कांस में इग्नोर होने पर आलिया का ट्रोल को जवाब:बोलीं- दुख कैसा प्यारे,आपने तो नोटिस किया; यूजर ने लिखा था- किसी ने भाव नहीं दिया

बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट हाल ही में कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 के रेड कार्पेट पर नजर आईं। यहां उनके लुक्स की काफी चर्चा हुई, लेकिन साथ ही उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने दावा किया कि इंटरनेशनल पैपराजी ने आलिया को इग्नोर किया। अब आलिया ने खुद एक ट्रोल को बहुत ही शालीनता से जवाब दिया है। बुधवार को आलिया ने इंस्टाग्राम पर एक रील शेयर की थी। इसमें वे आइवरी सिल्क साड़ी-गाउन में रॉयल लुक में नजर आ रही थीं। इस पोस्ट पर एक यूजर ने तंज कसते हुए कमेंट किया, “कितने दुख की बात है, किसी ने आपको नोटिस ही नहीं किया।” आलिया ने इस कमेंट को नजरअंदाज करने के बजाय जवाब देना बेहतर समझा। उन्होंने लिखा, “दुख कैसा प्यारे? आपने तो मुझे नोटिस किया”। आलिया के समर्थन में टीवी एक्टर अली गोनी और सिंगर राहुल वैध भी आगे आए। अली गोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह देखकर दुख होता है कि जब कोई हमारे देश का नाम ग्लोबल लेवल पर रोशन करने के लिए इतनी मेहनत करता है, तो हमारे अपने ही लोग उसे नीचे खींचने की कोशिश करते हैं। उन्होंने आगे कहा आलिया ने वहां पहुंचकर वो मुकाम हासिल किया है जिसका सपना कई लोग देखते हैं। हमें मजाक उड़ाने के बजाय उन लोगों का साथ देना चाहिए जो विदेशों में भारत का मान बढ़ा रहे हैं।” वहीं राहुल वैध ने लिखा आलिया को किसी के अटेंशन की जरूरत नहीं है।
तेज धूप में थकान हो रही है? काम करेगा गर्मी में राहत देने वाला देसी फॉर्मूला, नींबू, नमक और चीनी से बनाएं ORS

Homemade ORS Recipe: गर्मियों का मौसम आते ही सबसे बड़ी परेशानी होती है शरीर का जल्दी थक जाना, चक्कर आना और पानी की कमी महसूस होना. खासकर मई-जून की तेज धूप में बाहर निकलते ही शरीर से पसीना इतना निकलता है कि कब डिहाइड्रेशन हो जाए, पता ही नहीं चलता. ऐसे में लोग बाजार के महंगे ड्रिंक्स की तरफ भागते हैं, लेकिन घर में मौजूद साधारण चीजों से भी एक असरदार और हेल्दी पेय तैयार किया जा सकता है. यही वजह है कि इन दिनों “नींबू ORS ड्रिंक” तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह न सिर्फ शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, बल्कि गर्मी की थकान से उबरने में भी मदद करता है. अच्छी बात ये है कि इसे बनाना बेहद आसान है और इसका स्वाद भी हल्का, ताज़गी भरा और हर उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त है. क्यों जरूरी है गर्मियों में ORS?गर्मियों में शरीर से पानी और जरूरी मिनरल्स तेजी से बाहर निकलते हैं. जब यह कमी बढ़ जाती है, तो कमजोरी, सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में ORS यानी ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन एक आसान और कारगर उपाय है. शरीर को कैसे करता है फायदा?ORS में मौजूद नमक और चीनी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखते हैं. यह शरीर को तुरंत हाइड्रेट करता है और थकान कम करता है. नींबू मिलाने से इसमें विटामिन C भी जुड़ जाता है, जो इम्युनिटी को सपोर्ट करता है. घर पर नींबू ORS बनाने का आसान तरीकाघर पर ORS बनाना न तो मुश्किल है और न ही इसमें ज्यादा समय लगता है. बस सही मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. सामग्री-1 लीटर ठंडा पानी-6 चम्मच चीनी-1½ चम्मच नमक-1 बड़ा चम्मच नींबू का रस बनाने के स्टेप्ससबसे पहले एक साफ बोतल या जग में ठंडा पानी डालें. अब इसमें चीनी और नमक मिलाएं. ध्यान रखें कि दोनों पूरी तरह घुल जाएं, इसलिए इसे अच्छे से चलाते रहें. जब मिश्रण साफ दिखने लगे, तब इसमें ताजा नींबू का रस डालें. एक बार फिर हल्का सा मिक्स करें और आपका नींबू ORS तैयार है. कब और कैसे पिएं?इस ड्रिंक को दिनभर थोड़ा-थोड़ा करके पीना ज्यादा फायदेमंद होता है. खासकर जब आप बाहर से धूप में लौटें या ज्यादा पसीना आए, तब इसे जरूर लें. किसके लिए है सबसे ज्यादा फायदेमंद?-जो लोग बाहर काम करते हैं-बच्चे जो खेलते समय ज्यादा पसीना बहाते हैं-बुजुर्ग जिन्हें जल्दी कमजोरी महसूस होती है बाजार के ड्रिंक्स से क्यों बेहतर?आजकल मार्केट में कई एनर्जी ड्रिंक्स मिलते हैं, लेकिन उनमें शुगर की मात्रा ज्यादा होती है और कई बार आर्टिफिशियल फ्लेवर भी होते हैं. इसके उलट घर का बना ORS पूरी तरह नेचुरल होता है और इसमें कोई केमिकल नहीं होता. ध्यान रखने वाली बातेंहालांकि यह ड्रिंक काफी फायदेमंद है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. नमक और चीनी की मात्रा ज्यादा न करें, वरना इसका असर उल्टा भी हो सकता है. साथ ही, इसे एक दिन से ज्यादा स्टोर करके न रखें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
गर्मियों में त्वचा को होने वाले नुकसान: देर तक एसी में रहने से त्वचा हो रही है खतरनाक, जानें देखभाल के सही टिप्स; चेहरे की चमक

गर्मी का मौसम आते ही एसी हमारी सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। बाहर की चिलचिलाती धूप और तराजू से बचकर एसी की खिड़की हवा में बहुत सार्वभौम देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देर तक एसी में रहने से आपकी त्वचा को भारी नुकसान हो सकता है? एसी रूम की हवा से प्रोग्राम को पूरी तरह से खींचा जाता है, जिससे हमारी त्वचा रूखी, बेजान और खानदानी-खींची का एहसास होता है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो कुछ बहुत ही आसान और घरेलू टिप्स अपनाकर आप अपनी त्वचा की देखभाल कर सकते हैं और चेहरे का निखार बरकरार रख सकते हैं। एसी में कैसे रहें त्वचा की देखभाल? सही चयनकर्ता का चुनाव लोग अक्सर समरलैन्सर में चले जाते हैं, जो कि सबसे बड़ी गलती है। एसी में बैठने से त्वचा का तेल मिल लगता है। क्या करें: समरस्लैम के लिए एक प्रभाव, वॉटर-बेस्ड या जेल-बेस्ड रिस्कर्टर चुनें। चेहरा धोने के बाद इसे जरूर लगाएं। पानी प्रतिपूर्ति अगर बाहर से त्वचा रूखी हो रही है, तो उसे अंदर से नुस्खा देना बहुत जरूरी है। क्या करें: दिन भर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएं। उद्यम पानी के समुद्र तट पानी, नींबू पानी, छाछ या समुद्र तट के फलों का रस। इस चेहरे पर खरीदारी चमकती है। एसी का सही तापमान हम अक्सर गर्मी से बचने के लिए 18 या 20 डिग्री पर एसी चलाते हैं। यह त्वचा के लिए बहुत हानिकारक है। क्या करें: एसी का तापमान हमेशा 24 से 26 डिग्री के बीच रहा। यह शरीर और त्वचा दोनों के लिए एक आरामदायक और सुरक्षित स्थिति है। कमरे में पानी का बाउल यह एक बहुत ही पुरानी और ब्रोकरेज डीलरशिप है। विस्तृत एसी रूम की ड्रैग चालित लाइनें हैं, इसलिए हमें उस सेमिनार को वापस लाना होगा। क्या करें: आप जिस कमरे में एसी स्टाइक बैठे हैं, वहां एक पेट्रोकेमिकल या बाउल में पानी की मांग रखते हैं। इस कमरे के अंदर हवा में साथी बनी रहेगी और आपकी त्वचा डॉक्युमेंट नहीं होगी। फेस मिस्ट या गुलाब जल साथ रखें अगर आप ऑफिस में हैं या लंबे समय तक एसी में बैठे हैं, तो त्वचा को तुरंत ताज़ा करने का यह सबसे अच्छा तरीका है। क्या करें: अपने डेस्क पर या बैग में गुलाब जल की बोतल या कोई अच्छा फेस मिस्ट रखें। जब भी त्वचा सूख जाए या थकी हुई हो तो इसे अपने चेहरे पर सा प्रभाव कर लें। माइल्ड क्लींजर का उपयोग किया जाता है चेहरे को बार-बार साबुन या बहुत हार्ड फेस वाश से धोना त्वचा और ज्यादातर साबुन से होता है। क्या करें: चेहरे को साफ करने के लिए किसी माइल्ड क्लींजर का ही इस्तेमाल करें। रात को सोने से पहले चेहरा जरूर लगाएं और नाइट क्रीम न लगाएं। एसी की ठंडक हमें गर्मी से राहत तो देती है, लेकिन इसके कारण त्वचा की अनदेखी करना सही नहीं है। अपनी डेली रूटीन में इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपनी खोपड़ी को ड्रिप करने से बचा सकते हैं। बस अपनी त्वचा को प्लास्टर लगाए और फिर देखें, समर में भी आपका चेहरा कैसा बेदाग और सुंदर चमकता है। यह अवश्य पढ़ें: नींद के बाद थकान: सुबह 8 घंटे की नींद के बाद भी रहती है थकान? शरीर में हो सकती है इस चीज की कमी! (टैग्सटूट्रांसलेट)समर त्वचा देखभाल(टी)ग्रीष्मकालीन त्वचा देखभाल युक्तियाँ(टी)चमकती त्वचा(टी)चेहरे की चमक(टी)सौंदर्य युक्तियाँ
तृषा को विजय के प्रतिद्वंद्वी से 12 करोड़ का ऑफर:दावा- उदयनिधि स्टालिन ने फिल्म में लीड रोल के लिए एक्ट्रेस को अप्रोच किया

तमिल एक्ट्रेस तृषा कृष्णन थलापति विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद से लगातार चर्चा में हैं। पहले वे विजय के साथ अपने रिश्ते को लेकर सुर्खियों में रहीं। वहीं अब एक मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि उन्हें विजय के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी उदयनिधि स्टालिन ने 12 करोड़ रुपए का ऑफर दिया है। एनडीटीवी के मुताबिक, डीएमके के प्रमुख नेता और एक्टर उदयनिधि स्टालिन ने अपनी अगली बड़ी फिल्म के लिए तृषा को अप्रोच किया है। इस फिल्म में उन्हें लीड रोल देने की तैयारी है। उदयनिधि और विजय की पार्टियों के बीच तमिलनाडु की राजनीति में सीधा मुकाबला है। पोन्नियिन सेल्वन के बाद बढ़ी पावर तृषा कृष्णन साउथ सिनेमा की सबसे डिमांडिंग एक्ट्रेसेज में से एक हैं। ‘पोन्नियिन सेल्वन’, ‘घिल्ली’ और ‘वरशम’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। हाल के दिनों में उनकी पॉपुलैरिटी और फीस दोनों में बड़ा उछाल आया है। रिपोर्ट्स की मानें तो वे अब प्रति फिल्म 10 से 12 करोड़ रुपए चार्ज कर रही हैं। उदयनिधि के प्रोजेक्ट को उनकी इसी बढ़ती स्टार पावर से जोड़कर देखा जा रहा है। विजय के शपथ ग्रहण समारोह में हुई थीं भावुक कुछ समय पहले थलापति विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके शपथ ग्रहण समारोह में तृषा भी पहुंची थीं। वहां विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देख उनकी भावुक तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए थे। पर्दे पर भी विजय और तृषा की जोड़ी हमेशा हिट रही है। विजय ने तृषा के लिए बदले नियम तमिलनाडू के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद थलापति विजय ने तृषा के लिए फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े नियम में बदलाव किया है। विजय ने तृषा कृष्णन की फिल्म करप्पू के लिए सुबह 9 बजे की स्क्रीनिंग रखने की स्पेशल परमिशन दी है, जबकि अब तक साउथ में इस पर प्रतिबंध था।
तृषा को विजय के प्रतिद्वंद्वी से 12 करोड़ का ऑफर:दावा- उदयनिधि स्टालिन ने फिल्म में लीड रोल के लिए एक्ट्रेस को अप्रोच किया

तमिल एक्ट्रेस तृषा कृष्णन थलापति विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद से लगातार चर्चा में हैं। पहले वे विजय के साथ अपने रिश्ते को लेकर सुर्खियों में रहीं। वहीं अब एक मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि उन्हें विजय के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी उदयनिधि स्टालिन ने 12 करोड़ रुपए का ऑफर दिया है। एनडीटीवी के मुताबिक, डीएमके के प्रमुख नेता और एक्टर उदयनिधि स्टालिन ने अपनी अगली बड़ी फिल्म के लिए तृषा को अप्रोच किया है। इस फिल्म में उन्हें लीड रोल देने की तैयारी है। उदयनिधि और विजय की पार्टियों के बीच तमिलनाडु की राजनीति में सीधा मुकाबला है। पोन्नियिन सेल्वन के बाद बढ़ी पावर तृषा कृष्णन साउथ सिनेमा की सबसे डिमांडिंग एक्ट्रेसेज में से एक हैं। ‘पोन्नियिन सेल्वन’, ‘घिल्ली’ और ‘वरशम’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। हाल के दिनों में उनकी पॉपुलैरिटी और फीस दोनों में बड़ा उछाल आया है। रिपोर्ट्स की मानें तो वे अब प्रति फिल्म 10 से 12 करोड़ रुपए चार्ज कर रही हैं। उदयनिधि के प्रोजेक्ट को उनकी इसी बढ़ती स्टार पावर से जोड़कर देखा जा रहा है। विजय के शपथ ग्रहण समारोह में हुई थीं भावुक कुछ समय पहले थलापति विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके शपथ ग्रहण समारोह में तृषा भी पहुंची थीं। वहां विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देख उनकी भावुक तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए थे। पर्दे पर भी विजय और तृषा की जोड़ी हमेशा हिट रही है। विजय ने तृषा के लिए बदले नियम तमिलनाडू के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद थलापति विजय ने तृषा के लिए फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े नियम में बदलाव किया है। विजय ने तृषा कृष्णन की फिल्म करप्पू के लिए सुबह 9 बजे की स्क्रीनिंग रखने की स्पेशल परमिशन दी है, जबकि अब तक साउथ में इस पर प्रतिबंध था।
लहसुन मशरूम सब्जी रेसिपी: घर में लहसुन-मशरूम की सब्जी, स्वाद ऐसे बड़े-बड़े शेफ भी हो जाएंगे फेल; यहां पढ़ें आसान तरीका

सब्जी बनाने की सामग्री: 250 ग्राम मशरुम, 10-12 लहसुन की कलियाँ, 1 बड़ा प्याज माइक्रोवेव कटा हुआ, 2 टमाटर छोटा लहसुन कटा, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट, 1/2 छोटा लहसुन हल्दी पाउडर, छवि: फ्रीपिक 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच मसाला तेल या मक्खन, 1 बड़ा चम्मच हरा धनिया पाउडर। इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आये। छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले मशरुम को अच्छे से धोकर साफ कर लें। इसके बाद मध्यम आकार में कट लें। लहसुन की कलियों को प्रभाव कूट लें ताकि उनका स्वाद अच्छे से निकल सके। छवि: फ्रीपिक अब एक कड़ाही में तेल या मक्खन गर्म। इसमें लिखा हुआ है लहसुन और सरसों का तेल। फिर प्याज डाला और उसे गोल्डन ब्राउन होने तक का मौका दिया। इसके बाद अदरक-लहसुन पेस्ट, हरी मिर्च और टमाटर डालें। छवि: एआई टमाटर प्राकृतिक हो जाएं तो हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर नमक और कैटलॉग को अच्छी तरह से भून लें। अब क्यूट हुए मशरूम कड़ही में डाले और मसाले के साथ बढ़िया से पकड़े। छवि: एआई मशरुम पानी छोड़ेंगे, उदाहरणार्थ मध्यम आँच पर 7-8 मिनट तक। जब सब्जी अच्छी तरह पक जाए और मसाला मसाला दिखने लगे, तब ऊपर से गरम मसाला डालें। गैस बंद करें और हरे धनिये से गार्निश करें। छवि: एआई अगर आप ज्यादा क्रीमी स्वाद चाहते हैं तो अंत में 1 मसाला ताज़ा क्रीम दाल ले सकते हैं। मक्खन बनाने में इसका स्वाद और देखने में भी लाजवाब होता है। तीखा पसंद हो तो काली मिर्च भी डाल सकते हैं. छवि: फ्रीपिक मशरुम में प्रोटीन, आहार और कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। वहीं लहसुन के शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में मदद मिलती है। ऐसे में यह सब्जी स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी अच्छी मानी जाती है। छवि: फ्रीपिक
वायरल बीमारियां अब जल्दी ठीक क्यों नहीं होती हैं? कोविड के बाद दुनिया में ऐसा क्या बदल गया

Last Updated:May 14, 2026, 18:18 IST Viral Infections Recovery Time: कोविड महामारी से पहले वायरल बुखार 2-3 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन अब छोटी-छोटी परेशानियां ठीक होने में 8 से 10 दिन का वक्त ले रही हैं. डॉक्टर्स की मानें तो कोविड की वजह से करोड़ों लोगों की इम्यूनिटी लंबे समय तक प्रभावित हुई है. इसकी वजह से वायरल इंफेक्शंस से लड़कर उबरने में शरीर को लंबा समय लग रहा है. इसके अलावा भी कई फैक्टर्स रिकवरी टाइम को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं. कोविड महामारी के बाद वायरल इंफेक्शन को ठीक होने में ज्यादा समय लग रहा है. Viral Diseases and Immunity: जनवरी 2020 में भारत में कोविड का पहला मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद धीरे-धीरे देश भर में कोरोना संक्रमण फैलने लगा था. इसे कंट्रोल करने के लिए लॉकडाउन भी लगाया गया था, लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई. कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया. करीब 6 साल बाद भी कोविड पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन अब यह स्थानीय बीमारी बन गई है. कोविड से पहले जब भी लोगों को बुखार आता था, तब एक पैरासिटामोल लेने पर ही अधिकतर लोग ठीक हो जाते थे. कोविड के बाद हालात पूरी तरह बदल गए हैं. अब छोटी-मोटी परेशानियां होने पर भी लोगों को सही ट्रीटमेंट के बावजूद रिकवर होने में कई सप्ताह लग जाते हैं. पहले सामान्य वायरल बुखार, सर्दी या फ्लू जैसी बीमारियां कुछ दिनों में ठीक हो जाया करती थीं, लेकिन अब कई लोग शिकायत करते हैं कि वायरल संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है. खांसी हफ्तों तक नहीं जाती, कमजोरी बनी रहती है और शरीर पूरी तरह रिकवर होने में ज्यादा समय लेने लगा है. कोविड-19 महामारी के बाद लोगों के मन में यह सवाल और बढ़ गया है कि आखिर अब वायरल बीमारियां जल्दी ठीक क्यों नहीं होतीं? क्या वायरस पहले से ज्यादा खतरनाक हो गए हैं या फिर दुनिया में कुछ ऐसा बदल गया है, जो शरीर की रिकवरी को प्रभावित कर रहा है. इस बारे में डॉक्टर की राय जान लेते हैं. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया कोविड के बाद दुनिया में कई चीजें बदली हैं. सबसे बड़ा बदलाव लोगों की इम्यूनिटी और शरीर के इंफेक्शन से लड़ने के तरीके में देखा गया है. कोरोना वायरस ने सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि शरीर के इम्यून सिस्टम पर भी गहरा असर डाला है. कई रिसर्च में यह सामने आया कि कोविड संक्रमण के बाद कुछ लोगों का इम्यून रिस्पॉन्स लंबे समय तक प्रभावित रह सकता है. यही वजह है कि बाद में होने वाले वायरल संक्रमण से शरीर को उबरने में ज्यादा समय लग रहा है. पहले जो वायरल इंफेक्शन 3-4 दिन में अपने आप ठीक हो जाते थे, उन्हें ठीक होने में अब 10 से 15 दिन का वक्त लग रहा है. डॉक्टर ने बताया कि अब लोग छोटी बीमारी में भी तुरंत एंटीबायोटिक या कई दवाएं लेने लगे हैं, जबकि वायरल संक्रमण पर एंटीबायोटिक असर नहीं करती हैं. जरूरत से ज्यादा दवाओं का इस्तेमाल शरीर के प्राकृतिक रिकवरी सिस्टम को भी प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा कुछ नए वायरस और उनके वेरिएंट पहले की तुलना में ज्यादा संक्रामक हो सकते हैं, जिससे संक्रमण लंबे समय तक बना रह सकता है. हालांकि हर लंबे समय तक रहने वाला वायरल संक्रमण गंभीर हो, ऐसा जरूरी नहीं है. अगर बुखार, खांसी, सांस लेने में दिक्कत या कमजोरी लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. सही खानपान, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनाव कम करने से इम्यूनिटी को मजबूत रखने में मदद मिल सकती है. एक्सपर्ट की मानें तो कोविड के बाद लोगों का खानपान और लाइफस्टाइल भी काफी बिगड़ गई है. अब ज्यादातर लोगों की फिजिकल एक्टिविटी काफी कम हो गई है, जंक फूड का सेवन बढ़ गया है और सोने-जागने की टाइमिंग में भी बदलाव आ गया है. इसके अलावा बढ़ता हुआ तनाव भी इम्यून सिस्टम को कमजोर कर रहा है. कोविड के बाद बढ़ता स्क्रीन टाइम भी सेहत के लिए एक चैलेंज बन गया है. इन सभी फैक्टर्स की वजह से भी वायरल संक्रमण को ठीक होने में लंबा वक्त लग रहा है. अगर शरीर को पर्याप्त आराम, सही पोषण और नींद नहीं मिलती, तो वायरल संक्रमण से रिकवरी धीमी हो सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
पुराने जमाने के ये 7 फूड अब बन गया अमीरों के घरों की शान, हर किसी में सुपरफूड वाला गुण

7 Old Foods Become Superfoods: क्या आपको पता है कि आपके दादा-परदादा क्या खाते हैं. अगर नहीं पता है तो अपने पिताजी से एक बार जरूर पूछिए. तब के जमाने में बाहर की इतनी चीजें नहीं मिलती थी. पिज्जा, बर्गर, चॉकलेट, बिस्कुट, आइस्क्रीम, केक, पेस्ट्रीज आदि नहीं होते थे. वे लोग घर का शुद्ध खाना खाते थे. साबुत अनाज से बनी हुई चीज, फल, हरी सब्जी, सीड्स आदि का भरपूर सेवन करते हैं. यही लंच होता था, यही डिनर और यही नाश्ता. पर समय के साथ खान-पान में प्रोसेस्ड चीजें मिलने लगी. यानी मशीन से तैयार चीजों से मिलावट वाली चीजें. आज फास्ट फूड, जंक फूड की भरमार है जो हमारी सेहत के लिए दुश्मन से कम नहीं है. पर अच्छी बात यह है कि पिछले कुछ सालों में हमारे दादा-परदादा के यही फूड दोबारा से ट्रेंड में आ गए हैं और अब तो यह अमीरों के घरों की शान होने लगी है. आइए इन फूड के बारे में जानते हैं. वो 7 पुराने फूड जो बन गया सुपरफूड मोटा अनाज : मोटे अनाजों में ज्वार, बाजरा, रागी, कंगनी, कुटकी जैसे श्री अन्न आते थे. पहले के जमाने के लोग इसे अपने भोजन का जरूरी हिस्सा मानते थे. लेकिन समय के साथ मोटे अनाजों को चलन खत्म होने लगा. पहले अमीर लोग इसे थाली से हटाया. बाद में यह सिर्फ गरीबों का भोजन हो गया लेकिन पिछले दो-तीन दशकों में गरीब भी इन अनाजों को खाने से कतराने लगे लेकिन अब ये फूड दोबारा से चलन में आ गए हैं. रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इन फूड को सुपरफूड माना है. ये फूड कई बीमारियों से लड़ने में मददगार है. इसलिए अब ये फूड अमीरों के घरों की शान बनने लगे है. इनसे शुगर कम होती है और हार्ट और लिवर डिजीज का खतरा कम हो जाता है. इन फूड को रोस्टेट करके 500 से 2000 प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है. गुड़ : कुछ साल पहले तक गुड़ हमारे खान-पान से एकदम से हट ही गया था. लेकिन बहुत समय तक भारतीय घरों में चीनी की जगह गुड़ ही मिठास का मुख्य स्रोत हुआ करता था. इसे गर्म दूध में मिलाया जाता था, मिठाइयों में घोला जाता था, खाने के बाद खाया जाता था और सर्दियों के व्यंजनों में गर्माहट और ऊर्जा के लिए इस्तेमाल किया जाता था. आज के समय में गुड़ को फिर से एक नेचुरल विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. गुड़ का स्वाद गहरा और देसी होता है. इसमें एक पारंपरिक अपनापन महसूस होता है. यही कारण है कि गुड़ फिर से ट्रेंड में आ गया है. घर की बनी चटनियां: पुराने समय में चटनियां महज भोजन के साथ परोसी जाने वाली कोई अतिरिक्त चीज नहीं थीं, बल्कि खाने का एक अनिवार्य हिस्सा मानी जाती थीं. नारियल, मूंगफली, पुदीना, टमाटर और लहसुन की चटनियां भोजन में ताजगी और तीखापन लाती थीं. ये चटनियां सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ातीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेमिसाल हैं. आधुनिक समय में लोग फिर से यह समझ रहे हैं कि स्वाद और स्वास्थ्य एक साथ रह सकते हैं, जो साधारण खाने को भी पूरा और संतोषजनक बना देता है. फर्मेंटेड फूड्स: आज दुनिया भर में माइक्रोबायोम और गट हेल्थ की चर्चा होती है लेकिन भारतीय रसोई में इडली, डोसा, ढोकला, कांजी और अचार जैसे फर्मेंटेड (खमीर वाले) खाद्य पदार्थ सदियों से बन रहे हैं. ये चीजें किसी फैशनेबल वेलनेस प्रोडक्ट की तरह नहीं बल्कि मौसम और परंपरा के अनुसार व्यावहारिक रूप से बनाई जाती थीं. आज विज्ञान इन्हें पाचन सुधारने और आंतों के अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने के लिए सराह रहा है, लेकिन भारत के लिए यह पुराना और आजमाया हुआ ज्ञान है. शुद्ध घी: इस धरती पर शुद्ध घी सबसे शुद्ध खाद्य पदार्थ है. घी की छवि में पिछले कुछ दशकों में बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं. एक समय इसे संदेह की नजर से देखा जाने लगा था लेकिन अब यह एक बार फिर सम्मान के साथ रसोई में लौट आया है. दादा-दादी की पीढ़ी के लिए घी कोई विलासिता नहीं, बल्कि ताकत, पोषण और अपनेपन का प्रतीक था. लोग अब इसे संतुलित मात्रा में अपना रहे हैं क्योंकि यह न केवल शरीर के लिए फायदेमंद है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी सुकून देता है. मखाना: मखाना लंबे समय तक भारतीय घरों में एक सादे स्नैक या व्रत के भोजन के रूप में इस्तेमाल होता रहा. इसे घी में भूनकर खाना एक पुरानी परंपरा है. आज वही मखाना आकर्षक पैकेजिंग में एक ‘डिज़ाइनर स्नैक’ बन चुका है, जिसे हाई-प्रोटीन और लो-फैट डाइट के लिए आदर्श माना जाता है. यह हल्का और बहुउपयोगी है, इसलिए इतने वर्षों बाद भी यह लोगों की पसंदीदा पसंद बना हुआ है. आज अमीरों के घरों में मखाना किसी शान से कम नहीं है. दही: दही भारतीय थाली का एक स्थायी हिस्सा रहा है जो दोपहर के भोजन, छाछ या चावल के साथ खाया जाता था. आज इसे प्रोबायोटिक कहकर दोबारा पेश किया जा रहा है, लेकिन पुराने लोग इसे हमेशा से इसकी ठंडक और पाचन शक्ति के कारण अपनाते आए हैं. पेट खराब होने पर या तपती गर्मी में राहत देने के लिए दही एक शांत और भरोसेमंद उपाय है, जिसे किसी नए रूप की नहीं बल्कि बस फिर से याद करने की जरूरत है.
सबरीमला में महिलाओं की एंट्री मामला, SC का फैसला सुरक्षित:16 दिन सुनवाई चली; कोर्ट ने केंद्र, धार्मिक संगठनों और याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनीं

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं की एंट्री और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों की सुनवाई गुरुवार को पूरी कर ली है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में 9 जजों वाली बेंच ने 16 दिन तक चली सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट धार्मिक स्वतंत्रता, अनुच्छेद 25 और 26 के दायरे, संवैधानिक नैतिकता और धार्मिक प्रथाओं में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा जैसे कई अहम संवैधानिक सवालों पर फैसला देगी। इनमें सबसे अहम मासिक धर्म के उम्र वाली 10 से 50 साल की महिलाओं की सबरीमाला मंदिर में एंट्री का विवाद है। सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों वाली बेंच ने महिलाओं के सबरीमला मंदिर में एंट्री पर लगे प्रतिबंध को असंवैधानिक बताते हुए हटा दिया था। बाद में 2019 में इस मुद्दे को बड़ी बेंच को भेजा गया। केंद्र सरकार महिलाओं की एंट्री के विरोध में है। सबरीमाला मामले के साथ मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद और दरगाहों में प्रवेश और पारसी महिलाओं के अगियारी में प्रवेश से जुड़े मुद्दे भी बड़ी बेंच को भेजे गए थे। मामले की सुनवाई कर रही 9 जजों की बेंच में CJI जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्य बागची भी शामिल हैं। केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि सबरीमला मंदिर में मासिक धर्म आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध धार्मिक आस्था और संप्रदायिक स्वायत्तता का विषय है। केंद्र के मुताबिक, यह मामला न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर है।
विपक्षी बेंच से लेकर क्लिफ हाउस तक: केरल के नए सीएम वीडी सतीसन के बारे में सब कुछ

एक वकील जिन्होंने छात्र सक्रियता के माध्यम से राजनीति में प्रवेश किया: 31 मई, 1964 को कोच्चि के पास नेट्टूर में जन्मे सतीसन ने कानून की पढ़ाई की और बाद में पूर्णकालिक राजनीति में प्रवेश करने से पहले लगभग एक दशक तक केरल उच्च न्यायालय में अभ्यास किया। उनका उदय छात्र और युवा राजनीति में शुरू हुआ: सतीसन ने केरल छात्र संघ (केएसयू) से शुरुआत की और बाद में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के साथ काम किया। उन्होंने 1980 के दशक के अंत में महात्मा गांधी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। गढ़ बनाने से पहले वह अपना पहला चुनाव हार गए: उनकी चुनावी शुरुआत 1996 में हुई, जब वह परवूर से हार गए, जिसे उस समय वामपंथियों का गढ़ माना जाता था। वह 2001 में इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए लौटे और तब से इस सीट पर काबिज हैं। परवूर से छह बार विधायक: सतीसन ने 2001 से लगातार केरल विधानसभा में परवूर का प्रतिनिधित्व किया है, लगातार छह बार जीत हासिल की और केरल की राजनीति में कांग्रेस के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक बनकर उभरे। 2021 के बाद वह विपक्ष का चेहरा बन गए: 2021 में, सतीसन ने केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में रमेश चेन्निथला की जगह ली। पिछले पांच वर्षों में, उन्होंने शासन और भ्रष्टाचार से लेकर कानून-व्यवस्था तक के मुद्दों पर वामपंथी सरकार पर यूडीएफ के हमलों का नेतृत्व किया।







