बुरहानपुर में भाजपा कार्यालय का भूमिपूजन:एक साल में होगा तैयार; स्थापना दिवस पर वरिष्ठ नेताओं का सम्मान

बुरहानपुर में भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस 6 अप्रैल को मोहन नगर स्थित पार्टी कार्यालय के पास मनाया गया। इस अवसर पर नए भाजपा कार्यालय का भूमिपूजन किया गया और 1980 में पार्टी की स्थापना के समय मुंबई अधिवेशन में शामिल हुए वरिष्ठ नेताओं को सम्मानित किया गया। भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने ने बताया कि यह पार्टी का 47वां स्थापना दिवस है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के अथक प्रयासों से पार्टी इस मुकाम पर पहुंची है। कार्यालय निर्माण में आ रही बाधाएं अब दूर हो गई हैं। बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस ने कार्यालय के लिए 20 लाख रुपये की राशि दी है और इस वित्तीय वर्ष में 15 लाख रुपये और देने की बात कही है। डॉ. माने ने बताया कि कार्यालय का निर्माण कार्य आज से ही शुरू हो गया है। इसे एक साल के भीतर पूरा कर लिया जाएगा और अगले साल 6 अप्रैल 2027 को इसका लोकार्पण किया जाएगा। कार्यक्रम में 1980 में जनसंघ से भाजपा की स्थापना के समय मुंबई अधिवेशन में शामिल हुए वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में रामदास शिवहरे, ज्ञानेश्वर मोरे, प्रकाश कानूनगो, गोकुल प्रजापति, हीरालाल बड़गुर्जर, जगदीश कपूर, अरुण शेंडे, अतुल पटेल और दीपक अग्रवाल शामिल थे। इस अवसर पर सांसद ज्ञानेश्वर पाटील, विधायक अर्चना चिटनिस, जिला संगठन प्रभारी क्षितिज भट्ट, संभाग प्रभारी सुरेंद्र शर्मा और नेपानगर विधायक मंजू दादू सहित अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। मंच का संचालन जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने ने किया।
धुरंधर देखकर परेश रावल बोले- काश मैं इसमें होता:यह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि गाथा है; आदित्य धर की ‘उरी’ में कर चुके हैं काम

निर्देशक आदित्य धर की फिल्म धुरंधर और उसके सीक्वल की जबरदस्त सफलता के बीच एक्टर परेश रावल का एक बयान चर्चा में है। रावल ने कहा है कि उन्हें इस फ्रेंचाइजी का हिस्सा होना चाहिए था और पहली बार उन्हें किसी फिल्म को देखकर ऐसा लगा कि काश वे भी इसमें होते। परेश रावल ने हाल ही में न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में धुरंधर और धुरंधर: द रिवेंज की जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि उन्होंने फिल्म का पहला पार्ट दो बार देखा है, जबकि दूसरा पार्ट भी देख चुके हैं और दोबारा देखने की इच्छा है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक गाथा है, जिसने उन्हें काफी प्रभावित किया। परेश रावल ने कहा, “पहली बार लगा कि मुझे इस फिल्म का हिस्सा होना चाहिए था।” उन्होंने मजाकिया अंदाज में निर्देशक आदित्य धर से यह भी कहा कि अगर मौका मिलता तो वे फिल्म में एक दिलचस्प किरदार निभाना चाहते। फिल्म में रणवीर सिंह, आर माधवन और अर्जुन रामपाल जैसे सितारे अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं। खासतौर पर आर माधवन के किरदार को लेकर भी चर्चा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से प्रेरित बताया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि परेश रावल पहले उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक में इसी तरह के किरदार से जुड़े रोल निभा चुके हैं। उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक में परेश रावल ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार गोविंद भारद्वाज का किरदार निभाया था, जो अजीत डोभाल से प्रेरित माना जाता है। रावल ने दोनों फिल्मों में इस तरह के किरदारों की अलग-अलग व्याख्या को दिलचस्प बताया और कहा कि दर्शकों को यह विविधता पसंद आई है। उन्होंने यह भी माना कि धुरंधर की कहानी, पैमाना और प्रस्तुति इसे खास बनाते हैं, जिसकी वजह से यह दर्शकों के बीच बड़ी हिट साबित हुई है। बता दें कि धुरंधर फ्रेंचाइजी बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन कर रही है और देश-विदेश में इसे जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है।
महाकुंभ वाले IITian बाबा ने शादी की:इंजीनियर पत्नी कर्नाटक की, दोनों हिमाचल में रह रहे; झज्जर में परिवार से मिलने पहुंचे

प्रयागराज महाकुंभ मेले में फेमस हुए IITian बाबा अभय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लंबे समय बाद सोमवार को वह झज्जर में स्पॉट हुए। वो भी अकेले नहीं पत्नी के साथ। उन्होंने खुलासा किया कि दोनों ने 15 फरवरी को शिवरात्रि के मौके पर हिमाचल के अघंजर मंदिर में शादी कर ली। उसके बाद 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज भी की। भगवा कपड़े पहने अभय सिंह एडवोकेट पिता के चैंबर में आए। यहां दैनिक भास्कर एप की टीम से बातचीत में उन्होंने कहा- “हम दोनों अपनी जिंदगी से खुश हैं। फिलहाल सादगी से रह रहे हैं। अध्यात्म की तरफ रुझान होने से पहले कभी मैं भी इस चैंबर में बैठकर पिता की एप्लीकेशन चेक कर लेता था। पत्नी मूलरूप से कर्नाटक की हैं। वह भी इंजीनियर हैं। हम हिमाचल के धर्मशाला में रह रहे हैं।” अभय सिंह मूलरूप से झज्जर के सासरौली गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता कर्ण सिंह वकील हैं और झज्जर बार एसोसिएशन के प्रधान भी रह चुके हैं। बॉम्बे IIT से एयरो स्पेस इंजीनियरिंग करने वाले अभय सिंह प्रयागराज महाकुंभ में संन्यासी वेश में नजर आने के बाद देश-विदेश में चर्चा में आए। जानिए IITian बाबा और उनकी पत्नी ने शादी को लेकर क्या बताया…. चैंबर में केस स्टडी करने आता था अभय सिंह ने कहा- आज पिताजी के चैंबर में आकर अच्छा लगा। मैं पहले भी यहां आकर एप्लीकेशन चेक करता था। मुझे अध्यात्मिकता का सच समझ में आ गया था, लेकिन ये नहीं था कि आगे क्या करना है। जब घर पर अकेला होता था तो सोचता था कि चैंबर में जाकर कुछ कर लेता हूं। यहां आकर मैं स्टडी करता रहता था कि कौन सा केस कैसे लगता है। 15 फरवरी को मंदिर, 19 को कोर्ट मैरिज की शादी को लेकर अभय सिंह ने कहा कि ऐसे छिपाने वाली कोई बात नहीं थी। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर हिमाचल के अघंजर महादेव मंदिर में जाकर शादी की। इसके बाद 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज की। पत्नी ही आज मुझे यहां लेकर आई हैं। बैंक में KYC भी करानी थी। पत्नी बोलीं- सनातन यूनिवर्सिटी बनाएंगे अभय की पत्नी प्रतीका ने कहा- अभय काफी सरल नेचर के हैं। वो बेहद ईमानदार और सच्चे इंसान हैं। मैं कर्नाटक से हूं और इनसे एक साल पहले मिलीं थी। मैंने इंजीनियरिंग कर रखी है। अब हम सनातन को आगे बढ़ाने में काम करेंगे। हम विचार कर रहे हैं कि आगे चलकर सनातन यूनिवर्सिटी बनाए। यहां अध्यात्म से जुड़े गुरु, साधक एक जगह पर यूनाइट करने की कोशिश है। हम झज्जर में सास-ससुर और परिवार वालों से मिलने आए हैं। अब अभय सिंह के इंजीनियर से संन्यासी बनने की कहानी जानिए… कोचिंग के लिए कोटा की जगह दिल्ली गए अभय सिंह का जन्म झज्जर के सासरौली गांव में हुआ। वह ग्रेवाल गोत्र के जाट परिवार में जन्मे। अभय ने शुरुआती पढ़ाई झज्जर जिले से की। पढ़ाई में वह बहुत होनहार थे। इसके बाद परिवार उन्हें IIT की कोचिंग के लिए कोटा भेजना चाहता था। मगर, अभय ने दिल्ली में कोचिंग लेने की बात कही। IIT बॉम्बे में पढ़ाई, कनाडा में काम किया कोचिंग के बाद अभय ने IIT का एग्जाम क्रैक कर लिया। जिसके बाद उन्हें IIT बॉम्बे में एडमिशन मिल गया। अभय ने वहां से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री ली। इसके बाद डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री की। अभय की छोटी बहन कनाडा में रहती है। पढ़ाई पूरी करने के बाद परिवार ने उन्हें अच्छे फ्यूचर के लिए कनाडा भेज दिया। कनाडा में अभय ने कुछ समय एरोप्लेन बनाने वाली कंपनी में काम भी किया। जहां उन्हें 3 लाख सेलरी मिलती थी। लॉकडाउन की वजह से कनाडा में फंसे 2021 में कनाडा में लॉकडाउन लग गया। जिस वजह से अभय भी कनाडा में ही फंस गए। जब लॉकडाउन हटा तो अभय भारत लौट आए। यहां आने के बाद वह अचानक फोटोग्राफी करने लगे। अभय सिंह को घूमने का भी शौक रहा, इसलिए वह केरल गए। उज्जैन कुंभ में भी गए थे। 2024 में अभय सबके संपर्क से बाहर हो गए। परिवार ने बहुत कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई। परिवार का नंबर तक ब्लॉक कर दिया। इसके बाद 2025 में वह महाकुंभ से चर्चा में आए।
छिंदवाड़ा में मर्सी हॉस्पिटल में लगा ताला:मरीज शिफ्ट, सुधार के बाद ही खुलेगा अस्पताल, CMHO ने जारी किया है पत्र

छिंदवाड़ा: शहर में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खजरी रोड स्थित मर्सी हॉस्पिटल (अम्मा अस्पताल) का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। यह सख्त कदम मरीज स्वर्गीय श्रीमती साक्षी शर्मा के उपचार में लापरवाही की शिकायत की विस्तृत जांच के बाद उठाया गया है। आज सोमवार को अस्पताल को पूरी तरह बंद कर दिया गया और वहां भर्ती सभी मरीजों को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया। शिकायत के बाद बनी जांच टीम मामले में विशाल शर्मा द्वारा सीएम हेल्पलाइन पोर्टल और ई-मेल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग ने दो सदस्यीय जांच दल गठित किया। इस दल में जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. धीरज दवंडे और जिला चिकित्सालय की स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता पाठक को शामिल किया गया। जांच में सामने आई गंभीर स्थिति जांच के दौरान सामने आया कि 25 वर्षीय साक्षी शर्मा गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से पीड़ित थीं और 8 दिसंबर 2025 से उनका उपचार चल रहा था। अल्ट्रासाउंड में पॉलीहाइड्रामिनियोस की स्थिति पाई गई थी, जिससे गर्भावस्था पहले से ही हाई रिस्क मानी जा रही थी। 15 दिसंबर को मरीज का ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ गया, भ्रूण की हलचल कम हो गई और लीकिंग की समस्या सामने आई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। इसके बाद 17 दिसंबर की रात को मरीज की हालत बिगड़ने पर इमरजेंसी सीजेरियन ऑपरेशन किया गया, जिसमें बच्चे का जन्म हुआ। ऑपरेशन के बाद मरीज को ब्लड चढ़ाने की सलाह दी गई थी। इलाज में भारी लापरवाही उजागर जांच रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन की कई गंभीर खामियां सामने आईं। सबसे अहम बात यह रही कि अस्पताल में मरीज की निगरानी के लिए कोई भी RMO (रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर) या इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर मौजूद नहीं था। पूरी जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ के भरोसे थी। तड़के करीब 5 बजे जब मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ी, तब एनेस्थीसिया विशेषज्ञ को बुलाया गया और इसके बाद मरीज को हायर सेंटर रेफर किया गया। इसके अलावा अस्पताल में ICU सुविधा का अभाव और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी पाई गई, जिसे गंभीर लापरवाही माना गया। नियमों का उल्लंघन, तत्काल बंद करने के आदेश जांच में पाई गई कमियों को मध्यप्रदेश उपचर्यागृह एवं रुजोपचार संबंधी स्थापना अधिनियम 1973 एवं संशोधित नियम 2021 का उल्लंघन माना गया। इसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी कर दिए। मरीजों को शिफ्ट, नई भर्ती पर रोक विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अस्पताल में नए मरीजों की भर्ती पूरी तरह बंद रहेगी। साथ ही पहले से भर्ती मरीजों को 3 दिनों के भीतर अन्य अस्पतालों या जिला चिकित्सालय में शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए थे। अपडेट के अनुसार, सोमवार को सभी मरीजों को सुरक्षित अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया है। सुधार कार्य में जुटा अस्पताल प्रबंधन सीएमएचओ द्वारा जारी नोटिस में जिन कमियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें दूर करने के लिए अस्पताल प्रबंधन अब सुधार कार्य में जुट गया है। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद ही अस्पताल को दोबारा संचालन की अनुमति दी जाएगी। चेतावनी: नियम तोड़े तो होगी सख्त कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि औचक निरीक्षण के दौरान अस्पताल संचालित पाया गया, तो प्रबंधन के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
तमिल इलेक्शन में नंबर गेम या 69 प्रतिशत नट? किसी दल ने भी क्यों नहीं निकाला ब्राह्मण प्रत्याशी, जानें वजह

तमिल की सूची में इस बार बड़ा उल्टेफेर देखने को मिल रहा है। आगामी चुनाव के मद्देनजर ना सिर्फ डीएमके और कांग्रेस बल्कि एआईएडीएमके और बीजेपी तक ने किसी भी ब्राह्मण को अपना हित नहीं बनाया है। करीब साढ़े तीन दशक में पहली बार ऐसा हुआ जब अन्नाद्रमुक ने किसी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया। द्रविड़ आंदोलन का कितना प्रभावद्रविड़ आंदोलन के दक्षिण के इस राज्य में ब्राह्मण राजनीति ना सिर्फ हाशिए पर चली गई है बल्कि इस बार चुनावों में प्रमुख आश्रमों ने ब्राह्मणों को टिकटें बांटने से भी मना कर दिया है और ब्राह्मणों का समर्थन हासिल करने वाली बीजेपी ने भी पार्टी बना ली है। बीजेपी ने अपने कोटे की 27 विधानसभा सीटों में से किसी भी सीट पर ब्राह्मणों की प्रतिष्ठा घोषित नहीं की है। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि ये सब तमिलनाडु में ये घटिया प्रतिभाएं का नतीजा है या फिर मजबूरी है। बता दें कि तमिल के 234 विधानमंडलों में भारतीय गठबंधन में डीएमके 164 और कांग्रेस 28 के प्राइमरी चुनावों में लड़ाई जारी है, लेकिन दोनों में से किसी ने भी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया। इसके अलावा उनके सहयोगी लेफ्ट, वीसीके और मुस्लिम लीग ने भी किसी ब्राह्मण पर भरोसा नहीं किया। विपक्षी गठबंधन में अन्नाद्रमुक 178 रिपब्लिकन उम्मीदवार 27 और अन्य 18 रिपब्लिकन उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, लेकिन एक भी सीट पर ब्राह्मण उम्मीदवार को नहीं उतारा गया है। बिजनेसमैन की पार्टी ने भी बनाई दूरीदिलचस्प बात यह है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनके निधन के करीब 10 साल बाद भी उनकी पार्टी ने किसी भी ब्राह्मण को मैदान में नहीं उतारा। एआईएडीएमके ने 2021 में ब्राह्मण समाज से आने वाले पूर्व पुलिस गोदाम और नटराज को उम्मीदवार बनाया था, इस बार भी टिकट नहीं दिया गया। ब्राह्मणों ने टिकटें निकालींअभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कजगम (टीवीके) ने 2 ब्राह्मण दावेदारों को मैदान में उतारा। इसके अलावा तमिल राष्ट्रवादी नेता सीमान की पार्टी के नाम तमिलर दास ने 6 ब्राह्मणों के टिकट दिए हैं। इन दोनों ने ही मायलापुर और श्रीरंगम जैसे इलाक़ों को चुना है, जहाँ ब्राह्मण चर्च की संख्या सबसे ज़्यादा है। एनईटीके द्वारा 6 ब्राह्मणों को मैदान में पीछे के सिद्धांतों का कहना है कि सरटेन ने तमिलनाडु में पेरियार-विरोधी रुख अपनाया है। आरएसएस से जुड़े एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि वो द्रविड़ दीवार को गिराने का काम करेंगे। वे अपने राजनीतिक अनुसंधान में भी जाति और पहचान का फ्रैंक का उपयोग करते हैं। क्या कहते हैं राजनीतिक पंडितटाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक अरुण जेटली का कहना है कि अन्नाद्रमुक ने कई दशकों तक ब्राह्मण समाज का समर्थन किया, लेकिन हाल ही में इसमें बदलाव आया है। व्यापारियों के निधन के बाद ब्राह्मण ईसाइयों का गुट भाजपा के पक्ष में हुआ। इसके चलते एआईएडीएमके ने ही ब्राह्मणों से दूरी बना ली है, लेकिन बीजेपी के संयोजक बनने की वजह से लोग जरूर चिंतित हैं। ब्राह्मणों की सूचीतमिल की कुल सूची में ब्राह्मणों की दुकान मात्र 3 प्रतिशत है। वेबसाइटों की संख्या अधिक है। मुथुरैयर, थेवर, वन्नियार और गौंडर। कम संख्या में ब्राह्मणों को वोट बैंक के रूप में देखा नहीं गया। इसके अलावा राज्य में 69 प्रतिशत शून्य लागू है। विचारधारा ने अपनी राजनीति को ओबीसी और विचारधारा के उद्घोषणा के साथ जोड़ा- गिरफ़्तार है। द्रविड़ राजनीति में ब्राह्मणों को आर्य या बाहरी माना जाता है, जबकि गैर-ब्राह्मणों को मूल द्रविड़ माना जाता है। यही कारण है कि किसी भी ब्राह्मण नेता के लिए खुद को तमिल हितों की रक्षा साबित करना आपके लिए एक बड़ी चुनौती है। ये भी पढ़ें पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ‘बंगाल के लोगों को भूख लगती है मोदी सरकार’, केंद्र पर अभिषेक बनर्जी ने कहा- झूठ बोला तो दो मुझे जेल भेज दिया (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)टीएन चुनाव 2026(टी)डीएमके(टी)कांग्रेस(टी)ब्राह्मण उम्मीदवार(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी(टी) डीएमके(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)ब्राह्मण(टी)प्रत्याशी(टी)द्रविड़
किचन में रखी इस दाल में छुपा है हेल्थ सीक्रेट! दिल से पाचन तक करेगी कमाल, ऐसे करें इस्तेमाल

Last Updated:April 06, 2026, 14:02 IST भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली उड़द की दाल सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी है. इसमें मौजूद प्रोटीन, आयरन, फाइबर और कई जरूरी खनिज शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं. यह पाचन सुधारने से लेकर दिल को स्वस्थ रखने और त्वचा-बालों को निखारने तक कई तरह से फायदेमंद मानी जाती है. उड़द की दाल (ब्लैक ग्राम) के पत्ते और दाल दोनों ही स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन और अन्य खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पाचन सुधारने, हड्डियों को मजबूत बनाने, ऊर्जा बढ़ाने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद करते हैं. यह पेट के लिए भी काफी पौष्टिक मानी जाती है. डॉक्टर विनीत शर्मा ने बताया कि उड़द की दाल का सेवन, विशेषकर इसके पत्ते (पौधे का भाग) और दाल, फाइबर और खनिजों से भरपूर होने के कारण पाचन में सुधार, कब्ज से राहत और पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देने में बेहद फायदेमंद है. यह वात दोष को भी कम करती है. हालांकि, पचने में भारी (गुरु) होने के कारण इसे अदरक या लहसुन के साथ पकाना बेहतर माना जाता है. उड़द की दाल में पोटेशियम, मैग्नीशियम और फाइबर की उच्च मात्रा पाई जाती है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करती है. इससे हृदय स्वास्थ्य बेहतर रहता है. यह दाल रक्त परिसंचरण में सुधार करती है और धमनियों में प्लाक जमने से रोककर दिल को मजबूत बनाए रखने में सहायक होती है. Add News18 as Preferred Source on Google उड़द की दाल आयरन, प्रोटीन, मैग्नीशियम और पोटैशियम का बेहतरीन स्रोत है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर एनीमिया की समस्या को कम करने में मदद करती है और ऊर्जा स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ाती है. यह थकान कम करने, मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने और पाचन तंत्र को सुधारने में भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है. उड़द की दाल त्वचा और बालों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है, क्योंकि यह आयरन, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है. यह रूखी त्वचा को नमी प्रदान करती है, मुंहासों को कम करने में मदद करती है और स्कैल्प को पोषण देकर बालों को घना व मजबूत बनाती है, जिससे झड़ने की समस्या भी कम होती है. उड़द की दाल का पेस्ट त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण मुंहासे, दाग-धब्बे और झुर्रियों को कम करने में मदद करते हैं. यह प्राकृतिक रूप से त्वचा को साफ कर डेड स्किन हटाता है, जिससे चेहरा चमकदार और मुलायम बनता है. इसे रातभर भिगोकर पीसकर इस्तेमाल किया जा सकता है. उड़द की दाल और इसके पौधे के विभिन्न हिस्से पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और आंतों की सफाई में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इसमें भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है, जो कब्ज, गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है और मल त्याग को आसान बनाता है. First Published : April 06, 2026, 14:02 IST
हिसार में शादी करने जा रहा फर्जी मेजर अरेस्ट:पुलवामा का रहने वाला, हिंदू बनकर शादी डॉट कॉम पर फंसाया; चंडीगढ़ से खरीदी ड्रेस

हरियाणा के कैथल पुलिस ने शादी के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी आर्मी मेजर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी युवक मुस्लिम है और जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला है। उसके पास से आर्मी की वर्दी भी बरामद हुई है, जो चढ़ीगढ़ से खरीदी थी। वह मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर खुद को आर्मी मेजर बताकर हिंदू युवतियों को फंसाता था। गिरफ्तारी के वक्त वह हिसार की युवती से मिलने जा रहा था, जिससे वह शादी करने वाला था। कैथल पुलिस ने मामला हिसार से जुड़ा होने के कारण उसे वहां की पुलिस के हवाले कर दिया। हिसार पुलिस ने जब उसकी कुंडली खंगाली तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आई। पता चला कि अब तक वह 10 से ज्यादा युवतियों से मेजर बनकर ठगी कर चुका है। हिसार की रहने वाली युवती से 30 हजार रुपए भी ठग चुका था। इस मामले में रिपोर्ट भी दर्ज हुई है। फिलहाल, पुलिस उसे पूछताछ कर रही है। पता किया जा रहा है कि उसके अलावा इस अपराध में कौन-कौन शामिल है। उसका बैकग्राउंड क्या है और उसके परिवार में कौन है। इसके अलावा सबसे खास बात यह है कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि टारगेटेड बेस क्राइम से जुड़ा हो। कौन है फर्जी मेजर और कैसे पकड़ा गया, सिलसिलेवार पढ़ें… नाम मेहराजुद्दीन, पुलवामा का रहने वाला: कैथल पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी की पहचान मेहराजुद्दीन आजम निवासी गांव अवनीपुरा, जिला पुलवामा, जम्मू-कश्मीर के रूप में हुई है। कैथल में तितराम चौक पर पुलिस ने जांच के लिए के लिए एक ओला कैब को रोका। कैब में सवार युवक से पूछताछ की तो उसने अपना नाम निशांत सहारण बताया। आर्मी की वर्दी दिखाई तो पुलिस को शक हुआ: पुलिस के मुताबिक, जब युवक से पूछा गया कि वह क्या करता है तो उसने बैग से सेना की वर्दी दिखाते हुए कहा कि वह आर्मी में मेजर है। उसकी इसी बात पर पुलिसकर्मियों को शक हुआ। क्योंकि उसने बैग खोलकर वर्दी पहले दिखाई, पेशा बाद में बताया। सख्ती से पूछताछ में खुद का नाम आजम बताया : इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसे कैब से बाहर बुलाकर उसकी पोस्टिंग, रेजिमेंट और कागजात आदि के बारे में पूछताछ की तो वह कोई जवाब नहीं दे सका। पेशे से जुड़े कोई कागजात भी नहीं दिखा सका। सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने अपना नाम मेहराजुद्दीन आजम बताया। हिसार में युवती से मिलने की बात की तो खुली पोल : पुलिस ने यहां आने का कारण पूछा तो बताया कि वह हिसार में एक हिंदू लड़की से मिलने जा रहा था। उससे उसकी शादी की बात चल रही थी। युवती के स्वजन अपनी बेटी से युवक से शादी करवाने की तैयारी भी कर रहे थे। पुलिस ने युवती के परिवार से संपर्क किया तो उन्होंने भी निशांत से कॉन्टेक्ट होने की बात बताई, ना कि मेराजुद्दीन से। इसके बाद कैथल पुलिस ने उसे हिसार पुलिस को सौंप दिया। यहां जानिए कैसे करता था मेहराजुद्दीन ठगी…. निशांत सहारण नाम से बनाई फर्जी प्रोफाइल : हिसार पुलिस की पूछताछ में मेहराजुद्दीन ने बताया कि उसने शादी डॉट कॉम पर फर्जी आईडी बना रखी है। इसमें उसने खुद का नाम निशांत सहारण और पेशा आर्मी मेजर बताया हुआ है। वर्दी में कुछ फोटो भी लगा रखे थे। इसी वेबसाइट पर वह हिंदू लड़कियों को फंसाता था। हिसार सहित कई जगह की युवतियों को ठग चुका : पुलिस के मुताबिक, मेहराजुद्दीन ने बताया कि हिसार की युवती को भी उसने शादी डॉट कॉम पर ही कॉन्टेक्ट किया था। खुद को मेजर बताकर उसे विश्वास में लिया और करीब 30 हजार रुपए ठग लिए। इसके अलावा वह करीब दस से ज्यादा युवतियों को भी ऐसे ही ठग चुका है। खरड़ में वेटर, चंडीगढ़ से खरीदी वर्दी : मेहराजुद्दीन ने बताया कि वह 2021 में मोहाली के खरड़ में वेटर का काम करता था। दो साल तक यहां काम करने के बाद वह गांव लौट गया। इसके बाद 2025 में फिर से खरड़ आया। इस बार उसे काम नहीं मिला तो उसने शादी डॉट कॉम पर फर्जी आईडी बनाकर खुद को सेना का अधिकारी बताया। चंडीगढ़ से ही उसने आर्मी की वर्दी भी खरीदी थी। खरड़ से ही वह कैब करके हिसार आ रहा था। युवती के परिवार ने भी दर्ज कराई शिकायत उधर, मामला सामने आने के बाद हिसार की युवती ने भी मेहराजुद्दीन के खिलाफ थाना आजाद नगर में ठगी मामला दर्ज कराया है। इसमें धर्म बदलकर और शादी का झांसा देकर रुपए ठगने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल, हिसार पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। मेहराजुद्दीन से पूछताछ भी की जा रही है। पता किया जा रहा है कि किन लड़कियों से वह ठगी कर चुका है। ठगी से बचने के लिए पुलिस की आमजन से अपील हिसार पुलिस प्रवक्ता दीपक कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए आमजन से अपील की कि ऑनलाइन वैवाहिक साइटों पर मिलने वाले किसी भी व्यक्ति पर बिना पूर्ण सत्यापन के विश्वास न करें। अपनी निजी जानकारी और धनराशि साझा करने से पहले सामने वाले व्यक्ति की पहचान की अच्छी तरह जांच अवश्य करें।
दतिया के पंडोखर धाम में संदिग्ध मौत:परिसर में मिला 33 वर्षीय महिला का शव; 8 महीने से रह रही थी, पुलिस कर रही पूछताछ

दतिया जिले के पंडोखर धाम परिसर में रविवार शाम 33 वर्षीय एक महिला का संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिला है। मृतका की शिनाख्त छतरपुर निवासी जनका अहिरवार के रूप में हुई है, जो पिछले 7-8 महीनों से धाम में रह रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। पंडोखर थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और भांडेर अस्पताल में पोस्टमार्टम कराकर मौत के कारणों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस धाम में रहने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है। देर शाम हुई छतरपुर निवासी के रूप में शिनाख्त शुरुआत में महिला की पहचान नहीं हो सकी थी, लेकिन देर शाम उसकी शिनाख्त जनका (33) पत्नी मनीराम अहिरवार (निवासी छतरपुर) के रूप में हुई। बताया जा रहा है कि महिला पिछले 7-8 महीनों से पंडोखर धाम में रह रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। रविवार शाम को धाम में महिला का शव मिलने से हड़कंप मच गया था। भांडेर अस्पताल में हुआ PM, रिपोर्ट का इंतजार सूचना मिलते ही पंडोखर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भांडेर अस्पताल भेजा, जहां पीएम कराया गया है। फिलहाल महिला की मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो सके हैं और पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। हर एंगल से जांच कर रही पुलिस पंडोखर थाना पुलिस के मुताबिक, मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। धाम परिसर में रहने वाले लोगों और आसपास के व्यक्तियों से पुलिस द्वारा लगातार पूछताछ की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई है।
पुरुषों की ताकत और सेहत के लिए संजीवनी! बस दूध में मिलाकर पी ले ये चीज, तनाव, गठिया और जोड़ों के दर्द का काल

Last Updated:April 06, 2026, 13:41 IST पुरुषों की सेहत और ताकत को बनाए रखने के लिए आयुर्वेद में कई प्रभावी औषधियों का वर्णन मिलता है, जिनमें अश्वगंधा को विशेष स्थान प्राप्त है. प्राचीन समय से ही इसे एक शक्तिवर्धक और शरीर को ऊर्जा देने वाली औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है. यह मानसिक तनाव को कम करने और शरीर को संतुलित रखने में काफी कारगर मानी जाती है. पलामू. आज के भागदौड़ भरे जीवन, तनाव, अनियमित खानपान और बदलती जीवनशैली के कारण कई पुरुष खुद को शारीरिक रूप से कमजोर महसूस करने लगते हैं. ऐसे में अश्वगंधा का नियमित सेवन काफी लाभदायक साबित हो सकता है. आयुर्वेद के जानकर शिव कुमार पांडे ने लोकल 18 को बताया कि अश्वगंधा की प्रकृति गर्म होती है और इसका स्वाद हल्का कड़वा होता है, लेकिन इसके गुण अत्यंत प्रभावशाली होते हैं. यह शरीर की सभी धातुओं को पोषण देने का काम करता है, जिससे ताकत और सहनशक्ति में वृद्धि होती है. यह न केवल पुरुषों की शक्ति को बढ़ाने में सहायक है, बल्कि मानसिक तनाव को कम करने और शरीर को संतुलित रखने में भी मदद करता है. इसके नियमित सेवन से रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे शरीर के अंगों तक पर्याप्त पोषण पहुंचता है. गठिया और जोड़ों के दर्द में कारगरइसके अलावा, अश्वगंधा गठिया और जोड़ों के दर्द में भी राहत देने के लिए जानी जाती है. जिन लोगों को साइटिका या पैरों में दर्द की समस्या रहती है, उनके लिए भी यह औषधि उपयोगी मानी जाती है. इसमें मौजूद तत्व हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं, जिससे उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्याओं से बचाव संभव है. यही कारण है कि इसे प्राचीन समय की अमृत तुल्य औषधि कहा जाता है. अश्वगंधा का सेवन करना भी बेहद आसान है. सबसे पहले इसकी जड़ को साफ करके सुखा लें और फिर उसका बारीक चूर्ण तैयार करें. बाजार में भी इसका पाउडर आसानी से उपलब्ध है. रोजाना रात को सोने से पहले आधा चम्मच अश्वगंधा चूर्ण गुनगुने दूध के साथ लेना लाभकारी माना जाता है. नियमित सेवन से कुछ ही समय में शरीर में सकारात्मक बदलाव महसूस होने लगते हैं. पुरुषों की ताकत में होगा सुधारउन्होंने आगे कहा कि सामान्य तौर पर इसका इस्तेमाल कर सकते है. लेकिन किसी भी औषधि का सेवन शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना उचित रहता है, ताकि शरीर की प्रकृति और आवश्यकता के अनुसार सही मात्रा का निर्धारण किया जा सके. सही तरीके और नियमितता के साथ अश्वगंधा का उपयोग पुरुषों की ताकत में सुधार लाने और जोड़ों की समस्याओं से राहत दिलाने में कारगर सिद्ध हो सकता है. About the Author Mohd Majid with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें Location : Palamu,Jharkhand First Published : April 06, 2026, 13:41 IST
इंडक्शन बनाम इलेक्ट्रिक स्टोव: बिजली बिल की कीमत या कुकिंग की रेटिंग? रसोई गैस संकट में इलेक्ट्रिक चूल्हे के बीच असली ‘पैसा वसूल’ कौन है? जानें अंतर

इंडक्शन बनाम इलेक्ट्रिक स्टोव कौन सा बेहतर है: शामिल एलपीजी इंजील की खबरों के बीच लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है, इलेक्ट्रिक कुकिंग संस्थानों की ओर से। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इलैक्ट्रिक चूल्हा लें या इलेक्ट्रिक चूल्हा? दोनों ही बिजली से चलते हैं, लेकिन काम करने का तरीका, खर्च और खाना पकाने की गति एक-दूसरे से काफी अलग हैं। तो जानें दोनों में से कौन है बेस्ट? टेक्नोलॉजी में क्या है फर्क? विद्युत चूल्हा इलेक्ट्रिक चूल्हे में एक मेटल कॉइल होता है, जो बिजली से खुद गर्म लाल हो जाता है। वही गर्मी से पॉश्चर गर्माहट होती है और खाना पकाता है। इन अज़ाब चूल्हा एक किताब में चुल्हा में थोड़ी उन्नति होती है। कॉइल खुद में गर्माहट नहीं होती, बल्कि चुंबकीय तरंगें यानी मैग्नेटिक तरंगें होती हैं, जो सीधे पॉलीकोइल को गर्म करती हैं। यानी इलेक्ट्रिक चूल्हा पहले खुद को गर्म करता है, जबकि डायरेक्टली स्टोव को गर्म करता है। सबसे सस्ता कौन है? दोनों की कीमत के बारे में बात करें तो इलेक्ट्रिक चूल्हा करीब ₹500-₹1000 तक मिलेगा और इलेक्ट्रिक चूल्हा ₹1500-₹4500 तक का मार्केट में मिलेगा। वहीं इलेक्ट्रिक चूल्हा बेहद सस्ता होता है, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा कीमत मिलती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके लिए पॉटरी भी अलग-अलग इस्तेमाल की जाती है।शुरुआत में इलेक्ट्रिक चूल्हा आपकी जेब पर कम भार की जगह है। बिजली के खाते से सबसे अच्छा कौन है? बिजली के जमा खाते से 30-40% तक बिजली मिलती है, तो इलेक्ट्रिक चूल्हा में बिजली का बड़ा खाता होता है। लंबे समय तक इंकलाब में सबसे ज्यादा मुनाफाखोरी होती रही। कुकिंग स्पीड किसकी बेहतर? इन-इन-कैलोरी चूल्हा तेजी से खाना बनाने वाली संस्थाएं हैं, क्योंकि हीट स्ट्रेट पोर कोलेट करती है। जहां इलेक्ट्रिक चूल्हा पहले खुद गर्म होता है, वहीं फिर पोषाहार को गर्म करता है। इससे समय अधिकतर लगता है। जल्दी खाना बनाना है तो इन जैसा साफा जीतना है। पोचोरों का झंझट इन निवेशकों के लिए खास बातें इन-फ्रेंडली पॉज़िशन जरूरी होती हैं। वहीं इलेक्ट्रिक चूल्हे का भी सामान्य उपयोग किया जा सकता है। अगर कोई नया इलेक्ट्रानिक खरीदार नहीं चाहता है, तो इलेक्ट्रिक चूल्हा आसान विकल्प है। आखिर कौन सा आयोजन? यदि आपका बजट कम है या कभी-कभार ही खाना बनाना है या फिर आप नए प्वॉइंट नहीं खरीदना चाहते हैं तो इलेक्ट्रिक चूल्हा आपके लिए सर्वोत्तम पद पर आसीन हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ रोजाना खाना बनाना है और बिजली बिल बेचना चाहते हैं। इसके अलावा तेज और स्मार्ट खाना बनाना चाहिए? तो इन अलिखित चूल्हा में आपका काफी काम आ सकता है। यदि आप केवल कुछ समय के लिए या कम उपयोग के लिए चूल्हा लेना चाहते हैं, तो इलेक्ट्रिक चूल्हा ठीक है। लेकिन अगर आप एलपीजी का पूरा विकल्प ढूंढ रहे हैं, तो यहां सिलेंडर में जरूरी समझदारी भरा और “पैसा वसूली” विकल्प है। यह अवश्य पढ़ें: खरबूजा ख़रीदने के टिप्स: खरबूजा मीठा है या नहीं? बिना काटे एक मिनट में पता लगाने के लिए काम आएंगे ये आसान टिप्स






