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गर्मियों में भी फिट रखेगा कड़कनाथ, लेकिन ऐसी गलती की तो बिगड़ सकती है तबीयत

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Satna News: कड़कनाथ में 25 फीसदी से ज्यादा प्रोटीन और भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. गर्मियों में होने वाली थकान, कमजोरी और सुस्ती को दूर करने में भी यह मददगार होता है.

सतना. गर्मी के मौसम में लोग खाने-पीने को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाते हैं, खासकर नॉनवेज पसंद करने वाले यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस मौसम में कौन सा चिकन शरीर के लिए सही रहेगा. तेज गर्मी में भारी और ज्यादा फैट वाला भोजन शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में सतना और आसपास के इलाकों में ऐसे दिनों कड़कनाथ चिकन की चर्चा तेज हो जाती है. कम फैट, ज्यादा प्रोटीन और हीमोग्लोबिन के साथ-साथ आसान पाचन क्षमता के कारण इसे हेल्दी माना जाता है. वहीं पशु चिकित्सकों का कहना है कि अगर चिकन का सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए, तो यह गर्मी में भी शरीर को ताकत और पोषण दे सकता है.

लोकल 18 को जानकारी देते हुए प्रभारी पशु चिकित्सालय के डॉ बृहस्पति भारती ने बताया कि कड़कनाथ चिकन अन्य सामान्य मुर्गियों की तुलना में काफी हेल्दी माना जाता है. आम चिकन में जहां 13 से 25 प्रतिशत तक फैट पाया जाता है, वहीं कड़कनाथ में सिर्फ 0.73 से 1.05 प्रतिशत तक ही वसा होती है. यही वजह है कि यह गर्मियों में आसानी से पच जाता है और पेट पर भारी नहीं पड़ता. उन्होंने बताया कि कड़कनाथ में 25 प्रतिशत से ज्यादा प्रोटीन और भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. गर्मियों में होने वाली कमजोरी, थकान और सुस्ती को दूर करने में भी यह मददगार माना जाता है. कम कोलेस्ट्रॉल होने के कारण इसे दिल के मरीजों और वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों के लिए भी बेहतर विकल्प माना जाता है. कड़कनाथ को पकाते समय हरी धनिया और पुदीने जैसी ठंडी तासीर वाली चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके साथ छाछ, नींबू पानी या खीरे का सलाद लेने से शरीर का तापमान संतुलित बना रहता है और पाचन भी बेहतर होता है.

सतना के आदिवासी इलाकों में बढ़ रहा पालन
कड़कनाथ मूल रूप से पश्चिमी मध्य प्रदेश के झाबुआ क्षेत्र की प्रसिद्ध काली नस्ल है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश सरकार की योजनाओं के तहत सतना जिले के आदिवासी क्षेत्रों में भी इसका बड़े पैमाने पर पालन शुरू कराया गया है. यह नस्ल तेज गर्मी और कड़ाके की ठंड दोनों मौसमों में आसानी से खुद को ढाल लेती है, इसलिए ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इसका पालन आसान माना जाता है. स्थानीय बाजारों और पोल्ट्री फार्म्स पर कड़कनाथ चिकन की कीमत करीब 500 से 800 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है. इसके बावजूद हेल्थ कॉन्शियस लोग इसकी मांग लगातार बढ़ा रहे हैं.

स्वाद, सेहत और बजट में अलग-अलग विकल्प
गर्मी के मौसम में बाजार में सबसे ज्यादा बिक्री ब्रॉयलर चिकन की होती है क्योंकि इस समय इसके दाम काफी कम हो जाते हैं. वहीं मध्य प्रदेश में कड़कनाथ के अलावा असील, वनराजा, गिरिराजा और सोनाली जैसी नस्लें भी लोकप्रिय हैं. स्वाद के शौकीनों के लिए असील चिकन को सबसे लजीज माना जाता है जबकि सेहत के लिहाज से कड़कनाथ सबसे आगे है. वहीं कम बजट और सॉफ्ट मीट पसंद करने वालों के लिए नर्मदा निधि, सोनाली और वनराजा बेहतर विकल्प माने जाते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सही मात्रा और संतुलित डाइट के साथ चिकन का सेवन गर्मियों में भी फायदेमंद साबित हो सकता है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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Satna News: कड़कनाथ में 25 फीसदी से ज्यादा प्रोटीन और भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. गर्मियों में होने वाली थकान, कमजोरी और सुस्ती को दूर करने में भी यह मददगार होता है.

सतना. गर्मी के मौसम में लोग खाने-पीने को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाते हैं, खासकर नॉनवेज पसंद करने वाले यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस मौसम में कौन सा चिकन शरीर के लिए सही रहेगा. तेज गर्मी में भारी और ज्यादा फैट वाला भोजन शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में सतना और आसपास के इलाकों में ऐसे दिनों कड़कनाथ चिकन की चर्चा तेज हो जाती है. कम फैट, ज्यादा प्रोटीन और हीमोग्लोबिन के साथ-साथ आसान पाचन क्षमता के कारण इसे हेल्दी माना जाता है. वहीं पशु चिकित्सकों का कहना है कि अगर चिकन का सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए, तो यह गर्मी में भी शरीर को ताकत और पोषण दे सकता है.

लोकल 18 को जानकारी देते हुए प्रभारी पशु चिकित्सालय के डॉ बृहस्पति भारती ने बताया कि कड़कनाथ चिकन अन्य सामान्य मुर्गियों की तुलना में काफी हेल्दी माना जाता है. आम चिकन में जहां 13 से 25 प्रतिशत तक फैट पाया जाता है, वहीं कड़कनाथ में सिर्फ 0.73 से 1.05 प्रतिशत तक ही वसा होती है. यही वजह है कि यह गर्मियों में आसानी से पच जाता है और पेट पर भारी नहीं पड़ता. उन्होंने बताया कि कड़कनाथ में 25 प्रतिशत से ज्यादा प्रोटीन और भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. गर्मियों में होने वाली कमजोरी, थकान और सुस्ती को दूर करने में भी यह मददगार माना जाता है. कम कोलेस्ट्रॉल होने के कारण इसे दिल के मरीजों और वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों के लिए भी बेहतर विकल्प माना जाता है. कड़कनाथ को पकाते समय हरी धनिया और पुदीने जैसी ठंडी तासीर वाली चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके साथ छाछ, नींबू पानी या खीरे का सलाद लेने से शरीर का तापमान संतुलित बना रहता है और पाचन भी बेहतर होता है.

सतना के आदिवासी इलाकों में बढ़ रहा पालन
कड़कनाथ मूल रूप से पश्चिमी मध्य प्रदेश के झाबुआ क्षेत्र की प्रसिद्ध काली नस्ल है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश सरकार की योजनाओं के तहत सतना जिले के आदिवासी क्षेत्रों में भी इसका बड़े पैमाने पर पालन शुरू कराया गया है. यह नस्ल तेज गर्मी और कड़ाके की ठंड दोनों मौसमों में आसानी से खुद को ढाल लेती है, इसलिए ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इसका पालन आसान माना जाता है. स्थानीय बाजारों और पोल्ट्री फार्म्स पर कड़कनाथ चिकन की कीमत करीब 500 से 800 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है. इसके बावजूद हेल्थ कॉन्शियस लोग इसकी मांग लगातार बढ़ा रहे हैं.

स्वाद, सेहत और बजट में अलग-अलग विकल्प
गर्मी के मौसम में बाजार में सबसे ज्यादा बिक्री ब्रॉयलर चिकन की होती है क्योंकि इस समय इसके दाम काफी कम हो जाते हैं. वहीं मध्य प्रदेश में कड़कनाथ के अलावा असील, वनराजा, गिरिराजा और सोनाली जैसी नस्लें भी लोकप्रिय हैं. स्वाद के शौकीनों के लिए असील चिकन को सबसे लजीज माना जाता है जबकि सेहत के लिहाज से कड़कनाथ सबसे आगे है. वहीं कम बजट और सॉफ्ट मीट पसंद करने वालों के लिए नर्मदा निधि, सोनाली और वनराजा बेहतर विकल्प माने जाते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सही मात्रा और संतुलित डाइट के साथ चिकन का सेवन गर्मियों में भी फायदेमंद साबित हो सकता है.

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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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