एक अच्छी चीज़ का बहुत ‘माच’? कैसे बंगाल चुनाव अभियान ‘मछली बाज़ार’ में बदल गया | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:10 अप्रैल, 2026, 20:05 IST तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों ने बंगाल में ‘माच’ (मछली) को एक केंद्रीय अभियान उपकरण में बदल दिया है। मछली को एक शीर्ष स्तरीय राजनीतिक मुद्दे के रूप में उभारना सांस्कृतिक थोपे जाने को लेकर गहरी चिंता से उपजा है। प्रतीकात्मक तस्वीर जैसे-जैसे 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक विमर्श उच्च-स्तरीय नीति से हटकर बंगाली रसोई के केंद्र में आ गया है। ऐसे राज्य में जहां मछली केवल भोजन नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों ने “माच” (मछली) को एक केंद्रीय अभियान उपकरण में बदल दिया है। जो कभी घरेलूता का प्रतीक था, वह अब क्षेत्रीय गौरव और धार्मिक स्वायत्तता पर एक उच्च दांव की लड़ाई में सबसे आगे है। 2026 में मछली अंतिम अभियान हथियार क्यों बन गई है? मछली को एक शीर्ष स्तरीय राजनीतिक मुद्दे के रूप में उभारना सांस्कृतिक थोपे जाने को लेकर गहरी चिंता से उपजा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव को स्थानीय बंगाली परंपराओं और जिसे वह “दिल्ली के नेतृत्व वाले शाकाहार” के रूप में संदर्भित करती हैं, के बीच एक विकल्प के रूप में तैयार किया है। बिहार और असम जैसे पड़ोसी राज्यों में मांस और मछली पर प्रतिबंधों को उजागर करके, टीएमसी ने एक कहानी बनाई है कि भाजपा की जीत से राज्य-शासित आहार में बदलाव आएगा। इसके विपरीत, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योग के अर्थशास्त्र को हथियार बना लिया है। 9 अप्रैल को हल्दिया में एक हाई-प्रोफाइल रैली के दौरान, प्रधान मंत्री ने मछली उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने में विफलता के लिए राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने इस विडंबना की ओर इशारा किया कि बंगाल की विशाल तटरेखा और नदी नेटवर्क के बावजूद, राज्य आंध्र प्रदेश और तेजी से गुजरात जैसे राज्यों से मछली आयात पर बहुत अधिक निर्भर है। बीजेपी ‘शाकाहारी पार्टी’ लेबल का मुकाबला कैसे कर रही है? टीएमसी के “बाहरी” कथन को बेअसर करने के लिए, भाजपा ने दृश्य और पाक संरेखण की रणनीति अपनाई है। एक क्षण जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, उसमें बिधाननगर के भाजपा उम्मीदवार डॉ. शरदवत मुखर्जी को एक विशाल कतला मछली ले जाते हुए स्थानीय बाजारों में प्रचार करते देखा गया। यह “फिश-इन-हैंड” कूटनीति यह संकेत देने का सीधा प्रयास है कि भगवा खेमे का आहार प्रतिबंध लगाने का कोई इरादा नहीं है। राज्य भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने स्वामी विवेकानंद की मांसाहारी भोजन की ऐतिहासिक स्वीकृति का हवाला देते हुए इसे मजबूत किया है और कहा है कि पार्टी बंगाल की अनूठी पाक विरासत का सम्मान करती है। पार्टी अनिवार्य रूप से दो-ट्रैक अभियान चला रही है: बंगाल की मत्स्य पालन को आधुनिक बनाने के लिए “नीली क्रांति” का वादा करना और साथ ही साथ अपने “बंगालीपन” को साबित करने के लिए सार्वजनिक मछली खाने के कार्यक्रमों में भाग लेना। बयानबाजी के पीछे आर्थिक वास्तविकताएँ क्या हैं? जबकि बयानबाजी पहचान पर केंद्रित है, अंतर्निहित तथ्य इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आर्थिक संकट की ओर इशारा करते हैं। पश्चिम बंगाल भारत का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक बना हुआ है, फिर भी इसे लगातार घाटे का सामना करना पड़ रहा है। बांग्लादेश में पद्मा नदी से बेशकीमती हिल्सा (इलिश) की आपूर्ति भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेजी से अस्थिर हो गई है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे मध्यम वर्ग की जेब पर असर पड़ रहा है। भाजपा ने इस निर्भरता को कम करने के लिए उन्नत मछलीपालन तकनीकों और समुद्री भोजन प्रसंस्करण केंद्रों को लागू करने का वादा किया है। इस बीच, टीएमसी ने स्थानीय मछली पकड़ने वाले समुदाय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के प्रमाण के रूप में अपनी “जल धरो जल भरो” जल संरक्षण योजना पर प्रकाश डाला। औसत मतदाता के लिए, बहस उत्पादन आंकड़ों के बारे में कम और “प्लेट टेस्ट” के बारे में अधिक है – क्या उनकी पसंदीदा मछली सस्ती रहेगी और क्या इसे खाने का उनका अधिकार निर्विवाद रहेगा। क्या खाद्य पहचान 2026 के लिए निर्णायक कारक है? जैसे-जैसे मतदान की तारीखें नजदीक आ रही हैं, अभियान का “मछली-आंख” फोकस बताता है कि बंगाल में पहचान की राजनीति भाषा और धर्म से परे प्लेट के दायरे में आ गई है। टीएमसी का “माच-भात” (मछली और चावल) का नारा 90 प्रतिशत मांसाहारी वोट बैंक को मजबूत करने के लिए बनाया गया एक शक्तिशाली भावनात्मक उपकरण है। यदि भाजपा मतदाताओं को सफलतापूर्वक यह विश्वास दिला सकती है कि वह आपूर्ति श्रृंखला को ठीक करते समय उनके आहार विकल्पों की रक्षा करेगी, तो वह अंततः “अंदरूनी-बाहरी” बाधा को तोड़ सकती है। हालाँकि, अगर सांस्कृतिक एकरूपता का डर बना रहता है, तो विनम्र मछली अच्छी तरह से वह कांटा हो सकती है जो टीएमसी को सत्ता में बनाए रखती है। 2026 में, राज्य सचिवालय, नबन्ना का मार्ग स्पष्ट रूप से बंगाल के हलचल भरे मछली बाजारों से होकर गुजरता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 10 अप्रैल, 2026, 20:05 IST समाचार चुनाव एक अच्छी चीज़ का बहुत ‘माच’? कैसे बंगाल चुनाव अभियान ‘मछली बाज़ार’ में बदल गया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी(टी)ममता बनर्जी(टी)बीजेपी(टी)मछली
अनूपपुर फ्लाईओवर: सर्विस लाइन निर्माण में फंसा जमीन का पेंच:वन विभाग की दीवार और रेलवे क्वार्टर बना बाधा; जून तक बहाल होगा यातायात

अनूपपुर जिला मुख्यालय पर निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण में तेजी आई है, लेकिन सर्विस लाइन का काम जमीनी विवाद में फंस गया है। रेलवे फाटक से कोतवाली तिराहे के बीच एक ओर वन विभाग की दीवार और दूसरी ओर रेलवे क्वार्टर का हिस्सा मार्ग में आ रहा है। इसके कारण फिलहाल इस हिस्से में सर्विस लाइन की सुविधा नहीं मिल सकेगी। सेतु निगम ने फिलहाल इस कार्य को रोककर मुख्य रिटेनिंग वॉल के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया है। जून तक पुल पर यातायात बहाल करने का लक्ष्य सेतु निगम शहडोल के एसडीओ प्रदीप सिंह बघेल ने बताया कि बारिश से पहले जून तक फ्लाईओवर ब्रिज का मुख्य कार्य पूरा कर लिया जाएगा। रिटेनिंग वॉल में मिट्टी भरने और ऊपरगामी मार्ग को तैयार करने का काम जारी है। विभाग का दावा है कि जून माह में पुल पर आवागमन बहाल कर दिया जाएगा, जिससे रेलवे फाटक के दोनों ओर फंसे रहने वाले नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी। 8 साल की देरी और ब्लैक लिस्ट की चेतावनी 20 करोड़ की लागत से बन रहा यह ब्रिज पिछले 8 वर्षों से लंबित है, जबकि इसे मात्र 18 महीने में पूर्ण होना था। निर्माण की सुस्त गति को देखते हुए कलेक्टर हर्षल पंचोली ने ठेकेदार को 10 अप्रैल से ब्लैक लिस्ट करने और 6 प्रतिशत जुर्माना लगाने की चेतावनी दी थी। प्रशासनिक सख्ती के बाद ठेकेदार ने मौके पर मशीनरी और मैनपावर बढ़ाकर काम की गति तेज की है। वन विभाग और रेलवे से पत्राचार जारी सर्विस लाइन के लिए आवश्यक भूमि को लेकर सेतु निगम ने वन विभाग और रेलवे से संपर्क किया है। वन विभाग ने वरिष्ठ अधिकारियों से इस संबंध में राय मांगी है, लेकिन वहां से जवाब मिलने में हो रही देरी ने काम को प्रभावित किया है। एसडीओ ने बताया कि जब तक भूमि का पेंच नहीं सुलझता, तब तक कोतवाली तिराहे की ओर सर्विस रोड का निर्माण संभव नहीं होगा।
टाटा संस की लिस्टिंग के पक्ष में आए शापूरजी मिस्त्री:बोले- यह केवल रेगुलेटरी जरूरत नहीं, बल्कि ट्रांसपेरेंसी के लिए जरूरी कदम

शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप के चेयरमैन शापूरजी पलोनजी मिस्त्री ने एक बार फिर टाटा संस की लिस्टिंग की वकालत की है। शुक्रवार को जारी एक बयान में मिस्त्री ने कहा कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट करना जरूरी है। इससे न केवल ग्रुप में पारदर्शिता यानी ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी, बल्कि गवर्नेंस और जवाबदेही भी मजबूत होगी। बता दें कि टाटा संस में शापूरजी पलोनजी ग्रुप की करीब 18% हिस्सेदारी है। पब्लिक लिस्टिंग से टाटा ट्रस्ट्स को फायदा होगा शापूरजी मिस्त्री ने कहा कि टाटा संस की लिस्टिंग केवल कानूनी नियमों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टाटा ग्रुप के बुनियादी सिद्धांतों को और मजबूती देगी। उन्होंने तर्क दिया कि अब तक ऐसा कोई ठोस कारण या सबूत सामने नहीं आया है जो यह बताए कि पब्लिक लिस्टिंग से टाटा ट्रस्ट्स के हितों को नुकसान होगा या उनकी लोक कल्याणकारी गतिविधियों में कोई कमी आएगी। आम निवेशकों और शेयरधारकों को लाभ मिलेगा मिस्त्री के अनुसार, टाटा संस के लिस्ट होने से बोर्ड की जवाबदेही बढ़ेगी और निवेशकों का आधार भी बड़ा होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे लाखों रिटेल शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉक होगी। इसके अलावा, टाटा ट्रस्ट्स के लिए डिविडेंड (लाभांश) का एक तय और मजबूत जरिया बनेगा, जिससे समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए किए जाने वाले परोपकारी कामों में और तेजी आएगी। RBI के नियमों का हवाला दिया समाधान के लिए RBI से उम्मीद शापूरजी मिस्त्री ने बताया कि SP ग्रुप इस मामले के शांतिपूर्ण समाधान के लिए टाटा संस के नेतृत्व के साथ चर्चा कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस मामले में एक ठोस दिशा के लिए रिजर्व बैंक की ओर देख रहे हैं। उन्हें भरोसा है कि भारत सरकार और RBI इस लिस्टिंग को लेकर निर्णायक कदम उठाएंगे। क्या है पूरा विवाद? हिस्सेदारी का गणित: टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66% हिस्सेदारी है, जबकि शापूरजी पलोनजी परिवार के पास 18.4% हिस्सा है। RBI का नियम: सितंबर 2022 में RBI ने टाटा संस को ‘अपर लेयर’ NBFC घोषित किया था। इसके तहत कंपनी को 3 साल के भीतर (सितंबर 2025 तक) शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी है। टाटा का रुख: टाटा संस अपनी होल्डिंग कंपनी के ढांचे को बदलने या कर्ज चुकाकर इस नियम से बचने के रास्ते तलाश रही है, ताकि उसे लिस्ट न होना पड़े। वहीं, SP ग्रुप चाहता है कि लिस्टिंग हो ताकि उनकी हिस्सेदारी की सही वैल्यू लग सके। ये खबर भी पढ़ें… चांदी आज ₹4855 बढ़कर ₹2.41 लाख पर पहुंची: सोना ₹368 महंगा होकर ₹1.50 लाख के पार, इस साल ₹17 हजार दाम बढ़े सोना-चांदी के दाम में शुक्रवार को तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी 4,855 रुपए बढ़कर 2,41,013 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले 9 अप्रैल को कीमत 2,36,158 रुपए प्रति किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 368 रुपए बढ़कर 1,50,305 रुपए पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को कीमत 1,49,937 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। पूरी खबर पढ़ें…
खड़गे बोले- महिला आरक्षण संशोधन जल्दबाजी में लाया जा रहा:सरकार आचार संहिता का उल्लंघन कर रही; लोकसभा सीटें 543 से 816 होंगी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को कहा कि सरकार महिला आरक्षण संशोधन और लोकसभा में सीटें बढ़ाने की बिल जल्दबाजी में ला रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान संसद सत्र बुलाना अचार संहिता का उल्लंघन है। सरकार बिल को जल्द से जल्द पास कराना चाहती है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका फायदा मिल सके। आज दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की इस मुद्दे पर बैठक हुई। इसमें खड़गे ने कहा कि अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। जानकारी सिर्फ प्रधानमंत्री के लेटर के जरिए सामने आई है। लंबे समय तक चुप रहने के बाद अब अचानक इस मुद्दे पर सक्रियता दिखाई जा रही है। सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का सत्र बुलाया बुलाया है। इस दौरान संविधान संशोधन बिल लाने की तैयारी है। सरकार महिलाओं को 33% आरक्षण देने के साथ लोकसभा और विधानसभा सीटों में 50% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव ला सकती है। इसके तहत लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 हो जाएगी। बैठक की चार मुख्य बातें… इसी बीच राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कांग्रेस महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है। CWC की बैठक में महिला आरक्षण, परिसीमन और पश्चिम एशिया के हालात पर भी चर्चा हुई। एक दिन पहले सरकार ने ड्राफ्ट को मंजूरी दी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट मीटिंग में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी थी। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग बिल लाएगी सरकार राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में सीटों का आरक्षण होगा। सरकार एक संशोधन बिल के एक संविधान साथ-साथ परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग साधारण बिल भी लाएगी। ताकि नए सिरे से सीटों का निर्धारण हो सके। नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जाएगा। महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 सीटें बढ़ेंगी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ेंगी। 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यहां लोकसभा की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है। यहां कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है। एमपी में 15 महिला आरक्षित सीटें बढ़ सकती हैं। तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 यानी महिला सीटें होंगी। झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है। 1931 में पहली बार महिला आरक्षण का मुद्दा उठा था 1931: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महिला आरक्षण पर पहली बार चर्चा हुई, लेकिन प्रस्ताव अंततः खारिज कर दिया गया। बेगम शाह नवाज और सरोजिनी नायडू जैसी नेताओं ने महिलाओं को पुरुषों पर तरजीह देने के बजाय समान राजनीतिक स्थिति की मांग पर जोर दिया। 1971: भारत में महिलाओं की स्थिति पर समिति का गठन किया गया। इसके कई सदस्यों ने विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध किया। 1974: महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए महिलाओं की स्थिति पर एक समिति ने शिक्षा और समाज कल्याण मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी। इसमें पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की सिफारिश की 1988: राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perspective Plan) ने पंचायत स्तर से संसद तक महिलाओं को आरक्षण देने की सिफारिश की। इसने पंचायती राज संस्थानों और सभी राज्यों में शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण अनिवार्य करने वाले 73वें और 74वें संविधान संशोधनों की नींव रखी। 1993: 73वें और 74वें संविधान संशोधनों में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल सहित कई राज्यों ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू किया है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… 2029 चुनाव से पहले लागू होगा 33% महिला आरक्षण:लोकसभा सीटें बढ़कर 816 होंगी, महिला सांसदों की संख्या 273 तक पहुंचेगी केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो बिल लाए जा सकते हैं। इसके जरिए महिला आरक्षण लागू करने की मौजूदा शर्त में बदलाव किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
बाजार में मिलने वाला आम नेचुरल तरीके से पका है या कार्बाइड से, ऐसे करें पहचान, खा सकेंगे मीठे, रसीले Mango

Ways to check the quality of mangoes: फलों का राजा आम खाने के शौकीनों की कोई कमी नहीं है. हर किसी को गर्मियों का मौसम आते ही आम का इंतजार बेसब्री से रहता है. मुख्य रूप से मई से जुलाई तक के महीने में आम मार्केट में मिलते रहते हैं. आम के कई वेरायटी हैं और सभी का रगं, आकार, स्वाद, बनावट एक-दूसरे से अलग होता है. लेकिन, आम कोई सा भी क्यों न हो, ये सेहत के लिए बेहद हेल्दी होते हैं. बाजार रंग-बिरंगे आमों से भर जाता है, लेकिन जब आप मार्केट में आम खरीदने जाते हैं तो समझ नहीं आता है कि कौन सा आम नेचुरल तरीके से पकाया गया है और कौन सा कार्बाइड से पका है. कार्बाइड से पका आम स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होता है. इससे पके आम को आप रेगुलर खाएंगे तो आपके लिवर, किडनी, आंतों पर नकारात्मक असर पड़ेगा. ऐसे में मार्केट में मिलने वाले आम कौन से हेल्दी हैं और कौन से हानिकारक, किसे नेचुरल तरीके से पकाया गया है, कौन सा मीठा और खट्टा है, ये आप इन तरीकों से पहचानें. आम की गुणवत्ता को पहचानने का तरीका -स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में बिकने वाले कई आम प्राकृतिक तरीके से नहीं, बल्कि केमिकल के जरिए जल्दी पकाए जाते हैं, जो शरीर पर गंभीर असर डाल सकते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. -जो आम प्राकृतिक रूप से पके होते हैं, उनमें एक खास तरह की मिठास, ताजगी भरी खुशबू होती है. इसे आप दूर से ही महसूस कर सकते हैं. वहीं, केमिकल से पकाए गए आमों में यह प्राकृतिक सुगंध लगभग न के बराबर होती है. उनका रंग भी असामान्य रूप से चमकीला पीला होता है. ये देखने में आकर्षक लगते हैं, लेकिन यह उनकी असल गुणवत्ता को छुपा सकता है. -वैज्ञानिकों के अनुसार, प्राकृतिक आम का रंग हल्का हरा और पीला होता है. ये अंदर से पूरी तरह पका होता है, जबकि कृत्रिम रूप से पकाए गए आम अक्सर बाहर से पीले और अंदर से कच्चे रह जाते हैं. -आप पानी में डालकर ये जान सकते हैं कि आप नेचुरल तरीके से पका है या नहीं. यदि आम पानी में डालते ही डूब जाता है तो आम प्राकृतिक रूप से पका है, क्योंकि ये भारी होता है. -केमिकल कार्बाइड से पकाया गया आम वजन में हल्का होता है. इसे पानी में डालेंगे तो तैरता रहेगा. केमिकल से पकाए गए आम को खाने से कई बार जीभ में जलन, गले में हल्की परेशानी महसूस हो सकती है. -कैल्शियम कार्बाइड एक खतरनाक रसायन है. अक्सर आम विक्रेता अपने फायदे के लिए इसका इस्तेमाल करके आम को जल्दी पकाने की कोशिश करते हैं. इससे एसिटिलीन नाम की गैस निकलती है, जो शरीर के लिए हानिकारक होती है. इसमें आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे तत्व भी हो सकते हैं, जो लंबे समय तक शरीर में रहने पर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं. -केमिकल से पके हुए आम को खाने से आपको दस्त, पेट दर्द, उल्टी, डायरिया, गले में जलन, मुंह में छाले जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अधिक सेंसेटिव लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. चक्कर आ सकता है. नींद आने में समस्या हो सकती है. लंबे समय तक ऐसे फलों का सेवन करने से लिवर और किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकता है. ये केमिकल कैंसर के रिस्क को भी बढ़ा सकता है.
हज यात्रियों की परेशानी पर भोपाल में प्रदर्शन:चूड़ियां लेकर औकाफ-ए-शाही पहुंचीं महिलाएं; रुबात बंद होने पर हाजियों का विरोध

भोपाल में हज यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोग औकाफ-ए-शाही कार्यालय पहुंचे, जहां महिलाओं ने चूड़ियां लेकर विरोध जताया। आरोप है कि मक्का-मदीना की रुबात (धर्मशाला) बंद होने से हाजियों पर लाखों का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कमेटी ने चेतावनी दी है कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा। बता दें कि हज यात्रा के लिए इस साल करीब 8 हजार लोग मध्य प्रदेश से जा रहे हैं। 18 अप्रैल को भारत से पहली फ्लाइट सऊदी अरब जाएगी। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पोस्टर और बैनर लेकर नारेबाजी की। पोस्टर्स पर लिखा था “शाही औकाफ होश में आओ, लापरवाही नहीं चलेगी, जवाब दो”, “सोते हुए शहर को जगाने आए हैं, बंद रुबातों को खुलवाने आए हैं”, “रुबातें हमारा हक है, बहाल करो”। महिलाओं ने चूड़ियां देकर जताया विरोध प्रदर्शन में शामिल सरवर जहां ने कहा कि पिछले कई वर्षों से भोपाल के हाजी रुबात सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने कहा, “यह हमारी बेगमात की धरोहर है। अगर जिम्मेदार लोग काम नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें चूड़ियां पहनकर घर बैठ जाना चाहिए। आज एक महिला बैठी है, कल सैकड़ों महिलाएं भी आ सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज की महिलाएं धूप में बैठकर विरोध कर रही हैं, जबकि अधिकारी मिलने तक नहीं आए। 6 साल से मदीना की रुबात बंद, इस साल मक्का भी प्रभावित जिम्मेदार गायब, जवाब देने को कोई तैयार नहीं प्रदर्शन में शामिल आबिद मोहम्मद खान ने आरोप लगाया कि एक हफ्ते पहले लिखित आवेदन देने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, “कार्यालय में कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं है, मोबाइल बंद हैं। जब हमारी खुद की रुबातें मौजूद हैं, तो हमें किराए पर क्यों रुकना पड़ रहा है?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समन्वय की कमी और आंतरिक विवादों के कारण रुबात व्यवस्था प्रभावित हुई है। प्रशासन बोला- उच्च स्तर पर चल रहे प्रयास औकाफ-ए-शाही के प्रशासनिक प्रबंधक फारूक किबरिया ने कहा कि मामले में उच्च स्तर पर प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि सऊदी सरकार की प्रक्रियाओं में देरी के कारण इजाजतनामा मिलने में समय लगा है, जिससे भवन लेने में दिक्कत आई। उन्होंने कहा कि बोर्ड, चेयरमैन और सरकार के स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द समाधान की उम्मीद है। कमेटी की मांगें रुबात क्या है रुबात दरअसल मक्का और मदीना में बनी ऐसी धर्मशालाएं या सराय होती हैं, जिन्हें पुराने समय में रियासतों और नवाबी दौर में हज यात्रियों की सुविधा के लिए बनवाया गया था। इनका मकसद यह था कि संबंधित रियासतों जैसे भोपाल के हाजी वहां मुफ्त या बेहद कम खर्च में ठहर सकें। भोपाल की बेगमों ने भी अपने दौर में हाजियों के लिए मक्का-मदीना में रुबात बनवाई थीं, ताकि शहर के लोग हज के दौरान आर्थिक बोझ से बच सकें और अपनी “रियासती धरोहर” का लाभ ले सकें। रुबात सिर्फ ठहरने की जगह नहीं, बल्कि नवाबी दौर की एक ऐतिहासिक विरासत मानी जाती है। शहर की बेगमों द्वारा मक्का और मदीना में बनवाई गई इन रुबातों का उद्देश्य भोपाल, सीहोर और रायसेन के हाजियों को हज के दौरान मुफ्त या रियायती ठहरने की सुविधा देना था। यही वजह है कि आज जब ये रुबातें बंद हैं या हाजियों को उपलब्ध नहीं हो पा रहीं, तो इसे सिर्फ सुविधा का नहीं बल्कि “हक और विरासत” का मुद्दा मानकर विरोध हो रहा है।
शरीर के लिए पावर बूस्टर से कम नहीं इस जानवर का दूध, गाय-भैंस से भी ज्यादा असरदार! कई बीमारियों में फायदेमंद

Last Updated:April 10, 2026, 18:50 IST Health News: फरीदाबाद के गांवों में बकरी का दूध बना सेहत और रोजगार का मजबूत सहारा. आयुर्वेद में सबसे गुणकारी माना जाने वाला यह दूध इम्युनिटी बढ़ाने पाचन सुधारने और बीमारियों में फायदेमंद है. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि इसके क्या-क्या फायदे हैं. फरीदाबाद: फरीदाबाद के गांवों में सुबह की शुरुआत अब सिर्फ खेतों से नहीं, बल्कि बकरियों की मिमियाहट और उनके दूध की बढ़ती मांग से भी होने लगी है. अरावली से सटे कोट गांव से लेकर आसपास के कई गांवों तक बकरी का दूध आज लोगों की सेहत और किसानों की आमदनी दोनों का सहारा बन चुका है. खास बात यह है कि बीमारियों के समय इस दूध की डिमांड अचानक बढ़ जाती है और लोग इसे किसी अमृत से कम नहीं मानते हैं. Local18 से बातचीत में फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉक्टर चेतन शर्मा बताते हैं कि आयुर्वेद में दूध के आठ प्रकार बताए गए हैं, जिनमें बकरी का दूध सबसे गुणकारी माना जाता है. यह स्वाद में मधुर और पचने में बेहद हल्का होता है. यही वजह है कि राजस्थान, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे दूरदराज इलाकों में भी इसका खूब सेवन किया जाता है. त्वचा के लिए बेहद फायदेमंदडॉ. चेतन शर्मा ने बताया कि बकरी के दूध में विटामिन A प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद है. साथ ही यह शरीर को ताकत देता है और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है. पुराने समय से ही इसे गंभीर बीमारियों, खासकर ट्यूमर जैसी स्थितियों में भी दिया जाता रहा है. जिन बच्चों को किसी कारणवश मां का दूध नहीं मिल पाता है, उनके लिए भी बकरी का दूध एक अच्छा विकल्प माना जाता है. क्या है बकरी के दूध के फायदे?डॉ. चेतन शर्मा ने यह दूध इतना हल्का होता है कि कमजोर पाचन तंत्र वाले लोगों को भी आसानी से पच जाता है और तुरंत फायदा देता है. न्यूट्रिशन के मामले में भी यह गाय और भैंस के दूध से कहीं ज्यादा असरदार माना जाता है. डेंगू जैसी बीमारियों में प्लेटलेट्स गिरने लगते हैं. ऐसे में बकरी का दूध काफी फायदेमंद साबित होता है. डॉक्टर चेतन शर्मा बताते हैं कि नियमित सेवन से शरीर को अंदर से मजबूती मिलती है, चाहे इसे सीधे पिया जाए या चाय के रूप में लिया जाए, यह हर तरह से शरीर के लिए लाभकारी है. फरीदाबाद के गांवों में बकरी पालन अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक मजबूत रोजगार बन चुका है. कई परिवार सिर्फ बकरियों के सहारे अपना घर चला रहे हैं और उनके लिए यह दूध न सिर्फ कमाई का जरिया है, बल्कि लोगों की सेहत से जुड़ा एक भरोसा भी बन गया है. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Faridabad,Haryana First Published : April 10, 2026, 18:50 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
114 नए राफेल स्वदेशी मिसाइलों से लैस होंगे:18 जेट फ्रांस में, 96 भारत में बनेंगे; कंपनी ने सोर्स कोड देने से इनकार किया

भारत फ्रांस से 114 नए राफेल फाइटर जेट खरीद रहा है। 18 जेट फ्रांस में, 96 भारत में बनेंगे। इन जेट्स को स्वदेशी मिसाइलों और हथियार सिस्टम से लैस किया जाएगा। एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट (ICD) के जरिए राफेल जेट और स्वदेशी हथियार आपस में कैसे जुड़ेंगे यह तय किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय अगले महीने राफेल फाइटर जेट बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन को रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी करेगा। इसके बाद कॉन्ट्रैक्ट पर बातचीत शुरू होगी। इस सौदे को फेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने 12 फरवरी को मंजूरी दी थी। 114 में से 18 राफेल जेट्स फ्रांस से फ्लाई-अवे कंडीशन में मिलेंगे। बाकी 96 जेट्स भारत में बनाए जाएंगे, जिसमें 25% कलपुर्जे स्वदेशी होंगे। फ्रांस सोर्स कोड शेयर नहीं करेगा रिपोर्ट्स में कहा गया कि फ्रांस सोर्स कोड देने को तैयार नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, कोई भी देश अपने फाइटर जेट का सोर्स कोड साझा नहीं करता। यही कोड रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, टारगेट ट्रैकिंग और हथियार सिस्टम को कंट्रोल करता है, इसलिए इसे साझा नहीं किया जाता। हालांकि, डील पर इसका असर नहीं है। दावा- रूस और अमेरिका भी नहीं देते सोर्स कोड एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को रूस ने 5th जनरेशन Su-57 फाइटर जेट के दो स्क्वाड्रन देने की पेशकश की है। वह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ मिलकर Su-30 MKI जेट्स को अपग्रेड भी कर रहा है। हालांकि रूस ने इन दोनों फाइटर जेट्स के सोर्स कोड कभी शेयर नहीं किए। अमेरिका का भी यही रुख है। भारत के पास मौजूद अमेरिकी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और अटैक हेलिकॉप्टर से जुड़े सॉफ्टवेयर कोड भी शेयर नहीं किए जाते। एयरफोर्स ने सितंबर 2025 में मांग की थी एयरफोर्स ने सितंबर 2025 में 114 अतिरिक्त राफेल जेट की मांग रक्षा मंत्रालय को भेजी थी। एयरफोर्स के पास पहले से 36 राफेल विमान है, जबकि नौसेना ने 26 मरीन वेरिएंट राफेल का ऑर्डर दिया है। अधिक संख्या में एक ही प्लेटफॉर्म होने से रखरखाव लागत कम होगी। अंबाला एयरबेस पर राफेल का ट्रेनिंग और MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सेंटर पहले से चालू है। एयरफोर्स के पास तुरंत दो स्क्वाड्रन (36–38 विमान) शामिल करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेयर पार्ट्स और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद है। भारत में 176 राफेल विमान हो जाएंगे 114 राफेल की डील पूरी होने के बाद भारत के बेड़े में राफेल विमानों की संख्या 176 हो जाएगी। हालांकि अभी इसमें थोड़ा वक्त लग सकता है। एयरफोर्स पहले ही 36 राफेल विमानों को शामिल कर चुकी है। भारतीय नौसेना ने 26 राफेल मरीन का ऑर्डर दिया है। राफेल मरीन से पहले भारत फ्रांस से एयरफोर्स के लिए 36 राफेल जेट भी खरीद चुका है। 2016 में हुई इस डील के सभी विमान 2022 में भारत पहुंचे थे। इन्हें एयरफोर्स के अंबाला और हाशिनारा एयरबेस से संचालित किया जाता है। ये डील 58,000 करोड़ रुपए में हुई थी। राफेल मरीन विमान के फीचर्स एयरफोर्स के राफेल विमान से एडवांस हैं। ————– ये कबर भी पढ़ें… 114 नए राफेल खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी:फ्रेंच प्रेसिडेंट मैक्रों के भारत आने पर हो सकता है सौदा भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस डील की कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपए बताई जा रही है। दसॉ एविएशन से 18 विमान उड़ने के लिए तैयार स्थिति में मिलेंगे। बाकी 96 भारत में बनेंगे। इनके 60% कलपुर्जे स्वदेशी होंगे। भारत का यह सबसे बड़ा रक्षा सौदा है। पूरी खबर पढ़ें…
गुना में 90 वर्षीय पुजारी से मारपीट:पुजारी बोले – मंदिर की जमीन हड़पना चाहता है आरोपी; लाठी डंडों से की मारपीट

जिले के रूठियाई इलाके में एक 90 वर्षीय पुजारी से मारपीट का मामला सामने आया है। मंदिर की जमीन हड़पने के उद्देश्य से पुजारी से विवाद किया गया और उनसे मारपीट की गई। मारपीट में पुजारी घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुजारी कमल दास महाराज (90) ने बताया कि वे वर्षों से देहरी पांजा स्थित मंदिर की सेवा कर रहे हैं। मंदिर की करीब 4-5 बीघा जमीन है, जिससे होने वाली आय से मंदिर का संचालन और उनका जीवन निर्वाह होता है। लेकिन पास में रहने वाले भैयालाल गुर्जर की नीयत इस बेशकीमती जमीन पर खराब थी। गुरुवार दोपहर करीब 4 बजे जब महाराज जी मंदिर परिसर में थे, तभी आरोपी भैयालाल वहां पहुंचा और गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोपी ने बहाना बनाया कि मंदिर का जाली वाला गेट खुला रहता है, लेकिन असल मकसद विवाद खड़ा करना था। देखते ही देखते आरोपी ने डंडे से महाराज पर हमला कर दिया। उनके बाएं कंधे और पीठ पर डंडे के प्रहार किए गए। इतना ही नहीं, आरोपी ने 90 साल के बुजुर्ग पुजारी को जमीन पर पटककर थप्पड़ों से जमकर पिटाई की, जिससे उनकी दाहिनी आंख के ऊपर गहरा घाव हो गया और खून बहने लगा। गनीमत रही कि उसी समय एक दर्शनार्थी मंदिर पहुंच गया, जिसे देखकर आरोपी वहां से भाग निकला। जाते-जाते उसने पुजारी को चेतावनी दी कि अगर दोबारा इस मंदिर पर दिखे, तो जान से खत्म कर देंगे। पुजारी को घायल अवस्था में इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वृद्ध पुजारी के साथ हुई इस बर्बरता की सूचना मिलते ही भुजरिया तालाब मंदिर के महंत राघवेंद्र दास महाराज ने अस्पताल पहुंचकर उनका हाल जाना और इस कृत्य की घोर निंदा की। घटना के बाद घायल पुजारी ने डायल 112 की मदद से पुलिस को बुलाया। रुठियाई चौकी पुलिस ने आरोपी भैयालाल गुर्जर के खिलाफ अपराध क्रमांक 023/26 धारा 115(2), धारा 296(बी), धारा 351(3) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया है। जिले के साधु-संतों ने चेतावनी दी है कि यदि मंदिर की जमीन को सुरक्षित नहीं किया गया और आरोपी पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल, पुलिस मामले की विवेचना कर रही है।
थारू कैंप के पास ग्लेशियर टूटा, केदारनाथ पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त:यात्रा से पहले बारिश-बर्फबारी बनी सबसे बड़ी चुनौती, धाम में 3 फीट तक बर्फ

केदारनाथ धाम के कपाट खुलने में अब 11 दिन ही शेष रह गए हैं। 22 अप्रैल को धाम के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे, ऐसे में प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए हर स्तर पर व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है, ताकि इस बार आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके। धाम तक पहुंचने वाले पैदल मार्ग से लेकर बेस कैंप तक सफाई, मरम्मत और सुविधाओं को विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। प्रशासन, पुलिस और अन्य संबंधित विभाग लगातार समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। जिससे यात्रा के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था की स्थिति न बने। बर्फ हटाने से लेकर रास्तों को सुरक्षित बनाने तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि इन तैयारियों के बीच मौसम बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है। लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी के कारण काम प्रभावित हो रहा है। वहीं ग्लेशियर खिसकने से पैदल मार्ग को नुकसान भी पहुंचा है। इसके बावजूद टीमें लगातार जुटी हुई हैं और मुश्किल परिस्थितियों के बीच भी तैयारियों को समय पर पूरा करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। धाम में युद्धस्तर पर काम जारी केदारनाथ धाम में बर्फबारी के बाद अब मौसम खुल गया है और तेज धूप निकलने से हालात तेजी से सामान्य किए जा रहे हैं। रास्तों के किनारे जमी मोटी बर्फ को हटाया जा चुका है और पैदल मार्ग को साफ करने का काम जारी है। कर्मचारी और मजदूर मिलकर रास्ते की मरम्मत और सफाई में जुटे हुए हैं, जिससे यात्रा मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और सुगम बनाया जा सके। धूप खिलने के बाद तैयारियां तेज पिछले दिनों हुई बारिश और बर्फबारी के बाद धूप खिलने से प्रशासन और संबंधित टीमें तैयारियों को और तेज कर चुकी हैं। धाम में बैरिकेडिंग, सफाई व्यवस्था और मार्ग सुधार के काम किए जा रहे हैं। जल्द ही यात्रा सुचारू रूप से शुरू करने के लिए सभी जरूरी इंतजाम तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। ग्लेशियर टूटने से मची अफरा-तफरी यात्रा की तैयारियों के बीच गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर थारू कैंप के पास दोपहर करीब साढ़े 12 बजे एक ग्लेशियर टूट गया। जिससे यात्रा मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया। यह घटना बड़ी लिनचौली से ऊपर हुई, जहां इन दिनों यात्रा को सुचारू बनाने के लिए तेजी से काम चल रहा है। घटना के समय मौके पर मजदूर और कर्मचारी मौजूद थे। जो यात्रा तैयारियों में जुटे हुए थे। अचानक ग्लेशियर टूटने से क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा के लिहाज से मार्ग पर आवाजाही को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी बड़े नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। पुलिस प्रशासन अलर्ट इस घटना के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है और क्षतिग्रस्त मार्ग को जल्द से जल्द दुरुस्त करने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। लगातार बदलते मौसम और बर्फबारी के चलते इस तरह की घटनाएं चुनौती बन रही हैं, लेकिन टीमें मौके पर डटी हुई हैं और यात्रा को निर्धारित समय पर शुरू कराने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। सभी लोग सुरक्षित जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि ग्लेशियर टूटने से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है और सभी लोग सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में स्थिति सामान्य है और मार्ग को फिर से खोलने के लिए श्रमिकों को तैनात कर दिया गया है। तीन साल में 53.81 लाख श्रद्धालु पहुंचे पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो श्रद्धालुओं की संख्या में उतार-चढ़ाव के बावजूद कुल मिलाकर भारी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचे हैं। वर्ष 2023 में 19,61,025 श्रद्धालु केदारनाथ पहुंचे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 16,52,070 रह गई। वहीं 2025 में फिर से बढ़त देखने को मिली और 17,68,795 श्रद्धालुओं ने धाम के दर्शन किए। तीनों वर्षों को मिलाकर कुल 53,81,890 श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंचे हैं, जो इस बात का संकेत है कि मौसम और चुनौतियों के बावजूद आस्था में कोई कमी नहीं आई है और हर साल बड़ी संख्या में भक्त बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।








