मुंबई महिला लीग ऑक्शन- इरा जाधव की सबसे महंगी खिलाड़ी:आकाश टाइगर्स ने 10 लाख में खरीदा, U-19 में तिहरा शतक लगाया

16 साल की इरा जाधव पहली मुंबई महिला लीग नीलामी की सबसे महंगी खिलाड़ी बन गई हैं। उन्हें शनिवार को आकाश टाइगर्स ने 10 लाख रुपए में खरीदा। इरा ने पिछले साल अंडर-19 क्रिकेट में तिहरा शतक लगाया था। उन्हें आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) की ऑक्शन में कुल 363 विमेंस प्लेयर्स पर बोली लगी। इनमें से 50 खिलाड़ियों को तीन फ्रेंचाइजी ने अपनी टीम में शामिल किया। फ्रेंचाइजी ने कुल 1.47 करोड़ रुपए खर्च किए। लीग में शामिल होने वाली तीन टीमें- सोबो मुंबई फाल्कन्स, ठाणे स्काई राइजर्स और आकाश टाइगर्स हैं। जगमोहन डालमिया ट्रॉफी जीत चुकी हैं इरा इरा जाधव का हालिया प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्हें ‘नमन अवॉर्ड्स 2026’ में बेस्ट घरेलू क्रिकेटर के लिए जगमोहन डालमिया ट्रॉफी से सम्मानित किया गया था। सिर्फ 14 साल की उम्र में उन्होंने विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। अब वे इस लीग में प्रदर्शन करके WPL के अगले सीजन के लिए दावा मजबूत करना चाहती हैं। सयाली, साइमा और हुमैरा बनीं ‘आइकन प्लेयर’ MCA ने लीग के पहले सीजन के लिए तीन अनुभवी खिलाड़ियों को ‘आइकन प्लेयर’ के तौर पर चुना है। भारतीय टीम का हिस्सा रह चुकीं सयाली सतघरे ‘सोबो मुंबई फाल्कन्स’ की आइकन होंगी, जबकि साइमा ठाकुर ‘ठाणे स्काई राइजर्स’ और हुमैरा काजी ‘आकाश टाइगर्स’ का प्रतिनिधित्व करेंगी। इन खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय और घरेलू अनुभव लीग के स्तर को और ऊंचा ले जाएगा। नाइक बोले- यह मुंबई क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक शुरुआत MCA अध्यक्ष अजिंक्य नाइक ने कहा कि यह लीग भारत में महिला क्रिकेट के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। नीलामी के लिए कुल 2,411 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से अंतिम छंटनी के बाद पुरुष और महिला खिलाड़ियों की नीलामी एक साथ आयोजित की गई। जल्द ही शुरू होने वाली इस लीग से मुंबई के फैंस को रोमांचक क्रिकेट देखने की उम्मीद है। ——————————————————– महिला क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… विमेंस टी-20 वर्ल्डकप के लिए टीम इंडिया का ऐलान BCCI ने विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय महिला टीम का ऐलान कर दिया है। पिछले साल वनडे वर्ल्डकप जिताने वालीं कप्तान हरमनप्रीत कौर को ही टीम की कप्तानी सौंपी गई है, जबकि स्मृति मंधाना को ही वाइस कैप्टन बनाया गया है। पढ़ें पूरी खबर
अब असम में खेला जाएगा? कांग्रेस ने डिजिटल पोल को बताया गलत, डेके शिवकुमार ने बीजेपी पर लगाया बड़ा दावा

असम चुनाव 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सबसे पहले मोटरसाइकिल रैली को तेज किया गया है, जहां कांग्रेस और सहयोगी आश्रम ने दावा किया है कि राज्य में उनकी सरकार बनने जा रही है और पार्टी पोल को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की जा रही है। शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक डी.के. शिवकुमार, चंबाल बजाजा और संगीतकार सिंह ने गठबंधन के सहयोगियों के साथ बैठक की, जबकि कांग्रेस ने इस चुनाव में राइजोर दल, असम जाति परिषद (एजेपी), सी.के.एल.एच.एल.सी. (एम.), ए.पी.एच.एल.सी. और सी.आर.आई. गौरव गोगोई का दावा- आराम से लेगी सरकार बैठक के बाद असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने दावा किया कि गठबंधन आराम से सरकार बनाएगा और कहा कि राज्य के लोगों, किसानों, युवाओं और महिलाओं ने बदलाव के लिए वोट दिया है, साथ ही उन्होंने समीक्षित दल की रणनीति पर सहमति जताते हुए कहा कि 4 मई को नतीजे आएंगे और सभी को एक मजबूत कमरे पर नजर रखनी होगी। ‘डर की वजह से लोग फ़्रांसीसी नहीं बोले’ कर्नाटक के स्नातक डी.के. शिवकुमार ने भी एलेक्टिट पोल को खारिज करते हुए कहा कि लाइब्रेरी में डार का मनोबल है, इसलिए लोग फ्रैंक राय अपने पास नहीं रख पाए, उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी से सहमति नहीं बनने वालों को सरकारी मंजूरी का लाभ नहीं मिल रहा है और उनकी टीम मजबूत और एकजुट है। शिवकुमार ने यह भी दावा किया कि बीजेपी के कुछ नेता खतरे की हार के बावजूद कांग्रेस के संपर्क में आने की कोशिश कर रहे हैं और पार्टी को अपने आंतरिक सर्वेक्षण पर पूरा भरोसा है। एक्जालिट पोल में एनडीए को बढ़त बीजेपी के नेतृत्व में एक्सिस माय इंडिया ने जहां एनडीए को 88-100 सीटें, जेवीसी ने 88-101 और मैट्रिज ने 85-95 सीटें दीं, वहीं कांग्रेस गठबंधन को 23 से 36 सीटें मिलीं। असम विधानसभा का चुनाव प्रारंभिक 4 मई को होगा और इस बार कांग्रेस ने छह गठबंधन के साथ गठबंधन बीजेपी के नेतृत्व वाले चेहरे को चुनौती दी है। (टैग्सटूट्रांसलेट)असम चुनाव 2026(टी)कांग्रेस(टी)असम चुनाव 2026(टी)कांग्रेस का दावा(टी)एग्जिट पोल विवाद(टी)एनडीए लीड(टी)गौरव गोगोई का बयान(टी)डीके शिवकुमार(टी)चुनाव परिणाम 4 मई(टी)असम की राजनीति(टी)गठबंधन सरकार(टी)बीजेपी बनाम कांग्रेस(टी)असम चुनाव 2026(टी)कांग्रेस दावा
नारियल पानी या गन्ने का जूस, गर्मी में क्या है ज्यादा फायदेमंद? डॉक्टर ने दिया सही जवाब

Last Updated:May 02, 2026, 18:08 IST गर्मी में ठंडक पाने के लिए लोग अक्सर नारियल पानी और गन्ने का जूस दो आसान विकल्पों की ओर बढ़ते हैं. लेकिन हर घूंट का असर एक जैसा नहीं होता. कभी शरीर को तुरंत ताकत की जरूरत होती है, तो कभी सिर्फ पानी की कमी पूरी करनी होती है. ऐसे में चुनाव सोच-समझकर करना जरूरी हो जाता है. सही समय, सही मात्रा और अपनी जरूरत को समझना ही असली समझदारी है. तो आइए जानते है कौन सा ड्रिंक गर्मी के लिए ज्यादा फायदेमंद है. नई दिल्ली: गर्मी के मौसम में ठंडक पाने के लिए लोग अक्सर नारियल पानी और गन्ने के जूस का सहारा लेते हैं, लेकिन दोनों का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता. कभी शरीर को तुरंत ऊर्जा की जरूरत होती है, तो कभी सिर्फ पानी की कमी पूरी करनी होती है. ऐसे में सही विकल्प का चुनाव सोच-समझकर करना जरूरी है. विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय, सही मात्रा और शरीर की जरूरत को समझकर ही इन पेयों का सेवन करना चाहिए. वरना राहत देने वाली चीज कभी-कभी परेशानी भी बढ़ा सकती है. डॉक्टर की रायडॉ. सुनीता चौधरी के अनुसार, नारियल पानी और गन्ने का जूस दोनों ही फायदेमंद हैं, लेकिन इन्हें शरीर की जरूरत के हिसाब से लेना चाहिए. नारियल पानी में पोटैशियम और सोडियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन को जल्दी दूर करते हैं. खासकर लू लगने या बार-बार प्यास लगने की स्थिति में नारियल पानी ज्यादा असरदार होता है. गन्ने के जूस के फायदेगन्ने का जूस शरीर को तुरंत ऊर्जा देने में मदद करता है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक शर्करा होती है. अगर किसी को कमजोरी महसूस हो रही हो या शुगर लेवल कम लग रहा हो, तो गन्ने का जूस एक अच्छा विकल्प हो सकता है. हालांकि, इसे पीते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि जूस मशीन या गन्ने की सतह पर गंदगी होने का खतरा रहता है, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है. किसे क्या चुनना चाहिएडॉक्टरों के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों को गन्ने का जूस पीने से बचना चाहिए और उनके लिए नारियल पानी ज्यादा सुरक्षित विकल्प है. वहीं, जिन लोगों को बार-बार डिहाइड्रेशन की समस्या होती है, उनके लिए भी नारियल पानी बेहतर माना जाता है. सही समय और मात्राडॉ. चौधरी का कहना है कि दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करनी चाहिए. इसके बाद सुबह करीब 11 बजे के आसपास नारियल पानी या गन्ने का जूस लिया जा सकता है. मात्रा की बात करें तो एक बार में लगभग 200 मिली यानी एक गिलास पर्याप्त होता है. ज्यादा मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए, ताकि शरीर पर इसका नकारात्मक असर न पड़े. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
न्यूयॉर्क में सालाना 2 करोड़ या भारत में 60 लाख?:सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस; लोग बोले- जिंदगी को सिर्फ पैसों से नहीं माप सकते

भारतीय युवाओं के बीच विदेश में नौकरी करने का सपना अब सिर्फ बड़ी सैलरी तक सीमित नहीं रह गया है। बेहतर लाइफस्टाइल, ग्लोबल एक्सपोजर और करिअर ग्रोथ के साथ अब लोग यह भी सोचने लगे हैं कि क्या विदेश जाकर वास्तव में जिंदगी बेहतर होती है। इसी सवाल ने सोशल मीडिया पर तब नई बहस छेड़ दी, जब एक भारतीय प्रोफेशनल ने न्यूयॉर्क की हाई-पेइंग जॉब और भारत में आरामदायक जिंदगी के बीच अपनी दुविधा साझा की। रेडिट पर ‘भारत में सालाना 60 लाख बनाम न्यूयॉर्क में 2 करोड़’ शीर्षक से लिखी गई पोस्ट वायरल हो गई। प्रोफेशनल ने बताया कि उन्हें न्यूयॉर्क में 2.2 लाख डॉलर सालाना यानी करीब ₹2 करोड़ का ऑफर मिला है, जो बढ़कर 2.3 लाख डॉलर (2.2 करोड़ रुपए) तक जा सकता है। दूसरी तरफ भारत में रहने पर प्रमोशन के बाद उनकी सालाना सैलरी करीब ₹80 लाख तक पहुंच सकती है। प्रोफेशनल ने बताया कि उनके ऊपर कोई कर्ज नहीं है, अच्छी-खासी बचत है और भारत में हर महीने करीब ₹3.4 लाख की पैसिव इनकम भी आती है, जो विदेश जाने पर भी जारी रह सकती है। यही वजह है कि पहले जो ऑफर ‘ड्रीम मूव’ लग रहा था, अब उसी पर संदेह होने लगा है। इस पर सोशल मीडिया पर लोगों की राय दो हिस्सों में बंटी नजर आई। कई यूजर्स ने कहा कि जिंदगी को सिर्फ पैसों से नहीं मापा जा सकता। कुछ लोगों ने लिखा कि ग्लोबल एक्सपोजर, नेटवर्किंग और करिअर के मौके लंबे समय में भारत की आरामदायक नौकरी से ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं। हालांकि दूसरी तरफ कई यूजर्स ने न्यूयॉर्क के महंगी जीवनशैली की याद दिलाई। कुछ ने कहा कि 2.3 लाख डॉलर सुनने में बड़ा पैकेज लगता है, लेकिन टैक्स और किराया निकालने के बाद वहां बचत आसान नहीं होती। कई भारतीय न्यू जर्सी में रहकर रोज न्यूयॉर्क आने-जाने को मजबूर होते हैं। इसीलिए यह चर्चा उस नई सोच के केंद्र में आ गई है जिसमें युवा ‘विदेश यानी बेहतर जिंदगी’ के फॉर्मूले पर दोबारा सोचने लगे हैं। करिअर ग्रोथ, बेतहाशा खर्च, वीसा…हर पहलू पर बहस का बाजार गर्म समर्थकों का तर्क – न्यूयॉर्क में काम करने से ग्लोबल एक्सपोजर और करिअर ग्रोथ के बड़े मौके मिलेंगे। विरोध में राय – न्यूयॉर्क दुनिया के सबसे महंगे शहरों में शुमार है। भारी-भरकम टैक्स, ऊंचा घर किराया और रोजाना लंबी दूरी की यात्रा बड़ी चुनौती बन सकते हैं। वीसा को लेकर चिंता – कुछ यूजर्स ने याद दिलाया कि एच1बी या एल1 वीसा पर आय के अतिरिक्त स्रोत चलाना आसान नहीं होता।
AIIMS portable MRI| Brain Imaging technology| मशीन खुद चलकर आएगी मरीज के पास, करेगी MRI, एम्स दिल्ली में शुरू हुई कमाल की सुविधा

होमताजा खबरDelhi मशीन खुद चलकर आएगी मरीज के पास, करेगी MRI, एम्स में शुरू हुई कमाल की सुविधा Last Updated:May 02, 2026, 17:17 IST AIIMS नई दिल्ली ने देश का पहला पोर्टेबल बेडसाइड MRI शुरू किया है. इससे ICU और इमरजेंसी में बिना मरीज को हिलाए ब्रेन इमेजिंग की जा सकेगी. रेडियोसर्जरी ग्लोबल के सहयोग से इसे एम्स लाया गया है. एम्स नई दिल्ली में शुरू हुई बेडसाइड पोर्टेबल एमआरआई की सुविधा. AIIMS Delhi Portable MRI: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली ने देश में पहली बार पोर्टेबल बेडसाइड MRI सिस्टम शुरू कर दिया है.यह तकनीक गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए गेम चेंजर साबित होने वाली है. अब ICU, इमरजेंसी और न्यूरोसर्जिकल वार्ड में मरीज को बिस्तर से हिलाए बिना ब्रेन की इमेजिंग की जा सकेगी. देश में पहली बार ऐसी कोई मशीन लाई गई है जो न्यरोलॉजी विभाग में क्रांतिकारी साबित होने वाली है. परंपरागत MRI से अलगअभी तक एम्स में पारंपरिक एमआरआई मशीनों से स्कैन किया जाता था. ये एमआरआई मशीनें बड़ी, महंगी और स्थिर होती हैं. इनमें स्कैन के लिए मरीज को ICU से MRI रूम तक ले जाना पड़ता है, जो गंभीर मरीजों के लिए जोखिम भरा होता है. नया अल्ट्रा-लो-फील्ड पोर्टेबल एमआरआई छोटा, व्हील वाला और आसानी से मरीज के बेड तक ले जाया जा सकता है. यह सिस्टम न्यूरोलॉजिकल कंडीशंस सेंटर में डॉ. शैलेश गायकवाड़ की टीम के नेतृत्व में उपयोग में लाया जा रहा है. किन मरीजों को फायदा?डॉ. शैलेश गायकवाड़ ने बताया कि यह तकनीक स्ट्रोक, ट्रॉमा, ICU मॉनिटरिंग, बच्चों और पोस्ट-ऑपरेटिव न्यूरोसर्जिकल केस में तेज डायग्नोसिस की सुविधा देगी. इमरजेंसी में जहां समय की कमी होती है और मरीज को शिफ्ट करना खतरनाक है, वहां यह सिस्टम जीवन रक्षक साबित होगा. डॉक्टरों का कहना है कि इससे फैसला लेने की गति बढ़ेगी और मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी. भारत के लिए ऐतिहासिक कदमभारत में इस पोर्टेबल MRI को नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद AIIMS में लगाया गया है. अस्पताल को रेडियोसर्जरी ग्लोबल के सहयोग से यह उपलब्ध हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पॉइंट-ऑफ-केयर न्यूरो डायग्नोस्टिक्स में नई क्रांति लाएगा. दूरदराज के क्षेत्रों और छोटे अस्पतालों में भी ब्रेन इमेजिंग की पहुंच बढ़ेगी. मरीजों और चिकित्सा क्षेत्र पर प्रभावपोर्टेबल MRI से मरीजों को अनावश्यक ट्रांसफर का खतरा कम होगा, संक्रमण का जोखिम घटेगा और समय की बचत होगी. AIIMS के इस कदम से देशभर के अस्पतालों में ऐसी तकनीक अपनाने की राह खुल सकती है. यह खासकर संसाधन सीमित क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगा. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
मलाइका अरोड़ा बोलीं- बेटे अरहान ने शादी से इनकार किया:कहा- ग्रैंडकिड्स भूल जाइए, प्रदूषण और खराब माहौल में बच्चे नहीं चाहता हूं

मलाइका अरोड़ा ने बेटे अरहान खान को लेकर एक बात शेयर की। उन्होंने बताया कि अरहान ने कहा कि वह शादी नहीं करना चाहते और बच्चे भी प्लान नहीं कर रहे हैं। मलाइका के मुताबिक, बेटे ने मजाक में कहा, “ग्रैंडकिड्स की उम्मीद छोड़ दो।” हाल ही में टाइम्स एंटरटेनमेंट को दिए इंटरव्यू में मलाइका रिश्तों और शादी पर बात कर रही थीं। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी रिश्तों को अलग नजरिए से देखती है। उनका बेटा कई बार ऐसी बातें बोलता है, जो उन्हें सोचने पर मजबूर करती हैं। मलाइका ने बताया कि अरहान ने उनसे कहा, “मैं शादी नहीं करूंगा, इसलिए ग्रैंडकिड्स के बारे में भूल जाइए।” वजह पूछने पर अरहान ने बढ़ते प्रदूषण और खराब माहौल का जिक्र किया। उसने कहा कि AQI 500-1000 तक पहुंच रहा है, ऐसे माहौल में बच्चों को दुनिया में लाना सही नहीं लगता। मलाइका ने माना कि बेटे की सोच उनसे अलग है। उन्होंने उसे समझाया कि जिंदगी के हर फेज का अलग अनुभव होता है और परिवार बनाना भी उसका हिस्सा है। उन्होंने कहा कि रिश्ते बदलते रहते हैं और जिंदगी में कुछ भी स्थायी नहीं होता। इंसान को परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालना पड़ता है। इंटरव्यू में मलाइका ने सेल्फ-लव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वह हर दिन खुद से प्यार करने को कहती हैं, क्योंकि अगर इंसान खुद को स्वीकार नहीं करेगा, तो जिंदगी खुलकर नहीं जी पाएगा। मलाइका अरोड़ा की शादी 1998 में अरबाज खान से हुई थी। दोनों का 2017 में तलाक हो गया था। अरहान उन्हीं के बेटे हैं। तलाक के बाद भी दोनों बेटे की को-पैरेंटिंग कर रहे हैं। मलाइका लंबे समय तक अर्जुन कपूर के साथ रिश्ते को लेकर भी चर्चा में रहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी को दिया झटका, तृतीय वर्ष के लिए केंद्रीय कर्मचारियों के दस्तावेजों के मामले में प्रवेश की अनुमति दी गई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की शुरुआत से पहले सैद्धांतिक कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। तीसरे में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की अपील को चुनौती देने वाली याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जोयामाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग का फैसला पूरी तरह से भूमिका में है। शनिवार को विशेष रूप से दोनों जज बैठे थे। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया। लेकिन बेंच ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने साफ किया कि प्राथमिक स्तर के कर्मचारियों के लिए चुनाव आयोग का अधिकार है। बेंच के अध्यक्ष जस्टिस बागची ने कहा, “चुनाव आयोग के केंद्र में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि कर्मचारी केवल केंद्र का ही होगा। लेकिन अगर वह ऐसा भी लिखते हैं, तब भी हम उन्हें गलत नहीं कहते हैं।” न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि तृतीयक केंद्र में सिटकॉल कैमरा होगा, वहां राजनीतिक वैश्वीकरण के एजेंट होंगे। ऐसे में कलाकार के संकट का कोई आधार नहीं है. चुनाव आयोग के वकील ने क्या कहा इसके बाद चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील डी एस नायडू ने बात शुरू की. नायडू ने कहा कि निराधार खतरों के तहत पूरी याचिका दायर की गई है। चुनाव आयोग के सरकुल में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि तीसरे चरण में राज्य सरकार के कर्मचारियों की कोई भूमिका ही नहीं होगी। यहां तक कि तीन साल के कर्मचारियों के लिए जो रिटर्निंग ऑफीसर विज़ेट है, वह भी राज्य सरकार का ही अधिकारी होता है। आयोग के वकील ने कहा कि पूरा काम ऐतिहासिक कहा जा रहा है। सरकुल में लिखी गई सभी बातों का पालन करना होगा और उसी आधार पर कर्मचारियों की ड्यूटी निभानी होगी। इसके बाद कोर्ट ने कहा, “इस मामले में किसी भी आदेश का पालन नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग ने कहा है कि सरकार का पूरी तरह से पालन नहीं किया जाएगा।” उच्च न्यायालय ने भी टीएमसी के दलालों को खारिज कर दिया था इससे पहले, कैथोलिक कांग्रेस ने येली कलकत्ता उच्च न्यायालय में मूर्ति की स्थापना की थी। 30 अप्रैल को उच्च न्यायालय ने चिकन चॉकलेट्स को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि तीन साल के कर्मचारियों के लिए चुनाव आयोग का पद बनता है। यदि तृतीयक में कोई गड़बड़ी होती है, तो इसके लिए बाद में नामांकन दाखिल किया जा सकता है। केवल खतरों के आधार पर कोई आदेश नहीं दिया जाएगा। यह भी पढ़ें : पश्चिम बंगाल में 15 बूथों पर वोटिंग के दौरान फूट, खुलासा- सामने आए टीएमसी-बीजेपी कार्यकर्ता, वीडियो (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल 2026(टी)पश्चिम बंगाल 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)भारत(टी)ममता बनर्जी(टी)ममता बनर्जी टीएमसी(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी
पापा के करीब रहने बॉलीवुड में आना चाहती थीं त्रिशाला:संजय दत्त की सलाह के बाद एक्टिंग छोड़ी, अब मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बन चुकी हैं

संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त एक समय बॉलीवुड में आना चाहती थीं। इसकी वजह एक्टिंग का सपना नहीं, बल्कि पिता के करीब रहना था। त्रिशाला ने इन्साइड थॉट्स आउट लाउड पॉडकास्ट में कहा कि बचपन में उन्हें लगता था कि फिल्मों में आने से वह पिता के साथ ज्यादा समय बिता पाएंगी। त्रिशाला, संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी ऋचा शर्मा की बेटी हैं। ऋचा का 1996 में ब्रेन ट्यूमर से निधन हुआ था। इसके बाद त्रिशाला अमेरिका में नाना-नानी के साथ पली-बढ़ीं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने बॉलीवुड में आने की इच्छा जताई, तब संजय दत्त ने पूछा था कि क्या एक्टिंग सच में उनका पैशन है। त्रिशाला के मुताबिक, उन्होंने पिता से कहा था कि वह सिर्फ उनके करीब रहना चाहती हैं। इस पर संजय दत्त ने समझाया कि सिर्फ स्टार किड होने से कोई ए-लिस्ट एक्ट्रेस नहीं बनता। उन्होंने बेटी को वही करने की सलाह दी, जिसमें उसकी असली रुचि हो। त्रिशाला ने कहा कि उनके पिता जिंदगी में मुश्किल दौर से गुजरे हैं। उन्होंने हमेशा उन्हें सही दिशा दिखाने की कोशिश की। बॉलीवुड में करियर बनाने के बजाय त्रिशाला ने मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र चुना। वह अब थेरेपिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में मानसिक स्वास्थ्य पर कम खुलकर बात होती है। वह लोगों को बताना चाहती थीं कि संघर्ष सामान्य है। त्रिशाला ने दीपिका पादुकोण की भी तारीफ की, जिन्होंने डिप्रेशन पर खुलकर बात की थी। त्रिशाला ने बताया कि उन्होंने माता-पिता के साथ सामान्य पारिवारिक जिंदगी नहीं जी। वह बचपन से अमेरिका में रहीं और भारत कम आ पाती थीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जब भी वह संजय दत्त के साथ होती हैं, उन्हें सामान्य पिता-बेटी जैसा रिश्ता महसूस होता है।
पापा के करीब रहने बॉलीवुड में आना चाहती थीं त्रिशाला:संजय दत्त की सलाह के बाद एक्टिंग छोड़ी, अब मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बन चुकी हैं

संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त एक समय बॉलीवुड में आना चाहती थीं। इसकी वजह एक्टिंग का सपना नहीं, बल्कि पिता के करीब रहना था। त्रिशाला ने इन्साइड थॉट्स आउट लाउड पॉडकास्ट में कहा कि बचपन में उन्हें लगता था कि फिल्मों में आने से वह पिता के साथ ज्यादा समय बिता पाएंगी। त्रिशाला, संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी ऋचा शर्मा की बेटी हैं। ऋचा का 1996 में ब्रेन ट्यूमर से निधन हुआ था। इसके बाद त्रिशाला अमेरिका में नाना-नानी के साथ पली-बढ़ीं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने बॉलीवुड में आने की इच्छा जताई, तब संजय दत्त ने पूछा था कि क्या एक्टिंग सच में उनका पैशन है। त्रिशाला के मुताबिक, उन्होंने पिता से कहा था कि वह सिर्फ उनके करीब रहना चाहती हैं। इस पर संजय दत्त ने समझाया कि सिर्फ स्टार किड होने से कोई ए-लिस्ट एक्ट्रेस नहीं बनता। उन्होंने बेटी को वही करने की सलाह दी, जिसमें उसकी असली रुचि हो। त्रिशाला ने कहा कि उनके पिता जिंदगी में मुश्किल दौर से गुजरे हैं। उन्होंने हमेशा उन्हें सही दिशा दिखाने की कोशिश की। बॉलीवुड में करियर बनाने के बजाय त्रिशाला ने मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र चुना। वह अब थेरेपिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में मानसिक स्वास्थ्य पर कम खुलकर बात होती है। वह लोगों को बताना चाहती थीं कि संघर्ष सामान्य है। त्रिशाला ने दीपिका पादुकोण की भी तारीफ की, जिन्होंने डिप्रेशन पर खुलकर बात की थी। त्रिशाला ने बताया कि उन्होंने माता-पिता के साथ सामान्य पारिवारिक जिंदगी नहीं जी। वह बचपन से अमेरिका में रहीं और भारत कम आ पाती थीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जब भी वह संजय दत्त के साथ होती हैं, उन्हें सामान्य पिता-बेटी जैसा रिश्ता महसूस होता है।
बेटे के गम में मां की मौत, सदमा कैसे ले लेता है जान, इमोशनल शॉक पीड़ित को कैसे संभालें?

Mental Trauma Effects: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई. जब मां-बेटे में हुई कहासुनी के बाद बेटे ने जहर खाकर जान दे दी तो मां इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने भी फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली. इलाके में इमोशनल शॉक या भावनात्मक सदमे के कारण हुई इन मौतों ने हलचल पैदा कर दी है. लोग बार-बार यही बात कह रहे हैं कि किसी की मौत का सदमा क्या इतना खतरनाक होता है कि खुदकुशी की कर लेते हैं. मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. कल्याणी नागर की मानें तो अचानक का गहरा दुख, तीव्र तनाव, चिंता या ट्रॉमा कई बार व्यक्ति को एक्सट्रीम कदम उठाने पर मजबूर कर देता है. जबकि कई बार इसका साइड इफैक्ट अपने आप ही शरीर पर दिखाई दे जाता है. सदमा भावनात्मक और शारीरिक दोनों रूपों में नुकसान पहुंचा सकता है. सदमा ब्रेन और हार्ट पर सीधा असर डाल सकता है. तीव्र भावनात्मक सदमा ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम या हार्ट अटैक जैसी स्थिति पैदा कर सकता है. अत्यधिक भावनात्मक सदमा व्यक्ति को गहरे अवसाद, हताशा और लाचारी की स्थिति में ले जा सकता है, जहां उसे आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आता. बेटे की मौत के बाद संभव है कि इस मां को भी ऐसा ही लगा हो. हार्ट पर भी असर डालता है सदमा अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार तीव्र सदमा शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (कोर्टिसोल और एड्रेनालाइन) की अचानक वृद्धि कर देता है. इससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हृदय की मांसपेशियां अस्थायी रूप से कमजोर हो सकती हैं. भावनात्मक सदमा अचानक हार्ट अटैक के लक्षण पैदा कर सकता है, जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना. कुछ मामलों में यह हार्ट फेल्योर या अरिदमिया (Arrhythmia) का कारण बन जाता है, खासकर पहले से हृदय रोग वाले लोगों में. कैसे पहचानें खतरे के संकेत?ऐसे में डॉक्टर और एसोसिएशन अक्सर सलाह देते हैं कि जब भी कोई बेहद दुख की घटना हो जाए तो उससे जुड़े व्यक्ति का खास ध्यान रखना जरूरी है, हल्की सी लापरवाही भी जानलेवा हो जाती है. सदमा एक्यूट और क्रॉनिक दोनों ही स्थितियों में खराब है. सदमे में व्यक्ति चुप रह सकता है, रो सकता है या अचानक बेहोश हो सकता है. उसके सीने में दबाव, बांहों या जबड़े में दर्द, पसीना आना, उल्टी जैसा महसूस हो सकता है. आईसीएमआर की एक रिपोर्ट कहती है कि तीव्र मानसिक तनाव हार्ट अटैक को ट्रिगर कर देता है. सदमे को कैसे संभालें? अगर आपके पास सदमे का पीड़ित है तो उसे शांत जगह पर बिठाएं, गहरी सांस लेने को कहें. अगर उसके सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत 108 या नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं. ECG और ब्लड टेस्ट जरूर करवाएं. अगर वह फिर ठीक से व्यवहार न करे तो उसे मानसिक सहायता दें, सदमे की काउंसलिंग कराएं. परिवार उसके आसपास रहे, उससे लगातार बात करें, उसे अकेले न छोड़ें. . अगर किसी को पहले से दिल की बीमारी है तो उसे झटके से कोई दुखभरी सूचना न दें और उसे लगातार व्यायाम करने व दवा लेने के लिए प्रेरित करें. क्या सदमे से मिल सकती है मुक्ति भावनात्मक सदमा स्ट्रैस कार्डियोमायोपैथी पैदा कर सकता है, जो ज्यादातर मामलों में रिवर्सिबल होता है, लेकिन समय पर इलाज जरूरी है. AIIMS और PGI चंडीगढ़ जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ कहते हैं कि तीव्र दुख में हृदय की निगरानी रखें. योग करें, व्यायाम करें, लोगों से मिलें. स्वस्थ जीवनशैली और मजबूत सामाजिक समर्थन सदमे के प्रभाव को कम कर सकता है.






