कटरीना को विक्की और बेटे विहान ने दिया खास गिफ्ट:एक्ट्रेस ने मां बनने के बाद सेलिब्रेट किया पहला मदर्स डे

बॉलीवुड एक्ट्रेस कटरीना कैफ के मां बनने के बाद उन्होंने अपना पहला मदर्स डे सेलिब्रेट किया है। इस मौके पर उनके पति विक्की कौशल और बेटे विहान ने उन्हें खास सरप्राइज दिया। कटरीना ने सोशल मीडिया पर इस सेलिब्रेशन की कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें नन्हे विहान की भी झलक देखने को मिली। विक्की और विहान का प्यारा सरप्राइज कटरीना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस खास दिन की कुछ झलकियां शेयर की हैं। पहली तस्वीर में एक हाथ से लिखा हुआ कार्ड और गुलाबी गुलाबों का खूबसूरत गुलदस्ता नजर आ रहा है। कार्ड पर लिखा है, “हैप्पी फर्स्ट मदर्स डे मेरा प्यार, बहुत सारा प्यार- विहान और पापा कौशल।” विक्की और विहान की तरफ से मिले इस प्यार को देखकर कटरीना काफी इमोशनल नजर आईं। नन्ही उंगलियों की झलक दूसरी तस्वीर में कटरीना ने अपने बेटे विहान की एक छोटी सी झलक दिखाई है। फोटो में मशहूर बच्चों की किताब ‘द वेरी हंग्री कैटरपिलर’ दिख रही है। नन्हे विहान ने अपनी छोटी उंगलियों से उस किताब को थाम रखा है। हालांकि, कपल ने अभी तक बेटे का चेहरा पूरी तरह से दुनिया को नहीं दिखाया है। अवॉर्ड शो से शुरू हुई थी लव स्टोरी विक्की और कटरीना की पहली मुलाकात एक अवॉर्ड शो में हुई थी, जहां विक्की होस्टिंग कर रहे थे। वहां मजाक-मजाक में शुरू हुई बात धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। दोनों ने साल 2021 में राजस्थान के सवाई माधोपुर के सिक्स सेंस फोर्ट बरवारा में शाही अंदाज में शादी की थी। शादी के 4 साल बाद 7 नवंबर 2025 को उनके बेटे विहान का जन्म हुआ।
क्या बच्चे भी एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं ले सकते हैं? इस बारे में क्या है एक्सपर्ट की राय

Last Updated:May 11, 2026, 18:02 IST Anxiety and Depression in Kids: आजकल बच्चों में एंजायटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार जरूरत पड़ने पर बच्चों को एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं दी जा सकती हैं. हालांकि यह फैसला केवल डॉक्टर ही कर सकते हैं. कॉग्निटिव थेरेपी, फैमिली सपोर्ट और हेल्दी लाइफस्टाइल से बच्चों की मेंटल हेल्थ को सुधारा जा सकता है. बच्चों में आजकल मेंटल हेल्थ से जुड़ी प्रॉब्लम्स बढ़ रही हैं. Anxiety and Depression Drugs: आज के जमाने में मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं. छोटे बच्चों से लेकर टीनएजर्स, युवा, मिडिल एज के लोग और बुजुर्ग सभी मानसिक समस्याओं से परेशान हैं. पढ़ाई का दबाव, सोशल मीडिया, अकेलापन, पारिवारिक तनाव और बदलती लाइफस्टाइल की वजह से कई बच्चे एंजायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं की चपेट में आ जाते हैं. ऐसे में माता-पिता के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या बच्चों को भी एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं दी जा सकती हैं? चलिए इस बारे में साइकेट्रिस्ट से हकीकत जानने की कोशिश करते हैं. नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेस्ट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया बच्चों में एंजायटी और डिप्रेशन का इलाज केवल दवाओं पर निर्भर नहीं होता है. ज्यादातर मामलों में सबसे पहले काउंसलिंग, बिहेवियर थेरेपी और परिवार का सहयोग जरूरी माना जाता है. अगर समस्या हल्की हो, तो थेरेपी और लाइफस्टाइल में बदलाव करने की सलाह दी जाती है. अगर बच्चा लंबे समय तक उदास रहे, पढ़ाई और रोजमर्रा की गतिविधियों में रुचि कम हो जाए, नींद और भूख प्रभावित होने लगे या आत्महत्या जैसे विचार आने लगें, तब दवाओं की जरूरत पड़ सकती है. एक्सपर्ट के अनुसार कुछ एंटीडिप्रेसेंट और एंटी-एंजायटी दवाएं बच्चों और किशोरों के लिए मेडिकल गाइडलाइन के तहत इस्तेमाल की जाती हैं. हर दवा हर बच्चे के लिए सुरक्षित नहीं होती. डॉक्टर बच्चे की उम्र, लक्षणों की गंभीरता, मेडिकल हिस्ट्री और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर ही दवा तय करते हैं. यही वजह है कि बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएं देना खतरनाक माना जाता है. इन दवाओं के कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं. कुछ मामलों में शुरुआती दिनों में आत्मघाती विचार बढ़ने का खतरा भी देखा गया है, इसलिए दवा शुरू होने के बाद बच्चे की नियमित निगरानी बेहद जरूरी होती है. माता-पिता को बच्चे के व्यवहार में आने वाले किसी भी असामान्य बदलाव पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. डॉक्टर का मानना है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर पैरेंट्स को भी जागरूक रहना चाहिए. कई बार माता-पिता बच्चों की चिंता, डर या उदासी को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर बच्चा लंबे समय तक चुप रहने लगे, दोस्तों से दूरी बनाने लगे, पढ़ाई में गिरावट आए या व्यवहार अचानक बदल जाए, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए. स्वस्थ दिनचर्या भी बच्चों की मानसिक सेहत को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, फिजिकल एक्टिविटी, परिवार के साथ समय और स्क्रीन टाइम कम करना एंजायटी और तनाव को कम करने में मदद कर सकता है. बच्चों से खुलकर बातचीत करना और उनकी भावनाओं को समझना भी बेहद जरूरी है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
आम जितना खाना है खाइए लेकिन इन 5 चीजों के साथ भूलकर भी न खाएं, शरीर में अग्निबंध बनने का खतरा

Last Updated:May 11, 2026, 17:51 IST Foods to avoid with mango: फलों का राजा आम किसे पसंद नहीं. गर्मी बढ़ते ही बाजार में तरह-तरह के आम गुलजार होने लगती है. आम को लोग बड़े चाव से खाते हैं. लेकिन कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें आम के साथ नहीं खाना चाहिए. आयुर्वेद के हिसाब से आम और कुछ चीजें विरूद्ध आहार है. अगर इन दोनों चीजों को साथ में खाया जाए तो शरीर में अग्निबंध का खतरा होता है. आम के साथ क्या-क्या नहीं खाना चाहिए. यह मौसम फलों के राजा आम का है. बाजार में हर तरफ तरह-तरह के आम भर गए हैं. जब आम ज्यादा हो जाता है तो लोग आम के साथ कई अन्य चीजों का सेवन भी करने लगते हैं. लेकिन आयुर्वेद में आम के साथ कुछ चीजों का सेवन एकदम वर्जित है. आयुर्वेद में जिन चीजों को विरूद्ध आहार कहा गया है उन्हें साथ में खाने की मनाही है. यहां ऐसी 5 चीजें हैं जिनका संयोजन सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है. इन 5 चीजों के साथ कभी आम न खाएं. आम और दही – आयुर्वेद में आम और दही का विरुद्ध आहार माना गया है. आम की तासीर गर्म होती है जबकि दही की तासीर ठंडी होती है. इसलिए जब गर्म और ठंडी तासीर वाली चीजें एक साथ मिलती हैं तो यह शरीर की अग्नि यानी पाचन तंत्र को मंद कर देती है. आयुर्वेद के अनुसार ऐसा करने से शरीर में टॉक्सिन्स बनता है. वैज्ञानिक दृष्टि से भी आम और दही का मिश्रण शरीर में अत्यधिक गर्मी और पाचन असंतुलन पैदा कर सकता है. इससे त्वचा संबंधी समस्याएं जैसे कि मुंहासे, एक्जिमा या सोरायसिस हो सकता है. वही इससे पाचन धीमा होने लगता है और पेट फूलना और एसिडिटी की समस्या भी हो सकती है. आम और दूध वाली चाय या कॉफी –आयुर्वेद के अनुसार आम भारी या गरिष्ठ फल है. अगर इसे चाय के साथ पिएंगे तो इससे पाचन पर सीधा असर होगा. चाय या कॉफी जैसे कैफीन युक्त पेय पदार्थ शरीर में पित्त दोष को बढ़ाते हैं. इन दोनों का साथ सेवन शरीर में असंतुलन पैदा करता है जिससे घबराहट और सीने में जलन महसूस हो सकती है.आम में फ्रुक्टोज अधिक होता है और कैफीन के साथ मिलने पर यह मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है. चाय या कॉफी का सेवन आम खाने के तुरंत बाद करने से पाचन एंजाइम्स का स्राव रुक सकता है जिससे पेट में ऐंठन और बेचैनी हो सकती है. आम और करेला-आम और करेला भी विरूद्ध आहार माना गया है. एक तरफ आम मीठा और भारी होता है जबकि करेला कड़वा और हल्का होता है. इन विपरीत गुणों के कारण यह पेट में गैस और अपच का कारण बनता है. इसी तरह तीखे मसालों के साथ आम का सेवन रक्त की अशुद्धि का कारण बन सकता है. आम के तुरंत बाद करेला या मिर्च-मसालेदार भोजन करने से मतली और उल्टी की समस्या हो सकती है. आम का शुगर और मिर्च का कैप्साइसिन जब आपस में मिलते हैं तो यह गैस्ट्रिक म्यूकोसा में जलन पैदा करते हैं, जिससे पाचन मार्ग में सूजन आ सकती है. आम और कोल्ड ड्रिंक या सोडा- आयुर्वेद में आम खाने के बाद अत्यधिक ठंडा और गैस युक्त पेय पीना जठराग्नि को पूरी तरह बुझा देता है. यह शरीर के वात्त और पित्त दोषों को बढ़ा देता है. इससे मेटाबॉलिक वेस्ट को शरीर से बाहर निकलने में बाधा पहुंचती है. यानी इससे कब्ज हो सकती है. आम में पहले से ही शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है. कोल्ड ड्रिंक में भी कृत्रिम शुगर और कार्बन डाइऑक्साइड होती है. यह घातक संयोजन ब्लड शुगर लेवल को अचानक बहुत ज्यादा बढ़ा सकता है. यह डायबिटीज के रोगियों के लिए खतरनाक है. यह पेट में भारीपन और तीव्र गैस का कारण भी बनता है. आम और पानी-आयुर्वेद के अनुसार फलों को खाने के बाद तुरंत पानी पीना वर्जित है. आम के मामले में यह जठराग्नि को धीमा कर देता है जिससे आम पेट में पचने के बजाय ‘सड़ने’ लगता है, जो जोड़ों के दर्द और वात रोगों का कारण बन सकता है. आम में काफी मात्रा में फाइबर और पानी होता है. ऊपर से अतिरिक्त पानी पीने से पेट के एसिड का प्रभाव कम हो जाता है. इससे पाचन प्रक्रिया बाधित होती है और बैक्टीरिया को पनपने का मौका मिलता है, जिससे दस्त, पेट दर्द या गैस्ट्रोएंटेराइटिस होने की संभावना बढ़ जाती है. डिस्क्लेमर : यह स्टोरी सामान्य ज्ञान और इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है. न्यूज 18 इसकी पुष्टि नहीं करता. किसी भी चीज का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से अवश्य राय ले. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
गर्मी में AC नहीं, यह नेचुरल चीज देगा राहत! शरीर को रखेगा फ्रिज जैसा ठंडा, एक्सपर्ट से जानें कैसे करें सेवन

Last Updated:May 11, 2026, 17:33 IST Benefits of Consuming Katira in summer: भीषण गर्मी में करौली के ग्रामीण आज भी शरीर को ठंडा रखने के लिए पारंपरिक देसी नुस्खे कतीरा पर भरोसा करते हैं. आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार कतीरे की तासीर ठंडी होती है, जो शरीर को ठंडक देने, डिहाइड्रेशन से बचाने और लू के असर को कम करने में मदद करती है. लोग इसे रातभर भिगोकर सुबह दूध, शरबत या मिश्री के साथ सेवन करते हैं. आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. महेश जंगम ने बताया कि कतीरा फायदेमंद है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए. भीषण गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा रखना बेहद जरूरी हो जाता है. ऐसे मौसम में करौली के ग्रामीण आज भी पारंपरिक देसी नुस्खों पर भरोसा करते हैं. इन्हीं में से एक है कतीरा, जिसे आयुर्वेद में शरीर के लिए बेहद लाभकारी माना गया है. गांवों में लोग सुबह खाली पेट कतीरे का सेवन करते हैं, ताकि शरीर को ठंडक मिले और लू से बचाव हो सके. कतीरा शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता और गर्म हवाओं के असर को कम करने में मदद करता है. ग्रामीणों का मानना है कि नियमित सेवन से शरीर तरोताजा रहता है और गर्मी से राहत मिलती है. करौली के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. महेश जंगम के अनुसार गर्मी के मौसम में कतीरा का सेवन फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए. उनका कहना है कि कतीरा शरीर को ठंडक पहुंचाने, लू से बचाव करने और शरीर में पानी की कमी को संतुलित रखने में मदद करता है. हालांकि जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर कुछ लोगों को पेट फूलना, अपच या अन्य पेट संबंधी परेशानियां हो सकती हैं. इसलिए कतीरा का उपयोग हमेशा संतुलित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए, ताकि शरीर को इसका पूरा लाभ मिल सके. ग्रामीणों का कहना है कि कतीरा शरीर को फ्रिज की तरह ठंडा रखने का काम करता है. यह एक प्राकृतिक गोंद होता है, जो पेड़ों से प्राप्त किया जाता है. गर्मी के मौसम में गांवों में इसका सेवन काफी लोकप्रिय माना जाता है. कतीरा को रातभर पानी में भिगोकर रखा जाता है, जिससे यह फूलकर जेली जैसा बन जाता है. सुबह लोग इसे दूध, शरबत या ठंडे पानी में मिश्री के साथ मिलाकर पीते हैं. ग्रामीणों के अनुसार इसका सेवन शरीर को ठंडक पहुंचाने, लू से बचाने और दिनभर तरोताजा बनाए रखने में मदद करता है. Add News18 as Preferred Source on Google गर्मियों के मौसम में कतीरे की मांग काफी बढ़ जाती है, क्योंकि यह शरीर को ठंडक देने के साथ ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करता है. आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, कतीरे की तासीर ठंडी होती है, इसलिए इसका सेवन गर्मी में फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करने, डिहाइड्रेशन से बचाने और पेट को ठंडा रखने में सहायक होता है. तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण होने वाली लू से बचाव में भी कतीरा असरदार माना जाता है. नियमित और सीमित मात्रा में सेवन करने से शरीर तरोताजा और ठंडा बना रहता है. गांवों में बुजुर्ग आज भी बच्चों और खेतों में काम करने वाले लोगों को नियमित रूप से कतीरा सेवन करने की सलाह देते हैं. उनका मानना है कि यह गर्मी और लू से बचाने में काफी मददगार होता है. विशेषज्ञों के अनुसार कतीरा शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता और लंबे समय तक शरीर को ठंडक प्रदान करता है. यही वजह है कि किसान और मजदूरी करने वाले लोग इसका सेवन ज्यादा करते हैं. कई लोग कतीरे को मिश्री और गुलाब शरबत के साथ मिलाकर पीते हैं, जिससे इसका स्वाद बढ़ जाता है और शरीर को तुरंत ठंडक व ताजगी महसूस होती है. गर्मी के मौसम में कतीरा सिर्फ शरीर को ठंडक ही नहीं देता, बल्कि पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसका सेवन कब्ज, एसिडिटी और पेट की जलन जैसी समस्याओं में राहत पहुंचाने में मदद कर सकता है. कतीरा शरीर को अंदर से ठंडा रखकर पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है. महिलाओं के लिए भी इसे उपयोगी बताया जाता है, क्योंकि यह शरीर को ऊर्जा देने और कमजोरी दूर करने में मदद करता है. गर्मियों में सीमित मात्रा में इसका सेवन लाभकारी माना जाता है. गर्मी के इस मौसम में कतीरा गांवों के लोगों के लिए किसी प्राकृतिक औषधि से कम नहीं माना जाता. करौली के ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इसे पारंपरिक देसी नुस्खे के रूप में इस्तेमाल करते हैं. ग्रामीणों का मानना है कि कतीरा शरीर को अंदर से ठंडा रखने और लू से बचाने में काफी मददगार होता है. यही कारण है कि आधुनिक कोल्ड ड्रिंक्स और बाजारू पेयों की बजाय लोग आज भी कतीरा को ज्यादा महत्व देते हैं. गर्मियों में इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है और गांवों में इसकी मांग लगातार बढ़ जाती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
पश्चिम बंगाल: बंगाल में 3 अपराधी और 13 दिन की तानाशाही.. शुभेंदु डुके में अब तक क्या-क्या हुआ?

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ हत्याकांड मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और अब उन्हें बंगाल पुलिस की सी डाटाबेस की कस्टडी में भेजा गया है। मयंक राज मिश्रा, विकी मौर्या और राज सिंह को कोर्ट ने 13 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा है। अहम ये है कि बंगाल पुलिस के साथ-साथ बिहार पुलिस भी जांच में अभिषेक की बात कर रही थी. पुलिस ने अदालत को बताया कि चार के पास से रिजर्व बैंक की बाकी सीटें हैं। इसके साथ ही कुछ सहयोगी साथियों की भी तलाश चल रही है। पुलिस का कहना है कि उसने इस मार्किट केस की पूरी चेन का पता लगाने में कामयाबी हासिल की है, जिससे पता चला है कि हत्या के लिए कब रेकी की गई और कैसे की गई। पुलिस ने पूरे मामले की जांच की और खुलासा किया कि हत्याकांड को अंजाम दिया गया। इस ग्राउंड पर कोर्ट ने वेस्ट बंगाल पुलिस की सी डाटाबेस को 13 दिन की कस्टडी में रखा है। चार के खिलाफ किस धारा में केस दर्ज किया गया पुलिस ने रविवार को मयंक राज मिश्रा और मोनिका मौर्य को बिहार के मुक्केबाज से हिरासत में ले लिया था। तीसरा बच्चा राज सिंह उत्तर प्रदेश के बलिया से पकड़ा गया था। 10 मई को पूछताछ के आधार पर सोमवार (11 मई) को सुबह आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। इन पर धारा 103(1)/111(2)(a)/126(2)/ 3(5) एवं 61(1) BNS r/w 25/27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. चौथे को 13 दिन की पुलिस जज में भेजा गया है। चार तक कैसे जांच पुलिस प्रारंभिक जांच में पता चला है कि शुभेंदु अधिकारी के पीए रथ के वाहन मध्यमग्राम क्रॉसिंग के पास दोहाड़िया इलाके में एक कार में सवार थे और उसी समय एक मोटरसाइकिल भी खड़ी थी। जांच में यह भी पता चला है कि दंगों में इस्तेमाल की गई रिंदा कार हत्या से पहले बाली टोल प्लाजा से गुजरी थी। उस दौरान कार में सवार एक व्यक्ति ने यूपीआई के माध्यम से टोल का भुगतान किया था। दावा किया जा रहा है कि इसी यूपीआई के माध्यम से पुलिस पोस्ट तक की जानकारी दी जा रही है। यह भी पढ़ें : बीएसएफ को जमीन, मासूम का आदेश और ममता बनर्जी की…बंगाल में शुभेंदु कैबिनेट ने लिए ये 6 बड़े फैसले (टैग्सटूट्रांसलेट)इंडिया(टी)पश्चिम बंगाल(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)बंगाल सीएम(टी)सुवेंदु अधिकारी; सुवेंदु अधिकारी पीएम हत्याकांड; सुवेंदु अधिकारी पीएम हत्याकांड के आरोपी पुलिस हिरासत में; पीएम हत्याकांड के आरोपी सुवेंदु अधिकारी सीआईडी की हिरासत में.
मसूढ़ों में दर्द हो या खून की कमी…गूलर का फल रामबाण, बुजुर्गों वाली ये ट्रिक लाखों में एक

Last Updated:May 11, 2026, 16:58 IST Gular fruit benefits : गांवों में लोग गूलर के पेड़ को बहुत उपयोगी मानते हैं. पुराने समय में जब दवाइयां आसानी से उपलब्ध नहीं थीं, तब लोग गूलर का उपयोग घरेलू उपचार में करते थे. आज भी कई बुजुर्गों को इसके फायदों पर अटूट भरोसा है. लोकल 18 ने इस बारे में गोंडा के वैद्य नंदू प्रसाद से बात की. वे बताते हैं कि गूलर का पका फल सीधे खाया जा सकता है. कुछ लोग इसका चूर्ण बनाकर दूध या पानी के साथ लेते हैं. लोग इसकी छाल का काढ़ा बनाकर कुल्ला करते हैं. इससे मुंह के छाले, मसूड़ों की सूजन और दांत दर्द में राहत मिलती है. वैद्य नंदू प्रसाद बताते हैं कि गूलर का पका फल सीधे खाया जा सकता है. कुछ लोग इसका चूर्ण बनाकर दूध या पानी के साथ लेते हैं. इसकी सब्जी भी बनाई जाती है. ग्रामीण लोग गूलर के दूध का सेवन भी करते हैं. इससे पेट से जुड़ी समस्या दूर होती है. इसकी छाल का काढ़ा भी बनाया जाता है, लेकिन किसी भी चीज का जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए सीमित मात्रा में ही इसका भी उपयोग करना चाहिए. यदि आप किसी बड़ी बीमारी की चपेट में हैं तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें. गूलर का फल महिलाओं के लिए रामबाण है. आयुर्वेद में इसे शरीर को अंदर से मजबूत बनाने वाला प्राकृतिक फल बताया गया है. इसके सेवन से शरीर की कमजोरी कम करने में मदद मिलती है. गूलर में मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर की ऊर्जा बनाए रखते हैं. गूलर की छाल मुंह से जुड़ी कई समस्याओं में फायदेमंद मानी जाती है. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इसकी छाल का काढ़ा बनाकर कुल्ला करते हैं. माना जाता है कि इससे मुंह के छाले, मसूड़ों की सूजन और दर्द में राहत मिलती है. गूलर की छाल के प्राकृतिक गुण मुंह को साफ रखने में मदद करते हैं और बैक्टीरिया को कम करने में सहायक हैं. कई लोग इसे मुंह की दुर्गंध दूर करने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं. आयुर्वेद में भी गूलर की छाल को औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है. हालांकि, अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहे या ज्यादा तकलीफ हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. घरेलू उपाय केवल सामान्य परेशानी में ही उपयोगी है. Add News18 as Preferred Source on Google गूलर का फल देखने में साधारण लगता है, लेकिन इसके अंदर कई औषधीय गुण छिपे होते हैं. इसका फल, छाल, पत्ते और दूध तक कई रोगों में काम आते हैं. गूलर का पेड़ ज्यादातर गांव और जंगल वाले इलाकों में आसानी से मिल जाता है. इसका फल छोटे आकार का होता है और पकने पर लाल या बैंगनी रंग का दिखाई देता है. ग्रामीण इलाकों में आज भी कई लोग गूलर को प्राकृतिक ताकत बढ़ाने वाला फल मानते हैं. आयुर्वेद में भी गूलर को स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद बताया गया है. नियमित और सीमित मात्रा में इसका सेवन शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद कर सकता है. हालांकि, किसी भी चीज का अधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए संतुलित मात्रा में ही इसका उपयोग करें. गूलर का फल खून बढ़ाने में भी मददगार है. इसमें आयरन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो कमजोरी और थकान को दूर करने में सहायक हैं. जिन लोगों को खून की कमी की समस्या रहती है, उनके लिए इसका सेवन लाभकारी है. नियमित और सीमित मात्रा में गूलर खाने से शरीर को ताकत मिलती है. आयुर्वेद में इसे सेहत के लिए उपयोगी फल बताया गया है. गूलर का फल डायबिटीज के मरीजों के लिए भी उपयोगी है. इसके सेवन शरीर में शुगर लेवल को नियंत्रित रखा जा सकता है. हालांकि, डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है, इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. सही मात्रा और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर गूलर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है. वैद्य नंदू प्रसाद बताते हैं कि गूलर का फल पेट से जुड़ी कई समस्याओं में बेहद फायदेमंद है. जिन लोगों को कब्ज, अपच, गैस या कमजोर पाचन की परेशानी रहती है, उनके लिए इसका सेवन लाभकारी हो सकता है. यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है और पेट को साफ रखने में सहायक माना जाता है. ग्रामीण इलाकों में लोग पके हुए गूलर के फल को सुखाकर उसका चूर्ण तैयार करते हैं और नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Health Alert : वजन कम के चक्कर में आप भी कर रहे ये गलती? बॉडी स्टोर करने लगेगी फैट

Last Updated:May 11, 2026, 16:22 IST Weight loss mistakes : फरीदाबाद में बदलती लाइफस्टाइल और जंक फूड की आदत लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है. कई लोग मोटापा घटाने के लिए अपनी डाइट कम कर देते हैं. लोकल 18 से फरीदाबाद की चिकित्सक डॉ. रितिका शर्मा बताती हैं कि खाना छोड़ना वजन घटाने का सही तरीका नहीं है, बल्कि इससे शरीर कमजोर होता है. इससे बॉडी स्ट्रेस मोड में चली जाती है और फैट को स्टोर करने लगती है. सही डाइट, हाइड्रेशन और हेल्दी दिनचर्या अपनाकर मोटापा, डायबिटीज और थकान जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है. डॉ. रितिका बताती हैं कि कई बार लोग काम में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि खाना खाना भूल जाते हैं. ये गलती आगे चलकर घातक हो सकती है. फरीदाबाद. भागदौड़ भरी जिंदगी, बाहर का खाना, ठंडे ड्रिंक और देर रात तक खाने की आदत लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है. बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी जंक फूड की वजह से मोटापा, कमजोरी और थकान जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. कई लोग जल्दी वजन घटाने के चक्कर में खाना छोड़ देते हैं, लेकिन इससे शरीर को फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता है. ऐसे में सही खानपान और अच्छी दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी हो गया है. लोकल 18 से फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल की सीनियर डाइटिशियन और न्यूट्रिशन कंसल्टेंट डॉ. रितिका शर्मा बताती हैं कि आजकल लोग अपने वजन को लेकर बहुत ज्यादा फोकस रहते हैं, लेकिन इसी दौरान कई गलतियां कर बैठते हैं. डॉ. रितिका कहती हैं कि सबसे बड़ी गलती लोग खाना छोड़कर करते हैं. लोगों को लगता है कि अगर खाना छोड़ देंगे तो वजन जल्दी कम हो जाएगा, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है. जब हम लंबे समय तक खाना नहीं खाते तो शरीर स्ट्रेस मोड में चला जाता है और फैट को स्टोर करने लगता है. इससे वजन कम होने के बजाय शरीर कमजोर होने लगता है, एनर्जी भी घटती है. गर्मियों में इसका ध्यान जरूरी डॉ. रितिका बताती हैं कि कई बार लोग काम में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि खाना खाना भूल जाते हैं. खासकर युवा सोचते हैं कि अभी शरीर में ताकत है तो खाना मिस करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन यही आदत आगे चलकर शरीर को नुकसान पहुंचाती है. शरीर को सही समय पर पोषण मिलना बहुत जरूरी है. गर्मियों में पानी पी लेना ही हाइड्रेशन नहीं बल्कि सही तरीके से पानी पीना जरूरी है. लोग इन्फ्यूज वॉटर का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें फल और सब्जियों को पानी में डालकर रखा जाता है, जिससे शरीर को विटामिन और मिनरल भी मिलते रहते हैं. तरबूज और खरबूजा जैसे फलों का सेवन भी गर्मियों में काफी फायदेमंद रहता है, क्योंकि इनमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है और शरीर को ठंडक मिलती है. बच्चों को कैसे रोकें डॉ. रितिका के मुताबिक, बच्चे आजकल जंग फूड ज्यादा खाते हैं. बच्चों को जबरदस्ती रोकना आसान नहीं होता लेकिन समझदारी से इसे कंट्रोल किया जा सकता है. अगर बच्चा बाहर की चीजें पसंद करता है तो वही चीज घर पर हेल्दी तरीके से बनाकर दें. बच्चे पैकेट देखकर आकर्षित होते हैं इसलिए घर की बनी चीजों को उसी तरह पैक करके दिया जा सकता है. बच्चों को बाहर ले जाने से पहले घर का खाना जरूर खिलाएं ताकि बाहर जाकर उनकी भूख ज्यादा न बढ़े और वे जंक फूड की तरफ कम आकर्षित हों. सुबह उठते ही पानी पीने के ये फायदे डॉ. रितिका बताती हैं कि डायबिटीज, बीपी और मोटापे जैसी बीमारियां काफी हद तक लाइफस्टाइल और खानपान से जुड़ी होती हैं. अगर लोग बैलेंस डाइट और सही दिनचर्या अपनाएं तो इन बीमारियों को कंट्रोल किया जा सकता है. सुबह उठते ही सबसे पहले पानी पीना चाहिए क्योंकि पूरी रात शरीर बिना पानी और खाने के रहता है. सुबह खाली पेट चाय या कॉफी पीना नहीं चाहिए. इसकी जगह एक या दो गिलास पानी, ग्रीन जूस या इन्फ्यूज वॉटर लेना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद रहता है. इससे शरीर को विटामिन, मिनरल और अच्छी एनर्जी मिलती है. About the Author Priyanshu Gupta प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Faridabad,Haryana
चूँकि कांग्रेस ने केरल के मुख्यमंत्री की घोषणा में देरी की, भाजपा ने एक नाम सुझाया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:11 मई, 2026, 16:04 IST पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, पूर्व केंद्रीय मंत्री और केरल बीजेपी प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने जवाब दिया, “मैं न तो पुष्टि करूंगा और न ही इनकार करूंगा कि यह सच है।” तिरुवनंतपुरपुरम में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान केरल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर। (पीटीआई फोटो) केरल मुख्यमंत्री गतिरोध: केरल का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा इस पर सस्पेंस जारी है क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में कई दौर की चर्चा के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने अभी तक अपने अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की है। देरी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के भीतर तीव्र राजनीतिक बहस छेड़ दी है, वरिष्ठ नेताओं वीडी सतीसन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के समर्थकों ने केरल और दिल्ली में विरोध, पोस्टर और प्रदर्शनों के माध्यम से अपने पसंदीदा उम्मीदवारों का खुले तौर पर समर्थन किया है। सियासी रस्साकशी के बीच बीजेपी की केरल इकाई भी अपने पसंदीदा उम्मीदवार के संकेत देती नजर आई। एक्स पर एक पोस्ट में कांग्रेस नेतृत्व के संघर्ष का मज़ाक उड़ाते हुए कहा गया, “केरल बीजेपी और राष्ट्रीय बीजेपी के बीच हास्यास्पद कड़ी लड़ाई। केरल बीजेपी केरल में केसी वेणुगोपाल को चाहती है, राष्ट्रीय बीजेपी दिल्ली में केसी वेणुगोपाल को चाहती है।” पोस्ट में सुझाव दिया गया कि भाजपा नेतृत्व शायद चाहता है कि वेणुगोपाल राष्ट्रीय राजधानी में ही रहें क्योंकि वहां उनके लिए बहुत कम राजनीतिक खतरा है, जबकि केरल भाजपा भी राज्य में इसी तरह के कारणों से उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में पसंद करेगी। पोस्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, पूर्व केंद्रीय मंत्री और केरल भाजपा प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने हंसते हुए और मुंह बंद करने वाले इमोजी के साथ जवाब दिया, “मैं न तो पुष्टि करूंगा और न ही इनकार करूंगा कि यह सच है।” उनकी प्रतिक्रिया ने सोशल मीडिया पर तुरंत ध्यान आकर्षित किया और केरल के मुख्यमंत्री पद पर चल रहे राजनीतिक नाटक में एक और मोड़ जोड़ दिया। केरल में क्या हो रहा है? कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 140 विधानसभा सीटों में से 102 सीटों पर कब्जा कर लिया, जिससे एक दशक के बाद ऐतिहासिक वापसी हुई और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। हालाँकि, जीत ने जल्द ही अंदरूनी कलह को जन्म दे दिया, क्योंकि प्रमुख राजनेताओं के समर्थकों ने शीर्ष पद के लिए अपना जोर तेज कर दिया। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने केरल में एक दशक के बाद सत्ता में वापसी करते हुए निर्णायक वापसी की है। लेकिन जश्न थमने से पहले ही सारा ध्यान तेजी से मुख्यमंत्री के चयन के बड़े सवाल पर केंद्रित हो गया है. केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए तीन प्रमुख नाम सबसे आगे चल रहे हैं, वे हैं वीडी सतीसन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला। इस स्थिति में क्लासिक कांग्रेस सत्ता संघर्ष के सभी तत्व मौजूद हैं – संगठनात्मक प्रभुत्व बनाम विधायी नेतृत्व, पीढ़ीगत बदलाव बनाम अनुभव, और दिल्ली का प्रभाव बनाम राज्य इकाई की प्राथमिकता। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला और वीडी सतीसन और केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ के साथ अलग-अलग और संयुक्त बैठकें कीं। तीन घंटे से अधिक समय तक चली इस मंत्रणा में एआईसीसी पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक ने भाग लिया। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि कांग्रेस नेतृत्व जानबूझकर आम सहमति सुनिश्चित करने और केरल में पार्टी की जोरदार जीत के बाद और शर्मिंदगी को रोकने के लिए समय ले रहा है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया जैसे ही कांग्रेस ने केरल के मुख्यमंत्री की घोषणा में देरी की, भाजपा ने एक नाम सुझाया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल के मुख्यमंत्री गतिरोध(टी)केरल के सीएम की दौड़(टी)कांग्रेस नेतृत्व की खींचतान(टी)यूडीएफ सत्ता संघर्ष(टी)वीडी सतीसन(टी)केसी वेणुगोपाल(टी)रमेश चेन्निथला(टी)राजीव चन्द्रशेखर प्रतिक्रिया
गर्मियों के लिए सत्तू की छाछ रेसिपी: घर पर बनाएं सत्तू की छाछ, गर्मी में चाहिए सत्तू की छाछ; स्वाद ऐसा की सब पूछेंगे रेसिपी

सामग्री: 4 बड़े चम्मच सत्तू, 2 चम्मच हरा धनिया, 1 हरी मिर्च पाउडर, थोड़ा सा जीरा पाउडर, स्वाद में काला नमक, थोड़ा सा साधारण नमक, थोड़ा सा साधारण नमक, थोड़ा सा हरा धनिया, कुछ पुदीने की मिठाई छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले एक बड़ा पोछे में सत्तू डाला। अब इसमें शामिल हैं छोटा-थोड़ा करके छाछ रेवेरे और अच्छे से शौकीन बने रहें ताकि छोटे-मोटे न बनें। छवि: फ्रीपिक इसके बाद इसमें प्याज, हरी मिर्च, अन्य जीरा, काला और साधारण नमक शामिल हैं। अब ऊपर से हरा धनियां और पुदीने की पत्तियां। छवि: एआई साड़ी को अच्छी तरह से लाइक करें। अगर आपको ज्यादा ठंडा पसंद है तो इसमें कुछ बर्फ के टुकड़े भी डाल सकते हैं. अब आपकी मंहगी-ठंडी और स्वादिष्ट सत्तू की छाछ तैयार है। छवि: एआई सत्तू शरीर को ठंडक की सलाह में मदद करता है। इसके अलावा, भोजन की खपत और पाचन क्षमता बेहतर होती है। गर्मी में लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए यह ड्रिंक काफी खतरनाक साबित होती है। छवि: फ्रीपिक पर्यटक तो इसमें थोड़ा नींबू रस भी मिला सकते हैं। पुदीना से स्वाद और ताजगी दोनों बढ़ते हैं। अगर बच्चे बना रहे हैं तो हरी मिर्च न डालें। छवि: फ्रीपिक गर्मी के दिनों में जब भी कुछ ठंडा और कॉकटेल पीने का मन करे, तब सत्तू की छाछ जरूर बनाएं। इसका देसी स्वाद हर किसी को पसंद आएगा। छवि: एआई अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें।
बच्चों के पैरों में दर्द I leg pain in childrens

Last Updated:May 11, 2026, 15:54 IST बच्चों के पैरों में बार-बार होने वाला दर्द सिर्फ थकान नहीं, बल्कि ग्रोथ पेन, कमजोरी या पोषक तत्वों की कमी का संकेत भी हो सकता है. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति सिंह ने बच्चों की डाइट, मसाज और घरेलू उपायों को लेकर जरूरी सलाह दी है. मिर्जापुर. अक्सर छोटे बच्चों के पैरों में दर्द होता है, बच्चों के पैरों में दर्द होने के बाद कई बार मालिश के बाद भी दर्द ठीक नहीं होता है. अगर आपके बच्चों के पैरों में दर्द है तो इसके कुछ खास वजह हो सकती है. पहले ग्रोथ हो सकता है और दूसरा कारण थकान हो सकता है. वहीं, कई बार न्यूट्रिएंट्स की कमी की वजह से भी दर्द होता है. मंडलीय अस्पताल में तैनात डाइटीशियन डॉक्टर ज्योति सिंह ने बच्चों को लेकर टिप्स दिए हैं. डॉक्टर ज्योति सिंह ने घरेलू नुस्खे के साथ ही चिकित्सकीय पद्धति से बच्चों का ध्यान रखने की बात कही है. उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रॉपर न्यूट्रिएंट्स दें और शाम में जरूर पैरों की मालिश करें. मंडलीय अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति सिंह ने लोकल 18 से बताया कि बच्चों के पैरों में दो चीजों से दर्द होता है. एक होता है ग्रोथ पैन, जो बच्चों के शारीरिक विकास की वजह से होता है. वहीं, दूसरा दर्द ज्यादा खेल-कूद आदि की वजह से होता है, कभी दर्द कमजोरी की वजह से भी हो सकता है. ऐसे में सबसे जरूरी बच्चों का खान-पान होता है. बच्चों को प्रॉपर प्रोटीन वाले सामान पनीर, अंडे, राजमा, सोयाबीन आदि को डाइट में रखना चाहिए. बच्चों को दूसरी जरूरी चीज कैल्शियम की आवश्यकता होती है. कैल्शियम के लिए बच्चों को रागी, चौराई, रामदाना, शिमला मिर्च, चने, खजूर और अंजीर आदि दे सकते हैं. बच्चों के पैरों में दर्द है तो इप्सम सॉल्ट है तो कुनकुने पानी में डालकर पैर को कुछ देर के लिए रोककर रखना चाहिए. ये टिप्स भी है बेहद कारगरडॉ. ज्योति सिंह ने बताया कि ध्यान रहे कि ज्यादा देर तक पैरों को पानी के अंदर नहीं रखे, वरना लूज मोशन जैसी समस्या हो सकती है. ऐसे में कम से कम समय तक पैरों को पानी में रखे. उन्होंने बताया कि बच्चों के पैरों में दर्द होन पर देसी तरीका है मसाज. थोड़ा मसाज बच्चों का रात में करना चाहिए. इसको करने से सोते समय बच्चों को बेहतर फील होता है. उनको अच्छी नींद लगती है, ये कुछ तरीके थे, जिनका उपयोग बच्चों के लिए पैरों में होने वाले दर्द को कम करने के लिए कर सकते हैं. अगर दर्द असहनीय हो या ज्यादा हो तो किसी पीडियाट्रिक को दिखा सकते हैं. मंडलीय अस्पताल में भी बाल रोग विशेषज्ञ है, यहां सम्पूर्ण इलाज है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Mirzapur,Uttar Pradesh







