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क्या खिलाएं-क्या पिलाएं? भयंकर गर्मी में बच्चों को ऐसे रखें स्वस्थ, डॉक्टर से जानें 5 जरूरी बातें

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Last Updated:May 14, 2026, 15:55 IST अगर थोड़ी सी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाई जाए, तो इस भीषण गर्मी में भी बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ रखा जा सकता है. इसलिए जरूरी है कि पेरेंट्स समय रहते सतर्क रहें और बच्चों की सेहत का खास ख्याल रखें. डॉक्टर अनिल पटेल बच्चों के गर्मी से बचाने के लिए कई जरूर टिप्स दी, पेरेंट्स समय रहते सतर्क रहें और बच्चों की सेहत का खास ख्याल रखें. भयंकर गर्मी ने इस वक्त पूरे निमाड़ और सभी जगह को अपनी चपेट में ले रखा है. कई जगहों पर तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जिससे आम जनजीवन पर असर साफ दिखाई दे रहा है. लेकिन इस भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा खतरा बच्चों पर मंडरा रहा है, क्योंकि उनका शरीर तापमान को नियंत्रित करने में उतना सक्षम नहीं होता. ऐसे में जरा सी लापरवाही उन्हे बीमार कर सकती है. दरअसल, गर्मी के मौसम में बच्चों में हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है. हीट स्ट्रोक एक गंभीर स्थिति होती है, जब शरीर का तापमान 40 डिग्री या उससे ज्यादा हो जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता. इसके चलते तेज बुखार, चक्कर आना, उल्टी, त्वचा का सूखना और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. ऐसे में अगर बच्चे में ये संकेत नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी हो जाता है. डॉक्टर अनिल पटेल बताते हैं कि बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की आदतों में थोड़े बदलाव करके ही उन्हें सुरक्षित रखा जा सकता है. सबसे जरूरी है कि बच्चों के शरीर में पानी की कमी न होने दी जाए. इसके लिए उन्हें दिनभर पानी पिलाते रहें, साथ ही ORS, नारियल पानी, छाछ या ग्लूकोज जैसे पेय भी देते रहें, ताकि शरीर में जरूरी लवण की कमी न हो. बच्चों को गर्मी से बचाने की सलाहवहीं, तेज धूप से बचाव भी बेहद जरूरी है. खासतौर पर सुबह 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक बच्चों को बाहर खेलने से रोकना चाहिए, क्योंकि इस दौरान धूप सबसे ज्यादा खतरनाक होती है. अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो उन्हें पूरी तरह कवर करके ही बाहर भेजें.कपड़ों का चुनाव भी बच्चों की सेहत पर असर डालता है. गर्मी में बच्चों को हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनाने चाहिए, जिससे शरीर को ठंडक मिलती रहे और पसीना आसानी से सूख सकें. इसके साथ ही घर का वातावरण भी ठंडा रखना जरूरी है, ताकि बच्चों को लू से बचाया जा सके.खानपान की बात करें तो गर्मी में बच्चों को हल्का और पौष्टिक भोजन देना चाहिए. तरबूज, खीरा, खरबूजा जैसे मौसमी फल न सिर्फ शरीर को ठंडक देते हैं, बल्कि इम्यूनिटी भी बढ़ाते हैं. यही वजह है कि डॉक्टर बच्चों की डाइट में इन चीजों को शामिल करने की सलाह देते हैं.अगर थोड़ी सी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाई जाए, तो इस भीषण गर्मी में भी बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ रखा जा सकता है. इसलिए जरूरी है कि पेरेंट्स समय रहते सतर्क रहें और बच्चों की सेहत का खास ख्याल रखें. About the Author Mohd Majid with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Khandwa,Khandwa,Madhya Pradesh

मूंग दाल पनीर चीला रेसिपी: पूछताछ में मुर्गदाल-पनीर चीला, लाजवाब स्वाद के साथ मिलेगा हाई प्रोटीन; नोट करें मिनट वाली रेसिपी

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 1 कप ढीली मूंग दाल, 100 ग्राम पनीर, 1 प्याज, 1 छोटा चम्मच हरी मिर्च, हरा धनियां, 1 छोटा मोटा अदरक, नमक, 1/2 छोटा मोटा लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा छोटा जीरा, आवश्यक पानी, तेल छवि: फ्रीपिक चीला बनाने की आसान विधि: सबसे पहले मूंग दाल को अच्छी तरह धोकर 3 से 4 घंटे के लिए सबसे सस्ता दाम। जब दाल फूल जाए, तब उसके पानी के मसाले में डाला हुआ और थोड़ा सा पानी मिलाकर बैटर तैयार कर लें। छवि: एआई अब इस बैटर में नमक, जीरा, अदरक, हरी मिर्च और हरा धनिया मोबिल से मिला लें। इसके बाद पनीर को कद्दू कर लें। खजूर तो इसमें थोड़ा सा नमक और काली मिर्च साबुत स्टफिंग तैयार कर सकते हैं. छवि: एआई अब गैस पर तवा गरम करें और पंखुड़ी वाला तेल लगाएं। तवे पर एक कलछी बैटर फोटोग्राफर गोल आकार में फैला हुआ है। ऊपर से छोटे प्याज और फिर डाले गए पनीर की स्टफिंग। छवि: एआई चीले के सहायक पर थोड़ा सा तेल डाला और मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंक लें। गरमा-गरम मूंगदाल-पनीर चीला हरी चटनी, दही या टोमैटो सॉस के साथ सर्व करें। छवि: एआई मूंग की दाल में प्रोटीन और कड़वाहट पाई जाती है, जबकि मूंगफली शरीर को कैल्शियम और ऊर्जा देती है। ऐसे में यह नाश्ता वजन नियंत्रित करने वाले लोगों और फिटनेस पसंद लोगों के लिए भी शानदार नियुक्ति है। छवि: फ्रीपिक अगर आप यात्रा करते हैं तो इसमें अपनी पसंद की सामग्री जैसे कि काली मिर्च, गाजर या स्वीटकॉर्न भी मिला सकते हैं। इससे स्वाद और पोषण दोनों बढ़ेंगे। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)मूंग दाल पनीर चीला(टी)पनीर चिल्ला रेसिपी(टी)हाई प्रोटीन रेसिपी(टी)मूंग दाल पनीर चिल्ला रेसिपी(टी)स्वस्थ नाश्ता(टी)वजन घटाने के लिए नाश्ता(टी)मूंग दाल चिल्ला(टी)गर्मियों के लिए हाई प्रोटीन ब्रेकफास्ट रेसिपी

करनाल के युवक की अमेरिका में एक्सीडेंट में मौत:गाड़ी को पीछे से मारी टक्कर; 35 लाख का कर्ज लेकर विदेश गया, परिवार का इकलौता बेटा

करनाल के युवक की अमेरिका में एक्सीडेंट में मौत:गाड़ी को पीछे से मारी टक्कर; 35 लाख का कर्ज लेकर विदेश गया, परिवार का इकलौता बेटा

अमेरिका के इंडियाना राज्य के प्लेनफील्ड इलाके में 12 मई को हुए सड़क हादसे में करनाल के युवक की मौत हो गई। वह रेड लाइट पर खड़ा था, तभी पीछे से तेज रफ्तार कार ने उसकी गाड़ी को टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को मोर्चरी हाउस भिजवाया गया। मृतक युवक की पहचान 40 वर्षीय प्रवीन निवासी शिव कॉलोनी, करनाल के रूप में हुई है। अमेजन कंपनी में करता था काम प्रवीण करीब तीन साल पहले अमेरिका गया था और वहां अमेजन कंपनी में डिलीवरी का काम कर रहा था। प्रवीन अपने परिवार का इकलौता बेटा था और दो बच्चों का पिता था। उसकी एक बहन भी है। परिवार के आर्थिक हालात सुधारने के लिए उसने अमेरिका जाने का फैसला लिया था और इसके लिए 30 से 35 लाख रुपए का कर्ज लिया था। वहां पहुंचने के कुछ महीनों बाद उसे नौकरी मिल गई थी और वह नियमित काम कर रहा था। रेड लाइट पर खड़ा था, तभी हुआ हादसा मृतक के मामा चरणजीत ने बताया कि परिजनों को अमेरिका से कॉल के जरिए हादसे की सूचना मिली। 12 मई की सुबह प्रवीन डिलीवरी के लिए जा रहा था और प्लेनफील्ड में क्वेकर बुलेवार्ड और स्टाउट हेरिटेज पार्कवे के चौराहे पर रेड लाइट पर खड़ा था। इसी दौरान पीछे से एक तेज रफ्तार कार आई और उसकी डिलीवरी गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। देखें हादसे की फोटो… दो अन्य घायल, पुलिस ने शव मोर्चरी में रखवाया हादसे में टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि प्रवीन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए। घटना को देख आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी हाउस में रखवा दिया।

कॉप की भूमिका में सैफ अली:भक्षक' के बाद अब 'कर्तव्य' की बारी; निर्देशक ने बताया क्यों सैफ थे पहली पसंद

कॉप की भूमिका में सैफ अली:भक्षक' के बाद अब 'कर्तव्य' की बारी; निर्देशक ने बताया क्यों सैफ थे पहली पसंद

‘भक्षक’ के बाद निर्देशक पुलकित अब नेटफ्लिक्स फिल्म ‘कर्तव्य’ लेकर आ रहे हैं, जिसमें सैफ अली खान कॉप बने हैं। पुलकित ने फिल्म के बैकड्रॉप, सैफ की कास्टिंग आदि पर बातचीत की… पुलकित कहते हैं, ‘कर्तव्य’ किसी एक सच्ची घटना पर आधारित नहीं है। यह विचार मेरे दिमाग में बहुत सालों से चल रहा था। हम अक्सर अपने अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन अपने कर्तव्यों पर चर्चा कम ही होती है। बतौर इंसान हमारी क्या जिम्मेदारी है? एक पिता का काम सिर्फ बच्चा पैदा करना नहीं है, बल्कि उस बच्चे की जिंदगी में क्या सही है और क्या गलत, यह सिखाना भी उसकी ड्यूटी है। मैं कहानी के जरिए उसी कर्तव्य की परिभाषा को ढूंढ रहा था। मैं एक ऐसी दुनिया बुनना चाहता था जहां कर्तव्य और इंसानियत के बीच का संघर्ष दिखे। बहुत सालों तक यह विचार मेरे अंदर बंद था, जिसे अब मैंने इस फिल्म के रूप में बाहर निकाला है। फिल्म की स्क्रिप्ट लेकर किसी और एक्टर के पास गया ही नहीं पुलकित बताते हैं, ‘भक्षक’ के बाद रेड चिलीज और नेटफ्लिक्स के साथ रिश्ता और मजबूत हुआ। जब ‘कर्तव्य’ लिखी तो सबसे पहले उन्हें सुनाई और वे तुरंत तैयार हो गए। सैफ ही मेरी पहली पसंद थे। मैं यह स्क्रिप्ट लेकर किसी और एक्टर के पास गया ही नहीं।’ फिल्म के लिए ‘झामली’ नाम की एक काल्पनिक जगह बनाई है फिल्म की दुनिया पर पुलकित कहते हैं…‘हमने ‘झामली’ नाम की एक काल्पनिक जगह बनाई है, जिसकी टोन पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा बॉर्डर जैसी रखी गई। ‘ओमकारा’ में सैफ का ‘लंगड़ा त्यागी’ वाला किरदार मेरे दिमाग में हमेशा रहा। मुझे मजा आता है जब आप बांद्रा में रहने वाले, इंग्लिश बोलने वाले एक्टर को छोटे शहर की धूल-मिट्टी में डाल देते हैं।’ ‘ओमकारा’ के बाद कम निर्देशकों ने सैफ के देसी और रॉ अंदाज में लिया पुलकित मानते हैं, ‘ओमकारा के बाद बहुत कम निर्देशकों ने सैफ के उस देसी और रॉ अंदाज को इस्तेमाल किया। ‘आरक्षण’ और ‘तांडव’ में कोशिश जरूर हुई, लेकिन मुझे वो वाला सैफ नहीं मिला जो ‘लंगड़ा त्यागी’ में दिखा था। मेरे जेहन में वही इमेज थी, इसलिए मैं उन्हें फिर से उसी दुनिया में वापस लेकर गया।’ ‘99% हिंदुस्तान छोटे शहरों में बसता है’ अपने सिनेमा की जड़ों पर बात करते हुए पुलकित कहते हैं, ‘मैं खुद छोटे शहर से आता हूं, इसलिए मुझे ऐसी कहानियों में मजा आता है। 99% हिंदुस्तान छोटे शहरों और कस्बों में बसता है। जब आप ग्रासरूट लेवल की कहानी लिखते हैं, तो एक्टर्स को भी उसमें कुछ नया नजर आता है। यही वजह है कि मैंने सैफ, रसिका दुग्गल, संजय मिश्रा और मनीष चौधरी जैसे दमदार एक्टर्स को चुना। हम स्टारडम नहीं, परफॉर्मेंस पर दांव लगा रहे हैं।’

चारधाम यात्रा में 25 दिनों में 40 श्रद्धालुओं की मौत:केदारनाथ में सबसे ज्यादा 22 की जान गई; बद्रीनाथ में 7, गंगोत्री-यमुनोत्री में भी बढ़ा आंकड़ा

चारधाम यात्रा में 25 दिनों में 40 श्रद्धालुओं की मौत:केदारनाथ में सबसे ज्यादा 22 की जान गई; बद्रीनाथ में 7, गंगोत्री-यमुनोत्री में भी बढ़ा आंकड़ा

चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार रिकॉर्ड बना रही है। 19 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा में 13 मई तक 12 लाख 64 हजार 217 श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। लेकिन दूसरी ओर यात्रा के दौरान मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की 14 मई सुबह 10 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार अब तक चारधाम यात्रा में 40 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा 22 मौतें केदारनाथ धाम में दर्ज की गई हैं। वहीं बद्रीनाथ में 7, यमुनोत्री में 6 और गंगोत्री में 5 श्रद्धालुओं की जान गई है। सरकार लगातार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और मेडिकल तैयारियों का दावा कर रही है, लेकिन लगातार बढ़ते मौत के आंकड़े यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य चुनौतियों और हाई एल्टीट्यूड से जुड़ी परेशानियों की गंभीरता भी दिखा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अधिकांश मौतें हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाइपरटेंशन और अन्य स्वास्थ्य कारणों से हुई हैं। मौतों के पीछे हाई एल्टीट्यूड, हार्ट अटैक और पुरानी बीमारियां स्वास्थ्य विभाग के अनुसार चारधाम यात्रा में अब तक हुई अधिकांश मौतें स्वास्थ्य खराब होने, हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस जैसी समस्याओं के कारण हुई हैं। यात्रा मार्ग ऊंचाई वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जहां ऑक्सीजन का स्तर कम होने और लगातार चढ़ाई की वजह से बुजुर्गों और पहले से बीमार यात्रियों की तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आ रहे हैं। यात्रा से पहले जारी की गई थी एडवाइजरी चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले सरकार ने कई समीक्षा बैठकें की थीं। सभी विभागों को यात्रा शुरू होने से पहले तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए थे। सरकार का दावा है कि यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सेवाओं, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। यात्रियों के लिए एडवाइजरी भी जारी की गई थी, जिसमें बुजुर्गों, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी गई थी। स्वास्थ्य मंत्री ने भी यात्रियों से सावधानी बरतने और शरीर में परेशानी होने पर तुरंत रुकने की अपील की है। स्वास्थ्य मंत्री बोले- अति उत्साह भारी पड़ रहा प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल ने कहा कि कई यात्री शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर तेजी से यात्रा पूरी करने की कोशिश करते हैं। इससे हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड की समस्या बढ़ जाती है। 47 अस्पताल और 400 डॉक्टर तैनात स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार यात्रा मार्ग पर 47 अस्पताल बनाए गए हैं। इसके अलावा करीब 2820 स्वास्थ्य कर्मियों और 400 डॉक्टरों को अलग-अलग पड़ावों पर तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि पहली बार दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में 180 डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इन्हें हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाइपरटेंशन और शुगर मरीजों के उपचार की ट्रेनिंग दी गई है। बद्रीनाथ और केदारनाथ में अस्पताल शुरू करने की दिशा में भी काम चल रहा है। ट्रॉमा सेंटर बनाने की तैयारी सरकार अब यात्रा मार्ग पर डेडिकेटेड ट्रॉमा सेंटर बनाने की तैयारी में भी जुट गई है। दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में ट्रॉमा सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा कौड़ियाला समेत यात्रा मार्ग के अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी ट्रॉमा सेंटर बनाने की योजना है ताकि दुर्घटना या स्वास्थ्य आपात स्थिति में “गोल्डन ऑवर” के भीतर इलाज मिल सके और जान बचाई जा सके।

अंकुरित या भुना चना, किससे मिलेगा आपको ज्यादा मात्रा में प्रोटीन? जानिये दोनों में अंतर

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अंकुरित चने और भुने चने में अंतर: भारतीय आहार का एक सस्ता और पौष्टिक स्रोत है, जो प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है. लोग इसे अलग‑अलग तरीकों से खाते हैं, भुना हुआ चना और अंकुरित (स्प्राउटेड) चना सबसे आम रूप हैं. लेकिन सवाल यह है कि इन दोनों में से किसमें ज्यादा प्रोटीन होता है और कौन ज्यादा फायदेमंद है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं. प्रोटीन की मात्रा में अंतरसामान्य तौर पर देखा जाए, तो भुने हुए चने और अंकुरित चने दोनों में प्रोटीन अच्छी मात्रा में होता है,चलिये जानते हैं. भुना हुआ चना: इसमें प्रोटीन की मात्रा थोड़ी अधिक होती है, क्योंकि इसमें पानी नहीं होता और पोषक तत्व सघन (concentrated) रूप में रहते हैं. अंकुरित चना: अंकुरण के दौरान चने में पानी की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे प्रोटीन का प्रतिशत थोड़ा कम दिखाई देता है, लेकिन उसकी गुणवत्ता और पचने की क्षमता बेहतर हो जाती है. यानी, मात्रा के हिसाब से भुने चने में प्रोटीन थोड़ा ज्यादा होता है, लेकिन शरीर के लिए उपयोग (absorption) के हिसाब से अंकुरित चना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. अंकुरित चने के फायदेप्रोटीन आसानी से पचता है.विटामिन C और B की मात्रा बढ़ जाती है.एंजाइम्स एक्टिव हो जाते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाते हैं.वजन घटाने और फिटनेस के लिए अच्छा. अंकुरित चना शरीर को ज्यादा पोषण देता है और हल्का भी होता है. भुने चने के फायदेलंबे समय तक ऊर्जा देते हैं.फाइबर भरपूर, जिससे भूख कम लगती है.यात्रा या स्नैक के लिए सुविधाजनक.जल्दी खराब नहीं होते. भुना चना एक अच्छा और हेल्दी स्नैक है, खासकर जब जल्द ऊर्जा चाहिए हो. कौन सा बेहतर है?ज्यादा प्रोटीन मात्रा के लिए: भुना चनाबेहतर पाचन और पोषण के लिए: अंकुरित चना निष्कर्षभुने हुए और अंकुरित, दोनों तरह के चने अपने‑अपने तरीके से फायदेमंद हैं. अगर आप ज्यादा प्रोटीन की मात्रा चाहते हैं, तो भुना चना अच्छा विकल्प है. लेकिन अगर आप शरीर को ज्यादा पौष्टिक और आसानी से पचने वाला प्रोटीन देना चाहते हैं, तो अंकुरित चना बेहतर है.

किसान मोर्चा के नए अध्यक्ष ने वाहन रैली निकाली…नियुक्ति रद्द:18 दिन में ही गया भाजपा नेता का पद; पेट्रोल बचाओ अपील के बाद देश में पहली कार्रवाई

किसान मोर्चा के नए अध्यक्ष ने वाहन रैली निकाली…नियुक्ति रद्द:18 दिन में ही गया भाजपा नेता का पद; पेट्रोल बचाओ अपील के बाद देश में पहली कार्रवाई

भिंड के भाजपा नेता सज्जन सिंह यादव को 100 से अधिक लग्जरी वाहनों के साथ शहर में प्रवेश करना भारी पड़ गया। नियुक्ति के 18 दिन में ही भाजपा ने उन्हें भिंड जिला भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष पद से हटा दिया है। वे अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद बुधवार शाम को शक्ति प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान शहर का ट्रैफिक बाधित हुआ तो हॉर्न बजाते और नारेबाजी के कारण शोर भी हुआ। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा ने यह कार्रवाई की है। इस मामले में देश में यह पहली कार्रवाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिन में दो बार ईंधन बचाने की अपील कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने अपने काफिले से वाहन कम कर दिए। देश के गृह मंत्री अमित शाह, अन्य विभागों के मंत्रियों, मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं मंत्रियों ने भी काफिले से वाहन कम कर दिए। इसके बाद भी सज्जन सिंह यादव अध्यक्ष बनने के बाद शक्ति प्रदर्शन कर रहे थे। पार्टी ने किया था जवाब तलब मामला सामने आने के बाद भाजपा संगठन ने सज्जन सिंह यादव से चर्चा की। उनसे जवाब तलब किया तो सज्जन सिंह यादव ने पार्टी नेतृत्व को सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी कार्यकर्ता या समर्थक को वाहन लेकर आने के लिए नहीं कहा था। लोग स्वेच्छा से काफिले में शामिल हुए थे और यह पार्टी के प्रति उनका उत्साह व प्रेम था। नियुक्ति रद्द होने के बाद अब कॉल रिसीव नहीं कर रहे दैनिक भास्कर ने जब इस संबंध में सज्जन सिंह यादव से संपर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष देवेंद्र नरवरिया ने कहा कि मामले में सज्जन सिंह यादव से चर्चा की। उनका कहना था कि उन्होंने किसी को काफिले के लिए आमंत्रित नहीं किया था। लोग स्वयं शामिल हुए थे। अनुशासनहीनता पर कार्रवाई की जाएगी जयपाल सिंह चावड़ा ने बताया कि मंगलवार के बाद जहां-जहां से ऐसे मामले सामने आए हैं, वहां की जानकारी लेकर जिम्मेदारों से चर्चा की जा रही है। अभी भिंड का मामला प्रकाश में आया था। इस मामले में भिंड के जिला अध्यक्ष को दायित्व मुक्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जहां भी इस तरह की अनुशासनहीनता सामने आएगी, उनके खिलाफ सख्त निर्णय लिए जाएंगे। इन्होंने भी की अनुशासनहीनता ………………… यह खबर भी पढ़ें सिंगरौली विकास प्राधिकरण अध्यक्ष ई-रिक्शा से बैढ़न पहुंचे: पीछे दौड़ा 200 वाहनों का काफिला सिंगरौली विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल गुरुवार को मोरवा स्थित अपने आवास से ई-रिक्शा में सवार होकर बैढ़न जिला मुख्यालय पहुंचे। उनकी इस यात्रा के पीछे 200 से अधिक वाहनों का लंबा काफिला भी चला। पढ़ें पूरी खबर

धुरंधर के बाद ल्यारी पर आई एक और फिल्म:पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी के फैसलाबाद में सिर्फ 22 टिकट बिके, कई शो कैंसिल

धुरंधर के बाद ल्यारी पर आई एक और फिल्म:पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी के फैसलाबाद में सिर्फ 22 टिकट बिके, कई शो कैंसिल

पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। यह फिल्म पाकिस्तान के ल्यारी इलाके पर आधारित थी। गौरतलब है कि ल्यारी का जिक्र भारतीय फिल्म धुरंधर में भी हुआ है, जो सुपरहिट साबित हुई थी। हालांकि, मेरा ल्यारी को बॉक्स ऑफिस पर कमजोर रिस्पॉन्स मिला। फेसबुक पेज ऑल पाकिस्तान शोबिज स्टार्स ने दावा किया कि पाकिस्तान की फिल्म मेरा ल्यारी को खराब शुरुआत के बाद फैसलाबाद के ताज महल सिनेमा से हटा दिया गया है। फिल्म पहले दिन सिर्फ 22 टिकट ही बेच पाई। कम दर्शक आने की वजह से अगले शो भी रद्द कर दिए गए। बता दें कि यह फिल्म धुरंधर और दूसरी फिल्मों को जवाब देने के लिए बनाई गई। फिल्म को कराची के ल्यारी इलाके की कहानी के तौर पर प्रमोट किया गया था। जहां फिल्मों में अक्सर इस इलाके को अपराध और गैंग हिंसा से जोड़कर दिखाया जाता है, वहीं मेरा ल्यारी में समुदाय, खेल और युवाओं की जिंदगी पर फोकस किया गया। महिला फुटबॉल पर आधारित है फिल्म की कहानी यह फिल्म महिला फुटबॉल पर आधारित है। अबू अलीहा के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में आयशा उमर, दनानीर मोबीन, सामिया मुमताज और ट्रिनेट लुकास हैं। फिल्म की कहानी महिला फुटबॉल, कम्युनिटी की एकता और ल्यारी में युवा खिलाड़ियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर केंद्रित है। मेकर्स ने फिल्म के जरिए इलाके की एक अच्छी इमेज दिखाने की कोशिश की है। डायरेक्टर अबू अलीहा ने पहले कहा था कि फिल्म की 80 प्रतिशत कास्ट लोकल है, जिसमें फुटबॉल टीमों के सदस्य भी शामिल हैं। फिल्म को सिंध के सूचना मंत्री शरजील इनाम मेमन का भी सपोर्ट मिला।

धुरंधर के बाद ल्यारी पर आई एक और फिल्म:पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी के फैसलाबाद में सिर्फ 22 टिकट बिके, कई शो कैंसिल

धुरंधर के बाद ल्यारी पर आई एक और फिल्म:पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी के फैसलाबाद में सिर्फ 22 टिकट बिके, कई शो कैंसिल

पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। यह फिल्म पाकिस्तान के ल्यारी इलाके पर आधारित थी। गौरतलब है कि ल्यारी का जिक्र भारतीय फिल्म धुरंधर में भी हुआ है, जो सुपरहिट साबित हुई थी। हालांकि, मेरा ल्यारी को बॉक्स ऑफिस पर कमजोर रिस्पॉन्स मिला। फेसबुक पेज ऑल पाकिस्तान शोबिज स्टार्स ने दावा किया कि पाकिस्तान की फिल्म मेरा ल्यारी को खराब शुरुआत के बाद फैसलाबाद के ताज महल सिनेमा से हटा दिया गया है। फिल्म पहले दिन सिर्फ 22 टिकट ही बेच पाई। कम दर्शक आने की वजह से अगले शो भी रद्द कर दिए गए। बता दें कि यह फिल्म धुरंधर और दूसरी फिल्मों को जवाब देने के लिए बनाई गई। फिल्म को कराची के ल्यारी इलाके की कहानी के तौर पर प्रमोट किया गया था। जहां फिल्मों में अक्सर इस इलाके को अपराध और गैंग हिंसा से जोड़कर दिखाया जाता है, वहीं मेरा ल्यारी में समुदाय, खेल और युवाओं की जिंदगी पर फोकस किया गया। महिला फुटबॉल पर आधारित है फिल्म की कहानी यह फिल्म महिला फुटबॉल पर आधारित है। अबू अलीहा के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में आयशा उमर, दनानीर मोबीन, सामिया मुमताज और ट्रिनेट लुकास हैं। फिल्म की कहानी महिला फुटबॉल, कम्युनिटी की एकता और ल्यारी में युवा खिलाड़ियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर केंद्रित है। मेकर्स ने फिल्म के जरिए इलाके की एक अच्छी इमेज दिखाने की कोशिश की है। डायरेक्टर अबू अलीहा ने पहले कहा था कि फिल्म की 80 प्रतिशत कास्ट लोकल है, जिसमें फुटबॉल टीमों के सदस्य भी शामिल हैं। फिल्म को सिंध के सूचना मंत्री शरजील इनाम मेमन का भी सपोर्ट मिला।

काला कोट पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी:चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े मामले में पैरवी की; बाहर निकलीं तो चोर-चोर के नारे लगे

काला कोट पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी:चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े मामले में पैरवी की; बाहर निकलीं तो चोर-चोर के नारे लगे

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस चीफ ममता बनर्जी एक बार फिर काला कोट पहनकर कोर्ट में दलीलें देने पहुंची। ममता गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पाल के सामने पेश हुईं। मामला 2026 के राज्य विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद हुई चुनावी हिंसा से जुड़ी जनहित याचिका का था। सुनवाई के दौरान ममता ने कोर्ट को बताया कि राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। इसमें बुलडोजर एक्शन भी शामिल है। पुलिस FIR दर्ज करने की परमिशन नहीं दे रही है। इधर, सुनवाई के बाद जब ममता कोर्ट रूम से बाहर निकलीं, तो गलियारों में मौजूद वकीलों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। ये सभी ममता को देखकर चोर-चोर के नारे लगाने लगे। सुप्रीम कोर्ट में भी दलीलें रख चुकी हैं ममता सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले पर सुनवाई की थी, जहां तब बंगाल की मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी ने भीं दलीलें रखीं थीं। कोर्ट रूम में ममता ने 13 मिनट तक अपनी बात रखी। बेंच के सामने हाथ जोड़कर खड़ी ममता ने कहा कि हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखीं थीं। मुकदमों में आमतौर पर मुख्यमंत्रियों के वकील या सलाहकार ही पेश होते हैं। पढ़ें पूरी खबर…