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कैसे कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने केरल का मुख्यमंत्री चुनने में अपना रास्ता अपनाया | भारत समाचार

Iran's Supreme Leader Mojtaba Khamenei and US President Donald Trump. (File)

आखरी अपडेट:14 मई, 2026, 13:51 IST कई दिनों के गहन विचार-विमर्श के बाद, केरल विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की प्रचंड जीत के बाद कांग्रेस ने वीडी सतीसन को सीएम पद के लिए चुना। केरल के मनोनीत मुख्यमंत्री वीडी सतीसन और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की फ़ाइल छवि। (स्रोत: पीटीआई) केरल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन को नियुक्त करने के कांग्रेस के फैसले ने कांग्रेस के निर्णय लेने में, खासकर वायनाड से सांसद बनने के बाद केरल की राजनीति में, प्रियंका गांधी के बढ़ते प्रभाव को सूक्ष्मता से रेखांकित किया है। कई दिनों के गहन विचार-विमर्श और आंतरिक पैरवी के बाद, कांग्रेस नेतृत्व ने गुरुवार को केरल विधानसभा चुनावों में यूडीएफ की व्यापक जीत के बाद सतीसन को सीएम पद के लिए चुना। यह भी पढ़ें: वीडी सतीसन को केरल का नया मुख्यमंत्री नामित किया गया, कांग्रेस ने 11 दिनों का सस्पेंस खत्म किया जबकि वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल दिल्ली में मजबूत संगठनात्मक समर्थन के साथ एक मजबूत दावेदार बने रहे, कई मीडिया रिपोर्टों ने सुझाव दिया कि प्रियंका गांधी ने यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई कि नेतृत्व अंततः सतीसन की ओर झुका। सतीसन पर प्रियंका के दबाव के पीछे वायनाड फैक्टर? द स्टेट्समैन के अनुसार, प्रियंका गांधी वाड्रा कथित तौर पर अपने वायनाड निर्वाचन क्षेत्र में वीडी सतीसन के समर्थकों के दबाव में थीं, जिन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से उन्हें केरल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त करने का आग्रह करते हुए “ईमेल की बाढ़” भेजी थी। एक संगठित अभियान के हिस्से के रूप में, सतीसन के वायनाड समर्थकों ने उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाने की अपीलों के साथ उनके आधिकारिक ईमेल को भर दिया था। उन्होंने पार्टी के आलाकमान को यह दिखाने के लिए सार्वजनिक प्रदर्शन भी किए थे कि “जिस व्यक्ति ने लड़ाई का नेतृत्व किया” उसे राज्य का नेतृत्व करना चाहिए। कथित तौर पर प्रियंका गांधी केरल में राजनीतिक मूड के बारे में चिंतित थीं, खासकर वायनाड में, जो वह लोकसभा क्षेत्र है जिसका वह वर्तमान में प्रतिनिधित्व करती हैं। यह भी पढ़ें: मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन: कैसे कांग्रेस ने केरल में कर्नाटक दोहराने से इनकार कर दिया? सीएम चेहरे पर सहमति बनाने से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केरल के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की चर्चा की। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, ऐसी ही एक चर्चा के दौरान, प्रियंका ने राहुल गांधी से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को अंतिम रूप देने से पहले केरल में “मौजूदा राजनीतिक माहौल” को ध्यान में रखने का आग्रह किया। जैसे ही सीएम चेहरे पर सस्पेंस जारी रहा, वायनाड में राहुल और प्रियंका को निशाना बनाने वाले पोस्टर सामने आए, जिसमें नेतृत्व को वेणुगोपाल के पक्ष में सतीसन को दरकिनार करने के खिलाफ चेतावनी दी गई, अन्यथा उन्हें “अमेठी जैसा” भाग्य मिलेगा। संदेश में केरल कांग्रेस के कुछ वर्गों के भीतर चिंताओं को दर्शाया गया है कि सतीसन की अनदेखी, जिसे व्यापक रूप से यूडीएफ के एलडीएफ विरोधी अभियान के चेहरे के रूप में देखा जाता है, कैडरों और समर्थकों के बीच नाराजगी पैदा कर सकता है। सतीसन को बढ़त क्यों मिली? 2026 के केरल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को निर्णायक जीत दिलाने के बाद सतीसन ने महत्वपूर्ण राजनीतिक गति के साथ नेतृत्व की दौड़ में प्रवेश किया। यूडीएफ ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें हासिल कीं, जबकि कांग्रेस ने 63 सीटें जीतीं, जो गठबंधन के भीतर सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। यह भी पढ़ें: केरल के गेम ऑफ थ्रोन्स में वीडी सतीसन को मिला ताज लेकिन वेणुगोपाल के पास रही सत्ता विपक्ष के नेता के रूप में, सतीसन ने भ्रष्टाचार के आरोपों, शासन के मुद्दों और कानून-व्यवस्था की चिंताओं पर वाम सरकार पर आक्रामक रूप से निशाना साधा था, जिससे चुनाव से पहले कांग्रेस के राजनीतिक संदेश को तेज करने में मदद मिली। कांग्रेस में बढ़ रहा है प्रियंका का प्रभाव! केरल के मुख्यमंत्री के फैसले ने कांग्रेस के आंतरिक विचार-विमर्श में प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। वायनाड से संसद में प्रवेश करने के बाद से, प्रियंका ने केरल की राजनीति में अधिक प्रत्यक्ष हिस्सेदारी हासिल कर ली है और उन्हें राज्य के राजनीतिक मूड की गहरी समझ रखने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम), भारत, भारत न्यूज़ इंडिया कैसे कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने केरल का मुख्यमंत्री चुनने में अपना रास्ता अपनाया? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)प्रियंका गांधी केरल की राजनीति(टी)वीडी सतीसन मुख्यमंत्री(टी)केरल कांग्रेस नेतृत्व(टी)वायनाड निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति(टी)यूडीएफ की जीत केरल चुनाव(टी)राहुल गांधी प्रियंका प्रभाव(टी)केरल सीएम पद की दौड़(टी)कांग्रेस आंतरिक निर्णय लेना

Body Builder death reason| इंटरनेशनल बॉडीबिल्डर रण सिंह की अचानक मौत, 30 साल की उम्र में बड़े खिताब किए थे नाम, कैसे गई जान

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Last Updated:May 14, 2026, 13:50 IST Bodybuilder Ron Singh Death: इंटरनेशनल बॉडीबिल्डर रण सिंह उर्फ सुखविंदर सिंह की अचानक मौत से पूरे शहर में सन्‍नाटा छा गया है. तांडा होशियारपुर के रण स‍िंह का न‍िधन 30 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से हुआ है. इन्‍होंने ऑस्ट्रेलिया में कई खिताब जीते थे. इंटरनेशनल बॉडी ब‍िल्‍डर रण स‍िंह का 30 साल की उम्र में कार्ड‍ियक अरेस्‍ट से न‍िधन हो गया है. Bodybuilder Ron Singh Death: मशहूर इंटरनेशनल बॉडीबिल्डर रण सिंह के अचानक निधन की खबर आ रही है. रण सिंह पंजाब के होशियारपुर में तांडा क्षेत्र के रहने वाले थे. महज 30 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग का बड़ा नाम बने सिंह की मौत से परिवार ही नहीं पूरे शहर में शोक छा गया है. रण सिंह का दूसरा नाम सुखविंदर सिंह था. जानकारी के अनुसार रण सिंह का निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ है. तांडा से निकलकर ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में प्रतियोगिताएं जीतने वाले इस बॉडीविल्डर की उम्र सिर्फ 30 साल थी. ऐसे में एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि इतनी शारीरिक मेहनत और डायटिंग रूटीन से बॉडी बनाने और जिम करने वाले बॉडीबिल्डर को कार्डियक अरेस्ट कैसे हो गया? बता दें कि बॉडीबिल्डर रण सिंह उर्फ सुखविंदर सिंह को मंगलवार दोपहर अचानक दिल का दौरा पड़ा. तुरंत उन्हें अस्पताल जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की लेकिन नहीं बचा सके और निधन हो गया. मात्र 30 साल की उम्र में उनकी इस अचानक मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है. इलाके के चहेते रण सिंह की मौत की खबर फैलते ही उनके घर के बाहर लोग इकठ्ठे हो गए. इस दौरान लोगों ने बताया कि रण सिंह न सिर्फ तांडा बल्कि पूरे होशियारपुर जिले के लिए गौरव का प्रतीक थे. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमाई थी शोहरतरण सिंह ने बॉडीबिल्डिंग के क्षेत्र में अपनी मेहनत और समर्पण से कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था और पदक जीते थे. खासकर ऑस्ट्रेलिया में उन्होंने कई खिताब अपने नाम किए थे, जिससे उनका नाम देश-विदेश में चर्चा में रहा. वे युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत थे. जिम में घंटों कड़ी मेहनत करते और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देते थे. परिवार में पसरा मातमरण सिंह अपने पीछे बूढ़े माता-पिता, पत्नी और सिर्फ दो साल की छोटी बेटी छोड़कर गए हैं. वे अपने परिवार के इकलौते सहारे थे. उनकी अचानक मौत से पूरा परिवार टूट गया है. छोटी सी बच्ची अभी अपने पिता के चले जाने का मतलब भी नहीं समझ पा रही है. पहली घटना नहीं ये.. बता दें कि जिम में मेहनत करने के बाद हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट की ये पहली घटना नहीं है. आए दिन ऐसे मामले आते हैं जब रोजाना शारीरिक मेहनत करने के बावजूद लोगों को कार्डियक अरेस्ट हो रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारी वजन उठाने वाले एथलीट्स को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए, क्योंकि अत्यधिक व्यायाम और सप्लीमेंट्स के कारण हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

बीजेपी की नई टीम:नबीन के नेतृत्व में बीजेपी में बड़े बदलाव की तैयारी, मिलेनियल नेताओं को मिल सकता है बड़ा रोल

बीजेपी की नई टीम:नबीन के नेतृत्व में बीजेपी में बड़े बदलाव की तैयारी, मिलेनियल नेताओं को मिल सकता है बड़ा रोल

भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने सोमनाथ नबीन के साथ ही पार्टी में बड़े पैमाने पर बदलाव की चर्चा तेज हो गई थी। 45 साल की उम्र में उन्होंने मोहम्मद मोहम्मद का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें “मिलेनियल नेता” और पार्टी का “बॉस” बताते हैं। माना जा रहा है कि नवीन की नई टीम के अनुभवी नेता और उभरते हुए युवा राहुल का मिश्रण होगा, जिसका लक्ष्य भाजपा के राष्ट्रीय सम्मेलन को अगले चरण तक ले जाना है। अब चर्चा ये है कि बीजेपी में जल्द ही संगठन में बदलाव होंगे। अब देखिए ये होगी बीजेपी की टीम मिलेनियल में कौन कौन शामिल होता है। नवीन का राजनीतिक सफर खुद भाजपा की नई रणनीति का संकेत माना जा रहा है। बिहार सरकार में घटक दल और शहर विकास मंत्री बने रहने के बाद भी उनके संगठन में शीर्ष भूमिका ऑनलाइन तक बनी रही, इस बात का उदाहरण यह है कि भाजपा और औद्योगिक अनुभव को साथ लेकर चलना पसंद है। इससे पहले राजनाथ सिंह और अमित शाह भी संगठन और सरकार के बीच अहम भूमिका निभा रहे हैं। आधिकारिक तौर पर कहा गया है, केंद्र में कुख्यात कैदियों और नई राष्ट्रीय टीम का गठन 2027 के चुनाव की तैयारी का हिस्सा है। पार्टी सात राज्यों में चुनाव से पहले बेंचमार्क बैलेंस, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और नए नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रही है। और पढ़ें: बिहार के नए मॉडल पर बनी बात! संजय झा और वैलेंटाइन की मुलाकात में क्या हुआ? जेडीयू नेताओं ने खुद बताया मोदी सरकार 3.0 में अविनाशी का स्मारक मोदी सरकार 3.0 के दो साल पूरे होने से पहले ही केंद्र सरकार में बड़े पैमाने पर किसानों की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। राजनीतिक सिद्धांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले कार्यकाल के दौरे में कहा गया है कि आने वाले महीनों में मंत्रिपरिषद में बदलाव संभव है। स्टॉक्स के समर्थित दावे ये जा रहे हैं कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में नवंबर 2014 में पहली बार सरकार का विस्तार हुआ था, जबकि जुलाई 2016 और सितंबर 2017 में बड़े पैमाने पर प्रचार हुआ था। दूसरे अधिवेशन में जुलाई 2021 में बड़ा विस्तार हुआ और मई 2023 में लोकतंत्र के विभाजन में बदलाव हुआ। ऐसा माना जा रहा है कि मोदी 3.0 के दो साल बाद एक बार फिर से मंत्री परिषद की बहाली हो सकती है। 26 मई को केंद्र में मोदी सरकार के 12 साल पूरे हो जायेंगे, जबकि 9 जून को तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे हो जायेंगे. सचिवालय केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 72 सदस्य हैं, जबकि संवैधानिक रूप से 81 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसके नए अवशेष और कुछ संगीतकारों के प्रोटोटाइप में बदलावों का नवीनीकरण किया गया है। सूत्रों के मुताबिक 2027 चुनाव में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने हाल ही में एबीपी न्यूज से एक्सक्लूसिव बातचीत में भी कहा था, ”बीजेपी के कार्यकर्ता फुल टाइम पॉलिटिक्स करते हैं, 24X7 काम करते हैं,” जिसे पार्टी के कैडर आधारित मान्यता प्राप्त और लगातार विचारधारा की तैयारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। संगठन में युवा नेतृत्व जोर बीजेपी में 2027 के विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करते हुए चुनावी बदलावों की तैयारी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश बिहार और में बौद्ध मठ विस्तार के बाद कई नेताओं के संगठन में शामिल होने के संकेत मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, यूपी, पश्चिम बंगाल और झारखंड के कई नेताओं को नई टीम में जगह मिल सकती है। अगले साल होने वाले चुनाव में कई नेताओं को राज्य प्रभारी बनने का दायित्व मिल सकता है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में नई राष्ट्रीय टीम को लेकर चर्चा अंतिम चरण में घोषित की जा रही है। 20 जनवरी को राष्ट्रपति के पद पर नियुक्तियों के बाद नवीन कांस्टीट्यूशनल पद में बदलाव और प्रमुख पदों पर नियुक्तियां की जा रही हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही नई टीम की घोषणा हो सकती है. पासपोर्ट के मुताबिक, नई टीम में युवा नेताओं की अहम भूमिका हो सकती है. हालांकि आईसीआईसीआई बैलेंस भंडार के लिए अनुभवी नेताओं की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी कई नए राज्यों के ज्वालामुखी शामिल हो सकते हैं, ताकि अलग-अलग राज्यों के नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा सके। इसके अलावा महिला नेताओं को भी नई टीम में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने के संकेत हैं। राजनीतिक सिद्धांतों का मानना ​​है कि भाजपा संगठन और भारत सरकार में विचारधारा केवल सार्वभौमिक परिवर्तन नहीं, बल्कि लंबे समय की राजनीतिक तैयारी का हिस्सा हैं। पार्टी 2027 में होने वाले महत्वपूर्ण चुनावी चुनावों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनी रणनीति को नए सिरे से आकार दे रही है। इसके साथ ही बीजेपी अगली पीढ़ी के नेतृत्व की तैयारी पर भी जोर दे रही है। माना जा रहा है कि संगठन और सरकार में बदलाव आने वाले समय में पार्टी की राजनीतिक दिशा, विचारधारा संदेश और नेतृत्व संरचना पर गहरा असर पड़ सकता है। और पढ़ें: भदोही में गरेरे बीजेपी अध्यक्ष पुतिन नबीन को बताया ‘नारी विरोधी’, बोले- जो बिले संकट थे, जनता उनकी वजूद देवता | (टैग्सटूट्रांसलेट)नितिन नबीन(टी)बीजेपी नेतृत्व(टी)बीजेपी संगठन(टी)मोदी 3.0(टी)नितिन नबीन बीजेपी(टी)बीजेपी के नए अध्यक्ष(टी)बीजेपी संगठनात्मक परिवर्तन(टी)मोदी 3.0 कैबिनेट फेरबदल(टी)बीजेपी युवा नेतृत्व(टी)बीजेपी की राष्ट्रीय टीम(टी)बीजेपी 2027 रणनीति(टी)नितिन नबीन सहस्राब्दी नेता(टी)बीजेपी पीढ़ीगत बदलाव(टी)नरेंद्र मोदी बीजेपी(टी)अमित शाह(टी)राजनाथ सिंह(टी)बीजेपी चुनाव रणनीति(टी)बीजेपी नेतृत्व परिवर्तन(टी)नितिन नबीन(टी)बीजेपी(टी)अमित शाह(टी)राजनाथ सिंह

अमिताभ बच्चन 83 साल की उम्र में कैसे रहते हैं इतने एक्टिव और फिट? हर दिन करते हैं ये काम, खुद बताया ये सीक्रेट

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Last Updated:May 14, 2026, 13:40 IST Amitabh Bachchan fitness secret: 83 साल की उम्र में आज भी बॉलीवुड के शंहशाह अमिताभ बच्चन हर यंग एक्टर को अपनी फिटनेस से टक्कर दे सकते हैं. वे इस उम्र में भी लगातार काम कर रहे हैं. बड़े पर्दे से लेकर छोटे पर्दे पर एक्टिव हैं. आखिर कहां से लाते हैं बिग बी इतनी एनर्जी. कैसे रहते हैं वे इतने मेंटली और फिजिकली हैप्पी, कूल, हेल्दी और स्ट्रेस रहित? अमिताभ बच्चन का फिटनेस सीक्रेट जानकर आपको जरूर हैरानी होगी अमिताभ बच्चन के फिट रहने का मंत्र. PC: instagram/amitabhbachchan 83 साल की उम्र में भी बॉलीवुड के शहंशाह, बिग बी, एंग्री यंग मैन जैसे नामों से मशहूर एक्टर अमिताभ बच्चन अपने काम के प्रति काफी डेडिकेटेड रहते हैं. इस उम्र में भी वे लगातार एक्टिंग और होस्टिंग में एक्टिंग हैं. उनके फिटनेस, एनर्जी के सामने तो यंग एक्टर भी फेल हो जाएं. आखिर किस तरह से अमिताभ बच्चन इस उम्र में भी इतने स्वस्थ, फिट रखते हैं? क्या है उनकी फिटनेस का राज? अमिताभ बच्चन के फिटनेस के राज का खुलासा किया है आयुष मंत्रालय ने. दरअसल, कुछ दिनों पहले आयुष मंत्रालय ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पुराना वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें अमिताभ बच्चन अपनी सेहत और फिट रहने के बारे में बताते नजर आ रहे हैं. चलिए जानते हैं यहां अमिताभ बच्चन के फिटनेस का राज क्या है? अमिताभ बच्चन ने खुद बताया फिट रहने का मंत्र आयुष मंत्रालय ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर अमिताभ बच्चन का एक पुराना वीडियो शेयर किया है. मौका है विश्व योग दिवस को बढ़ावा देना. हर साल 21 जून का दुनिया भर में योग दिवस सेलिब्रेट किया जाता है. ऐसे में 83 वर्ष की उम्र में इतने फिट और एक्टिव रहने वाले अमिताभ बच्चन से बेहतर कोई और उदाहरण नहीं हो सकता था. वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा गया कि अमिताभ बच्चन की यह प्रेरणा लोगों को योग के प्रति जागरूक और उत्साहित कर सकती है. साथ ही यह भी बताया गया कि अभिनेता ने अपने स्वस्थ और संतुलित जीवन का राज योग को माना है. अमिताभ बच्चन ने कहा, मैं रोज योग करता हूं वीडियो में अमिताभ बच्चन कहते नजर आ रहे हैं कि वह प्रतिदिन योग करते हैं. इससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं. उनके अनुसार, योग ने उनके जीवन को बेहतर और समृद्ध बनाया है. बिग बी ने इस वीडियो में अपने फैंस को भी योग करने की सलाह दी. इसे रेगुलर प्रैक्टिस करने से जीवन को पूरी एनर्जी और क्षमता के साथ आप जी सकते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि योग हमेशा सही मार्गदर्शन और विशेषज्ञ की सलाह के साथ करना चाहिए. View this post on Instagram

केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन: कैसे कांग्रेस कैडर नेतृत्व पर हावी रहा | भारत समाचार

Iran's Supreme Leader Mojtaba Khamenei and US President Donald Trump. (File)

आखरी अपडेट:14 मई, 2026, 13:23 IST पार्टी सूत्रों के मुताबिक, केसी वेणुगोपाल को शीर्ष पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था. वीडी सतीसन ने केरल के नए मुख्यमंत्री की घोषणा की केरल के मुख्यमंत्री पद की दौड़: केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को भारी जीत हासिल होने के दस दिन बाद, गुरुवार को सबसे पुरानी पार्टी ने सस्पेंस खत्म कर दिया और वरिष्ठ नेता वीडी सतीसन को केरल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में नामित किया। केरल की एआईसीसी प्रभारी दीपा दासमुंशी और राज्य के लिए पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों अजय माकन और मुकुल वासनिक ने एक संवाददाता सम्मेलन में इस फैसले की घोषणा की। सतीसन ने दो अन्य दावेदारों, एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और पूर्व विपक्षी नेता रमेश चेन्निथला को पछाड़कर शीर्ष पद की दौड़ जीती। और पढ़ें: केसी वेणुगोपाल केरल के सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे थे: 48 घंटों में क्या बदल गया? वेणुगोपाल विधायकों और आलाकमान की लोकप्रिय पसंद होने के बावजूद, पार्टी के फैसले में कैडर प्रबल रहे क्योंकि आलाकमान को यह मानने के लिए मजबूर होना पड़ा कि सतीसन की जमीनी स्तर की मांग को नजरअंदाज करने से राज्य में पार्टी के भविष्य को नुकसान होगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक वेणुगोपाल को शीर्ष पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था. हालाँकि, केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा इस सप्ताह नई दिल्ली में राहुल गांधी के साथ चर्चा के बाद स्थिति बदल गई। सूत्रों ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी को बताया कि जनता की राय और कांग्रेस गठबंधन सहयोगी दोनों सतीसन को अगला मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पार्टी को ऐसे नेता का चयन करने से बचना चाहिए जो विधायक नहीं है, क्योंकि इससे उपचुनाव हो सकते हैं। पहले, सीएनएन-न्यूज18 ने बताया था कि पिछले हफ्ते तिरुवनंतपुरम में पर्यवेक्षकों अजय माकन और मुकुल वासनिक के साथ बैठक के दौरान 63 नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायकों में से 43 ने मुख्यमंत्री पद के लिए वेणुगोपाल का समर्थन किया था। वेणुगोपाल ने इनमें से कई निर्वाचित विधायकों के लिए टिकट हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, और कहा जाता है कि कई लोग व्यक्तिगत रूप से उनके प्रति आभारी महसूस करते थे। लेकिन सतीसन यूडीएफ के विजयी अभियान का चेहरा थे, उन्होंने असामान्य एकजुटता के साथ “टीम यूडीएफ” की कप्तानी की और जब गठबंधन खुद अनिश्चित लग रहा था तो अक्सर स्पष्टता पेश करते थे। और पढ़ें: वीडी सतीसन की कुल संपत्ति क्या है? केरल के नए मुख्यमंत्री के पास 6 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है 2021 से विपक्ष के नेता के रूप में, सतीसन ने लगातार विधानसभा के अंदर और बाहर पिनाराई विजयन सरकार पर कांग्रेस के हमले का नेतृत्व किया। यूडीएफ की 2021 की हार के बाद सतीसन ने सफलतापूर्वक कांग्रेस को एक आक्रामक विपक्षी ताकत के रूप में स्थापित किया। विरोध प्रदर्शनों, विधानसभा हस्तक्षेपों और मुद्दा-आधारित अभियानों के दौरान उनकी दृश्यता ने 2026 के चुनाव से पहले पार्टी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में मदद की। हालाँकि, यूडीएफ में कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, जिसके 22 विधायक हैं, को भी सतीसन का समर्थन करने के लिए कहा गया था। आईयूएमएल नेताओं ने कथित तौर पर कांग्रेस पर्यवेक्षकों से कहा कि मौजूदा विधायक को मुख्यमंत्री के रूप में चुनने से अनावश्यक उपचुनावों से बचने में मदद मिलेगी। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 140 विधानसभा सीटों में से 102 सीटों पर कब्जा कर लिया, जिससे एक दशक के बाद ऐतिहासिक वापसी हुई और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन: कैसे कांग्रेस कैडर नेतृत्व पर हावी रहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल सीएम रेस(टी)वीडी सतीसन केरल(टी)केरल के मुख्यमंत्री(टी)कांग्रेस यूडीएफ की जीत(टी)केरल विधानसभा चुनाव(टी)केसी वेणुगोपाल(टी)रमेश चेन्निथला(टी)इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग

क्रिकेट में पकड़ मजबूत कर रहा जापान:एशियन गेम्स के लिए तैयार किया खास मैदान, रूल बुक साथ लेकर मैच देख रहे लोग

क्रिकेट में पकड़ मजबूत कर रहा जापान:एशियन गेम्स के लिए तैयार किया खास मैदान, रूल बुक साथ लेकर मैच देख रहे लोग

बेसबॉल के दीवाने देश जापान में अब क्रिकेट की आवाज भी सुनाई देने लगी है। नागोया शहर से करीब 40 मिनट दूर बने कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में जब बल्लेबाज ने गेंद को जोरदार छक्का लगाकर मैदान के बाहर रेत और झाड़ियों में पहुंचाया, तो दर्शक तालियां तो बजा रहे थे, लेकिन साथ ही हाथ में नियमों की किताब भी पकड़े हुए थे। उन्हें खेल समझ नहीं आ रहा था, लेकिन रोमांच जरूर महसूस हो रहा था। दरअसल, सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स से पहले जापान में क्रिकेट को लेकर माहौल बनना शुरू हो गया है। पहली बार यहां क्रिकेट के लिए खास मैदान तैयार किया गया है। इसी मैदान पर 2028 टी20 वर्ल्ड कप के ईस्ट एशिया-पैसिफिक क्वालिफायर खेले जा रहे हैं। इन मुकाबलों में जापान, वानुआतु, फिजी, समोआ, इंडोनेशिया, फिलीपींस, पापुआ न्यू गिनी, कुक आइलैंड्स और दक्षिण कोरिया जैसी टीमें हिस्सा ले रही हैं। भले ही ये बड़ी क्रिकेट ताकतें न हों, लेकिन जापान के लिए यह टूर्नामेंट किसी बड़े मौके से कम नहीं है। मैदान पर मौजूद 34 साल के स्थानीय निवासी यूया ओकिमासु पत्नी और बच्चों के साथ मैच देखने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने क्रिकेट का नाम पहली बार बच्चों के मशहूर ऑस्ट्रेलियाई कार्टून ‘ब्लूई’ में सुना था। मैच देखते हुए वे नियमों की किताब पलट रहे थे। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, ‘मुझे खेल पूरी तरह समझ नहीं आ रहा, लेकिन देखने में मजेदार लग रहा है।’ करीब 300 लोग जापान और वानुआतु का मुकाबला देखने पहुंचे थे। कई लोग कुर्सियां लगाकर बैठे थे और कमेंटेटर उन्हें आसान भाषा में क्रिकेट के नियम समझा रहा था। एशियन गेम्स के दौरान यहां अस्थाई स्टैंड लगाए जाएंगे, जिससे करीब 2000 दर्शक मैच देख सकेंगे। जापान में खिलाड़ियों की संख्या बढ़ रही है और टोक्यो के आसपास क्रिकेट धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहा है। बेसबॉल के देश जापान में क्रिकेट अभी नया मेहमान है, लेकिन जिस तरह लोग नियमों की किताब लेकर भी मैदान तक पहुंच रहे हैं, उससे साफ है कि यह खेल यहां धीरे-धीरे दिलों में जगह बना रहा है। श्रीलंका के क्यूरेटर तैयार करेंगे मैदान की पिच यह मैदान पहले बेसबॉल का था, इसलिए बाउंड्री लाइन के पास अब भी पिचर का छोटा टीला दिखाई देता है। मैदान की पिच तैयार करने की जिम्मेदारी श्रीलंका के अनुभवी क्यूरेटर असिथा विजयसिंघे के पास है, जो पल्लेकेले इंटरनेशनल स्टेडियम की पिच भी संभालते हैं। आयोजकों का कहना है कि यहां की पिच पाकिस्तान जैसी होगी, जहां गेंद उछाल भी लेगी और स्पिन गेंदबाजों को भी मदद मिलेगी।

केरल में सीएम का नाम तय होता ही कांग्रेस नेता का बड़ा बयान, कहा- ‘किसी जिले में किसी एक नेता को रखा जाए…’

केरल में सीएम का नाम तय होता ही कांग्रेस नेता का बड़ा बयान, कहा- 'किसी जिले में किसी एक नेता को रखा जाए...'

कांग्रेस ने केरल के लिए सीएम के नाम की घोषणा कर दी है. वीडियो शेरीशन (वीडी सतीसन) केरल के नए मुख्यमंत्री। वरिष्ठ कांग्रेस नेता तिरुवनंतपुरम राधाकृष्णन ने कहा कि केरल के अगले मुख्यमंत्री के चयन के लिए पार्टी अलकमान ने स्पष्ट प्रक्रिया अपनाई है। कोट्टायम से नवनिर्वाचित नेता कृष्ण राधन ने अध्ययन से बातचीत में कहा कि अलाकमान ने सभी सितारों को सुना है और पूर्व राष्ट्रपति राहुल गांधी सीधे तौर पर इस प्रक्रिया में शामिल हो रहे हैं। राधाकृष्णन ने कहा, ‘यह स्पष्टता वाली एक ऐसी प्रक्रिया है जिस पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। लोकतंत्र में केवल ऐसी ही प्रक्रिया का पालन किया जा सकता है। इसके लिए मैं अलकमान के प्रति अपनी पसंद व्यक्त करता हूं’। उन्होंने कहा कि कई होटलों में से किसी एक नेता में असमंजस की स्थिति अस्वाभाविक है। यह भी पढ़ें: केरल के मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा, कांग्रेस ने 10 दिन बाद की घोषणा राधाकृष्णन ने कहा, ‘ऐसा नहीं कहा जा सकता कि एक लोकतांत्रिक पार्टी में हर व्यक्ति की राय एक जैसी होनी चाहिए।’ यहां कांग्रेस पार्टी के पास एक एकजुटता शक्ति है, जिसका नेतृत्व है। पार्टी नेतृत्व ने कांग्रेस नेता दल (सीएलपी) की बैठक, नई दिल्ली में बैठक और आगे की चर्चाओं में सभी को शामिल किया है। इन सभी ‘बाथों’ के बाद, नेतृत्व अपना अंतिम निर्णय घोषित करने जा रहा है’। उन्होंने कहा कि हालांकि सी नोटबुक ने अंतिम निर्णय अलकमान को छोड़ दिया था, फिर भी उसके बाद विस्तृत विवरण दिया गया। राधाकृष्णन ने कहा कि वह किसी भी तरह का समर्थन करेंगे, भले ही उनके द्वारा सुझाए गए नाम पर सहमति न मिले। उन्होंने कहा, ‘पार्टी के सदस्यों का स्वभाव, अपने आलाकमान की आज्ञा का पालन करना मेरा कर्तव्य है।’ ‘मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार’, भारत के खिलाफ बांग्लादेश में बोया जहर, तारिक रहमान सरकार बोली- ‘ये झूठ है, सबूत नहीं’” href=’https://www.abplive.com/news/world/banglaदेश-tarique-rahman-govt-reject-jamaat-e-islami-claims-muslim-assam-and-west-bengal-3129636′ target=”_self”>‘मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार’, भारत के खिलाफ बांग्लादेश में बोया जहर, तारिक रहमान सरकार बोली- ‘ये झूठ है, सबूत नहीं’

केसी वेणुगोपाल केरल के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे थे: 48 घंटों में क्या बदल गया? | भारत समाचार

Iran's Supreme Leader Mojtaba Khamenei and US President Donald Trump. (File)

आखरी अपडेट:14 मई, 2026, 12:50 IST केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए तीन प्रमुख नाम सबसे आगे चल रहे थे: वीडी सतीसन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला। वीडी सतीसन को कांग्रेस और यूडीएफ अभियान के मुख्य चेहरे के रूप में देखा गया था। केरल के मुख्यमंत्री पद की दौड़: कांग्रेस पार्टी के भीतर 11 दिनों की अटकलों, रहस्य, बातचीत और गहन पैरवी के बाद, पार्टी के वरिष्ठ नेता वीडी सतीसन को आखिरकार बुधवार को केरल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में नामित किया गया। केरल की एआईसीसी प्रभारी दीपा दासमुंशी और राज्य के लिए पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों अजय माकन और मुकुल वासनिक ने एक संवाददाता सम्मेलन में इस फैसले की घोषणा की। मंगलवार को दिल्ली में राहुल गांधी की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने इस फैसले को अंतिम रूप दिया। केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए तीन प्रमुख नाम सबसे आगे चल रहे थे: वीडी सतीसन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला। पार्टी सूत्रों के मुताबिक दो दिन पहले तक वेणुगोपाल को शीर्ष पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था. हालाँकि, केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा नई दिल्ली में राहुल गांधी के साथ चर्चा के बाद स्थिति बदल गई। और पढ़ें: वीडी सतीसन की कुल संपत्ति क्या है? केरल के नए मुख्यमंत्री के पास 6.69 करोड़ रुपये की संपत्ति है सूत्रों के अनुसार, नेताओं ने राहुल गांधी को बताया कि जनता की भावना, साथ ही गठबंधन सहयोगियों के विचार, केरल के निवर्तमान विपक्ष के नेता वीडी सतीसन के पक्ष में हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को मुख्यमंत्री पद के लिए किसी गैर-विधायक को चुनकर उपचुनाव की स्थिति पैदा करने से बचने की भी सलाह दी। जैसा कि पहले बताया गया था सीएनएन-न्यूज18पिछले सप्ताह तिरुवनंतपुरम में एआईसीसी पर्यवेक्षकों अजय माकन और मुकुल वासनिक द्वारा आयोजित परामर्श के दौरान 63 नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायकों में से 43 विधायक शीर्ष पद के लिए वेणुगोपाल का समर्थन कर रहे थे। हालाँकि, यूडीएफ में कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, जिसके 22 विधायक हैं, को सतीसन का समर्थन करने के लिए कहा गया था। आईयूएमएल नेताओं ने कथित तौर पर कांग्रेस पर्यवेक्षकों से कहा कि मौजूदा विधायक को मुख्यमंत्री के रूप में चुनने से अनावश्यक उपचुनावों से बचने में मदद मिलेगी। पिछले पांच वर्षों में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य करने वाले सतीसन को व्यापक रूप से पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार के खिलाफ कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ अभियान के चेहरे के रूप में देखा जाता था। पार्टी के भीतर कई लोगों का मानना ​​था कि जनता उन्हें मुख्यमंत्री के लिए स्वाभाविक पसंद के रूप में देखती है। और पढ़ें: वीडी सतीसन होंगे केरल के अगले मुख्यमंत्री: कैसे जमीनी स्तर का कांग्रेसी शीर्ष पद तक पहुंचा कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 140 विधानसभा सीटों में से 102 सीटों पर कब्जा कर लिया, जिससे एक दशक के बाद ऐतिहासिक वापसी हुई और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। हालाँकि, जीत ने जल्द ही अंदरूनी कलह को जन्म दे दिया, क्योंकि प्रमुख राजनेताओं के समर्थकों ने शीर्ष पद के लिए अपना जोर तेज कर दिया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया केसी वेणुगोपाल केरल के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे थे: 48 घंटों में क्या बदल गया? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

क्या वाकई चर्बी पिघला देता है लौकी का जूस? जानिए कितनी मात्रा में और कब पीना है फायदेमंद

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Last Updated:May 14, 2026, 12:46 IST Lauki juice for weight loss: देश में मोटापे की बीमारी तेजी से बढ़ती जा रही है. ऐसे में हर किसी को अपना वजन घटाने की जरूरत है. हालांकि वजन घटाने के लिए कई चीजों को एक साथ करने की जरूरत है. इसके लिए सबसे पहले डाइट में कटौती और एक्सरसाइज में बढ़ोतरी करनी पड़ती है लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी है आपके पेट का साफ होना. पेट के लिए लौकी का जूस बेहतरीन औषधि माना जाता है. आयुर्वेद में इसे अमृत तुल्य माना गया है. वजन कम करने में लौकी का जूस किस तरह फायदेमंद है. आइए इसके बारे में जानते हैं. लौकी के जूस के फायदे. भारत में हर चार में से 1 वयस्क मोटापे के शिकार हैं. इससे भी चिंता की बात यह है कि भारत में जो मोटापा वह ज्यादा खतरनाक है क्योंकि यहां के लोगों में पेट के पास चर्बी बेतहाशा बढ़ने लगती है. पेट की चर्बी शरीर की चर्बी से ज्यादा खराब होती है. मोटापा कई बीमारियों की जड़ है. इससे फैटी लिवर, किडनी, हार्ट आदि की बीमारियां होती है. यह शरीर के पूरे मेटाबोलिक प्रोसेस को खराब कर देता है. इसलिए हर हाल में मोटापा को घटाना जरूरी है. लौकी का जूस मोटापा घटाने में बहुत मददगार साबित हो सकता है. आजकल की हेल्दी लाइफस्टाइल में बहुत लोग नेचुरल फूड और हेल्दी ड्रिंक्स को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं. इसी तरह, आसानी से मिलने वाली सब्जियों में से एक लौकी को सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. खासकर अगर आप रोज लौकी का जूस पिएंगे तो आपकी सेहत बेहतर होगी और कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स को कंट्रोल करने में भी मदद मिलेगी. लौकी के जूस में 90% से ज्यादा पानी होता है. इसके साथ ही इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है. फाइबर पेट की चर्बी कम करने के लिए आदर्श है. डॉक्टरों का मानना है कि लौकी का जूस मेटाबॉलिज्म को तेज करने और शरीर को डिटॉक्स करने में तो मदद करता है, लेकिन इसके सेवन की मात्रा और समय का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है, वरना यह फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है. लौकी में बहुत सारा पानी, फाइबर, आयरन और कई तरह के विटामिन्स होते हैं. इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती. गर्मियों में लौकी का जूस पीने से शरीर ठंडा रहता है, गर्मी कम होती है और थकान भी दूर होती है. जो लोग वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं उनके लिए लौकी का जूस बहुत फायदेमंद माना जाता है. इसमें कैलोरी कम और फाइबर ज्यादा होता है, जिससे लंबे समय तक भूख नहीं लगती. इससे बार-बार खाने की आदत कम हो जाती है और धीरे-धीरे वजन कम होने की संभावना रहती है. 100 ग्राम लौकी में मात्र 12-15 कैलोरी होती है. सुबह खाली पेट एक गिलास लौकी के जूस का सेवन कर लेंगे तो पूरा दिन पेट भरा हुआ महसूस होगा और आप एक्स्ट्रा कैलोरी लेने से बच जाते हैं.इसमें मौजूद सॉल्युबल फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है और भूख को नियंत्रित करने में मदद करता है. लौकी का जूस यह शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है, जिससे मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और फैट बर्निंग प्रोसेस तेज होती है. यह इलेक्ट्रोलाइट को संतुलित रखता है. इसलिए वजन घटाने के दौरान शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता. लौकी के जूस का कम मात्रा में सेवन करना चाहिए. एक हेल्दी वयस्क के लिए दिन में 150 से 200 मिलीलीटर यानी एक छोटा गिलास लौकी का जूस पर्याप्त है. इसे सुबह खाली पेट सेवन सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है. जूस पीने के बाद आधे घंटे तक कुछ न खाएं.जूस निकालने से पहले लौकी का एक छोटा टुकड़ा काटकर चख लें. यदि लौकी कड़वी है, तो उसका जूस बिल्कुल न पिएं. कड़वी लौकी में कुकरबिटासिन नामक जहरीला तत्व होता है जो जानलेवा साबित हो सकता है. (डिस्क्लेमर : यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है. न्यूज 18 सकी पुष्टि नहीं करता. किसी भी चीज का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टरों की राय अवश्य लें.) About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

कार, बस में आने लगती है उल्टी, डॉक्टर सुनीता ने बताई असली वजह, बस ये आसान ट्रिक अपनाएं, तुरंत मिलेगी राहत

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दिल्ली: बस, कार या नाव में सफर करते समय कई लोगों को चक्कर आना, उल्टी जैसा महसूस होना, घबराहट या बेचैनी होने लगती है. इसे ही मोशन सिकनेस कहा जाता है. यह समस्या खासतौर पर लंबी यात्रा के दौरान लोगों को परेशान करती है. इस बारे में दिल्ली की फेमस डॉक्टर सुनीता चौधरी के मुताबिक यह दिक्कत शरीर और दिमाग के बीच बनने वाले सिग्नल मिसमैच की वजह से होती है. आइये जानते हैं इसकी सबसे बड़ी वजह क्या है? शरीर और दिमाग के बीच कैसे होता है कन्फ्यूजन डॉ. सुनीता चौधरी ने बताया कि जब हम सफर में होते हैं तो हमारा शरीर लगातार मूव करता है, लेकिन अगर हम फोन देखने लगें या किताब पढ़ें, तो आंखों को लगता है कि शरीर स्थिर है. वहीं, कान और शरीर दिमाग को मूवमेंट का संकेत देते रहते हैं. इसी कारण दिमाग भ्रमित हो जाता है और उल्टी या चक्कर जैसी परेशानी शुरू हो जाती है. महिलाओं में ज्यादा होती है यह समस्या डॉक्टर सुनीता के अनुसार महिलाओं में मोशन सिकनेस ज्यादा देखने को मिलती है. इसकी एक वजह हार्मोनल बदलाव भी हो सकता है. उन्होंने बताया कि एक रिसर्च में पाया गया कि नाव में सफर करने वाले करीब 32 प्रतिशत लोगों को मोशन सिकनेस और 6 से 8 प्रतिशत लोगों को एंग्जायटी महसूस हुई थी. सफर के दौरान यहां बैठना है बेहतर डॉ. चौधरी ने बताया कि सही सीट चुनने से भी काफी राहत मिलती है. कार में आगे की सीट, नाव में बीच का हिस्सा और हवाई जहाज में विंग्स के पास बैठना बेहतर माना जाता है. इसके अलावा खिड़की के पास बैठने और खुली हवा मिलने से भी परेशानी कम होती है. फोन और किताबें बढ़ा सकती हैं परेशानी उन्होंने सलाह दी कि यात्रा के दौरान बाहर के दृश्य देखते रहना चाहिए. लगातार फोन देखने या किताब पढ़ने से मोशन सिकनेस बढ़ सकती है. अगर नजर बाहर के स्थिर दृश्यों पर रहे तो दिमाग को कम भ्रम होता है. खाने-पीने में रखें सावधानी डॉक्टर ने बताया कि सफर से पहले भारी खाना नहीं खाना चाहिए, लेकिन खाली पेट यात्रा करना भी सही नहीं है. हल्का भोजन करना सबसे बेहतर रहता है. नींबू और अदरक जैसे घरेलू उपाय भी काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं. दवा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी कुछ लोग सफर से पहले उल्टी रोकने वाली दवाइयां लेते हैं. डॉ. चौधरी का कहना है कि जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से दवा ली जा सकती है. बिना सलाह के दवा लेने से ज्यादा नींद या सुस्ती जैसी समस्या हो सकती है. ट्रेन में कम होती है मोशन सिकनेस डॉ. सुनीता चौधरी के मुताबिक ट्रेन में लोगों को यह परेशानी कम होती है. क्योंकि ट्रेन की गति एक समान रहती है और उसमें हवा का अच्छा इंतजाम होता है. सड़क की तरह लगातार झटके नहीं लगते हैं. इसलिए शरीर को ज्यादा परेशानी महसूस नहीं होती है.