किस उम्र से बच्चों की आंखें करवानी चाहिए टेस्ट? सही एज में आई चेकअप क्यों है जरूरी, डॉक्टर से जानिए

Last Updated:April 20, 2026, 15:16 IST When To Go for Kids Eye Test: बच्चों की आंखों की जांच सही उम्र में कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे नजर से जुड़ी समस्याओं को शुरुआती चरण में ही पहचाना जा सकता है. नियमित आई चेकअप बच्चों के बेहतर विकास और पढ़ाई में भी मदद करता है. डॉक्टर की मानें तो 3 साल के बाद साल में एक बार बच्चे की आंखें जरूर चेक करानी चाहिए. 3 साल की उम्र से बच्चों की आंखें चेक करवानी चाहिए. Child Eye Check-Up Guide: आज के जमाने में बच्चों को भी आंखों से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं. 3 से 4 साल की उम्र में ही कई बच्चों की आंखों पर चश्मा लग जाता है और इससे बच्चे परेशान होने लगते हैं. कई बार पैरेंट्स को पता ही नहीं चलता है कि उनके बच्चे की नजर कमजोर हो गई है. इसका असर उनकी पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी पर बुरी तरह पड़ता है. आजकल मोबाइल, टीवी और स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल बच्चों की आंखों पर असर डाल रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों की आंखों का टेस्ट किस उम्र से कराना चाहिए और यह क्यों जरूरी है. इस बारे में डॉक्टर से जरूरी बातें जान लेते हैं. नई दिल्ली के विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर और रिफ्रेक्टिव सर्जन डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया नवजात शिशु की आंखों की पहली जांच जन्म के तुरंत बाद ही कर ली जाती है, ताकि किसी जन्मजात समस्या का पता लगाया जा सके. इसके बाद 6 महीने से 1 साल की उम्र के बीच बच्चों की आंखों का एक बेसिक चेकअप करवाना चाहिए. इस उम्र में डॉक्टर यह देखते हैं कि बच्चा चीजों को सही तरीके से देख और पहचान पा रहा है या नहीं. अगर इस चरण में कोई समस्या मिलती है, तो समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है. कई बच्चों में आंखों से जुड़ी जन्मजात समस्याएं भी होती हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर ग्रोवर ने बताया कि 3 से 5 साल की उम्र को बच्चों की आंखों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान उनकी विजन डेवलपमेंट तेजी से होती है. इसलिए इस उम्र में नियमित रूप से आई टेस्ट कराना जरूरी है. अगर इस समय नजर की कमजोरी, भेंगापन या अन्य समस्या पकड़ में आ जाए, तो उसे आसानी से ठीक किया जा सकता है. 5 साल के बाद हर 1 से 2 साल में बच्चों की आंखों की जांच करानी चाहिए. अगर बच्चा बार-बार आंखें मलता है, टीवी के पास बैठता है, सिरदर्द की शिकायत करता है या पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाता, तो ये संकेत हैं कि उसकी नजर कमजोर हो रही है और तुरंत जांच की जरूरत है. एक्सपर्ट के मुताबिक समय पर आंखों की जांच न कराने से मायोपिया या एंब्लायोपिया जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. इनका इलाज शुरुआती उम्र में आसान होता है, लेकिन देर होने पर यह स्थायी भी हो सकती हैं. बच्चों की आंखों की जांच सही उम्र में कराना उनकी अच्छी दृष्टि और बेहतर भविष्य के लिए बेहद जरूरी है. नियमित आई चेकअप से न सिर्फ आंखों की समस्याओं को रोका जा सकता है, बल्कि बच्चे की पढ़ाई और विकास पर भी सकारात्मक असर पड़ता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 20, 2026, 15:09 IST
निहंग सिंहों का अनूठा संकल्प:युद्ध कला में निपुण जत्थेदार बिना कीटनाशक खेती कर रहे, ताकि लंगर पवित्र हो

युद्ध कला के माहिर निहंग सिंह गेहूं को जहरीला होने से बचाने की जंग लड़ रहे हैं। यह संघर्ष इसलिए ताकि गुरुद्वारा साहिबान के छकाए जाने वाले लंगर के प्रसादों की पवित्रता बनी रहे। वे लंगर के लिए 3000 एकड़ में ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं। पेस्टिसाइड की जगह स्वाह, खाद की जगह गोबर डालते हैं। शिरोमणि पंथ अकाली श्री मिसल शहीदां तरनादल बाबा बकाला साहिब के मुखी जत्थेदार बाबा जोगा सिंह व संत बाबा गुरदेव सिंह जी शहीदी बाग श्री आनंदपुद साहिब के निर्देश पर दल के भुजंगी प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। ढैंचा जैसी फसल लगाने से पहले ही मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी पूरी करते हैं, फिर सड़े गोबर को मिट्टी में मिला देते हैं जत्थेदार बाबा जोगा सिंह और बाबा नोध सिंह समाध का प्रबंधन देख रहे बाबा परमिंदरबीर सिंह ने बताया कि जत्थेदार भगवान सिंह गेहूं की क्वालिटी को बरकरार रखने की सेवा विशेष तौर पर निभा रहे हैं। वही दल के खेती जत्थेदार हैं। गेहूं की बुवाई से पहले खेत में ढैंचा जैसी फसलें उगाकर उन्हें जोत दिया जाता है। इससे मिट्टी को भरपूर नाइट्रोजन मिलता है। फिर सड़े हुए गोबर को मिट्टी में मिलाया जाता है। उस पर गेहूं की बिजाई की जाती है। बुवाई के 25-30 दिन बाद हाथों से या छोटे यंत्रों से निराई-गुड़ाई करते हैं। जैसे ही पौधे निकलते हैं तो उनकी जरूरत के मुताबिक स्वाह या नीम के घोल का छिड़काव किया जाता है। ताकि कीड़े न लगें। अगर फसल में काड्डे और कीड़े-मकोड़े दिखे तो ही स्वाह डाली जाती है। कीड़े ज्यादा हों तो 10 तरह की कड़वी पत्तियों से बना अर्क छिड़का जाता है। बारिश न हो तो 4-5 बार पानी दिया जाता है। सिंह परमिंदरबीर ने बताया कि गेहूं के अलावा हर वो खाद्य पदार्थ खुद उगाया जाता है जो लंगर में लगता है। गन्ना, मूंगी, गोभी, आलू, प्याज, सरसों, मक्का, जौ, तेल और तिल तक। निहंग सिंहों की उगाई एक-एक चीज लंगर में ही इस्तेमाल होती है। जितनी भी पैदावार हो उसे लंगर में ही छका दिया जाता है। बाहर बेचा नहीं जाता। पेस्टिसाइड के बिना गेहूं की पैदावार बहुत कम होती है। कीटनाशकों के बिना फसल को बचाना चुनौतीपूर्ण है और निहंग सिंहों को चुनौतियां पसंद हैं। उन्हें कई बार स्वाह को ढोकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाना पड़ता है, क्योंकि कहीं स्वाह की जरूरत पड़ती है तो कहीं नहीं। इसलिए रसोई से जो स्वाह निकलती है, उसे कभी फेंका नहीं जाता। बड़ी संख्या में गोशालाएं चलती हैं। गोबर वहां से लिया जाता है।
शराब नीति केस में केजरीवाल की याचिका पर आज फैसला:जज बदलने की मांग; पिछली सुनवाई में कहा था- जज के परिवार का केंद्र से जुड़ाव

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा आज शाम 4:30 बजे शराब नीति मामले में पूर्व CM अरविंद केजरीवाल समेत 23 अन्य आरोपियों की रीक्यूजल याचिका पर फैसला सुनाएंगी। केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने याचिका में जज से खुद को मामले से अलग करने की मांग की है। इससे पहले फैसला सुनाने का समय 2:30 बजे तय था। हालांकि, इसे दो घंटे बढ़ाया गया है। सुनवाई के दौरान केजरीवाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। उन्होंने कहा कि उनकी ‘रिजॉइंडर’ (जवाबी दलील) को रिकॉर्ड में नहीं लिया गया है, जो न्याय का उल्लंघन है। इस पर कोर्ट ने कहा कि कानून में लिखित दलीलों पर ‘रिजॉइंडर’ का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इसे लिखित सबमिशन के तौर पर स्वीकार किया गया। वहीं, CBI की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आदेश सुरक्षित होने के बाद नई दलील स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। केजरीवाल और अन्य ने जज पर पक्षपात और हितों के टकराव के आरोप लगाकर उनसे खुद को मामले से अलग करने (रीक्यूज) की मांग की है। 15 अप्रैल को पिछली सुनवाई में केजरीवाल ने दावा किया था कि जज का परिवार केंद्र सरकार से जुड़ा हुआ है।
शराब नीति केस में केजरीवाल की याचिका पर आज फैसला:जज बदलने की मांग; पिछली सुनवाई में कहा था- जज के परिवार का केंद्र से जुड़ाव

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा आज शाम 5:30 बजे शराब नीति मामले में पूर्व CM अरविंद केजरीवाल समेत 23 अन्य आरोपियों की रीक्यूजल याचिका पर फैसला सुनाएंगी। फैसला सुनाने का समय दो बार बढ़ाया गया है। पहले दोपहर 2:30 बजे समय तय था। इसके बाद 4:30 बजे और फिर शाम 5:30 बजे का समय तय हुआ है। केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जज पर पक्षपात और हितों के टकराव के आरोप लगाकर उनसे खुद को मामले से अलग करने की मांग की है। फैसले से पहले सुनवाई के दौरान केजरीवाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। केजरीवाल ने कहा कि उनकी ‘रिजॉइंडर’ (जवाबी दलील) को रिकॉर्ड में नहीं लिया गया है, जो न्याय का उल्लंघन है। इस पर कोर्ट ने कहा कि कानून में लिखित दलीलों पर ‘रिजॉइंडर’ का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इसे लिखित सबमिशन के तौर पर स्वीकार किया गया। वहीं, CBI की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आदेश सुरक्षित होने के बाद नई दलील स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। केजरीवाल बोले- जज के बच्चे SG मेहता के साथ काम करते हैं केजरीवाल ने 15 अप्रैल को कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था। इसमें केजरीवाल ने दावा किया था कि जज का परिवार केंद्र सरकार से जुड़ा हुआ है। हलफनामे के अनुसार, जस्टिस कांता के दोनों बच्चे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करते हैं। मेहता उनके बच्चों को केस सौंपते हैं। इससे पहले 13 अप्रैल को सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने कहा था कि जस्टिस शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में 4 बार शामिल हो चुकी हैं। ऐसे में उन्हें केस से हटाया जाए। केजरीवाल ने कहा- 9 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पहली नजर में गलत बता दिया। ट्रायल कोर्ट ने पूरे दिन सुनवाई कर फैसला दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने 5 मिनट की सुनवाई में उसे गलत बता दिया। तब मुझे लगा कि मामला पक्षपात की तरफ जा रहा है। मैंने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा, लेकिन वह खारिज हो गया। इसके बाद मैंने यह आवेदन दिया। जज को हटाने की अर्जी क्यों, 5 पॉइंट्स में समझिए ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। इस आदेश को CBI ने चुनौती दी, जिसकी सुनवाई वर्तमान में जस्टिस शर्मा कर रही हैं। 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने नोटिस जारी किया और उस आदेश के उस हिस्से पर रोक लगा दी, जिसमें जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की बात कही गई थी। उन्होंने प्रारंभिक तौर पर यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां गलत थीं और ट्रायल कोर्ट को PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) की कार्यवाही स्थगित करने का निर्देश दिया। इसके बाद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, विजय नायर समेत अन्य आरोपियों ने जस्टिस शर्मा को हटाने की अर्जी दाखिल की। जस्टिस कांता ने पूर्व AAP विधायक की याचिका से खुद को अलग किया केजरीवाल की याचिका पर फैसले से पहले जस्टिस स्वर्ण कांता ने पूर्व AAP विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। जस्टिस ने मामले से खुद को अलग करते समय कोई कारण नहीं बताया। यह मामला MCOCA से जुड़ा है। नरेश बाल्यान ने इस केस में जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। कानूनी प्रक्रिया के तहत, जब कोई जज किसी मामले की सुनवाई से खुद को अलग करता है, तो केस को दूसरी बेंच को ट्रांसफर कर दिया जाता है, जो आगे सुनवाई करती है। 27 फरवरी: ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को बरी किया था ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी। ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है। साथ ही, जस्टिस शर्मा की कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी। केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया। इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ। इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… दिल्ली शराब नीति केस-हाइकोर्ट का सभी 23 आरोपियों को नोटिस:CBI अफसर के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक, मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुनवाई नहीं करने का आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 मार्च को दिल्ली शराब नीति केस में पूर्व CM अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की CBI अधिकारियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी थी। पूरी खबर पढ़ें…
ड्रिप लाइन से दूल्हा-दुल्हन पर बरसी पानी की फुहारें:अक्षय तृतीया पर सामूहिक विवाह सम्मेलन में 32 जोड़ों ने लिए सात फेरे

देवास में अक्षय तृतीया के अवसर पर शहर के कई स्थानों पर सामूहिक विवाह सम्मेलनों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों में कुल 32 जोड़ों ने विवाह किया। भीषण गर्मी से राहत के लिए विशेष इंतजाम किए गए, जिनमें ड्रिप लाइन से पानी की फुहारें बरसाना और कूलर लगाना शामिल था। यादव गवली समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन केपी कॉलेज में संपन्न हुआ। इसमें 16 जोड़ों का विवाह कराया गया, जिनमें देवास सहित अन्य जिलों से आए दूल्हा-दुल्हन शामिल थे। सोमवार सुबह इन जोड़ों की बनौली (बारात) निकाली गई। इस दौरान दूल्हा घोड़ी पर सवार था, जबकि दुल्हन कार में बैठकर आई। गर्मी से राहत के लिए पानी की फुहार इसी तरह, श्री गुजराती रामी माली समाज द्वारा भी सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में भी 16 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ। यहां दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवारों के लिए गर्मी से बचाव के खास इंतजाम किए गए थे। आयोजकों ने 15 से अधिक कूलर लगाए थे। इसके अतिरिक्त, गर्मी से राहत देने के लिए ड्रिप लाइन की व्यवस्था की गई थी, जिससे दूल्हा-दुल्हन पर लगातार पानी की फुहारें बरसती रहीं। देखें तस्वीरें
जापान में 7.5 तीव्रता का भूकंप आया:3 मीटर तक सुनामी लहरे आने की आशंका, लोगों से ऊंचे इलाकों में जाने की अपील

जापान में सोमवार को 7.5 रिक्टर तीव्रता का जोरदार भूकंप आया। इसके बाद तटीय क्षेत्रों में सुनामी चेतावनी जारी कर दी गई है। जापान मौसम एजेंसी (JMA) के मुताबिक, इवाते प्रांत और होक्काइडो और आओमोरी के कुछ हिस्सों में 3 मीटर तक ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई गई है। अधिकारियों ने लोगों से तुरंत ऊंचे इलाकों में जाने और तट तथा नदियों से दूर रहने की अपील की है। राहत और आपात सेवाएं हालात पर नजर बनाए हुए हैं और संभावित नुकसान का आकलन किया जा रहा है। रेल सेवा रोकी गई भूकंप के झटके रिकॉर्ड होने के बाद तोहोकू शिंकानसेन बुलेट ट्रेन सेवा को टोक्यो स्टेशन और शिन-आओमोरी स्टेशन के बीच अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। ऑपरेटर ने बताया कि सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया गया है। इसके अलावा टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (TEPCO) ने कहा है कि वह फुकुशिमा दाइची और फुकुशिमा दाइनी न्यूक्लियर प्लांट में किसी तरह के नुकसान की जांच कर रही है। फुकुशिमा दाइनी परमाणु प्लांट के ऑपरेटर ने बताया है कि अभी तक किसी भी तरह की असामान्यता की कोई सूचना नहीं मिली है। साथ ही कहा गया है कि प्लांट के आसपास रेडिएशन स्तर सामान्य बने हुए हैं।
गांधी नगर में गाय गायब, फार्म हाउस में खून मिला:बजरंग दल ने थाने में दिया धरना, आरोपियों की गिरफ्तारी और SIT जांच की मांग

भोपाल के गांधी नगर इलाके में चोरी हुई दो गायों के मामले में शनिवार को फार्म हाउस में उनकी घंटियां और पास ही बड़ी मात्रा में खून मिलने के बाद विवाद बढ़ गया है। आरोप है कि गायों को काटकर तस्करी के लिए ले जाया गया, लेकिन अब तक पुलिस आरोपियों की पहचान नहीं कर सकी है। ऐसे में आरोपियों की गिरफ्तारी, धाराएं बढ़ाने और एसआईटी जांच की मांग को लेकर सोमवार को बजरंग दल और विहिप कार्यकर्ताओं ने गांधी नगर थाने में धरना दिया। कार्यकर्ताओं ने एडिशनल डीसीपी मलकीत सिंह को ज्ञापन सौंपा। खेत से बंधी गायें हुई थीं गायब पुलिस के मुताबिक फरियादी बद्रीप्रसाद भिलाला ने बताया कि वे अचारपुरा रोड गोदरमऊ के निवासी हैं और खेती करते हैं। शुक्रवार रात उन्होंने गायों को खेत के पास मैदान में बांधा था, जो सुबह गायब मिलीं। गायों की तलाश के दौरान जैन फार्म हाउस में उनके गले की घंटियां मिलीं। पास ही बड़ी मात्रा में खून और अवशेष भी पाए गए, जिससे गाय काटे जाने की आशंका जताई गई। पुलिस ने दर्ज किया केस, जांच जारी टीआई ब्रजेंद्र मर्सकोले ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है।
बाजार में सिर्फ 40 दिन के लिए मिलता है यह फल, इसका मटर जितना साइज, खट्टा-मीठा स्वाद बना देगा दीवाना

Last Updated:April 20, 2026, 14:25 IST Falsa Fruit Health Benefits: फालसा एक ऐसा मौसमी फल है, जो गर्मियों में सिर्फ कुछ हफ्तों के लिए बाजार में मिलता है. यह छुटकू सा फल शरीर को ठंडक देने, इम्यूनिटी बढ़ाने और पाचन सुधारने में बेहद फायदेमंद होता है. गर्मियों में इसे खाने से लू और डिहाइड्रेशन से भी बचाव होता है. फालसा का खट्टा-मीठा स्वाद सभी लोगों को खूब पसंद आता है. फालसा बाजार में सिर्फ कुछ दिनों के लिए आता है और सेहत के लिए फायदेमंद होता है. Health Benefits of Falsa: गर्मी के मौसम में कुछ ऐसे फल भी आते हैं, जो बहुत कम समय के लिए बाजार में मिलते हैं, लेकिन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. ऐसा ही एक खास फल फालसा है, जो आमतौर पर सिर्फ 40 से 45 दिनों के लिए ही बाजार में उपलब्ध होता है. इसका स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है और यह शरीर को तुरंत ठंडक पहुंचाने के लिए जाना जाता है. फालसा को गर्मियों का नेचुरल कूलिंग फल माना जाता है. इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती है. तेज गर्मी और लू से बचाव के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है. इसे खाने से शरीर में ठंडक महसूस होती है. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया फालसा छोटा होता है, लेकिन इसमें पोषक तत्वों की भरमार होती है. फालसा विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स से भरपूर होता है. ये सभी मिलकर इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं और शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं. खासकर गर्मियों में होने वाली थकान और कमजोरी को दूर करने में यह काफी असरदार होता है. पाचन तंत्र के लिए भी फालसा बहुत फायदेमंद होता है. यह पेट को ठंडक देता है और एसिडिटी, जलन और कब्ज से राहत दिलाता है. इसके नियमित सेवन से डाइजेशन बेहतर होता है और पेट हल्का महसूस होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. एक्सपर्ट के मुताबिक फालसा का सेवन आप सीधे फल के रूप में कर सकते हैं या इसका शरबत बनाकर भी पी सकते हैं. इसका जूस भी काफी लोकप्रिय है, जो शरीर को तुरंत एनर्जी देता है और गर्मी से राहत दिलाता है. खास बात यह है कि यह स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ख्याल रखता है. अगर आपको बाजार में फालसा नजर आए, तो इसे नजरअंदाज न करें. कम समय के लिए मिलने वाला यह फल सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. गर्मियों में इसे अपनी डाइट में शामिल करके आप खुद को फिट, ठंडा और एनर्जेटिक रख सकते हैं. इसकी कीमत ज्यादा होती है, लेकिन रोज कम मात्रा में खाएंगे, तब भी गजब के फायदे मिलेंगे. अगर आप फालसा का शरबत बनाना चाहते हैं, तो यह बहुत आसान है. सबसे पहले ताजे फालसे को अच्छी तरह धो लें, फिर उन्हें हल्के से मसलकर या मिक्सर में थोड़ा पानी डालकर पीस लें. इसके बाद इस मिश्रण को छानकर बीज अलग कर लें. अब इसमें स्वादानुसार चीनी या गुड़ मिलाएं, साथ में चुटकी भर काला नमक और चाहें तो थोड़ा भुना जीरा पाउडर भी डाल सकते हैं. इसे अच्छे से मिलाकर ठंडा करने के लिए कुछ देर फ्रिज में रखें या बर्फ डालकर सर्व करें. इस तरह शरबत तैयार हो जाएगा. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 20, 2026, 14:25 IST
बंगाल में पीएम मोदी की रैली के बाद बोले बीजेपी समर्थक- हमारी जीत पक्की है, टीएमसी की विदाई तय

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बंगाल में विधानसभा चुनाव और चुनावी सभाओं का ऐलान किया। मोदी ने पश्चिम मेदिनीपुर में एक चुनावी सभा का उद्घाटन किया, जिसमें लोगों का भारी जनसैलाब ढह गया। यहां मोदी की रैली से बीजेपी की काफी उम्मीदें हैं. उन्हें पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री की इस रैली का सीधा फायदा उन्हें वोट के दिन मिलेगा। न सिर्फ मेदिनीपुर, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल में इस बार बदलाव हो रहा है। हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद मिला है- भाजपा उम्मीदवार बीजेपी प्रत्याशी शंकर कुमार ने कहा कि हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद मिला है. मेदिनीपुर विद्यासागर और खुदीराम बोस की धरती है। मोदी के दौरे से यहां लोगों में उत्साह का संचार हुआ है। प्रधानमंत्री और जनता के बीच का यह मजबूत नेटवर्क हमारी जीत सुनिश्चित करता है। लोगों का जनसैलाब बाढ़ में डूब गया। गली-गली में भाजपा के पक्ष में तानाशाही है, इसलिए हमारी जीत निश्चित है। भाजपा प्रत्याशी राम प्रसाद गिरि ने कहा कि मेदिनीपुर का विकास सुनिश्चित होगा। पश्चिम बंगाल की जनता ने ममता बनर्जी को उम्मीदवार बनाया है। घुसपैठियों को वापस जाना चाहिए। बीजेपी उम्मीदवार भद्रा हेमराम ने कहा कि हमने पश्चिम मेदिनीपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोरदार स्वागत किया. कुल 12 विधानसभाओं पर जीत हासिल कर हम मोदी के हाथों को और मजबूत बनाएंगे। केंद्र की सरकार ने जो भी तय किया है, हम उसे… प्रतियोगी दिलीप घोष ने कहा कि यह मोदी की रचनात्मकता है। केंद्र की सरकार ने जो भी तय किया है, हम उसे पूरा करेंगे। पिछले 10 वर्षों में मध्य सरकार ने बहुत काम किया है, और जो भी बचा है, वह अब पूरा हो जाएगा। पूरा देश मोदी के साथ खड़ा है। बंगाल की जनता को मोदी पर भरोसा है. बीजेपी उम्मीदवार लक्ष्मीकांत साहू ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ज़िक्र करते हुए कहा कि सीएम ममता बनर्जी और बिल्डर ने उनका अपमान सिर्फ इसलिए किया है, क्योंकि वह आदिवासी समुदाय से आते हैं। यह सिर्फ जमुनी समुदाय की बात नहीं है, बल्कि वह भारत के प्रथम नागरिक हैं। एक महिला के लिए यह महिला संविधान का भी अपमान है। चुनाव में जनता इसका जवाब देती है देवी. यह भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल चुनाव: बंगाल में वोटिंग से पहले जुड़े 7 लाख नए वोटर, अब 6.82 करोड़ लोग डालेंगे वोट, चुनाव आयोग ने और क्या बताया?
रैम्प वॉक में अब उम्रदराज महिलाओं का जलवा:50 साल से ज्यादा की मॉडलों की पूछ बढ़ी, सीनियर मॉडलों को इतनी तवज्जो पहले नहीं मिली

इस महीने, ग्लोबल फैशन मैगजीन वोग ने कुछ ऐसा किया जो उसने पहले कभी नहीं किया था। उसने अपने कवर पर दो 76 वर्षीय महिलाओं को जगह दी। फैशन मैगजीन के कवर पर उम्र की बाधा को तोड़कर वोग ने खुद को पुराना नहीं बल्कि समकालीन साबित कर दिया। या कम से कम फैशन जगत में तो ऐसा ही लगने लगा है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक फैशन जगत में सीनियर मॉडलों को इतनी तवज्जो पहले कभी नहीं मिली। फैशन की दुनिया की भाषा में, सीनियर होने का अर्थ 30 वर्ष से ज्यादा की उम्र से लगाया जाता है। फैशन सर्च इंजन टैगवॉक के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के टॉप 20 ब्रांडों ने रनवे शो में प्लस-साइज़ मॉडल के अलावा अधिक उम्र की मॉडलों को शामिल किया। पिछले महीने हुए एक फैशन शो की शुरुआत 50 वर्षीय स्टेफनी कैवली ने की, जो रैंप पर 40 से अधिक उम्र की 15 मॉडलों में से एक थीं। बोटेगा वेनेटा में नौ सीनियर मॉडल थीं। टॉम फोर्ड में नौ (महिला और पुरुष), गिवेंची में आठ, बालेन्सियागा में पांच और लुई वितां में चार सीनियर मॉडल शामिल हुईं। फैशन की दुनिया से परे भी नया ट्रेंड, अब उम्र छिपाने के बजाय दिखाने का चलन फैशन की दुनिया से परे भी, एक नया चलन पनप रहा है। इसमें फैशन जगत या उससे जुड़े लोग अपनी उम्र छिपाने के बजाय उसे उजागर करना पसंद करते हैं। पूर्व सुपरमॉडल और वर्तमान में एस्टी लॉडर की एंबेसडर, 61 वर्षीय पॉलिना पोरिजकोवा, इंस्टाग्राम पर इसका नेतृत्व कर रही हैं। वह अपने 14 लाख फॉलोअर्स के साथ बिना मेकअप वाली तस्वीरों के माध्यम से अपनी झुर्रियों और बढ़े वजन को दिखाती हैं। यह उस इंडस्ट्री में एक चौंकाने वाला बदलाव है जो लंबे समय से यौवन को महिमामंडित करने के लिए प्रसिद्ध रही है। बढ़ती सिल्वर इकोनॉमी का फायदा उठाने की कोशिश फैशन इंडस्ट्री का ये बदलाव अमीर बुजुर्गों (जिसे सिल्वर इकोनॉमी कहते हैं) को लुभाने की कोशिश है। अमेरिका की कुल संपत्ति का 70% 55 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के पास है। मैकिन्से कंसल्टिंग फर्म में फैशन रिटेल प्रैक्टिस की ग्लोबल को-लीडर जेम्मा डी’ऑरिया कहती हैं, ‘जब लग्जरी उत्पादों की वृद्धि धीमी हो गई है, एक प्रमुख उपभोक्ता समूह को नजरअंदाज करना बिल्कुल भी अच्छी रणनीति नहीं है।’







