जयपुर-भोपाल समेत 19 शहरों में हीट एक्शन प्लान अधूरा:20 शहरों में सिर्फ अहमदाबाद में प्लान लागू; 2025 में 40 हजार केस, 110 मौतें

शहरों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए बनाया गया हीट एक्शन प्लान ज्यादातर शहरों में प्याऊ लगाने, एडवाइजरी जारी करने और अस्पतालों में अस्थायी इंतजाम तक सीमित है। केंद्र सरकार ने 2016 में पहले चरण में दिल्ली, अहमदाबाद, इंदौर, भोपाल, जयपुर और चेन्नई समेत 20 शहरों के लिए यह प्लान बनाया था, ताकि लू के असर को कम किया जा सके और गर्मी के दौरान कामकाज प्रभावित न हो। लेकिन ज्यादातर शहरों में इसके दीर्घकालिक उपाय जमीन पर नहीं दिखते। अहमदाबाद को छोड़कर ज्यादातर शहरों में कूल रूफ, ग्रीन कवर बढ़ाने और गर्मी के लिहाज से संवेदनशील इलाकों की पहचान जैसे कदमों पर गंभीर काम नहीं हुआ। इसका असर स्वास्थ्य आंकड़ों में दिख रहा है। 2024 में हीट स्ट्रोक के 25 हजार मामले और 56 मौतें दर्ज हुई थीं। 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 40 हजार केस और 110 मौतों तक पहुंच गया। 2026 में महाराष्ट्र अकेले अब तक 236 केस और 6 मौतें दर्ज कर चुका है। ‘लू’ घोषित करने के नियम बदलने की तैयारी बढ़ती गर्मी और अल नीनो के असर को देखते हुए भारतीय मौसम विभाग लू घोषित करने के मानकों में बदलाव की तैयारी में है। अभी लू घोषित करने के नियम सिर्फ तापमान पर आधारित हैं, जो केरल जैसे तटीय राज्यों के लिए पूरी तरह सटीक नहीं माने जाते। नए मानकों में उमस और हीट स्ट्रेस को भी शामिल किया जा सकता है। इससे उन इलाकों में भी सटीक चेतावनी दी जा सकेगी, जहां तापमान अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद गर्मी का असर ज्यादा होता है। अहमदाबाद ने ऐसे तैयार किया मॉडल 9 चीजें करनी थीं, कई शहरों में अधूरी रहीं किन शहर ने क्या किया और क्या नहीं किया 1. दिल्ली क्या किया: इस साल 11,000 ‘कूलिंग पॉइंट्स’ (पेयजल, शेड) का लक्ष्य। मेट्रो स्टेशनों और बस स्टॉप पर छबीलें लगाईं। क्या नहीं किया: कूलिंग सेंटर्स की संख्या दावों से काफी कम रही। कूल रूफ नहीं बनाईं। 2. भोपाल क्या किया: स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में ‘लू वार्ड’ बनाने के निर्देश दिए। न शेड बनाए, न कूल रूफ, न हीव वेव अलर्ट सिस्टम लागू किया और न पौधरोपण में तेजी। क्या नहीं किया: कोई विस्तृत बजट या ठोस हीट एक्शन प्लान लागू नहीं हुआ। 1990 में ग्रीन कवर 66% था, जो अब 6% रह गया है। 3. इंदौर: क्या किया: 12 अस्पतालों में लू केंद्र बनाए गए। ट्रैफिक सिग्नल पर दोपहर में रेड लाइट का समय कम किया गया। क्या नहीं किया: संवेदनशील जगह कूलिंग शेड नहीं लगाए गए। 1990 में ग्रीन कवर 33% था, जो 2026 में घटकर 10% रह गया। 4. जयपुर क्या किया: अस्पतालों में विशेष वार्ड और ओआरएस कॉर्नर बनाए गए। निर्माण कार्य के घंटों में बदलाव की सलाह दी गई। क्या नहीं किया: श्रमिकों के लिए पर्याप्त शेल्टर व सार्वजनिक कूलिंग स्टेशन नहीं बने।
आयुर्वेद में क्यों खास मानी जाती है भांग? जानिए इसका उपयोग और सावधानियां

Last Updated:May 17, 2026, 07:23 IST भांग को केवल नशे के रूप में नहीं, बल्कि आयुर्वेद में कुछ औषधीय उपयोगों के लिए भी जाना जाता है. गोंडा की वैद्य सुषमा चतुर्वेदी ने बताया कि भांग का उपयोग दर्द, नींद और पाचन से जुड़ी समस्याओं में किया जाता है, लेकिन इसका गलत या अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है. गोंडा: भांग एक ऐसा पौधा है, जिसका उपयोग लंबे समय से पारंपरिक चिकित्सा और आयुर्वेद में अलग-अलग तरीकों से किया जाता रहा है. बहुत से लोग इसे सिर्फ नशे से जोड़कर देखते हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसके कुछ औषधीय उपयोग भी बताए गए हैं. हालांकि, इसका इस्तेमाल हमेशा सावधानी और विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही करना चाहिए, क्योंकि गलत उपयोग स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य सुषमा चतुर्वेदी ने बताया कि आयुर्वेद में भांग का उपयोग कुछ विशेष परिस्थितियों में किया जाता है. पुराने समय से इसका इस्तेमाल दर्द कम करने और शरीर को आराम देने के लिए किया जाता रहा है. कुछ लोग मानते हैं कि यह शरीर की कुछ परेशानियों में राहत पहुंचाने में मदद कर सकती है. हालांकि, इसका असर व्यक्ति की स्थिति और सेवन की मात्रा पर निर्भर करता है. सुषमा चतुर्वेदी ने बताया कि कुछ लोग जोड़ों के दर्द और शरीर में होने वाली अकड़न की परेशानी में भी इसका उपयोग करते हैं. आयुर्वेद में इसे दर्द से जुड़ी कुछ समस्याओं में सहायक माना गया है. इसके अलावा कई लोग इसे नींद से जुड़ी परेशानियों में भी उपयोग करते हैं. माना जाता है कि यह शरीर को शांत करने में मदद कर सकती है, लेकिन इसका उपयोग बिना सलाह के नहीं करना चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google वैद्य सुषमा चतुर्वेदी ने बताया कि भांग के बीजों का उपयोग कई जगह पोषण के लिए भी किया जाता है. इसके बीजों में कुछ पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग खाद्य पदार्थों में किया जाता है. कई लोग इन्हें स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद मानते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इसका सेवन बिना जानकारी के किया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि भांग के फायदे जितने बताए जाते हैं, उससे ज्यादा जरूरी इसकी सावधानियां हैं. अगर इसका अधिक मात्रा में या गलत तरीके से सेवन किया जाए तो यह नुकसान पहुंचा सकता है. इसके ज्यादा उपयोग से चक्कर आना, मानसिक परेशानी, सुस्ती और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. कुछ मामलों में इसका शरीर और दिमाग पर नकारात्मक असर भी पड़ सकता है. सुषमा चतुर्वेदी ने बताया कि भांग का उपयोग पाचन से जुड़ी समस्याओं में भी बताया जाता है. कुछ लोग मानते हैं कि यह भूख बढ़ाने और पाचन प्रक्रिया को बेहतर करने में मदद कर सकती है. हालांकि, इसके बारे में अलग-अलग राय भी मौजूद हैं. इसलिए किसी भी प्रकार के उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. भांग एक ऐसा पौधा है, जिसे पारंपरिक चिकित्सा में विशेष महत्व दिया गया है. इसके कुछ संभावित फायदे बताए जाते हैं, लेकिन इसका उपयोग समझदारी और सावधानी के साथ करना ही बेहतर माना जाता है. स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी चीज में सही जानकारी और विशेषज्ञ की राय सबसे जरूरी होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी औषधीय पौधे को चमत्कारी इलाज मानना सही नहीं है. हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है और हर चीज का असर भी अलग हो सकता है. इसलिए बिना सही जानकारी और डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह के भांग का सेवन नहीं करना चाहिए. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
राजस्थान में चलती ट्रेन में आग, स्टेशन पर बजे हूटर:त्रिवेंद्रम से दिल्ली जा रही थी, एक कोच से 68 पैसेंजर्स को उतारा गया

कोटा में त्रिवेंद्रम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस (12431) के कोच बी 1 में आग लग गई। हादसा रविवार सुबह करीब 5.15 बजे कोटा मंडल के लूणीविच्चा-विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन के बीच हुआ। कोटा स्टेशन पर हूटर बजते ही प्रशासन अलर्ट हुआ। कोटा से राहत व बचाव टीम मौके के लिए रवाना हुई। अधिकारी भी मौके के लिए निकले। जानकारी के अनुसार कोच में आग लगने की सूचना गार्ड ने दी थी। इसके बाद ट्रेन को रुकवाया गया और पैसेंजर्स को बाहर निकाला गया वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि ट्रेन के B1 कोच में आग लगी थी। कोच में 68 यात्री सवार थे। फिलहाल कोई जनहानि की सूचना नहीं है। टीम में मौके पर पहुंची है। खबर अपडेट की जा रही है…
गर्मियों में भी फिट रखेगा कड़कनाथ, लेकिन ऐसी गलती की तो बिगड़ सकती है तबीयत

Last Updated:May 17, 2026, 06:29 IST Satna News: कड़कनाथ में 25 फीसदी से ज्यादा प्रोटीन और भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. गर्मियों में होने वाली थकान, कमजोरी और सुस्ती को दूर करने में भी यह मददगार होता है. सतना. गर्मी के मौसम में लोग खाने-पीने को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाते हैं, खासकर नॉनवेज पसंद करने वाले यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस मौसम में कौन सा चिकन शरीर के लिए सही रहेगा. तेज गर्मी में भारी और ज्यादा फैट वाला भोजन शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में सतना और आसपास के इलाकों में ऐसे दिनों कड़कनाथ चिकन की चर्चा तेज हो जाती है. कम फैट, ज्यादा प्रोटीन और हीमोग्लोबिन के साथ-साथ आसान पाचन क्षमता के कारण इसे हेल्दी माना जाता है. वहीं पशु चिकित्सकों का कहना है कि अगर चिकन का सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए, तो यह गर्मी में भी शरीर को ताकत और पोषण दे सकता है. लोकल 18 को जानकारी देते हुए प्रभारी पशु चिकित्सालय के डॉ बृहस्पति भारती ने बताया कि कड़कनाथ चिकन अन्य सामान्य मुर्गियों की तुलना में काफी हेल्दी माना जाता है. आम चिकन में जहां 13 से 25 प्रतिशत तक फैट पाया जाता है, वहीं कड़कनाथ में सिर्फ 0.73 से 1.05 प्रतिशत तक ही वसा होती है. यही वजह है कि यह गर्मियों में आसानी से पच जाता है और पेट पर भारी नहीं पड़ता. उन्होंने बताया कि कड़कनाथ में 25 प्रतिशत से ज्यादा प्रोटीन और भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. गर्मियों में होने वाली कमजोरी, थकान और सुस्ती को दूर करने में भी यह मददगार माना जाता है. कम कोलेस्ट्रॉल होने के कारण इसे दिल के मरीजों और वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों के लिए भी बेहतर विकल्प माना जाता है. कड़कनाथ को पकाते समय हरी धनिया और पुदीने जैसी ठंडी तासीर वाली चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके साथ छाछ, नींबू पानी या खीरे का सलाद लेने से शरीर का तापमान संतुलित बना रहता है और पाचन भी बेहतर होता है. सतना के आदिवासी इलाकों में बढ़ रहा पालनकड़कनाथ मूल रूप से पश्चिमी मध्य प्रदेश के झाबुआ क्षेत्र की प्रसिद्ध काली नस्ल है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश सरकार की योजनाओं के तहत सतना जिले के आदिवासी क्षेत्रों में भी इसका बड़े पैमाने पर पालन शुरू कराया गया है. यह नस्ल तेज गर्मी और कड़ाके की ठंड दोनों मौसमों में आसानी से खुद को ढाल लेती है, इसलिए ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इसका पालन आसान माना जाता है. स्थानीय बाजारों और पोल्ट्री फार्म्स पर कड़कनाथ चिकन की कीमत करीब 500 से 800 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है. इसके बावजूद हेल्थ कॉन्शियस लोग इसकी मांग लगातार बढ़ा रहे हैं. स्वाद, सेहत और बजट में अलग-अलग विकल्पगर्मी के मौसम में बाजार में सबसे ज्यादा बिक्री ब्रॉयलर चिकन की होती है क्योंकि इस समय इसके दाम काफी कम हो जाते हैं. वहीं मध्य प्रदेश में कड़कनाथ के अलावा असील, वनराजा, गिरिराजा और सोनाली जैसी नस्लें भी लोकप्रिय हैं. स्वाद के शौकीनों के लिए असील चिकन को सबसे लजीज माना जाता है जबकि सेहत के लिहाज से कड़कनाथ सबसे आगे है. वहीं कम बजट और सॉफ्ट मीट पसंद करने वालों के लिए नर्मदा निधि, सोनाली और वनराजा बेहतर विकल्प माने जाते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सही मात्रा और संतुलित डाइट के साथ चिकन का सेवन गर्मियों में भी फायदेमंद साबित हो सकता है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Satna,Madhya Pradesh
कांगो में इबोला वायरस से 80 मौतें, 246 संदिग्ध केस:WHO ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित की; युगांडा-सूडान में अलर्ट, केन्या ने भी निगरानी बढ़ाई

कांगो के पूर्वी इटुरी प्रांत में इबोला से अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है। 246 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। हालांकि, WHO का कहना है कि यह महामारी की कैटेगरी में नहीं आता है। कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल-रोजर कंबा के मुताबिक, पहला मामला एक नर्स का माना जा रहा है, जिसकी 24 अप्रैल को मौत हुई थी। जांच में अब तक इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के 8 मामलों की पुष्टि हुई है। बीमारी फिलहाल इतुरी प्रांत के बुनीया, रवामपारा और मोंगवालू इलाकों तक पहुंच चुकी है। कांगो में 1976 में पहली बार इबोला सामने आया था। यह देश में इसका 17वां मामला है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बार इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन मिला है, जबकि कांगो में पहले ज्यादातर मामले जायरे स्ट्रेन के रहे हैं। इससे चिंता बढ़ी है, क्योंकि इबोला के मौजूदा कई इलाज और टीके जायरे स्ट्रेन को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। स्थानीय लोगों में डर, कहा- रोज हो रही मौतें इतुरी प्रांत की राजधानी बुनीया में लोगों ने डर का माहौल बताया है। स्थानीय निवासी जीन मार्क असिम्वे ने कहा कि पिछले एक हफ्ते से लगातार मौतें हो रही हैं। कई बार एक ही दिन में 2-3 या उससे ज्यादा लोगों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में लोगों को समझ ही नहीं आया कि बीमारी क्या है। हालांकि बुनीया में बाजार और सार्वजनिक जगहों पर सामान्य गतिविधियां जारी हैं। पड़ोसी देशों में भी खतरा बढ़ा युगांडा में कांगो से जुड़ा इबोला का एक मामला सामने आया है। संक्रमित मरीज की 14 मई को कंपाला के एक अस्पताल में मौत हो गई। बाद में शव कांगो वापस भेज दिया गया। युगांडा ने फिलहाल किसी दूसरे स्थानीय मामले की पुष्टि नहीं की है। अफ्रीका की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने युगांडा और दक्षिण सूडान में बीमारी फैलने का खतरा जताया है। केन्या ने भी क्षेत्रीय आवाजाही को देखते हुए एहतियात बढ़ा दी है। सरकार ने इबोला की तैयारी के लिए अलग टीम बनाई है और सभी एंट्री पॉइंट्स पर निगरानी कड़ी कर दी है। इबोला वायरस है क्या? पूरी दुनिया में इबोला वायरस डिसीज (EVD) से पीड़ित मरीजों में 25% से 90% की मौत होती है। यह बीमारी इबोला नाम के वायरस की वजह से फैलती है। यह 1976 में पहली बार 2 स्थानों पर एक साथ फैला था। ये हैं- नजारा (सूडान) और यामबुकु (कांगो)। इसका नाम इबोला नदी (कांगो) के ऊपर रखा गया है।
‘खतरों के खिलाड़ी’ में विशाल सिंह की होगी वापसी:बोले- मेरे अंदर बहुत सारी कमियां थीं; महेंद्र सिंह धोनी की बात ने मुझे बदला

टीवी एक्टर विशाल आदित्य सिंह एक बार फिर रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी 15 में नजर आने वाले हैं। इससे पहले भी विशाल इस शो का हिस्सा रह चुके हैं और फाइनल तक पहुंचे थे। अब ‘डर का नया दौर’ थीम वाले इस सीजन में वह एक बार फिर शो में लौट रहे हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में विशाल ने अपने डर, संघर्ष, दिल टूटने के दर्द और जिंदगी के उतार-चढ़ाव पर खुलकर बात की। सवाल: दूसरी बार ‘खतरों के खिलाड़ी’ में वापसी कर रहे हैं। इस बार कितना एक्साइटमेंट है? जवाब: यह शो ऐसा है जो आपके साथ रह जाता है। हमें थ्रिल और एक्शन बहुत पसंद है। जैसे स्पोर्ट्स में कोई मैच जीतने का एहसास आपके साथ रहता है, वैसे ही यह शो भी मेरे लिए वैसा ही है। सांप, बिच्छू, ऊंचाई… बचपन से मैंने बहुत चीजें फेस की हैं। शायद इसलिए मुझे यह शो और ज्यादा पसंद है। लोग कहते हैं कि डर का सामना करने से डर खत्म हो जाता है। यह सिर्फ किताबों में अच्छा लगता है। असल में जब आप दोबारा डर का सामना करते हो, तो डर और ज्यादा बढ़ जाता है। सवाल: क्या पहली बार अधूरा रह गया सफर इस बार आपको और मोटिवेट कर रहा है? जवाब: बिल्कुल। स्पोर्ट्समैन के लिए जीत-हार बहुत मायने रखती है। अगर कुछ अधूरा रह जाए, तो वो अंदर कहीं रह जाता है। मेरे लिए भी यह सफर थोड़ा अधूरा रह गया था। शायद इसलिए मैं दोबारा लौट रहा हूं। सवाल: छोटे शहर से मुंबई आने तक का सफर कैसा रहा? जवाब: मैं बिहार से हूं। जब मुंबई आया, तब मेरे अंदर बहुत सारी कमियां थीं और सपने बहुत बड़े थे। यहां आकर समझ आया कि सिर्फ सपने काफी नहीं होते। खुद को बदलना पड़ता है। मैंने खुद को A से लेकर Z तक बदल दिया और आज जो हूं, वो सब उसी सफर का हिस्सा है। महेंद्र सिंह धोनी की एक बात ने बहुत मदद की। उन्होंने कहा था- ‘अपने साथ ईमानदार रहो।’ ईमानदार रहने का मतलब सिर्फ सच बोलना नहीं है, बल्कि खुद को समझना है कि आपकी ताकत क्या है, आपकी कमी क्या है और आप किस रेस के लिए बने हो। जब मैंने खुद को समझना शुरू किया, तब जिंदगी आसान लगने लगी। सवाल: क्या आज भी किसी चीज का डर लगता है? जवाब: पहले मुझे लगता था कि कहीं मेरा कॉन्फिडेंस खत्म न हो जाए, लेकिन अब समझ आया कि कॉन्फिडेंस कोई बाहर की चीज नहीं है, वो आपके अंदर होता है। अब मुझे डर कम लगता है। सवाल: क्या रियलिटी शो में आपका अनफिल्टर्ड और सीधा स्वभाव कभी नुकसान पहुंचाता है? जवाब: परिपक्व होना बहुत जरूरी है। पहले मैं बहुत भोला था। छोटे शहर से आया था, दुनिया उतनी नहीं देखी थी। लेकिन जब आप बड़े लेवल पर कॉम्पिटिशन देखते हो, तब समझ आता है कि सिर्फ अच्छा इंसान होना काफी नहीं है। बहुत कुछ सीखना पड़ता है। सवाल: हार्टब्रेक ने आपको कितना बदला? जवाब: बहुत ज्यादा। हार्टब्रेक बहुत जरूरी होता है। लोग पूछते हैं कि क्या मैं उससे बाहर आ गया हूं? सच कहूं तो नहीं। मैं आज भी उससे रिकवर कर रहा हूं, लेकिन ऐसा नहीं है कि मुझे प्यार से शिकायत है। प्यार जिंदगी का बहुत खूबसूरत हिस्सा है। सवाल: इस बार शो में आपकी रणनीति क्या होगी? जवाब: जब पहली बार गया था, तब मैं सिर्फ ‘विशाल आदित्य सिंह’ था। इस बार मैं ‘बिहार के आरा जिला वाला विशाल’ बनकर जा रहा हूं। इस बार पूरी देसी एनर्जी के साथ जाऊंगा। सवाल: बाकी कंटेस्टेंट्स के साथ कैसी बॉन्डिंग रहने वाली है? जवाब: मैं कैमरे के लिए अलग बनने की कोशिश नहीं करता। मैं जैसा हूं, वैसा ही रहता हूं। जो मुझे प्यार देगा, मैं उसे और ज्यादा प्यार दूंगा। जो नफरत देगा, उसे वही वापस मिलेगा, लेकिन आखिर में हर कोई यहां कॉम्पिटिटर है। पुराने खिलाड़ी हों या नए, सबको भय के देवता यानी रोहित शेट्टी से बचके रहना है। सवाल: पहली बार जब शो किया था, तब लोगों का कैसा रिएक्शन था? जवाब: लोगों ने बहुत प्यार दिया। सबने कहा कि चाहे मैं टास्क के दौरान जीतूं या हारूं, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। वही बात मुझे इस बार भी मोटिवेट करती है।
‘खतरों के खिलाड़ी’ में विशाल सिंह की होगी वापसी:बोले- मेरे अंदर बहुत सारी कमियां थीं; महेंद्र सिंह धोनी की बात ने मुझे बदला

टीवी एक्टर विशाल आदित्य सिंह एक बार फिर रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी 15 में नजर आने वाले हैं। इससे पहले भी विशाल इस शो का हिस्सा रह चुके हैं और फाइनल तक पहुंचे थे। अब ‘डर का नया दौर’ थीम वाले इस सीजन में वह एक बार फिर शो में लौट रहे हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में विशाल ने अपने डर, संघर्ष, दिल टूटने के दर्द और जिंदगी के उतार-चढ़ाव पर खुलकर बात की। सवाल: दूसरी बार ‘खतरों के खिलाड़ी’ में वापसी कर रहे हैं। इस बार कितना एक्साइटमेंट है? जवाब: यह शो ऐसा है जो आपके साथ रह जाता है। हमें थ्रिल और एक्शन बहुत पसंद है। जैसे स्पोर्ट्स में कोई मैच जीतने का एहसास आपके साथ रहता है, वैसे ही यह शो भी मेरे लिए वैसा ही है। सांप, बिच्छू, ऊंचाई… बचपन से मैंने बहुत चीजें फेस की हैं। शायद इसलिए मुझे यह शो और ज्यादा पसंद है। लोग कहते हैं कि डर का सामना करने से डर खत्म हो जाता है। यह सिर्फ किताबों में अच्छा लगता है। असल में जब आप दोबारा डर का सामना करते हो, तो डर और ज्यादा बढ़ जाता है। सवाल: क्या पहली बार अधूरा रह गया सफर इस बार आपको और मोटिवेट कर रहा है? जवाब: बिल्कुल। स्पोर्ट्समैन के लिए जीत-हार बहुत मायने रखती है। अगर कुछ अधूरा रह जाए, तो वो अंदर कहीं रह जाता है। मेरे लिए भी यह सफर थोड़ा अधूरा रह गया था। शायद इसलिए मैं दोबारा लौट रहा हूं। सवाल: छोटे शहर से मुंबई आने तक का सफर कैसा रहा? जवाब: मैं बिहार से हूं। जब मुंबई आया, तब मेरे अंदर बहुत सारी कमियां थीं और सपने बहुत बड़े थे। यहां आकर समझ आया कि सिर्फ सपने काफी नहीं होते। खुद को बदलना पड़ता है। मैंने खुद को A से लेकर Z तक बदल दिया और आज जो हूं, वो सब उसी सफर का हिस्सा है। महेंद्र सिंह धोनी की एक बात ने बहुत मदद की। उन्होंने कहा था- ‘अपने साथ ईमानदार रहो।’ ईमानदार रहने का मतलब सिर्फ सच बोलना नहीं है, बल्कि खुद को समझना है कि आपकी ताकत क्या है, आपकी कमी क्या है और आप किस रेस के लिए बने हो। जब मैंने खुद को समझना शुरू किया, तब जिंदगी आसान लगने लगी। सवाल: क्या आज भी किसी चीज का डर लगता है? जवाब: पहले मुझे लगता था कि कहीं मेरा कॉन्फिडेंस खत्म न हो जाए, लेकिन अब समझ आया कि कॉन्फिडेंस कोई बाहर की चीज नहीं है, वो आपके अंदर होता है। अब मुझे डर कम लगता है। सवाल: क्या रियलिटी शो में आपका अनफिल्टर्ड और सीधा स्वभाव कभी नुकसान पहुंचाता है? जवाब: परिपक्व होना बहुत जरूरी है। पहले मैं बहुत भोला था। छोटे शहर से आया था, दुनिया उतनी नहीं देखी थी। लेकिन जब आप बड़े लेवल पर कॉम्पिटिशन देखते हो, तब समझ आता है कि सिर्फ अच्छा इंसान होना काफी नहीं है। बहुत कुछ सीखना पड़ता है। सवाल: हार्टब्रेक ने आपको कितना बदला? जवाब: बहुत ज्यादा। हार्टब्रेक बहुत जरूरी होता है। लोग पूछते हैं कि क्या मैं उससे बाहर आ गया हूं? सच कहूं तो नहीं। मैं आज भी उससे रिकवर कर रहा हूं, लेकिन ऐसा नहीं है कि मुझे प्यार से शिकायत है। प्यार जिंदगी का बहुत खूबसूरत हिस्सा है। सवाल: इस बार शो में आपकी रणनीति क्या होगी? जवाब: जब पहली बार गया था, तब मैं सिर्फ ‘विशाल आदित्य सिंह’ था। इस बार मैं ‘बिहार के आरा जिला वाला विशाल’ बनकर जा रहा हूं। इस बार पूरी देसी एनर्जी के साथ जाऊंगा। सवाल: बाकी कंटेस्टेंट्स के साथ कैसी बॉन्डिंग रहने वाली है? जवाब: मैं कैमरे के लिए अलग बनने की कोशिश नहीं करता। मैं जैसा हूं, वैसा ही रहता हूं। जो मुझे प्यार देगा, मैं उसे और ज्यादा प्यार दूंगा। जो नफरत देगा, उसे वही वापस मिलेगा, लेकिन आखिर में हर कोई यहां कॉम्पिटिटर है। पुराने खिलाड़ी हों या नए, सबको भय के देवता यानी रोहित शेट्टी से बचके रहना है। सवाल: पहली बार जब शो किया था, तब लोगों का कैसा रिएक्शन था? जवाब: लोगों ने बहुत प्यार दिया। सबने कहा कि चाहे मैं टास्क के दौरान जीतूं या हारूं, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। वही बात मुझे इस बार भी मोटिवेट करती है।
भास्कर अपडेट्स:असम में देश की पहली AI पावर्ड बैंक ब्रांच शुरू, बिना कागज के होंगे सारे काम

असम के गुवाहाटी में शनिवार को स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक की देश की पहली एआई-संचालित फिजिटल (फिजिकल और डिजिटल का मेल) बैंकिंग शाखा शुरू हुई। यहां एआई-सक्षम सेल्फ-सर्विस कियोस्क, पेपरलेस कैश डिपॉजिट और विड्रॉल की सुविधा मिलेगी। ग्राहक बिना किसी अलग आवेदन के यूपीआई इंटरफेस के जरिए सीधे लोन भी ले सकेंगे। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस शाखा का उद्घाटन किया। बैंक का कहना है कि इस मॉडल से छोटे कारोबारियों और सीमित बैंकिंग पहुंच वाले ग्राहकों के लिए कर्ज, बचत और भुगतान जैसी सेवाएं आसान होंगी।
भास्कर अपडेट्स:असम में देश की पहली AI पावर्ड बैंक ब्रांच शुरू, बिना कागज के होंगे सारे काम

असम के गुवाहाटी में शनिवार को स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक की देश की पहली एआई-संचालित फिजिटल (फिजिकल और डिजिटल का मेल) बैंकिंग शाखा शुरू हुई। यहां एआई-सक्षम सेल्फ-सर्विस कियोस्क, पेपरलेस कैश डिपॉजिट और विड्रॉल की सुविधा मिलेगी। ग्राहक बिना किसी अलग आवेदन के यूपीआई इंटरफेस के जरिए सीधे लोन भी ले सकेंगे। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस शाखा का उद्घाटन किया। बैंक का कहना है कि इस मॉडल से छोटे कारोबारियों और सीमित बैंकिंग पहुंच वाले ग्राहकों के लिए कर्ज, बचत और भुगतान जैसी सेवाएं आसान होंगी।
IPL में आज दूसरा मुकाबला दिल्ली Vs राजस्थान:दोनों टीमों के लिए करो या मरो मैच; हेड-टु-हेड रिकॉर्ड बराबरी पर

IPL 2026 में रविवार के दूसरे मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स आमने-सामने होंगी। मुकाबला नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जाएगा। दोनों टीमों प्लेऑफ में बने रहने के लिए जीत जरूरी हैं। दिल्ली 12 मैचों में 10 अंक के साथ पॉइंट्स टेबल में सातवें स्थान पर मौजूद हैं। राजस्थान 11 मैचों में 12 अंक लेकर पांचवें स्थान पर हैं। दोनों टीमें 32वीं बार आमने-सामने होंगी दोनों टीमों के बीच अब तक 31 मैच हुए हैं। दिल्ली और राजस्थान ने 15-15 मैच जीते हैं। एक मैच टाई रहा था, जिसे राजस्थान ने जीता। इस सीजन दोनों टीमें दूसरी बार भिड़ेंगी। जयपुर में खेला गया पिछला मैच दिल्ली ने जीता था। स्टार्क Vs सूर्यवंशी देखने को मिलेगा इस मैच में सबसे दिलचस्प मुकाबला मिचेल स्टार्क और वैभव सूर्यवंशी के बीच होगा। वैभव ने 11 मैचों में 236.55 के स्ट्राइक रेट से 440 रन बनाए हैं, जिसमें 40 छक्के शामिल हैं। दूसरी ओर, 400 से ज्यादा टेस्ट विकेट ले चुके मिचेल स्टार्क IPL में कभी महंगे साबित होते हैं तो कभी मैच जिताऊ स्पेल डालते हैं। अगर उन्हें शुरुआती स्विंग और सीम मिली, तो वैभव के लिए मुश्किल हो सकती है। दिल्ली की कमजोरी बनी स्पिन जोड़ी दिल्ली के लिए सबसे बड़ी चिंता उनके स्पिनरों का खराब फॉर्म है। कप्तान अक्षर पटेल और कुलदीप यादव की जोड़ी इस सीजन में न विकेट ले पा रही है और न रन रोक पा रही है। लुंगी एनगिडी को छोड़कर दिल्ली का पेस अटैक भी साधारण रहा है। टी नटराजन और मुकेश कुमार महंगे साबित हुए हैं। अक्षर पटेल टीम के टॉप विकेट टेकर हैं। वहीं, केएल राहुल 12 मैचों में 477 रन के साथ टीम के टॉप रन स्कोरर हैं। कप्तान रियान की फॉर्म राजस्थान के लिए चिंता राजस्थान के लिए कप्तान रियान पराग की फॉर्म चिंता बनी हुई है। उन्होंने 10 मैचों में 143 के स्ट्राइक रेट से 207 रन बनाए हैं। वहीं, वैभव सूर्यवंशी, यशस्वी जायसवाल और ध्रुव जुरेल की तिकड़ी दिल्ली के गेंदबाजों पर भारी पड़ सकती है। वैभव 11 मैचों में 440 रन के साथ टीम के टॉप रन स्कोरर हैं। हालांकि, राजस्थान का बॉलिंग अटैक मजबूत है। जोफ्रा आर्चर 15 विकेट के साथ टीम के टॉप विकेट टेकर हैं। अरुण जेटली स्टेडियम की पिच रिपोर्ट अरुण जेटली स्टेडियम की पिच IPL में बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। सपाट पिच और 60-66 मीटर की छोटी बाउंड्री के कारण यहां हाई-स्कोरिंग मैच होते हैं। यहां IPL के 103 मैच खेले गए हैं। इनमें 47 बार पहले बल्लेबाजी और 53 बार चेज करने वाली टीम जीती है। एक मैच रद्द हुआ, जबकि दो मैच सुपर ओवर में गए। दिल्ली में आज बारिश की संभावना नहीं दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के मैच के दौरान मौसम गर्म रहने की संभावना है। बारिश की कोई आशंका नहीं है। शाम में गर्मी और उमस खिलाड़ियों और दर्शकों को परेशान कर सकती है। दिन का तापमान 38°C से 40°C के बीच रहेगा, जो शाम तक 30°C के करीब पहुंच जाएगा। दोनों टीमों की प्लेइंग-12 दिल्ली कैपिटल्स: अभिषेक पोरेल, केएल राहुल, साहिल परख, ट्रिस्टन स्टब्स, डेविड मिलर, अक्षर पटेल (कप्तान), माधव तिवारी, मिचेल स्टार्क, मुकेश कुमार, आकिब नबी, लुंगी एनगिडी और आशुतोष शर्मा। राजस्थान रॉयल्स: यशस्वी जायसवाल (कप्तान), वैभव सूर्यवंशी, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), शिमरोन हेटमायर, डोनोवन फरेरा, रवींद्र जडेजा, शुभम दुबे, दसुन शनाका, जोफ्रा आर्चर, बृजेश शर्मा, तुषार देशपांडे और यश पुंजा।







