टूथपेस्ट में नमक क्यों मिलाया जाता है? क्या होती है इसकी वजह, डेंटिस्ट ने बताए 5 रोचक तथ्य

Last Updated:May 12, 2026, 17:04 IST Why Salt Added in Toothpaste: टूथपेस्ट में नमक मिलाने का उद्देश्य दांतों और मसूड़ों की सफाई को बेहतर बनाना माना जाता है. डेंटिस्ट डॉक्टर वैभव गुलाटी के अनुसार नमक में हल्के एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो ओरल हाइजीन सुधारने में मदद कर सकते हैं. हालांकि स्वस्थ दांतों के लिए सही ब्रशिंग और नियमित डेंटल केयर सबसे ज्यादा जरूरी है. नमक में हल्के एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो ओरल हेल्थ को सुधारने में मदद कर सकते हैं. Is Salt Toothpaste Good for Teeth: दांतों को साफ और हेल्दी बनाए रखने के लिए अच्छी क्वालिटी का टूथपेस्ट इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. टूथपेस्ट खरीदते समय आपने अक्सर विज्ञापनों में नमक वाला टूथपेस्ट जरूर सुना होगा. कई लोग यह मानते हैं कि नमक दांतों को मजबूत बनाता है, जबकि कुछ लोग इसे सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा समझते हैं. अब सवाल है कि आखिर टूथपेस्ट में नमक मिलाने की असली वजह क्या होती है? डेंटिस्ट की मानें तो नमक का इस्तेमाल पुराने समय से ही ओरल हाइजीन और दांतों की सफाई के लिए किया जाता रहा है. आजकल टूथपेस्ट में इसका इस्तेमाल कंट्रोल्ड तरीके से होता है. नई दिल्ली के पीतमपुरा स्थित गुलाटी डेंटल एंड एस्थेटिक क्लीनिक के डेंटिस्ट डॉ. वैभव गुलाटी ने News18 को बताया आजकल अधिकतर टूथपेस्ट में नमक होता है. नमक में हल्के एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. यही वजह है कि लोगों को गुनगुने नमक पानी से कुल्ला करने की सलाह दी जाती है. इससे मुंह की सफाई बनाए रखने और बैक्टीरिया कम करने में मदद मिल सकती है. टूथपेस्ट में नमक मिलाने का उद्देश्य भी ओरल हाइजीन को बेहतर बनाना माना जाता है. नमक वाले टूथपेस्ट मसूड़ों की सतह को साफ रखने में मदद कर सकते हैं. नमक की हल्की किरकिराहट दांतों पर जमी गंदगी और प्लाक हटाने में सहायक होती है. डॉक्टर ने बताया कि नमक वाले टूथपेस्ट मुंह की दुर्गंध कम करने में भी मदद कर सकते हैं. नमक मुंह के अंदर बैक्टीरिया की संख्या को कुछ हद तक कंट्रोल करने में सहायक माना जाता है, जिससे सांस की बदबू कम हो सकती है. हालांकि लंबे समय तक बदबू रहने पर डेंटिस्ट से जांच करवाना जरूरी माना जाता है. किसी भी टूथपेस्ट की गुणवत्ता सिर्फ नमक पर निर्भर नहीं करती. आधुनिक टूथपेस्ट में फ्लोराइड, कैल्शियम और दूसरी जरूरी सामग्री भी मिलाई जाती है, जो दांतों को कैविटी से बचाने और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. इसलिए केवल नमक देखकर टूथपेस्ट चुनना सही तरीका नहीं माना जाता है. डॉक्टर के मुताबिक दांतों की सेंसिटिविटी या मसूड़ों की समस्या वाले लोगों को किसी भी टूथपेस्ट का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए. कुछ लोगों में ज्यादा एब्रेसिव यानी रगड़ पैदा करने वाले टूथपेस्ट सेंसिटिविटी बढ़ा सकते हैं. इसलिए अगर दांतों में दर्द, झनझनाहट या मसूड़ों से खून आने जैसी समस्या हो, तो डेंटिस्ट की सलाह लेना बेहतर माना जाता है. स्वस्थ दांतों के लिए सिर्फ सही टूथपेस्ट ही काफी नहीं होता. दिन में दो बार ब्रश करना, सही तरीके से सफाई करना, मीठे खाद्य पदार्थ कम खाना और नियमित डेंटल चेकअप भी बेहद जरूरी हैं. कई लोग सोचते हैं कि महंगा या नमक वाला टूथपेस्ट इस्तेमाल करने से दांत पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे, लेकिन असल में सही ओरल केयर आदतें ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
गर्मियों में पुदीना छाछ रेसिपी: गर्मी में पेट को ठंडक दें पुदीना छाछ, 5 मिनट से भी कम समय में तैयार हो जाएगी; आप रहें कूल-कूल

सामग्री: 1 कप ताजा दही, 2 कप ठंडा पानी, 8-10 पुदीना आटा, 1 हरी मिर्च, 1/2 छोटा मोटा जीरा पाउडर, काला नमक स्वाद, थोड़ा सा सादा नमक, बर्फ के टुकड़े, हरा धनियां छवि: फ्रीपिक पुदीना छाछ बनाने की विधि: सबसे पहले प्लास्टिक जार में दही, पुदीना फ़्राई और छोटे पानी के कलाकार से ब्लेंड कर लें। अब इसमें पानी बचा, इसके अलावा जीरा, काला नमक और साधारण नमक डाला गया। छवि: एआई इसे एक बार फिर अच्छी तरह से चला लें ताकि छाछ झगड़ा और दोस्ती बन जाए। अब गोले में बर्फ डालें और छाछ को भर कर तैयार कर लें। ऊपर से थोड़ा सा, जीरा और इलेक्ट्रोलाइट कट, हरा धनियां मॉड्यूल सर्व करें। छवि: फ्रीपिक पुदीना छाछ पीने के फायदे: यह शरीर को अंदर से ठंडक प्रदान करता है। पाचन तंत्र बेहतर रहता है। गैस और एसिडिटी से राहत मिल सकती है। गर्मी में डिहाइड्रेशन की समस्या कम होती है। लंबे समय तक ताजगी महसूस होती है। छवि: फ्रीपिक अगर आप छाछ को और ज्यादा टेस्टी बनाना चाहते हैं तो इसमें थोड़ी सी भुनी हुई मेज या कुछ बूंदें नींबू रस की भी मिला सकते हैं। इसका स्वाद और भी मज़ेदार है। छवि: एआई गर्मी में रोज़ाना एक बोतल पुदीना छाछ पीने से शरीर पर असर और ठंडक का एहसास होता है। यह सब्जी के साथ-साथ बेहद स्वादिष्ट भी होती है। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)पुदीना छाछ रेसिपी(टी)पुदीना छाछ रेसिपी(टी)पुदीना छाछ कैसे बनाएं(टी)स्वस्थ पेय(टी)पुदीना रेसिपी(टी)ठंडा करने वाला पेय(टी)पुदीना छाछ(टी)पुदीना छाछ रेसिपी
कूनो में 4 चीता शावकों की मौत, शव खाए मिले:श्योपुर में शिकार की आशंका, एक महीने पहले हुआ जन्म; मांद के पास पड़े मिले

श्योपुर कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता KGP12 के चार शावकों की मौत हो गई। मंगलवार सुबह मॉनिटरिंग टीम को डेन साइट (मांद) के पास चारों शावकों के शव मिले। वन विभाग के मुताबिक शव आंशिक रूप से खाए हुए थे, जिससे किसी जंगली जानवर के शिकार की आशंका जताई जा रही है। मादा चीता पूरी तरह स्वस्थ शावकों का जन्म 11 अप्रैल 2026 को हुआ था और वे करीब एक महीने के थे। टीम ने उन्हें 11 मई की शाम आखिरी बार जीवित देखा था। मौत के सही कारण का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद होगा। कूनो में अब 50 चीते बचे वन विभाग ने बताया कि मादा चीता KGP12 पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ है। इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है। कूनो में अब 50 चीते बचे हैं, जिनमें 33 भारत में जन्मे चीते हैं। गांधी सागर अभयारण्य में 3 चीते मौजूद हैं। देश में चीतों की कुल संख्या अब 53 हो गई है।
सोनू निगम फैन से बोले-पिटने वाले काम क्यों करते हो:लाइव कॉन्सर्ट में फैन स्टेज पर चढ़ा; सोनू ने कहा- अगली बार नहीं बचा पाऊंगा

सिंगर सोनू निगम कोल्हापुर में एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान अचानक एक फैन स्टेज पर चढ़ गया। वह स्टेज पर सिंगर के पैर छूने की कोशिश करने लगा। इस घटना से सोनू निगम काफी असहज नजर आए। उन्होंने अब सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए दर्शकों को सख्त चेतावनी दी है। कोल्हापुर में बीच शो में सुरक्षा चूक सोनू निगम पिछले हफ्ते कोल्हापुर में परफॉर्म कर रहे थे। वे अपने एक हिट गाने में मगन थे, तभी सफेद टी-शर्ट पहने एक युवक अचानक सिक्योरिटी घेरा तोड़कर स्टेज पर पहुंच गया। सोनू ने जैसे ही उसे अपनी तरफ आते देखा, वे गाना छोड़कर पीछे हट गए। फैन ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेने की कोशिश की। इस वजह से शो को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा। गुस्सा करने के बजाय फैन को थमाया माइक जब सिक्योरिटी टीम उस युवक को स्टेज से हटाने के लिए आई, तो सोनू ने उसे डांटने के बजाय शांत तरीके से हैंडल किया। उन्होंने उस फैन को अपना माइक थमा दिया और उसे गाने का मौका दिया। फैन ने ‘दबंग’ फिल्म का गाना ‘चोरी किया रे जिया’ की कुछ लाइनें गाईं। गाना खत्म करने के बाद उसने कहा, “कोल्हापुर लव्स यू।” हालांकि, सोनू निगम इस पूरी स्थिति से काफी परेशान और असहज दिखे। सोशल मीडिया पर दर्शकों को दी चेतावनी कंसर्ट के एक दिन बाद सोनू निगम ने इस घटना का वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया। उन्होंने कैप्शन में लिखा, “क्यों पिटने वाले काम करते हो ऑडियंस? इस बार तो बचा लिया, हर बार नहीं बचा पाऊंगा।” उन्होंने तंज कसते हुए वीडियो में फैन की हरकत पर “वाह, शाबाश!” भी कहा। लाइव शो में बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं कलाकारों के साथ लाइव शो के दौरान बदतमीजी या सुरक्षा में चूक की घटनाएं पिछले कुछ महीनों में बढ़ी हैं। हाल ही में दिल्ली में ‘धुरंधर’ सिंगर जैस्मीन सैंडलस के साथ भी एक फैन ने स्टेज पर गलत व्यवहार किया था। इसके अलावा आतिफ असलम और सुनंदा शर्मा जैसे मशहूर सिंगर्स को भी कंसर्ट के दौरान ऐसी ही स्थितियों का सामना करना पड़ा है।
ब्राउन और व्हाइट शुगर में क्या अंतर होता है? जानिये सेहत पर इन दोनों का असर

चीनी हमारे रोज़मर्रा के खान‑पान का अहम हिस्सा है. चाय, मिठाई, डेज़र्ट या फिर किसी रेसिपी में मिठास लाने के लिए हम आमतौर पर व्हाइट शुगर का इस्तेमाल करते हैं, जबकि आजकल सेहत के नाम पर ब्राउन शुगर भी काफ़ी लोकप्रिय हो गई है. कई लोग मानते हैं कि ब्राउन शुगर ज़्यादा हेल्दी होती है, लेकिन क्या सच में ऐसा है? आइए जानते हैं दोनों में अंतर, फायदे और उपयोग. 1. बनाने की प्रक्रियाव्हाइट शुगर गन्ने या चुकंदर के रस को पूरी तरह रिफाइन करके बनाई जाती है. इसमें मौजूद शीरा (molasses) पूरी तरह निकाल दिया जाता है, इसलिए इसका रंग बिल्कुल सफेद और स्वाद साफ़ मीठा होता है. ब्राउन शुगर या तो आंशिक रूप से रिफाइन की गई होती है या फिर व्हाइट शुगर में दोबारा शीरा मिलाकर बनाई जाती है. इसी शीरे के कारण इसका रंग भूरा और स्वाद हल्का‑सा कैरामेल जैसा होता है. 2. रंग, बनावट और स्वादव्हाइट शुगर के दाने सूखे, चमकदार और एक‑जैसे होते हैं. इसका स्वाद तेज़ और सीधा मीठा होता है.ब्राउन शुगर नमी वाली, थोड़ी चिपचिपी और मुलायम होती है. इसका स्वाद हल्का गहरा और खुशबूदार होता है. 3. पोषण मूल्यपोषण के लिहाज़ से दोनों लगभग एक‑सी ही हैं. ब्राउन शुगर में शीरे की वजह से बहुत थोड़ी मात्रा में कैल्शियम, पोटैशियम और आयरन हो सकता है, लेकिन यह मात्रा इतनी कम होती है कि इससे कोई खास पोषण लाभ नहीं मिलता. कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट दोनों में लगभग समान होते हैं. 4. सेहत पर प्रभावयह धारणा गलत है कि ब्राउन शुगर बहुत ज़्यादा हेल्दी होती है. दोनों ही शुगर्स का अधिक सेवन मोटापा, डायबिटीज़ और दांतों की समस्या बढ़ा सकता है. सेहत के लिए मात्रा पर नियंत्रण ज़्यादा ज़रूरी है, न कि रंग पर. 5. उपयोग में अंतरव्हाइट शुगर का इस्तेमाल चाय‑कॉफी, मिठाइयों और सामान्य पकाने में होता है.ब्राउन शुगर का उपयोग खासतौर पर केक, कुकीज़, सॉस और बेकिंग में किया जाता है, जहां इसका फ्लेवर स्वाद बढ़ाता है. निष्कर्षब्राउन शुगर और व्हाइट शुगर में मुख्य अंतर रंग, स्वाद और निर्माण प्रक्रिया का है, न कि सेहत का. दोनों का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. अगर मिठास कम और संतुलित रखी जाए, तो यही सबसे अच्छा और समझदारी भरा विकल्प है.
रिटेल महंगाई अप्रैल में बढ़कर 3.48% पर पहुंची:खाने-पीने की चीजें महंगी होने का असर; अमेरिका-ईरान तनाव से ये और बढ़ सकती है

अप्रैल की रिटेल महंगाई बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई है। इससे पहले मार्च में यह 3.40% थी। आज 12 मई को ये आंकड़े जारी किए गए हैं। महंगाई में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। यह तनाव लंब चला तो महंगाई आगे और बढ़ सकती है। महंगाई बढ़ने की वजह- खाने-पीने की चीजों के दामों का बढ़ना महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दामों का बढ़ना है। फूड इन्फ्लेशन अप्रैल में बढ़कर 4.20% पर पहुंच गई। मार्च में यह आंकड़ा 3.87% था। नए तरीके से मापी जा रही महंगाई, OTT शामिल यह महंगाई के नए फॉर्मूले (2024 बेस ईयर) के तहत जारी तीसरा आंकड़ा है। सरकार ने महंगाई नापने के बास्केट में भी बदलाव किया है। खाने-पीने की चीजों का वजन (वेटेज) 45.9% से घटाकर 36.75% कर दिया गया है, जबकि हाउसिंग और बिजली-गैस का वेटेज बढ़ा दिया गया है। क्या हटा: वीसीआर और ऑडियो कैसेट जैसे पुराने सामान हटा दिए गए हैं। क्या जुड़ा: OTT सब्सक्रिप्शन, डिजिटल स्टोरेज जैसे खर्चे शामिल किए हैं। महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है? महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी। 3.48% महंगाई दर का क्या मतलब है? 1. तुलना पिछले साल से होती है (साल-दर-साल) जब हम कहते हैं कि अप्रैल 2026 में महंगाई 3.48% है, तो इसका मतलब है कि हम इसकी तुलना मार्च 2025 से कर रहे हैं। यह पूरे एक साल का बदलाव है। 3.48% एक औसत नंबर है जिसे ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ कहते हैं। इसमें आपके जीवन की सैकड़ों चीजें शामिल हैं: किसी चीज के दाम बहुत ज्यादा बढ़े होंगे। किसी चीज के दाम घटे भी होंगे। जब इन सबको एक साथ मिलाया गया, तो औसतन खर्च 3.48% बढ़ गया। 2. ₹100 की चीज अब ₹103.48 की हो गई इसका गणित बहुत सीधा है। अगर अप्रैल 2025 में आपने कोई सामान जैसे राशन ₹100 में खरीदा था, तो वही सामान अप्रैल 2026 में ₹103.48 का हो गया है।
केरल के मुख्यमंत्री के रूप में केसी वेणुगोपाल की पदोन्नति से दो उपचुनाव क्यों हो सकते हैं | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 16:08 IST हालांकि केसी वेणुगोपाल पिछले छह वर्षों से केरल की सक्रिय राजनीति से दूर हैं, लेकिन राज्य में पार्टी के मामलों में उनका काफी प्रभाव है। भले ही वेणुगोपाल पिछले छह वर्षों से केरल की राजनीति से दूर हैं, फिर भी वह पार्टी के मामलों में महत्वपूर्ण प्रभाव रखते हैं। (छवि: एएनआई फ़ाइल) केरल के अगले मुख्यमंत्री पर विचार-विमर्श जारी है, केसी वेणुगोपाल इस पद के लिए शीर्ष दावेदार के रूप में उभरे हैं। हालाँकि, उनकी संभावित नियुक्ति एक अनोखी संवैधानिक चुनौती पेश करती है, क्योंकि वेणुगोपाल ने हालिया विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। यदि वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री के रूप में चुना जाता है, तो उन्हें छह महीने के भीतर केरल विधानसभा में एक सीट सुरक्षित करनी होगी। इससे दो अलग-अलग उपचुनाव होंगे। अलाप्पुझा के मौजूदा सांसद के रूप में वेणुगोपाल को अपनी संसदीय सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। इसके अलावा, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के एक मौजूदा विधायक को वेणुगोपाल को राज्य विधानसभा के लिए उपचुनाव लड़ने की अनुमति देने के लिए अपनी सीट खाली करनी होगी। केरल की राजनीति में वेणुगोपाल की विरासत वेणुगोपाल राज्य के राजनीतिक परिदृश्य के लिए अजनबी नहीं हैं। उन्होंने पहली बार 1996 में केरल विधानसभा में प्रवेश किया और लगातार तीन बार अलाप्पुझा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। ओमन चांडी प्रशासन (2004-2006) के दौरान, उन्होंने पर्यटन और देवास्वोम मंत्री के रूप में भी कार्य किया। पार्टी के भीतर उनका उत्थान जमीनी स्तर पर शुरू हुआ, जहां उन्होंने 1988 से 1993 तक केरल छात्र संघ (केएसयू) का नेतृत्व किया, इसके बाद युवा कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष (1993-2000) के रूप में कार्यकाल रहा। वेणुगोपाल का राष्ट्रीय राजनीति में स्थानांतरण राष्ट्रीय राजनीति में परिवर्तन के बाद से, वेणुगोपाल कांग्रेस पदानुक्रम में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए हैं। 2019 में एआईसीसी महासचिव (संगठन) के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद, उन्होंने खुद को पार्टी के भीतर एक प्राथमिक शक्ति केंद्र के रूप में स्थापित किया, जो आलाकमान के लिए एक प्रमुख पुल के रूप में कार्यरत था। क्या वेणुगोपाल बनेंगे केरल के सीएम? हालांकि केसी वेणुगोपाल पिछले छह वर्षों से केरल की सक्रिय राजनीति से दूर हैं, लेकिन राज्य में पार्टी के मामलों में उनका काफी प्रभाव है। उन्होंने कथित तौर पर विधानसभा टिकट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पार्टी के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार किया। कांग्रेस में उनके कद को देखते हुए राज्य के लगभग 43 विधायकों और सभी पार्टी सांसदों ने मुख्यमंत्री के रूप में वेणुगोपाल का समर्थन किया है। वेणुगोपाल स्पष्ट रूप से दौड़ में दो अन्य दावेदारों- वीडी सतीसन और रमेश चेन्निथला से आगे हैं, यह निर्णय राहुल गांधी पर निर्भर करता है कि क्या वह अपने विश्वासपात्र को केरल जाने की अनुमति देंगे, जहां वह पहले पार्टी के सांसद थे और जहां उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा अब वायनाड निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं। कांग्रेस की दुविधा एक केंद्रीय नेता, वेणुगोपाल और केरल के जमीनी समर्थन वाले नेताओं के बीच चयन करने को लेकर भी है – इन दोनों का राज्य में मजबूत प्रभाव है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम), भारत, भारत समाचार राजनीति केरल के मुख्यमंत्री के रूप में केसी वेणुगोपाल की पदोन्नति से दो उपचुनाव क्यों हो सकते हैं? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग अनुवाद करने के लिए)केसी वेणुगोपाल केरल के मुख्यमंत्री(टी)केरल के मुख्यमंत्री की दौड़(टी)केसी वेणुगोपाल सांसद(टी)केरल संवैधानिक चुनौती(टी)केरल उपचुनाव(टी)अलप्पुझा निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति(टी)कांग्रेस यूडीएफ केरल(टी)एआईसीसी महासचिव संगठन
रूक जाओ… गर्मियों में रोज आम खाने वाले हो जाएं अलर्ट, सेवन से पहले की ये एक बड़ी गलती बना सकती है आपको बीमार

Last Updated:May 12, 2026, 14:41 IST Mango Eating Tips: गर्मी के मौसम में आम खाना लगभग हर किसी को पसंद होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे गलत तरीके से खाना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार आम खाने से पहले उसे कुछ समय पानी में भिगोकर रखना बेहद जरूरी होता है. ऐसा नहीं करने पर आम में मौजूद फाइटिक एसिड और केमिकल्स शरीर में गर्मी बढ़ा सकते हैं, जिससे पिंपल्स, पेट की गड़बड़ी और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अधिक मात्रा में आम खाने से ब्लड शुगर भी बढ़ सकता है. खासतौर पर डायबिटीज और मोटापे से परेशान लोगों को सीमित मात्रा में आम का सेवन करना चाहिए. करौली के आयुर्वेदिक चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ उमेश शर्मा बताते हैं कि आम की प्रकृति गर्म होती है और इसे सीधे खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है. इससे चेहरे पर पिंपल्स, मुंहासे, पेट की गड़बड़ी और शरीर में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में आम को खाने से पहले पानी में भिगोने से इसमें मौजूद अतिरिक्त गर्मी कम हो जाती है. गर्मी का मौसम आते ही बाजार में फलों के राजा आम की बहार शुरू हो जाती है. बच्चे हों या बड़े, हर कोई आम का स्वाद बड़े चाव से लेता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आम खाने से पहले की गई एक छोटी सी गलती आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार से लाए गए आम को बिना पानी में भिगोए सीधे खाना नुकसानदायक साबित हो सकता है. यही कारण है कि पुराने समय से दादी-नानी आम को कुछ घंटों तक पानी में भिगोकर खाने की सलाह देती आ रही हैं. अब विज्ञान भी इस घरेलू उपाय को सही मानता है. Add News18 as Preferred Source on Google दरअसल, आम को पकाने और सुरक्षित रखने के लिए कई बार केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है. कुछ व्यापारी आम को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे हानिकारक रसायनों का उपयोग करते हैं. इसके अलावा आम के छिलके पर धूल, मिट्टी और कीटनाशकों के अंश भी चिपके रह सकते है. डॉक्टरों का कहना है कि आम में फाइटिक एसिड नामक तत्व भी पाया जाता है, जो शरीर में गर्मी पैदा कर सकता है. लंबे समय तक बिना भिगोए आम खाने से कुछ लोगों को एलर्जी, सिरदर्द और पेट संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं. खासतौर पर बच्चों और संवेदनशील लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है. आयुर्वैदिक एक्सपर्ट डॉ उमेश शर्मा गर्मी के मौसम में सलाह देते हैं कि आम खाने से पहले उसे अच्छी तरह धोएं और कम से कम 1 से 2 घंटे पानी में जरूर रखें. साथ ही सीमित मात्रा में ही आम का सेवन करें. गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना भी जरूरी है. सही तरीके से खाया गया आम स्वाद के साथ शरीर को विटामिन, फाइबर और ऊर्जा भी देता है, लेकिन लापरवाही नुकसान का कारण बन सकती है. ऐसे में यदि आम को बिना धोए या भिगोए खाया जाए तो यह शरीर में कई समस्याएं पैदा कर सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार आम को 2 से 3 घंटे तक साफ पानी में भिगोकर रखने से उसके ऊपर मौजूद गंदगी और हानिकारक तत्व काफी हद तक निकल जाते हैं. इससे आम की तासीर भी थोड़ी संतुलित हो जाती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
केवल 4,649 वोटों से विजय की टीवीके को तमिलनाडु में अपने दम पर बहुमत मिल जाता | भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 12:56 IST अकेले बहुमत के बिना भी, विजय के पहले चुनाव ने लंबे समय से चले आ रहे DMK-AIADMK के प्रभुत्व को तोड़कर तमिलनाडु की राजनीति को बदल दिया। टीवीके प्रमुख विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. (पीटीआई छवि) एक शानदार चुनावी शुरुआत में, विजय की तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) ने 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में 108 सीटों पर कब्जा कर लिया। 118 सीटों वाले बहुमत के जादुई आंकड़े से सिर्फ 10 सीटें कम रह जाने के कारण पार्टी अपने दम पर सरकार बनाने में असमर्थ रही। टीवीके को सीपीआई (एम), सीपीआई, वीसीके और आईयूएमएल के बाहरी समर्थन के साथ-साथ कांग्रेस और एमएनएम जैसी पार्टियों से समर्थन प्राप्त करने के लिए गठबंधन पर निर्भर रहना पड़ा है। डेटा पर करीब से नज़र डालने से एक दिलचस्प वास्तविकता का पता चलता है: रणनीतिक रूप से 10 विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों में रखे गए मात्र 4,649 अतिरिक्त वोट, चुनाव के बाद गठबंधन की आवश्यकता के बिना टीवीके के लिए पूर्ण बहुमत हासिल कर सकते थे। महत्वपूर्ण 10 युद्धक्षेत्र ये 10 निर्वाचन क्षेत्र टीवीके की सबसे कम हार का प्रतिनिधित्व करते हैं। फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली में, यदि टीवीके ने इन विशिष्ट सीटों पर जीत के अंतर के आधे से केवल एक वोट अधिक हासिल किया होता (प्रभावी रूप से उन वोटों को विजेता से टीवीके की ओर पलट दिया होता), तो चुनाव परिणाम पूरी तरह से उनके पक्ष में स्थानांतरित हो जाता। हार के सबसे कम अंतर वाली 10 सीटें थीं तिरुक्कोयिलुर (285 वोट), कुलिथलाई (579 वोट), पलानी (693 वोट), कोविलपट्टी (843 वोट), विक्रवंडी (910 वोट), उधगमंडलम (976 वोट), पापनासम (1065 वोट), डिंडीगुल (1131 वोट), किल्लियूर (1311 वोट), और थिरुमायम (1492 वोट)। वोट)। गणित एक त्वरित गणना से पता चलता है कि इन 10 सीटों पर टीवीके के पक्ष में पलड़ा झुकाने के लिए आवश्यक स्विंग वोटों की न्यूनतम संख्या बिल्कुल 4,649 है (तालिका देखें)। वे सीटें कहां गईं? टीवीके की उंगलियों से फिसलने वाले 10 निर्वाचन क्षेत्रों पर प्रतिद्वंद्वियों और वर्तमान सहयोगियों के मिश्रण ने दावा किया था: डीएमके चार, एआईएडीएमके दो, बीजेपी एक, कांग्रेस एक, आईयूएमएल एक और पीएमके एक। विजय और उनके पहले ही प्रयास में ऐतिहासिक, एकल-दलीय बहुमत के बीच 5,000 से भी कम वोटों का अविश्वसनीय रूप से कम अंतर था। अकेले बहुमत के बिना भी, विजय के पहले चुनाव ने लंबे समय से चले आ रहे डीएमके-एआईएडीएमके प्रभुत्व को तोड़कर और टीवीके को सीधे सरकार गठन की बातचीत में शामिल करके तमिलनाडु की राजनीति को बदल दिया। लेकिन बेहद कम अंतर इस बात को रेखांकित करता है कि अभिनेता से नेता बने अभिनेता और भी बड़ी उपलब्धि के कितने करीब आ गए: दशकों में पहली बार तमिलनाडु में एकल-पार्टी बहुमत हासिल करने वाले पहले नवागंतुक बन गए। अंत में, लाखों की संख्या वाले राज्य में फैले 5,000 से भी कम वोट, विजय और पूर्ण राजनीतिक नियंत्रण के बीच खड़े थे। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया केवल 4,649 वोटों से विजय की टीवीके को तमिलनाडु में अपने दम पर बहुमत मिल जाता अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलगा वेट्री कड़गम चुनाव(टी)विजय तमिलनाडु की राजनीति(टी)टीवीके विधानसभा सीटें(टी)तमिलनाडु चुनाव परिणाम(टी)संकीर्ण जीत का अंतर(टी)गठबंधन सरकार तमिलनाडु(टी)डीएमके एआईएडीएमके प्रभुत्व(टी)स्विंग वोट निर्वाचन क्षेत्र
आर्थिक फैसलों में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी:महिला मुखिया वाले घरों में कम हुई दिहाड़ी; पक्की नौकरियां बढ़ीं- रिपोर्ट

देश में महिलाओं की आर्थिक भूमिका सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रह गई। एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट में सामने आया है कि महिला मुखिया वाले परिवारों में रोजगार की गुणवत्ता तेजी से सुधर रही है। जब घर में महिला की चलती है, तो परिवार की निर्भरता असुरक्षित दिहाड़ी मजदूरी से हटकर सम्मानजनक नियमित वेतन वाली नौकरियों की ओर बढ़ जाती है। ऐसी महिलाओं में नियमित रोजगार की संभावना 4.4% बढ़ी है, जबकि दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भरता 4.2% घटी है। यह संकेत है कि महिलाएं संरक्षित रोजगार की ओर बढ़ रही हैं। देशभर के 2.70 लाख परिवारों और 11.48 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों पर आधारित सर्वे शहर – सुरक्षित नौकरियों की ओर बड़ी छलांग शहरी क्षेत्रों में जिन घरों की मुखिया महिला है, वहां नियमित वेतन वाली नौकरियों की संभावना 10 फीसदी तक बढ़ गई है। यह डेटा चौंकाने वाला है क्योंकि यह दर्शाता है कि महिलाएं अनिश्चित छोटे-मोटे व्यवसायों के बजाय स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा वाले कॉर्पोरेट या संस्थागत काम को प्राथमिकता दे रही हैं। ग्रामीण भारत – दिहाड़ी मजदूरी में 5% तक की कमी आई महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण घरों में दिहाड़ी में शामिल होने की संभावना 5% घटी। इसकी जगह परिवार अब खुद के छोटे उद्यमों या नियमित काम की ओर बढ़ रहे हैं, जो उनकी बढ़ती बार्गेनिंग पावर को दर्शाता है। महिला शिक्षित होती हैं तो तेजी से उन्नति अध्ययन में शिक्षा को भी महिलाओं के रोजगार बदलाव का बड़ा कारण बताया गया है। अशिक्षित महिलाओं में दिहाड़ी मजदूरी की संभावना सबसे ज्यादा है, लेकिन शिक्षा बढ़ने के साथ यह तेजी से घटती है। उच्च माध्यमिक और उससे ऊपर की पढ़ाई करने वाली महिलाओं में नियमित वेतन वाली नौकरी की संभावना सबसे अधिक पाई गई। श्रम में हिस्सेदारी रिकॉर्ड 40 फीसदी पहुंची देश में महिला श्रम भागीदारी दर 40% तक पहुंच चुकी है। ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 45.9% और शहरों में महज 27.7% है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं में स्वरोजगार की संभावना बढ़ी है। यदि प्रशिक्षण, रोजगार योजनाओं का विस्तार किया जाए तो महिलाओं को बेहतर रोजगार मिल सकता है। यहां दी मात-परिवहन में महिलाओं की नौकरी पुरुषों से ज्यादा रिपोर्ट में सबसे दिलचस्प बदलाव परिवहन क्षेत्र में दिखा। यहां नियमित वेतन वाली नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों से ज्यादा पाई गई। लंबे समय तक पुरुष प्रधान माने जाने वाले इस क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी नए रोजगार रुझान का संकेत मानी जा रही है। दूसरी ओर खनन और औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं की नियमित नौकरी हिस्सेदारी अब भी काफी कम बनी हुई है।






