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गोंद जैसा दिखने वाला ये देसी फल है पोषण का पावरहाउस, अचार से लेकर सेहत तक हर चीज में है सुपरहिट

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Last Updated:May 11, 2026, 23:08 IST लसोड़ा एक ऐसा देसी फल है, जिसे गांवों में सालों से अचार और सब्जी के रूप में खाया जाता रहा है. दिखने में साधारण लगने वाला यह छोटा-सा फल पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है और आयुर्वेद में भी इसका खास महत्व बताया गया है. यही वजह है कि अब लोग फिर से इस पारंपरिक फल की तरफ ध्यान देने लगे हैं. ख़बरें फटाफट गांव-कस्बों में पाए जाने वाला लसोड़ा एक ऐसा फल है, जिसे आज की नई पीढ़ी धीरे-धीरे भूलती जा रही है. हालांकि पुराने समय में यह लोगों की रसोई और घरेलू नुस्खों का अहम हिस्सा माना जाता था. लसोड़ा का पेड़ गर्म और सूखे इलाकों में आसानी से उग जाता है और ज्यादा देखभाल की जरूरत भी नहीं पड़ती. इसे कई जगहों पर “इंडियन चेरी” के नाम से भी जाना जाता है. इसका फल आकार में छोटा होता है, लेकिन स्वाद और पोषण के मामले में काफी खास माना जाता है. खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग इसका अचार, सब्जी और कई पारंपरिक व्यंजनों में इस्तेमाल करते आए हैं. स्वाद के साथ सेहत का भी खजानालसोड़ा देखने में भले साधारण लगे, लेकिन इसमें कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार इसमें फाइबर, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और जिंक जैसे तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. यही वजह है कि पुराने समय में लोग इसे सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सेहत को बेहतर रखने के लिए भी अपनी डाइट का हिस्सा बनाते थे. इसका कच्चा फल हल्का कसैला और चिपचिपा होता है, जबकि पकने के बाद इसमें हल्की मिठास आ जाती है. गांवों में आज भी कई घरों में इसका अचार बड़े चाव से खाया जाता है. वहीं कुछ जगहों पर इसकी मसालेदार सब्जी भी बनाई जाती है, जिसका स्वाद काफी अलग माना जाता है. पाचन के लिए क्यों माना जाता है अच्छा?लसोड़ा को पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद फाइबर पेट को साफ रखने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि जिन लोगों को कब्ज या पेट से जुड़ी समस्याएं रहती हैं, उनके लिए इसे उपयोगी माना जाता है. ग्रामीण इलाकों में पुराने समय से लोग इसे खाने के साथ-साथ घरेलू उपायों में भी इस्तेमाल करते रहे हैं. माना जाता है कि यह शरीर को अंदर से ताकत देने और कमजोरी कम करने में मदद कर सकता है. आयुर्वेद में भी बताया गया खासआयुर्वेद में लसोड़ा के फल, पत्तियों और बीजों तक का उपयोग बताया गया है. कई जगहों पर इसकी पत्तियों का इस्तेमाल सूजन और त्वचा संबंधी समस्याओं में भी किया जाता रहा है. वहीं कुछ लोग इसके गूदे को पारंपरिक घरेलू नुस्खों में शामिल करते हैं. हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि किसी भी चीज का औषधि की तरह इस्तेमाल बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए. हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक उपयोग से पहले योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी माना जाता है. गांवों से शहरों तक फिर बढ़ रही लोकप्रियताएक समय था जब लसोड़ा लगभग हर गांव में आसानी से मिल जाता था, लेकिन अब शहरों में बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में पारंपरिक और देसी फूड्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण लोग फिर से ऐसे फलों की तरफ ध्यान देने लगे हैं. कई लोग अब ऑर्गेनिक और देसी खानपान को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें लसोड़ा जैसे पारंपरिक फल भी शामिल हो रहे हैं. खासतौर पर इसका अचार आज भी कई लोगों की पसंद बना हुआ है. छोटा फल, बड़े फायदेलसोड़ा भले ही दिखने में साधारण लगे, लेकिन इसके अंदर पोषण और पारंपरिक स्वाद दोनों छिपे हैं. गांवों में सालों से इस्तेमाल होने वाला यह फल आज भी लोगों की थाली और घरेलू परंपराओं का हिस्सा बना हुआ है. सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर यह शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व देने में मदद कर सकता है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi

वेजिटेबल उपमा रेसिपी: फिट पर स्वाद से नहीं होता कॉम्प्रोमाइज? अनलॉस्ट सुपरमार्केट वाला उपमा, कम कैलोरी में भरेगा पेट

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सामग्री: 1 कप सूजी, 1 छोटा चम्मच, 1 गाजर, 1/2 कप कप मटर, 1 काली मिर्च, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा चम्मच राई, 7-8 करी पत्ते, 2 बड़े मसाले का तेल, 2 से 3 पानी, स्वाद नमक, थोड़ा हरा धनियां, 1/2 नींबू का रस छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले एक पैन में सूजी को अंधेरा होने तक सूखा भुन लें। जब सूजी से अच्छी क्वालिटी आने लगे, तो इसे एक प्लेट में निकाल लें। अब वही पैन में तेल या घी गर्म करें। छवि: फ्रीपिक इसमें राई और चटकने दें। फिर कारी पत्ता, हरी मिर्च और पेंसिल पेंटिंग भून लें। इसके बाद गाजर, मटर और नमक का टुकड़ा 2 से 3 मिनट तक टूट गया। अब इसमें पानी और नमक और मसाले शामिल हैं। छवि: एआई जब पानी भरने लगे, तब धीरे-धीरे-धीरे-धीरे भुनी हुई सूजी डालें और लगातार चाटते रहें ताकि घुटठियां न बनें। माप पर 3 से 4 मिनट तक का समय। अंतिम रूप से नींबू का रस और हरा धनियां स्टैक अच्छी तरह से मिक्स करें। छवि: फ्रीपिक आपका गरमा-गरम वेजिटेबल उपमा तैयार है। वेजिटेबल उपमा में सूजी के साथ कई तरह के पादप तत्व पाए जाते हैं, जिससे शरीर को विटामिन और आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं। छवि: फ्रीपिक यह कम तेल में बन जाता है, इसलिए वजन नियंत्रित करना भी लोगों के लिए अच्छा माना जाता है। छवि: फ्रीपिक उपमा में भुनी हुई मूँगफली दाल ले सकते हैं। प्रभाव कॅटपन पसंद हो तो थोड़ा सा न्यूनतम वाक्य। इसमें टमाटर तो टमाटर भी मिला सकते हैं। बच्चों के लिए छोटी बटरी का स्वाद और बढ़ना बढ़ता है। छवि: फ्रीपिक अगर आप रोज एक नाश्ता जैसा कि जरूरी बोर हो चुके हैं, तो इस रेफ्रिजरेटर और टेस्टी वेजिटेबल उपमा को जरूर ट्राई करें। यह जल्दी बनता है और पूरे परिवार को पसंद भी आता है। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)वेजिटेबल उपमा रेसिपी(टी)वेजिटेबल उपमा रेसिपी(टी)उपमा रेसिपी(टी)उपमा कैसे बनाएं(टी)नमकीन उपमा(टी)उपमा कैसे बनाएं

मोरिंगा के पकौड़े रेसिपी: पनीर-प्याज सब खा जाएंगे भूल, जब घर में बचे सहजन के पकौड़े; स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का प्रभाव आदर्श है

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मोरिंगा में प्रचुर मात्रा में आयरन, कैल्शियम और विटामिन पाए जाते हैं, जो शरीर को शक्ति प्रदान करने में मदद करते हैं। हां ये पकौड़े बहुत कम समय में बनकर तैयार हो जाते हैं. छवि: एआई सामग्री: 1 कप मोरिंगा की पत्तियां, 1 कप बेसन, 1 छोटा प्याज मोनोफोनिक कटा हुआ, 1-2 हरी मिर्च हरी मिर्च कटी हुई, 1/2 छोटा लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा प्याज हल्दी छवि: फ्रीपिक 1/2 छोटा चम्मच, नमक स्वाद अनुसार, थोड़ा सा हरा धनियां, पानी चाहिए, तलने के लिए तेल। इनका स्वाद इतना शानदार लगता है कि घर के लोग बार-बार बनते हैं। छवि: एआई बनाने की विधि: सबसे पहले मोरिंगा की निश्चिंतता को अच्छे तरीके से धोकर साफ़ कर लें। अब एक बड़े बाउल में बेसन शामिल है और इसमें प्याज, हरी मिर्च, अजमोद, हल्दी, लाल मिर्च, नमक और हरा धनिया शामिल है। छवि: फ्रीपिक इसके बाद इसमें मोरिंगा के टुकड़े और थोड़ा-थोड़ा पानी के टुकड़े डालकर तैयार कर लें। ध्यान दें कि बैटर ज्यादा पतला न हो, तभी पकौड़े अच्छे कुरकुरे लगेंगे। छवि: एआई अब कढ़ाही में तेल गर्म करें। जब तेल अच्छे से गर्म हो जाए, तब हाथ या घर की मदद से छोटे-छोटे पकौड़े तेल में डाल दीजिए। उदाहरण के तौर पर मध्यम आंच पर सोनार और क्रिस्पी होने तक तलें। छवि: एआई जब पकौड़े दोनों तरफ से अच्छे से पक जाएं, तो इसलिए प्लेट में निकाल लें। गरमा-गरम मोरिंगा के पकौड़े हरी चटनी, टमाटर मसाला या मसाला चाय के साथ सर्व करें। छवि: एआई शरीर की कमजोरी दूर करने में मदद मिलती है। प्रतिरक्षा को मजबूत करने में सहायता करता है। ट्रैक्टरों के लिए खतरनाक होता है। इसके अलावा पाचन को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। छवि: फ्रीपिक

Guava Health Benefits: पेड़ पर उगने वाला यह देसी फल प्रोटीन-विटामिन से भरपूर, फल-पत्ती दोनों में छिपे हैं गुण

Guava Health Benefits: पेड़ पर उगने वाला यह देसी फल प्रोटीन-विटामिन से भरपूर, फल-पत्ती दोनों में छिपे हैं गुण

Last Updated:May 11, 2026, 21:27 IST Guava Health Benefits: अमरूद का पौधा प्रकृति का अनमोल उपहार माना जाता है. इसके फल के साथ-साथ इसकी पत्तियां भी लोगों के लिए काफी उपयोगी मानी जाती हैं. अमरूद में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. यही वजह है कि गांवों में आज भी लोग इसे सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि प्राकृतिक औषधि के रूप में भी देखते हैं. आइए अमरूद के प्राकृतिक गुणों के बारे में जानते हैं. अमरूद का पौधा सिर्फ स्वादिष्ट फल देने वाला पेड़ ही नहीं है, बल्कि इसे एक प्राकृतिक औषधि भी माना जाता है. गांवों से लेकर शहरों तक अमरूद का उपयोग लोग बड़े शौक से करते हैं. आयुर्वेद में भी अमरूद के फल, पत्तियां और छाल को कई घरेलू उपचारों में उपयोगी बताया गया है. यही कारण है कि आज भी लोग अमरूद को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानते हैं. अमरूद में विटामिन सी, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसके फल के साथ-साथ इसकी पत्तियां भी कई प्रकार से उपयोग में लाई जाती हैं. खास बात यह है कि अमरूद आसानी से मिलने वाला फल है और इसकी देखभाल भी ज्यादा कठिन नहीं होती. अमरूद को मधुमेह यानी डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभकारी फल माना जाता है. इसमें प्राकृतिक शुगर पाई जाती है और फाइबर भी भरपूर मात्रा में होता है, जो शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है. कई लोग डायबिटीज में अमरूद का सेवन बिना छिलके के करते हैं. माना जाता है कि यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है. अमरूद में विटामिन और पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने में सहायक होते हैं. हालांकि हर व्यक्ति की सेहत अलग होती है, इसलिए किसी भी बीमारी में डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही इसका सेवन करना चाहिए. सही मात्रा में अमरूद खाना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि अमरूद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी सहायक माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करता है. बदलते मौसम में होने वाली सर्दी, जुकाम और हल्के संक्रमण से बचाव के लिए भी अमरूद का सेवन लाभकारी माना जाता है. नियमित रूप से अमरूद खाने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे ऊर्जा बनी रहती है और कमजोरी कम महसूस होती है. अमरूद में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. यही कारण है कि कई लोग इसे अपनी दैनिक खानपान में शामिल करते हैं. इसके अलावा अमरूद पेट के लिए भी अच्छा माना जाता है और पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मदद कर सकता है. हालांकि किसी भी बीमारी में इसका उपयोग डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google अमरूद सिर्फ स्वाद और सेहत के लिए ही नहीं, बल्कि दांत और मसूड़ों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसकी कोमल पत्तियां गांवों में आज भी घरेलू उपाय के रूप में इस्तेमाल की जाती हैं. कई लोग सुबह अमरूद की पत्तियों को चबाते हैं. माना जाता है कि इससे मुंह की बदबू कम करने में मदद मिलती है और दांत साफ बने रहते हैं. इसके अलावा अमरूद की पत्तियां मसूड़ों को मजबूत बनाने में भी सहायक मानी जाती हैं. आयुर्वेद में भी इसे लाभकारी बताया गया है. हालांकि किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी होता है. नियमित रूप से साफ-सफाई और सही खानपान के साथ अमरूद का उपयोग दांतों और मसूड़ों की देखभाल में मददगार साबित हो सकता है. आज के समय में बढ़ता वजन और मोटापा बड़ी समस्या बन गया है. ऐसे में अमरूद को वजन नियंत्रित करने के लिए अच्छा फल माना जाता है. इसमें कैलोरी कम होती है, जबकि फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. यही वजह है कि अमरूद खाने के बाद पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और बार-बार भूख नहीं लगती है. जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, वे अपनी डाइट में अमरूद शामिल कर सकते हैं. यह शरीर को जरूरी पोषण भी देता है और ज्यादा खाने की आदत को कम करने में मदद करता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी संतुलित मात्रा में अमरूद खाने की सलाह देते हैं. अमरूद पेट और पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद फल माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पेट को साफ रखने में मदद करता है. जिन लोगों को कब्ज की समस्या रहती है, उनके लिए पका अमरूद काफी लाभकारी माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह खाली पेट अमरूद खाने से पाचन शक्ति बेहतर होती है और पेट हल्का महसूस होता है. अमरूद सिर्फ फल ही नहीं, इसकी पत्तियां भी औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती है. गांवों में आज भी लोग पेट दर्द, गैस और अपच जैसी समस्याओं में अमरूद की पत्तियों का काढ़ा इस्तेमाल करते हैं. नियमित रूप से अमरूद का सेवन करने से पेट स्वस्थ रहता है और शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं. जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि अमरूद स्वास्थ्य के साथ-साथ त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें पाए जाने वाले विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद करते हैं. कई लोग अमरूद की पत्तियों को पीसकर चेहरे पर लगाते हैं, जिससे त्वचा साफ और ताजगी भरी महसूस होती है. हालांकि किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी होता है. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर अमरूद त्वचा की देखभाल में मददगार साबित हो सकता है. अमरूद को हृदय स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद फल माना जाता है. इसमें कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं. इसके अलावा यह रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी सहायक माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार नियमित मात्रा में अमरूद खाने से हृदय को स्वस्थ रखने में

नींबू पानी बनाकर कितनी देर में पी लेना चाहिए? अगर रातभर रखेंगे तो क्या होगा, जानें काम की बात

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Last Updated:May 11, 2026, 21:22 IST Lemon Water Health Benefits: नींबू पानी ताजा बनाकर पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, लंबे समय तक रखने पर इसका स्वाद और विटामिन C कम हो सकता है. गर्मियों में बाहर रखने से बैक्टीरिया बढ़ने का खतरा भी रहता है. अगर जरूरत हो, तो इसे फ्रिज में 12 से 24 घंटे तक स्टोर किया जा सकता है. नींबू पानी बनाने के बाद जल्द से जल्द उसे पी लेना चाहिए. Lemon Water Storage Tips: गर्मियों में नींबू पानी पीना सभी को अच्छा लगता है. घर पर आसानी से नींबू पानी बनाया जा सकता है और यह सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है. यह शरीर को ताजगी देने के साथ हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है. कई लोग सुबह एक साथ ज्यादा मात्रा में नींबू पानी बनाकर रख लेते हैं और दिनभर थोड़ा-थोड़ा पीते रहते हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि नींबू पानी बनाकर कितनी देर के अंदर पी लेना चाहिए? और अगर इसे रातभर रखा जाए तो क्या इसका स्वाद और गुण बदल जाते हैं? इस बारे में डाइटिशियन से जरूरी बात जान लेते हैं, ताकि आपको ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया ताजा बना नींबू पानी सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. नींबू में मौजूद विटामिन C और दूसरे पोषक तत्व हवा, गर्मी और रोशनी के संपर्क में आने पर धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि नींबू पानी बनाने के तुरंत बाद या 1-2 घंटे के अंदर इसे पी लिया जाए. लंबे समय तक खुला रखने पर इसका स्वाद भी बदल सकता है. अगर नींबू पानी को कमरे में कई घंटों तक रखा जाए, तो उसमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ सकता है. चीनी, नमक या अन्य चीजें मिलाने के बाद ड्रिंक जल्दी खराब हो सकता है. ऐसे में लंबे समय तक रखा हुआ नींबू पानी पेट खराब होने या फूड कंटामिनेशन का कारण बन सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक अगर नींबू पानी को साफ बोतल या एयरटाइट कंटेनर में फ्रिज में रखा जाए, तो इसे 12 से 24 घंटे के अंदर इस्तेमाल करना सुरक्षित माना जाता है. हालांकि फ्रिज में रखने के बाद भी समय के साथ इसका स्वाद और पोषण धीरे-धीरे कम होने लगता है. रातभर रखा नींबू पानी जरूरी नहीं कि पूरी तरह खराब हो जाए, लेकिन वह ताजे नींबू पानी जितना फायदेमंद नहीं माना जाता. नींबू पानी में अगर पुदीना, फल या काला नमक जैसी चीजें डाली गई हों, तो उसका स्वाद और जल्दी बदल सकता है. कई बार लंबे समय तक रखने से इसमें हल्की कड़वाहट भी आ सकती है. इसलिए इसे बनाकर जल्द से जल्द पीना चाहिए. डाइटिशियन की मानें तो लंबे समय तक नींबू पानी हमेशा कांच या स्टील के साफ कंटेनर में रखना चाहिए. अगर जरूरत हो तो इसे कुछ घंटों के लिए फ्रिज में रखा जा सकता है, लेकिन रातभर या बहुत लंबे समय तक स्टोर करने से इसका स्वाद और पोषण कम हो सकता है. गर्मियों में साफ-सफाई और सही स्टोरेज का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि यह हेल्दी ड्रिंक नुकसान की वजह न बने. नींबू पानी बहुत लाभकारी होता है और गर्मियों में इसे पीने से शरीर को कई गजब के फायदे मिल सकते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

अन्नाद्रमुक में एक और विभाजन? विधायक दल के नेता के लिए अधिकांश विधायकों ने वेलुमणि का समर्थन किया, 17 ने ईपीएस का समर्थन किया | भारत समाचार

PBKS vs DC IPL 2026 Live Streaming Details (AP)

आखरी अपडेट:11 मई, 2026, 20:21 IST अन्नाद्रमुक को एक और विभाजन का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि सीवी शनमुगम खेमा एसपी वेलुमणि और विजय की टीवीके को समर्थन दे रहा है, जबकि 17 विधायकों ने दलबदल विरोधी कानून का मुद्दा उठाते हुए एडप्पादी के पलानीस्वामी का समर्थन किया है। सीवी शनमुगम और एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK), पहले से ही तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अपनी करारी हार से जूझ रही है, अब एक और विभाजन की ओर बढ़ती दिख रही है। सीवी शनमुगम खेमे के लगभग 30 एआईएडीएमके विधायकों ने कथित तौर पर प्रोटेम स्पीकर को एक याचिका सौंपी है, जिसमें एसपी वेलुमणि को विधायक दल के नेता के रूप में मान्यता देने की मांग की गई है, जबकि 17 विधायकों ने एक अलग पत्र के माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी का समर्थन किया है। समझा जाता है कि शनमुगम खेमा विजय की तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) सरकार को समर्थन देने के पक्ष में है। यदि शनमुगम अन्नाद्रमुक के दो-तिहाई विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब हो जाते हैं, तो उनका गुट “असली” अन्नाद्रमुक के रूप में वैधता का दावा कर सकता है। वैकल्पिक रूप से, यदि समूह टीवीके के साथ विलय का निर्णय लेता है, तो विधायक दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत अपनी विधानसभा सदस्यता बरकरार रखने में सक्षम हो सकते हैं। सोमवार को 17वीं तमिलनाडु विधानसभा के शपथ ग्रहण समारोह में नवनिर्वाचित अन्नाद्रमुक विधायकों के दो अलग-अलग समूहों में पहुंचने के बाद पार्टी के भीतर बढ़ती दरार की अटकलें तेज हो गईं। पूर्व राज्य मंत्रियों, केपी मुनुसामी और थलवई एन सुंदरम सहित मनोनीत विधायकों का एक समूह, आधिकारिक तौर पर विधायक के रूप में शपथ लेने के लिए पार्टी महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी के साथ विधानसभा में आया। इसके तुरंत बाद पूर्व राज्य मंत्री एसपी वेलुमणि और पूर्व मंत्री डॉ. सी विजयबास्कर के नेतृत्व में एक और समूह पहुंचा। पूर्व मंत्री सीवी षणमुगम समय पर नहीं पहुंच सके। 23 अप्रैल के विधानसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद, केवल 47 सीटें जीतने में कामयाब होने के बाद, एआईएडीएमके के भीतर बदलाव की मांग को लेकर हंगामा मच गया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया अन्नाद्रमुक में एक और विभाजन? विधायक दल के नेता के लिए अधिकांश विधायकों ने वेलुमणि का समर्थन किया, 17 ने ईपीएस का समर्थन किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)एआईएडीएमके विभाजन(टी)एआईएडीएमके संकट(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)सीवी शनमुगम(टी)एसपी वेलुमणि(टी)एडप्पादी के पलानीस्वामी(टी)विजय टीवीके पार्टी(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम

गर्मी में बाल ज्यादा क्यों झड़ते हैं? क्या होती है हेयर फॉल की बड़ी वजह, एक्सपर्ट से समझ लीजिए

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Last Updated:May 11, 2026, 20:05 IST Summer Hair Loss Causes: गर्मियों में बाल झड़ने की समस्या बढ़ जाती है. इसकी वजह तेज धूप, पसीना, स्कैल्प में गंदगी और शरीर में पानी की कमी हो सकती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार गलत हेयर केयर, पोषण की कमी और तनाव भी हेयर फॉल बढ़ा सकते हैं. सही डाइट, स्कैल्प की सफाई और अच्छी लाइफस्टाइल से इस समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है. गर्मियों में पसीना और स्कैल्प की गंदगी की वजह से हेयर फॉल बढ़ जाता है. How Summer Affects Hair Health: गर्मी का मौसम अपने साथ कई समस्याएं लेकर आता है. गर्मी में कई लोग हेयर फॉल बढ़ने की शिकायत करते हैं. इस मौसम में नहाते समय, कंघी करते वक्त या तकिए पर टूटे बाल दिखाई देना आम बात है. अक्सर लोग इसे केवल मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. हेयर एक्सपर्ट्स के अनुसार गर्मी में बाल झड़ने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. तेज धूप, पसीना, धूल, स्कैल्प में ऑयल बढ़ना और गलत हेयर केयर रूटीन बालों को कमजोर बना सकते हैं. यूपी के कानपुर स्थित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. युगल राजपूत ने News18 को बताया गर्मियों में ज्यादा पसीना आने से स्कैल्प पर गंदगी और ऑयल जमा होने लगता है. इससे बालों की जड़ों पर असर पड़ता है और हेयर फॉल बढ़ सकता है. अगर स्कैल्प लंबे समय तक साफ न रखा जाए, तो डैंड्रफ, खुजली और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं, जो बाल झड़ने की बड़ी वजह बनती हैं. कई लोग गर्मियों में बार-बार बाल धोते हैं, लेकिन हार्श शैम्पू या गलत प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी बालों को रूखा और कमजोर बना सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक तेज धूप और गर्म हवाएं भी बालों की सेहत पर असर डालती हैं. लंबे समय तक सूरज की UV किरणों के संपर्क में रहने से बालों की नमी कम होने लगती है, जिससे वे ड्राई और बेजान हो जाते हैं. जब बालों में नमी कम होती है, तो वे जल्दी टूटने लगते हैं. खासकर जिन लोगों के बाल पहले से ड्राई या केमिकल ट्रीटेड होते हैं, उनमें यह समस्या ज्यादा देखने को मिल सकती है. इसके अलावा शरीर में पानी की कमी भी हेयर फॉल की एक बड़ी वजह मानी जाती है. गर्मियों में शरीर से पसीने के जरिए ज्यादा पानी निकलता है. अगर पर्याप्त पानी और पोषण न मिले, तो इसका असर बालों की जड़ों पर भी पड़ सकता है. आयरन, प्रोटीन, बायोटिन और विटामिन D की कमी बालों को कमजोर बना सकती है. डॉक्टर की मानें तो तनाव और खराब लाइफस्टाइल भी बाल झड़ने की समस्या को बढ़ा सकते हैं. नींद पूरी न होना, ज्यादा स्ट्रेस लेना और अनियमित खानपान बालों की ग्रोथ साइकल को प्रभावित कर सकता है. कई बार लोग गर्मियों में हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स और हीट टूल्स का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिससे बाल और ज्यादा कमजोर हो सकते हैं. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि गर्मियों में माइल्ड शैम्पू का इस्तेमाल करें और जरूरत से ज्यादा केमिकल वाले प्रोडक्ट्स से बचें. स्कैल्प को साफ रखना, हल्का हेयर ऑयल लगाना और धूप में निकलते समय बालों को कवर करना फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा पर्याप्त पानी पीना और प्रोटीन व विटामिन से भरपूर डाइट लेना भी जरूरी है. डॉक्टर का साफ कहना है कि अगर बाल जरूरत से ज्यादा झड़ रहे हों, स्कैल्प में लगातार खुजली हो रही हो या बाल पतले होते दिखाई दें, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी माना जाता है. कई बार हेयर फॉल के पीछे हार्मोनल बदलाव, थायरॉइड या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं. समय रहते बालों और स्कैल्प की सही देखभाल करना हेल्दी और मजबूत बाल बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी माना जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

‘तृणमूल पूरी तरह से नष्ट’: बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी नेताओं ने I-PAC पर की फायरिंग | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:11 मई, 2026, 19:58 IST निलंबित टीएमसी नेता रिजु दत्ता ने भी I-PAC पर पार्टी को प्रभावी ढंग से चलाने और आंतरिक निर्णयों को प्रभावित करने का आरोप लगाया। वरिष्ठ टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि I-PAC ने पार्टी की आंतरिक संरचना और चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया है। (फाइल फोटो) 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के हाथों करारी हार का सामना करने के बाद, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर आंतरिक दोष तेजी से फोकस में आ गए हैं, नेताओं का एक वर्ग पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए खुलेआम राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC को दोषी ठहरा रहा है। वरिष्ठ टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने संगठन पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि I-PAC ने पार्टी की आंतरिक संरचना और चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया है। बनर्जी ने कोलकाता स्थित एक समाचार आउटलेट से कहा, “आई-पीएसी ने तृणमूल कांग्रेस संगठन को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। उन्होंने संभावित उम्मीदवारों के बीच झगड़े भड़काए। उन्होंने हर विधानसभा क्षेत्र में कई लोगों से कहा कि आपकी प्रतिक्रिया सबसे अच्छी है, आपको ही टिकट मिलेगा। जिन लोगों को टिकट नहीं मिला, उन्होंने गुस्से में आकर भाजपा की मदद की।” उन्होंने कंसल्टेंसी फर्म पर अत्यधिक निर्भरता के लिए साथी पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी की भी आलोचना की। उनके अनुसार, इस तरह की निर्भरता “पार्टी के भीतर स्वीकार नहीं की गई” और इससे आंतरिक असंतोष पैदा हुआ। आलोचना को बढ़ाते हुए, निलंबित टीएमसी नेता रिजु दत्ता ने भी I-PAC पर पार्टी को प्रभावी ढंग से चलाने और आंतरिक निर्णयों को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने “सदस्यों को धमकाया” और पार्टी के साथ उसके जुड़ाव से वित्तीय लाभ उठाया, जबकि टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से उन्होंने “तोड़फोड़” की जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया। #घड़ी | कोलकाता, पश्चिम बंगाल: निलंबित टीएमसी नेता रिजु दत्ता का कहना है, “…दीदी (ममता बनर्जी) और अभिषेक बनर्जी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि कैसे एक बाहरी संगठन (आई-पीएसी) पूरी पार्टी पर कब्जा करने में कामयाब रहा… जब टीएमसी नेताओं के घरों पर ईडी की छापेमारी हुई, तो दीदी… pic.twitter.com/FeHjEP1bwc– एएनआई (@ANI) 11 मई 2026 उन्होंने कहा, ”दीदी (ममता बनर्जी) और अभिषेक बनर्जी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि कैसे एक बाहरी संगठन (आई-पीएसी) पूरी पार्टी पर कब्जा करने में कामयाब रहा,” उन्होंने दावा किया कि संगठन ने पार्टी ढांचे पर ”कब्जा” कर लिया है। राजगंज के पूर्व विधायक खगेश्वर रॉय और अलीपुरद्वार के पूर्व विधायक सौरव चक्रवर्ती सहित अन्य नेताओं ने भी इसी तरह की चिंताएं जताई हैं, जिसमें उम्मीदवारों के चयन में I-PAC द्वारा हस्तक्षेप करने और जमीनी स्तर की संगठनात्मक ताकत को कमजोर करने का आरोप लगाया गया है। यह विवाद टीएमसी के लिए एक महत्वपूर्ण चुनावी झटके की पृष्ठभूमि में आया है। 294 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर प्रचंड जीत हासिल की, जबकि टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई। I-PAC के साथ टीएमसी का जुड़ाव 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले शुरू हुआ, जब फर्म ने अभियान रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे पार्टी को एक मजबूत जनादेश हासिल करने में मदद मिली। इसने 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन में भी योगदान दिया। हालाँकि, हालिया हार के बाद इसकी भूमिका तेजी से जांच के दायरे में आ गई है। I-PAC, एक राजनीतिक परामर्शदाता कंपनी है जो पूरे भारत में हाई-प्रोफ़ाइल चुनाव अभियानों के प्रबंधन के लिए जानी जाती है, जिसने वर्षों से कई प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ काम किया है। इसके संस्थापकों में से एक, चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर, भाजपा और कांग्रेस सहित कई अभियानों से जुड़े रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद औपचारिक रूप से संगठन से बाहर निकल गए, और अपनी राजनीतिक यात्रा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए राजनीतिक परामर्श से दूर हो गए। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : पश्चिम बंगाल, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया ‘तृणमूल पूरी तरह नष्ट हो गई’: बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी नेताओं ने आई-पीएसी पर हमला बोला अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

हंतावायरस के संपर्क में आए 17 यात्री अमेरिका लाए गए:42 दिन क्वारंटीन में भेजा; इस वायरस से किडनी फेल होने का खतरा

हंतावायरस के संपर्क में आए 17 यात्री अमेरिका लाए गए:42 दिन क्वारंटीन में भेजा; इस वायरस से किडनी फेल होने का खतरा

हंता वायरस के संपर्क में आए 17 अमेरिकी यात्रियों को अमेरिका के नेब्रास्का मेडिकल सेंटर लाया गया है। यहां उन्हें 42 दिनों तक निगरानी और क्वारंटीन में रखा जाएगा। अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग (HHS) के मुताबिक, इन सभी यात्रियों को अमेरिकी सरकार के स्पेशल विमान से वापस लाया गया। ये सभी यात्री ‘MV होंडियस’ नाम की उस क्रूज शिप से लौटे हैं, जहां वायरस के मामले सामने आए थे। यह जहाज स्पेन के कैनरी आइलैंड्स में रुका था। इसके बाद एक यात्री में हंता वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि दूसरे में हल्के लक्षण पाए गए हैं। एहतियात के तौर पर दोनों को स्पेशल सिक्योरिटी सिस्टम में लाया गया। डॉक्टर अब बाकी यात्रियों की जांच करेंगे कि उनमें संक्रमण है या नहीं। अगर कोई बीमार पाया जाता है तो उसका इलाज किया जाएगा। जो लोग स्वस्थ होंगे, उन्हें घर भेजा जा सकता है, लेकिन उनकी निगरानी जारी रहेगी। हंता वायरस के लक्षण दिखने में 8 हफ्ते तक लग सकते हैं हंता वायरस से इंसानों की किडनी फेल होने का खतरा होता है। कई मामलों में मरीज को तेज बुखार, शरीर दर्द, सांस लेने में दिक्कत और कमजोरी होने लगती है। हालत बिगड़ने पर फेफड़ों में पानी भर सकता है और जान का खतरा भी हो सकता है। इंसानों में हंता वायरस के लक्षण दिखने में 1 से 8 हफ्ते लग जाते हैं, लेकिन इसके बाद मरीज की हालत तेजी से बिगड़ने लगती है। WHO के मुताबिक, हंता वायरस की चपेट में आने वालों में से 35-40% की मौत 6 हफ्तों के अंदर हो जाती है। जानवरों से फैलता है यह वायरस हंता वायरस एक खतरनाक वायरस है, जो ज्यादातर चूहों और गिलहरियों जैसे जानवरों से फैलता है। यह उनके मल, पेशाब और लार में पाया जाता है। इसका नाम दक्षिण कोरिया की “हंटन” नदी के नाम पर रखा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हंता वायरस की “एंडीज” नाम की एक खास किस्म इंसान से इंसान में भी फैल सकती है। यह संक्रमित व्यक्ति की लार, थूक, साथ खाना खाने या एक ही बिस्तर पर सोने से फैल सकता है। मरीज की देखभाल करने वालों को ज्यादा खतरा रहता है। इस वायरस का पहला मामला 1993 में अमेरिका में सामने आया था। उस समय एक अमेरिकी दंपत्ति की मौत हुई थी। जांच में उनके घर के आसपास चूहों के बिल और वायरस के निशान मिले थे। अमेरिका के नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ हेल्थ के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल हंता वायरस के करीब 1.5 लाख मामले सामने आते हैं, जिनमें से ज्यादातर यूरोप और एशिया के होते हैं। इनमें से आधे से ज्यादा मामले चीन से होते हैं। 2018 में अर्जेंटीना की एक बर्थडे पार्टी में यह वायरस 34 लोगों में फैल गया था, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी। संक्रमित इंसान के करीबी संपर्क से हंता वायरस होता है अधिकारियों के मुताबिक, हंतावायरस आसानी से नहीं फैलता। यह केवल उस व्यक्ति के बहुत करीबी संपर्क से फैल सकता है जिसमें लक्षण दिखाई दे रहे हों। यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के कार्यवाहक निदेशक जय भट्टाचार्य ने कहा कि पहले यह देखा जाएगा कि कौन-कौन लोग संक्रमित व्यक्ति के करीब थे। उसी हिसाब से उन्हें कम, मध्यम या ज्यादा खतरे वाली श्रेणी में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी यात्री का संक्रमित व्यक्ति से करीबी संपर्क नहीं था, तो उसे कम खतरे वाला माना जाएगा। हालांकि, यह वायरस कोविड-19 की तरह तेजी से नहीं फैलता। ज्यादातर मामलों में यह संक्रमित चूहों के मल, पेशाब या लार के संपर्क में आने से फैलता है। इंसान से इंसान में फैलने के मामले बहुत कम देखे गए हैं। हंता वायरस का अभी कोई इलाज नहीं हंता वायरस का अभी कोई खास इलाज या वैक्सीन मौजूद नहीं है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों के हिसाब से इलाज करते हैं ताकि उसकी हालत ज्यादा खराब न हो। अगर मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है, तो उसे ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की मदद दी जाती है। शरीर में पानी और ब्लड प्रेशर संतुलित रखने के लिए दवाएं और फ्लूइड दिए जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जल्दी पहचान और समय पर इलाज से मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए बुखार, सांस लेने में परेशानी या कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है। कुछ लोगों को घर भेजा जा सकता है स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती जांच के बाद कुछ यात्रियों को घर जाने की इजाजत दी जा सकती है। हालांकि, उन्हें सुरक्षित तरीके से भेजा जाएगा ताकि रास्ते में किसी और को खतरा न हो। घर पहुंचने के बाद भी लोकल स्वास्थ्य विभाग और सीडीसी उनकी लगातार निगरानी करेंगे। CDC के मुताबिक, वायरस के संपर्क में आने के बाद 42 दिनों तक निगरानी जरूरी होती है। अगर इस दौरान किसी को बुखार या दूसरे लक्षण दिखते हैं, तो उसे तुरंत खुद को अलग करना होगा। खास मेडिकल सेंटर में रखा गया नेब्रास्का मेडिकल सेंटर में अमेरिका की खास नेशनल क्वारंटीन यूनिट है। यह अमेरिका की इकलौती फेडरल फंडेड क्वारंटीन सुविधा है। यहां के कमरों में खास नेगेटिव एयर प्रेशर सिस्टम लगाया गया है, जिससे वायरस हवा में फैल नहीं पाता। अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों को स्ट्रेचर पर नहीं लाया गया। वे खुद विमान से उतरकर गाड़ियों में बैठे और सीधे अपने क्वारंटीन कमरों में पहुंचे। डॉक्टर माइकल वाडमैन ने बताया कि यहां रहने की व्यवस्था होटल जैसी है। लोगों को कमरे में खाना मिलेगा, वे हल्की एक्सरसाइज कर सकेंगे और रोजाना उनकी जांच होगी। अगर कोई यात्री बीमार होता है, तो उसे अस्पताल की बायोकंटेनमेंट यूनिट में शिफ्ट किया जाएगा, जहां खतरनाक संक्रामक बीमारियों का इलाज किया जाता है। भारत में आ चुके हैं हंता वायरस के मामले 2007 में आंध्र प्रदेश में एक 46 साल के व्यक्ति को यह संक्रमण हुआ था। नेचर जर्नल में प्रकाशित आर्टिकल के मुताबिक 2008 में चूहे और सांप पकड़ने वाले 28 लोगों में संक्रमण मिला। सबसे हालिया केस 2016 का है। इंडियन जर्नल ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन के मुताबिक, मुंबई में हंता वायरस से एक महिला की मौत हुई थी। महिला को डिलिवरी के 8 दिन बाद पेट में तेज दर्द,

कटरीना को विक्की और बेटे विहान ने दिया खास गिफ्ट:एक्ट्रेस ने मां बनने के बाद सेलिब्रेट किया पहला मदर्स डे

कटरीना को विक्की और बेटे विहान ने दिया खास गिफ्ट:एक्ट्रेस ने मां बनने के बाद सेलिब्रेट किया पहला मदर्स डे

बॉलीवुड एक्ट्रेस कटरीना कैफ के मां बनने के बाद उन्होंने अपना पहला मदर्स डे सेलिब्रेट किया है। इस मौके पर उनके पति विक्की कौशल और बेटे विहान ने उन्हें खास सरप्राइज दिया। कटरीना ने सोशल मीडिया पर इस सेलिब्रेशन की कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें नन्हे विहान की भी झलक देखने को मिली। विक्की और विहान का प्यारा सरप्राइज कटरीना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस खास दिन की कुछ झलकियां शेयर की हैं। पहली तस्वीर में एक हाथ से लिखा हुआ कार्ड और गुलाबी गुलाबों का खूबसूरत गुलदस्ता नजर आ रहा है। कार्ड पर लिखा है, “हैप्पी फर्स्ट मदर्स डे मेरा प्यार, बहुत सारा प्यार- विहान और पापा कौशल।” विक्की और विहान की तरफ से मिले इस प्यार को देखकर कटरीना काफी इमोशनल नजर आईं। नन्ही उंगलियों की झलक दूसरी तस्वीर में कटरीना ने अपने बेटे विहान की एक छोटी सी झलक दिखाई है। फोटो में मशहूर बच्चों की किताब ‘द वेरी हंग्री कैटरपिलर’ दिख रही है। नन्हे विहान ने अपनी छोटी उंगलियों से उस किताब को थाम रखा है। हालांकि, कपल ने अभी तक बेटे का चेहरा पूरी तरह से दुनिया को नहीं दिखाया है। अवॉर्ड शो से शुरू हुई थी लव स्टोरी विक्की और कटरीना की पहली मुलाकात एक अवॉर्ड शो में हुई थी, जहां विक्की होस्टिंग कर रहे थे। वहां मजाक-मजाक में शुरू हुई बात धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। दोनों ने साल 2021 में राजस्थान के सवाई माधोपुर के सिक्स सेंस फोर्ट बरवारा में शाही अंदाज में शादी की थी। शादी के 4 साल बाद 7 नवंबर 2025 को उनके बेटे विहान का जन्म हुआ।