Gut Health news: डेस्क पर खाना, बैठे रहना, ऑफिस हर साल छीन रहा आपकी उम्र में से 11 दिन!

शहरी जीवन की तेज रफ्तार के बीच भारत में खान-पान की आदतों में एक गहरा बदलाव आया है. सुबह का नाश्ता अक्सर मोबाइल स्क्रीन स्क्रॉल करते हुए लोग खाते हैं. दोपहर का खाना ऑफिस की मीटिंग्स के बीच डेस्क पर ही बैठे-बैठे खा लिया जाता है. रात का भोजन देर रात ऐप से मंगाकर जल्दबाजी में निपटा दिया जाता है, और फिर हम अपने काम, दफ्तर, मीटिंग में जुट जाते हैं. यह सब देखने में तो सुविधा जैसा लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यही ऑफिस का रूटीन और आपाधापी का भोजन हमें खा रहा है. लंबे काम के घंटे, व्यस्त दिनचर्या और फूड डिलीवरी ऐप्स की आसान उपलब्धता ने खाने को एक जरूरत से ज्यादा सुलभ और तेज प्रतिक्रिया बना दिया है. अब लोग यह नहीं सोचते कि क्या खा रहे हैं, बल्कि यह सोचते हैं कि कितनी जल्दी खा सकते हैं. हालांकि डॉक्टरों की मानें तो समस्या कभी-कभार के गलत खाने की नहीं, बल्कि रोजमर्रा की इस आदत की है, जो शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है. पैसिफिक वन हेल्थ में प्रिवेंटिव वेलनेस एवं मेटाबॉलिक डिजीज एक्सपर्ट डॉक्टर ऐजाज इल्मी कहते हैं कि अक्सर लोग आंतों की सेहत को केवल पाचन से जोड़ते हैं, जबकि इसका प्रभाव इससे कहीं अधिक व्यापक है. माइक्रोबायोम में असंतुलन इम्यूनिटी, नींद और हृदय स्वास्थ्य तक को प्रभावित कर सकता है. आज जो स्थिति हम देख रहे हैं, वह रोजमर्रा के छोटे-छोटे खान-पान के फैसलों का नतीजा है, जो शरीर की प्राकृतिक जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं.’ आंतों की हेल्थ है बड़ा मुद्दा डॉ. कहते हैं कि मानव शरीर में आंतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. लगभग 70 से 80 प्रतिशत प्रतिरक्षा तंत्र आंतों में मौजूद होता है, जिसे माइक्रोबायोम नामक सूक्ष्मजीवों का जटिल तंत्र संचालित करता है. यह तंत्र न केवल पाचन को प्रभावित करता है, बल्कि इम्यूनिटी, सूजन, हार्मोन संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य तक में भूमिका निभाता है. स्टडी में हुआ खुलासा वर्ष 2025 में शहरी कामकाजी लोगों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 39 प्रतिशत लोग कम फाइबर वाला आहार लेते हैं, 36 प्रतिशत से अधिक लोग अधिक चीनी वाले खान-पान का पालन करते हैं, और 28 प्रतिशत से ज्यादा लोग नियमित रूप से मीठे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं. यह आदतें अब कभी-कभार नहीं, बल्कि रोजमर्रा का हिस्सा बन चुकी हैं. ऐसा आहार आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की विविधता को कम करता है, जिससे शरीर में सूजन बढ़ती है, इम्यून सिस्टम अधिक संवेदनशील हो जाता है और मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है. नए शोधों में यह भी सामने आया है कि खराब आंत स्वास्थ्य धमनियों में प्लाक बनने और वसा के असंतुलित मेटाबॉलिज्म से भी जुड़ा हो सकता है. हर साल छिन रहे आपके 11 दिन इसका असर केवल शरीर तक सीमित नहीं है. आंतें शरीर में सेरोटोनिन के उत्पादन में अहम भूमिका निभाती हैं, जो नींद और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करता है. भारत के वर्कप्लेस वेलबीइंग रिपोर्ट 2025 के अनुसार, खराब नींद के कारण हर कर्मचारी औसतन 11.3 कार्यदिवस प्रति वर्ष खो देता है. ये हैं लक्षण पेट फूलना दोपहर के समय थकान रात में बेचैनी आमतौर पर ये समस्याएं अक्सर सामान्य मान ली जाती हैं, जबकि विशेषज्ञ इन्हें आंतों की खराब होती सेहत के संकेत मानते हैं, जिन्हें तत्काल सुधार की जरूरत होती है. डॉ. एजाज कहते हैं कि आंतों की सेहत को सुधारना मुश्किल नहीं है, बशर्ते कुछ चीजों को कड़ाई से फॉलो किया जाए. क्या करना चाहिए? दिन में कम से कम एक बार बिना किसी स्क्रीन के शांति से भोजन करना आहार में दाल, फल और मेवों जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करना मीठे पेय पदार्थों को कम करना रात के भोजन और सोने के बीच कम से कम दो घंटे का अंतर रखना डॉक्टर कहते हैं कि तेज और सुविधाजनक जीवनशैली के इस दौर में सबसे जरूरी है जागरूकता. शरीर को परफेक्शन नहीं, बल्कि थोड़ी समझ और संतुलन की जरूरत है. रोज के छोटे-छोटे फैसले ही तय करते हैं कि हम स्वस्थ रहेंगे या धीरे-धीरे बीमार पड़ते जाएंगे.
ऊपर से नमक नहीं खाते फिर भी हाई रहता है बीपी? आपके किचन की इन 5 चीजों में छिपा है ‘असली विलेन’, आज ही करें तौबा

Last Updated:April 06, 2026, 13:16 IST Hidden Sodium in Foods: भारत में हर चार में से एक वयस्क को हाई बीपी है. जब भी किसी को हाई ब्लड प्रेशर होता है तो डॉक्टर सलाह देते हैं कि नमक खाना कम कर दीजिए. डॉक्टरों की सलाह पर लोग नमक खाना बहुत कम कर देते हैं. यहां तक कि सब्जी, दाल या उपर से नमक लेना बंद कर देते हैं. इसके बावजूद कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर नहीं घटता है. क्या आप जानते हैं इसका कारण है. दरअसल, इसका कारण है नमक जो आपके भोजन में छिपा होता है.आइए इसके बारे में जानते हैं. किन-किन चीजों में छुपा होता है नमक. Hidden Sodium in Foods: नमक का स्वाद लोगों को ऐसा लगा है कि इसके बिना भोजन बेस्वाद हो जाता है. लेकिन नमक का ज्यादा सेवन ब्लड प्रेशर मरीजों के लिए मीठा जहर है. यही कारण है कि बीपी के मरीजों को डॉक्टर कम से कम नमक खाने की सलाह देते हैं. इसके बाद मरीज नमक बिल्कुल कम कर देते है. लेकिन फिर भी ब्लड प्रेशर कम नहीं होता है. क्या आप जानते हैं कि नमक से दूर रहने के बावजूद आपके शरीर में भारी मात्रा में सोडियम कहां से पहुंच रहा है. यह खतरा वास्तव में आपके भोजन में ही छिपा है. इसके बारे में आपको पता भी नहीं रहता है लेकिन खाने की ये चीजें आपके शरीर में सोडियम भर देता है. यही सोडियम ब्लड प्रेशर को आउट ऑफ कंट्रोल कर देता है. सोडियम से क्यों बढ़ जाता है बीपीपहले यह जानिए कि सोडियम से बीपी क्यों बढ़ जाता है. सोडिएम अत्यंत महत्वपूर्ण माइक्रोन्यूट्रेंट्स हैं. यह इलेक्ट्रोलाइट्स का हिस्सा है जो शरीर में नसों को एक्टिव रखने के लिए जरूरी है. सोडियम, मैग्नीशियम और जिंक मिलकर इलेक्ट्रोलाइट्स बनाता है. इसके अलावा सोडियम शरीर में तरल पदार्थों को बैलेंस रखता है. सोडिएम के कारण शरीर में पानी की संतुलित मात्रा बनी रहती है. अगर सोडियम की मात्रा कम हो जाए शरीर में पानी नहीं रुकेगा जिससे हजारों तरह की गतिविधियां बंद होने लगेगी. इसलिए सोडियम बहुत जरूरी है लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा हो जाए तो शरीर में पानी की मात्रा बढ़ने लगती है. यह पानी पहले खून की नलियों में पहुंचता है जिससे खून का वॉल्यूम बढ़ जाता है. जब खून की मात्रा नलियों में बढ़ जाएगी तो इसका प्रेशर भी ज्यादा होगा. यह अतिरिक्त प्रेशर खून की नलियों की दीवाल को नुकसान पहुंचाने लगता है. इस तरह यह ब्लड प्रेशर तो बढ़ाता ही है साथ नसों के फटने यानी हेमरेज की आशंका को भी बढ़ा देता है. किन-किन चीजों में छुपा होता सोडियमदरअसल, आप सब्जी या दाल में नमक तो कम देते हैं लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में आप कई ऐसी चीजें खाते हैं जिनमें आपको लगता है कि इनमें नमक नहीं है या बहुत कम है लेकिन उसमें बहुत ज्यादा सोडियम मिलाया जाता है. आमतौर पर ये पैकेटबंद चीजों में होता है. मसलन आप पॉपकॉर्न खाते हैं और आपको लगता है कि इसमें तो बिल्कुल नमक नहीं होगा लेकिन आप गलत हैं क्योंकि पॉपकॉर्न में कंपनियां सोडियम मिलाती है. इतना ही नहीं कुछ मीठे बिल्किट में भी सोडियम की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. अगर आप बाजार से मटर जैसी फ्रोजन सब्जियां खरीदते हैं और आपको लगेगा इसमें थोड़ा भी नमक नहीं है लेकिन इसमें बहुत अधिक नमक होता है क्योंकि किसी भी चीज को प्रिजर्व करने के लिए सोडियम मिलाया जाता है. पैकेटबंद चिप्स, कुरकुरे, बिस्किट, चॉकलेट, केक, पिज्जा, बर्गर, सॉस, नूडल्स, बेकरी आयटम, सूप, प्रोसेस्ड फूड,ब्रेड, कुकीज, फास्ट फूड आदि में बहुत अधिक सोडियम मिला रहता है. फिर बीपी कंट्रोल कैसे करेंनमक कम करना बीपी कंट्रोल करने का सबसे बेहतर तरीका होता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी डब्ल्यूएचओ के मुताबिक एक दिन में 5 ग्राम से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए. यह 5 ग्राम आप पूरे दिन में जितनी चीजें खाते हैं सबको मिलाकर होना चाहिए. यानी आपके फूड में जितना नमक होता है सिर्फ वही नहीं बल्कि अन्य चीजें जैसे बाहर के पैकेटबंद चीजें बिस्किट, केक आदि से जो नमक आता है, उन सबको जोड़कर 5 ग्राम से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए. 5 ग्राम का मतलब एक चम्मच नमक. हालांकि भारत में करीब-करीब लोग 7 से 9 ग्राम तक नमक रोज खाते हैं. यही कारण है कि भारत में बीपी के मरीज बढ़ रहे हैं. ऐसे में नमक कम करना ही एक मात्र विकल्प है. इसके लिए थोड़ा-थोड़ा कर नमक को कम करें. शुरुआत में एक-दो सप्ताह मामूली मात्रा में नमक को घटाए और इसे धीरे-धीरे और कम करें. इसके साथ ही बाहर की चीजें जिनमें नमक की मात्रा ज्यादा रहती है, उनके बदले साबुत अनाज, फल, ड्राई फ्रूट्स, सीड्स आदि का सेवन करें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp,आपके सवालों का हम देंगे जवाब. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 13:16 IST
बास्केटबॉल चैम्पियन का ‘कैंडी’ सीक्रेट:मिलन शॉट से पहले दिमाग में दोहराते हैं ‘जेलीबीन’, ओवरथिंकिंग दूर करने का मिला अचूक फॉर्मूला

बड़े मैचों के दबाव में अक्सर दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों का दिमाग भी सुन्न पड़ जाता है। ऐसे में वे अपने ही खेल पर शक करने लगते हैं। अमेरिका के कॉलेज बास्केटबॉल टूर्नामेंट में इस साल के सर्वश्रेष्ठ 3-पॉइंट शूटर मिलन मोमसिलोविक भी इसी ओवरथिंकिंग का शिकार हो रहे थे। लेकिन इस 6 फीट 8 इंच लंबे स्नाइपर ने अपने दिमाग को शांत करने का एक बेहद अजीब, लेकिन 100% अचूक तरीका खोज निकाला है। यह तरीका है एक शब्द ‘जेलीबीन’। आयोवा स्टेट के मिलन इस वक्त डिवीजन-1 कॉलेज बास्केटबॉल के सबसे सटीक शूटर हैं। लेकिन एक वक्त था जब हर शॉट से पहले उनका आत्मविश्वास डगमगा जाता था। मिलन बताते हैं, ‘मुझे हमेशा लगता था कि मेरे शॉट में कुछ कमी है। शायद गेंद का आर्क सही नहीं है या मैं सही तरीके से थ्रो नहीं कर रहा हूं।’ लगातार गिरते कॉन्फिडेंस को बचाने के लिए उन्होंने एक मशहूर स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट डॉ. मैथ्यू मायरविक से संपर्क किया। डॉ. मैथ्यू ने उन्हें एक बेहद आसान मनोवैज्ञानिक तरकीब बताई- ‘थ्रो करने से ठीक पहले दिमाग में किसी एक चीज, खासकर किसी खाने की चीज का नाम सोचो।’ मिलन ने इसके लिए ‘जेलीबीन’ शब्द चुना। वे कहते हैं, ‘शायद यह शब्द बोलने में थोड़ा लंबा है, इसलिए मैंने इसे चुना। मजेदार बात यह है कि जेलीबीन मेरी फेवरेट कैंडी भी नहीं है।’ मिलन यह शब्द जोर से नहीं बोलते, शॉट लेने से ठीक पहले वे इसे बस अपने दिमाग में दोहराते हैं। यह टेक्निक उनके दिमाग में आने वाले नकारात्मक ख्यालों को ब्लॉक कर देती है, जिससे उनका फोकस सिर्फ थ्रो पर रहता है। जैसे ही दिमाग ओवरथिंकिंग करना बंद करता है, शरीर की ‘मसल मेमोरी’ अपना काम बिल्कुल सटीक तरीके से करने लगती है। यह तकनीक खिलाड़ी का ध्यान नतीजे से हटाकर प्रोसेस पर ले आती है। आयोवा स्टेट के हेड कोच टीजे ओत्जेल्बर्गर इस बदलाव से बेहद खुश हैं। उनका कहना है, ‘पहले अगर वह एक-दो शॉट मिस करता था, तो अगला शॉट लेने से डरने लगता था। लेकिन अब उसका माइंडसेट बदल गया है। अब वह सिर्फ अपनी कोशिशों पर फोकस करता है, नतीजों पर नहीं।’ इस एक शब्द ने मिलन के खेल को पूरी तरह बदल दिया है। वे इस सीजन में 49.3% की सटीकता से 3-पॉइंट्स स्कोर कर रहे हैं, जो पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा है। उन्होंने अब तक 134 थ्री-पॉइंटर्स दागे हैं, जो किसी भी अन्य खिलाड़ी से अधिक है। वे 17.2 पॉइंट्स प्रति मैच के औसत के साथ अपनी टीम के टॉप स्कोरर बन गए हैं।
अस्पताल में पहुंचकर मरीजों से मिलीं विधायक:बुरहानपुर में सुविधाओं के बारे में पूछा, बोलीं- व्यवस्थाएं बेहतर करने कलेक्टर से चर्चा करूंगी

बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस ने सोमवार सुबह 11 बजे जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मरीजों से भी बातचीत की। निरीक्षण के दौरान विधायक ने जिला अस्पताल के नोडल अधिकारी व डिप्टी कलेक्टर राजेश पाटीदार और सिविल सर्जन डॉ. दर्पण टोके से अस्पताल की व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न वार्डों में जाकर मरीजों से उनके स्वास्थ्य और मिल रहे उपचार के बारे में पूछा। मरीजों ने दी जा रही सुविधाओं पर संतुष्टि व्यक्त की। विधायक अर्चना चिटनिस ने बताया कि जिला अस्पताल में सुविधाएं और संसाधन जुटाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर से चर्चा की जाएगी। आज शाम ही जिला अस्पताल के अधिकारियों, डॉक्टरों और अन्य टीम के साथ एक बैठक आयोजित की जाएगी। इस अवसर पर विधायक ने एसएनसीयू कक्ष, प्रसव कक्ष और जनरल वार्ड का दौरा किया। इस दौरान जिला अस्पताल के आरएमओ भूपेंद्र गौर, प्रबंधन धीरज चौहान, डॉ. गौरव धावानी सहित अन्य डॉक्टर और स्टाफ सदस्य उपस्थित थे।
पन्ना- पालधरा गांव में 9वीं के छात्र की संदिग्ध मौत:माता-पिता के साथ महुआ बीनने गया था, उसी पेड़ पर लटकी मिली लाश

पन्ना जिले के पालधरा गांव में एक 15 वर्षीय छात्र का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पेड़ से लटका मिला। मृतक की पहचान दीपेश आदिवासी (पिता किशोर सिंह) के रूप में हुई है, जो पन्ना के सर्वोदय विद्यालय में कक्षा 9वीं का छात्र था। जानकारी के अनुसार, 5 अप्रैल को सुबह दीपेश अपने माता-पिता के साथ महुआ बीनने गया था। वहां से लौटने के बाद वह बकरियां चराने निकल गया। परिजनों ने बताया कि दोपहर में उन्होंने दीपेश को खाना खाने के लिए कहा था, लेकिन उसने मना कर दिया। इसके बाद करीब 1 बजे वह दोबारा खेत की ओर चला गया। जब शाम तक दीपेश घर नहीं लौटा, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। तलाश के दौरान, मृतक के चाचा लील सिंह खेत की तरफ लकड़ी लेने पहुंचे। उन्होंने देखा कि दीपेश का शव महुआ के ही एक पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका हुआ था। ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे और तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही बृजपुर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को फंदे से नीचे उतारा। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयानों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
World Health Day 2026: साल में एक बार जरूर कराएं ये 10 टेस्ट, वक्त रहते कई बीमारियों का लगेगा पता

World Health Day 2026: आजकल लोगों की लाइफस्टाइल और खान-पान बिगड़ गया है. इसकी वजह से बीमारियों का कहर बढ़ गया है. कम उम्र में ही लोग मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज जैसी तमाम गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. बीमारियों से बचने के लिए लाइफस्टाइल और खान-पान सुधारना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही समय-समय पर अपनी सेहत की जांच भी करवानी चाहिए. हेल्थ चेकअप से पता चलता है कि आपका शरीर कितना स्वस्थ है और किन बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं. वक्त रहते किसी बीमारी का पता लग जाए, तो उसे आसानी से ट्रीट किया जा सकता है. हर साल 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है, ताकि लोगों को सेहत के प्रति जागरूक किया जा सके. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया कि आजकल बीमारियां शरीर में पनपती रहती हैं और लोगों को इसका पता ही नहीं चलता है. भारत में करीब 20 फीसदी वयस्क हाई बीपी का शिकार हो चुके हैं और उन्हें इसका पता ही नहीं है. बड़ी संख्या में लोग प्रीडायबिटीज की चपेट में आ जाते हैं और चेकअप न कराने की वजह से कुछ सालों में डायबिटीज के मरीज बन जाते हैं. इसी तरह हार्ट डिजीज, किडनी डिजीज और कैंसर जैसी कई जानलेवा बीमारियां बिना लक्षणों के पनपती रहती हैं. ऐसे में सभी वयस्कों को साल में एक बार अपना फुल बॉडी चेकअप जरूर करवाना चाहिए, ताकि बीमारियों को वक्त रहते रोका जा सके. हर साल जरूर कराएं ये 10 हेल्थ टेस्ट ब्लड प्रेशर की जांच : हाई ब्लड प्रेशर की समस्या दुनिया भर में महामारी की तरह फैल रही है. हाई बीपी को साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण नजर नहीं आते हैं. हाई बीपी हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी डिजीज की बन सकता है. ऐसे में साल में कम से कम एक बार बीपी जरूर चेक कराएं. इससे आपको कई गंभीर समस्याओं से बचने में मदद मिलती है. ब्लड शुगर टेस्ट : डायबिटीज के मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है और भारत में यह आंकड़ा 10 करोड़ के पार हो गया है. कई लोगों को डायबिटीज का शुरुआत में पता नहीं चलता है, जिससे शुगर लेवल अनकंट्रोल हो जाता है. ऐसे में लोगों को साल में एक बार फास्टिंग और पोस्ट-लंच ब्लड शुगर टेस्ट जरूर करवाना चाहिए. इससे डायबिटीज का पता लग सकता है. कोलेस्ट्रॉल टेस्ट : अगर कोलेस्ट्रॉल का लेवल सामान्य से ज्यादा हो जाए, तो यह हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का कारण बन सकता है. गलत खान-पान के कारण यह समस्या युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है. इससे बचने के लिए साल में एक बार सभी वयस्कों को अपना लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवाकर HDL, LDL और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर जान लेना चाहिए. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. किडनी फंक्शन टेस्ट : कई बार लोगों की किडनी में परेशानी होने लगती है, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा ही नहीं होता है. ऐसे में किडनी का कामकाज ठीक चल रहा है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए हर साल किडनी फंक्शन टेस्ट कराना चाहिए. इससे किडनी की बीमारी का शुरुआती स्टेज में पता लगाया जा सकता है. लिवर फंक्शन टेस्ट : लिवर हमारे शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन ऑर्गन है. यह शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है. हालांकि गलत खानपान से लिवर की समस्याएं बढ़ रही हैं. कई बार लिवर वायरल इंफेक्शन की चपेट में भी आ जाता है. ऐसे में हर साल लिवर फंक्शन टेस्ट भी कराना चाहिए. थायराइड प्रोफाइल टेस्ट : आजकल थायराइड से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं. खासतौर से महिलाएं इसका ज्यादा शिकार होती हैं. थायराइड हार्मोन का असंतुलन वजन बढ़ने, वजन कम होने, थकान और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है. TSH, T3 और T4 टेस्ट से इसे समय पर पहचाना जा सकता है. यह टेस्ट भविष्य में होने वाली कई समस्याओं से बचा सकता है. विटामिन और मिनरल्स टेस्ट : शरीर सिर्फ बीमारियों की वजह से कमजोर नहीं होता है, बल्कि यह पर्याप्त मात्रा में विटामिन और मिनरल्स न मिलने की वजह से भी वीक हो जाता है. विटामिन D, B12 और आयरन की कमी से थकान, हड्डियों की कमजोरी और एनिमिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए साल में एक बार इन्हें जांचना जरूरी है. दांत और आंखों की जांच : हमारे दांत और आंखों का समय-समय पर चेकअप कराना जरूरी होता है. दांतों की सेहत पूरे शरीर से गहराई से जुड़ी होती है. ऐसे में इन ऑर्गन्स की सेहत को नजरअंदाज करना बड़ी गलती है. डेंटल और आई चेकअप से कैविटी, जड़ की समस्या और विजन संबंधी रोग समय पर पहचाने जा सकते हैं. पाचन तंत्र की जांच : अगर पेट में बार-बार गैस, एसिडिटी या अपच जैसी समस्याएं हों, तो GI ट्रैक्ट की जांच करवानी चाहिए. साल में एक बार अल्ट्रासाउंड या कॉलोनोस्कोपी करवाना फायदेमंद हो सकता है. इससे आपके पेट में पल रही कई बीमारियों का वक्त रहते पता लगाया जा सकता है. कई बार पेट की समस्याएं अन्य अंगों को भी बुरी तरह प्रभावित करती हैं. वजन और बॉडी मास इंडेक्स : स्वस्थ रहने के लिए शरीर का वजन न ज्यादा होना चाहिए और न कम. ओवरवेट या अंडरवेट होने से कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. सालाना BMI और बॉडी फैट प्रतिशत चेक करवाना स्वास्थ्य को नियंत्रित रखने में मदद करता है. इन दोनों की जांच आप वेट मशीन और कैलकुलेटर से खुद ही कर सकते हैं.
हिमाचल में प्रवासी बच्ची पीटने वाले फौजी ने मांगी माफी:बोला-आइंदा ऐसी गलती नहीं होगी, दिमाग ने काम नहीं किया, CWC और पुलिस करेगी पूछताछ

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला के बहडाला में 6 साल की प्रवासी बच्ची को बांधकर पीटने देने के मामले में आरोपी पूर्व सैनिक विजय कुमार ने माफी मांगी है। आरोपी मान रहा है कि उसने बच्ची को बांधा था और आइंदा ऐसी गलती नहीं होगी। वह कहता है कि घटना के वक्त दिमाग ने काम नहीं किया, लेट काम किया। वहीं ऊना पुलिस आरोपी विजय कुमार से पूछताछ कर रही है। बीती कल भी आरोपी को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की गई। आज फिर से थाने बुलाया है। कुछ देर में आरोपी को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के समक्ष भी पेश होना है। CWC भी आरोपी से पूछताछ करेगी, क्योंकि बच्ची नाबालिग है। घर की रैलिंग में बांधकर की थी पिटाई बता दें कि पूर्व सैनिक ने अमरूद चुराने के आरोपों के बाद बच्ची को घर की रैलिंग में बांधकर पीटा था। इससे जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई और आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। कैप्टन को देखकर बोली बच्ची – ‘अंकल बचा लो’ वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बच्ची चीखती-चिल्लाती रही, लेकिन आरोपी ने उसे नहीं छोड़ा। इस बीच मर्चेंट नेवी के कैप्टन रोहित जसवाल को बच्ची के चिल्लाने की आवाज आई, तो वह मौके पर पहुंचे और उन्होंने बच्ची को छुड़वाया। कैप्टन को देख बच्ची कहती है, ‘अंकल बचा लो, अंकल बचा लो’। यह घटना 5 अप्रैल की है। बच्ची पर आरोप है कि उसने रिटायर्ड फौजी के घर के बाहर अमरूद तोड़ा। बच्ची को अमरूद तोड़ते हुए फौजी ने देख लिया। इसके बाद उसने बच्ची के हाथ-पांव सीढ़ियों की रेलिंग से बांध दिए। वहीं एसपी ऊना सचिन हिरेमठ ने बताया कि पुलिस कानून के मुताबिक कार्रवाई कर रही है। आरोपी के खिलाफ BNS और JJ एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। बच्ची का ऊना के अस्पताल में मेडिकल करवा दिया गया है।
‘मातृभाषा का अपमान’ बनाम ‘तुष्टिकरण की साजिश’, बंगाल में पीएम मोदी का टीएमसी के पलटवार पर बयान, ‘इश्तेहार’ पर सुझाव

पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाषा, पहचान और इतिहास को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार में दिए गए बयान के बाद टीएमसी ने तीखा पलटवार किया है। खोज है-‘इश्तेहार’, लेकिन इसके साथ ही अब बंगाल की अस्मिता पर गहरी राजनीतिक लड़ाई खत्म हो गई है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार भूखा विकास या रोजगार नहीं, बल्कि एक शब्द बन गया है- ‘इश्तेहार’। यह शब्द अब सिर्फ घोषणापत्र का पर्याय नहीं है, बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया है। बीजेपी ने सीधे तौर पर 1905 के बंगाल के इतिहास से लेकर अब तक के कलाकारों में से किसी को भी शामिल करना शुरू कर दिया है. “पीएम मातृभाषा का सम्मान नहीं पता” – कुणाल घोष का हमलाबेलेघाटा सीट से टीएमसी उम्मीदवार उम्मीदवार घोष ने प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मातृभाषा में भाषण नहीं देते हैं। अगर वे हिंदी में भाषण नहीं देते हैं, तो उनकी बात का कोई महत्व नहीं है। वह बंगाल का अपमान कर रहे हैं। वह पूरी तरह से बांग्ला भाषा का अपमान कर रहे हैं। यह सही नहीं है। वह पार कर रहे हैं।” पीएम मोदी का आरोप- ”बंगाल की पहचान के लिए तुष्टीकरण के खेल”बिहार की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीएमसी के घोषणापत्र पर सवाल उठाते हुए बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने कहा- “इस खेल में बंगाल की महान पहचान बनाई जा रही है। आपने देखा होगा कि टीएमसी ने अभी अपना घोषणापत्र जारी किया है, लेकिन उसे बंगाली भाषा का नाम नहीं दिया गया, बल्कि ‘इश्तेहार’ कहा जा रहा है। जरा सोचिए, कैसे बंगाल की पहचान बदल रही है।” प्रधानमंत्री ने ‘इश्तेहार’ शब्द को इतिहास से खारिज कर दिया और भी गंभीर आरोप लगाया- “1905 में बंगाल में धार्मिक सेनाओं ने ‘रेड इश्तेहार’ जारी किया था, जिसके बाद आदिवासियों का नरसंहार हुआ। टीएमसी हमें वही याद दिलाना चाहती है… ऐसा घिनौना तुष्टिकरण का खेल, बंगाल के सम्मान और संस्कृति को परंपरा की साजिश है।” उन्होंने जनता से अपील की कि अब ”बहुत कुछ चुकाया” जाएगा और बंगाल को अपनी पहचान दिलाने के लिए फैसला लिया जाएगा। ‘इश्तेहार’ पर एंटोनियो-विपक्ष का पलटवारप्रधानमंत्री के इस कथन के बाद नामांकन ने इसे “भ्रामक और गैर-जरूरी” बताया। टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा- “यह पीएम मोदी का पूरी तरह से बेतुका बयान है। ‘इश्तेहार’ सिर्फ ‘मेनिफेस्टो’ का नाम है। एक सामान्य शब्द जो कई समुद्रों में इस्तेमाल होता है। यह राजनीति नहीं है – यह असंतुलन और अज्ञानता का प्रदर्शन है। यह मूर्खतापूर्ण, खतरनाक और अनोखा करने वाला है।” वहीं, कीर्ति आज़ाद ने भी इसी मुद्दे पर घेरा डाला और कहा- “मैं आपको ‘सपना सपना’ पेश करता हूं। पीएम मोदी का एक अशिक्षित और बेतुका बयान है। यह राजनीति नहीं है। यह बेवकूफी और अज्ञानता का प्रदर्शन है। यह मूर्खतापूर्ण, खतरनाक और भ्रामक करने वाला है।” बीजेपी का वार- “शब्द नहीं, संकेत है”बीजेपी नेता सुधाशंशु ने इस अंक में कहा कि ‘इश्तेहार’ का इस्तेमाल अभी तक नहीं किया गया है. उनका कहना है यह शब्द इतिहास की एक भावनात्मक घटना की याद दिलाता है। उन्होंने सवाल किया, “टीएमसी को साफ करना चाहिए कि उसने अपने घोषित पत्र के लिए ‘इश्तेहार’ शब्द क्यों चुना? यह डॉकलेट का मूल शब्द क्या है? यह तो फ़्रज़ी से आया हुआ शब्द है, जिसका इस्तेमाल सबसे ज़्यादा उर्दू में होता है।” बीजेपी ने दावा किया कि 1905 में ढाका के नवाब के दौर में इसी शब्द का इस्तेमाल ऐसे पर्चों के लिए किया गया था, कि अलग मकसद समाज को बाँटना और एक समुदाय के खिलाफ़ तानाशाही बनाना था. 1905 का प्रसंग—इतिहास से वर्तमान तकअगर इतिहास पर नजर डाली जाए तो 1905 से 1907 के बीच का बंगाल का दौरा बेहद उकेरा-सा था। लॉर्ड कर्ज़ेन के बंगाल डिवीजन के बाद ‘स्वदेशी आंदोलन’ और ‘वंदे मातरम’ की लहर तेज़ हो गई थी। इसी समय ‘लाल इश्तेहार’ नाम की एक किताब सामने आई, जिसे इब्राहिम खान ने लिखा था। यह दस्तावेज़ ढाके के नवाब के प्रभाव वाले महासागर में मनाया गया था। इतिहासकारों का कहना है, इस मत का मकसद मुस्लिम समाज को स्वदेशी आंदोलन और विचारधारा के खिलाफ लामबंद करना था। भाजपा अब इसी ऐतिहासिक संदर्भ को आज की राजनीति से जोड़ रही है। भाषा बनाम राजनीति, चुनाव से पहले बढ़िया गर्मीबंगाल विधानसभा चुनाव से पहले यह विवादित शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया। ‘इश्तेहार’ को लेकर घटिया बहस अब भाषा, इतिहास और पहचान की राजनीति बदल गई है। एक तरफ बीजेपी इसे “बंगाली अस्मिता और भाषा के सम्मान” से बढ़ावा दे रही है, तो दूसरी तरफ टीएमसी इसे “बांग्ला अस्मिता और भाषा के सम्मान” से बढ़ावा दे रही है।
रविवार को लंबे जाम के बाद सोमवार को फिर चुनौती:बीहर नदी के पुल में दरार, 30 अप्रैल तक भारी वाहनों की एंट्री बैन

रीवा शहर के बायपास स्थित बीहर नदी के पुराने पुल के गर्डर में गंभीर दरारें आने और पियर कैप क्षतिग्रस्त होने के बाद सुरक्षा के मद्देनजर 30 अप्रैल तक भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। रविवार को पुलिस की लापरवाही के चलते बायपास पर करीब 3 घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही, जिसमें सैकड़ों वाहन फंसे रहे। सोमवार को एसडीएम हुजूर डॉ. अनुराग तिवारी ने पुलिस अधिकारियों के साथ पुल का निरीक्षण कर तकनीकी जांच के बाद भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट करने के निर्देश दिए हैं। तकनीकी जांच में संरचना कमजोर, SDM ने किया निरीक्षण पुल की तकनीकी जांच में इसकी संरचना कमजोर पाई गई है, जिसके चलते भारी वाहनों को प्रतिबंधित करने का फैसला लिया गया है। एसडीएम हुजूर डॉ. अनुराग तिवारी ने पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर पुल के गर्डर में आई दरार और क्षतिग्रस्त पियर कैप का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वैकल्पिक मार्गों पर भी व्यवस्था बेहतर रखी जाए, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था या दुर्घटना की स्थिति न बने। रविवार को 3 घंटे फंसा रहा ट्रैफिक, पुलिस रही नदारद रविवार को प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था की पोल खुल गई थी, जब पुलिस और प्रशासनिक लापरवाही के कारण करीब तीन घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही। कई किलोमीटर लंबे एरिया में सैकड़ों वाहन फंसे रहे और व्यवस्था बनाने की जगह मौके से पुलिस के जवान नदारद दिखाई दिए। रविवार रात शहर के भीतर भी हालात बिगड़े रहे, जहां सैकड़ों वाहन जाम में फंसे नजर आए। अब सोमवार को एक बार फिर प्रशासन के सामने यातायात व्यवस्था संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। प्रशासन की अपील- वैकल्पिक मार्गों का करें उपयोग एसडीएम ने कहा कि आमजन की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए यातायात व्यवस्था को सुचारू और सुरक्षित बनाए रखने के लिए भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया जाएगा। इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और यातायात नियमों का पालन करें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
बैतूल में आदि रंग महोत्सव, मंत्री-विधायक थिरके:सतपुड़ा ग्राउंड में दिखी जनजातीय संस्कृति की झलक; देखिए तस्वीरें…

बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी विकासखंड स्थित सतपुड़ा ग्राउंड में मध्यप्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय “आदि रंग महोत्सव” का आयोजन किया गया। इस महोत्सव में जनजातीय संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उईके, जनजातीय कार्य विभाग मंत्री कुंवर विजय शाह और घोड़ाडोंगरी विधायक गंगा सज्जन सिंह उईके मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान विभिन्न जनजातीय कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं और अतिथियों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। कलाकारों ने प्रस्तुत किए गेड़ी, डंडार और भडनोई नृत्य महोत्सव में विभिन्न जनजातीय कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। छिंदवाड़ा के अम्मीलाल बोसम और उनके साथियों ने सतम सुसुन तथा बेड़ें ढोल सुसुन की प्रस्तुति दी। वहीं, जय भवानी आदिवासी युवा मंडल (छिंदवाड़ा) ने गेड़ी नृत्य का प्रदर्शन किया। इसके अलावा अर्जुन बागमारे ने गोंडी डंडार नृत्य और सुखनंदन व उनके साथियों ने भडनोई नृत्य प्रस्तुत किया। भैंसदेही की श्रुति सबनम और उनके साथियों ने पुरिया नृत्य से दर्शकों का मन मोहा, जबकि ममता उईके ने गोंडी गीत की मधुर प्रस्तुति दी। मंत्री शाह बोले- जनजातीय संस्कृति हमारी पहचान और गौरव इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि, “जनजातीय संस्कृति हमारी पहचान और गौरव है, जिसे सहेजना हम सभी की जिम्मेदारी है।” उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार जनजातीय समाज के विकास और उनकी परंपराओं के संरक्षण के लिए लगातार प्रयासरत है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं। वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उईके ने अपने संबोधन में कहा कि, “”आदि रंग महोत्सव” जैसे आयोजन जनजातीय कला और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे मंच मिलने से कलाकारों का आत्मविश्वास बढ़ता है। विधायक उईके बोले- घोड़ाडोंगरी की परंपराएं बेहद विशिष्ट घोड़ाडोंगरी विधायक गंगा सज्जन सिंह उईके ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि घोड़ाडोंगरी क्षेत्र सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है और यहां की परंपराएं बेहद विशिष्ट हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महोत्सव के माध्यम से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। देखिए कार्यक्रम की बाकी तस्वीरें…







