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ऐसे कोर्स डिजाइन करें, जो ट्रेनिंग के बाद रोजगार दिलाएं:सीएम बोले- सीखो कमाओ योजना में 20 हजार लोगों की ट्रेनिंग को दोगुना कराएं

ऐसे कोर्स डिजाइन करें, जो ट्रेनिंग के बाद रोजगार दिलाएं:सीएम बोले- सीखो कमाओ योजना में 20 हजार लोगों की ट्रेनिंग को दोगुना कराएं

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में ऐसे नए उपयोगी कोर्स डिजाइन किए जाएं, जो प्रशिक्षण के बाद युवाओं को तत्काल रोजगार दिलाने में सहायक हों। मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना में लगभग 20 हजार से व्यक्तियों के प्रशिक्षण की उपलब्धि को दोगुना किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश समत्व भवन में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक में दिए। तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल की मौजूदगी में समत्व भवन में हुई मीटिंग में जानकारी दी गई कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर आईटीआई की ग्रेडिंग जारी की है, इसमें मध्यप्रदेश 5वें स्थान पर है। प्रदेश की 47 शासकीय आईटीआई को 10 में से 9 प्लस ग्रेडिंग स्कोर मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को स्किल कैपिटल बनाने की दिशा में अनेक प्रयास किए हैं। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों और डेयरी विकास कार्यक्रमों से भी युवाओं को जोड़ने के निर्देश दिए। इसके लिए कौशल विकास और रोजगार विभाग से समन्वय कर समुचित कदम उठाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि वर्ष-2026 में विभिन्न गतिविधियों से युवाओं को जोड़ने और रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए समुचित प्रयास करने को कहा। कौशल विकास योजना में लाभ पाने वालों की दी जानकारी बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में देश में सर्वाधिक 11 हजार 400 प्रशिक्षणार्थियों का नामांकन मध्यप्रदेश में हुआ। साथ ही युवा संगम के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 2 लाख 68 हजार से अधिक आवेदकों को लाभान्वित किया गया। मध्यप्रदेश के एक लाख 32 हजार युवाओं को स्व-रोजगार का लाभ मिला है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क भोपाल द्वारा इस वर्ष 3 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। इनमें 1500 प्रशिक्षणार्थी लॉन्ग टर्म और इतने ही शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग का लाभ प्राप्त करेंगे। युवाओं को पूर्व में जिन उद्योगों में प्रशिक्षण दिलवाया गया है, उनमें रिलायंस, ट्राइडेंट, जिंदल समूह के जेबीएम आदि शामिल हैं। प्रदेश में 290 शासकीय और 644 प्राइवेट आईटीआई संचालित हैं। शासकीय आईटीआई में 3484 सीटों की वृद्धि की गई, जिसके फलस्वरूप कुल सीट 52 हजार 248 हो गई हैं। प्राइवेट आईटीआई में कुल 61 हजार 32 सीट हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि परम फाउंडेशन द्वारा धार जिले में सरदारपुर आईटीआई में मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन कोर्स में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। पीएम सेतु के अंतर्गत मध्यप्रदेश में 20 हब और 81 स्पोक आईटीआई उन्नयन का कार्य हुआ है। इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता 2025-26 में मध्यप्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा। सीएम ने कृषि लोकरंग की तैयारियों की समीक्षा की इसके पहले कृषि लोकरंग की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि लोकरंग में किसानों और आमजन की सहभागिता बढ़ाने के लिए कृषि क्विज प्रतियोगिता जैसे नवाचार किए जाएं। प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार भी दिए जाएं। हर जिले के प्रथम विजेता (टॉपर) को पुरस्कार के रूप में किसानों के लिए हर मौसम में उपयोगी कृषि संसाधन (जैसे ट्रैक्टर आदि) एवं अन्य तरह के पुरस्कार भी दिए जा सकते हैं। सीएम ने संभाग, जिला स्तर पर भी इसके लिए कार्यक्रम करने को कहा है। इसके अलावा एक अन्य बैठक में बालाघाट में होने वाले जनजातीय कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की गई।

अनूपपुर में हाथियों ने खड़ी फसलें रौंदी:सिंचाई के पाइप और दीवारें भी तोड़ी, 103 दिनों से मचा रहे तबाही

अनूपपुर में हाथियों ने खड़ी फसलें रौंदी:सिंचाई के पाइप और दीवारें भी तोड़ी, 103 दिनों से मचा रहे तबाही

छत्तीसगढ़ से आए चार हाथियों ने अनूपपुर जिले में पिछले 103 दिनों से डेरा डाल रखा है। हाथियों के लगातार उत्पात और वन विभाग की सुस्ती की वजह से ग्रामीणों में भारी गुस्सा और डर का माहौल है। ये हाथी फिलहाल दो हिस्सों में बंटकर आतंक मचा रहे हैं। तीन हाथियों का दल करनपठार के जंगलों में छिपा है, जबकि एक अकेला हाथी (लोन टस्कर) जिला मुख्यालय से सिर्फ 8 किलोमीटर दूर पोंड़ी और खांड़ा के इलाकों में फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचा रहा है। इस अकेले हाथी ने बरबसपुर के सरपंच समेत कई किसानों के खेत रौंद दिए और सिंचाई के पाइप और दीवारें भी तोड़ डालीं। वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग उन्हें समय पर हाथियों के आने की सूचना (मुनादी) नहीं दे रहा है। लोगों का कहना है कि अधिकारी सिर्फ दूर खड़े होकर तमाशा देखते हैं। न तो विभाग पटाखे दे रहा है और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम कर रहा है। मजबूर होकर ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर मशालों के सहारे हाथियों को खदेड़ रहे हैं। मौत के दो महीने बाद भी नहीं मिला मुआवजा प्रशासन की लापरवाही का एक बड़ा मामला भी सामने आया है। बरबसपुर में 12 फरवरी को हाथी के हमले (दीवार गिरने) से घायल 70 साल के रामविशाल भैना की मौत हो गई थी। इस घटना को दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन मृतक के परिवार को अब तक सरकारी सहायता राशि नहीं मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग न तो जान की परवाह कर रहा है और न ही नुकसान की भरपाई।

मिर्गी आने से पहले कर लेगी पता! IIT कानपुर ने बना डाली ऐसी डिवाइस, जेब में रखकर कहीं भी घूमिए

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Last Updated:April 10, 2026, 22:36 IST IIT Kanpur News : ये डिवाइस दिमाग की हर गतिविधि पर नजर रखेगी और किसी भी गड़बड़ी के संकेत पहले ही दे देगी. इसकी मदद से ब्रेन स्ट्रोक और मिर्गी के मरीजों की जान बचाना आसान हो जाएगा. इसे खासतौर पर ग्रामीण इलाकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जहां बड़े अस्पतालों की सुविधा आसानी से नहीं मिलती. इस डिवाइस का लैब टेस्ट सफल रहा है और अब इसे क्लिनिकल ट्रायल के लिए भेजा गया है. कानपुर. अब ब्रेन से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा पहले ही पहचाना जा सकेगा. इसकी मदद से ब्रेन स्ट्रोक और मिर्गी के मरीजों की जान बचाना आसान हो जाएगा. आईआईटी कानपुर में तैयार की गई एक नई “प्वाइंट ऑफ केयर” डिवाइस दिमाग की हर गतिविधि पर नजर रखेगी और किसी भी गड़बड़ी के संकेत पहले ही दे देगी. यह डिवाइस आईआईटी कानपुर के इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर में काम कर रहे स्टार्टअप मेंटीव हेल्थ प्राइवेट लिमिटेड ने तैयार की है. स्टार्टअप के सीईओ हर्ष अरोड़ा के अनुसार, इस तकनीक का मकसद इलाज को अस्पतालों तक सीमित न रखकर सीधे मरीज तक पहुंचाना है, खासकर गांवों में. कैसे करेगी काम यह डिवाइस दिमाग की गतिविधियों को लगातार मॉनिटर करती है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह डेटा को समझकर संभावित खतरे का अंदाजा लगा सकती है. अगर मस्तिष्क में किसी तरह की असामान्य गतिविधि शुरू होती है, तो यह डिवाइस पहले ही अलर्ट दे देगी. इससे डॉक्टर समय रहते इलाज शुरू कर सकेंगे. यह डिवाइस मिर्गी के दौरे आने से पहले भी संकेत दे सकती है, जो मरीजों के लिए राहत भरी बात है. हर्ष अरोड़ा बताते हैं कि डिवाइस का लैब टेस्ट सफल रहा है और अब इसे क्लिनिकल ट्रायल के लिए भेजा गया है. आईआईटी कानपुर की लैब में इसकी टेस्टिंग अभी भी जारी है. पॉकेट में फिट इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत इसका छोटा और पोर्टेबल होना है. यह पॉकेट साइज की है और पूरी तरह से चार्जेबल है, यानी मरीज इसे कहीं भी आसानी से साथ रख सकता है. हर्ष के मुताबिक, उनकी कंपनी ऐसी डिवाइसेस पर काम कर रही है जिन्हें पहनना और इस्तेमाल करना आसान हो. यही वजह है कि इसे खासतौर पर ग्रामीण इलाकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जहां बड़े अस्पतालों की सुविधा आसानी से नहीं मिलती. पूरी तरह स्वदेशी इस डिवाइस को पूरी तरह भारत में तैयार किया गया है और इसकी कीमत भी विदेशी डिवाइसेस के मुकाबले काफी कम रखी जाएगी. हर्ष अरोड़ा का कहना है कि यह डिवाइस आधे से भी कम कीमत में उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें. इस प्रोजेक्ट को आईआईटी कानपुर और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय से फंडिंग भी मिली है, जिससे इसे आगे और बेहतर बनाने का काम चल रहा है. उम्मीद की नई किरण ब्रेन से जुड़ी बीमारियां अक्सर अचानक और खतरनाक होती हैं, लेकिन यह डिवाइस समय से पहले चेतावनी देकर मरीजों की जिंदगी बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.खा सकर गांवों में रहने वाले मरीजों के लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh First Published : April 10, 2026, 22:36 IST

क्या आप जानते हैं पीएम मोदी कुकिंग में भी हैं माहिर? बना लेते हैं ये हेल्दी चीजें, उनकी फिटनेस का है ये सीक्रेट

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What can PM Modi cook: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आप अक्सर टीवी पर भाषण देते सुने होंगे. उनके बोलने का अंदाज, शानदार व्यक्तित्व, हाव-भाव के दीवाने काफी लोग हैं. वे जब भी अपने मन की बात करते हैं, तो अपने बारे में, अपने पसंद-नापसंद के बारे में काफी चीजें देश की जनता के साथ साझा भी करते हैं. उन्हें आपने अक्सर ये भी कहते सुना होगा कि वो खाने के भी बेहद शौकीन हैं, लेकिन शायद आपको इस बात के बारे में पता नहीं होगा कि पीएम मोदी (PM Modi) को खाना पकाना भी पसंद है. वे एक अच्छे कुक भी हैं. यहां जानिए, आखिर प्रधानमंत्री मोदी कौन-कौन सी चीजें बना लेते हैं. कैसा खाना है पसंद?मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वे खानपान के मामले में काफी अनुशासित रूटीन फॉलो करते हैं. घर का खाना उन्हें पसंद है. वे सादा भोजन को प्रेफर करते हैं. उनकी डाइट में हेल्दी और पौष्टिक चीजें अधिक शामिल होती हैं. वे हर तरह की चीजें खाना पसंद करते हैं, जो सेहत के लिए पौष्टिक होती हैं. वे पहाड़ी मशरूम भी खाना पसंद करते हैं. हल्दी, दही उनके भोजन में जरूर शामिल होते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. फेवरेट है मोरिंगा पराठाजब भी उन्हें मौका मिलता है, वे कुछ ना कुछ कुक करते हैं. क्या आप जानते हैं कि नरेंद्र मोदी की फेवरेट चीज क्या है? दरअसल, उन्हें मोरिंगा का पराठा खाना बहुत पसंद है. एक इंटरव्यू में इसके बारे में बताते हुए उन्होंने कहा था कि जब भी उन्हें समय मिलता है तो वो थोड़ी बहुत कुकिंग में हाथ आजमाते हैं. कई बार मोरिंगा का पराठा भी बना चुके हैं. सप्ताह में 2 बार जरूर ड्रमस्टिक पराठा खाते हैं. इसके साथ ही उन्हें कई और चीजें खाना पसंद हैं जैसे मखाना, स्प्राउट्स, ढोकला, खांडवी, दालें, सब्जी, रोटी, सूप, खिचड़ी, इडली, डोसा, खाखरा, साबुदाना खिचड़ी भी खाना पसंद हैं. कुकिंग का भी रखते हैं शौक पीएम मोदी?उन्हें खाने के साथ ही कुक करना भी भाता है. कई बार वे खुद इस बात को कह चुके हैं कि जब वे आरएसएस प्रचाकर थे और पॉलिटिक्स में शामिल होने तक वे खुद से ही खाना पकाया करते थे. कई बार इंटरव्यू में उन्हें ये भी कहते सुना गया है कि अपने करियर के शुरुआती दिनों में सुबह की चाय वे खुद ही बना लिया करते थे. पोहा, खिचड़ी भी उनका फेवरेट व्यंजन है, जिसे वे काफी बनाया करते थे. आज भी उन्हें काम से फुर्सत मिलता है तो इन चीजों को वो बनाना पसंद करते हैं. उन्हें खिचड़ी बनाना इसलिए भी पसंद है, क्योंकि इसमें अधिक मेहनत नहीं लगती है और जल्दी बन जाती है. ये सुपाच्य भोजन है. आरएसएस के टाइम के समय वे ऑफिस में अपने सहकर्मियों, साथियों के लिए खिचड़ी, सिंपल भोजन बनाया करते थे. वे साबुदाना खिचड़ी की भी रेसिपी जानते हैं. एक प्रोग्राम में उन्होंने एक महिला को साबुदाना खिचड़ी की पूरी विधि बताई थी, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया था.

हेल्दी ब्रेकफास्ट: बस 20 मिनट में खाने के लिए तैयार करें आलू की चटपटी स्टफिंग; बच्चे-बच्चे सब चैट कर जायेंगे

हेल्दी ब्रेकफास्ट: बस 20 मिनट में खाने के लिए तैयार करें आलू की चटपटी स्टफिंग; बच्चे-बच्चे सब चैट कर जायेंगे

आटे का फरा रेसिपी: उत्तर प्रदेश और बिहार के पारंपरिक नामांकन में आज भी घर-घर में काफी लोकप्रिय हैं। अगर घर में सिर्फ मसाले का आटा और आलू है तो आप भी बेहद स्वादिष्ट और स्वादिष्ट नाश्ता तैयार कर सकते हैं. ये रेसिपी ना भी है आसान, साथ ही पूरे परिवार को पसंद आती है। आटा के बारे में यूपी-बिहार की ग्रामीण रसोई का हिस्सा हैं। कई जगह दाल की स्टफिंग बनाई जाती है, तो कहीं खोए की भराई की जाती है। लेकिन आलू की चटपटी स्टफिंग वाला वर्जन सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। इसे आम भाषा में कई बार ‘आलू का गोझा’ या ‘गोझा’ भी कहा जाता है। यह कम तेल में बनता है, इसलिए स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा माना जाता है। आटे का किराया क्या-क्या होना चाहिए? आटे का आटा- 2 कपआलू- 5-6 बड़े आकार केहरा धनिया- छोटा साहरी मिर्च- 2अदरक- 1 इंचलहसुन- 1 बड़ा चम्मच (कुचला हुआ)हल्दी पाउडर- 1 छोटा चम्मचलाल मिर्च पाउडर- 1 छोटा चम्मचजीरा- 1 छोटा चम्मचअमचूर पाउडर- 1/2 छोटा चम्मचधनिया पाउडर- 1 छोटा चम्मचहल्दी का तेल- आवश्यकतानुसारनमक सबसे पहले आलू को आलू लें। सुलगने के बाद ठंडा कर चिपकाकर रख दें। इस बीच आटे में थोड़ा सा नमक और 1 नमक का तेल साबुत मुलायम दो गूंथ लें। दो को 15 मिनट के लिए ढककर रख दें ताकि ग्रेट से फूल जाए। अब कड़ाही में 2 मसाले का तेल गर्म करें। जीरा, कटी हरी मिर्च और कसा अदरक। हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, अमचूर और नमक नमक भून लें। आलू को मैश करके डालें। अच्छे से पूरी चटपटी स्टफिंग तैयार कर लें। हरा धनिया पूरा ठंडा होने दें। समतुल्य लोइयों को बाँट लें। हर लोई को पूरी तरह बेलें। बीच में आलू की स्टफिंग सुपरमार्केट से बंद कर दें। फ़्रे को मोमो या गुग्गी जैसे दर्शन दे सकते हैं। सभी को स्टीमर या स्टीमर में 12-15 मिनट तक स्टीम करना है। स्टीम हो जाने के बाद कड़ाही में थोड़ा सा तेल गर्म करें। इसमें प्याज और लहसुन चित्रारेखाचित्र। स्टीमे फ़ेयरेनोमैथली दोनों तरफ से सौर मंडल होने तक प्रभाव फ़्राई कर लें। बस तैयार है आपके आटे के किराए, गर्म-गर्मी के किराए को हरी चटनी, दही या चाय के साथ सर्व करें। यह नाश्ता न सिर्फ पेट भरता है बल्कि ऊर्जा भी देता है। बच्चों को स्टूडियो बॉक्स में भी दे सकते हैं। अगली बार जब नामांकन का मन न करे तो यूपी-बिहार का ये क्लासिक टिकट जरूर खरीदें। अगर एक बार परिवार को बनाया जाए तो, घरवाले को बार-बार बनाने का तरीका बताया गया है। (टैग्सटूट्रांसलेट)आटे का फरा रेसिपी(टी)यूपी बिहार का प्रसिद्ध खाना(टी)गेहूं का आटा आलू भरवां खाना(टी)आटे के फरा कैसे बनाएं(टी)स्वस्थ भारतीय नाश्ता पकौड़ी

heavy periods home remedy: घर के गार्डन में लगा ये देसी फूल असल में औषधि, हैवी पीरियड्स में फायदेमंद, जानें सेवन का तरीका

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Last Updated:April 10, 2026, 21:22 IST Sadabahar Phool Ke Fayde: सदाबाहर का फूल आयुर्वेद इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है. इसका इस्तेमाल हैवी पीरियड्स से लेकर घाव को भरने के लिए किया जाता है. सदाबाहर फूल को उपयोग करने का तरीका यहां आप जान सकते हैं. ख़बरें फटाफट सदाबाहर का फूल भारतीय में बहुत ही कॉमन है. इसे पूजा-पाठ से लेकर घर की साज-सज्जा में इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इसमें औषधि गुण भी मौजूद होते हैं. आयुर्वेद में कई शक्तिशाली और गुणकारी पौधों और फूलों के बारे में बताया गया है, जिनके उपयोग से कई बीमारियों का इलाज होता आया है. ऐसा ही दिखने में सुंदर और गुणकारी पौधा है सदाबहार का पौधा. अपने नाम की तरह इस खूबसूरत पौधे की पत्तियों से लेकर फूल भी औषधीय गुणों से भरपूर हैं, हालांकि इसके इस्तेमाल के तरीकों के बारे में कम ही लोग जानते हैं. सदाबहार एक साधारण सा दिखने वाला पुष्प है पर आयुर्वेद में इसे खून, त्वचा और चयापचय से जुड़ा एक महत्वपूर्ण द्रव्य माना गया है. आयुर्वेद यह स्पष्ट करता है कि हर वनौषधि तभी औषधि बनती है, जब उसे सही द्रव्य, सही मात्रा और सही विधि के साथ अपनाया जाए. इसका स्वाद कड़वा होता है और इसे रक्त शुद्धि का सबसे आसान तरीका माना गया है. इसके पुष्प का सेवन रक्त की अशुद्धियों को कम करता है, जिससे आधी से ज्यादा शारीरिक रोग पहले ही खत्म हो जाते हैं. घाव के लिए नेचुरल औषधि के समानआयुर्वेद में सदाबहार को कफ और पित्त नाशक माना गया है. अगर सही मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो आसानी से त्रिदोषों को संतुलित किया जा सकता है. इसके पत्ते का चूर्ण और हल्दी की सहायता से घाव को जल्दी भरा जा सकता है. घाव को जल्दी ठीक करने, सूजन को कम करने और घाव की लालिमा को कम करने के लिए सहाबहार के पत्तों को पीसकर और हल्दी मिलाकर सीधा घाव पर लगाया जा सकता है, लेकिन यह सिर्फ छोटे घाव पर लगाएं. बड़े और पस पड़े घाव के लिए चिकित्सक की सलाह लें. हैवी पीरियड्स का घरेलू उपायमहिलाओं में अक्सर अनियमित मासिक धर्म की परेशानी देखी जाती है और नियमित करने के लिए महिलाओं को हॉर्मोन पिल्स का सहारा लेना पड़ता है. ऐसे में सदाबहार के पत्तों को पानी में उबालकर पीने से गर्भाशय को मजबूती मिलती है और हॉर्मोन भी संतुलित रहते हैं. यह अधिक रक्तस्राव को भी नियंत्रित करता है. नाक से खून आना घरेलू उपचारगर्मियों में अक्सर नाक से खून आने की समस्या देखी जाती है. गर्मी में अधिक ताप की वजह से नाक से खून बहना शुरू हो जाता है. ऐसे में सदाबहार के फूल और अनार के फूलों का रस नाक में डालने से आराम मिलेगा. इन दोनों फूलों के रस की तासीर ठंडी होती है और रक्त को बहने से रोकती है. इसके अलावा अगर ततैया या कीट काट लेता है तो सूजन और दर्द से आराम पाने के लिए सहाबहार के पत्तों का लेप प्रभावित जगह पर लगाने से आराम मिलता है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 10, 2026, 21:22 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

ड्रैगन फ्रूट Vs बनाना शेक: ड्रैगन फ्रूट और बनाना शेक में कौन सबसे ज्यादा जादुई? जानिए क्या हैं फायदे

ड्रैगन फ्रूट Vs बनाना शेक: ड्रैगन फ्रूट और बनाना शेक में कौन सबसे ज्यादा जादुई? जानिए क्या हैं फायदे

ड्रैगन फ्रूट बनाम केला शेक: गर्मी के मौसम में शरीर को वर्गीकृत और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए शेक और लॉजी दोनों ही कमाल किए जाते हैं। दोनों ही अपने-अपने अलग-अलग बन्धुओं के लिए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि आपके स्वास्थ्य के लिए इन दोनों में से कौन सबसे बेहतर है?आओ कमलम और खाना शेक दोनों के फायदों के बारे में जानें और अगर दोनों को कंपनी बनाना है तो स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा पद कौन सा है? ड्रैगन ड्रैगन या कमलम खाने के फायदे ड्रैगन ड्रैगन जिसे कमलम कहा जाता है। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। ड्रैगन में असली की मात्रा काफी कम होती है और भूखापन होता है। यह वज़न की कोशिश कर रहे लोगों के लिए सर्वोत्तम है। विटामिन-सी की प्रचुरता होती है, जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और प्रतिरोध से लड़ने में मदद करती है।इसमें मौजूद प्रीबायोथिक्स पेट के अच्छे चर्चों को सूचीबद्ध करता है, जिसमें पाचन तंत्र कायम रहता है। ड्रैगन ड्रॉइंग से एंटी एजिंग का काम किया जा सकता है। इससे चेहरे पर चमक आती है। केला एक ऐसा फल है जो हर मौसम में आसानी से उपलब्ध होता है। दूध के साथ इसका मिश्रण एक ‘कम्प्लिट माइल्स’ बनाता है। केले में कार्बोहाइड्रेट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स शुगर मौजूद है, जो तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। प्रतिक्रिया करने वालों के लिए यह सबसे अच्छा प्री या पोस्ट-वर्क आउट ड्रिंक है। इसमें साझीदार समानताएं होती हैं, जो मसालों में डूबी रहती हैं और उन्हें मजबूत बनाती हैं। शेक पीने से वजन बढ़ता है और दिल की सेहत में भी सुधार होता है। हार्डवेयर की आपूर्ति को नियंत्रित करने और दिल की सेहत को बनाए रखने में मदद मिलती है। ड्रैगन ड्रॉइंग और बनाना शेक में कौन सा बड़ा जादूगर? ड्रैगन ड्रैगन कम कैलोरी वाला है, जबकि बनाना शेक हाई कैलोरी वाला है। तीन के मामले में ड्रैगन दिखता है आगे। दूध में शेक बनाने के कारण इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, डिटॉक्स करना चाहते हैं या ग्लोइंग त्वचा की तलाश में हैं, तो ड्रैगन ड्रॉइंग आपके लिए सबसे अच्छा है। (टैग अनुवाद करने के लिए)ड्रैगन फ्रूट बनाम केला शेक कैलोरी(टी)ड्रैगन फ्रूट बनाम केला शेक(टी)ड्रैगन फ्रूट केला स्मूदी लाभ(टी)ड्रैगन फ्रूट बनाम केला शेक पोषण(टी)वजन घटाने के लिए ड्रैगन फ्रूट बनाम केला शेक(टी)वजन घटाने के लिए ड्रैगन फ्रूट और केला स्मूदी

पन्ना में बाघ ने महिला पर हमला किया:2 किमी कंधे पर लादकर घायल को गांव पहुंचाया, अस्पताल में भर्ती

पन्ना में बाघ ने महिला पर हमला किया:2 किमी कंधे पर लादकर घायल को गांव पहुंचाया, अस्पताल में भर्ती

पन्ना जिले के उत्तर वन मंडल के विश्रामगंज रेंज में एक बाघ ने महुआ बीनकर लौट रही महिला पर हमला कर दिया। ग्रामीणों के साहस से महिला की जान बच गई। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना विश्रामगंज रेंज के टगरा बीट के कक्ष क्रमांक 299 (महुआ टोला) में हुई। शाम करीब 6:00 बजे, हीरापुर टपरियन निवासी 35 वर्षीय रामकली कोंदर पति किशन कोंदर अपने साथियों के साथ घर लौट रही थीं। तभी घात लगाए बैठे बाघ ने उन पर अचानक हमला कर दिया। बाघ ने महिला की टांग पकड़ ली और उसे घसीटकर घने जंगल की ओर ले जाने लगा। महिला की चीख-पुकार सुनकर मौके पर मौजूद 6-7 ग्रामीणों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने शोर मचाते हुए लकड़ियों से बाघ पर हमला किया। ग्रामीणों के इस सामूहिक प्रयास से बाघ महिला को छोड़कर जंगल में भाग गया। प्रत्यक्षदर्शी नंद लाल ने बताया कि इस दुर्गम जंगली इलाके में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं था, जिससे तत्काल मदद नहीं मिल सकी। ग्रामीणों ने महिला के पैर में कपड़ा बांधकर खून रोका। इसके बाद, ग्रामीणों ने घायल महिला को कंधे पर लादकर लगभग 2 किलोमीटर पैदल चलकर गांव तक पहुंचाया। वहां से उसे जिला चिकित्सालय पन्ना ले जाया गया। विश्रामगंज रेंजर अजय बाजपेई ने बताया कि महिला को तत्काल इलाज के लिए भर्ती कराया गया है और उसे आर्थिक सहायता राशि भी प्रदान की गई है। उन्होंने ग्रामीणों को महुआ के सीजन में अकेले जंगल में न जाने की सलाह दी है। घायल महिला का उपचार जिला चिकित्सालय पन्ना में जारी है। उसके पैर और कंधे में गंभीर चोटें आई हैं।

राजमा और छोले भिगोना भूल गए, कुकर में उबालते समय ट्राई करें ये सिंपल ट्रिक, 3-4 सीटी में ही होगा सॉफ्ट

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काफी लोगों को छोले-भटूरे, राजमा-चावल खाना बहुत अच्छा लगता है. जगह-जगह आपको राजमा-चावल, छोले भटूरे वाले ठेले मिल जाएंगे. लोग इन्हें बहुत चाव से खाते हैं. राजमा और छोले बेहद ही पौष्टिक दाल बेस्ड फलियां (Beans) हैं. राजमा (kidney beans) और सफेद छोले या काबुली चने दोनों ही प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होते हैं. कई बार राजमा और सफेद छोले को पकाने में काफी समय लग जाते हैं. खासकर तब, जब आप इन्हें रात में पानी में भिगोकर रखना भूल जाएं.  जब आप इसे कुकर में पकाने की कोशिश करते हैं तो ये जल्दी पकते नहीं हैं. खाने में ये सख्त, कच्चे और हार्ड लगते हैं. कोई बात नहीं, जब भी आप इन्हें रात में भिगोना भूल जाएं तो राजमा या छोले को पकाते समय इस एक ट्रिक को जरूर फॉलो करें. कुकर में जब आप इसे उबालें तो उसमें ये एक चीज डाल दें. राजमा में पाए जाने वाले पोषक तत्वराजमा में प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, पोटैशियम, फोलेट, मैग्नीशियम आदि होते हैं. राजमा खाने से हार्ट हेल्दी रहता है. ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है. वजन नहीं बढ़ता है, क्योंकि इसमें फाइबर होता है. प्रोटीन से मांसपेशियों को मजबूती मिलती है. शरीर को रिपेयर करने के लिए प्रोटीन जरूरी है. वेज खाने वालों के लिए प्रोटीन का बेहतर सोर्स है. पाचन बेहतर रहता है. कब्ज नहीं होता है. शरीर को एनर्जी मिलती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. छोले में मौजूद पोषक तत्वछोले यानी सफेद चना भी कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कार्बोहाइड्रेट, फोलेट, पोटैशियम, मैग्नीशियम आदि भरपूर होते हैं. काबुली चने खाने से हड्डियां मजबूत होती हैं. हार्ट स्वस्थ रहता है. फाइबर भूख कंट्रोल करके वजन को बढ़ने से रोकता है. पोटैशियम ब्लड प्रेशर को काबू में रखता है. छोले को पानी में रातभर भिगोकर और अच्छी तरह से पकाकर ही खाना चाहिए. एक बार में ही अधिक खाने से बचें वरना पेट फूल सकता है, गैस की समस्या हो सकती है. राजमा और छोले को जल्दी पकाने का तरीका-जब आप रात में राजमा और छोले पानी में डुबाकर रखना भूल जाएं तो इसे आसानी से गलाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. इसे पकाने में 1 से 2 घंटे लग जाते हैं और कुकर में 7-8 सीटियां लगाने के बाद भी ये कच्चे और सख्त ही खाने में लगते हैं, तो आप यहां बताए गए इस एक ट्रिक को ट्राई करके देखिए. -राजमा और छोले को जल्दी पकाने के लिए आपको लेनी होगी एक अदरक. जब आप राजमा या छोला कुकर में बंद कर उबालें तो उसमें ये अदरक का टुकड़ा डाल दें. ये ट्रिक सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है, जिसे लोग आजमाकर देख रहे हैं. -छोले या राजमा जो भी बनाना हो, उसे पानी से धोकर कुकर में डालें. इसमें एक गिलास पानी, एक छोटा टुकड़ा अदरक का डाल, थोड़ा सा नमक, हल्दी पाउडर डाल दें. कुकर का ढक्कन लगा दें. कुकर में 3 से 4 सीटी लगने दें. जब आप कुकर का ढक्कन हटाएंगे तो ये अच्छी तरह से पके हुए मिलेंगे. अब आप इसे अपने तरीके से तेल, मसाले, टमाटर, प्याज में पका लें. इसके लिए ढक्कन लगाकर पकाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी. अगर आपने सुबह ही पानी में राजमा या छोले भिगोया है, तो भी इसे जल्दी पकाने के लिए अदरक वाला ये ट्रिक ट्राई कर सकते हैं. – दरअसल, राजमा और छोले में एक खास तरह का कॉम्प्लेक्स शुगर होता है, जिसे ओलिगोसैचेराइड्स (Oligosaccharides) कहते हैं. पाचन तंत्र इसे आसानी से पचा नहीं पाता है. एब्जॉर्ब नहीं कर पाता है. ये शुगर आंतों में फर्मेंटेशन का कारण बनते हैं. इस वजह से काफी लोगों को राजमा और छोले खाने से गैस की समस्या शुरू हो जाती है. – वहीं, अदरक में मौजूद तत्व जिंजरोल इस शुगर को बहुत तेजी से तोड़ता है. इस वजह से राजमा और छोले या फिर कोई अन्य अनाज, फलियां भी जल्दी पक जाती हैं. इससे गैस की समस्या भी नहीं होगी. अदरक डालने से ये दोनों ही चीजें जल्दी पच भी जाएंगी. ये आसानी से नहीं पचते हैं. ये वात-वर्धक होते हैं. अदरक से इनमें मौजूद वात दोष कम हो सकता है. इस तरह से इन्हें पचाना आसान हो जाता है.

युवा वयस्कों में उच्च कोलेस्ट्रॉल: 20-30 वर्ष की आयु में बढ़ रहा है कोलेस्ट्रॉल, ये लक्षण खतरनाक होना होगा; बचाव के लिए क्या करें?

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युवा वयस्कों में उच्च कोलेस्ट्रॉल: आज के दौर में खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान की गलत स्थिति ने शर्त का चेहरा बदल दिया है। जो बीमारी पहले 50 और 60 की उम्र के बाद देखने को मिलती है, वहीं बीमारी आज 20 और 30 की उम्र में देखने को मिल रही है। इसके शिकार विशेष रूप से युवा हो रहे हैं। ये है सबसे खतरनाक बीमारी हाई कॉलेस्ट्रोल। युवाओं में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल न केवल उनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है, बल्कि भविष्य में हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी सामान्य स्थिति देखने को मिल रही है। युवा इंडस्ट्री में बढ़ती उम्र का मुख्य कारण पिज्जा, बर्गर और कॉमर्स फूड में मौजूद ‘ट्रांस फाइट’ सीधे तौर पर खराब टुकड़ों को पेश किया जाता है।चौथे डेस्क पर काम करना और फ्लेक्स की कमी से शरीर में मेटाबॉलिज्म को धीमा कर दिया जाता है।क्रिटिक्स और निजी जीवन का तनाव शरीर में कोर्टिसोल की रैंकिंग बढ़ी है, जो चॉकलेट को प्रभावित करता है। एल्स को अक्सर ‘सैलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं। बिना किसी भारी काम के, थकान और कमजोरी महसूस होना।सीढ़ियाँ चढ़ने की गति या थोड़ी तेज़ गति से चलने पर संसार का असामान्य रूप से फूलना।रेलवे में कोलेस्ट्रॉल जमने से रक्त सरकुलेशन प्रभावित होता है, जिससे हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन हो सकता है।कभी-कभी मांसपेशियों में दर्द या दबाव महसूस होता है, जो भविष्य में एंजाइना का रूप ले सकता है।आंखों की पलकों के आस-पास छोटे-छोटे पीले रंग के शांत अवशेष जमा होने का संकेत हैं। आपके खाने में ओट्स, हरी जड़ी-बूटियाँ, फल और ओमेगा-3 एसिडिटी से भरपूर चीज़ें शामिल हैं। तली-भुनी से दूरी।दिन में कम से कम 30-40 मिनट की वॉक, रनिंग या अंधविश्वास जरूर करें। यह गुड चॉकलेट को बढ़ाने में मदद करता है।बढ़ा हुआ वजन वाला छात्र का सबसे बड़ा दोस्त है। अपने बीएमआई को सामान्य रखने की कोशिश करें।अगर आप 20 साल की उम्र पार कर चुके हैं, तो हर साल कम से कम एक बार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर करवाएं। (टैग्सटूट्रांसलेट)युवा वयस्कों में उच्च एलडीएल कोलेस्ट्रॉल(टी)उच्च कोलेस्ट्रॉल के लक्षण(टी)एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर(टी)युवा वयस्कों में हृदय जोखिम(टी)युवाओं में उच्च कोलेस्ट्रॉल(टी)जीवनशैली और कोलेस्ट्रॉल(टी)पेट की चर्बी और कोलेस्ट्रॉल(टी)लिपिड प्रोफाइल परीक्षण