बदलना नहीं है। मरियम का कहना था कि लाहौर का इतिहास ही इसकी पहचान है। पुराने नाम और इमारतें इसका सबूत हैं। कट्‌टरपंथियों का क्या रवैया रहा? कट्‌टरपंथ के नाम पर सड़कों पर उत्पात मचाने के लिए कुख्यात तहरीक-लब्बैक-पाकिस्तान (टीएलपी) को मरियम सरकार ने बैन कर रखा है। इसलिए कोई विरोध नहीं हुआ। लश्कर-ए-तैयबा ने भी मूल नाम रखने का कोई विरोध नहीं किया है। नाम बदली किसके दौर में हुई? लाहौर में नाम बदलने की कवायद 1990 के दशक में बाबरी मस्जिद के ढांचे को गिराने के बाद हुई। उस दौर में केंद्र में नवाज शरीफ, फिर बेनजीर और परवेज मुशर्रफ की सरकारें रहीं। 2018 से 2022 तक पीएम रहे इमरान खान के समय में नाम बदलने का दौर नहीं चला।

गर्मियों में कौन-सी रोटी खाना है सबसे फायदेमंद? डाइटिशियन ने दी सलाह

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Last Updated:May 17, 2026, 12:14 IST गर्मी में खानपान को लेकर डॉक्टरों ने सलाह दी है कि हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन ही सबसे बेहतर है. फरीदाबाद की डाइटिशियन डॉ. मीना के अनुसार गेहूं, जौ और मल्टीग्रेन रोटी सीमित मात्रा में लें… जबकि बाजरा-मक्का थोड़ी भारी होती हैं. ज्यादा तेल-घी और ओवरईटिंग से बचना जरूरी है. फरीदाबाद: गर्मी बढ़ते ही खानपान में जरा सी लापरवाही भी सेहत पर भारी पड़ सकती है. ऐसे में डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि इस मौसम में हल्का और आसानी से पचने वाला खाना ही सबसे बेहतर होता है खासकर रोटी को लेकर लोगों के मन में अक्सर सवाल रहता है. कि कौन-सी रोटी खाएं और कितनी मात्रा में खाएं, ताकि पेट भी ठीक रहे और गर्मी का असर भी कम हो. रोटी जितनी सादी और हल्की होगी उतनी ही सेहत के लिए अच्छी इसी मुद्दे पर फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल की चीफ डाइटिशियन डॉक्टर मीना ने Local18 चैनल से बातचीत में बताती हैं गर्मियों में रोटी जितनी सादी और हल्की होगी उतनी ही सेहत के लिए अच्छी रहेगी. डॉक्टर मीना कहती हैं रोटी में ज्यादा मसाले, तेल या घी का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे पाचन पर असर पड़ता है और गर्मी में अपच की समस्या बढ़ सकती है. क्या गर्मी में बाजरे-मक्के की रोटी खा सकते हैं डॉक्टर मीना बताती हैं मक्के और बाजरे जैसी मोटे अनाज की रोटियां पूरी तरह नुकसानदायक नहीं हैं, लेकिन ये थोड़ी भारी होती हैं. अगर इन्हें सीमित मात्रा में खाया जाए और साथ में छाछ या फाइबर युक्त चीजें ली जाएं तो ये आसानी से पच जाती हैं और शरीर पर गर्मी का असर भी कम होता है. मैं हमेशा लोगों को सलाह देती हूं इन रोटियों को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है बस मात्रा यानि क्वांटिटी पर ध्यान रखना जरूरी है. गर्मियों में कौन-सी रोटी सबसे बेहतर डॉक्टर मीना बताती हैं वहीं अक्सर लोग यह भी पूछते हैं गर्मियों में कौन-सी रोटी सबसे बेहतर है. इस पर मैं यही कहना चाहूंगी गेहूं, जौ या मल्टीग्रेन आटे की रोटी सामान्य रूप से सबसे अच्छा विकल्प है. लेकिन असली फर्क रोटी की किस्म से ज्यादा इस बात पर पड़ता है कि आप कितनी रोटी खा रहे हैं. जरूरत से ज्यादा खाना, चाहे वह कोई भी रोटी हो पाचन को बिगाड़ सकता है. लस्सी या फाइबर युक्त ड्रिंक पीएं डॉक्टर मीना बताती हैं मैदा और मल्टीग्रेन को लेकर भी लोग अक्सर कन्फ्यूज रहते हैं. डॉक्टर मीना बताती हैं मैदा भले ही हल्का लगता है, लेकिन बाद में भारीपन महसूस करा सकता है. जबकि मल्टीग्रेन रोटी में फाइबर ज्यादा होता है जो पेट के लिए फायदेमंद है. इसे भी लस्सी या फाइबर युक्त ड्रिंक के साथ लेना बेहतर रहता है. डॉक्टर मीना बताती हैं गर्मियों में गैस, कब्ज या एसिडिटी की समस्या सिर्फ रोटी की वजह से नहीं होती बल्कि कई बार बासी या ज्यादा पकी हुई रोटी या फिर जरूरत से बड़ी और ज्यादा मात्रा में रोटी खाना भी इसका कारण बन सकता है. इसलिए ताजा, सीमित और ठीक मात्रा में रोटी खाना ही सबसे सही तरीका है. सही तरीके से खाते हैं तो कोई नुकसान नहीं होगा. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Faridabad,Faridabad,Haryana

चंडीगढ़ में किन्नरों ने युवती को पीटा,VIDEO:क्लब के बाहर रोड पर गिरा जमकर लात-घूंसे मारे; भीड़ जमा थी लेकिन किसी ने नहीं बचाया

चंडीगढ़ में किन्नरों ने युवती को पीटा,VIDEO:क्लब के बाहर रोड पर गिरा जमकर लात-घूंसे मारे; भीड़ जमा थी लेकिन किसी ने नहीं बचाया

चंडीगढ़ में क्लब के बाहर किन्नरों ने एक युवती की जमकर पिटाई कर दी। इसका VIDEO सामने आया है। इसमें किन्नर एक युवती को घसीटते हैं और फिर नीचे गिराकर मारपीट करते हुए नजर आते हैं। वह युवती को जमकर लात-घूंसे मार रहे हैं। इस दौरान वहां कुछ युवक भी खड़े हैं लेकिन किन्नरों की वजह से कोई बीच-बचाव नहीं करता। हालांकि इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर झूठे दावे के साथ शेयर किया गया है। जिसमें कहा गया कि चंडीगढ़ के सेक्टर 26 के मशहूर क्लब के बाहर शराब के नशे में धुत लड़कियों के बीच फाइट हो रही है। दैनिक भास्कर की टीम सच्चाई जानने सेक्टर 26 पहुंची तो पता चला कि यह लड़ाई किन्नरों ने की थी। यह वीडियो 2 दिन पुराना है। मौके से यह पता चला कि जिस लड़की के साथ मारपीट की गई, वह नशे में थी। उसने किन्नरों पर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी, जिस वजह से उन्होंने युवती पर हमला कर दिया। पुलिस का कहना है कि वीडियो की जांच की जा रही है। किन्नरों की युवती से मारपीट के PHOTOS.. जानिए, 32 सेकेंड के वीडियो में क्या दिख रहा वीडियो में दिख रहा है कि 5-6 किन्नर एक युवती से झगड़ रहे हैं। इस दौरान एक युवक उन्हें छुड़ाने की कोशिश करता है लेकिन किन्नरों को देख वह पीछे हट जाता है। इसके बाद किन्नर युवती को नीचे गिरा देते हैं। फिर एक किन्नर गाड़ी का सहारा लेकर लड़की को नीचे गिरा लातें मारने लगती है। इस दौरान वह गालियां भी निकालती हुई सुनाई देती हैं। एक लड़की चिल्लाते हुए कहती है कि छोड़ दे लेकिन मारपीट पर उतारू किन्नर किसी की बात नहीं सुनते। जहां पर झगड़ा हो रहा है, नीचे पानी भी जमा है लेकिन किन्रर और युवती झगड़ते हुए उसी में गिरती-उठती रहती हैं। शॉर्ट ड्रेस पहनी एक किन्नर ज्यादा ही एग्रेसिव नजर आती है और वह लगातार मारपीट करती रहती है। इसके कुछ देर बाद माहौल शांत होता है तो एक लड़का किन्नर को पकड़ने की कोशिश करता है तो वह उस पर भड़कते हुए धक्कामुक्की करते नजर आती है। इसके बाद वह चिल्लाते हुए वहां से जाने लगती है। जहां लड़कियों की लड़ाई हुई, भास्कर उस जगह पर पहुंचा लड़कियों की लड़ाई को लेकर चंडीगढ़ पुलिस ने कहा कि ये उनकी लोकेशन का नहीं लग रहा। हालांकि दैनिक भास्कर सेक्टर 26 में उस जगह पहुंचा, जहां पर झगड़ा हुआ था। वहां पर क्लब भी मिला और वह जनरेटर भी, जो लड़कियों की लड़ाई के दौरान दिख रहा है। इसके अलावा झगड़ा करते हुए लड़कियां जिस पानी में गिरीं थी, वह भी उसी तरह वहां भरा मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि यह मामला शुक्रवार रात का है। लड़कियों की फाइट रात 2 बजे हुई थी। यह भी पता चला कि पहले लड़कियों की लड़ाई क्लब के भीतर हुई थी। जिसके बाद वह झगड़ा करते हुए बाहर आ गईं। इस दौरान वहां एक कर्मचारी का बनाया वीडियो भी सामने आया है। जानिए, इनके बीच झगड़ा क्यों हुआ दैनिक भास्कर को मौके पर जाकर पता चला कि देयोरा क्लब के अंदर एक युवती का किसी दूसरी युवती से झगड़ा हुआ था। इस दौरान क्लब में मौजूद बाउंसर ने उसे तुरंत क्लब से बाहर निकाल दिया। इसके बाद युवती बाहर आ गई और बगल में ही स्थित सांते क्लब के बाहर आई। वहां क्लब से 3 ट्रांसजेंडर यानी किन्नर निकल रहीं थी। उन्हें देखकर युवती ने अपशब्द कह दिए। जिस पर तीनों किन्नर भड़क गए और उन्होंने युवती की पिटाई कर दी। पुलिस बोली- जांच कर रहे इस बारे में चंडीगढ़ पुलिस थाना सेक्टर 26 के SHO राम रतन ने कहा कि इस तरह का वीडियो उनकी जानकारी में आया है। इस मामले की जांच कर रहे हैं कि ये झगड़ा कहां हुआ, जिसके बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

आस्ट्रेलिया में पंजाबियों को डराने वाला संगठन बैन:न्यू नाजी संगठन करता था नस्लीय टिप्पणियां; सिखों की कृपाण का विरोधी

आस्ट्रेलिया में पंजाबियों को डराने वाला संगठन बैन:न्यू नाजी संगठन करता था नस्लीय टिप्पणियां; सिखों की कृपाण का विरोधी

ऑस्ट्रेलियाई में रह रहे पंजाबी समुदाय को वहां की सरकार ने बड़ी राहत दी है। गृह मंत्री टोनी बर्क ने पंजाबी कम्युनिटी सहित सभी भारतीय लोगों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियां करने और रैलियां निकाल डराने वाले न्यू नाजी संगठन को हमेशा के लिए बैन कर दिया है। गृह मंत्री टोनी बर्क ने प्रतिबंध की घोषणा करते हुए साफ किया है कि अब इस संगठन से जुड़ने, इसका प्रचार करने या इसकी गतिविधियों में भाग लेने वाले किसी भी व्यक्ति को 15 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। सरकार के इस कड़े फैसले का ऑस्ट्रेलिया में रह रहे पंजाबी समुदाय ने स्वागत किया है और इसे समाज में शांति और भाईचारे की जीत बताया है। यह संगठन पिछले कुछ सालों से एडोल्फ हिटलर की नाजी विचारधारा का प्रचार कर रहा था और देश में रह रहे गैर-श्वेत प्रवासियों को निशाना बना रहा था। खासकर मेलबर्न और सिडनी जैसे बड़े शहरों में इस ग्रुप के लीडर थॉमस सेवेल ने प्रवासियों के खिलाफ कई रैलियां निकाली थीं। यह ग्रुप सोशल मीडिया और जमीन पर लगातार ऑस्ट्रेलियाई समाज को बांटने और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसक माहौल तैयार करने की कोशिशों में जुटा था, जिसके बाद सरकार ने नए सख्त नफरत-विरोधी कानूनों के तहत इसे गैर-कानूनी और नफरत फैलाने वाला समूह घोषित कर दिया है। जानें पंजाबी समुदाय को कब-कब किया टारगेट… जानें क्या है संगठन और क्यों लगा बैन…