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थर्मस में रखी चाय कितनी देर तक सही रहती है, जानिये इसको कब तक पीना है फायदेमंद?

हौसलों की उड़ान से बंद दरवाजे से बनाया रास्ता, अब मिसाल बनी यह 'सफल' पत्नी

सुबह के समय चाय बनाकर थर्मस में रख लेना आजकल काफी आम बात हो गई है. ऑफिस, यात्रा या लंबे समय तक गर्म चाय चाहिए हो, तो थर्मस बहुत ही काम आता है. लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि थर्मस में रखी चाय कितनी देर तक पीने लायक रहती है और क्या लंबे समय तक रखी चाय नुकसानदायक भी हो सकती है. आइए इस बात को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं. थर्मस में चाय कितनी देर तक सही रहती है?अगर चाय को ताज़ा बनाकर अच्छे क्वालिटी वाले साफ थर्मस में रखा गया है, तो: 2 से 4 घंटे तक चाय स्वाद और सेहत, दोनों के लिहाज से ठीक रहती है.6 घंटे तक चाय सुरक्षित तो रहती है, लेकिन उसका स्वाद, खुशबू और ताजगी कम हो सकती है.8 घंटे या उससे ज्यादा समय तक रखी चाय पीने की सलाह नहीं दी जाती, खासकर अगर उसमें दूध मिला हो.क्योंकि दूध वाली चाय में बैक्टीरिया जल्दी पनप सकते हैं, खासकर अगर थर्मस पूरी तरह साफ न हो. थर्मस में चाय रखने के फायदे 1. लंबे समय तक गर्म रहती हैथर्मस की इंसुलेशन तकनीक चाय को कई घंटों तक गर्म बनाए रखती है. 2. समय की बचतबार‑बार चाय बनाने की जरूरत नहीं पड़ती, खासकर ऑफिस या यात्रा के दौरान. 3. ईंधन की बचतगैस या बिजली की खपत कम होती है. 4. बाहर की चाय से बचावघर की बनी चाय ज्यादा साफ‑सुथरी और सुरक्षित होती है. थर्मस में चाय रखने के नुकसान 1. स्वाद और खुशबू में कमीलंबे समय तक रखने से चाय बासी‑सी लगने लगती है. 2. सेहत को नुकसानदूध वाली चाय देर तक रखने से उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे गैस, एसिडिटी या फूड पॉइजनिंग का खतरा होता है. 3. पोषक तत्वों में कमीचाय में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स समय के साथ कम हो जाते हैं. 4. थर्मस साफ न हो तो खतराअच्छी तरह साफ न किया गया थर्मस पुराने बैक्टीरिया को बढ़ावा दे सकता है. सुरक्षित रखने के जरूरी टिप्स हमेशा उबाल कर ताज़ी चाय ही थर्मस में डालें.थर्मस को रोज़ाना अच्छी तरह धोकर सुखाएं.कोशिश करें कि 4 घंटे के अंदर चाय खत्म कर लें.अगर ज्यादा देर के लिए रखना हो, तो बिना दूध की चाय बेहतर रहती है. थर्मस में चाय रखना सुविधाजनक जरूर है, लेकिन इसे ज्यादा देर तक रखना सही नहीं. सेहत और स्वाद दोनों को ध्यान में रखते हुए सीमित समय में ही थर्मस वाली चाय का सेवन करना बेहतर होता है.

3,000 रुपये बनाम 1,500 रुपये का कल्याण युद्ध: क्या बीजेपी बंगाल में ममता दीदी को ‘आउट’ करने की कोशिश कर रही है? | चुनाव समाचार

PBKS Vs SRH Live: Follow latest score updates from IPL 2026 match between Punjab Kings and Sunrisers Hyderabad. (PTI Photo)

आखरी अपडेट:11 अप्रैल, 2026, 13:48 IST भाजपा का बंगाल घोषणापत्र एक स्पष्ट संकेत है कि विचारधारा माहौल तय कर सकती है, लेकिन चुनाव रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था पर जीते जा रहे हैं 2026 के घोषणापत्र से पता चलता है कि भाजपा अब ममता बनर्जी की कल्याण राजनीति को बदलने की कोशिश नहीं कर रही है; वह इसे दोहराने और उससे आगे निकलने की कोशिश कर रहा है। (पीटीआई) सभी सुर्खियाँ बटोरने वाले वादों – 60 दिनों के भीतर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के कार्यान्वयन, और अवैध आप्रवासन पर परिचित “पता लगाने, हटाने, निर्वासित करने” की पिच के लिए – भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का नवीनतम पश्चिम बंगाल घोषणापत्र कहीं अधिक परिणामी बदलाव का खुलासा करता है। राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी बयानबाजी के पीछे एक शांत लेकिन तीव्र पुनर्गणना निहित है: भाजपा अब लंबे समय से ममता बनर्जी और उनकी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रभुत्व वाले कल्याण युद्धक्षेत्र में कदम रख रही है। 2021 का विधानसभा चुनाव, कई मायनों में, बंगाल में भाजपा के लिए एक बड़ा संकेत था, लेकिन साथ ही यह उसकी सीमाओं का एक सबक भी था। पार्टी ने पहचान, राष्ट्रीय सुरक्षा और ध्रुवीकरण जैसे विषयों से भरपूर अभियान चलाया। हालांकि यह एक महत्वपूर्ण वोट शेयर को मजबूत करने और केवल दो सीटों से 77 तक पहुंचने में सफल रही, लेकिन यह बनर्जी को हटाने में विफल रही, जिनकी राजनीतिक प्रवृत्ति अधिक तीव्र साबित हुई। उन्होंने अपने अभियान को मूर्त कल्याण वितरण में शामिल किया – नकद हस्तांतरण, सब्सिडी वाली योजनाएं, और प्रत्यक्ष लाभ जो ग्रामीण और शहरी बंगाल के घरों तक पहुंचे। 2026 के घोषणापत्र की ओर तेजी से आगे बढ़ें, और ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा ने उस सबक को आत्मसात कर लिया है। पार्टी ने अतिरिक्त वित्तीय सहायता कार्यक्रमों पर जोर देते हुए कम से कम चार मौजूदा टीएमसी योजनाओं को मात देने का वादा किया है। यह नीतिगत नकल से कहीं अधिक है। बीजेपी का वादा बनाम टीएमसी का ऑफर इस बार ऐसा लगता है कि बंगाल की राजनीतिक लड़ाई कल्याण पर सीधी लड़ाई है। बनर्जी के तहत टीएमसी के कल्याण मॉडल के केंद्र में लक्ष्मीर भंडार योजना है। 2021 में लॉन्च किया गया, यह महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करता है – शुरुआत में 500 रुपये, अब श्रेणी के आधार पर 1,000 रुपये से 1,200 रुपये तक की वृद्धि हुई है। जवाब में, भाजपा ने अधिक आक्रामक नकद हस्तांतरण मॉडल का वादा किया है, जो मध्यम वर्ग, निम्न-मध्यम वर्ग और गरीब महिलाओं को प्रति माह 3,000 रुपये की पेशकश करेगा, इसे वित्तीय स्वतंत्रता के लिए एक उपकरण के रूप में पेश किया जाएगा। यह प्रतियोगिता बेरोजगार युवाओं तक भी फैली हुई है। टीएमसी की युबा साथी योजना 21 से 40 वर्ष की आयु वर्ग के बेरोजगार युवाओं को प्रति माह 1,500 रुपये प्रदान करती है। भाजपा ने दोगुनी राशि – 3,000 रुपये मासिक भत्ता, पांच वर्षों में एक करोड़ रोजगार सृजन के व्यापक वादे के साथ, रोजगार आश्वासन के साथ कल्याण को मिश्रित करने का प्रयास किया है। स्वास्थ्य सेवा में, टीएमसी का स्वास्थ्य साथी प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का बीमा कवरेज प्रदान करता है। भाजपा ने लाभार्थियों को केंद्रीय योजना आयुष्मान भारत के साथ एकीकृत करने का प्रस्ताव रखा है, जबकि कवरेज सीमा को 5 लाख रुपये से अधिक बढ़ाया है, जो विस्तार और केंद्रीय संरेखण दोनों का संकेत है। इसके अलावा, आयुष्मान भारत के साथ, लाभार्थी केवल पश्चिम बंगाल में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं, जैसा कि सत्य साथी के मामले में है। किसान भी इस कल्याणकारी द्वंद्व के केंद्र में हैं। टीएमसी के कृषक बंधु के तहत किसानों को 4,000 रुपये से 10,000 रुपये तक की वार्षिक सहायता मिलती है। भाजपा ने केंद्र की पीएम-किसान योजना को अतिरिक्त राज्य समर्थन के साथ जोड़कर इसे बढ़ाने का वादा किया है, जिससे कुल सहायता लगभग 9,000 रुपये सालाना हो जाएगी। भाजपा के अनुसार, नई प्रणाली के तहत वर्गीकरण में कोई भेदभाव नहीं होगा, जहां भाजपा के सत्ता में आने पर प्रत्येक किसान को समान राशि मिलेगी। यह बदलाव क्यों मायने रखता है? यह बंगाल में एक राजनीतिक सच्चाई की मौन स्वीकृति है- कल्याण सिर्फ शासन नहीं है, यह चुनावी मुद्रा है। पिछले कुछ वर्षों में बनर्जी ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जहां लक्ष्मीर भंडार और कन्याश्री जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्य की उपस्थिति सीधे नागरिकों के जीवन में महसूस की जाती है। ये मुफ़्त चीज़ों से कहीं अधिक हैं; वे राज्य समर्थन के मासिक अनुस्मारक हैं जो जीवन को छूते हैं। भाजपा ने 2021 के चुनाव में इस मॉडल की भावनात्मक और आर्थिक ताकत को कम आंककर गलती की। नवंबर 2025 में भी, भाजपा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें बंगाल की मुख्यमंत्री की खैरात की राजनीति की आलोचना की गई थी और दावा किया गया था कि उनकी मुफ्त चीज़ें “ऋण का जाल है, उपहार नहीं”। हालाँकि, बीजेपी को जल्द ही एहसास हुआ कि ग्रामीण बंगाल, विशेष रूप से दक्षिण बंगाल के ग्रामीण हिस्से, पार्टी के लिए तब तक निषिद्ध क्षेत्र बने रहेंगे जब तक कि वे परिवारों को टीएमसी के प्रति वफादार बनाने वाली खैरात का स्वागत नहीं करते। इसके विपरीत, 2026 के घोषणापत्र से पता चलता है कि भाजपा अब बनर्जी की कल्याण राजनीति को बदलने की कोशिश नहीं कर रही है; वह इसे दोहराने और उससे आगे निकलने की कोशिश कर रहा है। टीएमसी को उसके ही खेल में हराना? इससे एक गहरा सवाल उठता है: क्या बीजेपी टीएमसी को मात दे सकती है? यहां दो जोखिम हैं. पहला, विश्वसनीयता. कल्याणकारी राजनीति का मतलब सिर्फ योजनाओं की घोषणा करना नहीं है; यह डिलीवरी में विश्वास के बारे में है। बनर्जी की सरकार को सत्ता में रहने का लाभ मिलता है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी चाहे जो भी वादा करें, तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने वादे तुरंत पूरे कर सकते हैं. किसी भी सत्तारूढ़ दल के लिए यह हमेशा एक अतिरिक्त लाभ होता है। दूसरा, भेदभाव. यदि दोनों पार्टियां समान लाभ का वादा कर रही हैं, तो मुकाबला विचारधारा से हटकर कार्यान्वयन और व्यक्तित्व पर केंद्रित हो जाता है। ऐसे परिदृश्य में, बनर्जी की

Diabetes Symptoms : शरीर में दिख रहे हैं ये 7 बदलाव? हो सकता है आप डायबिटीज के शिकार हों, आज ही कराएं जांच!

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Last Updated:April 11, 2026, 13:17 IST Diabetes Symptoms : आपका शरीर जो संकेत भेजता है, उन्हें सही समय पर पहचानना आपके स्वास्थ्य संसाधनों की सबसे कुशल योजना का एक अभिन्न अंग है. मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जिसके शुरुआती लक्षणों को लोग अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, और उन्हें सामान्य थकान समझ लेते हैं. लेकिन लिए सही समय पर इसकी पहचान करना ही सबसे सटीक तरीका है. पहले डायबिटीज को उम्र बढ़ने के बाद होने वाली बीमारी माना जाता था. लेकिन अब बदलती लाइफस्टाइल, तनाव और खाने की आदतों की वजह से ये समस्या कम उम्र में भी बढ़ रही है. खास बात ये है कि डायबिटीज अचानक नहीं आती. ये प्री-डायबिटीज स्टेज से धीरे-धीरे बढ़ती है. अगर इस दौरान शरीर के दिए संकेतों को पहचान लिया जाए तो हालात को कंट्रोल किया जा सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि खासकर ये 7 संकेत पहले ही बता देते हैं कि आपको डायबिटीज हो सकती है. घाव धीरे-धीरे भरना जब खून में ग्लूकोज का स्तर ज्यादा होता है तो रक्त नलिकाएं कमजोर हो जाती हैं. इससे खून का संचार सही से नहीं होता. इसी वजह से छोटे घाव भी सामान्य से ज्यादा समय लेते हैं ठीक होने में. इसे शरीर में शुगर लेवल बढ़ने का संकेत मानना चाहिए. बार-बार पेशाब आना. द इकनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक, जब खून में शुगर ज्यादा हो जाती है तो किडनी अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के जरिए बाहर निकालती है. इससे बार-बार पेशाब आती है, खासकर रात में कई बार उठना पड़ता है. ये शरीर के शुगर को कंट्रोल न कर पाने का संकेत है. (प्रतीकात्मक तस्वीर). Add News18 as Preferred Source on Google इन्फेक्शन ज्यादा होना हाई ब्लड शुगर की वजह से शरीर में बैक्टीरिया और यीस्ट बढ़ जाते हैं. इससे बार-बार सर्दी, यूरिन इन्फेक्शन (UTI), स्किन प्रॉब्लम्स और मसूड़ों की दिक्कतें हो सकती हैं. अगर आपकी इम्युनिटी कम हो रही है तो ध्यान देना चाहिए. बहुत ज्यादा प्यास लगना बार-बार पेशाब जाने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इससे डिहाइड्रेशन होता है और हमेशा प्यास लगती रहती है. बार-बार पानी पीने का मन करना भी खून में शुगर बढ़ने का संकेत है. लगातार थकान महसूस होना जब शरीर ग्लूकोज को एनर्जी में नहीं बदल पाता तब थकान आती है. अगर अच्छी नींद लेने के बाद भी आपको कमजोरी या थकावट महसूस हो रही है, तो इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस या प्री-डायबिटीज का संकेत मानना चाहिए. वजन में अचानक बदलाव अगर हमारी लाइफस्टाइल में कोई बदलाव नहीं है फिर भी अचानक वजन बढ़ना या कम होना हो रहा है तो यह चिंता की बात हो सकती है. जब शरीर ग्लूकोज को सही से नहीं ले पाता तो मांसपेशियां और फैट टूटने लगते हैं. इससे वजन में बहुत ज्यादा बदलाव आ सकते हैं. दृष्टि धुंधली होना. ज्यादा ब्लड शुगर आंखों के लेंस पर असर डालता है जिससे नजर धुंधली हो सकती है. शुरू में ये थोड़े समय के लिए हो सकता है, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी गंभीर आंखों की समस्या हो सकती है. आखिर में याद रखने वाली बात यह है कि इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि आपको जरूर डायबिटीज है. लेकिन ये शुरुआती चेतावनी संकेत हैं. इसी समय ब्लड शुगर टेस्ट करवाना, हेल्दी खाना खाना, एक्सरसाइज करना और तनाव कम करना बहुत जरूरी है. First Published : April 11, 2026, 13:17 IST

एम्स भोपाल में चूहों का खतरा:AC डक्ट से निकलकर वार्ड-एनआईसीयू तक पहुंचे, 20 नवजात भर्ती; स्टाफ बोला- एमवाय जैसी घटना हुई तो जिम्मेदार कौन

एम्स भोपाल में चूहों का खतरा:AC डक्ट से निकलकर वार्ड-एनआईसीयू तक पहुंचे, 20 नवजात भर्ती; स्टाफ बोला- एमवाय जैसी घटना हुई तो जिम्मेदार कौन

एम्स भोपाल में इन दिनों चूहों की बढ़ती मौजूदगी ने मरीजों और स्टाफ दोनों की चिंता बढ़ा दी है। सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम के डक्ट में पनपे चूहे अब वार्ड, कॉरिडोर और यहां तक कि एनआईसीयू तक पहुंच गए हैं। बीते तीन दिनों में 25 से ज्यादा मृत चूहे अलग-अलग क्षेत्रों में मिले हैं। यह स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि बीते साल एमवाय अस्पताल इंदौर में चूहों के कारण दो नवजातों की मौत हो चुकी है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठे थे। एम्स भोपाल में सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम लगा हुआ है, जिसके डक्ट में चूहों की भरमार पाई गई है। जानकारी के अनुसार, अब तक पेस्ट कंट्रोल केवल वार्ड और निचले हिस्सों तक सीमित था, जिससे एसी डक्ट में चूहों की संख्या लगातार बढ़ती रही। अप्रैल की शुरुआत में जब एसी मेंटेनेंस के दौरान रियरिंग टीम ने जांच की, तो डक्ट के अंदर बड़ी संख्या में चूहे पाए गए। इसी के बाद प्रबंधन ने वहां पेस्ट कंट्रोल कराने का फैसला लिया। पेस्ट कंट्रोल के बाद नई समस्या तीन दिन तक चले पेस्ट कंट्रोल अभियान के बाद अब चूहे डक्ट से बाहर निकलकर वार्ड और कॉरिडोर में आने लगे हैं। बीते तीन दिनों में सफाई कर्मचारियों को 25 से ज्यादा मृत चूहे विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में मिले हैं। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है और अस्पताल का वातावरण प्रभावित हो रहा है। एम्स के एनआईसीयू (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) में इस समय करीब 20 नवजात भर्ती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से यहां भी चूहों की आवाजाही देखी जा रही है। शिशु रोग विभाग के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चूहे एनआईसीयू में घूमते नजर आते हैं और कुछ समय बाद मर जाते हैं। इससे नवजातों को काटने का खतरा तो है ही, साथ ही संक्रमण का जोखिम भी बहुत अधिक है। यदि यहां कोई घटना होती है तो एमवाय अस्पताल की तहर जिम्मेदार डॉक्टरों और स्टाफ को माना जाएगा। जबकि इस स्थिति को लेकर प्रबंधन को कई बार अवगत कराया गया है। संक्रमण का सबसे बड़ा खतरा विशेषज्ञों के अनुसार, चूहों के शरीर, बाल, पैरों और मल-मूत्र में कई खतरनाक बैक्टीरिया होते हैं। ये बैक्टीरिया गंभीर संक्रमण फैला सकते हैं। एनआईसीयू में भर्ती बच्चे पहले से ही कमजोर होते हैं, ऐसे में मामूली संक्रमण भी उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। मामले में एम्स प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो पेस्ट कंट्रोल के दौरान का है। उनके अनुसार, पेस्ट कंट्रोल के समय चूहे दवा के असर से इधर-उधर भागते हैं और कुछ समय बाद मर जाते हैं। प्रबंधन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया प्रशिक्षित कर्मियों की निगरानी में की जा रही है। मृत चूहों को तुरंत हटाया जाता है और संबंधित क्षेत्र को वैज्ञानिक तरीके से साफ किया जाता है। इंदौर में दो मौतें हुई थीं 31 अगस्त-1 सितंबर 2025 की रात इंदौर के एमवाय अस्पताल के एनआईसीयू में दो नवजातों को चूहों ने काट लिया था, जिनकी बाद में मौत हो गई थी। हाई कोर्ट तक मामला पहुंचा। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही माना और एक डॉक्टर सहित 8 लोगों को सस्पेंड किया गया था।

इस्तीफे से पहले CM हाउस खाली कर रहे नीतीश:7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो रहा सामान; लालू के पड़ोसी बनेंगे नीतीश कुमार

इस्तीफे से पहले CM हाउस खाली कर रहे नीतीश:7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो रहा सामान; लालू के पड़ोसी बनेंगे नीतीश कुमार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफे से पहले CM हाउस खाली कर रहे हैं। 1 अणे मार्ग से सामान 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो रहा है। मुख्यमंत्री आवास से ट्रैक्टर में सामान बाहर ले जाया जा रहा है। नीतीश कुमार ने 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद की शपथ ली है। सूत्रों की माने तो नीतीश 14 अप्रैल को CM पद से इस्तीफा दे सकते हैं। 15 अप्रैल को बिहार में नई सरकार बन सकती है। CM पद से हटने के बाद नीतीश कुमार लालू यादव के पड़ोसी बन जाएंगे। वह दिल्ली तो जा रहे हैं, लेकिन बिहार में अपना ठिकाना नहीं छोड़ेंगे। 7 सर्कुलर रोड आवास का इस्तेमाल अभी नीतीश कुमार ही कर रहे हैं। इसे CM कार्यालय के तौर पर यूज किया जा रहा है। नीतीश ने अपनी देखरेख में इस बंगले को बनावाया था। ये इतना मजबूत है कि भूकंप के झटके झेल सके। इसके लॉन में कोलकाता से मंगाकर घास लगाई गई है। नीतीश कुमार का 7 सर्कुलर रोड वाले आवास से क्या नाता है? इस बंगले की क्या खासियत है? पढ़िए रिपोर्ट…। नीतीश कुमार को पसंद है 7 सर्कुलर रोड बंगला नीतीश कुमार को 7 सर्कुलर रोड बंगला पसंद है। लोकसभा चुनाव 2014 हारने के बाद उन्होंने CM पद छोड़ दिया था। जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था। इसके बाद रहने के लिए 7 सर्कुलर आ गए थे। इसी बंगले में रहते हुए नीतीश ने जीतन राम से मुख्यमंत्री की कुर्सी वापस ले ली थी। विधानसभा 2015 में जीत दर्ज की और मुख्यमंत्री बने थे। CM बनने के बाद नीतीश एक अणे मार्ग गए, लेकिन 7 सर्कुलर बंगला अपने पास बनाए रखा। विपक्ष ने 2-2 बंगला रखने का आरोप लगाया तो इसे मुख्य सचिव के नाम अलॉट किया गया। नीतीश ने अपनी देखरेख में इस बंगले का भूकंप रोधी निर्माण कराया था। लालू यादव के पड़ोसी बनेंगे नीतीश कुमार नीतीश कुमार 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो रहे हैं। अब वे लालू यादव के पड़ोसी बन जाएंगे। यहां से राबड़ी आवास बस दो घर बाद है। दोनों बंगलों के बीच की दूरी करीब 200 मीटर होगी। दोनों घर सर्कुलर रोड के दक्षिण तरफ है। 7 सर्कुलर रोड वाले बंगले की खास बातें नंबर 7 से है नीतीश कुमार को प्रेम नीतीश कुमार अपने लिए नंबर 7 को लकी मानते हैं। वह केंद्र सरकार में रेल मंत्री बने थे तब उनके फोन नंबर का अंतिम अंक 7 था। नीतीश जब पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तो उन्हें जो गाड़ी मिली थी उसका नंबर 777 था। नीतीश ने 1977 में राजनीति शुरू की थी। 1987 में युवा लोकदल के अध्यक्ष बने थे। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को 7 निश्चय नाम दिया। अभी बिहार सरकार 7 निश्चय पार्ट 3 पर काम कर रही है। 19 वर्षों से बिहार की सत्ता का केंद्र रहा है 1 अणे मार्ग नीतीश अभी सीएम आवास एक अणे मार्ग में रह रहे हैं। यह घर लगभग 19 वर्षों से बिहार की सत्ता का केंद्र रहा है। जहां से नीतीश कुमार ने राज्य की राजनीति और प्रशासन को दिशा दी। अब राज्यसभा जाने के बाद उनका 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट होना एक तरह से बिहार की राजनीति में नई भूमिका की शुरुआत माना जा रहा है।

मंडला में अंजनिया बाईपास पर पेपर लोड ट्रक पलटा:NH-30 पर हादसे में ड्राइवर मामूली घायल

मंडला में अंजनिया बाईपास पर पेपर लोड ट्रक पलटा:NH-30 पर हादसे में ड्राइवर मामूली घायल

मंडला जिले के अंजनिया बाईपास स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर एक ट्रक पलट गया। इस हादसे में ट्रक चालक को मामूली चोटें आई हैं। रायपुर से जबलपुर की ओर जा रहा यह ट्रक (नंबर एमपी 20 जी आर 9323) फोटो कॉपी पेपर से लदा था और अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। चालक ने बताया कि सामने अचानक एक मोटरसाइकिल सवार के आ जाने से उसे बचाने की कोशिश में ट्रक अनियंत्रित हो गया। इसी कारण यह दुर्घटना हुई। हादसे के बाद ट्रक में लदे पेपर के बंडल सड़क पर बिखर गए। स्थानीय लोगों ने ट्रक चालक के नशे में होने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि ट्रक के भीतर शराब की खाली बोतलें भी मिली हैं। स्थानीय निवासियों ने अंजनिया बाईपास पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। घटना की सूचना मिलते ही अंजनिया पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने चालक को ट्रक से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया और वाहन मालिक को सूचित किया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

बच्चों में तेजी से बढ़ रही दांतों की सड़न, यहां डॉक्टर से जानिए कारण और बचाव के देसी तरीके

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अंबाला: अंबाला शहर के लोगों के लिए एक खामोश खतरा तेजी से पनप रहा है और यह खतरा कहीं बाहर नहीं, बल्कि उनके अपने मुंह के भीतर छिपा हुआ है. दरअसल, दांतों की बीमारियां अब धीरे-धीरे नहीं, बल्कि खतरनाक रफ्तार से बढ़ रही हैं. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अस्पतालों में रोज आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो दांतों के दर्द, सड़न और खून आने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे खतरे की जड़ मुंह में पनपने वाले बैड बैक्टीरिया हैं, जो हर बार खाने के बाद एसिड बनाते हैं. यही एसिड धीरे-धीरे दांतों की मजबूत परत को घिसता है और उन्हें अंदर से खोखला बना देता है. तेजी से खराब हो रहे हैं बच्चों के दांत बता दें कि शुरुआत में यह नुकसान नजर नहीं आता, लेकिन समय के साथ दांतों में छोटे-छोटे छेद बनने लगते हैं, जिन्हें आम भाषा में कीड़ा लगना कहा जाता है, क्योंकि जब तक लोगों को इसका एहसास होता है तब तक सड़न दांतों की जड़ों तक पहुंच चुकी होती है और कई बार दांत निकालने तक की नौबत आ जाती है. खराब आदतें हैं वजह सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब बच्चे भी इस खतरे से अछूते नहीं हैं. 3 से 5 साल के मासूम बच्चों में रात को दूध की बोतल मुंह में लेकर सोने की आदत उनके दांतों को तेजी से खराब कर रही है. इससे जहां उनके आगे के दांत सड़ने लगते हैं, वहीं कई बार कम उम्र में ही टूट भी जाते हैं. वहीं, 8 साल तक के बच्चों में पीछे के दूध के दांत खराब होने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो आगे चलकर स्थायी दांतों के लिए भी खतरा बन सकते हैं. इस बारे में जब लोकल 18 की टीम ने अंबाला नागरिक अस्पताल के आयुर्वेदाचार्य डॉ. जितेंद्र वर्मा से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि आजकल छोटे बच्चों में यह आम समस्या बन चुकी है, जिसमें दांत टूटना, कीड़े लगना या फिर दांत देर से आना शामिल है. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में बच्चों के दांतों की देखभाल के कुछ उपाय बताए गए हैं, जिनमें मां का दूध पीने वाले छोटे बच्चों के लिए मां की डाइट बहुत अहम भूमिका निभाती है. मां को अपनी डाइट में गाय का दूध और हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए, क्योंकि इनके पोषक तत्व मां के दूध के जरिए बच्चों तक पहुंचते हैं, जो दांतों के लिए लाभदायक होते हैं. दांतों की सही सफाई न करने के कारण कीड़ा लगना उन्होंने कहा कि जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाता है, तो वह बाहर की चीजें खाना पसंद करने लगता है, लेकिन यह आदत कम उम्र के बच्चों के लिए नुकसानदायक होती है. दांतों की सही सफाई न करने के कारण कीड़ा लगने का खतरा बढ़ जाता है. आजकल कई प्रकार के टूथपेस्ट उपलब्ध हैं, लेकिन आयुर्वेदिक दातून को सबसे ज्यादा फायदेमंद माना गया है. इसलिए नीम, बबूल, अर्जुन और खदिर की दातून का उपयोग करना चाहिए. सुबह और रात के समय खाना खाने के बाद ब्रश जरूर करना चाहिए उन्होंने यह भी कहा कि सुबह और रात के समय खाना खाने के बाद ब्रश जरूर करना चाहिए, क्योंकि इससे दांतों में फंसे भोजन के कण साफ हो जाते हैं. जरूरत पड़ने पर उंगलियों से भी दांतों की सफाई की जा सकती है या किसी आयुर्वेदिक टूथपेस्ट से अच्छी तरह ब्रश किया जा सकता है. दांतों को मजबूत करने के देसी उपाय आयुर्वेद में एक और उपाय बताया गया है, जिसमें अमरूद और सफेदे के पत्तों को चबाने से दांत मजबूत होते हैं और कीड़े खत्म करने में मदद मिलती है. इसके साथ ही पैक्ड फूड, फास्ट फूड और मीठे स्नैक्स का बढ़ता सेवन इस समस्या को और गंभीर बना रहा है. ये चीजें दांतों से चिपक जाती हैं और बैक्टीरिया को पनपने का मौका देती हैं, इसलिए बच्चों को इनका सेवन कम करना चाहिए. उन्होंने बताया कि 20 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में संक्रमण दांतों की जड़ों तक पहुंच रहा है. मसूड़ों से खून आना, दांतों में तेज दर्द और दांतों का हिलना ये सभी संकेत हैं कि बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी है. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

रणवीर सिंह ने मोहन भागवत से मुलाकात की:नागपुर में रेशिमबाग स्मृति मंदिर पहुंचे, RSS के संस्थापक हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी

रणवीर सिंह ने मोहन भागवत से मुलाकात की:नागपुर में रेशिमबाग स्मृति मंदिर पहुंचे, RSS के संस्थापक हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी

बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह शुक्रवार को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के मेमोरियल पर गए। जहां उन्होंने उन्हें श्रद्धांजलि दी और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात की। पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि एक्टर ने संघ के दूसरे सरसंघचालक एम एस गोलवलकर के मेमोरियल पर जाकर उन्हें भी श्रद्धांजलि दी। रणवीर दोपहर करीब 4 बजे मुंबई से चार्टर्ड फ्लाइट से नागपुर पहुंचे। वे रेशिमबाग स्थित हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर गए, जो RSS से जुड़ा प्रमुख स्थान है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से चर्चा की इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि दौरा छोटा, लेकिन अहम रहा। उन्होंने RSS पदाधिकारियों के साथ कई विषयों पर बातचीत की, हालांकि इन चर्चाओं की जानकारी पब्लिक नहीं की गई है। एयरपोर्ट अधिकारियों ने भी उनके आने और जाने की पुष्टि की। रणवीर सिंह शाम करीब 8 बजे वापस मुंबई लौट गए। मोहन भागवत से मुलाकात की टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रणवीर सिंह ने नागपुर में RSS प्रमुख मोहन भागवत से भी मुलाकात की। यह मुलाकात RSS हेडक्वार्टर में हुई, हालांकि संगठन ने कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया है। RSS से जुड़े लोगों ने रेशिमबाग स्थित स्मृति भवन में उनके दौरे की पुष्टि की है। हालांकि, उनके इस दौरे का उद्देश्य साफ नहीं किया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले रणवीर सिंह ने RSS के स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर एक वीडियो मैसेज जारी कर अपनी शुभकामनाएं दी थीं। बता दें कि रणवीर का यह दौरा ऐसे समय में सामने आया है, जब उनकी फिल्म धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई कर रही है और इसने दुनिया भर में 1600 करोड़ रुपए से ज्यादा कमा लिए हैं।

रणवीर सिंह ने मोहन भागवत से मुलाकात की:नागपुर में रेशिमबाग स्मृति मंदिर पहुंचे, RSS के संस्थापक हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी

रणवीर सिंह ने मोहन भागवत से मुलाकात की:नागपुर में रेशिमबाग स्मृति मंदिर पहुंचे, RSS के संस्थापक हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी

बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह शुक्रवार को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के मेमोरियल पर गए। जहां उन्होंने उन्हें श्रद्धांजलि दी और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात की। पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि एक्टर ने संघ के दूसरे सरसंघचालक एम एस गोलवलकर के मेमोरियल पर जाकर उन्हें भी श्रद्धांजलि दी। रणवीर दोपहर करीब 4 बजे मुंबई से चार्टर्ड फ्लाइट से नागपुर पहुंचे। वे रेशिमबाग स्थित हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर गए, जो RSS से जुड़ा प्रमुख स्थान है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से चर्चा की इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि दौरा छोटा, लेकिन अहम रहा। उन्होंने RSS पदाधिकारियों के साथ कई विषयों पर बातचीत की, हालांकि इन चर्चाओं की जानकारी पब्लिक नहीं की गई है। एयरपोर्ट अधिकारियों ने भी उनके आने और जाने की पुष्टि की। रणवीर सिंह शाम करीब 8 बजे वापस मुंबई लौट गए। मोहन भागवत से मुलाकात की टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रणवीर सिंह ने नागपुर में RSS प्रमुख मोहन भागवत से भी मुलाकात की। यह मुलाकात RSS हेडक्वार्टर में हुई, हालांकि संगठन ने कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया है। RSS से जुड़े लोगों ने रेशिमबाग स्थित स्मृति भवन में उनके दौरे की पुष्टि की है। हालांकि, उनके इस दौरे का उद्देश्य साफ नहीं किया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले रणवीर सिंह ने RSS के स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर एक वीडियो मैसेज जारी कर अपनी शुभकामनाएं दी थीं। बता दें कि रणवीर का यह दौरा ऐसे समय में सामने आया है, जब उनकी फिल्म धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई कर रही है और इसने दुनिया भर में 1600 करोड़ रुपए से ज्यादा कमा लिए हैं।

बजट फ्रेंडली कपल ट्रिप: 10,000 रुपये में भारत की इन जगहों पर कर सकते हैं एक्सप्लोर, गोपालगंज के लिए आदर्श यात्रा

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कम बजट में भारत में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहें: यदि आप और महानगर कहीं घूमने का मन बना रहे हैं, लेकिन बजट कम है, तो चिंता न लें। भारत में ऐसी कई खूबसूरत जगहें हैं जहां आप 10,000 रुपये के अंदर एक शानदार और रोमांटिक ट्रिप प्लान कर सकते हैं। कम बजट का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप कम बजट का मजा लें। यहां कुछ ऐसी जगहों की लिस्ट है जो कपल्स के लिए बेस्ट हैं। तो जानिए कौन सी हैं वो शानदार जगहें? ऋषिकेष, उत्तराखंड (ऋषिकेश) गंगा किनारे बसा यह शहरी शांति और रोमांच का प्रभाव मेल है। अगर आप दोनों को एडवेंचर पसंद है, तो यह जगह आपके लिए ही है। कैसे घूमें: दिल्ली से बस का बिजनेस कम है। आप वहां यूनिवर्सल स्कूटर किराए पर ले सकते हैं। क्या करें: गंगा आरती देखें, राम झूला और लक्ष्मण झूला पर टहलें, और कैफे में मठों का आनंद लें। बजट टिप: यहां कई खूबसूरत होमस्टे और आश्रम हैं जो काफी संपत्ति और साफ-सुथरे पाए जाते हैं। जयपुर, राजस्थान (जयपुर) ‘पिंक सिटी’ अपने शाही मेहमानवाजी और किलो के लिए मशहूर है। यहां कपल्स के लिए शामें बेहद रोमांटिक होती हैं। कैसे घूमें: ट्रेन या बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है। क्या करें: अमेरिका का किला, हवा महल और नाहरगढ़ किले से शहर का सूर्यास्त देखें। बस्तु बाजार में सामूहिक सामान के साथ। बजट टिप: यहां स्ट्रीट फूड जैसे प्याज कचौरी और घेवर का स्वाद चखें, जो सस्ता भी है और सस्ता भी। लैंसडाउन, उत्तराखंड (लैंसडाउन) यदि आप भीड़भाड़ वाली जगह से किसी शांत स्थान पर दूरी तय करना चाहते हैं, तो लैंसडाउन से बेहतर कुछ नहीं। यह एक छोटा सा हिल स्टेशन है जो बहुत ही साफ और शांत है। कैसे घूमें: अपनी कार या बस से यहां पहुंच सकते हैं। क्या करें: भल्ला ताल झील में बोटिंग और टिप-इन-टॉप पॉइंट से हिमालय की चोटियों का दीदार करें। बजट टिप: यहां बहुत ज्यादा होटल नहीं हैं, इसलिए पहले से किफायती दाम पर सलाह देना। कसोल, हिमाचल प्रदेश (कसोल) कसोल उन कपल्स के लिए बेस्ट है जो प्रकृति के करीब चाहते हैं। यहां नदी, पहाड़ और हरियाली आपको देखने को मिलेगी। कैसे घूमें: दिल्ली से रात की बस रिश्ता संबंध या भुंतर पहुंचें। क्या करें: मणिकर्ण साहिब के दर्शन और पार्वती नदी के तट से जुड़ी हजारों बातें। बजट टिप: यहां इजरायली कैफे में खाना थोड़ा सस्ता और बहुत टेस्टी होता है। साथ ही यहां होटल में रहने का अनुभव भी होता है। ओरछा, मध्य प्रदेश (ओरछा) इतिहास प्रेमियों के लिए यह किसी जन्नत से कम नहीं है। बेतवा नदी के किनारे बसे इस छोटे से शहर में पुराने महलों और चित्रों की सुंदरता आपको देखने को मिलेगी। कैसे घूमें: रसोईघर से यात्री तक और वहां से ऑटो या टैक्सी ले लें। क्या करें: बेतवा नदी के तट पर भगवान के दर्शन और शाम को लाइट एंड साउंड शो देखें। बजट टिप: ओरघा काफी छोटा है, इसलिए आप पूरे शहर में पैदल ही घूम सकते हैं, जिससे आपका पैसा बच जाएगा। बजट यात्रा के लिए कुछ जरूरी जरूरी बातें काम ऑफ-सीजन में…: जब भीड़ कम होती है, तो होटलों के दाम खत्म हो जाते हैं। लोकल डाउनलोड: किराये पर लें या पैदल यात्रा करें। खाना: रेस्तरां में मशहूर स्थानीय ढाकों और स्ट्रीट फूड की सजावट करें। यह अवश्य पढ़ें: बजट फ्रेंडली कपल ट्रिप: कम बजट में यादगार बनाना चाहते हैं हनीमून? भारत के इन स्थानों को जानें; कपल्स के लिए बिल्कुल सही जगह है