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‘के-शेप्ड इकोनॉमी’ दिखा रही असर:1,400 रु. की आइसक्रीम की कतार में छिपा है अमेरिकी अर्थव्यवस्था का सच

‘के-शेप्ड इकोनॉमी’ दिखा रही असर:1,400 रु. की आइसक्रीम की कतार में छिपा है अमेरिकी अर्थव्यवस्था का सच

अमेरिका के एक छोटे से कस्बे हॉपकिंस, मिनेसोटा में हर मौसम में एक जैसा नजारा दिखता है। चाहे 27 डिग्री की गर्मी हो या बर्फीली ठंड, लोग एक ही चीज के लिए कतार में खड़े मिलते हैं: 15 डॉलर (करीब 1,400 रुपए) की एक छोटी सी आइसक्रीम। यह सिर्फ एक शहर या एक दुकान की कहानी नहीं। महामारी के दौरान शौकिया तौर पर शुरू हुआ यह आइसक्रीम कारोबार अब पूरे अमेरिका में एक ट्रेंड बन चुका है। दरअसल, कोरोना काल में जब लोगों की नौकरियां और रोजमर्रा की जिंदगी ठप पड़ गई थी, तब कई लोगों ने घर पर ही छोटे-मोटे शौक को कारोबार में बदल डाला। ए टू जेड क्रीमरी के संस्थापक जैक व्रा भी उन्हीं में से एक हैं, जिनकी सेल्स की नौकरी महामारी के दौरान छूट गई थी। इसके बाद उन्होंने मां से मिली एक छोटी आइसक्रीम मशीन से शुरुआत की। इसके पीछे छिपी है आज की अमेरिकी अर्थव्यवस्था की उलझी हुई तस्वीर। जानकारों के मुताबिक, यह असल में एक ‘के-शेप्ड इकोनॉमी’ का नतीजा है। जहां अमीर तबका बेझिझक खर्च कर रहा है, वहीं मध्यम व निम्न आय वर्ग महंगाई से जूझते हुए भी खुद को खुश रखने के लिए छोटे-छोटे ‘इमोशनल सपोर्ट’ के ज़रिए ढूंढ़ रहा है और आइसक्रीम उसी सुकून का प्रतीक बन गई है। फेच एप के फाउंडर वेस श्रोल कहते हैं कि लोग शेयर बाजार में रिकॉर्ड मुनाफे की खबरें तो देखते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि इस तरक्की का फायदा उन तक नहीं पहुंच रहा। इसी निराशा के बीच लोग छोटी-छोटी खुशियों यानी ‘लिटिल ट्रीट्स’ की तलाश में रहते हैं।
डेनवर की सैडबॉय क्रीमरी के फाउंडर माइकल किंबॉल कहते हैं कि यह कीमत बहुत ज्यादा नहीं, लेकिन इतनी जरूर है कि लोग क्वालिटी और मेहनत की कद्र करें। शायद यही वजह है कि लोग इसे ‘इमोशनल सपोर्ट आइसक्रीम’ बुलाने लगे हैं। दिलचस्प है कि इस ट्रेंड में एआई के दौर में ‘कुछ असली’ करने की चाहत भी शामिल है। न्यूयॉर्क की बेटी जोज क्रीमरी शुरू करने वाली मैडी नेहलेन कहती हैं कि एआई भविष्य में कारोबार बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन आइसक्रीम नहीं बना सकता – इसमें इंसानी हाथों की मेहनत जरूरी है। यादगार और अनोखे अनुभव पर खर्च करने में बजट आड़े नहीं आता ए टू जेड क्रीमरी हर साल अपने स्थापना दिवस पर खास 100 डॉलर (करीब ₹9,560 रु.) की आइसक्रीम बनाती है, शैंपेन आइसक्रीम, कैवियार और गोल्ड लीफ वाले सॉर्डो क्राउटन के साथ। कंपनी के फाउंडर जैक व्रा के मुताबिक, यह दिखाता है कि लोग आज भी यादगार और अनोखे अनुभव पर पैसा खर्च करने को तैयार हैं, भले ही जेब पर बोझ हो।

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‘के-शेप्ड इकोनॉमी’ दिखा रही असर:1,400 रु. की आइसक्रीम की कतार में छिपा है अमेरिकी अर्थव्यवस्था का सच

अमेरिका के एक छोटे से कस्बे हॉपकिंस, मिनेसोटा में हर मौसम में एक जैसा नजारा दिखता है। चाहे 27 डिग्री की गर्मी हो या बर्फीली ठंड, लोग एक ही चीज के लिए कतार में खड़े मिलते हैं: 15 डॉलर (करीब 1,400 रुपए) की एक छोटी सी आइसक्रीम। यह सिर्फ एक शहर या एक दुकान की कहानी नहीं। महामारी के दौरान शौकिया तौर पर शुरू हुआ यह आइसक्रीम कारोबार अब पूरे अमेरिका में एक ट्रेंड बन चुका है। दरअसल, कोरोना काल में जब लोगों की नौकरियां और रोजमर्रा की जिंदगी ठप पड़ गई थी, तब कई लोगों ने घर पर ही छोटे-मोटे शौक को कारोबार में बदल डाला। ए टू जेड क्रीमरी के संस्थापक जैक व्रा भी उन्हीं में से एक हैं, जिनकी सेल्स की नौकरी महामारी के दौरान छूट गई थी। इसके बाद उन्होंने मां से मिली एक छोटी आइसक्रीम मशीन से शुरुआत की। इसके पीछे छिपी है आज की अमेरिकी अर्थव्यवस्था की उलझी हुई तस्वीर। जानकारों के मुताबिक, यह असल में एक ‘के-शेप्ड इकोनॉमी’ का नतीजा है। जहां अमीर तबका बेझिझक खर्च कर रहा है, वहीं मध्यम व निम्न आय वर्ग महंगाई से जूझते हुए भी खुद को खुश रखने के लिए छोटे-छोटे ‘इमोशनल सपोर्ट’ के ज़रिए ढूंढ़ रहा है और आइसक्रीम उसी सुकून का प्रतीक बन गई है। फेच एप के फाउंडर वेस श्रोल कहते हैं कि लोग शेयर बाजार में रिकॉर्ड मुनाफे की खबरें तो देखते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि इस तरक्की का फायदा उन तक नहीं पहुंच रहा। इसी निराशा के बीच लोग छोटी-छोटी खुशियों यानी ‘लिटिल ट्रीट्स’ की तलाश में रहते हैं।
डेनवर की सैडबॉय क्रीमरी के फाउंडर माइकल किंबॉल कहते हैं कि यह कीमत बहुत ज्यादा नहीं, लेकिन इतनी जरूर है कि लोग क्वालिटी और मेहनत की कद्र करें। शायद यही वजह है कि लोग इसे ‘इमोशनल सपोर्ट आइसक्रीम’ बुलाने लगे हैं। दिलचस्प है कि इस ट्रेंड में एआई के दौर में ‘कुछ असली’ करने की चाहत भी शामिल है। न्यूयॉर्क की बेटी जोज क्रीमरी शुरू करने वाली मैडी नेहलेन कहती हैं कि एआई भविष्य में कारोबार बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन आइसक्रीम नहीं बना सकता – इसमें इंसानी हाथों की मेहनत जरूरी है। यादगार और अनोखे अनुभव पर खर्च करने में बजट आड़े नहीं आता ए टू जेड क्रीमरी हर साल अपने स्थापना दिवस पर खास 100 डॉलर (करीब ₹9,560 रु.) की आइसक्रीम बनाती है, शैंपेन आइसक्रीम, कैवियार और गोल्ड लीफ वाले सॉर्डो क्राउटन के साथ। कंपनी के फाउंडर जैक व्रा के मुताबिक, यह दिखाता है कि लोग आज भी यादगार और अनोखे अनुभव पर पैसा खर्च करने को तैयार हैं, भले ही जेब पर बोझ हो।

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