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शाजापुर में महिला ने कार में की तोड़फोड़:राधे-राधे चौराहे पर देर रात की घटना, CCTV फुटेज में दिखी वारदात

शाजापुर में महिला ने कार में की तोड़फोड़:राधे-राधे चौराहे पर देर रात की घटना, CCTV फुटेज में दिखी वारदात

शाजापुर के ज्योतिनगर स्थित राधे-राधे चौराहे पर रविवार-सोमवार की रात एक महिला ने खड़ी कार में तोड़फोड़ की। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें महिला पत्थर से कार के शीशे तोड़ती दिख रही है। यह घटना रात करीब 1:57 बजे हुई। फुटेज के अनुसार, महिला ने पहले कार के सामने वाले हिस्से को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। सफल न होने पर उसने साइड के शीशे को तोड़ने का प्रयास किया। इसके बाद, महिला ने कार के पिछले शीशे पर पत्थर मारकर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया। बाइक चालक से हुआ था विवाद कार मालिक नीरज कुमार मालवीय, निवासी ज्योति नगर, ने लालघाटी थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 12 अप्रैल की रात वे शादी से लौटकर कार पार्क कर रहे थे, तभी एक नशे में धुत व्यक्ति ने उनकी कार को नुकसान पहुंचाया और गाली-गलौज की। नीरज कुमार के अनुसार, उसी व्यक्ति की पत्नी ने रात में आकर उनकी कार में तोड़फोड़ की। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जांच कर रही है।

अस्पताल में चूहे-बिल्ली आना मरीजों के लिए कितना खतरनाक? किन बीमारियों का बढ़ेगा रिस्क, डॉक्टर से समझें

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Diseases Linked to Rats and Cats: अस्पतालों को मरीजों के लिए सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है. उम्मीद की जाती है कि अस्पताल में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाएगा, लेकिन देश के कई नामी अस्पताल इस पर खरे नहीं उतर रहे हैं. खासतौर से सरकारी अस्पतालों का हाल-बेहाल है. पिछले साल इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में चूहों के काटने से नवजात बच्ची की मौत का मामला सामने आया था, जिसने अस्पतालों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. अब भोपाल एम्स से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें देखकर आप हैरान रह जाएंगे. भोपाल एम्स के NICU में चूहों का आतंक देखने को मिल रहा है. एम्स प्रशासन का कहना है कि पेस्ट कंट्रोल के बावजूद चूहे कंट्रोल नहीं हो रहे हैं. कई अस्पतालों में कुत्ते और बिल्ली घूमते हुए भी नजर आते हैं. अब सवाल है कि अस्पतालों में कुत्ते-बिल्ली और चूहे घूमना मरीजों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है और इससे कौन-कौन सी बीमारियां फैल सकती हैं. इस बारे में डॉक्टर से जरूरी बातें जान लेते हैं. गुरुग्राम के मारेंगो एशिया हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की फिजीशियन डॉ. दीक्षा गोयल ने News18 को बताया कि अस्पताल में कुत्ता, बिल्ली और चूहे घूमने से कई गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है. प्रेग्नेंट महिलाओं, नवजात शिशुओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों को सबसे ज्यादा जोखिम होता है. कुत्ते के काटने से रेबीज हो सकता है, बिल्ली के काटने से कैट स्क्रैच डिजीज और चूहे के काटने से लेप्टोस्पायरोसिस जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं. चूहे और बिल्लियां कई खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस लेकर घूमते हैं. इनके संपर्क में आने से भी जानलेवा कंडीशंस पैदा हो सकती हैं. ऐसे में अस्पतालों में इनकी मौजूदगी मरीजों के लिए गंभीर समस्या है. इससे अस्पताल के स्टाफ के लिए भी खतरा पैदा हो जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कुत्ते बन सकते हैं रेबीज का कारण डॉक्टर दीक्षा के मुताबिक अस्पतालों में आवारा कुत्ते घूमना गंभीर समस्या है, क्योंकि अगर कुत्ता किसी को काट ले, तो इससे लोगों में रेबीज वायरस फैल सकता है. ऐसी कंडीशन में सही समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी पड़ेगी और अगर इसमें लापरवाही बरती गई, तो व्यक्ति की जान जा सकती है. अगर कुत्ता किसी खुले घाव को चाट ले, तब भी उसकी लार में मौजूद वायरस शरीर में पहुंच सकता है. कुत्ते की जरा सी खरोंच भी रेबीज की वजह बन सकती है. बच्चों को कुत्ते जल्दी टारगेट करते हैं और लोगों को इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए. कुत्ते से जितना दूर रहेंगे, उतना सुरक्षित रहेंगे. बिल्ली फैला सकती है कई बीमारियां एक्सपर्ट ने बताया कि अस्पताल में बिल्ली आने से कई बीमारियां फैल सकती हैं. बिल्ली के काटने से कैट स्क्रैच डिजीज हो सकती है, जिसकी वजह बिल्ली में पाया जाने वाला बार्टोनेला बैक्टीरिया होता है. इस डिजीज में प्रभावित हिस्से के पास लिम्फ नोड्स में सूजन और बुखार शामिल है. इसका रिस्क 20 साल से कम उम्र के लोगों को ज्यादा होता है. इसके अलावा बिल्लियों के मल के संपर्क में आने से टॉक्सोप्लाज्मोसिस इंफेक्शन हो सकता है. यह इंफेक्शन टॉक्सोप्लाज्मा गॉन्डियाइ नामक पैरासाइट के कारण होता है. यह बिल्ली के आसपास घूमने से हो सकता है. पालतू बिल्ली से बच्चों और लोगों में यह इंफेक्शन फैल सकता है. बच्चों में यह बेहद खतरनाक हो सकता है. इसमें बहुत ज्यादा तेज फीवर और मिर्गी होने लगती है. यह बिल्ली के मल से फैलता है और जो उसे क्लीन करता है, उसे भी इस इंफेक्शन का रिस्क सबसे ज्यादा होता है. अगर प्रेग्नेंट लेडी को टॉक्सोप्लाज्मोसिस इंफेक्शन हो जाए, तो यह सीरियस कंडीशन पैदा कर सकता है. कई बार बिल्लियां टाइफाइड बैक्टीरिया और क्रिप्टोस्पोरिडियम पैरासाइट को फैला देती हैं. ये इंफेक्शन आमतौर पर तब होते हैं, जब बिल्ली आपके खाने में मुंह मार दे या उसका लार खाने में गिर जाए. इस समस्या में पेट में ऐंठन और दस्त अचानक शुरू हो सकते हैं. कभी-कभी मतली, उल्टी, बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं. कई मरीजों को एंटीपैरासाइट दवाई लेनी पड़ती है, ताकि इस परेशानी से छुटकारा मिल सके. इसके अलावा भी बिल्ली कई अन्य बीमारियां फैला सकती है. अस्पताल में चूहे घूमने से क्या खतरे हैं? डॉक्टर दीक्षा गोयल कहती हैं कि अस्पताल में चूहे घूमने से भी कई तरह के संक्रमण फैल सकते हैं. इसमें लेप्टोस्पायरोसिस सबसे ज्यादा कॉमन है. यह चूहे की यूरिन और फीकल मैटर से फैलता है. चूहे अगर खाने में मुंह मार दें, तब भी यह बीमारी फैल सकती है. इसके अलावा रैट बाइट फीवर बहुत खतरनाक होता है, जो चूहे के काटने से फैलता है. इसमें 7 से 10 दिन में व्यक्ति की मौत हो सकती है और रैट बाइट के 2 से 10 दिन के बाद इसके लक्षण शुरू हो सकते हैं. घर के अंदर भी अगर किसी को चूहा काट ले, तो यह समस्या हो सकती है. इससे बचने के लिए रैट बाइट के बाद उस जगह को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ किया जाता है. इसके बाद टिटनेस का इंजेक्शन दिया जाता है और फिर एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं. इन समस्याओं से बचने के लिए अस्पतालों में पेस्ट कंट्रोल कराना जरूरी है. घरों में लोग DEET वाले रिपेलेंट यूज कर सकते हैं.

महाराष्ट्र के ठाणे में सड़क हादसा, 11 की मौत:मृतकों में 3 महिलाएं, 2 की हालत गंभीर; वैन से टकराया सीमेंट मिक्सर ट्रक

महाराष्ट्र के ठाणे में सड़क हादसा, 11 की मौत:मृतकों में 3 महिलाएं, 2 की हालत गंभीर; वैन से टकराया सीमेंट मिक्सर ट्रक

महाराष्ट्र के ठाणे में सोमवार सुबह सड़क हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई। दो गंभीर घायल हुए। पुलिस के मुताबिक हादसा सुबह करीब 10:45 बजे मुर्बाड के गोविली गांव स्थित रैता ब्रिज पर हुआ। कल्याण से मुर्बाड जा रही वैन की सामने से आ रहे सीमेंट मिक्सर ट्रक से टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वैन में सवार 11 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मुर्बाड के तहसीलदार अभिजीत देशमुख ने बताया कि घायलों को उल्हासनगर के सेंट्रल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मरने वालों में आठ पुरुष और तीन महिलाएं हैं। अब तक 6 मृतकों की पहचान हो चुकी है, बाकी की पहचान जारी है। हादसे के बाद कुछ घंटों तक कल्याण से अहिल्यानगर रोड पर लंबा जाम लगा था। 5 तस्वीरों में हादसा… कल्याण से मुरबाड के बीच चलती थी वैन वैन रोजाना की तरह आज सुबह भी पैसेंजर्स को लेकर कल्याण से मुरबाड जा रही थी। वैन में ड्राइवर समेत 12-13 लोग सवार थे। इसी दौरान रैता ब्रिज पर सामने से आ रहे सीमेंट मिक्सर से टक्कर हो गई। राहगीरों ने बताया कि दोनों गाड़ियां स्पीड में थीं। टक्कर इतनी भीषण थी कि वैन में सवार किसी को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। इनमें से 9 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। दो ने अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ दिया। अन्य दो घायलों की हालत भी है। —————————— हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… गुजरात में ट्रक ने श्रद्धालुओं को कुचला, 7 की मौत:राजकोट से सभी लोग पैदल बहुचराजी माता मंदिर जा रहे थे गुजरात के सुरेंद्रनगर में सोमवार सुबह लखतर-विरामगाम नेशनल हाईवे पर एक ट्रक ने पैदल चल रहे श्रद्धालुओं को कुचल दिया। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि चार घायल हो गए। घायलों को सुरेंद्रनगर के अलग-अलग हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया है। पूरी खबर पढ़ें…

एमपी के 6 जिलों में नए मेडिकल कॉलेज को मंजूरी:सागर में 286 करोड़ की सिंचाई परियोजना को मंजूरी; 12.44 लाख लीटर पहुंचा दुग्ध प्रोडक्शन

एमपी के 6 जिलों में नए मेडिकल कॉलेज को मंजूरी:सागर में 286 करोड़ की सिंचाई परियोजना को मंजूरी; 12.44 लाख लीटर पहुंचा दुग्ध प्रोडक्शन

आज भोपाल में मध्यप्रदेश मंत्रीमंडल की बैठक हुई। इसमें लोक निर्माण विभाग की परियोजनाएं जारी रखने, 6 नए मेडिकल कॉलेजों के प्रस्तावों को मंजूरी, सामाजिक योजनाओं की निरंतरता और सागर की सिंचाई परियोजना सहित कई अहम फैसले लिए गए। बैठक से पहले, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह सप्ताह महिला सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। 16 अप्रैल से संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को स्वीकृति के लिए पेश किया जाएगा। राज्य में 25 अप्रैल तक नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा मनाया जा रहा है। कैबिनेट बैठक शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री ने बताया कि पूरे प्रदेश में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन और पदयात्राएं आयोजित की जाएंगी। महाविद्यालयों में भी इससे जुड़े कार्यक्रम किए जाएंगे। उर्वरक सब्सिडी के लिए 41,833 करोड़ की मंजूरी सीएम ने बताया कि केंद्र सरकार ने खरीफ 2026 के लिए फॉस्फेट और पोटेशियम उर्वरकों पर 41,833 करोड़ रुपए की सब्सिडी को मंजूरी दी है, जिससे किसानों को लाभ मिलेगा। रायसेन में आयोजित तीन दिवसीय कृषि महोत्सव का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट में नक्सल गतिविधियों के समाप्त होने के बाद अब विकास कार्य तेज किए जाएंगे। 6 जिलों में नए मेडिकल कॉलेज को मंजूरी राजगढ़, मंडला, नीमच, मंदसौर, शिवपुरी और सिंगरौली जिलों में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इससे स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा। कृषि से जुड़ी मैकेनाइजेशन योजना को भी आगे जारी रखने का निर्णय लिया गया, जिससे किसानों को आधुनिक उपकरणों का लाभ मिलता रहेगा। दूध उत्पादन 9.4 से बढ़कर 12.4 लाख लीटर कैबिनेट में बताया गया कि प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़कर 12.4 लाख लीटर हो गया है, जो पहले 9.4 लाख लीटर था। यह करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि है। सागर में 286 करोड़ की सिंचाई परियोजना स्वीकृत मंत्रिमंडल ने सागर जिले के लिए 286 करोड़ रुपए की मिडवासा मध्यम सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना से करीब 7200 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इधर, मंत्रिमंडल ने लोक निर्माण विभाग की चार चल रही परियोजनाओं को निरंतर जारी रखने का निर्णय लिया। इन परियोजनाओं के माध्यम से आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। कैबिनेट ने मध्यान्ह भोजन परिषद, मिशन शक्ति, संबल योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और हेल्पलाइन 181 को जारी रखने की मंजूरी दी। इन योजनाओं के माध्यम से महिला और बाल विकास से जुड़े कार्यक्रम संचालित होते रहेंगे।

200 मीटर रेस में बोल्ट से भी तेज निकले गाउट:ऑस्ट्रेलिया के 18 वर्षीय गाउट ने रेस 19.67 सेकंड में पूरी कर बोल्ट का इस उम्र का रिकॉर्ड तोड़ा

200 मीटर रेस में बोल्ट से भी तेज निकले गाउट:ऑस्ट्रेलिया के 18 वर्षीय गाउट ने रेस 19.67 सेकंड में पूरी कर बोल्ट का इस उम्र का रिकॉर्ड तोड़ा

एथलेटिक्स की दुनिया में रविवार को एक ऐसा चमत्कार हुआ, जिसने भविष्य की सुनहरी झलक पेश कर दी। सिडनी ओलिंपिक पार्क एथलेटिक सेंटर में 18 वर्षीय स्प्रिंट सनसनी गाउट गाउट ने 200 मीटर के फाइनल में 19.67 सेकंड का अविश्वसनीय समय निकालकर इतिहास रच दिया। यह समय न केवल महान उसैन बोल्ट के रिकॉर्ड से तेज है, बल्कि इसने ऑस्ट्रेलियाई एथलेटिक्स के एक नए युग का सूत्रपात भी कर दिया है। खेल इतिहास में तुलनाएं अक्सर की जाती हैं, लेकिन गाउट ने आंकड़ों से अपनी श्रेष्ठता साबित की। साल 2004 में उसैन बोल्ट ने 18 साल की उम्र में 19.93 सेकंड का समय निकाला था। ऑस्ट्रेलियन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में गाउट ने उनसे कहीं आगे निकलते हुए 19.67 सेकंड में फिनिश लाइन पार की और गोल्ड मेडल जीता। यह इस साल दुनिया का सबसे तेज समय है। गाउट के लिए यह जीत एक भावनात्मक पल भी थी। पिछले साल उन्होंने 19.84 सेकंड का समय निकाला था, लेकिन वह ‘अवैध टेलविंड’ के कारण आधिकारिक नहीं हो सका था। इस बार 1.7 मीटर प्रति सेकंड की वैध हवा की गति के साथ उन्होंने रफ्तार पर मुहर लगा दी। रेस की शुरुआत सामान्य थी। उम्मीद थी कि गाउट जल्द ही बढ़त बना लेंगे, लेकिन एडन मर्फी ने गाउट को कदम-कदम पर कड़ी टक्कर दी। मर्फी की इस चुनौती ने गाउट के भीतर के ‘एथलेटिक दानव’ को जगा दिया। अंतिम मीटरों में गाउट ने अपनी सिग्नेचर टॉप-स्पीड पकड़ी और जब स्कोरबोर्ड पर समय चमका, तो पूरा स्टेडियम स्तब्ध रह गया। इस प्रदर्शन में एडन मर्फी की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। मर्फी ने 19.88 सेकंड का समय निकाला और दूसरे स्थान पर रहे। यह पहली बार है, जब एक ही रेस में दो ऑस्ट्रेलियाई धावकों ने 20 सेकंड से कम में रेस पूरी की है। मर्फी ने पीटर नॉर्मन के 1968 के उस रिकॉर्ड को तोड़ने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की, जो दशकों से अभेद्य लग रहा था। उन्होंने गाउट को उनके सर्वश्रेष्ठ स्वरूप तक धकेलने में अहम भूमिका निभाई। गाउट जिस ट्रैक पर दौड़े, वह सिडनी 2000 ओलिंपिक का वार्म-अप ट्रैक था। जब वे पोडियम पर खड़े थे, तो ऐसा लग रहा था जैसे उन्होंने पुरानी पीढ़ी से मशाल थाम ली। विशेषज्ञों का मानना है कि गाउट अब लॉस एं​जिलिस 2028 ओलिंपिक के मेडल के लिए भी प्रबल दावेदार बन चुके हैं। गाउट गाउट ने साबित कर दिया है कि वे केवल भविष्य का नाम नहीं हैं, बल्कि वे ‘आज’ के महानायक हैं। सिडनी का यह रविवार ऑस्ट्रेलियाई खेल इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। गाउट के इस प्रदर्शन को इन फैक्टर्स से समझें – 19.67 सेकंड का यह समय पेरिस ओलिंपिक में नोआह लाइल्स को पछाड़कर ब्रॉन्ज मेडल दिला देता। – सिडनी 2000 ओलिंपिक में यह प्रदर्शन गोल्ड मेडल जीतने के लिए पर्याप्त होता। – यह किसी भी अंडर-20 एथलीट द्वारा इतिहास में दौड़ा गया सबसे तेज समय है।

organ donation in RML delhi: दिल्ली आरएमएल में ब्रेन डेड महिला का अंगदान, तीन मरीजों को नई जिंदगी

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होमताजा खबरDelhi ब्रेन डेड महिला का दान बना रक्षा कवच, दिल्ली से लखनऊ तक बचीं तीन जिंदगियां Last Updated:April 13, 2026, 13:23 IST Organ donation in Delhi: एक ब्रेन डेड 45 महिला के दान की बदौलत तीन लोगों को नई ज‍िंदगी म‍िली. दिल्‍ली के आरएमएल अस्‍पताल में पर‍िवार ने मह‍िला के किडनी, लिवर, हार्ट दान किए, जो दिल्ली और लखनऊ के तीन गंभीर मरीजों को लगाए गए. ऑर्गन डोनेशन से ब्रेन डेड मह‍िला ने बचाई 3 लोगों की जान. RML Delhi News: अंगदान कितना महान होता है, ये इस घटना से आपको समझ में आ सकता है. दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में उस वक्त मरीजों, तीमारदारों से लेकर डॉक्टरों के सिर इन ब्रेन डेड महिला के सम्मान में झुक गए, जिनके दान की बदौलत दिल्ली से लखनऊ तक तीन लोगों की जिंदगियां वापस लौट आईं और इनके दर्जनों परिजनों के चेहरों पर खुशी की लहर आ गई. वहीं दर्द की इस कठिन घड़ी में भी मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक परिवार ने तीन अन्य परिवारों को नई जिंदगी का तोहफा दिया है. 12 अप्रैल 2026 को अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (ABVIMS) एंड डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ने अपना छठा मल्टी-ऑर्गन रिट्रीवल सफलतापूर्वक पूरा किया. 45 वर्षीय एक महिला सिर में खून के रिसाव (cerebral hemorrhage) के कारण ब्रेन डेड हो गई थीं. उनके परिवार ने बेहद मुश्किल समय में भी बहुत ही उदार और नेक फैसला लिया. उन्होंने अपनी बेटी/पत्नी/मां के किडनी, लीवर और हार्ट दान करने की सहमति दे दी. मौत से जूझ रहे 3 मरीजों के बचे प्राण . महिला के ऑर्गन डोनेशन में से एक किडनी आरएमएल अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के एंड-स्टेज किडनी डिजीज मरीज को लगाई गई. . महिला का लिवर दिल्ली के आर्मी अस्पताल (रिसर्च एंड रेफरल) RR अस्पताल के एंड-स्टेज लीवर डिजीज मरीज को लगाया गया. . जबकि महिला का हार्ट लखनऊ के SGPGI अस्पताल में भेजा गया जहां कार्डियक फेलियर से जूझ रहे मरीज को ट्रांसप्लांट किया गया. इस दौरान अस्पताल के मेडिसिन और क्रिटिकल केयर विभाग के डॉक्टरों ने परिवार को ब्रेन डेड की स्थिति समझाई. ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर ने अंगदान के बारे में विस्तार से बताया. परिवार की स्वैच्छिक सहमति के बाद नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लंट ऑर्गनाइजेशन (National Organ and Tissue Transplant Organisation) ने अंगों को जरूरत के अनुसार 3 अलग-अलग संस्थानों में देने का फैसला किया. 13 अप्रैल की सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर कार्डियक एनेस्थीसिया और एनेस्थीसिया टीम की मदद से CTVS टीम ने हार्ट, लिवर ट्रांसप्लांट टीम ने लिवर और यूरोलॉजी टीम ने महिला की किडनी रिट्रीव की. हार्ट को एयर एंबुलेंस से लखनऊ भेजा गया, जबकि लीवर को दिल्ली पुलिस द्वारा बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर से RR अस्पताल पहुंचाया गया. अंगदान के बाद मृतक का शरीर परिवार को पूरे सम्मान के साथ सौंप दिया गया. पूरी प्रक्रिया ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर और नोडल ऑफिसर (ट्रांसप्लांट) अस्पताल के डायरेक्टर, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और एडिशनल मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की निगरानी में की गई. इस दौरान इस अंगदान ने फिर साबित कर दिया कि मौत भी जिंदगी बन सकती है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 13, 2026, 13:23 IST

उज्जैन में दंपती ने किया वर्षीतप, दावा- स्वास्थ्य में सुधार:एक साल के तप से वजन घटा, बीपी और कोलेस्ट्रॉल भी कंट्रोल हुआ

उज्जैन में दंपती ने किया वर्षीतप, दावा- स्वास्थ्य में सुधार:एक साल के तप से वजन घटा, बीपी और कोलेस्ट्रॉल भी कंट्रोल हुआ

उज्जैन के अलखधाम नगर के रहने वाले शैलेन्द्र तल्लेरा और उनकी पत्नी प्रमिला तल्लेरा ने जैन धर्म के वर्षीतप को एक साल तक पूरा किया। इस तप के दौरान दोनों के स्वास्थ्य में सुधार सामने आया है, जिसमें ब्लड प्रेशर, वजन और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित होने की बात कही गई है। बीपी की दवा बंद, वजन 22 किलो कम शैलेन्द्र तल्लेरा के अनुसार, तप शुरू होने से पहले उनका ब्लड प्रेशर करीब 190 रहता था और रोज दवा लेनी पड़ती थी। वर्षीतप के बाद बीपी 140-150 के बीच बना हुआ है और दवा की जरूरत नहीं रही। एक साल में उनका वजन 95 किलो से घटकर 73 किलो हो गया। तप के दौरान एसिडिटी की समस्या खत्म हो गई। साथ ही कोलेस्ट्रॉल स्तर भी सामान्य रहने लगा है। 13 महीने तक चला कठोर उपवास क्रम दंपती ने 12 अप्रैल 2025 से वर्षीतप शुरू किया। इस तप में 36 घंटे में केवल दो बार भोजन और उसके बाद तीन दिन तक उपवास करना होता है। यह क्रम करीब 13 महीने यानी लगभग 400 दिन तक चलता है। सूर्य उदय के बाद ही सीमित भोजन तप के दौरान भोजन केवल सूर्य उदय के बाद और सूर्यास्त से पहले दो बार ही लिया जाता है। बाकी समय केवल पानी पर रहना होता है। 20 अप्रैल को पालीताना में होगा समापन वर्षीतप का समापन 20 अप्रैल को पालीताना में पारणा के साथ किया जाएगा। जैन धर्म में वर्षीतप को कठोर तप माना जाता है। इसमें एक दिन उपवास और अगले दिन सीमित आहार का क्रम चलता है। पूरे तप में करीब 200 उपवास शामिल होते हैं।

पीठ पीछे बात करने में मिलनसार लोग सबसे आगे:गॉसिप बुरी नहीं, समाज को जोड़ने में इसकी बड़ी भूमिका – मनोवैज्ञानिक

पीठ पीछे बात करने में मिलनसार लोग सबसे आगे:गॉसिप बुरी नहीं, समाज को जोड़ने में इसकी बड़ी भूमिका - मनोवैज्ञानिक

अक्सर पीठ पीछे बात करने को लोग बुराई मानते हैं, लेकिन मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यह इंसानी व्यवहार का बुनियादी हिस्सा है। अमेरिका में नॉक्स कॉलेज के मनोवैज्ञानिक फ्रैंक मैकएंड्रयू के मुताबिक गॉसिप सिर्फ किसी की छवि बिगाड़ना नहीं, बल्कि किसी गैर-मौजूद व्यक्ति के बारे में चर्चा भी है। दशकों की रिसर्च बताती है कि गॉसिप ने सभ्यता की शुरुआत से समाज को जोड़े रखने में बड़ी भूमिका निभाई है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मेगन रॉबिन्स के मुताबिक गॉसिप से लोग बिना खुद गलती किए सामाजिक नियम सीख लेते हैं। ज्यादातर गॉसिप न्यूट्रल, जेंडर मिथक भी टूटा रॉबिन्स की रिसर्च के अनुसार, गॉसिप का बड़ा हिस्सा न तो बुरा होता है और न ही अच्छा, बल्कि यह न्यूट्रल जानकारी होती है। स्टडी ने उस मिथक को भी तोड़ दिया कि केवल महिलाएं गॉसिप करती हैं। सच यह है कि पुरुष भी इसमें बराबर के भागीदार हैं। ज्यादा मिलनसार लोग गॉसिप करने में सबसे आगे पाए गए। अच्छी गॉसिप दूसरों को जवाबदेह बनाती है विशेषज्ञों के अनुसार, गॉसिप की अच्छाई या बुराई इरादे पर टिकी है। अच्छी गॉसिप दूसरों को जवाबदेह बनाती है। बुरी गॉसिप का मकसद केवल अपमान करना होता है। इसलिए, बोलने से पहले यह जरूर सोचें कि आप रिश्ते जोड़ रहे हैं या तोड़ रहे हैं। एक्सपर्ट कहते हैं-यह एक सोशल स्किल भी मैकएंड्रयू के अनुसार, गॉसिप एक सामाजिक कौशल है। एक कुशल गॉसिपर वह है जो जानकारी तो रखता है, लेकिन उसे जिम्मेदारी और गोपनीयता के साथ साझा करता है। ऐसे भरोसेमंद व्यक्ति का समाज में सम्मान होता है।

ब्यौहारी में किराना दुकान में आग:हजारों का सामान राख; गांव के लोगों पर संदेह

ब्यौहारी में किराना दुकान में आग:हजारों का सामान राख; गांव के लोगों पर संदेह

शहडोल जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र के खड्डा गांव में बीती रात एक झोपड़ीनुमा किराना दुकान में अज्ञात लोगों ने आग लगा दी। इस घटना में दुकान पूरी तरह जलकर राख हो गई, जिससे दुकानदार को हजारों रुपए का नुकसान हुआ है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, खड्डा गांव निवासी सालिकराम पटेल सड़क किनारे एक झोपड़ीनुमा दुकान में किराना सामग्री बेचकर अपना व्यवसाय चलाते थे। रविवार शाम को वे रोज की तरह दुकान का सारा सामान पेटी में बंद कर घर चले गए थे। सोमवार सुबह जब वे दुकान खोलने पहुंचे, तो दुकान पूरी तरह जली हुई मिली और अंदर रखा सारा सामान राख में बदल चुका था। पीड़ित सालिकराम पटेल ने बताया कि उन्हें संदेह है कि गांव के कुछ लोगों ने जानबूझकर उनकी दुकान में आग लगाई है। हालांकि, उनका किसी से कोई विवाद नहीं था। घटना के बाद उन्होंने ब्यौहारी थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और संदिग्धों की तलाश के साथ-साथ आगजनी के कारणों की जांच कर रही है।

जब कोई 14 साल में प्रेग्नेंट हो जाए तो शरीर में क्या-क्या आफत आती है? डॉक्टर ने बताई ऐसी बात दंग रह जाएंगे आप

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Last Updated:April 13, 2026, 12:39 IST Teenage Pregnancy Risks: डॉक्टर के मुताबिक 14 साल की उम्र में प्रेग्नेंसी बेहद खतरनाक होती है, क्योंकि इस उम्र में शरीर पूरी तरह विकसित नहीं होता. इससे मां और बच्चे दोनों की जान के लिए खतरा हो सकता है. किशोरी की मेंटल हेल्थ के लिए भी प्रेग्नेंसी घातक साबित हो सकती है. इससे डिलीवरी में खतरनाक कॉम्प्लिकेशंस पैदा हो सकती हैं. डॉक्टर सोनाली गुप्ता के अनुसार 14 साल की उम्र में प्रेग्नेंसी जानलेवा भी हो सकती है. Early Pregnancy Dangers: उत्तराखंड के मुनस्यारी में एक लड़की का महज 13 साल की उम्र में बाल विवाह कर दिया गया. शादी के बाद किशोरी 14 साल की उम्र में प्रेग्नेंट हो गई और जब डिलीवरी के लिए उसे अस्पताल ले जाया गया, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ. अस्पताल प्रशासन से पुलिस को सूचना दी और आगे की कानूनी कार्रवाई की गई. डॉक्टर्स की मानें तो 14 साल की उम्र में प्रेग्नेंसी लड़की और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए जानलेवा हो सकती है. इससे कई गंभीर कॉम्प्लिकेशंस पैदा हो सकती हैं और सही ट्रीटमेंट न मिलने पर जान जा सकती है. प्रेग्नेंसी के लिए 20 से 30 साल की उम्र सबसे अच्छी मानी जाती है. ग्रेटर नोएडा के ब्लिस आईवीएफ एंड गायनी केयर सेंटर की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सोनाली गुप्ता ने News18 को बताया कि इतनी कम उम्र में प्रेग्नेंसी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से भी बेहद जोखिम भरी होती है. किशोरावस्था में शरीर पूरी तरह विकसित नहीं होता है, जिससे मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है. 14 साल की उम्र में शरीर पूरी तरह परिपक्व नहीं होता है और खासकर गर्भाशय और पेल्विक एरिया की ग्रोथ अधूरी रहती है. ऐसे में प्रेग्नेंसी के दौरान कॉम्प्लिकेशंस पैदा हो सकती हैं. इससे समय से पहले डिलीवरी, कम वजन का बच्चा, और डिलीवरी के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग जैसे खतरे होते हैं. कई मामलों में ऑपरेशन की जरूरत भी पड़ सकती है, जो इतनी कम उम्र में बेहद रिस्की होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर ने बताया कि इतनी कम उम्र में प्रेग्नेंसी का सबसे बड़ा खतरा मां की सेहत पर पड़ता है. किशोरियों में एनीमिया यानी खून की कमी कॉमन है और प्रेग्नेंसी के दौरान यह समस्या और बढ़ जाती है. इससे शरीर कमजोर हो जाता है और डिलीवरी के समय जान का खतरा भी बढ़ सकता है. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, प्रेग्नेंसी से जुड़ी डायबिटीज और इंफेक्शन का खतरा भी अधिक रहता है. सिर्फ शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा असर पड़ता है. इतनी कम उम्र में प्रेग्नेंसी एक बड़ा मानसिक दबाव बन जाती है. इससे डर, तनाव, डिप्रेशन और अकेलेपन की भावना पैदा हो सकती है. इससे उसका भविष्य और सामाजिक जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है. एक्सपर्ट के मुताबिक कम उम्र में गर्भावस्था का असर बच्चे पर भी पड़ता है. ऐसे मामलों में जन्म लेने वाले बच्चों का वजन कम होता है और उनमें विकास से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा ज्यादा रहता है. इसके अलावा नवजात शिशु की मृत्यु दर भी ज्यादा हो सकती है. इसलिए यह सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि बच्चे के लिए भी खतरनाक स्थिति होती है. ऐसी घटनाओं से बचने के लिए समाज में जागरुकता बढ़ाने की जरूरत है. प्रेग्नेंसी के लिए आमतौर पर 20 से 30 साल की उम्र सबसे ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है. हालांकि तकनीक की मदद से 35-40 की उम्र तक महिलाएं मां बन सकती हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 13, 2026, 12:39 IST