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हज यात्रियों की परेशानी पर भोपाल में प्रदर्शन:चूड़ियां लेकर औकाफ-ए-शाही पहुंचीं महिलाएं; रुबात बंद होने पर हाजियों का विरोध

हज यात्रियों की परेशानी पर भोपाल में प्रदर्शन:चूड़ियां लेकर औकाफ-ए-शाही पहुंचीं महिलाएं; रुबात बंद होने पर हाजियों का विरोध

भोपाल में हज यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोग औकाफ-ए-शाही कार्यालय पहुंचे, जहां महिलाओं ने चूड़ियां लेकर विरोध जताया। आरोप है कि मक्का-मदीना की रुबात (धर्मशाला) बंद होने से हाजियों पर लाखों का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कमेटी ने चेतावनी दी है कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा। बता दें कि हज यात्रा के लिए इस साल करीब 8 हजार लोग मध्य प्रदेश से जा रहे हैं। 18 अप्रैल को भारत से पहली फ्लाइट सऊदी अरब जाएगी। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पोस्टर और बैनर लेकर नारेबाजी की। पोस्टर्स पर लिखा था “शाही औकाफ होश में आओ, लापरवाही नहीं चलेगी, जवाब दो”, “सोते हुए शहर को जगाने आए हैं, बंद रुबातों को खुलवाने आए हैं”, “रुबातें हमारा हक है, बहाल करो”। महिलाओं ने चूड़ियां देकर जताया विरोध प्रदर्शन में शामिल सरवर जहां ने कहा कि पिछले कई वर्षों से भोपाल के हाजी रुबात सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने कहा, “यह हमारी बेगमात की धरोहर है। अगर जिम्मेदार लोग काम नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें चूड़ियां पहनकर घर बैठ जाना चाहिए। आज एक महिला बैठी है, कल सैकड़ों महिलाएं भी आ सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज की महिलाएं धूप में बैठकर विरोध कर रही हैं, जबकि अधिकारी मिलने तक नहीं आए। 6 साल से मदीना की रुबात बंद, इस साल मक्का भी प्रभावित जिम्मेदार गायब, जवाब देने को कोई तैयार नहीं
प्रदर्शन में शामिल आबिद मोहम्मद खान ने आरोप लगाया कि एक हफ्ते पहले लिखित आवेदन देने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, “कार्यालय में कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं है, मोबाइल बंद हैं। जब हमारी खुद की रुबातें मौजूद हैं, तो हमें किराए पर क्यों रुकना पड़ रहा है?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समन्वय की कमी और आंतरिक विवादों के कारण रुबात व्यवस्था प्रभावित हुई है। प्रशासन बोला- उच्च स्तर पर चल रहे प्रयास औकाफ-ए-शाही के प्रशासनिक प्रबंधक फारूक किबरिया ने कहा कि मामले में उच्च स्तर पर प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि सऊदी सरकार की प्रक्रियाओं में देरी के कारण इजाजतनामा मिलने में समय लगा है, जिससे भवन लेने में दिक्कत आई। उन्होंने कहा कि बोर्ड, चेयरमैन और सरकार के स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द समाधान की उम्मीद है। कमेटी की मांगें रुबात क्या है रुबात दरअसल मक्का और मदीना में बनी ऐसी धर्मशालाएं या सराय होती हैं, जिन्हें पुराने समय में रियासतों और नवाबी दौर में हज यात्रियों की सुविधा के लिए बनवाया गया था। इनका मकसद यह था कि संबंधित रियासतों जैसे भोपाल के हाजी वहां मुफ्त या बेहद कम खर्च में ठहर सकें। भोपाल की बेगमों ने भी अपने दौर में हाजियों के लिए मक्का-मदीना में रुबात बनवाई थीं, ताकि शहर के लोग हज के दौरान आर्थिक बोझ से बच सकें और अपनी “रियासती धरोहर” का लाभ ले सकें। रुबात सिर्फ ठहरने की जगह नहीं, बल्कि नवाबी दौर की एक ऐतिहासिक विरासत मानी जाती है। शहर की बेगमों द्वारा मक्का और मदीना में बनवाई गई इन रुबातों का उद्देश्य भोपाल, सीहोर और रायसेन के हाजियों को हज के दौरान मुफ्त या रियायती ठहरने की सुविधा देना था। यही वजह है कि आज जब ये रुबातें बंद हैं या हाजियों को उपलब्ध नहीं हो पा रहीं, तो इसे सिर्फ सुविधा का नहीं बल्कि “हक और विरासत” का मुद्दा मानकर विरोध हो रहा है।

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हज यात्रियों की परेशानी पर भोपाल में प्रदर्शन:चूड़ियां लेकर औकाफ-ए-शाही पहुंचीं महिलाएं; रुबात बंद होने पर हाजियों का विरोध

हज यात्रियों की परेशानी पर भोपाल में प्रदर्शन:चूड़ियां लेकर औकाफ-ए-शाही पहुंचीं महिलाएं; रुबात बंद होने पर हाजियों का विरोध

भोपाल में हज यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोग औकाफ-ए-शाही कार्यालय पहुंचे, जहां महिलाओं ने चूड़ियां लेकर विरोध जताया। आरोप है कि मक्का-मदीना की रुबात (धर्मशाला) बंद होने से हाजियों पर लाखों का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कमेटी ने चेतावनी दी है कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा। बता दें कि हज यात्रा के लिए इस साल करीब 8 हजार लोग मध्य प्रदेश से जा रहे हैं। 18 अप्रैल को भारत से पहली फ्लाइट सऊदी अरब जाएगी। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पोस्टर और बैनर लेकर नारेबाजी की। पोस्टर्स पर लिखा था “शाही औकाफ होश में आओ, लापरवाही नहीं चलेगी, जवाब दो”, “सोते हुए शहर को जगाने आए हैं, बंद रुबातों को खुलवाने आए हैं”, “रुबातें हमारा हक है, बहाल करो”। महिलाओं ने चूड़ियां देकर जताया विरोध प्रदर्शन में शामिल सरवर जहां ने कहा कि पिछले कई वर्षों से भोपाल के हाजी रुबात सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने कहा, “यह हमारी बेगमात की धरोहर है। अगर जिम्मेदार लोग काम नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें चूड़ियां पहनकर घर बैठ जाना चाहिए। आज एक महिला बैठी है, कल सैकड़ों महिलाएं भी आ सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज की महिलाएं धूप में बैठकर विरोध कर रही हैं, जबकि अधिकारी मिलने तक नहीं आए। 6 साल से मदीना की रुबात बंद, इस साल मक्का भी प्रभावित जिम्मेदार गायब, जवाब देने को कोई तैयार नहीं
प्रदर्शन में शामिल आबिद मोहम्मद खान ने आरोप लगाया कि एक हफ्ते पहले लिखित आवेदन देने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, “कार्यालय में कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं है, मोबाइल बंद हैं। जब हमारी खुद की रुबातें मौजूद हैं, तो हमें किराए पर क्यों रुकना पड़ रहा है?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समन्वय की कमी और आंतरिक विवादों के कारण रुबात व्यवस्था प्रभावित हुई है। प्रशासन बोला- उच्च स्तर पर चल रहे प्रयास औकाफ-ए-शाही के प्रशासनिक प्रबंधक फारूक किबरिया ने कहा कि मामले में उच्च स्तर पर प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि सऊदी सरकार की प्रक्रियाओं में देरी के कारण इजाजतनामा मिलने में समय लगा है, जिससे भवन लेने में दिक्कत आई। उन्होंने कहा कि बोर्ड, चेयरमैन और सरकार के स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द समाधान की उम्मीद है। कमेटी की मांगें रुबात क्या है रुबात दरअसल मक्का और मदीना में बनी ऐसी धर्मशालाएं या सराय होती हैं, जिन्हें पुराने समय में रियासतों और नवाबी दौर में हज यात्रियों की सुविधा के लिए बनवाया गया था। इनका मकसद यह था कि संबंधित रियासतों जैसे भोपाल के हाजी वहां मुफ्त या बेहद कम खर्च में ठहर सकें। भोपाल की बेगमों ने भी अपने दौर में हाजियों के लिए मक्का-मदीना में रुबात बनवाई थीं, ताकि शहर के लोग हज के दौरान आर्थिक बोझ से बच सकें और अपनी “रियासती धरोहर” का लाभ ले सकें। रुबात सिर्फ ठहरने की जगह नहीं, बल्कि नवाबी दौर की एक ऐतिहासिक विरासत मानी जाती है। शहर की बेगमों द्वारा मक्का और मदीना में बनवाई गई इन रुबातों का उद्देश्य भोपाल, सीहोर और रायसेन के हाजियों को हज के दौरान मुफ्त या रियायती ठहरने की सुविधा देना था। यही वजह है कि आज जब ये रुबातें बंद हैं या हाजियों को उपलब्ध नहीं हो पा रहीं, तो इसे सिर्फ सुविधा का नहीं बल्कि “हक और विरासत” का मुद्दा मानकर विरोध हो रहा है।

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