मुकेश खन्ना बोले- जन गण मन हटाओ वंदे मारतम लाओ:राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान में फर्क भूले, पंजाब सिंध को कहा पंजाब सिंग, 2 और गड़बड़ की

शक्तिमान एक्टर मुकेश खन्ना ने हाल ही में राष्ट्रगान जन गण मन को हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि इसकी जगह वंदे मातरम को देनी चाहिए। हालांकि ये बयान देते हुए उनसे बड़ी गड़बड़ हो गई। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाना चाहिए, जबकि ये पहले से ही राष्ट्रगीत है। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रगान जन गण मन हाते हुए भी गड़बड़ कर दी। हाल ही में आईएएनएस को दिए बयान में मुकेश खन्ना ने कहा, ‘मैं तीन साल पहले बोल चुका हूं कि वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाओ (ये राष्ट्रगीत ही है)। ये जन मन गण (जन गण मन) हमारे देश का नहीं है। ये जो क्वीन एलिजाबेथ थीं, उनके मान में रवींद्रनाथ टेगौर ने एक स्तुति गान लिखा था, उसको हमने मान लिया, भाग्य विधाता, पंजाब सिंग (सिंध)। अरे ये हमारा नहीं है। हमारा है वंदे मातरम, लता जी (मंगेशकर) ने गाया है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘जितनी जल्दी हो, उतनी जल्दी ये जन मण गण (जन गण मन) को हटाओ और वंदे मातरम को लाओ। मोदी जी ने शुरुआत कर दी है। हर स्कूल में ये अनिवार्य हो चुका है कि पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। वो भी 3-4 अंतरे नहीं पूरे 7 अंतरे। मुझे खुशी है कि वंदे मातरम उठ रहा है। मेरा गाना भी बन रहा है, मैं उसे 6 महीने में रिलीज कर दूंगा।’ केंद्र सरकार ने राष्ट्रगान जन-गण-मन और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को नए निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि नियमों में पहले से तय है कि किन कार्यक्रमों में दोनों को गाना या बजाना जरूरी है। मंत्रालय ने कहा कि एक ही कार्यक्रम में दोनों में से पहले वंदे और फिर जन-गण-मन होगा। जिन राज्यों में राज्य गीत होता है, वहां भी सीक्वेंस का पालन करना होगा। 9 जुलाई को सभी राज्यों और मंत्रालयों को पत्र भेजा गया, जिसकी जानकारी शुक्रवार को सामने आई है। सभी राज्यों से कहा गया है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत हमेशा उनके असली शब्दों, सही उच्चारण और तय नियमों के अनुसार ही गाया और बजाया जाए। इसके लिए दोनों की ऑफिशियल कॉपी मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई है। 28 जनवरी को पहली बार आदेश आया इससे पहले 28 जनवरी को भी सरकार ने सभी राज्यों को यही आदेश दिया था। इसमें मुताबिक सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत में राष्ट्रगीत बजाया जाएगा। वंदे मातरम् के समय हर व्यक्ति को खड़ा होना होगा। राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे। इनकी कुल अवधि 3.10 मिनिट है। पहले दो अंतरे गाए जाते थे। सिनेमा हॉल को नए नियमों से दूर रखा गया है। यानी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम बजाना और खड़ा रहना अनिवार्य नहीं होगा। अगर किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री फिल्म के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजाया जाता है, तो दर्शकों को उस दौरान खड़ा होना जरूरी नहीं होगा। बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं। वंदे मातरम एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था।
एक्ट्रेस अनन्या राज का 27 साल की उम्र में निधन:मानसिक और शारीरिक बीमारी से जूझ रही थीं; परिजनों बोले- नींद में ही थम गईं सांसें

फिल्म ‘7 आवर्स टू गो’ और ‘घोस्ट’ फेम अभिनेत्री अनन्या राज का 27 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके परिजनों ने सोशल मीडिया पर इस खबर की पुष्टि की है। परिजनों के अनुसार, अनन्या का निधन 15 अगस्त की सुबह नींद में ही हो गया। वे पिछले एक साल से ज्यादा समय से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। परिजनों ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने की अपील की है। परिजनों ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया भावुक नोट अनन्या राज के परिवार ने उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक भावुक बयान जारी कर उनके निधन की जानकारी दी। परिजनों ने लिखा कि वे बहुत भारी दिल से यह बता रहे हैं कि 15 अगस्त को तड़के अनन्या का निधन हो गया। वे नींद में ही शांति से इस दुनिया को अलविदा कह गईं। पोस्ट में लिखा गया कि पिछले एक साल से अधिक समय से वे शारीरिक और मानसिक परेशानी से गुजर रही थीं और उन्होंने एक योद्धा की तरह इसका सामना किया। 2016 में बॉलीवुड में कदम रखा था मुंबई में पली-बढ़ी अनन्या राज ने हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा में अपनी पहचान बनाई थी। उन्होंने साल 2016 में थ्रिलर फिल्म ‘7 आवर्स टू गो’ से बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था। इसके बाद वे 2017 में आई फिल्म ‘द फाइनल एग्जिट’ और 2019 में विक्रम भट्ट के निर्देशन में बनी हॉरर फिल्म ‘घोस्ट’ में नजर आईं। फिल्मों के अलावा वे कई मशहूर म्यूजिक वीडियोज का भी हिस्सा रहीं, जिससे उन्हें दर्शकों के बीच पहचान मिली। तेलुगु और अन्य क्षेत्रीय फिल्मों में भी किया काम हिंदी फिल्मों के अलावा अनन्या ने क्षेत्रीय सिनेमा में भी अपनी किस्मत आजमाई थी। उन्होंने साल 2022 में रिलीज हुई तेलुगु सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘थगड़े ले’ में काम किया था। श्रीनिवास राजू के निर्देशन में बनी इस फिल्म में वे नवीन चंद्रा, दिव्या पिल्लई और पी. रविशंकर के साथ नजर आई थीं। इसके अलावा उन्होंने त्रिभाषी फिल्म ‘मद्रासी गैंग’ में भी मुख्य भूमिका निभाई थी। परिवार ने निजता बनाए रखने की अपील की परिवार की ओर से जारी बयान में आगे कहा गया कि अनन्या एक मजबूत इरादों वाली लड़की थीं और रानी की तरह जीती थीं। परिजनों ने लिखा कि उनके न रहने से जो खालीपन आया है, उसे हमेशा महसूस किया जाएगा। इस मुश्किल घड़ी में परिजनों ने फैंस और मीडिया से उनकी निजता (प्राइवेसी) का सम्मान करने और अभिनेत्री की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने का अनुरोध किया है।
रूस पर यूक्रेन का सबसे बड़ा ड्रोन हमला:6 की मौत, मॉस्को के पास गोदाम में आग लगी; रूस ने 1400 ड्रोन मार गिराए

यूक्रेन ने रविवार को रूस पर युद्ध शुरू होने के बाद अब तक का सबसे बड़े ड्रोन हमला किया है। इसमें कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई। इन ड्रोन हमलों में मॉस्को के पास रूसी ई-कॉमर्स कंपनी वाइल्डबेरिज के डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर में आग लग गई। यह गोदाम करीब 2 लाख वर्ग मीटर में फैला है। सामने आई तस्वीरों में इमारत का बड़ा हिस्सा आग की चपेट में दिखाई दिया। आसमान में दूर तक काला धुआं उठता नजर आया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसने पिछले 24 घंटे में 9 यूक्रेनी क्रूज मिसाइल और कुल 1,478 ड्रोन मार गिराए हैं। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने बताया कि करीब 600 ड्रोन राजधानी की ओर दागे गए थे। उन्होंने इसे पिछले दो साल में मॉस्को पर हुआ सबसे बड़ा हवाई हमला बताया। यूक्रेन ने 1,500 मील तक हमला करने की क्षमता बढ़ाई यूक्रेन ने 2026 में अपनी लंबी दूरी की ड्रोन और मिसाइल क्षमता में तेजी से इजाफा किया है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, अब वह रूस की सीमा से करीब 1,500 मील दूर तक मौजूद ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है। यूक्रेन इन हथियारों से रूस के गोदामों, तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है। इससे युद्ध में पहली बार रूस की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता को कड़ी चुनौती मिल रही है। दोनों देशों की एयर डिफेंस यानी हवाई हमलों को रोकने वाले सिस्टम पर भी लगातार दबाव बढ़ रहा है। वाइल्डबेरीज के ठिकाने क्यों निशाने पर? पिछले एक महीने में यूक्रेन ने वाइल्डबेरीज से जुड़ी कई इमारतों और सुविधाओं को निशाना बनाया है। कंपनी रूस के ऑनलाइन कारोबार में बड़ी भूमिका निभाती है और इसके डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर देशभर में फैले हैं। यूक्रेन के हमलों में करीब 20 गोदामों और दूसरी इमारतों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे हमलों का मकसद रूस की सप्लाई चेन और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है। रूस के हमलों में यूक्रेन में 7 लोगों की मौत इसी दौरान रूस ने यूक्रेन पर भी ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इन हमलों में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई। यूक्रेन के सूमी सीमा क्षेत्र में 2 लोगों की मौत हुई, जबकि देश के दूसरे हिस्सों में 3 और लोगों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है। रविवार सुबह करीब 3 बजे कीव पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया गया। इसमें 6 लोग घायल हुए और राजधानी में कई जगह आग लग गई। कीव के ओबोलोंस्की जिले में पेट्रोव्का बुक मार्केट का बड़ा हिस्सा जल गया। दुकानदारों के मुताबिक, आग में उनकी किताबों का पूरा स्टॉक नष्ट हो गया। जेलेंस्की बोले- रूस नागरिक इलाकों को निशाना बना रहा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इमरजेंसी सर्विस के कर्मचारियों की तारीफ की। उन्होंने रूस पर नागरिक इलाकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया। जेलेंस्की ने कहा कि रूस अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की पहुंच वाले इलाकों में नागरिक ढांचे पर हमला कर रहा है। उनके मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में रूस ने यूक्रेन के शहरों और दूसरे इलाकों पर 1,550 से ज्यादा ड्रोन, करीब 1,560 गाइडेड बम और 62 मिसाइल दागीं। इनमें बड़ी संख्या बैलिस्टिक मिसाइलों की थी। बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकना यूक्रेन के लिए बड़ी चुनौती यूक्रेन धीमी गति से आने वाले ड्रोन को रोकने में काफी हद तक सफल रहा है। लेकिन तेज गति से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकना उसके लिए बड़ी चुनौती है। ऐसी मिसाइलों को रोकने में अमेरिका की Patriot एयर डिफेंस प्रणाली अहम भूमिका निभाती है। हालांकि, लगातार हो रहे रूसी हमलों के कारण यूक्रेन के पास इन इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार सीमित हो गया है।
एक्ट्रेस पर RPF अफसर पर ब्लेड से हमले का आरोप:विवाद होने पर कपड़े उतारे; स्लीपर टिकट पर एसी कोच में बैठी थीं अंतरा बनर्जी

मॉडल और टीवी एक्ट्रेस अंतरा बनर्जी को अरावली एक्सप्रेस में आरपीएफ (RPF) कर्मचारी पर हमले के आरोप में हिरासत में लिया गया। उन पर आरोप है कि स्लीपर क्लास का टिकट होने के बाद भी वे सूरत जाने के लिए रिजर्व्ड एसी कोच में बैठ गई थीं। सीट को लेकर हुए विवाद के बाद उन्होंने अपने कपड़े उतारे और रेजर ब्लेड से आरपीएफ जवान पर हमला कर दिया। मामला 12 अगस्त का है। रीवली जीआरपी (GRP) ने 13 अगस्त को FIR दर्ज करने के बाद उन्हें नोटिस देकर जमानत पर रिहा कर दिया। एसी कोच में बैठी थीं, सीट छोड़ने से इनकार किया पुलिस के मुताबिक, अंतरा बनर्जी एक शूट के सिलसिले में सूरत जा रही थीं। उनके पास स्लीपर क्लास का टिकट था, लेकिन वे एसी कोच की रिजर्व्ड सीट पर जाकर बैठ गईं। यह घटना 12 अगस्त की रात बोरीवली और दहानू स्टेशन के बीच रात लगभग 9:30 बजे से 10:50 बजे के बीच हुई। जब एक यात्री ने उनसे रिजर्व्ड सीट खाली करने को कहा, तो उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद यात्री ने टिकट कलेक्टर हरिकेश त्रिपाठी और आरपीएफ को मामले की सूचना दी। आरपीएफ अफसर पर ब्लेड से हमला किया, कपड़े उतारे आरपीएफ के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर यामिनीकांत मिश्रा ने शिकायत में बताया कि वे और कॉन्स्टेबल राजेश कुमार विवाद सुलझाने पहुंचे थे। आरोप है कि अंतरा बनर्जी ने अधिकारियों के साथ बदसलूकी की और हिंसक हो गईं। इसके बाद उन्होंने अपने कपड़े उतारे, हाथ में रेजर ब्लेड लहराया और एएसआई मिश्रा के साथ-साथ खुद को भी घायल कर लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारी की यूनिफॉर्म और मोबाइल फोन को भी नुकसान पहुंचाया। कांच तोड़ने की कोशिश की, दहानू स्टेशन पर ट्रेन से उतारा घटना के दौरान कोच में मौजूद यात्री डर गए। हालात बिगड़ते देख आरपीएफ कर्मचारियों ने एसी कोच के दरवाजे बंद कर दिए। ट्रेन से बाहर निकलने के लिए अंतरा ने खिड़की का शीशा तोड़ने का भी प्रयास किया। यह पूरा हंगामा करीब एक घंटे से ज्यादा समय तक चला। इसके बाद दहानू रेलवे स्टेशन पर उन्हें ट्रेन से उतारकर सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के हवाले कर दिया गया। नोटिस देकर जमानत पर रिहा अगली सुबह बोरीवली जीआरपी ने अंतरा को कस्टडी में ले लिया। बोरीवली जीआरपी इंस्पेक्टर कुंडा गावड़े के अनुसार, चश्मदीदों ने बताया कि एसी कोच का टिकट न मिलने के कारण वे मानसिक तनाव में हो सकती हैं। पूछताछ के दौरान अंतरा ने अपने वकील या परिजनों से संपर्क करने से इनकार कर दिया और खुद को गिरफ्तार करने की मांग की। पुलिस ने 13 अगस्त को सुरक्षा खतरे में डालने, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने और बदसलूकी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की। एफआईआर दर्ज होने के बाद वे शांत हुईं और बाद में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत नोटिस देकर उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। ‘कसौटी जिंदगी की’ में कर चुकी हैं काम 31 साल की अंतरा बनर्जी का जन्म कोलकाता के बंगाली परिवार में हुआ था। साल 2013 में वे अपने माता-पिता के साथ मुंबई शिफ्ट हो गई थीं। उन्होंने निर्मला निकेतन कॉलेज से सोशल वर्क (BSW) की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन एक्टिंग के लिए पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। उन्होंने 2012 में ‘गुमराह: एंड ऑफ इनोसेंस’ से डेब्यू किया। 2014 में फिल्म ‘द शौकीन्स’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इसके अलावा वे ‘सावधान इंडिया’, ‘बढ़ो बहू’, ‘लाल इश्क’, ‘कसौटी जिंदगी की’ (सुमन शेखर शर्मा का रोल), ‘कवच… महाशिवरात्रि’ और ‘दिव्या दृष्टि’ जैसे सीरियल्स में नजर आ चुकी हैं। वे ओटीटी सीरीज ‘रागिनी एमएमएस रिटर्न्स 2’ और हाल ही में ‘द लास्ट शॉट’ में भी काम कर चुकी हैं।
हरियाणा के युवक की यूरोप में मौत,बहन ने दी मुखाग्नि:समुद्र देखने गया तो डूबा, ₹15 लाख लगाकर विदेश भेजा था; पिता की पहले मौत हो चुकी

हरियाणा के जींद से यूरोप गए 22 वर्षीय युवक की डूबने से मौत हो गई। वो मॉल्डोवा में दोस्तों के साथ वीकएंड पर समुद्र घूमने गया था। जिस बोट में वो बैठा अचानक से थे, वह डूबने लगी। समुद्र में डूबने से युवक की मौत हो गई। युवक 9 महीने पहले यूरोप स्टडी वीजा पर गया था। पढ़ाई के साथ-साथ वहां पर एक होटल में पार्ट टाइम डिलीवरी बॉय का काम करता था। युवक के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसी कारण उसे विदेश भेजा गया था ताकि वो पढ़ाई के साथ वहां जॉब कर पैसे भेज सके। युवक के पिता की 7 साल पहले मौत हो चुकी है। मां ने रिश्तेदारों से पैसे उधार लेकर इकलौते बेटे को भेजा था। अब 10 लाख रुपए खर्च कर युवक का शव गांव लाया गया। शव गांव पहुंचने पर आज बड़ी बहन ने भाई का अंतिम संस्कार किया और मुखाग्नि दी। 9 महीने पहले विदेश भेजा था चचेरे भाई प्रवीन कुमार ने बताया कि गांव चांदपुर के रहने वाले परिवार ने करीब 9 महीने पहले निहाल सिंह (22) को स्टडी वीजा पर विदेश भेजा था। परिवार को उम्मीद थी कि वह वहां पढ़ाई के साथ कमाई करके आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करेगा। विदेश भेजने में 15 लाख रुपए खर्च किए प्रवीन के मुताबिक, निहाल को विदेश भेजने में परिवार ने करीब 15 लाख रुपए खर्च किए थे। मां के पास इतने पैसे नहीं थे, इसलिए रिश्तेदारों और जानकारों से रकम जुटाई गई थी। अब शव भारत लाने में भी करीब 10 लाख रुपए खर्च हुए हैं, जिसमें कुछ राशि परिवार और कुछ भाईचारे से जुटाई गई। पिता की मौत के बाद निहाल था सहारा प्रवीन ने बताया कि निहाल के पिता कृष्ण कुमार की 7 साल पहले ही हार्ट अटैक से मौत हो चुकी थी। इसके बाद मां सुनीता देवी ने दोनों बच्चों का पालन-पोषण किया। घर के पास उनकी करियाना की दुकान है और निहाल परिवार में अकेला कमाने वाला था। निहाल से परिवार को बड़ी उम्मीदें थीं परिवार को उम्मीद थी कि निहाल विदेश में पढ़ाई पूरी करने के साथ कमाई कर मां और बहन का सहारा बनेगा। उसकी मौत के बाद परिवार की उम्मीदें टूट गईं। गांव में शव पहुंचने के बाद परिवार में मातम छा गया। दोपहल 2 बजे निहाल का अंतिम संस्कार किया गया।
कैम्ब्रिज के सबसे कम उम्र के ब्लैक प्रोफेसर की मौत:घर में बेहोश मिले, रिसर्च पर उठे सवालों के बाद यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था

इंग्लैंड की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर रहे जेसन अर्डे का 41 साल की उम्र में निधन हो गया। वे शिक्षा और समाज से जुड़े विषयों पर रिसर्च और अध्यापन करते थे। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे उन्हें दक्षिण लंदन के बैटरसी स्थित उनके घर में बेहोश पाया गया। एंबुलेंस टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, उनकी मौत अचानक हुई। अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे मौत को संदिग्ध माना जाए। पुलिस परिवार के संपर्क में है और मामले की जांच कर रही है। मौत से कुछ दिन पहले ही कैम्ब्रिज से दिया था इस्तीफा जेसन अर्डे ने 5 अगस्त को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था। यह फैसला उनकी कुछ रिसर्च को लेकर उठे सवालों के बीच आया था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने उनकी नियुक्ति और यूनिवर्सिटी में उनके कामकाज की जांच भी शुरू की थी। यूनिवर्सिटी यह पता लगा रही थी कि अर्डे को 2022 में प्रोफेसर की नौकरी कैसे मिली और उनके काम के दौरान क्या हुआ। इस्तीफा देने के बाद अर्डे ने कहा था कि लगातार लग रहे आरोपों और उनके बारे में सार्वजनिक रूप से की जा रही टिप्पणियों का उन पर बहुत गहरा असर पड़ा। रिसर्च के कुछ हिस्सों पर नकल के आरोप लगे थे अर्डे ने 2015 में ब्रिटेन की लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी। इस दौरान उन्होंने एक रिसर्च रिपोर्ट लिखी थी। बाद में उनकी रिसर्च के कुछ हिस्सों पर आरोप लगे कि उन्होंने दूसरे लोगों के लिखे काम को बिना उचित श्रेय दिए अपनी रिसर्च में इस्तेमाल किया। आसान भाषा में कहें तो उन पर रिसर्च में नकल करने का आरोप लगा था। अर्डे ने इन आरोपों को गलत बताया था। इसके बाद उनकी कुछ दूसरी रिसर्च में भी गलतियां होने के आरोप लगाए गए। नियुक्ति पर भी उठे थे सवाल अर्डे की कैम्ब्रिज में नियुक्ति को लेकर भी विवाद हुआ था। कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी योग्यता के बजाय यूनिवर्सिटी की विविधता बढ़ाने वाली नीति के तहत नौकरी दी गई। इस तरह की नीतियों को आम तौर पर DEI कहा जाता है। इसका मतलब है कि अलग-अलग समुदायों और कम प्रतिनिधित्व वाले लोगों को संस्थानों में बराबर मौके दिए जाएं और उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए। हालांकि, ब्रिटेन की शिक्षक यूनियन के नेता डेनियल कबेडे ने अर्डे का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि अर्डे को सार्वजनिक रूप से बहुत बुरी तरह निशाना बनाया गया। उन्होंने ब्रिटिश मीडिया और दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों के एक वर्ग पर अर्डे के खिलाफ नस्लवादी अभियान चलाने का आरोप लगाया था। परिवार बोला- गलत जानकारी के अभियान ने उन्हें बहुत परेशान किया अर्डे के परिवार ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया। परिवार ने कहा कि जेसन के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारी के अभियान का उन पर बहुत बुरा असर पड़ा था। परिवार के मुताबिक, अर्डे शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और हमेशा दूसरों में अच्छाई देखने की कोशिश करते थे। परिवार ने मीडिया से अपील की कि अब उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। उन्होंने जेसन और उनके परिवार के खिलाफ लंबे समय से चल रहे उत्पीड़न को रोकने की भी अपील की। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रमुख डेबोरा प्रेंटिस ने अर्डे की मौत पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में उनकी संवेदनाएं अर्डे के परिवार और दोस्तों के साथ हैं। ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री लूसी पॉवेल ने भी उनके निधन पर शोक जताया। 2022 में कैम्ब्रिज में बनाया था इतिहास जेसन अर्डे 2022 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शिक्षा विभाग में प्रोफेसर बने थे। वे यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर थे। कैम्ब्रिज में लंबे समय से अश्वेत लोगों की संख्या कम रही है। ऐसे में अर्डे की नियुक्ति को यूनिवर्सिटी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया था। उनकी मौत ऐसे समय हुई है, जब उनकी नियुक्ति और रिसर्च को लेकर यूनिवर्सिटी में जांच चल रही थी।
कैम्ब्रिज के सबसे कम उम्र के ब्लैक प्रोफेसर की मौत:घर में बेहोश मिले, रिसर्च पर उठे सवालों के बाद यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था

इंग्लैंड की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर रहे जेसन अर्डे का 41 साल की उम्र में निधन हो गया। वे शिक्षा और समाज से जुड़े विषयों पर रिसर्च और अध्यापन करते थे। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे उन्हें दक्षिण लंदन के बैटरसी स्थित उनके घर में बेहोश पाया गया। एंबुलेंस टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, उनकी मौत अचानक हुई। अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे मौत को संदिग्ध माना जाए। पुलिस परिवार के संपर्क में है और मामले की जांच कर रही है। मौत से कुछ दिन पहले ही कैम्ब्रिज से दिया था इस्तीफा जेसन अर्डे ने 5 अगस्त को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था। यह फैसला उनकी कुछ रिसर्च को लेकर उठे सवालों के बीच आया था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने उनकी नियुक्ति और यूनिवर्सिटी में उनके कामकाज की जांच भी शुरू की थी। यूनिवर्सिटी यह पता लगा रही थी कि अर्डे को 2022 में प्रोफेसर की नौकरी कैसे मिली और उनके काम के दौरान क्या हुआ। इस्तीफा देने के बाद अर्डे ने कहा था कि लगातार लग रहे आरोपों और उनके बारे में सार्वजनिक रूप से की जा रही टिप्पणियों का उन पर बहुत गहरा असर पड़ा। रिसर्च के कुछ हिस्सों पर नकल के आरोप लगे थे अर्डे ने 2015 में ब्रिटेन की लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी। इस दौरान उन्होंने एक रिसर्च रिपोर्ट लिखी थी। बाद में उनकी रिसर्च के कुछ हिस्सों पर आरोप लगे कि उन्होंने दूसरे लोगों के लिखे काम को बिना उचित श्रेय दिए अपनी रिसर्च में इस्तेमाल किया। आसान भाषा में कहें तो उन पर रिसर्च में नकल करने का आरोप लगा था। अर्डे ने इन आरोपों को गलत बताया था। इसके बाद उनकी कुछ दूसरी रिसर्च में भी गलतियां होने के आरोप लगाए गए। नियुक्ति पर भी उठे थे सवाल अर्डे की कैम्ब्रिज में नियुक्ति को लेकर भी विवाद हुआ था। कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी योग्यता के बजाय यूनिवर्सिटी की विविधता बढ़ाने वाली नीति के तहत नौकरी दी गई। इस तरह की नीतियों को आम तौर पर DEI कहा जाता है। इसका मतलब है कि अलग-अलग समुदायों और कम प्रतिनिधित्व वाले लोगों को संस्थानों में बराबर मौके दिए जाएं और उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए। हालांकि, ब्रिटेन की शिक्षक यूनियन के नेता डेनियल कबेडे ने अर्डे का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि अर्डे को सार्वजनिक रूप से बहुत बुरी तरह निशाना बनाया गया। उन्होंने ब्रिटिश मीडिया और दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों के एक वर्ग पर अर्डे के खिलाफ नस्लवादी अभियान चलाने का आरोप लगाया था। परिवार बोला- गलत जानकारी के अभियान ने उन्हें बहुत परेशान किया अर्डे के परिवार ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया। परिवार ने कहा कि जेसन के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारी के अभियान का उन पर बहुत बुरा असर पड़ा था। परिवार के मुताबिक, अर्डे शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और हमेशा दूसरों में अच्छाई देखने की कोशिश करते थे। परिवार ने मीडिया से अपील की कि अब उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। उन्होंने जेसन और उनके परिवार के खिलाफ लंबे समय से चल रहे उत्पीड़न को रोकने की भी अपील की। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रमुख डेबोरा प्रेंटिस ने अर्डे की मौत पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में उनकी संवेदनाएं अर्डे के परिवार और दोस्तों के साथ हैं। ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री लूसी पॉवेल ने भी उनके निधन पर शोक जताया। 2022 में कैम्ब्रिज में बनाया था इतिहास जेसन अर्डे 2022 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शिक्षा विभाग में प्रोफेसर बने थे। वे यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर थे। कैम्ब्रिज में लंबे समय से अश्वेत लोगों की संख्या कम रही है। ऐसे में अर्डे की नियुक्ति को यूनिवर्सिटी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया था।
कंगना रनोट के 2 साल में सिर्फ 16 काम पूरे:वर्क कंप्लीशन रेट सबसे कम; अनुराग ठाकुर समेत हिमाचल के चारों सांसदों का रिपोर्ट कार्ड जानिए

हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट की जनता ने बेहतर विकास की उम्मीद में कांग्रेस सरकार के PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह को हराकर सेलिब्रिटी कंगना रनोट को संसद भेजा। मगर, कंगना का 2 साल से अधिक का ‘रिपोर्ट कार्ड’ हिमाचल के चारों सांसदों में सबसे निराशाजनक रहा है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) के अनुसार, कंगना के चुनाव क्षेत्र में कुल 314 काम चल रहे हैं। दो साल बीतने पर भी महज 16 काम ही पूरे हुए हैं। कंगना की वर्क कम्पलीशन रेट चारों सांसदों में सबसे कम 5.1% है। कंगना को अब तक सांसद निधि के ₹14.7 करोड़ मिले हैं। इसमें से कंगना 11 अगस्त तक मात्र ₹4.1 करोड़ खर्च कर पाई हैं। कंगना की फंड यूटिलाइजेशन दर 27.6% है, जबकि राष्ट्रीय औसत 32.9% है। अनुराग ठाकुर भी कंगना से बेहतर नहीं हमीरपुर के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी कंगना से बेहतर नहीं है। अनुराग ₹15 करोड़ में से दो साल में मात्र ₹1.7 करोड़ खर्च कर पाए हैं, जबकि ₹13.2 करोड़ अनस्पेंट है। अनुराग का चारों सांसदों में सबसे ज्यादा अनस्पेंट बजट है। फंड यूटिलाइजेशन में शिमला के सांसद सुरेश कश्यप और वर्क कम्पलीशन में कांगड़ा के सांसद राजीव भारद्वाज आगे जरूर हैं, लेकिन राष्ट्रीय औसत से दोनों पीछे हैं। कंगना समेत चारों सांसदों का रिपोर्ट कार्ड… सांसदों को MPLADS में कितना पैसा मिलता है? हर सांसद को सालाना ₹5 करोड़ का MPLADS फंड मिलता है। यह पैसा सांसद के खाते में सीधे नहीं आता। सांसद अपने क्षेत्र में विकास कार्यों की सिफारिश करते हैं, जबकि राशि जिला प्राधिकरण को जारी होती है और संबंधित सरकारी एजेंसी काम करवाती है। फंड खर्च करने में फिसड्डी क्यों? बेशक, MPLADS का पैसा सांसद खुद खर्च नहीं करते। फिर भी सांसदों की जिम्मेदारी बनती है कि उनके क्षेत्र में विकास कार्य समय पर पूरे हो सकें। वे जरूरी कामों की पहचान, उनकी प्राथमिकता तय करने और उनकी प्रगति की निगरानी कर सकते हैं। खासकर जब बड़ी संख्या में काम स्वीकृत या अनुशंसित हों, तो सांसद कार्यालय की ओर से जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ नियमित फॉलोअप महत्वपूर्ण हो जाता है।
हाथ फ्रैक्चर था, अगले दिन विराट कोहली के साथ शूट:मिहिर आहूजा बोले- शाहरुख की तारीफ से लगा, मेहनत सही दिशा में जा रही है

जमशेदपुर से मुंबई आए मिहिर आहूजा ने एक्टिंग के लिए करीब चार साल तक ऑडिशन दिए। सुपर 30 से फिल्मी सफर शुरू हुआ, द आर्चीज से पहचान मिली और अब ऑपरेशन सफेद सागर में एयरफोर्स ऑफिसर के किरदार में नजर आ रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में मिहिर ने संघर्ष, रिजेक्शन, शाहरुख खान से मुलाकात और प्यार पैसा प्राफिट को लेकर हुई चर्चा पर बात की। सवाल: जमशेदपुर में रहते हुए एक्टिंग की तरफ आपका झुकाव कैसे हुआ? जवाब: मुझे याद नहीं कि मैंने कभी एक्टिंग के अलावा कुछ और करने के बारे में सोचा हो। सातवीं-आठवीं क्लास में ही तय कर लिया था कि मुझे एक्टर बनना है। घर के फंक्शन में मैं रिश्तेदारों की मिमिक्री करता था। लोग खुश होते थे और मुझे भी परफॉर्म करने में मजा आता था। वहीं से लगा कि मुझे यही करना है। सवाल: स्कूल के दिनों में जब आप एक्टिंग को लेकर इतने सीरियस थे, तो क्या लोगों ने आपका मजाक भी उड़ाया? जवाब: जमशेदपुर में मैंने एक छोटी-सी शॉर्ट फिल्म की थी। उसके बाद स्कूल में चर्चा होने लगी कि मैं फिल्म शूट करके आया हूं। उसी दौरान 10वीं में एक दिन मैं नोटबुक नहीं लेकर आया। टीचर ने मेरी नोटबुक डस्टबिन में फेंकते हुए कहा, ‘तुम खुद को सुपरस्टार समझते हो? तुम सुपरस्टार नहीं हो और कभी बन भी नहीं पाओगे।’ मैंने उसी दिन उनकी ये बात लिखकर रख ली थी। आज भी वो कागज मेरे पास है। उस दिन उन्होंने जो पत्थर मुझ पर फेंका था, मैंने उसी से अपनी इमारत बनाना सीख लिया। मैंने इंडिया गॉट टैलेंट में भी कोशिश की थी, लेकिन वहां से रिजेक्ट हो गया। उस समय दुख हुआ, लेकिन बाद में समझ आया कि रिजेक्शन इस फील्ड का हिस्सा है। सवाल: फिर मुंबई आने का फैसला कब किया? जवाब: 2017 में मैं मुंबई आया। हालांकि उससे पहले 10वीं के बाद छुट्टियों में भी मुंबई आया था। परिवार के साथ आकर देखा कि ऑडिशन कहां होते हैं। मैंने कई जगह अपना परिचय दिया। जमशेदपुर लौटने के बाद भी एड्स के लिए ऑडिशन आने लगे। इससे भरोसा बढ़ा कि अगर कोशिश करता रहूंगा तो कुछ न कुछ जरूर होगा। सवाल: मुंबई आने के बाद आपने पढ़ाई और ऑडिशन दोनों कैसे संभाले? जवाब: मैं कॉलेज के लिए मुंबई आया था, इसलिए रूटीन बन गया था- सुबह कॉलेज और शाम को ऑडिशन। यही मेरे लिए अच्छा रहा। अगर मैं सिर्फ एक्टिंग के लिए आता और काम नहीं मिलता तो शायद बहुत मुश्किल होती। मैंने ऑडिशन देने के अपने तरीके भी निकाल लिए थे। कई बार दोस्तों या आसपास के लोगों को नहीं बताता था कि एक्टर बनने आया हूं। ऑडिशन के कपड़े बैग में रखता और कह देता था कि ट्यूशन के लिए जा रहा हूं। सवाल: इतने साल ऑडिशन देने के बाद पहला बड़ा मौका कैसे मिला? जवाब: करीब चार साल तक ऑडिशन देने के बाद मुझे विराट कोहली के साथ कोलगेट का एड मिला। लेकिन शूट से एक दिन पहले मेरा एक्सीडेंट हो गया। बाइक ने मुझे टक्कर मार दी और मेरा हाथ फ्रैक्चर हो गया। अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर ने आराम करने को कहा। लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ यही था कि अगले दिन मेरा पहला बड़ा शूट है, वह भी विराट कोहली के साथ। मैंने डॉक्टर से कहा कि प्लास्टर मत कीजिए, मुझे शूट करना है। पेनकिलर लेकर अगले दिन शूट पर चला गया। सवाल: उसके बाद फिल्म में पहला मौका कब मिला? जवाब: सुपर 30 से मेरा फिल्मी सफर शुरू हुआ। ऋतिक रोशन के साथ काम करने का मौका मिला। हालांकि फिल्म में मेरा रोल छोटा रह गया और मेरे हिस्से का काफी काम एडिट हो गया। लेकिन मेरे लिए वह बड़ा अनुभव था। सवाल: सुपर 30 के बाद भी आपको पहचान मिलने में समय लगा? जवाब: हां, मैंने उसके बाद भी काम किया। मेड इन हेवन, फील्स लाइक इश्क और दूसरे प्रोजेक्ट किए। लेकिन द आर्चीज के बाद चीजें बदलीं। फिल्म में मुझे जुगहेड जोन्स का किरदार मिला और लोगों ने मुझे नोटिस किया। सवाल: द आर्चीज के दौरान शाहरुख खान से मुलाकात का मौका भी मिला? जवाब: हां, वह मेरे लिए खास अनुभव था। शाहरुख सर से मिलना अपने आप में बड़ी बात थी। मैं उन्हें देखकर बड़ा हुआ हूं। द आर्चीज के प्रीमियर में उनसे मिलने और बात करने का मौका मिला। उन्होंने मेरे काम को लेकर जो बातें कहीं, वह मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं। उन्होंने कहा था- बेटा, बस अच्छा काम करते रहो, यही मैंने भी किया है।ऐसे पलों से आपको लगता है कि आपकी मेहनत सही दिशा में जा रही है। सवाल: इसके बाद प्यार पैसा प्राफिट में महवश के साथ काम किया। इस शो को लेकर काफी बातें हुईं, खासकर इंटिमेट सीन को लेकर, क्या कहना चाहोगे? जवाब: वह बात काफी बढ़ा-चढ़ाकर कही गई। शो में ऐसा कोई इंटिमेट सीन नहीं था, जैसा सोशल मीडिया के कुछ थंबनेल में दिखाया गया। एक किसिंग सीन भी था, जिसे हमने चीट करके शूट किया था। असल में कहानी अच्छी थी और मुझे अपना किरदार पसंद आया, इसलिए मैंने शो किया। कुछ लोगों ने सिर्फ व्यूज के लिए चीजों को अलग तरह से पेश किया। सवाल: इसी शो के दौरान आपको ऑपरेशन सफेद सागर का ऑफर मिला? जवाब: हां। जब प्यार पैसा प्राफिट की शूटिंग चल रही थी, उसी दौरान मुझे ऑपरेशन सफेद सागर के ऑडिशन का फोन आया। पहले मुझसे मूंछों में तस्वीरें मांगी गईं। मैंने मूंछ रखकर फोटो भेजी और सोचा कि पता नहीं कैसा किरदार होगा। बाद में पता चला कि एयरफोर्स ऑफिसर का रोल है। स्क्रिप्ट पढ़ी तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। यह कारगिल युद्ध और एयरफोर्स की एक सच्ची कहानी से जुड़ी है। मुझे लगा कि ऐसा किरदार करने का मौका छोड़ना नहीं चाहिए। सवाल: एयरफोर्स ऑफिसर बनने के लिए सबसे अलग अनुभव क्या रहा? जवाब: असली एयरफोर्स स्टेशन पर शूट करना। फाइटर जेट के सामने खड़े होना और कॉकपिट में बैठना मेरे लिए अविश्वसनीय था। कॉकपिट में इतने कंट्रोल थे कि मैं सोच रहा था कि पायलट इन्हें याद कैसे रखते हैं। जिस मिग में मैं बैठा, वह कारगिल युद्ध के समय इस्तेमाल हुआ था। उसे देखकर एहसास होता
हाथ फ्रैक्चर था, अगले दिन विराट कोहली के साथ शूट:मिहिर आहूजा बोले- शाहरुख की तारीफ से लगा, मेहनत सही दिशा में जा रही है

जमशेदपुर से मुंबई आए मिहिर आहूजा ने एक्टिंग के लिए करीब चार साल तक ऑडिशन दिए। सुपर 30 से फिल्मी सफर शुरू हुआ, द आर्चीज से पहचान मिली और अब ऑपरेशन सफेद सागर में एयरफोर्स ऑफिसर के किरदार में नजर आ रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में मिहिर ने संघर्ष, रिजेक्शन, शाहरुख खान से मुलाकात और प्यार पैसा प्राफिट को लेकर हुई चर्चा पर बात की। सवाल: जमशेदपुर में रहते हुए एक्टिंग की तरफ आपका झुकाव कैसे हुआ? जवाब: मुझे याद नहीं कि मैंने कभी एक्टिंग के अलावा कुछ और करने के बारे में सोचा हो। सातवीं-आठवीं क्लास में ही तय कर लिया था कि मुझे एक्टर बनना है। घर के फंक्शन में मैं रिश्तेदारों की मिमिक्री करता था। लोग खुश होते थे और मुझे भी परफॉर्म करने में मजा आता था। वहीं से लगा कि मुझे यही करना है। सवाल: स्कूल के दिनों में जब आप एक्टिंग को लेकर इतने सीरियस थे, तो क्या लोगों ने आपका मजाक भी उड़ाया? जवाब: जमशेदपुर में मैंने एक छोटी-सी शॉर्ट फिल्म की थी। उसके बाद स्कूल में चर्चा होने लगी कि मैं फिल्म शूट करके आया हूं। उसी दौरान 10वीं में एक दिन मैं नोटबुक नहीं लेकर आया। टीचर ने मेरी नोटबुक डस्टबिन में फेंकते हुए कहा, ‘तुम खुद को सुपरस्टार समझते हो? तुम सुपरस्टार नहीं हो और कभी बन भी नहीं पाओगे।’ मैंने उसी दिन उनकी ये बात लिखकर रख ली थी। आज भी वो कागज मेरे पास है। उस दिन उन्होंने जो पत्थर मुझ पर फेंका था, मैंने उसी से अपनी इमारत बनाना सीख लिया। मैंने इंडिया गॉट टैलेंट में भी कोशिश की थी, लेकिन वहां से रिजेक्ट हो गया। उस समय दुख हुआ, लेकिन बाद में समझ आया कि रिजेक्शन इस फील्ड का हिस्सा है। सवाल: फिर मुंबई आने का फैसला कब किया? जवाब: 2017 में मैं मुंबई आया। हालांकि उससे पहले 10वीं के बाद छुट्टियों में भी मुंबई आया था। परिवार के साथ आकर देखा कि ऑडिशन कहां होते हैं। मैंने कई जगह अपना परिचय दिया। जमशेदपुर लौटने के बाद भी एड्स के लिए ऑडिशन आने लगे। इससे भरोसा बढ़ा कि अगर कोशिश करता रहूंगा तो कुछ न कुछ जरूर होगा। सवाल: मुंबई आने के बाद आपने पढ़ाई और ऑडिशन दोनों कैसे संभाले? जवाब: मैं कॉलेज के लिए मुंबई आया था, इसलिए रूटीन बन गया था- सुबह कॉलेज और शाम को ऑडिशन। यही मेरे लिए अच्छा रहा। अगर मैं सिर्फ एक्टिंग के लिए आता और काम नहीं मिलता तो शायद बहुत मुश्किल होती। मैंने ऑडिशन देने के अपने तरीके भी निकाल लिए थे। कई बार दोस्तों या आसपास के लोगों को नहीं बताता था कि एक्टर बनने आया हूं। ऑडिशन के कपड़े बैग में रखता और कह देता था कि ट्यूशन के लिए जा रहा हूं। सवाल: इतने साल ऑडिशन देने के बाद पहला बड़ा मौका कैसे मिला? जवाब: करीब चार साल तक ऑडिशन देने के बाद मुझे विराट कोहली के साथ कोलगेट का एड मिला। लेकिन शूट से एक दिन पहले मेरा एक्सीडेंट हो गया। बाइक ने मुझे टक्कर मार दी और मेरा हाथ फ्रैक्चर हो गया। अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर ने आराम करने को कहा। लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ यही था कि अगले दिन मेरा पहला बड़ा शूट है, वह भी विराट कोहली के साथ। मैंने डॉक्टर से कहा कि प्लास्टर मत कीजिए, मुझे शूट करना है। पेनकिलर लेकर अगले दिन शूट पर चला गया। सवाल: उसके बाद फिल्म में पहला मौका कब मिला? जवाब: सुपर 30 से मेरा फिल्मी सफर शुरू हुआ। ऋतिक रोशन के साथ काम करने का मौका मिला। हालांकि फिल्म में मेरा रोल छोटा रह गया और मेरे हिस्से का काफी काम एडिट हो गया। लेकिन मेरे लिए वह बड़ा अनुभव था। सवाल: सुपर 30 के बाद भी आपको पहचान मिलने में समय लगा? जवाब: हां, मैंने उसके बाद भी काम किया। मेड इन हेवन, फील्स लाइक इश्क और दूसरे प्रोजेक्ट किए। लेकिन द आर्चीज के बाद चीजें बदलीं। फिल्म में मुझे जुगहेड जोन्स का किरदार मिला और लोगों ने मुझे नोटिस किया। सवाल: द आर्चीज के दौरान शाहरुख खान से मुलाकात का मौका भी मिला? जवाब: हां, वह मेरे लिए खास अनुभव था। शाहरुख सर से मिलना अपने आप में बड़ी बात थी। मैं उन्हें देखकर बड़ा हुआ हूं। द आर्चीज के प्रीमियर में उनसे मिलने और बात करने का मौका मिला। उन्होंने मेरे काम को लेकर जो बातें कहीं, वह मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं। उन्होंने कहा था- बेटा, बस अच्छा काम करते रहो, यही मैंने भी किया है।ऐसे पलों से आपको लगता है कि आपकी मेहनत सही दिशा में जा रही है। सवाल: इसके बाद प्यार पैसा प्राफिट में महवश के साथ काम किया। इस शो को लेकर काफी बातें हुईं, खासकर इंटिमेट सीन को लेकर, क्या कहना चाहोगे? जवाब: वह बात काफी बढ़ा-चढ़ाकर कही गई। शो में ऐसा कोई इंटिमेट सीन नहीं था, जैसा सोशल मीडिया के कुछ थंबनेल में दिखाया गया। एक किसिंग सीन भी था, जिसे हमने चीट करके शूट किया था। असल में कहानी अच्छी थी और मुझे अपना किरदार पसंद आया, इसलिए मैंने शो किया। कुछ लोगों ने सिर्फ व्यूज के लिए चीजों को अलग तरह से पेश किया। सवाल: इसी शो के दौरान आपको ऑपरेशन सफेद सागर का ऑफर मिला? जवाब: हां। जब प्यार पैसा प्राफिट की शूटिंग चल रही थी, उसी दौरान मुझे ऑपरेशन सफेद सागर के ऑडिशन का फोन आया। पहले मुझसे मूंछों में तस्वीरें मांगी गईं। मैंने मूंछ रखकर फोटो भेजी और सोचा कि पता नहीं कैसा किरदार होगा। बाद में पता चला कि एयरफोर्स ऑफिसर का रोल है। स्क्रिप्ट पढ़ी तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। यह कारगिल युद्ध और एयरफोर्स की एक सच्ची कहानी से जुड़ी है। मुझे लगा कि ऐसा किरदार करने का मौका छोड़ना नहीं चाहिए। सवाल: एयरफोर्स ऑफिसर बनने के लिए सबसे अलग अनुभव क्या रहा? जवाब: असली एयरफोर्स स्टेशन पर शूट करना। फाइटर जेट के सामने खड़े होना और कॉकपिट में बैठना मेरे लिए अविश्वसनीय था। कॉकपिट में इतने कंट्रोल थे कि मैं सोच रहा था कि पायलट इन्हें याद कैसे रखते हैं। जिस मिग में मैं बैठा, वह कारगिल युद्ध के समय इस्तेमाल हुआ था। उसे देखकर एहसास होता









