Wednesday, 16 Sep 2026 | 07:19 PM

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अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर नया बिल पेश:भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों प्रवासियों को हो सकता है फायदा

अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर नया बिल पेश:भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों प्रवासियों को हो सकता है फायदा

अमेरिका में डेमोक्रेटिक सीनेटर एलेक्स पडिला ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसके तहत सात साल से लगातार अमेरिका में रह रहे प्रवासी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे। प्रस्तावित कानून से भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों लोगों को फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, रिपब्लिकन विरोध के कारण इसके पारित होने की राह आसान नहीं मानी जा रही है। क्या है प्रस्तावित विधेयक रिन्यूइंग इमिग्रेशन प्रोविजंस ऑफ द इमिग्रेशन एक्ट 1929 नाम के इस विधेयक के तहत ऐसे प्रवासी जो कम से कम सात वर्ष से लगातार अमेरिका में रह रहे हैं, ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए आवेदक का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए और उसे ग्रीन कार्ड की अन्य पात्रता शर्तें भी पूरी करनी होंगी। भारतीय H-1B वीजाधारकों के लिए क्यों अहम है प्रस्ताव यह प्रस्ताव भारतीय पेशेवरों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा धारकों का बड़ा हिस्सा भारतीयों का है। रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पर लागू देशवार वार्षिक सीमा (Per-Country Cap) के कारण उन्हें स्थायी निवास के लिए कई वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो सात वर्ष से लगातार अमेरिका में रह रहे पात्र H-1B वीजाधारकों को ग्रीन कार्ड पाने का एक वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है। इससे वे लोग भी लाभान्वित हो सकते हैं, जो वर्षों से अस्थायी वर्क वीजा का नवीनीकरण कराते हुए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा, लंबे समय से वीजा पर रह रहे लोगों के 21 वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों, ड्रीमर्स (Dreamers), टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) धारकों, आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों और अन्य उच्च कौशल वाले पेशेवरों को भी इस प्रस्ताव से राहत मिल सकती है। सीनेटर एलेक्स पडिला के कार्यालय के अनुसार, इस विधेयक से 80 लाख से अधिक लोगों को फायदा हो सकता है। कानून में क्या बदलाव होगा विधेयक इमिग्रेशन एंड नेशनेलिटी एक्ट के सेक्शन 249 (रजिस्ट्री) में संशोधन का प्रस्ताव देता है। वर्तमान में इस प्रावधान का लाभ केवल उन लोगों को मिल सकता है जो 1 जनवरी 1972 से पहले अमेरिका में रह रहे हों। नया प्रस्ताव इस निश्चित तारीख को हटाकर सात साल के निरंतर निवास की शर्त लागू करेगा। कानून बनने के 60 दिन बाद यह व्यवस्था प्रभावी होगी। राजनीतिक समर्थन, लेकिन राह आसान नहीं इस विधेयक का नेतृत्व सीनेटर एलेक्स पडिला के साथ सीनेट के डेमोक्रेटिक व्हिप डिक डर्बिन कर रहे हैं। इसे 14 डेमोक्रेटिक सीनेटरों का समर्थन प्राप्त है, जबकि प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में इसी तरह का विधेयक सांसद जोई लोफग्रेन ने पेश किया है। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के विरोध के कारण इसके कानून बनने की राह फिलहाल चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।

अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर नया बिल पेश:भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों प्रवासियों को हो सकता है फायदा

अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर नया बिल पेश:भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों प्रवासियों को हो सकता है फायदा

अमेरिका में डेमोक्रेटिक सीनेटर एलेक्स पडिला ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसके तहत सात साल से लगातार अमेरिका में रह रहे प्रवासी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे। प्रस्तावित कानून से भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों लोगों को फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, रिपब्लिकन विरोध के कारण इसके पारित होने की राह आसान नहीं मानी जा रही है। क्या है प्रस्तावित विधेयक रिन्यूइंग इमिग्रेशन प्रोविजंस ऑफ द इमिग्रेशन एक्ट 1929 नाम के इस विधेयक के तहत ऐसे प्रवासी जो कम से कम सात वर्ष से लगातार अमेरिका में रह रहे हैं, ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए आवेदक का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए और उसे ग्रीन कार्ड की अन्य पात्रता शर्तें भी पूरी करनी होंगी। भारतीय H-1B वीजाधारकों के लिए क्यों अहम है प्रस्ताव यह प्रस्ताव भारतीय पेशेवरों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा धारकों का बड़ा हिस्सा भारतीयों का है। रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पर लागू देशवार वार्षिक सीमा (Per-Country Cap) के कारण उन्हें स्थायी निवास के लिए कई वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो सात वर्ष से लगातार अमेरिका में रह रहे पात्र H-1B वीजाधारकों को ग्रीन कार्ड पाने का एक वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है। इससे वे लोग भी लाभान्वित हो सकते हैं, जो वर्षों से अस्थायी वर्क वीजा का नवीनीकरण कराते हुए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा, लंबे समय से वीजा पर रह रहे लोगों के 21 वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों, ड्रीमर्स (Dreamers), टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) धारकों, आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों और अन्य उच्च कौशल वाले पेशेवरों को भी इस प्रस्ताव से राहत मिल सकती है। सीनेटर एलेक्स पडिला के कार्यालय के अनुसार, इस विधेयक से 80 लाख से अधिक लोगों को फायदा हो सकता है। कानून में क्या बदलाव होगा विधेयक इमिग्रेशन एंड नेशनेलिटी एक्ट के सेक्शन 249 (रजिस्ट्री) में संशोधन का प्रस्ताव देता है। वर्तमान में इस प्रावधान का लाभ केवल उन लोगों को मिल सकता है जो 1 जनवरी 1972 से पहले अमेरिका में रह रहे हों। नया प्रस्ताव इस निश्चित तारीख को हटाकर सात साल के निरंतर निवास की शर्त लागू करेगा। कानून बनने के 60 दिन बाद यह व्यवस्था प्रभावी होगी। राजनीतिक समर्थन, लेकिन राह आसान नहीं इस विधेयक का नेतृत्व सीनेटर एलेक्स पडिला के साथ सीनेट के डेमोक्रेटिक व्हिप डिक डर्बिन कर रहे हैं। इसे 14 डेमोक्रेटिक सीनेटरों का समर्थन प्राप्त है, जबकि प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में इसी तरह का विधेयक सांसद जोई लोफग्रेन ने पेश किया है। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के विरोध के कारण इसके कानून बनने की राह फिलहाल चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।

नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा भड़की, 2 लोगों की मौत:कई जिलों में कर्फ्यू लगा; कांवर यात्रा के दौरान डीजे बजाने को लेकर विवाद हुआ था

नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा भड़की, 2 लोगों की मौत:कई जिलों में कर्फ्यू लगा; कांवर यात्रा के दौरान डीजे बजाने को लेकर विवाद हुआ था

नेपाल के सुनसरी जिले में रविवार रात कांवर यात्रा के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर शुरू हुए एक मामूली विवाद अब बड़े सांप्रदायिक तनाव में बदल गई है। शुरुआत में यह मामला दो समुदायों के बीच कहासुनी तक सीमित था, लेकिन देखते ही देखते हिंसा फैल गई और पुलिस को हालात काबू करने के लिए गोली चलानी पड़ी। इस हिंसा में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद पूरे तराई-मधेश क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शन के दौरान सिराहा में एक और युवक की मौत के बाद तनाव और बढ़ गया। हालात को देखते हुए प्रशासन ने सिराहा, धनुषा समेत कई जिलों में अगले आदेश तक कर्फ्यू लगा दिया है। बहस झड़प में बदली, पुलिस के आने पर भी नहीं रुकी श्रद्धालु कोसी बैराज से जल लेकर लौट रहे थे और उनके साथ डीजे व लाउडस्पीकर भी बज रहे थे। इसी दौरान दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने तेज आवाज में बज रहे संगीत पर आपत्ति जताई। पहले दोनों पक्षों के बीच बहस हुई, फिर धक्का-मुक्की शुरू हो गई और देखते ही देखते मामला हिंसक झड़प में बदल गया। शुरुआत में स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश की। लेकिन थोड़ी ही देर में दोनों समुदायों के और लोग मौके पर पहुंच गए। कई लोगों के हाथों में लाठी, बांस, पत्थर और भाले जैसे हथियार थे। इसके बाद दोनों तरफ से पथराव शुरू हो गया। हवाई फायरिंग के बाद भी हिंसा नहीं रुकी, पुलिस ने गोली चलाई पथराव में 8 पुलिसकर्मी, जिनमें एक इंस्पेक्टर भी शामिल थे, घायल हो गए। हालात बिगड़ने पर आसपास के पुलिस थानों और आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) की अतिरिक्त टीमों को बुलाया गया। पुलिस के मुताबिक, भीड़ पर पहले काबू पाने की कोशिश की गई। एक पुलिस अधिकारी ने तीन हवाई फायर भी किए, लेकिन हिंसा नहीं रुकी। इसके बाद रात करीब 10:45 बजे पुलिस ने गोली चलाई। गोली लगने से ओम प्रकाश मेहता की मौत हो गई। कई अन्य लोग भी गोली लगने से घायल हुए। बाद में इलाज के दौरान जयप्रकाश मेहता की भी मौत हो गई, जिससे इस घटना में मरने वालों की संख्या दो हो गई। 3 साल पहले सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को चेताया था नेपाल के मधेश और तराई क्षेत्र में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को तीन साल पहले ही चेतावनी दे दी थी, लेकिन उस पर कोई खास कार्रवाई नहीं हुई। अब सुनसरी और मधेश में हुई हालिया हिंसा के बाद यह रिपोर्ट फिर चर्चा में है। कांतिपुर की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल की सीमा सुरक्षा और दंगा नियंत्रण बल आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) ने तीन साल पहले सरकार को एक सीक्रेट रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें कहा गया था कि तराई क्षेत्र में धर्म और जातीय आधार पर लोगों को बांटने की संगठित कोशिशें हो रही हैं। रिपोर्ट में ओली सरकार से तुरंत राजनीतिक और प्रशासनिक कदम उठाने की सिफारिश की गई थी, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि उस समय सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। रिपोर्ट में कहा गया था कि नेपाल को भारत के मणिपुर और दक्षिण एशिया के दूसरे देशों में हुई सांप्रदायिक हिंसा से सबक लेना चाहिए।

‘के-शेप्ड इकोनॉमी’ दिखा रही असर:1,400 रु. की आइसक्रीम की कतार में छिपा है अमेरिकी अर्थव्यवस्था का सच

‘के-शेप्ड इकोनॉमी’ दिखा रही असर:1,400 रु. की आइसक्रीम की कतार में छिपा है अमेरिकी अर्थव्यवस्था का सच

अमेरिका के एक छोटे से कस्बे हॉपकिंस, मिनेसोटा में हर मौसम में एक जैसा नजारा दिखता है। चाहे 27 डिग्री की गर्मी हो या बर्फीली ठंड, लोग एक ही चीज के लिए कतार में खड़े मिलते हैं: 15 डॉलर (करीब 1,400 रुपए) की एक छोटी सी आइसक्रीम। यह सिर्फ एक शहर या एक दुकान की कहानी नहीं। महामारी के दौरान शौकिया तौर पर शुरू हुआ यह आइसक्रीम कारोबार अब पूरे अमेरिका में एक ट्रेंड बन चुका है। दरअसल, कोरोना काल में जब लोगों की नौकरियां और रोजमर्रा की जिंदगी ठप पड़ गई थी, तब कई लोगों ने घर पर ही छोटे-मोटे शौक को कारोबार में बदल डाला। ए टू जेड क्रीमरी के संस्थापक जैक व्रा भी उन्हीं में से एक हैं, जिनकी सेल्स की नौकरी महामारी के दौरान छूट गई थी। इसके बाद उन्होंने मां से मिली एक छोटी आइसक्रीम मशीन से शुरुआत की। इसके पीछे छिपी है आज की अमेरिकी अर्थव्यवस्था की उलझी हुई तस्वीर। जानकारों के मुताबिक, यह असल में एक ‘के-शेप्ड इकोनॉमी’ का नतीजा है। जहां अमीर तबका बेझिझक खर्च कर रहा है, वहीं मध्यम व निम्न आय वर्ग महंगाई से जूझते हुए भी खुद को खुश रखने के लिए छोटे-छोटे ‘इमोशनल सपोर्ट’ के ज़रिए ढूंढ़ रहा है और आइसक्रीम उसी सुकून का प्रतीक बन गई है। फेच एप के फाउंडर वेस श्रोल कहते हैं कि लोग शेयर बाजार में रिकॉर्ड मुनाफे की खबरें तो देखते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि इस तरक्की का फायदा उन तक नहीं पहुंच रहा। इसी निराशा के बीच लोग छोटी-छोटी खुशियों यानी ‘लिटिल ट्रीट्स’ की तलाश में रहते हैं। डेनवर की सैडबॉय क्रीमरी के फाउंडर माइकल किंबॉल कहते हैं कि यह कीमत बहुत ज्यादा नहीं, लेकिन इतनी जरूर है कि लोग क्वालिटी और मेहनत की कद्र करें। शायद यही वजह है कि लोग इसे ‘इमोशनल सपोर्ट आइसक्रीम’ बुलाने लगे हैं। दिलचस्प है कि इस ट्रेंड में एआई के दौर में ‘कुछ असली’ करने की चाहत भी शामिल है। न्यूयॉर्क की बेटी जोज क्रीमरी शुरू करने वाली मैडी नेहलेन कहती हैं कि एआई भविष्य में कारोबार बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन आइसक्रीम नहीं बना सकता – इसमें इंसानी हाथों की मेहनत जरूरी है। यादगार और अनोखे अनुभव पर खर्च करने में बजट आड़े नहीं आता ए टू जेड क्रीमरी हर साल अपने स्थापना दिवस पर खास 100 डॉलर (करीब ₹9,560 रु.) की आइसक्रीम बनाती है, शैंपेन आइसक्रीम, कैवियार और गोल्ड लीफ वाले सॉर्डो क्राउटन के साथ। कंपनी के फाउंडर जैक व्रा के मुताबिक, यह दिखाता है कि लोग आज भी यादगार और अनोखे अनुभव पर पैसा खर्च करने को तैयार हैं, भले ही जेब पर बोझ हो।

भारत में सोने की मांग में 6% की गिरावट:अप्रैल-जून तिमाही में 131.4 टन खपत रही, कस्टम ड्यूटी बढ़ने और PM मोदी की अपील का असर

भारत में सोने की मांग में 6% की गिरावट:अप्रैल-जून तिमाही में 131.4 टन खपत रही, कस्टम ड्यूटी बढ़ने और PM मोदी की अपील का असर

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल यानी WGC के अनुसार अप्रैल-जून तिमाही में भारत में सोने की मांग सालाना आधार पर 6% घटकर 131.4 टन रह गई है। पिछले साल की इसी अवधि में यह मांग 139.7 टन थी। मांग में इस गिरावट के पीछे कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोने की खरीदारी कम करने की अपील को मुख्य कारण माना गया है। केंद्र सरकार ने इसी साल मई में सोना और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी थी। इससे इनकी कीमत बढ़ गई थी। वैल्यू के हिसाब से 50% ज्यादा कीमत का सोना खरीदा WGC इंडिया के रीजनल सीईओ सचिन जैन ने बताया कि भले ही मात्रा में मांग घटी हो, लेकिन वैल्यू के लिहाज से यह एक रिकॉर्ड है। इस तिमाही में सोने की खपत 1,98,100 करोड़ रुपए रही, जो 2025 की दूसरी तिमाही के 1,32,500 करोड़ रुपए के मुकाबले 50% अधिक है। इससे पता चलता है कि ऊंची कीमतों के बावजूद उपभोक्ता सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं। ज्वैलरी मांग में 15% की कमी अप्रैल-जून तिमाही के दौरान भारत में कुल ज्वैलरी मांग 15% घटकर 75.1 टन रह गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 88.8 टन थी। प्रधानमंत्री मोदी ने मई में लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी कम करने और विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की अपील की थी, जिसका असर बाजार पर दिखा है। निवेश में तेजी आई कीमतों और भविष्य का अनुमान दूसरी तिमाही में सोने की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमत 4,506.3 डॉलर प्रति औंस रही, जो 2025 में 3,280.4 डॉलर थी। भारत में औसत तिमाही कीमत (बिना आयात शुल्क और जीएसटी के) 1,50,744.8 रुपए रही, जबकि पिछले साल यह 94,875.9 रुपए थी। WGC ने इस साल कुल मांग 650 से 750 टन के बीच रहने का अनुमान जताया है। जैन के अनुसार, त्योहारी और शादी के सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद है।

मूवी रिव्यू- 'भाई तेरा स्टार है':कहानी में दम नहीं, कॉमेडी में हंसी नहीं, राघव जुयाल की पहली सोलो लीड ने किया सिरदर्द

मूवी रिव्यू- 'भाई तेरा स्टार है':कहानी में दम नहीं, कॉमेडी में हंसी नहीं, राघव जुयाल की पहली सोलो लीड ने किया सिरदर्द

कॉमेडी फिल्म की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है दर्शकों को हंसाना। फिल्म ‘भाई तेरा स्टार है’ इसी सबसे जरूरी काम में बुरी तरह नाकाम रहती है। फिल्म शुरुआत से आखिर तक यह भरोसा दिलाती रहती है कि अब कुछ मजेदार होने वाला है, लेकिन हर अगले सीन के साथ निराशा ही हाथ लगती है। शोर है, भागदौड़ है, गलतफहमियां हैं, लेकिन हंसी कहीं दिखाई नहीं देती। राघव जुयाल की पहली सोलो लीड फिल्म से जिस धमाके की उम्मीद थी, वह शुरुआत में ही हवा हो जाती है। फिल्म की कहानी कहानी लंदन में रहने वाले स्ट्रगलिंग एक्टर अजय सिंह (राघव जुयाल) की है। क्रिकेट की एक शर्त हारने के बाद उस पर क्लब मालिक फैटी (संजय कपूर) का दस हजार पाउंड का कर्ज चढ़ जाता है। पैसे लौटाने के लिए उसके पास सिर्फ एक रात है। लेकिन सच बोलने की बजाय अजय एक के बाद एक झूठ बोलता चला जाता है। उसकी गर्लफ्रेंड रोशनी (निहारिका एन एम), बहन नताशा (पार्वती ओमनाकुट्टन) और रोशनी का भाई सिड (विवान भटेना) भी इस झूठ के जाल में फंसते चले जाते हैं। कहानी का आइडिया सुनने में दिलचस्प लगता है। एक रात, ढेर सारी गलतफहमियां और भागदौड़ वाली कॉमेडी। लेकिन स्क्रीन पर सब कुछ इतना बिखरा हुआ है कि कुछ देर बाद यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कहानी आखिर जाना कहां चाहती है। कई दृश्य सिर्फ समय भरने के लिए जोड़े गए लगते हैं और क्लाइमैक्स तक पहुंचते पहुंचते फिल्म पूरी तरह थका देती है। फिल्म में एक्टिंग राघव जुयाल ने किल जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से प्रभावित किया था, लेकिन यहां वह पूरी तरह लड़खड़ा जाते हैं। यह उनकी पहली सोलो लीड फिल्म है, लेकिन पूरी फिल्म में वह लीड हीरो से ज्यादा किसी साइड किरदार जैसे महसूस होते हैं। उनके चेहरे के हावभाव जरूरत से ज्यादा बनावटी लगते हैं और कई जगह ओवरएक्टिंग कॉमेडी को पूरी तरह खत्म कर देती है। कॉमिक टाइमिंग भी बार बार चूकती है, जिससे उनका किरदार दर्शकों से जुड़ ही नहीं पाता। संजय कपूर अपने अनुभव से कुछ दृश्यों को संभालने की कोशिश करते हैं, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट उनके हाथ भी बांध देती है। विवान भटेना अपने सीमित स्क्रीन टाइम में असर छोड़ते हैं और कई जगह राघव से ज्यादा सहज नजर आते हैं। पार्वती ओमनाकुट्टन फिल्म की सबसे संतुलित परफॉर्मेंस देती हैं। निहारिका एन एम ईमानदार कोशिश करती हैं, लेकिन कमजोर लेखन उन्हें भी ज्यादा मौका नहीं देता। चंदन राय सान्याल और निकी वालिया जैसे उम्दा कलाकारों की प्रतिभा का फिल्म में बेहद खराब इस्तेमाल किया गया है। फिल्म में डायरेक्शन निर्देशक विवेक बी अग्रवाल की सबसे बड़ी गलती यह है कि उन्होंने शोर को कॉमेडी समझ लिया। पूरी फिल्म में किरदार लगातार भागते हैं, चिल्लाते हैं और एक दूसरे के पीछे दौड़ते रहते हैं, लेकिन कोई भी सिचुएशन ऐसी नहीं बनती जिस पर खुलकर हंसी आए। स्क्रीनप्ले जरूरत से ज्यादा उलझा हुआ है। नए किरदार आते रहते हैं, लेकिन कहानी को मजबूत करने के बजाय उसे और बिखेर देते हैं। कई पंचलाइन बिना असर छोड़े निकल जाती हैं। गलतफहमियों पर टिकी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसकी राइटिंग होती है, लेकिन यहां वही सबसे कमजोर कड़ी साबित होती है। क्लाइमैक्स तक पहुंचते पहुंचते फिल्म पूरी तरह अपनी पकड़ खो देती है। फिल्म का तकनीकी पक्ष लंदन की लोकेशन अच्छी लगती है और सिनेमैटोग्राफी भी ठीक ठाक है। एडिटिंग अगर थोड़ी और कसी हुई होती तो फिल्म का असर कुछ बेहतर हो सकता था। लेकिन कमजोर कहानी और ढीले स्क्रीनप्ले के सामने तकनीकी पक्ष भी बेबस नजर आता है। फिल्म में म्यूजिक अमित त्रिवेदी का संगीत फिल्म की कुछ गिनी चुनी अच्छी बातों में शामिल है। हालांकि गाने कहानी की रफ्तार को रोकते हैं। सबसे अजीब फैसला आखिर में लगातार गाने रखने का है, जिससे फिल्म खत्म होने के बाद भी खत्म होती हुई महसूस नहीं होती। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘भाई तेरा स्टार है’ एक ऐसी कॉमेडी है, जिसमें सबसे ज्यादा कमी हंसी की है। कमजोर कहानी, बिखरा हुआ स्क्रीनप्ले, फीका निर्देशन और राघव जुयाल की निराशाजनक लीड परफॉर्मेंस मिलकर इस फिल्म को बेहद थका देने वाला अनुभव बना देते हैं। जिस फिल्म से राघव को बतौर सोलो हीरो नई पहचान मिलनी थी, वही फिल्म उनके करियर के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है। अगर अच्छी कॉमेडी देखने की उम्मीद लेकर थिएटर जा रहे हैं, तो यह फिल्म आपकी उम्मीद और आपका धैर्य दोनों तोड़ देगी।

पतंजलि ग्रुप खरीदेगा मैग्मा जनरल इंश्योरेंस कंपनी:IRDAI से मंजूरी मिली, मार्च 2025 में हुई थी डील; 3 महीने में पूरी होगी प्रोसेस

पतंजलि ग्रुप खरीदेगा मैग्मा जनरल इंश्योरेंस कंपनी:IRDAI से मंजूरी मिली, मार्च 2025 में हुई थी डील; 3 महीने में पूरी होगी प्रोसेस

पतंजलि आयुर्वेद को मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बीमा नियामक IRDAI से मंजूरी मिल गई है। कंपनी ने बुधवार को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी। नियामक ने 28 जुलाई 2026 के पत्र के जरिए इस अधिग्रहण को हरी झंडी दी है।यह मंजूरी पत्र जारी होने की तारीख से अगले 3 महीने तक मान्य रहेगी। पतंजलि के साथ कौन-कौन से फाउंडेशन शामिल हैं? इस अधिग्रहण प्रक्रिया में पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के साथ कई धार्मिक और चैरिटेबल ट्रस्ट/फाउंडेशन भी शामिल हैं। इनमें एस.आर. फाउंडेशन, रीति फाउंडेशन, आरआर फाउंडेशन, सुरुचि फाउंडेशन और स्वाति फाउंडेशन के नाम शामिल हैं। ये सभी मिलकर मैग्मा जनरल इंश्योरेंस के मौजूदा शेयरधारकों से हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेंगे। मार्च 2025 में हुआ था शेयर परचेज एग्रीमेंट इस डील की शुरुआत मार्च 2025 में हुई थी, जब पतंजलि-एलेड बायर ग्रुप और मौजूदा शेयरधारकों के बीच शेयर परचेज एग्रीमेंट (SPA) पर दस्तखत किए गए थे। 12 मार्च 2025 को कंपनी ने एक्सचेंजों को इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद regulatory समीक्षा प्रक्रिया में देरी के कारण 12 मार्च 2026 को एग्रीमेंट की लॉन्ग-स्टॉप डेट (समय सीमा) को आगे बढ़ाया गया था। 1 साल से ज्यादा समय से अटका था रेगुलेटरी अप्रूवल एग्रीमेंट साइन होने के बाद से यह सौदा लगभग 16 महीने से नियामक समीक्षा के तहत अटका हुआ था। IRDAI की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद अब मालिकाना हक बदलने का रास्ता साफ हो गया है। खरीदार समूह को अब अगले तीन महीनों की तय सीमा में शेयर ट्रांसफर और IRDAI द्वारा रखी गई शर्तों को पूरा करना होगा। मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में बदलेगा मालिकाना हक सभी जरूरी औपचारिकताएं, लीगल प्रोसेस और कांट्रैक्ट से जुड़ी शर्तें पूरी होने के बाद मैग्मा जनरल इंश्योरेंस का ओनरशिप ट्रांसफर पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही इंश्योरेंस सेक्टर में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के पतंजलि ग्रुप की मौजूदगी और मजबूत होगी।

मैग्मा जनरल इंश्योरेंस कंपनी को पतंजलि ग्रुप खरीदेगा:IRDAI से मंजूरी मिली, मार्च 2025 में हुई थी डील; 3 महीने में पूरी होगी प्रोसेस

मैग्मा जनरल इंश्योरेंस कंपनी को पतंजलि ग्रुप खरीदेगा:IRDAI से मंजूरी मिली, मार्च 2025 में हुई थी डील; 3 महीने में पूरी होगी प्रोसेस

पतंजलि आयुर्वेद और धर्मपाल सत्यपाल ग्रुप को मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बीमा नियामक IRDAI से मंजूरी मिल गई है। कंपनी ने बुधवार को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी। मीडिया रिर्पोट्स के अनुसार लगभग 4,500 करोड़ रुपए में ये डील हुई है। नियामक ने 28 जुलाई 2026 के पत्र के जरिए इस अधिग्रहण को हरी झंडी दी है।यह मंजूरी पत्र जारी होने की तारीख से अगले 3 महीने तक मान्य रहेगी। 73.6% हिस्सेदारी खरीदेगी पतंजलि इस डील के तहत पतंजलि आयुर्वेद 73.6% हिस्सेदारी खरीदेगी, जबकि धर्मपाल सत्यपाल ग्रुप 24.5% हिस्सेदारी का मालिक बनेगा। इससे पहले इस कंपनी की सबसे बड़ी हिस्सेदार सनोटी प्रॉपर्टीज (आदार पूनावाला समूह) थी। IRDAI की मंजूरी मिलने के बाद अब पतंजलि मैग्मा जनरल इंश्योरेंस की प्रमोटर कंपनी बन जाएगी। मार्च 2025 में हुआ था शेयर परचेज एग्रीमेंट इस डील की शुरुआत मार्च 2025 में हुई थी, जब पतंजलि-एलेड बायर ग्रुप और मौजूदा शेयरधारकों के बीच शेयर परचेज एग्रीमेंट (SPA) पर दस्तखत किए गए थे। 12 मार्च 2025 को कंपनी ने एक्सचेंजों को इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद regulatory समीक्षा प्रक्रिया में देरी के कारण 12 मार्च 2026 को एग्रीमेंट की लॉन्ग-स्टॉप डेट (समय सीमा) को आगे बढ़ाया गया था। 1 साल से ज्यादा समय से अटका था रेगुलेटरी अप्रूवल एग्रीमेंट साइन होने के बाद से यह सौदा लगभग 16 महीने से नियामक समीक्षा के तहत अटका हुआ था। IRDAI की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद अब मालिकाना हक बदलने का रास्ता साफ हो गया है। खरीदार समूह को अब अगले तीन महीनों की तय सीमा में शेयर ट्रांसफर और IRDAI द्वारा रखी गई शर्तों को पूरा करना होगा। मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में बदलेगा मालिकाना हक सभी जरूरी औपचारिकताएं, लीगल प्रोसेस और कांट्रैक्ट से जुड़ी शर्तें पूरी होने के बाद मैग्मा जनरल इंश्योरेंस का ओनरशिप ट्रांसफर पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही इंश्योरेंस सेक्टर में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के पतंजलि ग्रुप की मौजूदगी और मजबूत होगी।

सलमान खान की शो 'अलायंस' में एंट्री होगी:भाई सोहेल का सपोर्ट करने पहुंचेंगे, काउबॉय हैट और ऑल-डेनिम लुक में दिखे

सलमान खान की शो 'अलायंस' में एंट्री होगी:भाई सोहेल का सपोर्ट करने पहुंचेंगे, काउबॉय हैट और ऑल-डेनिम लुक में दिखे

सलमान खान बुधवार को रियलिटी शो ‘अलायंस’ के सेट पर पहुंचे। यहां वह अपने भाई सोहेल खान को सपोर्ट करने आए थे। सोहेल खान की पूर्व पत्नी सीमा सजदेह वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट के तौर पर शो में शामिल हुई थीं। हालांकि, हाल ही में वह शो से बाहर हो गईं। सीमा के एलिमिनेट होने के बाद सोहेल भावुक नजर आए थे। अब सलमान शो में गेस्ट के रूप में दिखाई देंगे। सेट पर जाने से पहले सलमान ने पैपराजी के लिए भी पोज दिए। इस दौरान उनका ऑल-डेनिम लुक और काउबॉय हैट लोगों का ध्यान खींचता नजर आया। वर्क फ्रंट की बात करें तो सलमान जल्द ही फिल्म ‘मातृभूमि: मे रेस्ट इन पीस’ में दिखाई देंगे। इस फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है। सोहेल ने सीमा की तारीफ की थी बता दें कि रियलिटी गेम शो ‘अलायंस’ में जब सीमा की एंट्री हुई, तब सोहेल ने उनकी तारीफ की थी। उस दौरान होस्ट कुणाल खेमू ने सोहेल से सीमा को लेकर सवाल किया था, जिस पर उन्होंने अपनी शादी और रिश्ते को लेकर खुलकर बात की। कुणाल खेमू ने पूछा था कि सीमा को शो में देखकर उन्हें कैसा लग रहा है। इस पर सोहेल खान ने कहा था कि उन्होंने सीमा के साथ अपनी जिंदगी के 25 साल बिताए हैं। उन्होंने सीमा को एक खूबसूरत और अच्छे दिल वाली महिला बताया। सोहेल ने यह भी कहा था कि अगर उनके रिश्ते में कभी कोई गलती हुई होगी, तो वह उनकी तरफ से हुई होगी। शो में सोहेल खान और सीमा के बीच बातचीत और बॉन्डिंग देखकर अन्य प्रतियोगियों ने तालियां बजाकर दोनों का हौसला बढ़ाया था। सोहेल और सीमा ने भागकर शादी की थी सोहेल और सीमा की पहली मुलाकात चंकी पांडे की सगाई की पार्टी में हुई थी। सोहेल पहली नजर में ही सीमा को दिल दे बैठे। जल्द ही दोनों ने एक-दूसरे को डेट करना शुरू कर दिया। लेकिन अलग-अलग धर्म होने की वजह से सीमा का परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। परिवार के विरोध के बावजूद दोनों ने साथ रहने का फैसला किया। 15 मार्च 1998 को, जिस दिन सोहेल की पहली डायरेक्टेड फिल्म ‘प्यार किया तो डरना क्या’ रिलीज हुई, उसी दिन दोनों ने घर से भागकर शादी कर ली। पहले आर्य समाज मंदिर में फेरे लिए और फिर निकाह किया। उनका पहला बेटा निर्वाण 2000 में और दूसरा बेटा योहान 2011 में हुआ। दोनों 2022 में अलग हो गए। रियलिटी गेम शो ‘अलायंस’ को कुणाल खेमू होस्ट कर रहे हैं। शो में रिश्तों और दोस्ती के समीकरण हर दिन बदलते रहते हैं। यह शो प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रहा है, जिसमें फिल्म और टीवी कलाकारों के साथ कई इंफ्लुएंसर्स भी हिस्सा ले रहे हैं। इसमें सोहेल खान, मिनी माथुर, कुशल टंडन, नीति टेलर और पायल गेमिंग शामिल हैं।

अमेरिका ने ईरान पर हमले शुरू किए:जॉर्डन में US बेस पर अटैक के बाद जवाबी कार्रवाई; ट्रम्प बोले- अब हमारी बारी

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अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि उसने ईरान के ठिकानों पर जवाबी हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी सेना के मुताबिक, यह कार्रवाई जॉर्डन में उसके सैन्य ठिकानों और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। सेंटकॉम ने इसे ‘शक्तिशाली प्रतिक्रिया’ बताया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में कहा, “अब हमारी बारी है।” उन्होंने दावा किया कि ईरान को हमले की जानकारी थी और उसने अमेरिका से ऐसा न करने की अपील भी की थी। इससे एक दिन पहले अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए थे। वहीं मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर अमेरिकी स्वामित्व वाले गैस टैंकर ‘एनर्गोस विंटर’ पर भी ड्रोन हमला हुआ। बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 7.3% बढ़कर 88 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…