Air Fryer: क्या एयर फ्रायर सच में हेल्दी है या सिर्फ मार्केटिंग? जानें सच्चाई

Last Updated:May 12, 2026, 19:26 IST आजकल एयर फ्रायर तेजी से लोगों की रसोई का हिस्सा बनता जा रहा है. कम तेल में कुरकुरा खाना बनाने की वजह से इसे हेल्दी कुकिंग का नया तरीका बताया जा रहा है. सोशल मीडिया और विज्ञापनों में भी एयर फ्रायर को लेकर काफी चर्चा हो रही है, लेकिन कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या यह सच में सेहत के लिए बेहतर है या फिर सिर्फ एक नया मार्केटिंग ट्रेंड बन चुका है. ख़बरें फटाफट आजकल एयर फ्रायर लगभग हर दूसरे किचन में दिखाई देने लगा है. सोशल मीडिया से लेकर विज्ञापनों तक इसे “हेल्दी कुकिंग” का सबसे आसान तरीका बताया जा रहा है. कम तेल में कुरकुरा खाना बनाने की वजह से लोग इसे तेजी से खरीद रहे हैं. कई लोग मानते हैं कि एयर फ्रायर में बना खाना डीप फ्राई चीजों से ज्यादा हेल्दी होता है, लेकिन कुछ लोग इसे सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा भी मानते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एयर फ्रायर सच में सेहत के लिए बेहतर है या फिर यह सिर्फ नया ट्रेंड बन चुका है. एयर फ्रायर की सबसे बड़ी खासियत यही मानी जाती है कि इसमें बहुत कम तेल इस्तेमाल होता है. सामान्य तौर पर जहां डीप फ्राई खाने में काफी ज्यादा तेल लगता है, वहीं एयर फ्रायर गर्म हवा की मदद से खाना पकाता है. इसी वजह से फ्रेंच फ्राइज, नगेट्स या टिक्की जैसी चीजें कम तेल में भी कुरकुरी बन जाती हैं. जो लोग वजन कम करना चाहते हैं या ज्यादा तला हुआ खाना खाने से बचना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतर विकल्प माना जा सकता है. लेकिन हर चीज हेल्दी नहीं हो जातीकई लोग सोचते हैं कि एयर फ्रायर में बना हर खाना अपने आप हेल्दी हो जाता है, जबकि ऐसा पूरी तरह सच नहीं है. अगर आप प्रोसेस्ड फूड, जमे हुए पैकेट वाले स्नैक्स या ज्यादा नमक और मसाले वाली चीजें एयर फ्रायर में बना रहे हैं, तो वह फिर भी शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं. सिर्फ कम तेल इस्तेमाल होने से कोई खाना पूरी तरह पौष्टिक नहीं बन जाता. खाने की गुणवत्ता और सामग्री भी उतनी ही जरूरी होती है. स्वाद और समय की वजह से बढ़ी लोकप्रियताएयर फ्रायर का इस्तेमाल आसान होने की वजह से भी लोग इसे पसंद कर रहे हैं. इसमें खाना जल्दी तैयार हो जाता है और बार-बार तेल गर्म करने की जरूरत नहीं पड़ती. खासतौर पर कामकाजी लोग और युवा इसे इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि इसमें कम मेहनत में जल्दी खाना बन जाता है. साथ ही किचन में तेल और धुएं की परेशानी भी कम होती है. क्या सच में खरीदना फायदेमंद हैअगर आप ज्यादा तला हुआ खाना खाते हैं और तेल कम करना चाहते हैं, तो एयर फ्रायर आपके लिए उपयोगी हो सकता है. लेकिन इसे जादुई मशीन समझना सही नहीं होगा. हेल्दी रहने के लिए सिर्फ एयर फ्रायर काफी नहीं है, बल्कि संतुलित भोजन, सही मात्रा और अच्छी जीवनशैली भी जरूरी है. आसान शब्दों में कहें तो एयर फ्रायर कुछ हद तक बेहतर विकल्प जरूर हो सकता है, लेकिन पूरी तरह हेल्दी जीवन का राज सिर्फ इसी में नहीं छिपा है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
पसीने में ज्यादा बदबू आती है तो क्या करें? डॉक्टर ने बताई इसकी वजह और छुटकारा पाने के तरीके

Last Updated:May 12, 2026, 19:19 IST Why Does Sweat Smell Bad: पसीने की बदबू कई लोगों के लिए शर्मिंदगी की वजह बन सकती है. डॉक्टर्स के अनुसार शरीर की दुर्गंध का मुख्य कारण स्किन पर मौजूद बैक्टीरिया, खराब हाइजीन और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. साफ-सफाई, हल्के कपड़े, संतुलित खानपान और जरूरत पड़ने पर मेडिकल सलाह से इस समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है. कई बार पसीने की बदबू हेल्थ प्रॉब्लम्स से जुड़ी हो सकती है. How to Get Rid of Sweat Smell: गर्मियों में पसीना आना एक सामान्य प्रक्रिया है और इससे शरीर का टेंपरेचर कंट्रोल रहता है. कई लोगों को पसीने में बदबू आती है और यह उनके लिए शर्मिंदगी का कारण बन जाती है. इसकी वजह से कई लोगों को भीड़ में खड़े होने, ऑफिस जाने या किसी के पास बैठने में असहज महसूस होता है. वे सोचते हैं कि ज्यादा पसीना आना ही बदबू की वजह है, लेकिन पसीने में किसी तरह की स्मेल नहीं होती है. जब पसीना बैक्टीरिया के संपर्क में आता है, तब दुर्गंध आने लगती है. अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो पसीने की बदबू से निजात मिल सकती है. यूपी के कानपुर स्थित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. युगल राजपूत ने News18 को बताया पसीने में किसी तरह की गंध नहीं होती है. शरीर से निकलने वाला पसीना जब त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया के संपर्क में आता है, तब बदबू पैदा हो सकती है. शरीर में जिन हिस्सों में नमी रहती है, वहां ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं और बदबू ज्यादा आती है. यही वजह है कि कुछ लोगों में पसीने की गंध ज्यादा महसूस होती है. खराब हाइजीन, लंबे समय तक एक ही कपड़े पहनना, ज्यादा मसालेदार खाना, स्मोकिंग और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी शरीर की दुर्गंध बढ़ा सकती हैं. कई मामलों में हार्मोनल बदलाव, मोटापा, डायबिटीज या फंगल इन्फेक्शन भी इसकी वजह हो सकता है. अगर पसीने में बदबू अचानक बढ़ जाए, तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए. एक्सपर्ट ने बताया कि पसीने की बदबू से निजात पाने के लिए रोज नहाना और शरीर को साफ रखना सबसे जरूरी कदम माना जाता है. खासकर गर्मियों में एंटीबैक्टीरियल साबुन या हल्के क्लेंजर का इस्तेमाल मददगार हो सकता है. पसीना ज्यादा आने वाले हिस्सों जैसे- बगल और पैरों को अच्छी तरह सुखाना भी जरूरी है, क्योंकि नमी बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका देती है. गर्मी में कॉटन जैसे हल्के और ब्रीदेवल कपड़े पहनने चाहिए. सिंथेटिक और बहुत टाइट कपड़े पसीना रोक सकते हैं, जिससे बदबू और ज्यादा बढ़ सकती है. कई बार जूतों में जमा नमी भी पैरों की दुर्गंध की वजह बनती है. डॉक्टर के मुताबिक कई लोग पसीने की बदबू से छुटकारा पाने के लिए डिओडोरेंट और एंटीपर्सपिरेंट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन दोनों के बीच का फर्क समझना भी जरूरी है. डिओडोरेंट बदबू कम करने में मदद करते हैं, जबकि एंटीपर्सपिरेंट पसीना कम करने का काम करते हैं. जरूरत के हिसाब से सही प्रोडक्ट चुनना फायदेमंद हो सकता है. हालांकि बहुत ज्यादा केमिकल वाले प्रोडक्ट्स सेंसिटिव स्किन वालों में जलन पैदा कर सकते हैं. अगर सामान्य उपायों के बाद भी पसीने की बदबू बहुत ज्यादा बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है. कुछ मामलों में यह ब्रोम्हाइड्रोसिस नामक कंडीशन हो सकती है. इसमें शरीर की गंध सामान्य से ज्यादा तेज होती है. डॉक्टर जरूरत पड़ने पर दवाएं, विशेष साबुन या अन्य इलाज की सलाह दी जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
मखाना पनीर टिक्की रेसिपी: टिक्की भी हो सकती है वेट लॉस, घर में इन आसान स्टेप्स से बनाएं मखाना-पनीर टिक्की, प्रोटीन भी मिलेगा

वेट लॉस में मखाना और पनीर दोनों खाने वालों की सलाह दी गई है। ये प्रोटीन और बहुमुखी से भरपूर लो कैलरी बस्तर है जो वजन में काफी मददगार है। ऐसे में सीखें मखाना-पनीर टिक्की की रेसिपी जान लें। छवि: फ्रीपिक मखाना-पनीर टिक्की की सामग्री- मसालेदार भुना हुआ 1 कप मखाना, 1 कप कद्दूकस की हुई चीज़, एक छोटा आलू, हरी मिर्च, अदरक, धनिया, नमक, काली मिर्च पाउडर, गर्म मसाला, नींबू का रस। छवि: फ्रीपिक सबसे पहले मखानों को कुरकुरा होने तक। फिर उनके प्लास्टर में पाउडर बनाया लें। एक कटोरी में इस पाउडर में कद्दूकस की हुई चीज़ और मसाले वाले आलू को मैश करके मिला लें। छवि: फ्रीपिक इस मिश्रण में हरी मिर्च, अदरक, धनिया पत्ता, नमक, गर्म मसाला और नींबू का रस पकाया जाता है। इस मिश्रण को अच्छे से बड़े गूंथ ले और हाथों में घी लगाकर गोल आकार की छोटी-छोटी टिक्कियां बना लें। छवि: एआई अब टिक्कियों को फ्री करेंगे। एक नॉन-स्टिक तवा और लें इसपर थोड़ा सा घी लगा लें। दोनों तरफ से सेंके तक की तुलना में टिक्कियों को सुनहरा भूरा होना। छवि: एआई टिक्कियां बिल्कुल क्रिस्पी हो मंज़िल। अब इन टिक्कियों को हरी या लाल चटनी के साथ सर्व करें। आपका मखाना-पनीर टिक्की एकदम तैयार है। छवि: एआई मखाना-पनीर टिक्की आपके वेट लॉस में तो मदद करती है, लेकिन ये आपके मसल्स स्वास्थ्य के लिए भी बहुत बढ़िया है। इस भूख को कंट्रोल में रखें। आप इसमें सेंधा नमक मशीनरी व्रत में भी खा सकते हैं। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)मखाना पनीर टिक्की(टी)मखाना पनीर टिक्की रेसिपी(टी)घर पर मखाना पनीर टिक्की(टी)वजन घटाने के लिए मखाना पनीर टिक्की(टी)मखाना पनीर टिक्की कैसे बनाएं
अन्नाद्रमुक के बागी विधायकों ने विजय का समर्थन किया, ईपीएस दबाव में, फ्लोर टेस्ट आगे: तमिलनाडु सरकार के लिए आगे क्या | भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 18:41 IST 30 विधायकों वाला एक विद्रोही अन्नाद्रमुक गुट महत्वपूर्ण शक्ति परीक्षण से ठीक 24 घंटे पहले तमिलनाडु में विजय के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करने के लिए आगे आया। एक विद्रोही खेमे के टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार से हाथ मिलाने के बाद एआईएडीएमके सुप्रीमो एडप्पादी के पलानीस्वामी को बड़ा झटका लगा। (पीटीआई/फ़ाइल) तमिलनाडु में एक नया राजनीतिक मोड़ सामने आया है जब 30 एआईएडीएमके विधायकों ने मंगलवार को पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी के खिलाफ विद्रोह कर दिया और विजय के नेतृत्व वाली तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) सरकार के पीछे एकजुट हो गए, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन को नई ताकत मिली। एक अभूतपूर्व कदम में, सीवी शनमुगम के नेतृत्व वाले विद्रोही अन्नाद्रमुक गुट ने कथित तौर पर तमिलनाडु के प्रोटेम स्पीकर को एक याचिका सौंपी, जिसमें एसपी वेलुमणि को विधायक दल के नेता के रूप में मान्यता देने की मांग की गई। बागी विधायकों ने मुख्यमंत्री विजय के साथ बैठक भी की. यह घटनाक्रम तब हुआ जब विजय के नेतृत्व वाली सरकार बुधवार (13 मई) को फ्लोर टेस्ट में अपना बहुमत साबित करने वाली है। विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतने वाली टीवीके को सरकार बनाने के लिए राजनीतिक गठबंधन बनाने में कई दिन बिताने के बाद 120 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। एआईएडीएमके विधायकों ने क्यों की बगावत? अन्नाद्रमुक के शनमुगम गुट ने पलानीस्वामी पर अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ गठबंधन करने का आरोप लगाया है और 23 अप्रैल के विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद उनके नेतृत्व पर सवाल उठाया है, जहां उसने 164 सीटों पर चुनाव लड़कर केवल 47 सीटें जीती थीं। महत्वपूर्ण शक्ति परीक्षण से ठीक 24 घंटे पहले विद्रोही खेमे के लगभग 30 विधायकों ने टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार से हाथ मिला लिया और पलानीस्वामी पर द्रमुक के साथ गठबंधन करके “विचारधारा के साथ विश्वासघात” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विजय के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करना “अम्मा (जयललिता) की विरासत को पुनर्जीवित करने” और प्रासंगिकता बहाल करने की दिशा में एक कदम था। यह भी पढ़ें: मेरे दुश्मन का दुश्मन: ‘स्टालिन से पार्टी को बचाने’ के लिए अन्नाद्रमुक के विद्रोही विजय का समर्थन क्यों कर रहे हैं? विद्रोही खेमे के पास दो-तिहाई बहुमत से दो विधायक कम हैं, जो शनमुगम गुट को असली अन्नाद्रमुक के रूप में वैधता का दावा करने की अनुमति देगा। हालाँकि, ईपीएस ने महासचिव का पद बरकरार रखा है और पार्टी के एक छोटे लेकिन वफादार वर्ग से समर्थन बरकरार रखा है। टीवीके-एआईएडीएमके का विलय हो सकता है यदि दो और विधायक विद्रोही खेमे में शामिल होते हैं, तो वे भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची में उल्लिखित दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बच जाएंगे। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे पार्टी पर पलानीस्वामी का नियंत्रण ख़त्म हो सकता है और उनके राजनीतिक भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लग सकता है। यदि विद्रोही खेमा टीवीके सरकार में शामिल होता है, तो यह सत्तारूढ़ गठबंधन को और मजबूत करेगा, जिससे राज्य के कुल 234 में से विधायकों की कुल संख्या 150 से अधिक हो जाएगी। इससे टीवीके कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम) या अन्य छोटे दलों पर कम निर्भर हो जाएगा, खासकर किसी भी असहमति के दौरान। और पढ़ें: ईपीएस के लिए रास्ता ख़त्म? दल-बदल से बचने के लिए अन्नाद्रमुक के विद्रोही गुट के केवल 2 विधायक कम पलानीस्वामी, जो दशकों से अन्नाद्रमुक के एक प्रमुख नेता रहे हैं, 2019, 2021, 2024 और 2026 में उनके नेतृत्व में पार्टी को भारी हार का सामना करने के बाद कठिन भविष्य का सामना करना पड़ रहा है। 2016 में जयललिता की मृत्यु के बाद, उन्होंने वीके शशिकला को सत्ता में मजबूत होने से रोकने के लिए ओ पनीरसेल्वम के साथ गठबंधन किया, बाद में 2022 में ओपीएस को निष्कासित करने से पहले, लेकिन उनकी अपनी शैली थी। राजनीति उन्हें परेशान करने के लिए वापस आ गई है। फ्लोर टेस्ट के दौरान क्या होता है? कई दिनों के राजनीतिक गतिरोध और गहन बातचीत के बाद, टीवीके कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम), वीसीके और आईयूएमएल का समर्थन हासिल करने में कामयाब रही, जिससे गठबंधन की कुल ताकत 120 सीटों तक पहुंच गई, जो बहुमत के 118 के आंकड़े से थोड़ा अधिक है। 30 एआईएडीएमके विद्रोहियों के समर्थन और गठबंधन सहयोगियों के मौजूदा समर्थन के साथ, विजय की सरकार लगभग 150 विधायकों की संयुक्त ताकत के साथ आसानी से फ्लोर टेस्ट पास कर सकती है, बशर्ते कि दो-तिहाई विधायक खेमा बदल लें। फ्लोर टेस्ट तमिलनाडु में एक नई राजनीतिक सुबह की शुरुआत कर सकता है, जिसमें टीवीके द्रविड़ियन एकाधिकार की जगह लेगा और अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में से एक को बड़ा झटका देगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया अन्नाद्रमुक के बागी विधायकों ने विजय का समर्थन किया, ईपीएस दबाव में, फ्लोर टेस्ट आगे: तमिलनाडु सरकार के लिए आगे क्या? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
अब छत्तीसगढ़ में तरबूज का मौत कनेक्शन ! क्या वाकई जहरीला था यह फल, कहां से आ रहा है यह जहर?

Last Updated:May 12, 2026, 18:33 IST Watermelon Tragedy in Chhattisgarh: तरबूज खाने के बाद तबीयत बिगड़ने की घटनाओं ने फलों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. एक्सपर्ट्स के अनुसार कीटनाशकों, गंदगी, गलत स्टोरेज और बैक्टीरिया की वजह से फल दूषित हो सकते हैं. फलों को अच्छी तरह धोकर और सावधानी से खरीदना चाहिए, ताकि फूड पॉइजनिंग समेत अन्य समस्याओं से बचा जा सके. तरबूज में आजकल केमिकल्स की मिलावट हो रही है, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ गया है. Why Fruits Become Poisonous in Summer: तरबूज गर्मियों में सबसे ज्यादा खाया जाने वाला फल है. तरबूज में पानी की अच्छी मात्रा होती है और इसे सेहत के लिए बेहद फायदेमंद फ्रूट माना जाता है. हालांकि आजकल तरबूज में खतरनाक केमिकल्स की मिलावट के मामले भी बढ़ गए हैं. पिछले महीने मुंबई में तरबूज खाने के बाद एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत का मामला सामने आया था. हालांकि फॉरेंसिक जांच में पता चला कि तरबूज में चूहे मारने की दवा मिलाई गई थी. अब छत्तीसगढ़ में तरबूज खाने से एक लड़के की मौत हो गई और उसी परिवार के 3 अन्य बच्चे बीमार हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है. डॉक्टर्स के मुताबिक बच्चे की मौत की शुरुआती वजह फूड पॉइजनिंग हो सकती है, लेकिन अभी इस मामले की जांच की जा रही है और तरबूज के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं. जानकारी के मुताबिक बच्चों ने जो तरबूज खाया, वह कई घंटे पहले काटकर रखा हुआ था. डॉक्टर्स को अंदेशा है कि इस वजह से तरबूज कंटामिनेटेड हो सकता है और इसी से फूड पॉइजनिंग की नौबत आ सकती है. हालांकि कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि फूड पॉइजनिंग की वजह से तुरंत मौत सीवियर मामलों में ही होती है. फिलहाल जांच चल रही है और जांच के बाद ही पता चलेगा कि तरबूज में ऐसा क्या था, जिसकी वजह से एक लड़के की मौत हो गई और 3 बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं. तरबूज को लेकर हुई इन घटनाओं के बाद लोगों में तरबूज को लेकर डर बैठ गया है. अब सवाल है कि तरबूज कब सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है और फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए तरबूज खाने से पहले किन बातों का ध्यान रखें. इस बारे में क्या है डॉक्टर की राय? लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया कि आमतौर पर तरबूज सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन अगर तरबूज कंटामिनेटेड हो जाए, तो उसे खाने से फूड पॉइजनिंग हो सकती है. इसके अलावा तरबूज में मौजूद हानिकारक केमिकल्स, कीटनाशक, मिलावट या बैक्टीरिया स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं. गर्मियों में खुले में कटे हुए फल, गंदे पानी से धोए गए फल या लंबे समय तक खराब तरीके से स्टोर किए गए फल जल्दी कंटामिनेटेड हो सकते हैं. खेती के दौरान कई बार फलों पर अत्यधिक मात्रा में कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है. अगर इन केमिकल्स को सही तरीके से साफ न किया जाए, तो इनके अवशेष फल की सतह पर बने रह सकते हैं. कुछ मामलों में फलों को जल्दी पकाने या ज्यादा लाल और आकर्षक दिखाने के लिए भी हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं. हालांकि हर फल में ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है. गर्मी में कटे हुए फल बिल्कुल न खाएं डॉक्टर के मुताबिक तरबूज और दूसरे कटे हुए फलों में बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा भी काफी बढ़ जाता है. अगर फल को काटने वाला चाकू, पानी या रखने की जगह साफ न हो, तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं. गर्म मौसम में यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है. दूषित फल खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. खासकर बच्चों में यह परेशानी घातक हो सकती है. सभी लोगों को फल खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए. बहुत ज्यादा चमकदार, असामान्य रूप से बड़े या जरूरत से ज्यादा लाल दिखने वाले फलों को सावधानी से खरीदना चाहिए. खाने से पहले फलों को साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी माना जाता है. तरबूज और अन्य फलों को साफ करने के लिए नमक या बेकिंग सोडा वाले पानी से फलों को धोना चाहिए, ताकि सतह पर मौजूद गंदगी और कुछ केमिकल्स कम हो सकें. बच्चों को फूड पॉइजनिंग का ज्यादा खतरा एक्सपर्ट ने बताया कि कटे हुए फल लंबे समय तक खुले में नहीं रखने चाहिए. सड़क किनारे खुले में बिक रहे कटे फलों को खाने से बचना बेहतर माना जाता है, क्योंकि उनमें धूल, मक्खियां और बैक्टीरिया आसानी से लग सकते हैं. अगर फल काटने के बाद उसका स्वाद, गंध या रंग असामान्य लगे, तो उसे तुरंत फेंक देना चाहिए. बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में फूड पॉइजनिंग का खतरा ज्यादा हो सकता है. इसलिए अगर फल खाने के बाद उल्टी, तेज पेट दर्द, चक्कर, बुखार या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. फल सेहत के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं, लेकिन उनकी सफाई और गुणवत्ता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. सही तरीके से खरीदे और साफ किए गए फल आमतौर पर सुरक्षित होते हैं. जागरुकता और सावधानी अपनाकर फलों से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
एआईएडीएमके में फिर दरार! क्यों 30 बागी विधायक विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के पीछे रैली कर रहे हैं | भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 17:54 IST अन्नाद्रमुक का नवीनतम संकट अपमानजनक चुनावी नतीजे के बाद आया है जिसमें पार्टी 167 सीटों पर चुनाव लड़कर केवल 47 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई। शनमुगम, जिन्होंने सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दिया है, को अब “असली” अन्नाद्रमुक की स्थिति का दावा करने के लिए लगभग 32 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है – अन्नाद्रमुक की 47 विधायकों की कुल ताकत का दो-तिहाई। (पीटीआई फाइल फोटो) विपक्षी अन्नाद्रमुक एक और बड़ी आंतरिक टूट का सामना कर रही है, जिसमें लगभग 30 विद्रोही विधायक अलग हो गए हैं और विजय के नेतृत्व वाली तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) सरकार को अपना समर्थन दे रहे हैं। यह कदम 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन और महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) द्वारा लिए गए नेतृत्व निर्णयों पर बढ़ते गुस्से के मद्देनजर उठाया गया है। मतदान के बाद के झटके ने खुले विद्रोह को जन्म दिया अन्नाद्रमुक का ताजा संकट एक अपमानजनक चुनावी नतीजे के बाद आया है, जिसमें राज्य भर में बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान के बावजूद, पार्टी 167 सीटों में से केवल 47 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई। इस हार ने वरिष्ठ नेताओं एसपी वेलुमणि और सी.वी. के नेतृत्व वाले एक गुट के साथ आंतरिक विभाजन को और बढ़ा दिया है। शनमुगम अब खुलेआम ईपीएस के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। विद्रोही समूह का दावा है कि पार्टी के 47 विधायकों में से 30 उसे समर्थन दे रहे हैं और उसने अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली नवगठित टीवीके सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। यह भी पढ़ें: अन्नाद्रमुक में ताजा विद्रोह: 1972 में स्थापना के बाद से पार्टी के तीसरे बड़े विभाजन के पीछे क्या है? उनके अनुसार, यह निर्णय 2019, 2021, 2024 और 2026 में ईपीएस के नेतृत्व में लगातार चार चुनावी हार से प्रेरित है। उनका यह भी आरोप है कि ईपीएस ने सरकार बनाने के लिए प्रतिद्वंद्वी डीएमके के साथ बैकचैनल चर्चा का प्रयास किया, उनका कहना है कि यह कदम एआईएडीएमके की लंबे समय से चली आ रही डीएमके विरोधी विचारधारा का उल्लंघन है। विद्रोही विजय की टीवीके का समर्थन क्यों कर रहे हैं? पत्रकारों से बात करते हुए, विद्रोही नेताओं ने तर्क दिया कि बार-बार हार और मतदाताओं के विश्वास में गिरावट के बाद पार्टी को “नई राजनीतिक दिशा” की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विजय के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करना “अम्मा (जयललिता) की विरासत को पुनर्जीवित करने” और प्रासंगिकता बहाल करने की दिशा में एक कदम था। उनसे औपचारिक रूप से टीवीके नेतृत्व से मिलने और महत्वपूर्ण शक्ति परीक्षण से पहले समर्थन पत्र सौंपने की भी उम्मीद है। विद्रोहियों का कहना है कि मौजूदा नेतृत्व संरचना कैडर की भावना और चुनावी वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने में विफल रही है। हालाँकि, ईपीएस ने महासचिव का पद बरकरार रखा है और पार्टी के एक छोटे लेकिन वफादार वर्ग से समर्थन बरकरार रखा है। अन्नाद्रमुक नेतृत्व ने विद्रोह को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है और असंतुष्टों पर अपने निर्वाचन क्षेत्रों में असफल होने के बाद झूठे दावे फैलाने का आरोप लगाया है। पिछले विभाजन हॉन्ट पार्टी में लौट आए मौजूदा उथल-पुथल ने अन्नाद्रमुक के गुटीय विभाजन के अशांत इतिहास की यादें ताजा कर दी हैं। पार्टी पहली बार 1987 में संस्थापक एमजी रामचंद्रन की मृत्यु के बाद टूटी, 1989 में पुनर्मिलन से पहले वीएन जानकी और जे. जयललिता के बीच विभाजित हो गई। 2016 में जयललिता की मृत्यु के बाद दूसरा बड़ा विभाजन सामने आया, जिससे ओ. पन्नीरसेल्वम, वीके शशिकला और ईपीएस के बीच सत्ता संघर्ष शुरू हो गया। हालाँकि ईपीएस ने अंततः 2017 तक नियंत्रण मजबूत कर लिया और बाद में 2022 में ओपीएस को निष्कासित कर दिया, आंतरिक घर्षण बना हुआ है। (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तमिलनाडु, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया एआईएडीएमके में फिर दरार! क्यों 30 बागी विधायक विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के पीछे रैली कर रहे हैं? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
केरल के सीएम पर जल्द ही ऐलान, राहुल गांधी के कांग्रेस नेताओं के साथ हंगामा, जानिए रेस में कौन-कौन से नाम

केरल के नए मुख्यमंत्री: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केरल के अगले मुख्यमंत्री के चयन को लेकर पार्टी की राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्षों समेत कई नेताओं के साथ मंत्रणा की और जल्द ही नाम की घोषणा की जा सकती है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के. मुरलीधरन का कहना है कि मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा मंगलवार देर शाम या बुधवार को की जा सकती है. कांग्रेस संसदीय दल के प्रमुख सोनिया गांधी के आवास ’10 जनपथ’ में हुई बैठक में राहुल गांधी ने प्रदेश कांग्रेस समिति के वरिष्ठ नेता और कद्दावर नेता से लेकर नोबल सदस्य के. सुधाकरन के अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन हसन और के. मुरलीधरन और प्रदेश कांग्रेस समिति के तीन कार्यकारी अध्यक्ष पी.सी. विष्णुनाथ, शफी परम्बिल और ए.पी. अनिल कुमार के साथ अलग-अलग मंतव्य. मुरलीधरन का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे मंगलवार शाम बेंगलुरु से दिल्ली पहुंच रहे हैं और फिर वह केरल के नेताओं के साथ बैठक करेंगे और इसके बाद सोनिया गांधी से भी विचार-विमर्श कर सकते हैं। कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल, पिछली विधानसभा में प्रतिद्वंद्वी नेता वीडी श्रीशेषन और वरिष्ठ नेता राकेश चेन्निथला मुख्यमंत्री पद के प्रमुख उम्मीदवार माने जा रहे हैं। और पढ़ें: केरल विधानसभा चुनाव 2026 केसी वेणुगोपाल सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे, कांग्रेस आज रात या कल नाम तय कर सकती है केरल में मुख्यमंत्री चयन को लेकर कांग्रेस नेताओं की बैठक, जल्द हो सकती है घोषणा आठ मई को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने केरल के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक की थी। इस बैठक में वेणुगोपाल, चेन्निथला और शेरशेन के अलावा केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के प्रमुख सनी जोसेफ और पार्टी की राज्य प्रभारी दीपा दासमुंशी भी शामिल हुए। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूएन समर्थकों के प्रमुख घटक संघ इंडियन मुस्लिम लीग (आइयू क्लास) ने सोमवार को मुख्यमंत्री के चयन में दी गई अंतिम घोषणा में कहा था कि लंबे समय तक अस्थिरता के राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। केरल में हाल ही में रॉयल्स इलेक्शन चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक मोर्चा (यू एफईसी) ने राज्य में कुल 140 सीटों से 102 पर जीत दर्ज की। और पढ़ें: केरलम सीएम: केरलम का मुख्यमंत्री कौन होगा? खड़गे-राहुल के हाथों में आखिरी फैसला, 3 घंटे तक दिल्ली में चली बात | (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल(टी)राहुल गांधी(टी)केरल अगला सीएम(टी)सोनिया गांधी(टी)केरल ने(टी)केरल न्यूज(टी)केरल चुनाव(टी)राहुल गांधी(टी)केरल चुनाव(टी)अगला मुख्यमंत्री(टी)सोनिया गांधी(टी)केरल समाचार
उत्तराखंड के पहले खेल विश्वविद्यालय का रास्ता साफ:हल्द्वानी में 12.317 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण को मिली अंतिम मंजूरी, नहीं कटेगा एक भी पेड़
उत्तराखंड के पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल विश्वविद्यालय के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया। भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने नैनीताल जिले के हल्द्वानी वन प्रभाग के अंतर्गत गोलापार क्षेत्र में प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट के लिए 12.317 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि के हस्तांतरण को अपनी अंतिम स्वीकृति दे दी है। इस महत्वपूर्ण मंजूरी के बाद अब गोलापार में खेल विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य में तेजी आएगी। सबसे खास बात यह है कि इस पूरी परियोजना के क्रियान्वयन में जंगल के पेड़ों की कटाई नहीं की जाएगी। उत्तराखंड के खेल भविष्य के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि वन भूमि हस्तांतरण को अंतिम मंजूरी मिलने पर प्रदेश की खेल मंत्री रेखा आर्या ने खुशी जाहिर की। उन्होंने इसे उत्तराखंड के खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। खेल मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री धामी और केंद्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा, “यह विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं होगा, बल्कि प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए आधुनिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, अनुसंधान और उच्च स्तरीय कोचिंग का प्रमुख केंद्र बनेगा। हमारा लक्ष्य उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ के साथ-साथ ‘खेलभूमि’ के रूप में स्थापित करना है।” इन सख्त शर्तों के साथ मिली है वन भूमि की अंतिम मंजूरी केंद्रीय मंत्रालय द्वारा जारी 8 मई के अंतिम स्वीकृति पत्र में कई सख्त पर्यावरण और मानक शर्तें लगाई गई हैं, जिनका राज्य सरकार और कार्यदायी संस्था को कड़ाई से पालन करना होगा। मंत्रालय की विशिष्ट शर्त के अनुसार, राज्य वन विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि खेल विश्वविद्यालय के निर्माण में पेड़ों की कटाई शामिल न हो। निर्माण क्षेत्र प्रस्तावित लेआउट से अधिक नहीं होगा। आवासीय क्षेत्र केवल 0.253 हेक्टेयर तक सीमित रहेगा और शेष क्षेत्र को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा, बाढ़ और भूस्खलन से बचाव के लिए गोला नदी के किनारे एक रिटेनिंग वॉल बनाई जाएगी। यहां होगा क्षतिपूर्ति वनीकरण वन भूमि के बदले वन विभाग द्वारा ग्राम- खेरनी बेतालघाट में 24.364 हेक्टेयर सिविल सोयम भूमि और दक्षिण जसपुर में 49.268 हेक्टेयर भूमि पर प्रतिपूरक वनीकरण किया जाएगा। कार्य शुरू होने से पहले इस भूमि की तारबाड़ की जाएगी। मजदूरों को मिलेगा एलपीजी जंगल पर दबाव कम करने के लिए साइट पर काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों को कार्यदायी संस्था द्वारा मुफ्त एलपीजी ईंधन उपलब्ध कराया जाएगा। वन क्षेत्र के अंदर कोई लेबर कैंप नहीं लगेगा। कैम्पा फंड में जमा हुए करोड़ों रुपए वन भूमि डायवर्जन के एवज में राष्ट्रीय कैम्पा प्राधिकरण के खाते में भारी-भरकम राशि जमा कराई गई है। इसमें क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए 3.85 करोड़ रुपए, शुद्ध वर्तमान मूल्य के रूप में 1.17 करोड़ रुपए, मृदा एवं जल संरक्षण के लिए 90.72 लाख और वन्यजीव प्रबंधन योजना के लिए 3.62 करोड़ रुपए जमा किए गए हैं। इस मंजूरी के साथ ही अब कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं के विकास का सपना जल्द ही जमीन पर उतरता दिखाई देगा।
कम सामग्री में बनाएं हाई प्रोटीन मील, लंबे समय तक नहीं लगेगी भूख, बन जाएगी बॉडी

Last Updated:May 12, 2026, 17:06 IST फिट और हेल्दी रहने के लिए हाई-प्रोटीन खाना जरूरी माना जाता है, लेकिन इसके लिए हमेशा महंगे ingredients की जरूरत नहीं होती. घर में मौजूद आसान चीजों से भी स्वादिष्ट और protein-rich meals तैयार किए जा सकते हैं, जो शरीर को एनर्जी और ताकत देने में मदद करते हैं. ख़बरें फटाफट आजकल फिट और हेल्दी रहने के लिए लोग प्रोटीन से भरपूर डाइट पर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं, लेकिन हर बार महंगे सप्लीमेंट्स या बहुत सारी सामग्री वाली रेसिपी बनाना आसान नहीं होता. अच्छी बात यह है कि घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों से भी हाई-प्रोटीन मील तैयार किए जा सकते हैं, जो स्वादिष्ट होने के साथ शरीर को जरूरी पोषण भी देते हैं. कम सामग्री में बनने वाले ये मील कामकाजी लोगों, स्टूडेंट्स और फिटनेस पसंद करने वालों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं. अगर आपके घर में सिर्फ अंडे, दूध और ओट्स मौजूद हैं, तब भी आप एक शानदार प्रोटीन रिच मील बना सकते हैं. ओट्स को दूध में पकाकर उसमें उबले अंडे या scrambled eggs मिलाने से यह एक संतुलित और पेट भरने वाला नाश्ता बन जाता है. इसमें चाहें तो थोड़ा काला नमक और काली मिर्च डालकर स्वाद बढ़ाया जा सकता है. यह मील लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है और सुबह की एनर्जी भी बनाए रखता है. पनीर के साथ ऐसा फूड कॉम्बिनेशनपनीर भी कम सामग्री में बनने वाला सबसे आसान हाई-प्रोटीन फूड माना जाता है. सिर्फ पनीर, टमाटर और कुछ मसालों से स्वादिष्ट पनीर भुर्जी तैयार की जा सकती है. अगर ज्यादा समय नहीं है तो पनीर के छोटे टुकड़ों पर नमक, चिली फ्लेक्स और नींबू डालकर भी हेल्दी स्नैक बनाया जा सकता है. इसे मल्टीग्रेन रोटी या ब्राउन ब्रेड के साथ खाने से यह पूरा मील बन जाता है. पनीर शरीर को प्रोटीन के साथ कैल्शियम भी देता है, जिससे हड्डियां मजबूत रहती हैं. दाल और चनादाल और चना भारतीय रसोई के सबसे सस्ते और असरदार प्रोटीन स्रोतों में गिने जाते हैं. रातभर भिगोए हुए काले चने को उबालकर उसमें प्याज, टमाटर, नींबू और हल्के मसाले मिलाकर हाई-प्रोटीन चाट बनाई जा सकती है. इसी तरह मूंग दाल चीला भी कम सामग्री में बनने वाला शानदार विकल्प है. भीगी हुई मूंग दाल को पीसकर उसमें नमक और हरी मिर्च मिलाएं और तवे पर हल्का तेल लगाकर चीला तैयार कर लें. यह स्वादिष्ट होने के साथ वजन घटाने वालों के लिए भी अच्छा माना जाता है. ग्रीक योगर्ट या दही के साथ ऐसा फूड कॉम्बिनेशनअगर आप मीठा पसंद करते हैं तो ग्रीक योगर्ट या दही में केला, मूंगफली और थोड़ा शहद मिलाकर भी इंस्टेंट प्रोटीन बाउल तैयार किया जा सकता है. इसमें ज्यादा मेहनत नहीं लगती और यह वर्कआउट के बाद खाने के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है. मूंगफली और दही दोनों शरीर को अच्छी मात्रा में प्रोटीन देते हैं, जबकि केला तुरंत एनर्जी देने में मदद करता है. कम सामग्री में बनने वाले ये प्रोटीन रिच मील इस बात का उदाहरण हैं कि हेल्दी खाने के लिए हमेशा महंगे ingredients या complicated recipes की जरूरत नहीं होती. सही चीजों का संयोजन करके घर पर आसानी से पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन तैयार किया जा सकता है, जो शरीर को मजबूत बनाने के साथ पूरे दिन एक्टिव रखने में भी मदद करता है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
टूथपेस्ट में नमक क्यों मिलाया जाता है? क्या होती है इसकी वजह, डेंटिस्ट ने बताए 5 रोचक तथ्य

Last Updated:May 12, 2026, 17:04 IST Why Salt Added in Toothpaste: टूथपेस्ट में नमक मिलाने का उद्देश्य दांतों और मसूड़ों की सफाई को बेहतर बनाना माना जाता है. डेंटिस्ट डॉक्टर वैभव गुलाटी के अनुसार नमक में हल्के एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो ओरल हाइजीन सुधारने में मदद कर सकते हैं. हालांकि स्वस्थ दांतों के लिए सही ब्रशिंग और नियमित डेंटल केयर सबसे ज्यादा जरूरी है. नमक में हल्के एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो ओरल हेल्थ को सुधारने में मदद कर सकते हैं. Is Salt Toothpaste Good for Teeth: दांतों को साफ और हेल्दी बनाए रखने के लिए अच्छी क्वालिटी का टूथपेस्ट इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. टूथपेस्ट खरीदते समय आपने अक्सर विज्ञापनों में नमक वाला टूथपेस्ट जरूर सुना होगा. कई लोग यह मानते हैं कि नमक दांतों को मजबूत बनाता है, जबकि कुछ लोग इसे सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा समझते हैं. अब सवाल है कि आखिर टूथपेस्ट में नमक मिलाने की असली वजह क्या होती है? डेंटिस्ट की मानें तो नमक का इस्तेमाल पुराने समय से ही ओरल हाइजीन और दांतों की सफाई के लिए किया जाता रहा है. आजकल टूथपेस्ट में इसका इस्तेमाल कंट्रोल्ड तरीके से होता है. नई दिल्ली के पीतमपुरा स्थित गुलाटी डेंटल एंड एस्थेटिक क्लीनिक के डेंटिस्ट डॉ. वैभव गुलाटी ने News18 को बताया आजकल अधिकतर टूथपेस्ट में नमक होता है. नमक में हल्के एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. यही वजह है कि लोगों को गुनगुने नमक पानी से कुल्ला करने की सलाह दी जाती है. इससे मुंह की सफाई बनाए रखने और बैक्टीरिया कम करने में मदद मिल सकती है. टूथपेस्ट में नमक मिलाने का उद्देश्य भी ओरल हाइजीन को बेहतर बनाना माना जाता है. नमक वाले टूथपेस्ट मसूड़ों की सतह को साफ रखने में मदद कर सकते हैं. नमक की हल्की किरकिराहट दांतों पर जमी गंदगी और प्लाक हटाने में सहायक होती है. डॉक्टर ने बताया कि नमक वाले टूथपेस्ट मुंह की दुर्गंध कम करने में भी मदद कर सकते हैं. नमक मुंह के अंदर बैक्टीरिया की संख्या को कुछ हद तक कंट्रोल करने में सहायक माना जाता है, जिससे सांस की बदबू कम हो सकती है. हालांकि लंबे समय तक बदबू रहने पर डेंटिस्ट से जांच करवाना जरूरी माना जाता है. किसी भी टूथपेस्ट की गुणवत्ता सिर्फ नमक पर निर्भर नहीं करती. आधुनिक टूथपेस्ट में फ्लोराइड, कैल्शियम और दूसरी जरूरी सामग्री भी मिलाई जाती है, जो दांतों को कैविटी से बचाने और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. इसलिए केवल नमक देखकर टूथपेस्ट चुनना सही तरीका नहीं माना जाता है. डॉक्टर के मुताबिक दांतों की सेंसिटिविटी या मसूड़ों की समस्या वाले लोगों को किसी भी टूथपेस्ट का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए. कुछ लोगों में ज्यादा एब्रेसिव यानी रगड़ पैदा करने वाले टूथपेस्ट सेंसिटिविटी बढ़ा सकते हैं. इसलिए अगर दांतों में दर्द, झनझनाहट या मसूड़ों से खून आने जैसी समस्या हो, तो डेंटिस्ट की सलाह लेना बेहतर माना जाता है. स्वस्थ दांतों के लिए सिर्फ सही टूथपेस्ट ही काफी नहीं होता. दिन में दो बार ब्रश करना, सही तरीके से सफाई करना, मीठे खाद्य पदार्थ कम खाना और नियमित डेंटल चेकअप भी बेहद जरूरी हैं. कई लोग सोचते हैं कि महंगा या नमक वाला टूथपेस्ट इस्तेमाल करने से दांत पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे, लेकिन असल में सही ओरल केयर आदतें ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें







