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कच्ची आम की दाल रेसिपी: घर में कच्ची आम की दाल, पेट की गर्मी के लिए है बेस्ट; नोट करें यूनिक रेसिपी

तस्वीर का विवरण

कच्ची आम की दाल बनाने की सामग्री के लिए: 1 कप तुअर दाल, 1 छोटा कच्चा आम, 2 हरी मिर्च 1 छोटा टमाटर, 1/2 हल्दी, स्वादानुसार नमक, 1 छोटा चम्मच घी, 2 बड़ा चम्मच छवि: एआई धन्यवाद के लिए: 1/2 मेयोनेज़ जीरा, 1/2 मेयोनेज़ जीरा, 1 चुटकी हींग, 7-8 करी पत्ते, 2 सूखी लाल मिर्च, थोड़ा हरा धनिया छवि: सोशल मीडिया दाल बनाने की आसान विधि: सबसे पहले दाल को अच्छी तरह धोकर 15-20 मिनट के लिए सबसे पहले। अब कुकर में दाल और हल्दी, नमक और पानी का मिश्रण मिलाकर 3-4 सीट आने तक पका लें। छवि: फ्रीपिक अब कच्चे आम को छीलकर छोटे-छोटे अनाजों में काट लें। अगर आपको ज्यादा खट्टा स्वाद पसंद है तो आम थोड़ी ज्यादा दाल ले सकते हैं. एक पैन में थोड़ी सी घी या तेल गरम कर लीजिये. छवि: फ्रीपिक इसमें राई, जीरा, हींग, करी पत्ता और सूखा लाल मिर्च तड़का कारखाना शामिल है। फिर इसमें हरी मिर्च और टमाटर के टुकड़े टुकड़े भून लें। अब कटे हुए कच्चे आम और 2-3 मिनट तक के लिए आदर्श आम छोटा नर हो जाए। छवि: एआई इसके बाद दाल में पकी हुई। ज़रूरत के हिसाब से पानी और डालें 5 मिनट तक का पैसा। अंत में लिटिल गुड ताकि रेस्टुरेंटपन का स्वाद कम हो जाए। ऊपर से हरा धनिया मॉड्यूल हॉटागर्म सर्व करें। छवि: एआई आप कच्ची आम की दाल के साथ गरमा गरम चावल, जीरा चावल या रोटी खा सकते हैं. गर्मी के दिनों में ये दाल भी लगती है और पेट भी ठंडा हो जाता है। छवि: एआई शरीर को ठंडक शब्दावली में मदद करता है। पाचन तंत्र बेहतर रहता है। विटामिन-सी से भरपूर है। गर्मी में भूख बढ़ाने में मदद मिलती है। स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का शानदार संयोजन है। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)कच्चे आम की दाल रेसिपी(टी)कच्चे आम की दाल रेसिपी(टी)तूर दाल रेसिपी(टी)ग्रीष्मकालीन रेसिपी(टी)भारतीय भोजन(टी)कच्चा आम की दाल रेसिपी(टी)कच्चा आम की दाल बनाने की विधि

करोड़ों की संपत्ति, पावर पैक परिवार, फिटनेस फ्रीक और लग्जरी लाइफस्टाइल, सब होने के बाद भी अवसाद में क्यों गए प्रतीक यादव

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Last Updated:May 13, 2026, 15:56 IST Prateek Yadav Depressed despite being healthy and wealthy : पैसे की कोई कमी नहीं, परिवार इतना पावरफुल कि एक इशारे पर बड़ा से बड़ा काम भी छोटा पड़ जाए, फिटनेस का ऐसा चस्का कि देश भर में अपना जिम का चेन खोल ले. फिर भी प्रतीक यादव इन सबसे बेजार हो गए थे. कहा जा रहा है कि वे गहरे अवसाद में चले गए थे. इतना सब कुछ होने के बावजूद आखिर कोई कैसे अवसाद में चला जाता है. क्या डिप्रेशन का अमीरी-गरीबी से संबंध है. Prateek Yadav Death : साल 2005 के आसपास की बात है. तब प्रतीक यादव महज 16-17 साल के थे. लेकिन उनके वजूद पर सबसे बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया था. वे देश के दिग्गज नेता मुलायम सिंह यादव के पुत्र तो थे लेकिन सार्वजनिक रूप से इसकी मान्यता नहीं थी. दुनिया को तब पता चला जब अधिवक्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की. इस याचिका में कहा गया कि मुलायम सिंह यादव की दो पत्नियां हैं और दोनों के नाम से कई संपत्तियां हैं लेकिन मुलायम सिंह यादव सिर्फ एक पत्नी की का व्यौरा अपने हलफनामे में बताते हैं. इस सनसनीखेज रहस्योदघाटन के बाद मुलायम सिंह यादव ने पहली बार यह स्वीकार किया कि साधना गुप्ता उनकी पत्नी और प्रतीक यादव उनका बेटा है. यह भूमिका देना इसलिए जरूरी था ताकि आपको पता चले कि प्रतीक यादव किस तरह की जटिलताओं, अस्तित्व के संकटों और गुमनामी की कोख से बाहर आए थे. इन सबके बावजूद प्रतीक यादव की रसूख और उनकी विलासिता में कोई कमी नहीं थी. वे राज्य के सीएम और दिग्गज नेता के बेटे थे. डिप्रेशन का अमीरी-गरीबी से नाता नहींरिपोर्टों के मुताबिक उनके पास रियल स्टेट का बड़ा कारोबार था और जिम का चेन था. साथ ही वे सोशल मीडिया इंफ्लुएंशर से भी कमाई कर लेते थे. ऐसे में पैसे की कमी की तो कोई बात ही नहीं थी. दूसरी ओर वे बेहद फिटनेस फ्रीक थी, लग्जरी लाइफस्टाइल और भारी शानो-शौकत उनकी पहचान थी. इन सबके बावजूद वे कहीं न कहीं गोल्डन केज में बंद थे. इनती भीड़ में तन्हा. शायद यही वह कारण रहा होगा जब वे अवसाद में गए होंगे. अक्सर समाज में यह भ्रम रहता है कि डिप्रेशन केवल गरीबी, असफलता या अभाव से उपजता है. लेकिन मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखे तो खाली पेट और खाली मन के डिप्रेशन में बड़ा अंतर होता है. जब किसी व्यक्ति के पास सत्ता, पैसा और फिटनेस जैसी सभी बाहरी चीजें मौजूद हों, तब भी वह अवसाद का शिकार हो सकता है. दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर और क्लिनिकल सायकोलॉजिस्ट डॉ अरुणा ब्रूटा कहती हैं अवसाद का अमीरी-गरीबी से कोई संबंध नहीं है. यह एक बीमारी है और बीमारी किसी को भी हो सकती है. प्रतीक यादव को किस कारण अवसाद हुई यह तो उनके डॉक्टर ही बताएंगे लेकिन कई स्थितियों में लोग अवसाद में चले जाते हैं चाहे उसके पास कितना भी पैसा या पावर ही क्यों न हो. डिप्रेशन का भावनात्मक कारण हेदोनिक एडेप्टेशन –मनोविज्ञान में एक शब्द है हेदोनिक ट्रेडमिल. इसका अर्थ है कि इंसान कितनी भी बड़ी उपलब्धि या सुख प्राप्त कर ले. एक समय के बाद यह सब नीरस लगने लगता है. जब किसी व्यक्ति के पास दुनिया की हर सुख-सुविधा पहले से मौजूद हो, तो उसके मस्तिष्क को डोपामाइन का किक मिलना बंद हो जाता है. इसलए जीवन में कुछ नया पाने की उत्तेजना खत्म होने लगती है और गहरा खालीपन आने लगता है. इसे बौद्धिक ऊब कहते हैं. अस्तित्वगत संकट- जब जीवन में सब सुख-सुविधा उपलब्ध हो तब इंसान आत्म-बोध या जीवन के अर्थ को तलाशने लगता है. जो व्यक्ति ताकतवर परिवार से होता है उसके उपर अपनी विरासत को बचाने या बड़ा करने का भारी दबाव होता है. यदि उसे अपने काम में कोई वास्तविक उद्देश्य या अर्थ नजर नहीं आता, तो वह सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है वाली भावना में फंस जाता है. फिटनेस और इमेज का दबाव- जिम और फिटनेस का जुनून कभी-कभी व्यक्ति को ज्यादा चिंता में डाल देता है. जो व्यक्ति पावरफुल परिवार से होता है उसमें हमेशा परफेक्ट दिखने की दबाव रहता है. परफेक्शन का बोझ ज्यादा होने से मानसिक थकान होती है. ऐसे लोग कई बार जिम और सप्लीमेंट का सहारा लेते हैं जिससे हार्मोनल असंतुलन पैदा होने लगता है. इससे न्यूरोट्रांसमीटर में उतार-चढ़ाव होने लगता है और व्यक्ति गहरे अवसाद में चला जाता है. वास्तविक संबंधों का अभाव –कहा जाता है कि टॉप पर पहुंचकर व्यक्ति अकेला हो जाता है. जब व्यक्ति बहुत बड़ा हो जाता है तो उसके आगे-पीछे चाटुकारों की एक फौज लग जाती है लेकिन वह व्यक्ति अपनी कमजोरी या अपनी मनोभावों को उन सबसे व्यक्त नहीं कर पाता है क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनकी स्थिति कमजोर होगी. यह भावनात्मक अलगाव डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण बनता है. बायोकेमिकल डिजीज के कई कारण डॉ. अरुणा ब्रुटा के मुताबिक अवसाद कई तरह के होते हैं. प्रतीक यादव को चाहे जो भी अवसाद रहा हो लेकिन यह बहुत खतरनाक होता है. एक बायपोलर डिप्रेसिव डिसोर्डर होता है. इसमें मरीज में आत्महत्या की प्रवृति होती है. वास्तव में सुसाइडोलॉजी बहुत बड़ा साइंस है. इसे लेकर कई रिसर्च हो चुकी है लेकिन अब तक पूरी तरह से यह स्पष्ट नहीं हो पाई है. इसलिए अभी और रिसर्च की जरूरत होती है. एक साइकोसोमेटिक होता है. इसमें ब्रेन का न्यूरोट्रांसमिटर असंतुलित हो जाता है. न्यूरोट्रांसमीटर में खुशी और भावनाओं को नियंत्रित करने वाले डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन होते हैं. इनकी मात्रा कम-ज्यादा हो जाती है. इसलिए यह एक मानसिक बीमारी है जिसका इलाज कराना जरूरी है. अगर किसी व्यक्ति में न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन हो जाए तो इसका सडेन रिएक्शन होता है. इसलिए इसे बायोकेमिकल डिजीज कहा जाता है. कुछ मामलों में यह जेनेटिक भी होता है. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके

पुलिस–प्रशासन ने घर पर जेसीबी चलाई, परिवार दबा:छतरपुर में मलबे में लहूलुहान मिले; केन-बेतवा परियोजना के लिए अतिक्रमण हटाने गए थे

पुलिस–प्रशासन ने घर पर जेसीबी चलाई, परिवार दबा:छतरपुर में मलबे में लहूलुहान मिले; केन-बेतवा परियोजना के लिए अतिक्रमण हटाने गए थे

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के दौधन गांव में केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम ने आदिवासी परिवार के मकान पर बुलडोजर चला दिया। आरोप है कि परिवार घर के अंदर मौजूद था, इसके बावजूद जेसीबी चलाई गई। मलबे में दबने से पति-पत्नी और दो बच्चे घायल हो गए। ग्रामीणों के मुताबिक, कार्रवाई के लिए जेसीबी मशीनें और भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इसी दौरान आदिवासी ग्रामीण आजाद के मकान पर भी कार्रवाई शुरू कर दी गई। “साहब बचा लीजिए…”, मलबे में दबा मिला परिवार प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मकान गिरते ही चीख-पुकार मच गई। परिवार के सदस्य मलबे में दब गए। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें बाहर निकाला। बताया जा रहा है कि पति-पत्नी खून से लथपथ हालत में मिले, जबकि एक बच्चा बेहोश हो गया था। घटना के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें घायल परिवार मदद की गुहार लगाता दिखाई दे रहा है। वीडियो में परिवार कह रहा था कि वे आदिवासी हैं और उन्हें बचाया जाए, लेकिन कार्रवाई नहीं रोकी गई। बुलजोडर कार्रवाई से जुड़ी 3 तस्वीरें देखिए… कार्रवाई के दौरान भड़के ग्रामीण, पथराव और तोड़फोड़ परिवार के घायल होने की खबर फैलते ही गांव में तनाव बढ़ गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। पथराव में एडिशनल एसपी की गाड़ी, तहसीलदार का वाहन और एक जेसीबी मशीन समेत करीब आधा दर्जन वाहनों में तोड़फोड़ हुई। कई गाड़ियों के शीशे टूट गए। प्रशासनिक अमले को भी मौके से पीछे हटना पड़ा। गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात घटना के बाद पूरे इलाके को पुलिस छावनी में बदल दिया गया। गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि स्थिति नियंत्रण में रखी जा सके। प्रशासन उपद्रव और पथराव में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई जल्दबाजी और दबाव में की गई। उनका कहना है कि प्रशासन ने यह सुनिश्चित नहीं किया कि मकान पूरी तरह खाली है या नहीं। केन-बेतवा परियोजना के लिए हटाया जा रहा था अतिक्रमण प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, गांव में केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। टीम राजस्व और पुलिस अमले के साथ मौके पर पहुंची थी। पहले से नोटिस और समझाइश की प्रक्रिया की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं ग्रामीण कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई सवालों के घेरे में प्रशासनिक कार्रवाई घटना के बाद प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मकान तोड़ने से पहले यह जांच की गई थी कि घर के अंदर कोई मौजूद तो नहीं है। क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था। और अगर परिवार अंदर था, तो कार्रवाई क्यों नहीं रोकी गई?

नर्स बनने के लिए ओलिंपिक विजेता का संन्यास:कहा- मुझे ‘असली दुनिया’ का आकर्षण खींच रहा; कॉमनवेल्थ 2026 की टीम में शामिल थीं केटी आर्चीबाल्ड

नर्स बनने के लिए ओलिंपिक विजेता का संन्यास:कहा- मुझे ‘असली दुनिया’ का आकर्षण खींच रहा; कॉमनवेल्थ 2026 की टीम में शामिल थीं केटी आर्चीबाल्ड

ब्रिटेन की सबसे सफल और दिग्गज साइकिलिस्ट में से एक, तीन बार की ओलिंपिक मेडलिस्ट केटी आर्चीबाल्ड ने अचानक संन्यास ले लिया है। हैरानी की बात यह है कि उन्हें इसी साल होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए स्कॉटलैंड की टीम में चुना गया था। लेकिन 32 वर्षीय केटी ने ट्रैक को हमेशा के लिए अलविदा कहकर अपना नया करियर चुन लिया है। अब वह एक नर्स के रूप में मरीजों की सेवा करती नजर आएंगी। केटी ने बताया कि काफी समय से ‘असली दुनिया’ का आकर्षण उन्हें अपनी ओर खींच रहा था। वह उस दुनिया को छोड़ने से डर रही थीं जिसे वह जानती हैं और उसमें माहिर हैं। लेकिन उनका मानना है कि अब उनके अंदर कोई डर नहीं बचा है। केटी ने कहा कि मैं उस स्टार्ट लाइन तक पहुंचने के लिए बेताब थी लेकिन अब मेरा दिमाग और शरीर साथ नहीं दे रहा है। समय आ गया है कि नई पीढ़ी अपना जलवा बिखेरे। अपने नए सफर के बारे में बात करते हुए केटी ने बताया कि वह फिलहाल एक नर्स बनने की ट्रेनिंग ले रही हैं और उन्हें इस नए पेशे से प्यार हो गया है। उनका कहना है कि जब लोगों को मदद की सख्त जरूरत हो और वे आप पर भरोसा कर सकें, तो उनके लिए वह भरोसेमंद इंसान बनना बहुत ही खास एहसास देता है। इस भावुक मौके पर केटी ने अपने शानदार सफर के लिए कोच, टीम के साथियों और परिवार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से अपनी मां और अपने दिवंगत पार्टनर रैब वार्डेल को याद किया। गौरतलब है कि रैब का 2022 में 37 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से अचानक निधन हो गया था। केटी ने कहा कि रैब ने ही उन्हें सिखाया था कि जीवन में रिलैक्स रहने और मजे करने से ज्यादा जरूरी कुछ नहीं है और वह हर दिन इन दोनों चीजों में बेहतर हो रही हैं। 13 साल लंबा रहा करियर, 7 वर्ल्ड टाइटल जीते – केटी ने 19 साल की उम्र में ब्रिटेन की एंड्योरेंस स्क्वाड में जगह बनाई थी। अपने शानदार करियर में उन्होंने कुल 51 प्रमुख मेडल जीते। उनके नाम ओलिंपिक में दो स्वर्ण और एक रजत पदक, सात वर्ल्ड टाइटल, रिकॉर्ड 21 यूरोपियन टाइटल और एक कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक दर्ज है। – वह महिला ‘टीम परस्यूट’ में विश्व रिकॉर्ड धारक टीम का हिस्सा भी हैं। उनके पदकों की संख्या और भी अधिक हो सकती थी, यदि उन्हें 2022 के बर्मिंघम गेम्स और बाद में ओलिंपिक से ठीक पहले चोट व अन्य कारणों से अपना नाम वापस नहीं लेना पड़ता।

केरल विधानसभा चुनाव:केरल के मुख्यमंत्री के चयन में देरी के मुद्दे पर जनता का सामना करना मुश्किल हुआ- एआईयू महासचिव

केरल विधानसभा चुनाव:केरल के मुख्यमंत्री के चयन में देरी के मुद्दे पर जनता का सामना करना मुश्किल हुआ- एआईयू महासचिव

केरल के नए मुख्यमंत्री के चयन में हो रही देरी को लेकर यूनाइटेड डेमोक्रेटिक मोर्चा (यू एफसी) गठबंधन की सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (एआईयू ग्रेड) की गंभीरता अब खत्म हो रही है और इसके कई नेताओं का कहना है कि वे इस मुद्दे पर जनता की राय का सामना करना गलत हैं। तिरुर विधानसभा क्षेत्र से एआईयू के नेता कुरुक्कोली मोइदीन ने रविवार को यहां कहा कि वह जहां भी जाते हैं। खासकर महिलाओं सहित सभी लोग सरकारी कर्मचारियों को मुख्यमंत्री के चयन में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने कहा कि लेकिन इस देरी से भी बड़ी समस्या यह मुद्दा कांग्रेस में खुलकर सामने आया है। विधायक ने कहा, “यह एक बड़ी बर्बादी बन गई है। यहां तक ​​कांग्रेस कार्यकर्ता भी निराश हैं। महिलाएं भी घूम रही हैं कि मुख्यमंत्री का चयन कब होगा। मुझे पूरा विश्वास है कि कांग्रेस के पास सबसे मजबूत नेतृत्व है, इसलिए इन सभी कार्यकर्ताओं का समाधान हो जाएगा।” कोंडोट्टी सीट से विधायक टी. वी. इब्राहिम ने एक दिन पहले कहा था कि मुख्यमंत्री को कौन होना चाहिए, इस पर कांग्रेस ने निर्णय लेने में देरी कर दी है, जिससे यूएफओ की जीत का समर्थन किया जा सके और इसके कारण उनके कार्यकर्ता और नेता जनता का आमना-सामना करने में असमर्थ हो गए हैं। इब्राहिम ने यह भी कहा कि तकनीकी रूप से यह कांग्रेस का आंतरिक मामला हो सकता है, लेकिन ”अश्विवकार्य” में देरी को देखते हुए जल्द ही निर्णय लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री पद के लिए तीन मुख्य उम्मीदवार वरिष्ठ नेता राकेश चेन्निथला, वी. डी. ष्रिषन और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (संस्था) के. सी. वेणुगोपाल हैं.

पहले आदित्य धर को चोर कहा, अब मांगी माफी:धुरंधर 2 की स्क्रिप्ट चुराने के आरोप लगाए थे, मानहानि केस में कोर्ट ने डायरेक्टर के पक्ष में फैसला दिया

पहले आदित्य धर को चोर कहा, अब मांगी माफी:धुरंधर 2 की स्क्रिप्ट चुराने के आरोप लगाए थे, मानहानि केस में कोर्ट ने डायरेक्टर के पक्ष में फैसला दिया

धुरंधर 2 की स्क्रिप्ट चोरी का विवाद अब खत्म हो गया है। मानहानि का केस करने के बाद आदित्य धर पर स्क्रिप्ट चुराने का आरोप लगाने वाले संतोष कुमार अब माफी मांग ली है। जबकि अप्रैल में उन्होंने दावा किया था कि आदित्य धर ने उनकी लिखी स्क्रिप्ट चुराकर फिल्म बनाई। 30 मार्च को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संतोष कुमार ने आदित्य धर को चोर कहा और स्क्रिप्ट चोरी का आरोप लगाया। इसके बाद आदित्य धर ने बॉम्बे हाईकोर्ट में संतोष कुमार के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज की। हाल ही में हुई सुनवाई में आदित्य धर का केस लड़ रहे सीनियर एडवोकेट डॉ. बिरेंद्र सराफ ने कोर्ट में कहा कि अगर संतोष कुमार ये आश्वासन देते हैं कि वो भविष्य में इस तरह की कोई मानहानिकारक टिप्पणी नहीं करेंगे, तो वो ये मामला सुलझाने के लिए तैयार हैं। इस पर संतोष कुमार के वकील ने बिना शर्त माफी पेश की और आश्वासन दिया कि अब आदित्य धर के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया जाएगा। माफी मांगे जाने के बाद आदित्य धर ने मानहानि और हर्जाने की मांग आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। अदालत ने संतोष कुमार की माफी स्वीकार कर मामला खारिज कर दिया है। क्या था संतोष कुमार का पिछला दावा संतोष कुमार ने मार्च में रखी प्रेस कॉन्प्रेंस में दावा किया कि धुरंधर की स्क्रिप्ट उन्होंने लिखी थी, लेकिन बाद में आदित्य दर ने उस कहानी पर धुरंधर 2 बना दी। उन्होंने कहा, ‘आप सबने देखा होगा कि फिल्म बहुत अच्छी चल रही है। ये मूवी देखने के बाद मुझे पता चला कि ये मेरी स्क्रिप्ट है। मेरी कहानी है। मैंने इसे बहुत मेहनत से किया था। 2023 में मैंने यहां आकर बहुत सारी कंपनियों को स्टोरी नरेट की थी। मुझे कहा गया था कि अगर आपको बड़ा एक्टर चाहिए, तो बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी लेकर आओ। मैं सोनी के पास गया, जी के पास गया, टी-सीरीज के पास गया, धर्मा प्रोडक्शन के पास गया।’ आगे उन्होंने कहा, ‘मुझे इस फिल्म की स्क्रिप्ट के लिए आदित्य रॉय कपूर चाहिए था। मैंने बहुत कोशिश की। मैंने बहुत डायरेक्टर्स को स्क्रिप्ट भेजी। मैं स्क्रीनराइटर एसोसिएशन का हिस्सा था, मैंने वहां भी स्क्रिप्ट रजिस्टर करवाई है, नवंबर 2023 में। मेरे पास सारे सबूत हैं। मेरे पास तस्वीरें हैं, स्क्रिप्ट हैं, स्केच हैं। मैं इस फिल्म के खिलाफ केस कर रहा हूं। फिल्म अच्छी है, लेकिन उन लोगों ने मेरे काम का दुरुपयोग किया है। फिल्म सिनेमा एंटरटेनमेंट थी, लेकिन उन्होंने इसे पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा बना दिया।’

पहले आदित्य धर को चोर कहा, अब मांगी माफी:धुरंधर 2 की स्क्रिप्ट चुराने के आरोप लगाए थे, मानहानि केस में कोर्ट ने डायरेक्टर के पक्ष में फैसला दिया

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धुरंधर 2 की स्क्रिप्ट चोरी का विवाद अब खत्म हो गया है। मानहानि का केस करने के बाद आदित्य धर पर स्क्रिप्ट चुराने का आरोप लगाने वाले संतोष कुमार अब माफी मांग ली है। जबकि अप्रैल में उन्होंने दावा किया था कि आदित्य धर ने उनकी लिखी स्क्रिप्ट चुराकर फिल्म बनाई। 30 मार्च को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संतोष कुमार ने आदित्य धर को चोर कहा और स्क्रिप्ट चोरी का आरोप लगाया। इसके बाद आदित्य धर ने बॉम्बे हाईकोर्ट में संतोष कुमार के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज की। हाल ही में हुई सुनवाई में आदित्य धर का केस लड़ रहे सीनियर एडवोकेट डॉ. बिरेंद्र सराफ ने कोर्ट में कहा कि अगर संतोष कुमार ये आश्वासन देते हैं कि वो भविष्य में इस तरह की कोई मानहानिकारक टिप्पणी नहीं करेंगे, तो वो ये मामला सुलझाने के लिए तैयार हैं। इस पर संतोष कुमार के वकील ने बिना शर्त माफी पेश की और आश्वासन दिया कि अब आदित्य धर के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया जाएगा। माफी मांगे जाने के बाद आदित्य धर ने मानहानि और हर्जाने की मांग आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। अदालत ने संतोष कुमार की माफी स्वीकार कर मामला खारिज कर दिया है। क्या था संतोष कुमार का पिछला दावा संतोष कुमार ने मार्च में रखी प्रेस कॉन्प्रेंस में दावा किया कि धुरंधर की स्क्रिप्ट उन्होंने लिखी थी, लेकिन बाद में आदित्य दर ने उस कहानी पर धुरंधर 2 बना दी। उन्होंने कहा, ‘आप सबने देखा होगा कि फिल्म बहुत अच्छी चल रही है। ये मूवी देखने के बाद मुझे पता चला कि ये मेरी स्क्रिप्ट है। मेरी कहानी है। मैंने इसे बहुत मेहनत से किया था। 2023 में मैंने यहां आकर बहुत सारी कंपनियों को स्टोरी नरेट की थी। मुझे कहा गया था कि अगर आपको बड़ा एक्टर चाहिए, तो बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी लेकर आओ। मैं सोनी के पास गया, जी के पास गया, टी-सीरीज के पास गया, धर्मा प्रोडक्शन के पास गया।’ आगे उन्होंने कहा, ‘मुझे इस फिल्म की स्क्रिप्ट के लिए आदित्य रॉय कपूर चाहिए था। मैंने बहुत कोशिश की। मैंने बहुत डायरेक्टर्स को स्क्रिप्ट भेजी। मैं स्क्रीनराइटर एसोसिएशन का हिस्सा था, मैंने वहां भी स्क्रिप्ट रजिस्टर करवाई है, नवंबर 2023 में। मेरे पास सारे सबूत हैं। मेरे पास तस्वीरें हैं, स्क्रिप्ट हैं, स्केच हैं। मैं इस फिल्म के खिलाफ केस कर रहा हूं। फिल्म अच्छी है, लेकिन उन लोगों ने मेरे काम का दुरुपयोग किया है। फिल्म सिनेमा एंटरटेनमेंट थी, लेकिन उन्होंने इसे पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा बना दिया।’

भवानीपुर विधायक के रूप में शपथ लेने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट खाली कर दी | भारत समाचार

Satheesan may emerge as the ultimate loser in the war he has won. Media headlines repeatedly hint that 'most MLAs' are backing KC Venugopal for the top post. (PTI photo)

आखरी अपडेट:13 मई, 2026, 13:59 IST सुवेंदु ने कहा कि हालांकि उन्हें भबनीपुर से शपथ लेने के बाद एक विधानसभा सीट खाली करनी होगी, लेकिन वह नंदीग्राम के लोगों की बारीकी से निगरानी करना और उनके लिए काम करना जारी रखेंगे। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य विधानसभा में विधायक के रूप में शपथ ली। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को घोषणा की कि वह भबनीपुर विधानसभा सीट बरकरार रखेंगे और नंदीग्राम सीट खाली कर देंगे। अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो को उनके गृह क्षेत्र भबनीपुर में 15,000 से अधिक वोटों से हराया और हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में लगातार तीन बार नंदीग्राम को सुरक्षित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हालांकि उन्हें भबनीपुर से शपथ लेने के बाद एक विधानसभा सीट खाली करनी होगी, लेकिन वह नंदीग्राम के लोगों की बारीकी से निगरानी करना और उनके लिए काम करना जारी रखेंगे। “मैंने भबनीपुर से शपथ ली है। नियमों के अनुसार, मुझे एक सीट खाली करनी होगी। हालांकि, मैं नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र की देखभाल करना जारी रखूंगा। मैं नंदीग्राम को यह महसूस नहीं होने दूंगा कि सुवेंदु अधिकारी अब वहां नहीं हैं। मैं हर चीज पर कड़ी नजर रखूंगा। मैं फिरोजा बीबी के समय से इसकी देखरेख कर रहा हूं।” उसने कहा। #घड़ी | कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी का कहना है, “मैं दो विधानसभा क्षेत्रों से विधायक के रूप में शपथ नहीं ले सकता। मैंने भबनीपुर से विधायक के रूप में शपथ ली है। मुझे नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र छोड़ना होगा…” pic.twitter.com/RHkqAu3Ld1– एएनआई (@ANI) 13 मई 2026 उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निर्वाचन क्षेत्र को उनकी कमी महसूस नहीं होगी और कहा कि वह फिरोजा बीबी के समय से इस क्षेत्र की देखभाल कर रहे हैं। राज्य में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद आज अधिकारी और अन्य नवनिर्वाचित विधायकों ने विधानसभा में शपथ ली। राज्य मंत्री दिलीप घोष ने भी खड़गपुर सदर विधानसभा क्षेत्र के विधायक के रूप में शपथ ली। अधिकारी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। कोलकाता में एक भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद की शपथ दिलाई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता शामिल हुए। अधिकारी ने इसे राज्य के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत बताते हुए कहा कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद “सोनार बांग्ला” युग आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। व्यापक चुनावी जनादेश में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में निर्णायक जीत हासिल की है, 207 सीटें जीतकर – दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से काफी आगे – और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 15 साल के शासन का अंत कर दिया है। पिछले विधानसभा चुनाव में 212 सीटें जीतने वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) 80 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही और एक निर्वाचन क्षेत्र में आगे चल रही है। 294 सदस्यीय सदन में बहुमत का आंकड़ा 148 है। परिणाम राज्य की राजनीतिक दिशा और वैचारिक संतुलन में एक निर्णायक बदलाव का संकेत देता है। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर विधायक के रूप में शपथ लेने के बाद नंदीग्राम सीट खाली कर दी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सुवेंदु अधिकारी(टी)भबनीपुर(टी)नंदीग्राम(टी)एमएलए(टी)पश्चिम बंगाल

विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार ने विरोध के बाद ओएसडी के रूप में ज्योतिषी राधन पंडित की नियुक्ति वापस ले ली | भारत समाचार

Satheesan may emerge as the ultimate loser in the war he has won. Media headlines repeatedly hint that 'most MLAs' are backing KC Venugopal for the top post. (PTI photo)

आखरी अपडेट:13 मई, 2026, 13:37 IST विजय के ज्योतिषी, राधन पंडित वेट्रिवेल को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्य अधिकारी (राजनीतिक) के रूप में नियुक्त किया गया था। राधन पंडित तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के ज्योतिषी हैं। तस्वीर/एएनआई. (एएनआई छवियां) विपक्ष के साथ-साथ सहयोगियों के विरोध के बाद, टीवीके सरकार ने विजय के ज्योतिषी, राधन पंडित वेट्रिवेल की तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्य अधिकारी (राजनीतिक) के रूप में नियुक्ति वापस ले ली। विजय के सत्ता में आने के बाद, उन्होंने मंगलवार को वेट्रिवेल को मुख्यमंत्री (राजनीतिक) के विशेष कर्तव्य अधिकारी के रूप में पदोन्नत किया। ज्योतिषी वही थे जिन्होंने विधानसभा चुनाव में विजय की भारी जीत की भविष्यवाणी की थी। ज्योतिषी होने के अलावा, वह टीवीके के प्रवक्ता भी थे और पिछले चुनाव अभियान के दौरान नेतृत्व के करीबी सहयोगी के रूप में काम किया था। यह भी पढ़ें: विजय ने उनकी जीत की भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिषी राधन पंडित को विशेष कर्तव्य अधिकारी के रूप में नियुक्त किया 4 मई को, वोटों की गिनती के बीच, जब टीवीके ने आगे बढ़ना शुरू कर दिया था, राधन पंडित विजय से मिलने वाले पहले व्यक्ति थे। राधन पंडित को ऊंचे पद पर पहुंचाने के विजय के कदम पर कई लोगों की भौंहें तन गईं और सहयोगियों के साथ-साथ विपक्ष ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। टीवीके को सहयोगियों की प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है राधन पंडित की नियुक्ति के बाद, कांग्रेस, वीसीके और सीपीएम ने इस कदम के लिए टीवीके सरकार की आलोचना की। एक्स को संबोधित करते हुए, कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने कहा, “मुझे पीटता है। एक ज्योतिषी को ओएसडी पद की आवश्यकता क्यों होगी?? क्या कोई समझा सकता है?” यह भी पढ़ें: ज्योतिषी को ओएसडी नियुक्त करने के विजय के कदम को सहयोगियों ने नापसंद किया: ‘अस्वीकार्य’ इस बीच, वीसीके महासचिव डी रविकुमार ने कहा, “यह एक धर्मनिरपेक्ष सरकार में अस्वीकार्य है। माननीय मुख्यमंत्री को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना सरकार का कर्तव्य है। रिकी राधन पंडित, जिन्हें आज मुख्यमंत्री के राजनीतिक विंग सचिव के रूप में घोषित किया गया है, मूल रूप से एक ज्योतिषी हैं।” एक अन्य पोस्ट में, वीसीके महासचिव ने कहा, “तमिलनाडु सरकार को इस अवैज्ञानिक नियुक्ति को तुरंत वापस लेना चाहिए जो संविधान के खिलाफ है!” सीपीएम की केंद्रीय समिति के सदस्य शनमुगम पी ने अपनी चिंता जताते हुए कहा, “सरकारी खर्च पर ऐसे व्यक्ति को अधिकारी के रूप में नियुक्त करना केवल लोगों के बीच ज्योतिष में विश्वास बढ़ाने का काम करेगा… सरकार द्वारा यह नियुक्ति अस्वीकार्य है! यह भी अस्वीकार्य है कि वह राजनीतिक सलाह देगा।” ‘विज्ञान पर ध्यान दें, ज्योतिष पर नहीं’ 13 मई को, तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान, वीसीके विधायक वन्नी अरासु ने सीएम विजय पर परोक्ष रूप से कटाक्ष किया और कहा कि सरकार को “विज्ञान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ज्योतिष पर नहीं”। अरासु ने कहा, “हमारी सरकार को ज्योतिष को नहीं बल्कि वैज्ञानिक सोच को महत्व देना चाहिए।” यह भी पढ़ें: ‘विज्ञान पर ध्यान दें’: निजी ज्योतिषी को ओएसडी नियुक्त करने के बाद वीसीके, डीएमडीके ने सीएम विजय पर निशाना साधा डीएमडीके महासचिव और विधायक प्रेमलता विजयकांत ने भी ज्योतिषी की नियुक्ति को “तमिलनाडु के लोगों की ओर से अत्यधिक निंदनीय” बताया। उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा में कहा, “मुख्यमंत्री के ओएसडी के रूप में ज्योतिषी रथिन पांडे की नियुक्ति तमिलनाडु के लोगों की ओर से अत्यधिक निंदनीय है।” शक्ति परीक्षण के अंत में विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रेमलता ने राधन पंडित की नियुक्ति के संबंध में जो कहा है, उस पर वह विचार करेंगे। विजय के बयान के लगभग एक घंटे बाद, सरकार ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्य अधिकारी (राजनीतिक) के रूप में ज्योतिषी की नियुक्ति वापस ले ली। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार ने विरोध के बाद ओएसडी के रूप में ज्योतिषी राधन पंडित की नियुक्ति वापस ले ली अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु राजनीतिक नियुक्ति(टी)टीवीके सरकार(टी)विजय ज्योतिषी विवाद(टी)राधन पंडित वेट्रिवेल(टी)विशेष कर्तव्य अधिकारी(टी)तमिलनाडु के मुख्यमंत्री(टी)राजनीतिक प्रतिक्रिया(टी)नियुक्ति वापसी

‘व्यक्तिगत लाभ के लिए विश्वासघात’: ईपीएस ने फ्लोर टेस्ट में सीएम विजय का समर्थन करने वाले 25 बागी एआईएडीएमके विधायकों को फटकार लगाई | भारत समाचार

Satheesan may emerge as the ultimate loser in the war he has won. Media headlines repeatedly hint that 'most MLAs' are backing KC Venugopal for the top post. (PTI photo)

आखरी अपडेट:13 मई, 2026, 13:30 IST तमिलनाडु विधानसभा फ्लोर टेस्ट में सीएम विजय को वोट देने के बाद एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी ने बागी विधायकों पर पार्टी को धोखा देने का आरोप लगाया। एक विद्रोही खेमे के टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार से हाथ मिलाने के बाद एआईएडीएमके सुप्रीमो एडप्पादी के पलानीस्वामी को बड़ा झटका लगा। (पीटीआई/फ़ाइल) तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को ताजा उथल-पुथल देखी गई जब 25 बागी एआईएडीएमके विधायकों ने महत्वपूर्ण विधानसभा फ्लोर टेस्ट से पहले मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की टीवीके सरकार का खुलेआम समर्थन किया। उनके समर्थन से विजय को आसानी से विश्वास मत जीतने में मदद मिली और अन्नाद्रमुक के भीतर गहरे विभाजन उजागर हो गए। वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि और सीवी शनमुगम के नेतृत्व में विद्रोही गुट ने विजय से मुलाकात की और सार्वजनिक रूप से सरकार के लिए समर्थन की घोषणा की। कुछ विधायकों ने कथित तौर पर टीवीके प्रशासन का समर्थन करते हुए पत्र सौंपे, जो सीधे तौर पर एआईएडीएमके नेतृत्व द्वारा जारी पार्टी व्हिप के खिलाफ था। विजय ने जीता विश्वास मत फ्लोर टेस्ट के दौरान बागी विधायकों के समर्थन ने अहम भूमिका निभाई. विजय सरकार के पक्ष में मतदान करने के उनके फैसले ने विजय के खिलाफ विपक्ष की संख्या को कमजोर कर दिया। विश्वास मत विजय सरकार के समर्थन में लगभग 144 वोट हासिल करने के साथ समाप्त हुआ, जबकि केवल 22 सदस्यों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। परिणाम ने विधानसभा में विजय की स्थिति मजबूत कर दी और एडप्पादी के पलानीस्वामी के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ। ईपीएस ने इसे ‘विश्वासघात’ कहा क्रॉस वोटिंग पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी ने बागी विधायकों पर पार्टी को धोखा देने का आरोप लगाया। ईपीएस ने कहा कि विधायक “गलत दिशा” में चले गए थे और दावा किया कि उन्होंने “व्यक्तिगत लाभ” के लिए जानबूझकर काम किया था। उन्होंने कहा कि अगर उनका इरादा पार्टी के रुख के खिलाफ जाने का था तो उन्हें एआईएडीएमके के बैनर तले चुनाव नहीं लड़ना चाहिए था। उन्होंने पार्टी के चुनावी प्रदर्शन का बचाव करते हुए कहा कि अन्नाद्रमुक ने 47 सीटें जीती हैं और मौजूदा संकट के बावजूद वह तमिलनाडु में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत बनी हुई है। अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी विद्रोह के बाद, अन्नाद्रमुक नेतृत्व ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले विधायकों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक उपायों की चेतावनी दी। ईपीएस ने द्रमुक सहित प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक ताकतों और विरोधियों पर अन्नाद्रमुक के भीतर विभाजन की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि विद्रोह को बढ़ावा देने और पार्टी की एकता को कमजोर करने के लिए बाहरी हस्तक्षेप जिम्मेदार था। अन्नाद्रमुक नेता ने पार्टी के भीतर समर्थन मजबूत करने और बड़े विभाजन को रोकने के प्रयास में जिला सचिवों और वफादार विधायकों के साथ भी बैठकें कीं। एआईएडीएमके के अंदर बढ़ती फूट घटनाक्रम ने पलानीस्वामी खेमे और वेलुमणि और शनमुगम के नेतृत्व वाले गुट के बीच मौजूदा विभाजन को चौड़ा कर दिया है। अब एआईएडीएमके के भविष्य के नेतृत्व और दिशा को लेकर सवाल उठने लगे हैं. जबकि कुछ नेताओं ने राजनीतिक झटके के बाद जवाबदेही की मांग की, ईपीएस ने पार्टी प्रमुख या विधायिका नेता के रूप में पद छोड़ने के आह्वान का विरोध किया। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी के अंदर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे जबकि असंतुष्ट विधायकों के साथ बातचीत के प्रयास जारी रहेंगे और संगठन के भीतर पूरी तरह टूटने से बचा जाएगा। विद्रोह हाल के वर्षों में अन्नाद्रमुक के सामने सबसे बड़ी आंतरिक चुनौतियों में से एक बन गया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘व्यक्तिगत लाभ के लिए विश्वासघात’: ईपीएस ने फ्लोर टेस्ट में सीएम विजय का समर्थन करने वाले 25 बागी एआईएडीएमके विधायकों को फटकार लगाई अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)टीवीके(टी)टीवीके फ्लोर टेस्ट(टी)टीवीके सरकार(टी)टीवीके(टी)एआईएडीएमके विधायकों ने विजय को वोट दिया(टी)ईपीएस(टी)तमिलनाडु राजनीतिक संकट(टी)एआईएडीएमके के बागी विधायक(टी)सी जोसेफ विजय सरकार(टी)तमिलनाडु विश्वास मत(टी)एडप्पादी के पलानीस्वामी(टी)एसपी वेलुमणि गुट(टी)सीवी शनमुगम नेता(टी)एआईएडीएमके आंतरिक विभाजन