झज्जर के देहाती दंगल में पहुंचे बॉलीवुड एक्टर गुलशन ग्रोवर:बोले- बंद करो ये गाना, बैड मैन आया, हरियाणा आकर दिल ‘गार्डन-गार्डन’ हो जाता है

झज्जर के डाबोदा गांव में आयोजित देहाती कुश्ती दंगल इस बार खास बन गया। मुंबई से पहुंचे बॉलीवुड के ‘बैड मैन’ गुलशन ग्रोवर ने अपने अंदाज से पूरे माहौल में जोश भर दिया। जैसे ही वे मंच पर पहुंचे, दर्शकों में उत्साह दौड़ गया और तालियों की गूंज से पूरा मैदान गूंज उठा। कार्यक्रम के दौरान जब मंच पर गाना चल रहा था, इसी बीच गुलशन ग्रोवर पहुंचे और अपने चिर-परिचित अंदाज में बोले- “बंद करो डायरेक्शन, बैड मैन आ गया है, अब मेरी स्पीच सुनो।” उनके इस मजाकिया अंदाज ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। हरियाणा की धरती की जमकर की तारीफ गुलशन ग्रोवर ने हरियाणा की संस्कृति और परंपरा की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि, हरियाणा पहलवानों का प्रदेश है, जहां हर घर में पहलवान और फौजी मिलते हैं। उन्होंने कहा, “जब भी मैं हरियाणा आता हूं, मेरा दिल गार्डन-गार्डन हो जाता है। यहां के लोग बड़े दिल के होते हैं और अपनापन दिल छू जाता है।” स्वर्गीय मोटा पहलवान की याद में हुआ दंगल यह भव्य दंगल स्वर्गीय नरेंद्र उर्फ मोटा पहलवान (हिंद केसरी) की स्मृति में आयोजित किया गया था। आयोजन से जुड़े पहलवान राजेंद्र मलिक ने बताया कि, हर साल समाजसेवी विक्रम अपने बड़े भाई की याद में इस दंगल का आयोजन करवाते हैं, जिसमें देशभर से नामी पहलवान हिस्सा लेते हैं। हर साल बड़े सितारों की रहती है मौजूदगी राजेंद्र मलिक ने बताया कि, इस दंगल की खास बात यह है कि हर साल विक्रम किसी न किसी बड़े फिल्मी सितारे को आमंत्रित किया जाता है। पिछले साल बॉलीवुड अभिनेता आदित्य पंचोली ने शिरकत की थी, जबकि इस बार गुलशन ग्रोवर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। दूर-दूर से पहुंचे पहलवान, इनाम भी रहा आकर्षण दंगल में हरियाणा ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी पहलवान पहुंचे। विजेताओं के लिए आकर्षक इनाम राशि रखी गई थी। पहला इनाम 1 लाख रुपए, दूसरा 51 हजार रुपए और तीसरा 31 हजार रुपए रखा गया था, जिसने प्रतियोगिता को और रोमांचक बना दिया। इन पहलवानों ने जीता मुकाबला दंगल में दिनेश हिंद केसरी (गोयला) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया और 1 लाख रुपए का इनाम जीता। दूसरी कुश्ती भोला कासनी और आशीष टिकाना के बीच बराबरी पर रही, जिसके चलते दोनों को संयुक्त रूप से इनाम दिया गया। तीसरे स्थान पर दीपांशु सांपला रहे, जिन्होंने 31 हजार रुपए का पुरस्कार अपने नाम किया। देसी घी के भंडारे ने बढ़ाया आकर्षण दंगल के दौरान हर साल की तरह इस बार भी देसी घी का भंडारा लगाया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और आयोजन का आनंद लिया। पूरे आयोजन के दौरान डाबोदा गांव में मेले जैसा माहौल देखने को मिला। कुश्ती के मुकाबलों के साथ-साथ लोगों में खासा उत्साह नजर आया। ग्रामीण संस्कृति, खेल और मनोरंजन का यह संगम लोगों के लिए यादगार बन गया।
दतिया में रात में 8.25 मिमी बारिश दर्ज:न्यूनतम तापमान में 1.9 डिग्री की गिरावट, फसलों को नुकसान की आशंका

दतिया में अप्रैल महीने में जहां आमतौर पर तेज गर्मी और लू का असर देखने को मिलता है, वहीं इस बार मौसम ने पूरी तरह करवट ले ली है। मंगलवार रात से शुरू हुई बारिश का सिलसिला बुधवार सुबह तक रुक-रुक कर जारी रहा। आसमान में काले बादल छाए रहे और ठंडी हवाओं ने मौसम को फरवरी जैसा बना दिया। रात जिले में 8.25 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है। मौसम विभाग ने बुधवार को बारिश के साथ ओलावृष्टि की चेतावनी भी जारी की है। जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। न्यूनतम तापमान में करीब 1.9 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई और यह 16.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सुबह के समय चल रही ठंडी हवाओं ने लोगों को हल्की सर्दी का एहसास कराया। जो अप्रैल के लिहाज से असामान्य स्थिति है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश का असर अलग-अलग देखने को मिला। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार इंदरगढ़ क्षेत्र में सबसे अधिक 14 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सेवढ़ा में 12 मिमी बारिश हुई। लगातार बदलते मौसम के कारण जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। लोग गर्मी से राहत तो महसूस कर रहे हैं, लेकिन अचानक आई ठंडक और नमी से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। इस असमय बारिश का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। गेहूं की फसल, जो कटाई के अंतिम चरण में थी, बारिश और संभावित ओलावृष्टि के कारण प्रभावित हुई है। खेतों में खड़ी और कटी हुई फसल भीगने से नुकसान की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि ओलावृष्टि होती है तो नुकसान और ज्यादा बढ़ सकता है।
पंजाबी सिंगर सुनंदा के बरेली शो में बोल्ड ठुमके:लॉलीपॉप लागेलु गीत पर जमकर नाचीं, फैंस हुए बेकाबू, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज

पंजाबी सिंगर सुनंदा शर्मा के गाजियाबाद शो के बाद अब बरेली शो भी विवादों से घिर गया है। शो यहां हुए स्टूडेंट्स के हंगामे और सुनंदा के बोल्ड ठुमकों को लेकर चर्चा में आ गया है। रविवार 5 अप्रैल की रात बरेली की फ्यूचर यूनिवर्सिटी में आयोजित फ्यूचर फिएस्टा के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब सुनंदा के एक डांस परफॉरमेंस के दौरान भीड़ पूरी तरह बेकाबू हो गई। सुनंदा ने यहां पर भोजपुरी गीत लॉलीपॉप पर बोल्ड ठुमके लगाए जिससे युवक बेकाबू हो गए। युवकों ने वेरिकेड तोड़ दिए। भीड़ को काबू करने के लिए यूपी पुलिस को उतरना पड़ा। सुनंदा ने स्टेज पर झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में सहित हिंदी गीतों पर भी डांस किया। इसके साथ ही अपने पंजाबी हिट सांग मेरी मम्मी नूं पसंद भी सुनाया। शो में तब रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया जब सुनंदा ने अपने हिट पंजाबी गानों के बीच अचानक मशहूर भोजपुरी ट्रैक लॉलीपॉप लागेलु पर परफॉर्म करना शुरू कर दिया। पंजाबी कुड़ी पर लगा भोजपुरी अवतार का टैग शो का सबसे रोमांचिक पल सुनंदा के भोजपुरी गीत लॉलीपॉप लागेलु पर लगाए गए बोल्ड ठुमके रहे। युवाओं ने इस दौरान भीड़ से अपने हाथों से सुनंदा के लिए दिल के आकार बनाए। कुछ युवा पोस्टर लेकर पहुंचे जिस पर लिखा था कि मैं आपके लिए झुमके लेकर आया हूं। इस दौरान पंजाबी सिंगर ने फैंस के साथ मुलाकात भी की और सेल्फी ली। रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया जब सुनंदा ने अपने हिट पंजाबी गानों के बीच अचानक मशहूर भोजपुरी ट्रैक लॉलीपॉप लागेलु पर परफॉर्म करना शुरू कर दिया। पंजाब की देसी स्टार को भोजपुरी धुन पर ठुमके लगाते देख छात्र दीवाने हो गए। सोशल मीडिया पर उनके इस डांस के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। भोजपुरी गीत पर ठुमकों के बाद सुनंदा पर बिहार के अवतार का टैग लग रहा है। टूटे बैरिकेड्स, पुलिस को करना पड़ा बल प्रयोग जैसे ही सुनंदा ने स्टेज पर अपना जलवा बिखेरा, लगभग 10 हजार से अधिक प्रशंसकों की भीड़ स्टेज के करीब पहुंचने के लिए सुरक्षा घेरा तोड़ बैठी। बैरिकेडिंग गिरने और अफरा-तफरी मचने के कारण सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। स्थिति को बिगड़ता देख स्थानीय पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। यूपी दौरे के दौरान सुनंदा शर्मा के साथ हुए विवाद… गाजियाबाद में स्टेज पर फैन के अचानक आने से चीख मारी: गाजियाबाद के राज कुमार गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (RKGIT) में आयोजित शो के दौरान एक बड़ी सुरक्षा चूक हुई। जब सुनंदा परफॉर्म कर रही थीं, तब एक छात्र अचानक बैरिकेड्स फांदकर स्टेज पर चढ़ गया और उनके पैर छूने की कोशिश करने लगा। इस अचानक हुई घटना से सुनंदा इतनी डर गईं कि वे जोर से चिल्लाईं और तुरंत स्टेज छोड़कर चली गईं। इसके बाद शो को बीच में ही रद्द करना पड़ा। हालांकि, बाद में सुनंदा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर बताया कि वे डर गई थीं, लेकिन उन्हें पता है कि उस छात्र की मंशा गलत नहीं थी, बल्कि वह प्यार जताने का एक गलत तरीका था। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन से छात्र को माफ करने की अपील भी की। मेरठ शो में छात्रों के 2 गुटों में हो गई झड़प- मेरठ की सुभारती यूनिवर्सिटी में आयोजित वार्षिक उत्सव स्पार्क-2026 के दौरान माहौल तब बिगड़ गया जब स्टेज के करीब बैठने और खड़े होने को लेकर छात्रों के दो समूहों में बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते यह बहस मारपीट में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छात्रों के बीच जमकर लात-घूंसे चले और इस धक्का-मुक्की में कई छात्रों के कपड़े तक फट गए। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि सुरक्षाकर्मियों को बीच-बचाव करना पड़ा और शो को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लिया और कई घायल छात्रों को प्राथमिक उपचार की जरूरत पड़ी। बरेली में बोल्ड ठुमके, बेकाबू भीड़ पर पुलिस का बल प्रयोग: बरेली की फ्यूचर यूनिवर्सिटी में फ्यूचर फिएस्टा के दौरान करीब 10,000 से ज्यादा लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। जैसे ही सुनंदा ने ‘लॉलीपॉप लागेलु’ और अपने अन्य हिट गानों पर परफॉर्म करना शुरू किया, प्रशंसक जोश में आकर बैरिकेड्स तोड़ने लगे। भीड़ के स्टेज की ओर बढ़ने से भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। भीड़ को नियंत्रित करने और किसी बड़ी अनहोनी को रोकने के लिए वहां तैनात पुलिस बल को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा। पुलिस की इस कार्रवाई से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मची, लेकिन बाद में स्थिति को काबू में कर लिया गया और शो को किसी तरह पूरा किया गया। पंजाब में छिड़ी सुनंदा के ठुमकों पर बहस सुनंदा के लॉलीपॉप गाने पर किए गए डांस ने पंजाब के संगीत गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। जहां युवा फैंस इसे एक कलाकार की वर्सटैलिटी मान रहे हैं, वहीं पंजाब के कुछ पारंपरिक संगीत प्रेमी और आलोचक इससे नाराज हैं। सोशल मीडिया पर आलोचकों का तर्क है कि सुनंदा शर्मा जैसे बड़े कलाकार को दूसरे राज्यों में कल्चर का ध्यान रखना चाहिए। कुछ यूजर्स ने लिखा कि एक स्थापित पंजाबी गायिका को यूपी-बिहार के मसाला गानों पर ठुमके लगाने की जरूरत नहीं है, उनकी पहचान उनके पंजाबी गानों से है।
रामपाल को देशद्रोह के केस में जमानत:हिसार के सतलोक आश्रम में 6 लोगों की मौत हुई थी; 11 साल से जेल में बंद

सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। देशद्रोह के केस में उम्रकैद की सजा काट रहे रामपाल को जमानत मिल गई है। इस केस में रामपाल 11 साल, 4 महीने और 20 दिन से जेल में है। वह हिसार सेंट्रल जेल में बंद है। संत रामपाल को 19 नवंबर 2014 को हिसार जिले के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम से गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने उसे कोर्ट की अवमानना के एक मामले में पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। जब पुलिस उसे गिरफ्तार करने पहुंची, तो समर्थकों से झड़प हो गई। इस टकराव में 5 महिलाओं और डेढ़ साल के बच्चे की मौत हुई थी। इसी मामले में रामपाल पर देशद्रोह का केस दर्ज किया गया था। हम इस खबर को लगातार अपडेट कर रहे हैं…
भारत में इन 5 बीमारियों के करोड़ों मरीज ! बड़ी संख्या में युवा भी हो रहे शिकार, वक्त रहते कर लें बचाव

Last Updated:April 08, 2026, 11:48 IST Health Risks in Indians: भारत में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और कैंसर जैसी बीमारियों के करोड़ों मरीज हैं. इस वजह से देश को डायबिटीज कैपिटल भी कहा जाता है. चिंता की बात यह है कि ये बीमारियां केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवा भी तेजी से शिकार हो रहे हैं. डॉक्टर्स का कहना है कि सही लाइफस्टाइल और खान-पान से इनमें से कई बीमारियों से बचाव किया जा सकता है. समय पर हेल्थ चेकअप कराना भी बेहद जरूरी है, ताकि शुरुआत में ही इलाज हो सके. भारत में डायबिटीज और हार्ट डिजीज के करोड़ों मरीज हैं. Top 5 Diseases in India: आजकल लोगों की लाइफस्टाइल और खान-पान की आदतें बिगड़ गई हैं, जिससे बीमारियों का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है. भारत में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या बेहद तेजी से बढ़ रही है और करोड़ों लोग कम उम्र में ही मरीज बन चुके हैं. अब ये बीमारियां केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं को भी प्रभावित कर रही हैं. डॉक्टर्स की मानें तो समय रहते सावधानी और स्वास्थ्य का ध्यान रखकर इन बीमारियों से बचाव किया जा सकता है. एक्सपर्ट से जानते हैं कि देश में सबसे ज्यादा लोग किन बीमारियों से जूझ रहे हैं और इनसे किस तरह बचाव किया जा सकता है. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया कि भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं, जबकि 15 करोड़ लोग प्रीडायबिटीज की चपेट में आ चुके हैं. अगर प्रीडायबिटीज के मरीज वक्त रहते सही कदम न उठाएं, तो आने वाले कुछ सालों में वे डायबिटीज के मरीज बन जाएंगे. अगले कुछ सालों में डायबिटीज के मरीजों का आंकड़ा 10 करोड़ से भी कई करोड़ ज्यादा हो सकता है. टाइप 2 डायबिटीज एक लाइफस्टाइल डिजीज है. यह अक्सर मोटापा, हाई बीपी, बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल और इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण होती है. फिजिकल एक्टिविटी की कमी भी डायबिटीज की सबसे बड़ी वजह है. सही लाइफस्टाइल, हेल्दी खानपान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय पर जांच से इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. भारत में हार्ट डिजीज के भी 5 करोड़ से ज्यादा मरीज हैं. गलत खान-पान, स्मोकिंग, शराब का सेवन और फिजिकल एक्टिविटी इसके मुख्य कारण हैं. युवा वर्ग में भी तनाव और जंक फूड के चलते दिल से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं. हार्ट डिजीज से बचाव के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव मैनेजमेंट बेहद जरूरी है. इसके अलावा भारत में कैंसर भी सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है. भारत में कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. स्मोकिंग, शराब, एयर पॉल्यूशन और खराब लाइफस्टाइल इसके मुख्य कारण माने जाते हैं. समय पर स्क्रीनिंग और नियमित मेडिकल चेकअप से कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान और इलाज संभव है. अच्छी लाइफस्टाइल से इसका खतरा कुछ हद तक कम हो सकता है. डॉक्टर ने बताया कि हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन के देश में करोड़ों मरीज हैं. हाई ब्लड प्रेशर अब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रही, बल्कि युवा वर्ग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं. ज्यादा नमक का सेवन, तनाव, मोटापा और फिजिकल इन-एक्टिविटी इसके मुख्य कारण हैं. नियमित ब्लड प्रेशर की जांच, बैलेंस्ड डाइट, एक्सरसाइज और स्ट्रेस मैनेजमेंट इसे कंट्रोल रखने के लिए जरूरी है. इसके अलावा भारत में मोटापा भी सबसे बड़ी समस्याओं में शुमार है. मोटापा खुद में बीमारी नहीं है, लेकिन यह हार्ट डिजीज, डायबिटीज और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है. भारत में बच्चों और युवाओं में भी मोटापे की दर बढ़ रही है. संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और जीवनशैली में सुधार मोटापे से बचाव के लिए जरूरी हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 08, 2026, 11:48 IST
Health Tips: मां बनने वाली हैं? डाइट में जरूर शामिल करें लाल साग, बच्चे की हेल्थ के लिए है सुपरफूड

Last Updated:April 08, 2026, 11:40 IST Pregnancy Diet Tips: प्रेग्नेंसी के दौरान सही आहार बेहद जरूरी होता है, और लाल साग (रेड स्पिनच) इसमें अहम भूमिका निभा सकता है. यह आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है, जो मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं. लाल साग खाने से खून की कमी दूर होती है और बच्चे के दिमाग के विकास में मदद मिलती है. साथ ही यह शरीर को ऊर्जा देता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है. नियमित रूप से इसे डाइट में शामिल करने से गर्भावस्था स्वस्थ और संतुलित बनी रहती है. गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जब मां का हर छोटा निर्णय बच्चे के विकास को प्रभावित करता है. सही आहार इस दौरान बेहद जरूरी होता है. लाल साग पोषण से भरपूर हरी सब्जी है, जो खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद मानी जाती है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शिशु के समग्र विकास में मदद करते हैं. यह शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है और गर्भ में पल रहे बच्चे को जरूरी पोषण देता है. इसलिए डॉक्टर भी हरी सब्जियों को डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं. लाल साग में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन ए, सी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. ये तत्व गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क के विकास के लिए बेहद जरूरी होते हैं. फोलिक एसिड खासतौर पर न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट से बचाव करता है, जिससे बच्चे का दिमाग स्वस्थ तरीके से विकसित होता है. इसके अलावा यह खून को बढ़ाने में भी मदद करता है, जिससे मां और बच्चे दोनों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है. नियमित सेवन से शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती. लाल साग केवल बच्चे ही नहीं, बल्कि मां के लिए भी बहुत फायदेमंद है. यह खून की कमी (एनीमिया) को दूर करने में मदद करता है, जिससे मां को कमजोरी नहीं होती. साथ ही यह शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करता है, जो गर्भावस्था के दौरान बेहद जरूरी होता है, यह पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाता है और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है. नियमित सेवन से मां खुद को ज्यादा स्वस्थ और एक्टिव महसूस करती है. Add News18 as Preferred Source on Google लाल साग एक सस्ता और आसानी से मिलने वाला सुपरफूड है, जो मां और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद है. यदि इसे संतुलित आहार में शामिल किया जाए, तो यह शिशु के बेहतर मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. इसके नियमित सेवन से गर्भवती महिला को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे गर्भावस्था स्वस्थ बनी रहती है. साथ ही यह बच्चे के संपूर्ण शारीरिक और बौद्धिक विकास में भी सहायक साबित होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, लाल साग का नियमित सेवन बच्चे की याददाश्त और सीखने की क्षमता को मजबूत कर सकता है. यह दिमाग की कोशिकाओं को सक्रिय रखने में मदद करता है. साथ ही यह मानसिक विकास को तेज करने में भी सहायक होता है. बच्चे का दिमाग गर्भ में ही तेजी से विकसित होता है, ऐसे में पोषक आहार का विशेष महत्व होता है. यही कारण है कि संतुलित डाइट को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है. First Published : April 08, 2026, 11:40 IST
तमिल चुनाव में नाम का कन्फ्यूजन! एक सीट, तीन-तीन ‘विजय’, वोटर बोले-असली कौन है भाई?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार मुद्दा, वादे और वादे पीछे छोड़ दिए गए हैं।सियासत का खेल भी दिलचस्प और पेचीदा होता जा रहा है। इस बार कॉम्पिटिशन सिर्फ यूनिवर्सल के बीच नहीं, बल्कि यूनिवर्सल के बीच भी है। चेन्नई के कई दावों पर हमनाम गुलामी की वे ने राजनीतिक गणित को लेकर चर्चा की है और सबसे ज्यादा असर विजय और उनकी पार्टी तमिलगात्री कजगम (टीवीके) पर पड़ा है। चेन्नई की कई सिफारिशों पर ऐसा लग रहा है जैसे चुनाव नहीं, ऑलवेस्ट की कॉपी-पेस्ट प्रतियोगिता चल रही हो और सबसे ज्यादा ‘टारगेट’ बने हैं सुपरस्टार-से-नेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कजगम (टीवीके)। 6 अप्रैल को नामांकन की अंतिम तिथि समाप्त हुई ही तस्वीर साफ हो गई कि चेन्नई के कई नामांकन पर एक ही नाम के कई उम्मीदवार मैदान में हैं, राजनीतिक विशेषज्ञ इसे कोई संयोग नहीं मान रहे हैं, बल्कि इसे एक सोची-समझी रणनीति बता रहे हैं, जिसका उद्देश्य मतदाताओं को प्रेरित करना और समर्थकों का समूह बनाना है। एक विजय नहीं, संपूर्ण ‘विजय परिवार’ मैदान मेंपेरम्बूर सीट पर असली विजय चुनाव लड़ रहे हैं… लेकिन मजा तब आया जब बैलेट दो पर और ‘विजय’ भी कूद पड़े। पेरम्बूर सीट, जहां अभिनेता विजय के लिए खुद चुनाव लड़ रहे हैं, वहां दो और सोलो ने बिल्कुल एक ही नाम से नामांकन किया है। ऐसे में बैलेट पर एक ही नाम के कई बार प्रदर्शन और प्रदर्शन से शुरू होगा कन्न फ़ुजन का खेल। टीवीके के लिए यह सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी पहली बार बड़े स्तर पर इलिनोइस में उतरी है और उसकी पहचान अभी भी मजबूत नहीं हुई है। अब सोचिये सामने वाले वोटर का मामला, ईवीएम के बेकार दिमाग में सिर्फ एक सवाल: “यार, मेरा वाला विजय कौन है?” हर सीट पर ‘नाम क्लोन’सिर्फ पेरम्बूर ही नहीं, बल्कि चेन्नई की कई रेवेरेशंस पर येरे रेवेरेशंस दिख रहे हैं। हार्बर में “सिनोरा” नाम का पूरा ज्वालामुखी उतरा हुआ है। रॉयपुरम में डी जयकुमार के सामने तीन-तीन जयकुमार लाइन में हैं- जैसे टिकटें खिड़की पर फॉर्म की मंजूरी आ गई। हार्बर सीट पर टीवीके उम्मीदवार सिनोरा पीएस अशोक के खिलाफ दो और “सिनोरा” नाम वाले प्रतियोगी मैदान में हैं। रॉयपुरम में डी जयकुमार के सामने तीन हमनाम प्रतियोगी हैं। चेपॉक-ट्रिपलिकेन सीट पर टीवीके उम्मीदवार डी सेल्वम चेपॉक-ट्रिपलिकन में उधयोदय स्टालिन के सामने टीवीके के डी सेल्वम हैं… लेकिन उनके तीन ‘डुप्लीकेट’ भी मौजूद हैं, जहां उनका मुकाबला उधयोदय स्टालिन से है।थाउजेंड लाइट्स में तो हाल ही में यह है कि जेसीडी एम्बालैब्स को भी शायद दो बार चेक करना पड़ा कि “मैं असली हूं या नहीं!” थाउजेंड लाइट्स सीट पर जेसीडी प्रभावशाली के सामने भी तीन हमनाम प्रतियोगी प्रतियोगी हैं। वहीं विल्लीवक्कम और एग्मोर की पसंद पर भी यही रणनीति देखने को मिल रही है। मीम्स की बाढ़ आ गई—सोशल मीडिया पर उठो सवालटीवीके चक ने सोशल मीडिया पर हाफनामों की कॉपी साझा करते हुए आरोप लगाया है कि हमनाम मासूम के दस्तावेज में एक नोट हीरी वकील से जुड़े हुए हैं। हालाँकि, जब इन नामांकित से संपर्क करने की कोशिश की गई तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। एक कॉल पर जवाब आया- “गलत नंबर है” और फोन कट गया। दूसरे ने अपने नामांकन का उद्देश्य शैल साध ली पर रखा। “एक नाम, तीन उम्मीदवार- 1 खरीदें 2 मुफ़्त पाएं!”फ़ोन करो तो जवाब दो- “गलत नंबर है”जब इन हमनाम शौक़ीन से बात करनी चाही, तो एक ने फ़ोन करके कहा- “गलत नंबर है” और फ़ोन कट गया। दूसरे ने तो इतनी रहस्यमयी शैलियां साधी कि लगे जैसे चुनाव नहीं, कोई अंडरकवर मिशन चल रहा हो। ये मजाक नहीं, पूरी रणनीति है, क्या है इस ‘नाम वाले गेम’ का असर?राजनीतिक सिद्धांतों का कहना है कि हमनाम उम्मीदवार के लिए कोई नई बात नहीं है। करीबी मुकाबलों में यह रणनीति अपनाई जाती है ताकि वोटरों को धोखा दिया जा सके और असली दावेदार के वोट कट सके।इस बार चेन्नई के 16 नामांकनों में कुल 628 नामांकन शामिल हैं। पेरूर में सबसे ज्यादा 66 उम्मीदवार हैं, जबकि मालापुर में सबसे कम 25. अब हंसी अपनी जगह है, लेकिन राजनीति में यह पुराना खेल है- वोट काटने की रणनीति। जब मुकाबला टक्कर का हो, तो नाम का कन्फ्यूजन पैदा करो… और वोटर को मजबूर कर दो। चेन्नई के 16 क्वार्टरों में कुल 628 प्रतियोगी मैदान हैं। पेरूर में 66 उम्मीदवार-यानी ईवीएम भी शायद सोच रही होगी, “इतने नाम कहां फिट होगा?” रियल एस्टेट अभी बाकी है, असर क्या होगा?यह ‘नाम का खेल’ वैज्ञानिकता पर कितना असर डालेगा, यह तो 4 मई को तीसरी के बाद ही साफ होगा। लेकिन इतना है कि इस बार मतदाताओं को सिर्फ उम्मीदवार नहीं, बल्कि सही नाम भी पहचानना होगा। तमिल की राजनीति में यह परिवर्तन नया सा संकेत देता है-अब चुनाव सिर्फ नाम या फिर आख़री का नहीं, बल्कि पहचान और भ्रम की लड़ाई भी बन गई है। अब जब वोटिंग होगी और रियल कॉमेडी उस दिन देखने को मिल सकती है, जब वोटर ईवीएम के सामने नाम आएगा… और फिर मिचमिचाकर सोचेंगे- “भाई, ये वाला विजय मेरा वाला है या अगले वाला?” तमिल इलेक्शन 2026 में एक बात साफ कर दी गई है- ये सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि पहचान की हकीकत बन गई है।
भवानीपुर से फिर मैदान में नैतिकता, नामांकित के लिए अखण्ड अखण्ड, नैतिकता हुई तेज

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा सीट से चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए रवाना हो गई हैं। भवानीपुर सीट ममता बनर्जी के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह उनका पारंपरिक क्षेत्र है। हर बार की तरह इस बार भी वह इसी सीट से चुनाव लड़ने जा रही हैं। नामांकन प्लेसमेंट के लिए उनके नामांकन होने के साथ-साथ राजनीतिक एसोसिएट्स का परीक्षण किया गया है। इस पार्टी के कई नेता और समर्थक भी उनके साथ नजर आ सकते हैं. इस चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है और सभी की नजरें अब भवानीपुर सीट पर टिकी हुई हैं। बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी से मुकाबला 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कोलकाता की भवानीपुर सीट पर इस बार बड़ा और सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। यहां मुख्यमंत्री और प्रमुख ममता बनर्जी का सामना बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी से है। यह मुकाबला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि बीजेपी ने सुवेंदु अधिकारी को मैदान में उतारकर 2021 के नंदीग्राम चुनाव में मुकाबले को फिर से दोहराने की कोशिश की है। उस समय भी दोनों नेताओं के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था. भवानीपुर विधानसभा सीट क्यों महत्वपूर्ण है? पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भवानीपुर विधानसभा सीट से गहरा और पुराना रिश्ता रहा है। यह सीट सिर्फ एक चुनावी क्षेत्र नहीं है, बल्कि उनकी राजनीतिक पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है। हर चुनाव में इस सीट पर उनकी मजबूत पकड़ देखने को मिली है, जिससे यह सीट टीएमसी (मूल कांग्रेस) का गढ़ बन गई है। भवानीपुर कोलकाता का एक प्रमुख एवं राजनीतिक रूप से सक्रिय क्षेत्र है, जहाँ शहरी क्षेत्र की संख्या अधिक है। इस क्षेत्र में शिक्षा, व्यापार और मध्यम वर्ग की बड़ी भूमिका है, जो कि निवेशकों को प्रभावित करती है। ममता बनर्जी ने यहां से कई बार लॉगिन कर अपनी पसंद का प्रस्ताव दिया है। ये भी पढ़ें: तमिल चुनाव में नाम का कन्फ्यूजन! एक सीट, तीन-तीन ‘विजय’, वोटर बोले-असली कौन है भाई? (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)ममता बनर्जी भबनीपुर(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव समाचार(टी)ममता नामांकन(टी)भबनीपुर सीट(टी)टीएमसी न्यूज(टी)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)ममता बनर्जी भवानीपुर(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव समाचार(टी)ममता नामांकन(टी)भवानीपुर सीट(टी)टीएमसी समाचार
ग्वालियर में मां की लाश के साथ 5दिन रहे भाई-बहन:डेढ़ माह बाद भी कह रहे- मां हमें लेने जरूर आएगी; कीड़े पड़ने पर पुलिस ने बीमार कहकर उठाया था शव

ग्वालियर के टोपी बाजार इलाके में रहने वाली रिटायर्ड क्लर्क उर्मिला भदौरिया (70) की मौत के बाद एक दर्दनाक कहानी सामने आई है। उनके मानसिक रूप से कमजोर बेटे अखंड (40) और बेटी रितु (38) पांच दिन तक मां के शव के साथ घर में ऐसे ही रहे जैसे सब सामान्य हो। उर्मिला देवी की मौत 14 फरवरी की रात हो गई थी, लेकिन दोनों बेटा-बेटी इसे समझ ही नहीं सके। 19 फरवरी को जब शव सड़ने लगा और उसमें कीड़े पड़ गए, तब बदबू बाहर फैली और पड़ोसियों को शक हुआ। पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को बरामद किया। दोनाें के सामने ‘बीमार’ बताकर ले गए शव पुलिस ने दोनों की मानसिक स्थिति को देखते हुए उनके सामने मां के शव को यह कहकर उठाया कि वह बीमार हैं और अस्पताल ले जा रहे हैं। यही बात अब उनके मन में बैठ गई है। एक दिन बाद दोनों रात को मां को तलाशते हुए कोतवाली थाना पहुंचे। उन्होंने पुलिस से कहा-हमारी मां खो गई है। कहीं मिल नहीं रही है, आप ढूंढ़ दो। मृतका के दोनों बेटा-बेटी इस बात से अनजान हैं कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं है। करीब एक महीने बाद भी दोनों भाई-बहन स्वर्ग सदन आश्रम में रह रहे हैं और दिनभर मां का इंतजार करते हैं। कभी दरवाजे पर बैठ जाते हैं तो कभी पूछते हैं “मां कब आएगी?” जब उन्हें समझाया जाता है कि मां अब इस दुनिया में नहीं है, तो वे इसे मानने से इंकार कर देते हैं और कहते हैं “मां बीमार है, अस्पताल गई है, हमें लेने जरूर आएगी।” मां ही थी उनकी पूरी दुनिया पड़ोसियों के मुताबिक, दोनों भाई-बहन महीनों घर से बाहर नहीं निकलते थे। मां ही उनकी देखभाल करती थीं। उर्मिला देवी ने पति के निधन के बाद अकेले ही बच्चों को पाला-पोसा और पढ़ाया-लिखाया। बेटा बी-टेक और बेटी साइंस ग्रेजुएट है। बच्चों की मानसिक स्थिति के कारण उर्मिला ने रिश्तेदारों और बाहरी दुनिया से दूरी बना ली थी। दो कमरों का घर ही उनका पूरा संसार बन गया था। घर की सफाई भी नियमित नहीं हो पाती थी। घर की छत पर सालों से कचरा जमा हो रहा है। पुलिस और आश्रम कर रहे काउंसलिंग घटना के बाद पुलिस ने दोनों को आश्रम में भर्ती कराया, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है। लेकिन अब तक वे इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। आश्रम प्रबंधन के अनुसार, बच्चे बार-बार घर जाने की जिद करते हैं और मां से मिलने की बात कहते हैं। ऐसे में उनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए धीरे-धीरे काउंसलिंग के जरिए सच्चाई समझाने की कोशिश की जा रही है। मां ने पिता बनकर बच्चों को संभाला था पड़ोसियों के मुताबिक जालिम सिंह का बाड़ा में रहने वाली 70 वर्षीय उर्मिला की शादी 45 साल पहले सुरेंद्र सिंह भदौरिया से हुई थी। उर्मिला उनकी दूसरी पत्नी थी। पहली पत्नी की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी। गुजरते वक्त में बेटा अखंड प्रताप सिंह और बेटी रितु भदौरिया का जन्म हुआ। उर्मिला भदौरिया के पति की काफी समय पहले ही मौत हो चुकी थी। अकेले ही उन्होंने अपने बच्चों को संभाला, उन्हें पढ़ाया-लिखाया। अपनी हिम्मत से बच्चों की मानसिक कमजोरी को हराया। मामला तब बिगड़ा जब वे खुद बीमार हुईं और घर में बेबस पड़ी रहीं। उनको समझ नहीं आ रहा कि मां नहीं रही स्वर्ग सदन आश्रम के संचालक विकास गोस्वामी ने बताया कि उर्मिला देवी के निधन के बाद पुलिस ने उनके बेच्चे अखंड और रितु को आश्रम भेज दिया था। बच्चों की मां का शव उनके सामने पुलिस यह कहकर ले गई थी कि बीमार है इलाज कराने ले जा रहे हैं। उनके मन में वही बात ठहर सी गई है। अब वह यही कहते हैं कि मां बीमार है और उनको लेने आएगी। वह अपने घर जाने की जिद्द भी कर रहे हैं। पुलिस से कहा है कि उनकी सुरक्षा में एक बार उनको उनके घर को दिखा लाया जाए।
वजन घटाने के लिए ग्रीन टी बनाम ब्लैक टी: पेट की चर्बी बदलने के लिए कौन सी चाय बेहतर, ग्रीन या ब्लैक टी में क्या बेस्ट? जानिए फायदे

8 अप्रैल 2026 को 10:17 IST पर अद्यतन किया गया वजन घटाने के लिए ग्रीन टी बनाम ब्लैक टी: वजन घटाने के लिए लोग अक्सर ग्रीन टी और ब्लैक टी पीना पसंद करते हैं। आइए जानते हैं कि पेट की चर्बी के लिए कॅस सी चाय फ़्लोरिडा सबसे अच्छा होगा। (टैग्सटूट्रांसलेट)वजन घटाने के लिए हरी चाय(टी)काली चाय के फायदे(टी)मेटाबॉलिज्म टिप्स(टी)पेट की चर्बी जलाने(टी)वजन घटाने वाले पेय(टी)फिटनेस गाइड हिंदी(टी)हर्बल चाय के फायदे






